नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों के बजट पर असर डाला है। अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक तेल संकट के कारण ईंधन महंगा हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति को फिटनेस सुधारने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। छोटी दूरी के लिए बाइक या कार छोड़कर पैदल चलना और साइकिल का इस्तेमाल करना न केवल खर्च कम करेगा, बल्कि शरीर को भी फिट बनाएगा। पैदल चलने से तेजी से बर्न होती है कैलोरी विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना 1 से 2 किलोमीटर पैदल चलने की आदत वजन घटाने में मददगार हो सकती है। नियमित वॉकिंग से शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और फैट तेजी से बर्न होने लगता है। फिटनेस एक्सपर्ट्स बताते हैं कि 30 मिनट तेज गति से चलने पर करीब 120 से 200 कैलोरी तक बर्न की जा सकती है। इससे मोटापा कम करने और शरीर को एक्टिव रखने में मदद मिलती है। साइकिलिंग से दिल और मांसपेशियां रहेंगी मजबूत Cycling को सबसे प्रभावी कार्डियो एक्सरसाइज में से एक माना जाता है। 30 मिनट साइकिल चलाने से लगभग 200 से 300 कैलोरी तक बर्न हो सकती है। इससे पैरों, जांघों और पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और दिल की सेहत में सुधार होता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित साइकिलिंग करने वाले लोगों में मोटापा और Type 2 Diabetes का खतरा कम हो सकता है। फिट रहने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल व्यायाम ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण भी जरूरी है। कम नींद और ज्यादा तनाव शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ाते हैं जो वजन बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। गर्मियों में तला-भुना भोजन और शक्कर वाली ड्रिंक्स कम लेकर पानी, फल और हल्का भोजन अपनाने से शरीर अधिक स्वस्थ और सक्रिय रह सकता है।
बालों की सही देखभाल केवल महंगे प्रोडक्ट्स से नहीं, बल्कि सही तकनीक और छोटे-छोटे स्मार्ट हैक्स से भी संभव है। हेयर एक्सपर्ट्स द्वारा सुझाए गए ये 6 आसान और असरदार हैक्स न सिर्फ आपके बालों की चमक और टेक्सचर सुधारते हैं, बल्कि उन्हें हेल्दी और मैनेजेबल भी बनाते हैं। 1. सेकंड-डे हेयर को करें रिवाइव अगर अगले दिन बाल बेजान और फ्लैट लगते हैं, तो leave-in conditioner और पानी का मिक्स बनाकर स्प्रे करें और हल्के हाथ से scrunch करें। इससे बालों में फिर से वेव्स और वॉल्यूम आ जाता है। 2. ड्राई शैम्पू का सही इस्तेमाल ड्राई शैम्पू को पूरे बालों में लगाने के बजाय सिर्फ oily हिस्सों (जैसे hairline, parting) पर लगाएं। इससे बाल हल्के, फ्रेश और नैचुरल मूवमेंट वाले बने रहते हैं। 3. Leave-in conditioner ऐसे लगाएं जैसे हैंड क्रीम Leave-in या हेयर ऑयल को सीधे बालों पर लगाने के बजाय पहले हाथों पर फैलाएं, फिर उंगलियों से बालों में लगाएं। इससे प्रोडक्ट बराबर फैलेगा और बाल greasy नहीं होंगे। 4. बालों का रंग ऐसे रखें सुरक्षित हार्ड वॉटर और क्लोरीन बालों के रंग को खराब कर सकते हैं। इसके लिए: शावर में फिल्टर का इस्तेमाल करें स्विमिंग से पहले बालों में ऑयल लगाएं इससे बालों का रंग लंबे समय तक चमकदार बना रहता है। 5. ज्यादा शैम्पू नहीं, ज्यादा पानी बाल धोते समय ज्यादा शैम्पू की जगह ज्यादा पानी का इस्तेमाल करें। खासकर sulfate-free shampoo के साथ, इससे बेहतर झाग बनेगा और बालों की नैचुरल नमी भी बरकरार रहेगी। 6. फ्लायअवे बालों को करें सेट छोटे-छोटे उड़ते बालों (flyaways) को सेट करने के लिए clear brow gel का इस्तेमाल करें। यह एक क्विक और प्रोफेशनल फिनिश देने वाला आसान ट्रिक है।
