भारत ने 1932 में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा था और तब से अब तक कई कप्तान टीम की कमान संभाल चुके हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इन कप्तानों में हेमू अधिकारी, रवि शास्त्री, कृष्णमाचारी श्रीकांत और अजिंक्य रहाणे ऐसे चार नाम हैं, जिनकी कप्तानी में भारत ने एक भी टेस्ट मैच नहीं गंवाया।
हालांकि, इन चारों का कप्तानी करियर एक जैसा नहीं रहा। किसी को सिर्फ एक मैच में कप्तानी का मौका मिला, तो किसी ने कई टेस्ट मैचों में टीम का नेतृत्व किया। आइए जानते हैं इन चार अजेय कप्तानों की कहानी।
हेमू अधिकारी भारत के उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्हें टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ एक बार कप्तानी करने का मौका मिला। खास बात यह रही कि जिस मैच में उन्होंने टीम की कमान संभाली, वह उनके टेस्ट करियर का आखिरी मुकाबला भी था।
वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली में खेले गए इस टेस्ट मैच में अधिकारी ने भारतीय टीम का नेतृत्व किया। मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ और इस तरह उनकी कप्तानी में भारत को हार का सामना नहीं करना पड़ा।
उनका कप्तानी रिकॉर्ड छोटा जरूर रहा, लेकिन अजेय रहा।
कप्तानी रिकॉर्ड: 1 टेस्ट, 0 जीत, 1 ड्रॉ, 0 हार
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज रवि शास्त्री को भी टेस्ट में कप्तानी करने का मौका मिला था। 1988 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एक टेस्ट मैच में नियमित कप्तान दिलीप वेंगसरकर की चोट के कारण शास्त्री को टीम की कमान सौंपी गई।
शास्त्री ने इस मौके को यादगार बना दिया। उनकी कप्तानी में भारत ने वेस्टइंडीज को 255 रन से हराया।
यह उनके टेस्ट कप्तानी करियर का इकलौता मैच था और इसमें मिली शानदार जीत के साथ उनका रिकॉर्ड भी 100 प्रतिशत अजेय रहा।
कप्तानी रिकॉर्ड: 1 टेस्ट, 1 जीत, 0 ड्रॉ, 0 हार
1989 का पाकिस्तान दौरा भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक था। इसी दौरे पर महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने अपना टेस्ट डेब्यू किया था। चार टेस्ट मैचों की इस सीरीज में कृष्णमाचारी श्रीकांत भारतीय टीम के कप्तान थे।
सीरीज के चारों टेस्ट मैच ड्रॉ रहे। यानी श्रीकांत की कप्तानी में भारत को एक भी हार नहीं मिली।
इसके बाद उन्हें दोबारा टेस्ट टीम की कप्तानी करने का अवसर नहीं मिला। इस तरह उनका कप्तानी रिकॉर्ड भी बिना हार के ही समाप्त हुआ।
कप्तानी रिकॉर्ड: 4 टेस्ट, 0 जीत, 4 ड्रॉ, 0 हार
इन चारों नामों में अजिंक्य रहाणे का कप्तानी रिकॉर्ड सबसे प्रभावशाली रहा। 2017 से 2021 के बीच रहाणे ने छह टेस्ट मैचों में भारतीय टीम का नेतृत्व किया।
उनकी कप्तानी में भारत ने चार टेस्ट मैच जीते और दो मुकाबले ड्रॉ रहे। यानी छह मैचों में भारत को एक भी हार नहीं मिली।
रहाणे की कप्तानी का सबसे यादगार अध्याय ऑस्ट्रेलिया दौरे से जुड़ा है। विराट कोहली की गैरमौजूदगी में रहाणे ने टीम की कमान संभाली और भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में मात दी।
इस सीरीज में एडिलेड टेस्ट की निराशा के बाद रहाणे के नेतृत्व में भारतीय टीम ने शानदार वापसी की। मेलबर्न में जीत और ब्रिस्बेन में ऐतिहासिक सफलता ने उनकी कप्तानी को भारतीय क्रिकेट के यादगार अध्यायों में शामिल कर दिया।
कप्तानी रिकॉर्ड: 6 टेस्ट, 4 जीत, 2 ड्रॉ, 0 हार
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इन चार कप्तानों की कहानी यह बताती है कि कप्तानी का असर केवल मैचों की संख्या से नहीं मापा जाता। हेमू अधिकारी और रवि शास्त्री को जहां सिर्फ एक-एक टेस्ट में कप्तानी मिली, वहीं श्रीकांत ने चार मैचों में टीम की अगुआई की और सभी मुकाबले ड्रॉ रहे।
