फैशन और ब्यूटी

Easy Hacks for Better Hair

हेयर केयर में बड़ा बदलाव: 6 आसान हेयर हैक्स जो बदल देंगे आपकी हेयर रूटीन

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Easy hair care hacks to improve shine, volume and manageability for healthy looking hair
Simple Hair Care Hacks Routine

बालों की सही देखभाल केवल महंगे प्रोडक्ट्स से नहीं, बल्कि सही तकनीक और छोटे-छोटे स्मार्ट हैक्स से भी संभव है। हेयर एक्सपर्ट्स द्वारा सुझाए गए ये 6 आसान और असरदार हैक्स न सिर्फ आपके बालों की चमक और टेक्सचर सुधारते हैं, बल्कि उन्हें हेल्दी और मैनेजेबल भी बनाते हैं।

1. सेकंड-डे हेयर को करें रिवाइव

अगर अगले दिन बाल बेजान और फ्लैट लगते हैं, तो leave-in conditioner और पानी का मिक्स बनाकर स्प्रे करें और हल्के हाथ से scrunch करें। इससे बालों में फिर से वेव्स और वॉल्यूम आ जाता है।

2. ड्राई शैम्पू का सही इस्तेमाल

ड्राई शैम्पू को पूरे बालों में लगाने के बजाय सिर्फ oily हिस्सों (जैसे hairline, parting) पर लगाएं। इससे बाल हल्के, फ्रेश और नैचुरल मूवमेंट वाले बने रहते हैं।

3. Leave-in conditioner ऐसे लगाएं जैसे हैंड क्रीम

Leave-in या हेयर ऑयल को सीधे बालों पर लगाने के बजाय पहले हाथों पर फैलाएं, फिर उंगलियों से बालों में लगाएं। इससे प्रोडक्ट बराबर फैलेगा और बाल greasy नहीं होंगे।

4. बालों का रंग ऐसे रखें सुरक्षित

हार्ड वॉटर और क्लोरीन बालों के रंग को खराब कर सकते हैं। इसके लिए:

  • शावर में फिल्टर का इस्तेमाल करें
  • स्विमिंग से पहले बालों में ऑयल लगाएं
    इससे बालों का रंग लंबे समय तक चमकदार बना रहता है।

5. ज्यादा शैम्पू नहीं, ज्यादा पानी

बाल धोते समय ज्यादा शैम्पू की जगह ज्यादा पानी का इस्तेमाल करें। खासकर sulfate-free shampoo के साथ, इससे बेहतर झाग बनेगा और बालों की नैचुरल नमी भी बरकरार रहेगी।

6. फ्लायअवे बालों को करें सेट

छोटे-छोटे उड़ते बालों (flyaways) को सेट करने के लिए clear brow gel का इस्तेमाल करें। यह एक क्विक और प्रोफेशनल फिनिश देने वाला आसान ट्रिक है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

फैशन और ब्यूटी

View more
Genelia Deshmukh in cobalt blue Ilkal saree showcasing Karnataka GI tag handloom with traditional styling
GI टैग वाली पारंपरिक साड़ी में छाईं Genelia Deshmukh, कर्नाटक की इलक्ल बुनाई को दिया नया अंदाज़

