झारखंड

‘सांसद सांस्कृतिक महोत्सव’ के लिए संजय सेठ ने राज्यपाल को किया आमंत्रित

Anjali Kumari अप्रैल 22, 2026 0
Sanjay Seth meet Governor
Sanjay Seth meet Governor

रांची। रांची में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार  से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों के बीच विभिन्न विषयों पर सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई। मुलाकात का मुख्य उद्देश्य आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर राज्यपाल को औपचारिक निमंत्रण देना था।

 

‘सांसद सांस्कृतिक महोत्सव’ में आने का आग्रह


मंत्री संजय सेठ ने राज्यपाल को 1 से 3 मई तक आयोजित होने वाले ‘सांसद सांस्कृतिक महोत्सव सह स्वदेशी मेला’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी और राज्यपाल से इसमें भाग लेने का अनुरोध किया।

 

ऑड्रे हाउस में होगा तीन दिवसीय आयोजन


यह तीन दिवसीय महोत्सव ऑड्रे हाउस में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय कला, शिल्प और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना है। यहां विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

 

स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच


संजय सेठ ने बताया कि यह आयोजन स्थानीय कलाकारों और कारीगरों के लिए एक बड़ा अवसर होगा। इससे उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और अपने उत्पादों को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने का मौका मिलेगा। साथ ही, यह महोत्सव स्वदेशी उत्पादों के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

संस्कृति और परंपरा को मिलेगा बढ़ावा


यह आयोजन क्षेत्रीय संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम न केवल कला और संस्कृति को जीवंत रखते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड हाईकोर्ट ने जंगलों से 500 मीटर के दायरे में खनन पर लगाई रोक

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने जंगलों से 500 मीटर के दायरे में खनन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य में पर्यावरण संरक्षण को लेकर यह फैसला सुनाया है।  250 मीटर का कानून रद्द कोर्ट ने संरक्षित जंगलों के आसपास पत्थर खनन और क्रशर लगाने की न्यूनतम दूरी 250 मीटर के कानून को रद्द कर दिया है। अब जंगलों से 500 मीटर के दायरे के बाहर ही खनन की अनुमति मिलेगी।   पुरानी व्यवस्था फिर से लागू मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि पहले तय 250 मीटर की दूरी पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2015 और 2017 की अधिसूचनाओं को खारिज करते हुए पुरानी व्यवस्था यानी 500 मीटर की दूरी फिर से लागू कर दी है। कोर्ट ने कहा कि 250 मीटर का नियम पर्यावरणीय दृष्टि से उचित नहीं है और यह बिना ठोस आधार के तय किया गया था।

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रांची में होमस्टे बन रहे क्राइम सेंटर

रांची। हाल ही में राजधानी रांची में एमडीएस छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म मामले ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना लालपुर स्थित गोकुल वाटिका अपार्टमेंट में हुई, जहां आरोपी ने एक प्राइवेट ऐप के जरिए फ्लैट को होम स्टे के रूप में बुक किया था। इस मामले ने यह उजागर कर दिया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिना किसी ठोस नियम-कानून और निगरानी के कमरे और फ्लैट को किराये पर देना कितना खतरनाक हो सकता हैं।    वेरिफिकेशन की कमी से बढ़ा खतरा सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसे होम स्टे में किराया देने से पहले ठहरने वालों का कोई पुख्ता रिकॉर्ड या पहचान पत्र मांगना चाहिए या नहीं ? अगर किसी व्यक्ति की पहचान और उसके ठहरने का उद्देश्य ही स्पष्ट न हो, तो इस तरह की घटनाओं का घटना स्वाभाविक है। यही वजह है कि अपराधियों के लिए ऐसे जगह क्राइम करने के लिए आसान ठिकाना बनते जा रहे हैं।    होटल-लॉज पर सख्ती तो वहीं आपको बताते चले कि  एक ओर सरकार ने होटल और लॉज के लिए कड़े नियम बनाए हैं-जैसे गेस्ट का पहचान पत्र लेना, रजिस्टर में नाम, एड्रेस एंट्री करना और सुरक्षा मानकों का पालन करना। वहीं दूसरी ओर प्राइवेट ऐप के जरिए चल रहे होम स्टे इन नियमों से बाहर हैं। इस असमानता के कारण सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा अंतर पैदा हो गया है, जो कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनता जा रहा है।   प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया नगर प्रशासन ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उप नगर आयुक्त गौतम प्रसाद साहू के अनुसार, नगर निगम के पास शहर में संचालित होम स्टे की संख्या का कोई स्पष्ट डेटा नहीं है। साथ ही, प्राइवेट ऐप के जरिए हो रही बुकिंग की जानकारी भी प्रशासन तक नहीं पहुंचती। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भले ही कुछ  समय के बुकिंग हो लेकिन किसी भी किरायेदार का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है। यह नियम पूरे राज्य में लागू है, पर होम स्टे के मामलों में इसका पालन नहीं हो रहा।   सख्त नियमों की बढ़ी मांग अगर होम स्टे सिस्टम को बिना नियंत्रण के चलने दिया गया, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में सरकार से मांग की जा रही है कि होम स्टे के लिए भी होटल-लॉज की तरह स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं और एक सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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रांची/पटना, एजेंसियां। 22 अप्रैल को बिहार और झारखंड में मौसम ने दोहरा रूप दिखाया है। एक तरफ भीषण गर्मी और लू का प्रकोप है, तो दूसरी ओर कई इलाकों में बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। India Meteorological Department (IMD) के अनुसार, अप्रैल में ही जून जैसी गर्मी पड़ रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है।   गया बना सबसे गर्म शहर   बिहार में गर्मी का असर सबसे ज्यादा गया में देखा गया, जहां तापमान 42.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। राजधानी Patna समेत कई जिलों में पारा 40 डिग्री के पार चला गया है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक हालात चुनौतीपूर्ण रहने की चेतावनी दी है। हालांकि 24-25 अप्रैल के आसपास हल्की बारिश से कुछ राहत मिलने की संभावना जताई गई है।   झारखंड में हीट वेव के साथ ठनका का अलर्ट झारखंड में मौसम का विरोधाभासी स्वरूप देखने को मिल रहा है। जहां कुछ जिलों में लू चलने की चेतावनी है, वहीं Ranchi मौसम केंद्र ने गुमला, खूंटी, सिमडेगा और जमशेदपुर में तेज हवाओं के साथ बारिश और ठनका (वज्रपात) का अलर्ट जारी किया है। यह स्थिति जान-माल के लिए खतरा बन सकती है।   देशभर में गर्मी का असर उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में लू का असर लगातार बढ़ रहा है। वहीं पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश के कारण राहत मिल रही है। पश्चिम बंगाल और बिहार के कई क्षेत्रों में ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है।   बचाव के जरूरी उपाय बढ़ती गर्मी को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और खाली पेट घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। साथ ही, तबीयत खराब होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की भी हिदायत दी गई है।

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