दूसरी ओर, अजिंक्य रहाणे ने छह टेस्ट में कप्तानी करते हुए चार जीत दर्ज कीं और उनके नेतृत्व में भारत को एक भी हार नहीं मिली। खास तौर पर ऑस्ट्रेलिया में मिली ऐतिहासिक सफलता ने उनके कप्तानी करियर को खास पहचान दी।
भारत के टेस्ट क्रिकेट इतिहास में कप्तानों की लंबी सूची के बीच इन चार नामों का अजेय रिकॉर्ड निश्चित रूप से एक खास उपलब्धि है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
WI vs PAK 2nd Test: वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के दूसरे टेस्ट से पहले पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। पहले मैच में शतक जड़ने वाले बल्लेबाज शान मसूद उंगली में फ्रैक्चर के कारण दूसरे टेस्ट में नहीं खेल पाएंगे। पाकिस्तान के लिए यह झटका इसलिए भी अहम है क्योंकि दो मैचों की सीरीज में वह पहला टेस्ट गंवा चुका है और अब सीरीज बचाने के लिए उसे दूसरे मुकाबले में जीत दर्ज करनी होगी। वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा और निर्णायक मुकाबला 2 अगस्त से पोर्ट ऑफ स्पेन में खेला जाएगा। पहले टेस्ट में मिली हार के बाद पाकिस्तान की टीम दबाव में है। इसी बीच टीम के इन-फॉर्म बल्लेबाज शान मसूद का बाहर होना उसकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है। पहले टेस्ट में शान मसूद ने जड़ा था शानदार शतक शान मसूद ने सीरीज के पहले टेस्ट की पहली पारी में शानदार शतक लगाया था। उनकी पारी पाकिस्तान के लिए सकारात्मक पहलुओं में शामिल रही, लेकिन मैच के दौरान उन्हें चोट लग गई। मसूद को वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज जेडन सील्स की गेंद का सामना करते समय बाएं हाथ की तर्जनी उंगली में चोट लगी। चोट के बाद भी उन्होंने मैच में बल्लेबाजी करने की कोशिश की, लेकिन उनकी परेशानी साफ दिखाई दे रही थी। दूसरी पारी में 8वें नंबर पर उतरे, सिर्फ 3 रन बना सके पहले टेस्ट की चौथी पारी में शान मसूद शुरुआत में बल्लेबाजी करने नहीं उतरे। पाकिस्तान जब 211 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सिर्फ 53 रन पर अपने छह विकेट गंवा चुका था, तब मसूद आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए। चोट के बावजूद उन्होंने टीम की मदद करने की कोशिश की, लेकिन वह ज्यादा देर टिक नहीं सके। मसूद सिर्फ 3 रन बनाकर आउट हुए। बल्लेबाजी के दौरान वह अपने बाएं हाथ पर ज्यादा दबाव नहीं डाल पा रहे थे और एक हाथ से ही शॉट खेलने की कोशिश करते नजर आए। सीरीज बचाने के लिए पाकिस्तान को चाहिए जीत पाकिस्तान पहले टेस्ट में वेस्टइंडीज से हारकर दो मैचों की सीरीज में 0-1 से पीछे है। ऐसे में दूसरा टेस्ट उसके लिए करो या मरो वाला मुकाबला बन गया है। अगर पाकिस्तान पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट जीतने में नाकाम रहता है तो वेस्टइंडीज सीरीज अपने नाम कर लेगा। इसलिए शान मसूद जैसे अनुभवी बल्लेबाज की गैरमौजूदगी पाकिस्तान की बल्लेबाजी के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। अब पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट को उनकी जगह एक ऐसे बल्लेबाज को मौका देना होगा जो शीर्ष क्रम में जिम्मेदारी संभाल सके और दबाव वाले मुकाबले में टीम को मजबूत शुरुआत दिलाए। इंग्लैंड दौरे पर भी शान मसूद की फिटनेस पर नजर वेस्टइंडीज दौरे के बाद पाकिस्तान को इंग्लैंड में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। यह सीरीज 19 अगस्त से लीड्स में शुरू होगी। शान मसूद की इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में उपलब्धता अभी तय नहीं है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अनुसार, उनके खेलने का फैसला रिकवरी और मेडिकल प्रोग्रेस पर निर्भर करेगा। हालांकि, मसूद टीम के साथ वेस्टइंडीज में रहेंगे और इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टीम का हिस्सा होंगे। मेडिकल टीम