Team India

Indian mixed disability cricket team celebrates at Lord’s balcony after defeating England in final match
लॉर्ड्स की बालकनी में फिर गूंजा 2002 का जश्न, भारतीय खिलाड़ियों ने दोहराया सौरव गांगुली का अंदाज

लंदन: क्रिकेट के ऐतिहासिक मैदान लॉर्ड्स पर भारतीय मिक्स्ड डिसएबिलिटी क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ शानदार जीत दर्ज कर यादगार पल बना दिया। सात मैचों की सीरीज भले ही इंग्लैंड ने 4-3 से अपने नाम की, लेकिन आखिरी मुकाबले में भारत की 118 रन की बड़ी जीत ने पूरे दौरे का शानदार अंत किया। जीत के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने लॉर्ड्स की बालकनी में जिस अंदाज में जश्न मनाया, उसने क्रिकेट प्रशंसकों को 2002 की ऐतिहासिक यादें ताजा करा दीं। खिलाड़ियों ने अपनी टी-शर्ट उतारकर हवा में लहराई और जमकर जीत का जश्न मनाया। यह नजारा पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली के उस ऐतिहासिक जश्न की याद दिला गया, जब उन्होंने नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल में इंग्लैंड को हराने के बाद लॉर्ड्स की बालकनी से अपनी टी-शर्ट लहराई थी। लॉर्ड्स में भारत का दबदबा आखिरी मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट पर 206 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। यह पूरे दौरे में किसी भी टीम द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा स्कोर रहा। 206 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने पूरी तरह दबाव में नजर आई। भारतीय गेंदबाजों ने इंग्लैंड की पूरी टीम को महज 88 रन पर ऑलआउट कर दिया। भारत ने मुकाबला 118 रन के बड़े अंतर से अपने नाम किया। इंग्लैंड के कप्तान कैलम फ्लिन ने भी भारत के प्रदर्शन की सराहना करते हुए माना कि लॉर्ड्स में भारतीय टीम ने शानदार क्रिकेट खेली और जीत की पूरी हकदार थी। 2002 की यादें हुईं ताजा लॉर्ड्स की बालकनी भारतीय क्रिकेट के लिए पहले से ही बेहद खास रही है। 2002 में नेटवेस्ट सीरीज के फाइनल में इंग्लैंड को हराने के बाद तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने बालकनी में अपनी टी-शर्ट उतारकर हवा में लहराई थी। उस समय गांगुली का यह जश्न भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित पलों में शामिल हो गया था। अब मिक्स्ड डिसएबिलिटी टीम के खिलाड़ियों ने उसी अंदाज में जश्न मनाकर उस ऐतिहासिक तस्वीर को फिर जीवंत कर दिया। सात मैचों में भारत ने तीन मुकाबले जीते सीरीज का पहला मुकाबला इंग्लैंड ने 29 रन से जीता था। इसके बाद भारत ने लगातार दो मैचों में 6 और 8 रन से जीत दर्ज की। चौथे और पांचवें मुकाबले में इंग्लैंड ने क्रमश: 2 और 54 रन से जीत हासिल की। छठे मैच में भी इंग्लैंड ने भारत को 18 रन से हराया। इसके बाद लॉर्ड्स में खेले गए निर्णायक मुकाबले में भारत ने 118 रन से शानदार जीत दर्ज की। इस तरह इंग्लैंड ने सीरीज 4-3 से जीत ली, लेकिन लॉर्ड्स की बड़ी जीत और भारतीय खिलाड़ियों का यादगार जश्न इस दौरे की सबसे खास तस्वीरों में शामिल हो गया।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Rishabh Pant celebrates historic WTC record after scoring 66 against Sri Lanka in Galle Test
ऋषभ पंत ने रचा इतिहास, WTC में शुभमन गिल को पछाड़ बने भारत के नंबर-1 बल्लेबाज