फिल्म प्रमोशन के दौरान एक बार फिर पारंपरिक भारतीय हस्तकरघा ने सुर्खियां बटोरीं, जब अभिनेत्री Genelia Deshmukh ने कोबाल्ट ब्लू रंग की इलक्ल साड़ी पहनकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। यह साड़ी न केवल अपने रंग और शिल्प के कारण खास है, बल्कि इसे कर्नाटक की प्रसिद्ध GI-टैग्ड बुनाई तकनीक से तैयार किया गया है। यह खास साड़ी कर्नाटक के बागलकोट जिले में तैयार होने वाली पारंपरिक इलक्ल साड़ी है, जिसे 2007 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिला था। इसकी सबसे बड़ी पहचान ‘टोपे तेनी’ तकनीक है, जिसमें साड़ी के बॉडी और पल्लू को लूप्स की मदद से जोड़ा जाता है। इस बारीक और जटिल प्रक्रिया के कारण हर साड़ी एक अनोखा हस्तशिल्प बन जाती है। जेनिलिया की साड़ी में लाल रंग का चौड़ा बॉर्डर था, जिसे सुनहरे ‘टोड़े परस’ के त्रिकोणीय पैटर्न से सजाया गया था। वहीं पल्लू में सिल्वर ज्योमेट्रिक डिजाइन इसे और आकर्षक बना रहे थे। उन्होंने इस लुक को पारंपरिक टेम्पल ज्वेलरी के साथ पूरा किया–सोने के हार, मोतियों से सजे नेकलेस, हल्के हरे रंग की झलक वाले झुमके और लाल-नीले-गोल्डन रंग की कांच की चूड़ियां। हेयरस्टाइल भी पूरी तरह पारंपरिक रखा गया–सेंटर पार्टिंग के साथ स्लीक बन, जिस पर गजरा सजाया गया। मेकअप में डिफाइंड आईज, रेडिश-पिंक लिपस्टिक, और माथे पर लाल बिंदी व सिंदूर ने पूरे लुक को और निखार दिया। इस दौरान वे अपने पति Riteish Deshmukh की आगामी फिल्म Raja Shivaji के प्रमोशन में नजर आईं। फैशन एक्सपर्ट की राय वोग इंडिया की फैशन एसोसिएट Divya Balakrishnan के अनुसार, इस तरह की साड़ियों के साथ नए प्रयोग किए जा सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऑर्गेंजा ब्लाउज के साथ इसे स्टाइल किया जा सकता है या आंध्र प्रदेश का गुडाकुट्टू ड्रेप या बिहार का मुंगेर ड्रेप अपनाकर एक नया और दिलचस्प लुक बनाया जा सकता है। उनका मानना है कि एक्सेसरीज को कम रखकर साड़ी की बुनाई और ड्रेप को उभरने देना चाहिए।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Easy hair care hacks to improve shine, volume and manageability for healthy looking hair

हेयर केयर में बड़ा बदलाव: 6 आसान हेयर हैक्स जो बदल देंगे आपकी हेयर रूटीन

Celebrities showcasing soft feminine and structured fashion looks

जैकलीन से जाह्नवी तक: इस हफ्ते फैशन में दिखा क्लास और मॉडर्न ट्विस्ट का परफेक्ट संगम

Magnesium rich healthy foods like nuts, seeds, leafy greens

Magnesium-Rich Foods: क्यों जरूरी है यह मिनरल और किन 13 फूड्स से पूरी होगी आपकी कमी

Traditional Hyderabadi Khada Dupatta bridal outfit showcasing Mughal-inspired heritage wedding attire
400 साल पुरानी विरासत: हैदराबादी दुल्हनों की पहचान बना ‘खड़ा दुपट्टा’ आज भी बरकरार