उनकी चोट और फिटनेस पर लगातार नजर रखेगी। बाबर आजम की टीम के सामने बड़ी चुनौती शान मसूद पहले पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान भी रह चुके हैं, लेकिन अब बाबर आजम को फिर से टेस्ट टीम की कमान सौंपी गई है। ऐसे समय में जब पाकिस्तान पहले टेस्ट की हार से उबरने की कोशिश कर रहा है, मसूद की चोट टीम के लिए अतिरिक्त चुनौती बन गई है। अब सभी की निगाहें 2 अगस्त से शुरू होने वाले पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट पर होंगी। पाकिस्तान के सामने साफ लक्ष्य है—सीरीज में वापसी के लिए जीत। वहीं वेस्टइंडीज की टीम इस मुकाबले को जीतकर घरेलू मैदान पर सीरीज अपने नाम करने के इरादे से उतरेगी।
ग्लासगो, एजेंसियां। भारत की स्टार डिस्कस थ्रो एथलीट सीमा कालीरामना ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा का कांस्य पदक अपने नाम किया। सीमा ने अपने तीसरे प्रयास में 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया और तीसरे स्थान पर रहते हुए भारत को एथलेटिक्स में एक और पदक दिलाया। आठ साल बाद भारत को मिला महिला डिस्कस में पदक सीमा कालीरामना का यह कांस्य पदक महिला डिस्कस थ्रो में भारत के लिए बेहद खास है। 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद पहली बार इस स्पर्धा में भारत ने पदक जीता है। इससे पहले नवजीत कौर ढिल्लों ने 2018 में कांस्य पदक हासिल किया था। जमैका और कनाडा की खिलाड़ियों ने जीते स्वर्ण और रजत इस मुकाबले में जमैका की सामंथा हॉल ने 61.66 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि कनाडा की जूलिया टंक्स ने 60.67 मीटर के साथ रजत पदक अपने नाम किया। सीमा कालीरामना का 58.65 मीटर का प्रयास उन्हें तीसरे स्थान तक ले गया। भारतीय एथलीट निधि रानी चौथे स्थान पर रहीं और पदक से मामूली अंतर से चूक गईं। संघर्ष और वापसी की प्रेरणादायक कहानी 27 वर्षीय सीमा कालीरामना हरियाणा के भिवानी की रहने वाली हैं। मातृत्व के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में शानदार वापसी की और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। वह खेल के साथ-साथ पीएचडी भी कर रही हैं।
आईपीएल इतिहास में पहली बार किसी टीम ने पार किया 300 मिलियन डॉलर का आंकड़ा नई दिल्ली, एजेंसियां। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने मैदान के बाहर एक बड़ा इतिहास रच दिया है। आईपीएल ब्रांड वैल्यूएशन स्टडी 2026 के अनुसार, RCB 300 मिलियन डॉलर (करीब 312 मिलियन डॉलर) की ब्रांड वैल्यू पार करने वाली आईपीएल की पहली फ्रेंचाइज़ी बन गई है। इस उपलब्धि के साथ RCB ने सभी अन्य टीमों को पीछे छोड़ते हुए सबसे मूल्यवान आईपीएल टीम का स्थान हासिल कर लिया है। आईपीएल का कुल कारोबार भी रिकॉर्ड स्तर पर रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का कुल बिजनेस वैल्यूएशन बढ़कर 20.6 अरब डॉलर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 11.4% अधिक है। लीग की बढ़ती लोकप्रियता, डिजिटल व्यूअरशिप, स्पॉन्सरशिप और मीडिया अधिकारों से यह वृद्धि दर्ज की गई है। खिताबी जीत का मिला बड़ा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि RCB की हालिया आईपीएल सफलता, मजबूत फैन बेस, विराट कोहली की वैश्विक लोकप्रियता और बढ़ते कमर्शियल सौदों ने फ्रेंचाइज़ी की ब्रांड वैल्यू में बड़ी छलांग लगाने में अहम भूमिका निभाई है। RCB अब केवल क्रिकेट टीम नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे मजबूत स्पोर्ट्स ब्रांड्स में शामिल होती जा रही है। ब्रांड वैल्यू में नई ऊंचाई विश्लेषकों का कहना है कि RCB की यह उपलब्धि आईपीएल के व्यावसायिक विस्तार का बड़ा संकेत है। आने वाले वर्षों में फ्रेंचाइज़ियों के बीच ब्रांड वैल्यू और वैश्विक निवेश को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।