आज के दौर में फैशन और स्टेटस का बड़ा हिस्सा बन चुके सनग्लासेस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। खासकर Designer Sunglasses की कीमत ₹10,000 से ₹25,000 तक पहुंच जाती है। लेकिन क्या यह ऊंची कीमत वास्तव में बेहतर क्वालिटी की गारंटी देती है? एक नया विश्लेषण बताता है कि महंगे सनग्लासेस की कीमत का बड़ा हिस्सा उनके ब्रांड, मार्केटिंग और रिटेल खर्च पर आधारित होता है-ना कि केवल उनकी असली क्वालिटी पर। Designer Sunglasses इतने महंगे क्यों होते हैं? हाई-एंड ब्रांड्स की कीमत कई फैक्टर्स से तय होती है: ब्रांड की ग्लोबल पहचान महंगे रिटेल स्टोर्स सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट विज्ञापन और इंपोर्ट लागत विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मामलों में असली प्रोडक्शन कॉस्ट कुल कीमत का छोटा हिस्सा होती है। यानी आप अक्सर “ब्रांड वैल्यू” के लिए ज्यादा भुगतान करते हैं। सनग्लास खरीदते समय क्या देखना चाहिए? अगर आप समझदारी से खरीदारी करना चाहते हैं, तो इन चीजों पर ध्यान देना जरूरी है: UV400 प्रोटेक्शन लेंस की क्लैरिटी और ग्लेयर कंट्रोल फ्रेम की मजबूती हिंग की क्वालिटी चेहरे पर सही फिट ध्यान रखें-ब्रांड नाम इन फीचर्स की गारंटी नहीं देता। Rawbare की पोजिशनिंग क्या है? Rawbare खुद को “Affordable Premium” कैटेगरी में रखता है। इसका फोकस ज्यादा ब्रांडिंग पर नहीं, बल्कि असली उपयोगिता और टिकाऊपन पर है। इसकी खास बातें: भारतीय धूप के हिसाब से UV प्रोटेक्शन रोज़ाना पहनने के लिए संतुलित फ्रेम मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले हिंग मॉडर्न और सिंपल डिजाइन Wayfarer स्टाइल जैसे Quadra कलेक्शन ऑफिस, ट्रैवल और कैजुअल हर जगह फिट बैठते हैं। Designer vs Rawbare: कौन बेहतर? Designer Sunglasses: हाई ब्रांड वैल्यू लग्जरी एक्सपीरियंस महंगी कीमत Rawbare: किफायती कीमत रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए मजबूत सिंपल और ट्रेंडी डिजाइन डायरेक्ट-टू-कस्टमर मॉडल
हर नए साल के साथ “न्यू ईयर, न्यू मी” के ट्रेंड्स सोशल मीडिया पर छा जाते हैं। लेकिन सच यह है कि स्टाइल बदलने के लिए किसी खास तारीख का इंतजार जरूरी नहीं होता। अगर आप भी अपने लुक से बोर हो चुके हैं और ‘बस ठीक-ठाक’ दिखने से आगे बढ़ना चाहते हैं, तो 2026 आपके लिए सही मौका हो सकता है। यहां कुछ ऐसे फैशन रिज़ॉल्यूशन्स दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने स्टाइल को एक नया और बेहतर रूप दे सकते हैं: 1. ब्लैक, ग्रे और ब्लू से बाहर निकलें अक्सर पुरुष अपनी वॉर्डरोब को सिर्फ तीन रंगों-ब्लैक, ग्रे और ब्लू तक सीमित रखते हैं। लेकिन अब वक्त है इसमें बदलाव लाने का। बेज़, ऑलिव ग्रीन या बरगंडी जैसे रंग आपके लुक को तुरंत अपग्रेड कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आप पूरी तरह एक्सपेरिमेंटल हो जाएं, लेकिन थोड़ा सा बदलाव आपकी पर्सनैलिटी को निखार सकता है। 2. वही खरीदें जो अभी फिट आता है सेल के चक्कर में गलत साइज के कपड़े खरीदना एक आम गलती है। ओवरसाइज़ ट्रेंड अलग चीज है, लेकिन गलत फिटिंग कभी स्टाइलिश नहीं लगती। अपनी वॉर्डरोब को क्लटर-फ्री रखें और सिर्फ वही कपड़े रखें जो आपको अभी सही फिट हों। इससे आपका लुक ज्यादा क्लीन और कॉन्फिडेंट नजर आएगा। 3. फुटवियर में करें समझदारी से निवेश अच्छे जूते सिर्फ कम्फर्ट ही नहीं, बल्कि आपके पूरे आउटफिट को परिभाषित करते हैं। हर रंग के जूते खरीदने की बजाय कुछ क्लासिक और मल्टी-यूज ऑप्शन चुनें। क्वालिटी फुटवियर आपके स्टाइल को लंबे समय तक बनाए रखते हैं और एक स्मार्ट इन्वेस्टमेंट साबित होते हैं। 4. सोशल मीडिया नहीं, खुद के लिए ड्रेस करें अक्सर लोग ऐसे कपड़े खरीदते हैं जो सिर्फ इंस्टाग्राम पोस्ट या खास मौके के लिए होते हैं। लेकिन असली स्टाइल वही है जो आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में फिट बैठे। ऐसे कपड़े चुनें जिन्हें आप बार-बार पहन सकें और जो आपकी पर्सनैलिटी को दर्शाएं। क्योंकि अंत में, आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा स्टाइल स्टेटमेंट होता है। 5. कम खरीदें, लेकिन सोच-समझकर फैशन का मतलब सिर्फ ज्यादा कपड़े खरीदना नहीं, बल्कि सही कपड़े चुनना है। सेल के दौरान खरीदारी जरूर करें, लेकिन हर चीज को खरीदने से पहले यह सोचें कि क्या आप उसे वास्तव में पहनेंगे या नहीं।
