झारखंड

जमीन कारोबारी की हत्या के बाद रांची पुलिस रेस, कुख्यात शूटर का किया एनकाउंटर

Anjali Kumari अप्रैल 22, 2026 0
Shooter encounter in Ranchi
Shooter encounter in Ranchi

रांची। राजधानी में पूर्व पार्षद और जमीन कारोबारी की हत्या के मामले में रांची पुलिस रेस है। बुधवार सुबह पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। रांची पुलिस ने कुख्यात शूटर सत्यम पाठक को मुठभेड़ में घायल कर दिया। बुधवार सुबह पंडरा ओपी क्षेत्र स्थित कांके डैम के पास पुलिस और सत्यम पाठक के बीच आमना-सामना हुआ, जो जल्द ही मुठभेड़ में बदल गया।


सत्यम के दोनों पैर में गोली लगी


पुलिस के अनुसार, आत्मरक्षा में की गई फायरिंग में सत्यम पाठक के दोनों पैरों में गोली लगी है। घायल हालत में उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस की टीम पहले से उसकी तलाश में जुटी थी और गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई।

मास्टर माइंड हो चुका है गिरफ्तार


बता दें कि मंगलवार को पंडरा के ओटीसी मैदान के पास जमीन कारोबारी भार्गव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि इस वारदात को अंजाम देने वाला शूटर सत्यम पाठक था, जबकि पूरे मामले का मास्टरमाइंड विजय टेटे को बताया जा रहा है। विजय टेटे को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। 
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

झारखंड

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Petrol crisis Ranchi
रांची में गहराने लगा पेट्रोल-डीजल का संकट, कई जगह राशनिंग शुरू

रांची। राजधानी रांची में भी अब पेट्रोल-डीजल का संकट गहराने लगा है। इसके बाद शहर कुछ इलाकों में पंपों पर पेट्रोल-डीजल की राशनिंग भी शुरू हो गई है। एक ओर शहर के भीतर कुछ पेट्रोल पंपों पर अब भी गैलन में तेल भरकर बेचा जा रहा है, वहीं शहर से बाहर और आसपास के इलाकों में ईंधन की भारी किल्लत देखी जा रही है।  500 रुपये तक का ही तेल दिया जा रहा स्थिति इतनी विकट हो गई है कि कई पंपों पर उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा से कम ईंधन दिया जा रहा है, शहर के बाहर कुछ जगहों पर पेट्रोल की बिक्री 500 रुपये तक सीमित कर दी गई है। तेल कंपनियों के साथ समन्वय कर आपूर्ति बहाल भी नहीं हो पा रही है।  अभी और बढ़ेगा संकट रांची में पेट्रोल-डीजल संकट अब एक गंभीर रूप लेता जा रहा है। यदि जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो इसका व्यापक असर न केवल आम जनजीवन बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल शहरवासी अनिश्चितता और परेशानी के बीच इंतजार कर रहे हैं कि कब हालात सामान्य होंगे। 50 लीटर मांगने पर 30 लीटर ही डीजल ग्रामीण और आउटर इलाके के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित है। ट्रक चालकों और व्यवसायिक वाहनों के चालकों का कहना है कि 50 लीटर डीजल मांगने पर केवल 30 लीटर ही दिया जा रहा है। इससे माल ढुलाई, निर्माण कार्य और आवश्यक सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। शहर के भीतर अलग तस्वीर शहर के कुछ पेट्रोल पंपों पर अभी भी गैलन में तेल उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आपूर्ति और वितरण में असमानता बढ़ रही है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है या जानबूझकर व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।  लोग हो रहे परेशान राजधानी और आसपास के कई पंपों पर पेट्रोल की बिक्री 500 रुपये तक सीमित कर दी गई है। इससे रोजमर्रा के कामकाज के लिए वाहन उपयोग करने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबी कतारें और अनिश्चितता के बीच उपभोक्ता घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।  पंप संचालकों का दावा- 20 प्रतिशत कम मिल रहा तेल पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि आपूर्ति में करीब 20 प्रतिशत की कटौती की गई है। उनका आरोप है कि डिमांड नोट भेजने के बावजूद तेल कंपनियों की ओर से टैंकरों की डिलीवरी समय पर नहीं हो रही है। इससे स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है और उन्हें मजबूरी में बिक्री पर सीमा तय करनी पड़ रही है।  पंप संचालकों ने लिया निर्णय इस परेशानी के बाद 30 लीटर से अधिक डीजल नहीं देने का पंप चालकों ने निर्णय लिया है, वहीं पेट्रोल भी 50 लीटर तक सीमित किया गया है। लेकिन, शहर में इस नियम को धड़ल्ले से तोड़ा जा रहा है।   संकट के पीछे के कारण हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी बड़े व्यवधान की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार टैंकरों की अनियमित आपूर्ति, लॉजिस्टिक बाधाएं और मांग में अचानक वृद्धि इस संकट के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा, वितरण श्रृंखला में किसी स्तर पर बाधा या प्रबंधन की कमी भी स्थिति को बिगाड़ रही है। ये पड़ कगा असर   माल ढुलाई प्रभावित होने से वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।  ऑटो, बस और टैक्सी सेवाओं पर भी दबाव बढ़ सकती है।  आपातकालीन सेवाओं के लिए भी ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।  निर्माण कार्य और छोटे उद्योगों पर असर पड़ सकता है।

