ग्लासगो, एजेंसियां। भारत के स्टार वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष 110+ किलोग्राम भारवर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। लवप्रीत ने कुल 388 किलोग्राम (176 किग्रा स्नैच + 212 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाया, लेकिन न्यूज़ीलैंड के डेविड लिटी ने अंतिम प्रयास में 389 किलोग्राम का कुल वजन उठाकर सिर्फ 1 किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक जीत लिया।
लवप्रीत ने स्नैच राउंड में 176 किलोग्राम उठाकर बढ़त बना ली थी। क्लीन एंड जर्क में भी उन्होंने 212 किलोग्राम का सफल प्रयास किया और लंबे समय तक स्वर्ण पदक की स्थिति में रहे। हालांकि, अंतिम प्रयास में डेविड लिटी ने 223 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क सफलतापूर्वक पूरा कर मुकाबला पलट दिया।
लवप्रीत का यह पदक भारत के वेटलिफ्टिंग अभियान का एक और बड़ा योगदान है। उनकी उपलब्धि के साथ भारत की कुल पदक संख्या में इजाफा हुआ और वेटलिफ्टिंग में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी रहा।
हालांकि लवप्रीत स्वर्ण पदक से बेहद मामूली अंतर से चूक गए, लेकिन उनके प्रदर्शन की खेल विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने जमकर सराहना की। आखिरी लिफ्ट तक चले रोमांचक मुकाबले को कॉमनवेल्थ गेम्स की सबसे यादगार स्पर्धाओं में से एक माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पुरुष 110+ किलोग्राम भारवर्ग में 388 किलोग्राम कुल वजन उठाया, आखिरी लिफ्ट में न्यूज़ीलैंड के डेविड लिटी ने पलटा मुकाबला ग्लासगो, एजेंसियां। भारत के स्टार वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष 110+ किलोग्राम भारवर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। लवप्रीत ने कुल 388 किलोग्राम (176 किग्रा स्नैच + 212 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाया, लेकिन न्यूज़ीलैंड के डेविड लिटी ने अंतिम प्रयास में 389 किलोग्राम का कुल वजन उठाकर सिर्फ 1 किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक जीत लिया। स्नैच के बाद गोल्ड की दौड़ में सबसे आगे थे लवप्रीत लवप्रीत ने स्नैच राउंड में 176 किलोग्राम उठाकर बढ़त बना ली थी। क्लीन एंड जर्क में भी उन्होंने 212 किलोग्राम का सफल प्रयास किया और लंबे समय तक स्वर्ण पदक की स्थिति में रहे। हालांकि, अंतिम प्रयास में डेविड लिटी ने 223 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क सफलतापूर्वक पूरा कर मुकाबला पलट दिया। भारत के लिए वेटलिफ्टिंग में एक और पदक लवप्रीत का यह पदक भारत के वेटलिफ्टिंग अभियान का एक और बड़ा योगदान है। उनकी उपलब्धि के साथ भारत की कुल पदक संख्या में इजाफा हुआ और वेटलिफ्टिंग में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी रहा। देशभर में प्रदर्शन की सराहना हालांकि लवप्रीत स्वर्ण पदक से बेहद मामूली अंतर से चूक गए, लेकिन उनके प्रदर्शन की खेल विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने जमकर सराहना की। आखिरी लिफ्ट तक चले रोमांचक मुकाबले को कॉमनवेल्थ गेम्स की सबसे यादगार स्पर्धाओं में से एक माना जा रहा है।
हॉकी इंडिया ने बताया तकनीकी वजह, पूर्व खिलाड़ियों और नेताओं ने फैसले पर उठाए सवाल नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा (केसरिया) रंग अपनाने के फैसले को लेकर विवाद गहरा गया है। यह नई जर्सी 2026 FIH हॉकी विश्व कप में पहली बार इस्तेमाल की जाएगी। फैसले के बाद खेल जगत, पूर्व खिलाड़ियों और राजनीतिक नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है। हॉकी इंडिया ने दी यह सफाई हॉकी इंडिया ने कहा कि यह फैसला राजनीतिक नहीं बल्कि तकनीकी और खेल संबंधी कारणों से लिया गया है। संगठन के अनुसार, नीली सिंथेटिक टर्फ पर पारंपरिक नीली जर्सी खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए स्पष्ट दिखाई नहीं देती थी। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से चर्चा के बाद भगवा रंग चुना गया, क्योंकि यह बेहतर दृश्यता देता है। पूर्व खिलाड़ियों ने जताई आपत्ति भारत के पूर्व हॉकी कप्तान वीरेन रासक्विन्हा ने कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान दशकों से नीली जर्सी रही है और इसे बदलना उचित नहीं है। वहीं, पूर्व कप्तान परगट सिंह ने भी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि खेल के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए, न कि टीम की पारंपरिक पहचान बदलने पर। हॉकी कप्तान ने विवाद पर दिया जवाब भारतीय टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जर्सी के रंग बदलने में किसी तरह की राजनीति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम का पूरा ध्यान विश्व कप की तैयारी और प्रदर्शन पर है तथा खिलाड़ियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण देश का प्रतिनिधित्व करना है, न कि जर्सी का रंग।
ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में आज एथलेटिक्स के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक देखने को मिलेगा। पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में भारत के नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के अरशद नदीम आमने-सामने होंगे। दोनों खिलाड़ियों की प्रतिद्वंद्विता ने पिछले कुछ वर्षों में विश्व एथलेटिक्स में खास पहचान बनाई है। अरशद नदीम ने क्वालिफिकेशन राउंड में 78.63 मीटर का थ्रो करके फाइनल में जगह बनाई। वहीं नीरज चोपड़ा 79.61 मीटर के प्रयास के साथ पांचवें स्थान पर रहते हुए फाइनल में पहुंचे। भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह ने भी फाइनल के लिए क्वालिफाई किया है। दिलचस्प बात यह है कि क्वालिफिकेशन राउंड में किसी भी एथलीट ने 83 मीटर का ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क हासिल नहीं किया। ऐसे में शीर्ष 12 खिलाड़ियों को फाइनल में जगह मिली। अरशद नदीम ने फाइनल से पहले मांगी फैंस से दुआ फाइनल से पहले पाकिस्तान के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी अरशद नदीम ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया। उन्होंने पाकिस्तानी प्रशंसकों से अपने लिए दुआ करने और फाइनल में अच्छे प्रदर्शन के लिए समर्थन देने की अपील की। नदीम ने बताया कि वह फाइनल के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं और अब उनकी कोशिश पाकिस्तान के लिए पदक जीतने की होगी। उन्होंने अपने प्रशंसकों के समर्थन और दुआओं के लिए धन्यवाद भी दिया। नदीम के लिए यह मुकाबला इसलिए भी अहम है क्योंकि वह मौजूदा कॉमनवेल्थ चैंपियन हैं। उन्होंने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में 90.18 मीटर के रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था। उस प्रतियोगिता में नीरज चोपड़ा चोट के कारण हिस्सा नहीं ले पाए थे। पेरिस ओलंपिक के बाद फिर आमने-सामने नीरज और अरशद नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम की प्रतिद्वंद्विता ने पेरिस ओलंपिक 2024 में एक नया अध्याय लिखा था। उस फाइनल में अरशद नदीम ने 92.97 मीटर के ओलंपिक रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था, जबकि नीरज चोपड़ा ने रजत पदक अपने नाम किया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में दोनों के बीच एक और बड़ी भिड़ंत होने जा रही है। हालांकि इस बार मुकाबला सिर्फ नीरज और अरशद तक सीमित नहीं है। श्रीलंका के रुमेश थारंगा और ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स जैसे मजबूत दावेदार भी फाइनल में मौजूद हैं। फाइनल में भारत के तीन खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के अलावा भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह ने भी फाइनल में जगह बनाकर देश की पदक उम्मीदों को मजबूत किया है। क्वालिफिकेशन में नीरज ने 79.61 मीटर के थ्रो के साथ पांचवां स्थान हासिल किया। रोहित यादव 78.37 मीटर के साथ नौवें और यशवीर सिंह 78.36 मीटर के साथ दसवें स्थान पर रहे। इसका मतलब है कि फाइनल में 12 खिलाड़ियों के बीच भारत के तीन एथलीट पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। रुमेश थारंगा भी बन सकते हैं बड़ा खतरा भारत-पाकिस्तान की बहुप्रतीक्षित भिड़ंत के बीच श्रीलंका के रुमेश थारंगा को नजरअंदाज करना बड़ी भूल हो सकती है। वह इस समय शानदार फॉर्म में हैं और क्वालिफिकेशन राउंड में 82.84 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके शीर्ष स्थान पर रहे। थारंगा ने इससे पहले रोम में 92.62 मीटर का शानदार थ्रो किया था। यही वजह है कि नीरज और अरशद के साथ उनकी मौजूदगी फाइनल को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना रही है। एंडरसन पीटर्स भी 81.29 मीटर के प्रयास के साथ क्वालिफिकेशन में दूसरे स्थान पर रहे। उनके नाम 93.07 मीटर का करियर बेस्ट थ्रो है। ऐसे में फाइनल में सिर्फ भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता ही नहीं, बल्कि कई विश्वस्तरीय खिलाड़ियों के बीच पदक की जोरदार जंग देखने को मिलेगी। आज तय होगा किसका भाला लगाएगा सबसे लंबी उड़ान नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम के बीच मुकाबला हमेशा से खेल प्रशंसकों के लिए खास रहा है। दोनों की दोस्ती और मैदान पर कड़ी प्रतिस्पर्धा इस मुकाबले को और दिलचस्प बनाती है। नीरज की नजर कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने दूसरे स्वर्ण पदक पर होगी, जबकि अरशद अपने खिताब को बचाने उतरेंगे। वहीं भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह भी पदक की दौड़ में अपनी दावेदारी पेश करेंगे। क्वालिफिकेशन के प्रदर्शन से फाइनल का नतीजा तय नहीं होता। असली मुकाबला आज होगा, जहां एक शानदार थ्रो पूरा समीकरण बदल सकता है।