रांची। राजधानी रांची में भी अब पेट्रोल-डीजल का संकट गहराने लगा है। इसके बाद शहर कुछ इलाकों में पंपों पर पेट्रोल-डीजल की राशनिंग भी शुरू हो गई है। एक ओर शहर के भीतर कुछ पेट्रोल पंपों पर अब भी गैलन में तेल भरकर बेचा जा रहा है, वहीं शहर से बाहर और आसपास के इलाकों में ईंधन की भारी किल्लत देखी जा रही है।
स्थिति इतनी विकट हो गई है कि कई पंपों पर उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा से कम ईंधन दिया जा रहा है, शहर के बाहर कुछ जगहों पर पेट्रोल की बिक्री 500 रुपये तक सीमित कर दी गई है। तेल कंपनियों के साथ समन्वय कर आपूर्ति बहाल भी नहीं हो पा रही है।
रांची में पेट्रोल-डीजल संकट अब एक गंभीर रूप लेता जा रहा है। यदि जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो इसका व्यापक असर न केवल आम जनजीवन बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल शहरवासी अनिश्चितता और परेशानी के बीच इंतजार कर रहे हैं कि कब हालात सामान्य होंगे।
ग्रामीण और आउटर इलाके के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित है। ट्रक चालकों और व्यवसायिक वाहनों के चालकों का कहना है कि 50 लीटर डीजल मांगने पर केवल 30 लीटर ही दिया जा रहा है। इससे माल ढुलाई, निर्माण कार्य और आवश्यक सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है।
शहर के कुछ पेट्रोल पंपों पर अभी भी गैलन में तेल उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आपूर्ति और वितरण में असमानता बढ़ रही है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है या जानबूझकर व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।
राजधानी और आसपास के कई पंपों पर पेट्रोल की बिक्री 500 रुपये तक सीमित कर दी गई है। इससे रोजमर्रा के कामकाज के लिए वाहन उपयोग करने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबी कतारें और अनिश्चितता के बीच उपभोक्ता घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि आपूर्ति में करीब 20 प्रतिशत की कटौती की गई है। उनका आरोप है कि डिमांड नोट भेजने के बावजूद तेल कंपनियों की ओर से टैंकरों की डिलीवरी समय पर नहीं हो रही है। इससे स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है और उन्हें मजबूरी में बिक्री पर सीमा तय करनी पड़ रही है।
इस परेशानी के बाद 30 लीटर से अधिक डीजल नहीं देने का पंप चालकों ने निर्णय लिया है, वहीं पेट्रोल भी 50 लीटर तक सीमित किया गया है। लेकिन, शहर में इस नियम को धड़ल्ले से तोड़ा जा रहा है।
हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी बड़े व्यवधान की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार टैंकरों की अनियमित आपूर्ति, लॉजिस्टिक बाधाएं और मांग में अचानक वृद्धि इस संकट के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा, वितरण श्रृंखला में किसी स्तर पर बाधा या प्रबंधन की कमी भी स्थिति को बिगाड़ रही है।
माल ढुलाई प्रभावित होने से वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
ऑटो, बस और टैक्सी सेवाओं पर भी दबाव बढ़ सकती है।
आपातकालीन सेवाओं के लिए भी ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।
निर्माण कार्य और छोटे उद्योगों पर असर पड़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कोडरमा। कोडरमा जिले के जयनगर थाना क्षेत्र के कंझियाडीह गांव में बीती रात जंगली हाथियों के झुंड ने कहर बरपा दिया। ईंट भट्टे के पास रह रहे मजदूरों की झोपड़ियों पर अचानक हमला होने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन भगदड़ में कई लोग फंस गए। हाथियों ने कच्चे मकानों को तोड़ते हुए भारी नुकसान पहुंचाया। दो लोगों की दर्दनाक मौत इस हमले में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों की पहचान बिहार के फतेहपुर निवासी 32 वर्षीय राजकुमार मांझी और 12 वर्षीय लवकुश के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हमले के दौरान एक बच्चा झोपड़ी में फंस गया था। उसे बचाने की कोशिश में परिजन दौड़े, लेकिन अफरा-तफरी में बच्चा हाथियों के करीब पहुंच गया और उनकी चपेट में आ गया। घायलों का इलाज जारी घायलों में राजकुमार मांझी की पत्नी गौरी देवी, लवकुश की मां कारी देवी और एक डेढ़ वर्षीय बच्चा शामिल हैं। सभी को तुरंत अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। गांव में मातम और डर का माहौल घटना के बाद गांव में शोक और भय का माहौल है। आसपास के इलाकों में भी दहशत फैल गई है। ग्रामीण रात में घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं और लगातार सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। वन विभाग पर उठे सवाल ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों ने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