Anjali Kumari अप्रैल 22, 2026 0
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Asian Championships 2026
एशियन चैंपियनशिप में झारखंड के खिलाड़ियों ने बढ़ाया मान, विजेता खिलाड़ियों ने DC से साझा की खुशी

रांची। दिल्ली में आयोजित एशियन चैंपियनशिप 2026 में झारखंड के खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया है। प्रतियोगिता 6 अप्रैल से 11 अप्रैल तक आयोजित हुई थी, जिसमें झारखंड के खिलाड़ियों ने पदक तालिका में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।   गोल्ड और सिल्वर मेडल से बढ़ा राज्य का मान इस प्रतियोगिता में दिनेश कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं बसंती कुमारी ने महिला अंडर-25 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य को गौरवान्वित किया। रेशमा कुमारी ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक रजत और एक कांस्य पदक हासिल किया। इन उपलब्धियों से झारखंड खेल जगत में एक बार फिर चर्चा में आ गया है।   DC से की शिष्टाचार मुलाकात खिलाड़ियों ने झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. मधुकांत पाठक के नेतृत्व में रांची के उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों और अनुभवों को साझा किया।   प्रशासन ने दी बधाई और सहयोग का भरोसा उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने खिलाड़ियों को उनकी सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे झारखंड के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि राज्य के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। DC ने भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया और जिला प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।   खेलों में बढ़ती पहचान झारखंड के खिलाड़ियों की यह उपलब्धि राज्य में खेल संस्कृति को नई दिशा दे रही है। लगातार मिल रही सफलताओं से युवा खिलाड़ियों में भी उत्साह और प्रेरणा बढ़ रही है।

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लातेहार में दर्दनाक हादसा, जंगली भैंस के हमले में दो महिलाओं की मौत

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Jharkhand Weather: झारखंड में भीषण गर्मी का कहर, कई जिलों में लू का अलर्ट जारी

रांची। झारखंड में गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। Ranchi स्थित मौसम केंद्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य के कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री अधिक दर्ज किया गया, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।   इन जिलों में हीट वेव का अलर्ट मौसम विभाग ने 21 अप्रैल को राज्य के कई जिलों के लिए लू (हीट वेव) का अलर्ट जारी किया है। इनमें Palamu, Garhwa, Latehar, Chatra, Bokaro, Dhanbad, Simdega, East Singhbhum, West Singhbhum और Seraikela-Kharsawan शामिल हैं। 22 अप्रैल को भी कई इलाकों में गर्म हवा चलने की संभावना जताई गई है।   डालटनगंज सबसे गर्म, कई शहरों में 42 पार राज्य में सबसे अधिक तापमान Daltonganj में 43.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 4 डिग्री ज्यादा है। Jamshedpur में पारा 42.6 डिग्री और Bokaro में 42.2 डिग्री तक पहुंच गया।   राजधानी रांची भी तपिश से बेहाल राजधानी रांची में भी तापमान 40.1 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.2 डिग्री अधिक है। Chaibasa में 41.4 डिग्री तापमान रहा, जबकि देवघर, कोडरमा और गोड्डा में भी पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया।   रात में भी नहीं मिल रही राहत राज्य के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है। रांची और जमशेदपुर में रात का तापमान 25 डिग्री से अधिक रिकॉर्ड किया गया, जिससे लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही।   बढ़ती गर्मी से बदला स्कूल टाइम लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूलों के समय में बदलाव किया है। विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।

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