Hyderabad की शादियों की बात हो और ‘खड़ा दुपट्टा’ का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं। लगभग 400 वर्षों पुरानी यह पारंपरिक पोशाक आज भी हैदराबादी मुस्लिम दुल्हनों की पहचान बनी हुई है–जहां परंपरा, शाही अंदाज और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। सिर्फ एक पोशाक नहीं, पहचान का प्रतीक शादी का लिबास केवल कपड़ा नहीं होता, बल्कि यह एक भावनात्मक और सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रतीक होता है। हैदराबाद में यह भूमिका ‘खड़ा दुपट्टा’ निभाता है–एक ऐसा ब्राइडल एंसेंबल जो दुल्हन की पहचान, विरासत और सौंदर्य को एक साथ प्रस्तुत करता है। यह तीन हिस्सों में बना होता है–कुर्ता, चूड़ीदार और लगभग छह गज लंबा दुपट्टा। इसकी सबसे खास बात इसका पहनने का अंदाज है, जिसमें दुपट्टा दोनों कंधों पर ‘खड़ा’ रहता है और पीछे की ओर गिरता है, जिससे एक खास और शाही सिल्हूट बनता है। मुगल काल से आज तक की यात्रा इस पोशाक की जड़ें Mughal era से जुड़ी मानी जाती हैं। माना जाता है कि उस दौर की प्रभावशाली शख्सियत Nur Jahan ने वस्त्र और शिल्प में कई नए प्रयोग किए, जिनका असर इस पोशाक में भी दिखता है। जब Nizam-ul-Mulk ने दक्कन में शासन स्थापित किया, तो मुगल और स्थानीय परंपराओं का मेल हुआ और धीरे-धीरे ‘खड़ा दुपट्टा’ ने अपना मौजूदा स्वरूप लिया। समय के साथ यह शाही पोशाक आम समाज तक पहुंची और आज यह हैदराबादी मुस्लिम दुल्हनों की पारंपरिक पहचान बन चुकी है। कारीगरी में छुपा है असली जादू ‘खड़ा दुपट्टा’ की खासियत इसकी बारीक कढ़ाई और भारी बॉर्डर में छिपी होती है। जरी, ज़रदोज़ी, दबका और गोटा वर्क कुंदन और फ्लोरल पैटर्न हाथ से की गई महीन कढ़ाई इन सभी तत्वों का संतुलन इसे एक शाही और संतुलित रूप देता है। डिजाइनर Jayanti Reddy इसे “कल्चरल हेयरलूम” मानती हैं–एक ऐसी विरासत जो समय के साथ बदलती है, लेकिन अपनी आत्मा को कायम रखती है। वहीं Karan Torani के अनुसार, यह पोशाक “लेयरिंग, गरिमा और पावर ड्रेसिंग” का बेहतरीन उदाहरण है, जो दुल्हन को एक आर्किटेक्चरल एलिगेंस देता है। परंपरा और आधुनिकता का संगम आज के दौर में भी ‘खड़ा दुपट्टा’ की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। कई मशहूर हस्तियां जैसे Rekha, Nita Ambani, Sania Mirza और Sobhita Dhulipala इस पारंपरिक स्टाइल को आधुनिक अंदाज में अपनाकर इसकी विरासत को आगे बढ़ा चुकी हैं। एक भावनात्मक जुड़ाव ‘खड़ा दुपट्टा’ सिर्फ एक ड्रेस नहीं, बल्कि एक एहसास है–जो दुल्हन को उसके अतीत, परंपरा और परिवार से जोड़ता है। यही कारण है कि बदलते फैशन ट्रेंड्स के बावजूद यह पोशाक आज भी उतनी ही खास और प्रासंगिक बनी हुई है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Aditi Rao Hydari wearing lime silk saree by Raw Mango with elegant jewelry and soft glam makeup look

लाइम सिल्क साड़ी में छाईं अदिति राव हैदरी: Raw Mango के क्लासिक लुक में दिखा रॉयल चार्म

Rashmika Mandanna relaxing with a soothing foot soak using Epsom salt at home

रश्मिका मंदाना का फुटकेयर सीक्रेट: एप्सम सॉल्ट से रखें पैरों को सॉफ्ट और रिलैक्स

Kareena Kapoor Khan wearing Sabyasachi leopard print saree with polki turquoise jewelry

करीना कपूर खान का ‘फियरस’ साड़ी लुक: सब्यसाची की लेपर्ड प्रिंट साड़ी में छाईं बेबो

Man applying sunscreen and skincare routine to remove tan and protect skin from UV rays
पुरुषों के लिए गाइड: सिर्फ 7 दिनों में टैन कैसे हटाएं – आसान और असरदार तरीका