श्रीलंका के खिलाफ गाले टेस्ट में ऋषभ पंत ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से एक साथ कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। दूसरी पारी में 69 गेंदों पर 66 रन की तेजतर्रार पारी खेलने वाले पंत वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने शुभमन गिल को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की। पंत की यह पारी सिर्फ WTC के आंकड़ों के लिहाज से खास नहीं रही। उन्होंने इसी पारी के दौरान टेस्ट क्रिकेट में अपने 100 छक्के भी पूरे किए और ऐसा करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन गए। वह टेस्ट इतिहास में इस मुकाम तक पहुंचने वाले केवल चौथे बल्लेबाज हैं। WTC में गिल को पछाड़कर नंबर-1 गाले टेस्ट की दूसरी पारी में 66 रन बनाने के बाद पंत के WTC करियर के रन 2885 तक पहुंच गए। इसके साथ ही उन्होंने शुभमन गिल के 2867 रन के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया। भारत के लिए WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में अब पंत शीर्ष पर हैं। गिल दूसरे स्थान पर हैं, जबकि रोहित शर्मा, रवींद्र जडेजा, विराट कोहली और यशस्वी जायसवाल भी इस सूची में शामिल हैं। पंत और गिल के बीच अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसे में WTC में भारत की ओर से सबसे पहले 3000 रन पूरे करने की दौड़ भी दिलचस्प हो गई है। टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय गाले में पंत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के पूरे करना भी रही। वह इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं। पंत ने यह रिकॉर्ड केवल 51वें टेस्ट में बनाया और दुनिया में सबसे तेजी से 100 टेस्ट छक्के पूरे करने वाले बल्लेबाज भी बने। उनसे पहले बेन स्टोक्स, ब्रेंडन मैकुलम और एडम गिलक्रिस्ट यह उपलब्धि हासिल कर चुके थे। टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्कों के मामले में बेन स्टोक्स 138 छक्कों के साथ शीर्ष पर हैं। ब्रेंडन मैकुलम 107 छक्कों के साथ दूसरे और पंत 100 छक्कों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। गाले में दोनों पारियों में बनाए 105 रन श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में पंत ने 39 रन बनाए थे। इसके बाद दूसरी पारी में उन्होंने 69 गेंदों पर 66 रन की तेज पारी खेली। इस तरह गाले टेस्ट में पंत ने दोनों पारियों को मिलाकर कुल 105 रन बनाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत को दूसरी पारी में तेजी से रन बनाने और श्रीलंका के सामने बड़ा लक्ष्य रखने में मदद की। पंत की खासियत यही रही है कि वह टेस्ट क्रिकेट में भी जरूरत के मुताबिक आक्रामक बल्लेबाजी कर सकते हैं। 100 टेस्ट छक्कों का आंकड़ा इस शैली की सबसे बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है। पंत के रिकॉर्ड ने बढ़ाई गिल से मुकाबले की दिलचस्पी शुभमन गिल और ऋषभ पंत दोनों ही भारतीय टेस्ट क्रिकेट के अहम बल्लेबाज हैं। WTC में रन बनाने के मामले में दोनों के बीच लगातार प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। पंत के नंबर-1 बनने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों में से कौन सबसे पहले 3000 WTC रन पूरे करता है। गाले टेस्ट की इस उपलब्धि ने पंत के नाम एक साथ दो ऐतिहासिक रिकॉर्ड जोड़ दिए हैं। उनका प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि टेस्ट क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी अब मैच की दिशा बदलने का बड़ा हथियार बन चुकी है।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
संदीप पाटिल के क्रिकेट करियर और उपलब्धियों की तस्वीर
Sandeep Patil Birthday: स्टाइलिश बल्लेबाज से अभिनेता और कोच तक, ऐसा रहा संदीप पाटिल का सफर