रांची। झारखंड में साइबर ठगी के शिकार हुए लोगों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है। अब 50 हजार रुपए से कम की ठगी होने पर थाने का चक्कर लगाने या एफआईआर दर्ज कराने की आवश्यकता नहीं है। ठगी के शिकार लोगो का पैसा बैंक से सीधे वापस मिल जायेगा। हालांकि ठगी होने के 2 घंटे के भीतर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराना जरूरी होगा। शिकायत किए जाने के बाद पुलिस 30 दिनों के अंदर वेरीफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर बैंक को रिपोर्ट करेगी। बैंक में पुलिस की रिपोर्ट मिलते ही पीड़ित के खाते में पैसा वापस भेजा जाएगा। इसके लिए पीड़ित को न तो कोर्ट जाना होगा और न ही वकील करने की आवश्यकता होगी। आई-4सी द्वारा जारी नई एसओपी के तहत अब सारा काम बैंक स्तर पर ही निपटाया जाएगा। इसके लिए बैंकों को ‘ग्रीवांस रिड्रेसल पोर्टल’ का एक्सेस दे दिया गया है। सभी बैंकों को लॉगइन आईडी दिया गया है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया चलेगी। सिर्फ एक बार क्लेम करने का मिलेगा मौका साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक आरबीआई पॉलिसी के तहत 50 हजार से कम की ठगी होने के बाद कोई भी व्यक्ति अपने जीवन काल में एक बार क्लेम ले सकता है। साइबर फ्रॉड के मामलों में यदि निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट की जाती है, तो आरबीआई के नए दिशा-निर्देशों के तहत त्वरित समाधान और आंशिक नुकसान की भरपाई का प्रावधान किया गया है। ठगी गई रकम 3 महीने के भीतर वापस मिल सकेगी। आवेदन की प्रक्रिया आसान, पर सावधानी जरूरी सरकार ने पुलिस और कोर्ट का बोझ कम करने के लिए बैंकों को पावर दी है। लेकिन, याद रखें, पैसा वापस मिलने की पहली शर्त ‘गोल्डन ऑवर’ है। ठगी के 2 घंटे के भीतर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट जरूर करें। देरी होने पर अपराधी पैसे को कई लेयर्स में बांट देता है, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है। बैंक से अपनी ‘होल्ड रिपोर्ट’ लेना न भूलें, क्योंकि यही रिफंड का सबसे मुख्य आधार है। बैंक अकाउंट फ्रीज हुआ है, तो क्या करें? अक्सर साइबर अपराधी किसी के भी खाते में ठगी का पैसा डाल देते हैं, जिससे निर्दोष का अकाउंट भी फ्रीज हो जाता है। अब ऐसे मामलों में घबराने की जरूरत नहीं है। आप बैंक जाकर लिखित शिकायत दें। बैंक पोर्टल के जरिए जांच करेगा और अगर आपका ट्रांजैक्शन सही पाया गया, तो 3 महीने में खाता दोबारा चालू हो जाएगा। संदिग्ध मामला होने पर ही पुलिस हस्तक्षेप करेगी। 60% केस ₹50 हजार से कम के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 60% ठगी ₹50 हजार से कम की होती है। कम रकम के कारण लोग कोर्ट-कचहरी के डर से पैसा छोड़ देते थे। साइबर थाने के एक-एक अधिकारी पर 250 से ज्यादा केसों का बोझ है, जिससे रिकवरी की रफ्तार बहुत धीमी थी। 2025 में ₹75 करोड़ ठगे गए, लेकिन रिफंड सिर्फ ₹3.25 करोड़ ही हो पाया। इसी खाई को पाटने के लिए बैंकों को यह पावर दी गई है। तय समय में पैसा वापस मिलेगा थाना में साइबर ठगी के केस में कमी आएगी। अनुसंधानकर्ता पर एफआईआर का बोझ कम हो जाएगा। पीड़ित को सीमित समय में पैसा वापस मिलेगा। ठगी के शिकार हुए लोगों को थाने व कोर्ट का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
रांची। झारखंड के चाईबासा में पुलिस ने मोबाइल चोरी की वारदातों का खुलासा करते हुए एक सक्रिय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बुलेट बाइक का इस्तेमाल कर रात के समय गांवों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने की उम्मीद जगी है। स्पेशल टीम बनाकर की गई कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया था। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर) बहामन टुटी के नेतृत्व में टीम ने मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के गितिलिपी मोड़ के पास छापेमारी कर बुलेट बाइक पर सवार तीन संदिग्ध युवकों को पकड़ लिया। आरोपियों के पास से मोबाइल बरामद गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमन निषाद, सुरेंद्र सुंडी उर्फ साहिल सुंडी और हिमांशु पिंगुवा उर्फ डीमेन के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उनके पास से सात एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए, जो चोरी के बताए जा रहे हैं। पूछताछ में कबूला अपराध पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कई चोरी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि झींकपानी थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर और इचापुर गांवों में रात के समय घरों में घुसकर मोबाइल चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया था। मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अमन निषाद का आपराधिक इतिहास रहा है और वह 25 मार्च 2026 को ही जेल से रिहा हुआ था। वहीं, हिमांशु पिंगुवा का भी पहले से आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है, जिससे गिरोह की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। आगे की कार्रवाई जारी पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश भी जारी है। इस कार्रवाई को क्षेत्र में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।