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में पुरुषों की त्वचा लगातार धूप, धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहती है। ऑफिस जाने का रोज़ाना सफर हो, वीकेंड पर बाइक राइड हो या आउटडोर स्पोर्ट्स–इन सबके कारण चेहरे पर जिद्दी टैन, असमान स्किन टोन और डलनेस साफ दिखाई देने लगती है। अच्छी बात यह है कि टैन हटाने के लिए आपको बहुत जटिल या लंबी स्किनकेयर रूटीन की जरूरत नहीं है। सही प्रोडक्ट्स और साइंटिफिक अप्रोच के साथ आप सिर्फ एक हफ्ते में अपनी स्किन को बेहतर बना सकते हैं। आखिर टैन होता क्यों है? जब आपकी त्वचा सूरज की UV किरणों के संपर्क में आती है, तो शरीर खुद को बचाने के लिए मेलानिन नामक पिगमेंट बनाता है। यही मेलानिन त्वचा को डार्क बनाता है। पुरुषों की त्वचा महिलाओं की तुलना में लगभग 20% मोटी होती है और इसमें ऑयल प्रोडक्शन भी ज्यादा होता है। यही कारण है कि टैन त्वचा पर जमा होकर ज्यादा गहरा और पैची दिखाई देता है। 7 दिनों का असरदार डिटैन रूटीन Step 1: दिन की शुरुआत करें डिटैन फेसवॉश से कई पुरुष आज भी चेहरे पर साबुन या बॉडी वॉश का इस्तेमाल करते हैं, जो स्किन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एक अच्छा डिटैन फेसवॉश त्वचा की ऊपरी परत से डेड स्किन और गंदगी हटाता है। यह स्किन को साफ करने के साथ-साथ आगे इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। Step 2: हफ्ते में 2 बार डिटैन फेस मास्क लगाएं सिर्फ फेसवॉश से गहरा टैन नहीं हटता। इसके लिए डिटैन फेस मास्क जरूरी है। यह मास्क खास एक्टिव इंग्रीडिएंट्स और क्ले से बना होता है, जो त्वचा के अंदर जमा मेलानिन को तोड़ने में मदद करता है। हफ्ते में 2 बार 10–15 मिनट लगाने से स्किन धीरे-धीरे साफ और ब्राइट दिखने लगती है। Step 3: मॉइश्चराइजर से स्किन को हाइड्रेट रखें बहुत से लोग मानते हैं कि टैन हटाने के लिए स्किन को ड्राय रखना चाहिए, लेकिन यह गलत है। ड्राय स्किन और भी ज्यादा डल और डार्क दिखती है। इसलिए हर बार फेसवॉश या मास्क के बाद एक हल्का, ऑयल-फ्री मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। इससे त्वचा सॉफ्ट, हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहती है। Step 4: सनस्क्रीन है सबसे जरूरी अगर आप सनस्क्रीन नहीं लगाते, तो आपका सारा डिटैन प्रयास बेकार हो सकता है। SPF 50 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन रोज सुबह लगाना जरूरी है। यह आपकी त्वचा को UV किरणों से बचाता है और नए टैन को बनने से रोकता है। यह रूटीन क्यों सबसे असरदार है? यह डिटैन रूटीन तीन स्तरों पर काम करता है: Removal (हटाना): डेड और डार्क स्किन को साफ करता है Correction (सुधार): गहरे पिगमेंट को कम करता है Prevention (बचाव): नए टैन को बनने से रोकता है

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Man applying beard oil to well-groomed beard for smooth and stylish look grooming routine

परफेक्ट स्टाइल के लिए टॉप 5 बियर्ड ऑयल

Woman applying sattu face mask on skin for natural glow and traditional skincare remedy at home.

ग्लोइंग स्किन के लिए नया ट्रेंड: बेसन नहीं, अब अपनाएं सत्तू फेस मास्क

rose water and sandalwood face pack for natural glowing skin in summer skincare routine.

गुलाब जल और चंदन से पाएं नैचुरल ग्लो: जानिए फायदे और लगाने का सही तरीका

0 Comments

Top week

Fire Service Week Jharkhand
झारखंड

अग्निशमन सेवा सप्ताह की शुरुआत पर बोले सीएम हेमंत-लोगों को जागरूक करना है

Anjali Kumari अप्रैल 14, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?