आज के डिजिटल दौर में लगातार मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन पर समय बिताना आम बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका सीधा असर आपकी आंखों पर पड़ रहा है? “डिजिटल आई स्ट्रेन” (Computer Vision Syndrome) अब एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिससे आंखों में थकान, सूखापन और धुंधलापन जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, इसलिए समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। क्या है डिजिटल आई स्ट्रेन? डिजिटल आई स्ट्रेन कोई मिथक नहीं, बल्कि एक वास्तविक समस्या है। मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर और टीवी स्क्रीन पर लगातार नजरें टिकाए रखने से आंखों में थकान, जलन और सिरदर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसे आमतौर पर “कंप्यूटर विजन सिंड्रोम” भी कहा जाता है। स्क्रीन से आंखों को कैसे बचाएं? अगर आप रोजाना लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करते हैं, तो ये आसान उपाय आपकी आंखों को सुरक्षित रख सकते हैं: 1. अपनाएं 20-20-20 नियम हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज को देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और थकान कम होती है। 2. बार-बार पलक झपकाएं कम पलक झपकाने से आंखें सूख जाती हैं। इसलिए काम करते समय नियमित रूप से पलक झपकाना जरूरी है। जरूरत हो तो आर्टिफिशियल आई ड्रॉप्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 3. स्क्रीन सेटिंग्स करें सही ब्राइटनेस को संतुलित रखें नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का उपयोग करें इससे आंखों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है। 4. ग्लेयर (चमक) कम करें स्क्रीन पर पड़ने वाली तेज रोशनी को कम करें। एंटी-ग्लेयर स्क्रीन या सही एंगल में डिवाइस रखने से आंखों को राहत मिलती है। 5. स्क्रीन की सही पोजिशन रखें स्क्रीन आंखों से 20–28 इंच दूर हो स्क्रीन का ऊपरी हिस्सा आंखों के बराबर या थोड़ा नीचे हो यह आदत आंखों और गर्दन दोनों के लिए फायदेमंद है। 6. कमरे की लाइटिंग संतुलित रखें अंधेरे कमरे में काम न करें और स्क्रीन बहुत ज्यादा चमकीली न रखें। सही रोशनी आंखों के तनाव को कम करती है। 7. डॉक्यूमेंट स्टैंड का इस्तेमाल करें अगर काम के दौरान कागज और स्क्रीन दोनों देखना पड़ता है, तो डॉक्यूमेंट स्टैंड का उपयोग करें। इससे आंखों और गर्दन की मूवमेंट कम होती है। 8. बीच-बीच में ब्रेक लें लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने से बचें। थोड़ी-थोड़ी देर में उठकर टहलना आंखों को आराम देता है। 9. फालतू स्क्रीन टाइम कम करें मनोरंजन के लिए मोबाइल या टीवी का इस्तेमाल सीमित करें। इससे आंखों की थकान और सूखापन कम होगा। 10. सोने से पहले स्क्रीन से दूरी रखें सोने से कम से कम 1 घंटे पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें। यह आंखों को आराम देने के साथ नींद भी बेहतर बनाता है। 11. नियमित आंखों की जांच कराएं समय-समय पर आंखों की जांच कराना जरूरी है, ताकि किसी भी समस्या का पता समय रहते चल सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।