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में संदीप पाटिल का नाम खास तौर पर लिया जाता है, जिन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और अलग अंदाज से पहचान बनाई। 1983 विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रहे पाटिल ने क्रिकेट के बाद अभिनय में भी किस्मत आजमाई और फिर कोचिंग व चयनकर्ता के रूप में क्रिकेट से जुड़े रहे। 18 अगस्त 1956 को बॉम्बे में जन्मे संदीप पाटिल आज अपना 70वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके पिता मधुसूदन पाटिल भी मुंबई के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके थे। क्रिकेट की विरासत को आगे बढ़ाते हुए संदीप पाटिल ने भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर में अपनी मजबूत जगह बनाई।   पाकिस्तान के खिलाफ किया अंतरराष्ट्रीय डेब्यू   संदीप पाटिल ने 15 जनवरी 1980 को पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया। इसी साल 6 दिसंबर को उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे क्रिकेट में कदम रखा। भारत के लिए पाटिल ने 29 टेस्ट मैचों में 36.93 की औसत से 1,588 रन बनाए। उनके नाम चार टेस्ट शतक भी हैं। वहीं 45 वनडे मैचों में उन्होंने 1,005 रन बनाए, जिसमें नौ अर्धशतक शामिल हैं। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा और उन्होंने 130 मैचों में 8,156 रन बनाए।   बॉब विलिस के एक ओवर में बरसाए चौके   संदीप पाटिल की सबसे यादगार पारियों में 1982 का मैनचेस्टर टेस्ट शामिल है। इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने नाबाद 129 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज बॉब विलिस के एक ओवर में लगातार छह चौके लगाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने इस पारी को भारतीय क्रिकेट के यादगार किस्सों में शामिल कर दिया।   1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा   संदीप पाटिल 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 32 रन की अहम पारी खेली थी। भारत ने यह मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बनाई और फिर वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार वनडे विश्व कप अपने नाम किया।   क्रिकेट के बाद फिल्मों में आजमाई किस्मत   क्रिकेट से संन्यास के बाद संदीप पाटिल ने अभिनय की दुनिया में भी कदम रखा। साल 1985 में उनकी फिल्म 'कभी अजनबी थे' रिलीज हुई। इसमें उनके साथ पूनम ढिल्लों और देबश्री रॉय नजर आई थीं। हालांकि, यह उनका एकमात्र फिल्म प्रोजेक्ट रहा और इसके बाद उन्होंने एक्टिंग से दूरी बना ली।   कोचिंग में भी हासिल की सफलता   पाटिल ने क्रिकेट से अपना रिश्ता खत्म नहीं किया और कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली। नवंबर 1996 में उन्हें केन्या की राष्ट्रीय टीम का कोच बनाया गया। उनके मार्गदर्शन में केन्या ने 2003 वनडे विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया और सेमीफाइनल तक पहुंची। सेमीफाइनल में केन्या को भारत के हाथों 91 रन से हार मिली। इसके बाद पाटिल ओमान क्रिकेट टीम और भारत-ए के साथ भी कोच के तौर पर जुड़े।   चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे   संदीप पाटिल ने क्रिकेट प्रशासन में भी अहम भूमिका निभाई। दिसंबर 2012 से सितंबर 2016 तक वह बीसीसीआई की सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में भारतीय टीम ने 2013 चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता। इस तरह संदीप पाटिल का करियर सिर्फ एक क्रिकेटर तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने खिलाड़ी, विश्व कप विजेता, अभिनेता, कोच और चयनकर्ता के रूप में क्रिकेट के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
Manav Suthar takes four wickets for India against Sri Lanka in the Galle Test
SL vs IND: मानव सुथार ने गाले में मचाया कहर, जडेजा-कुलदीप से भी ज्यादा टर्न; शानदार प्रदर्शन का दिया COE को क्रेडिट

SL vs IND 1st Test: गॉल टेस्ट में भारतीय टीम के युवा बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार ने अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया। श्रीलंका की पहली पारी में सुथार ने 76 रन देकर 4 विकेट हासिल किए और भारत की ओर से सबसे सफल गेंदबाज रहे। भारत ने श्रीलंका को 284 रन पर समेटकर पहली पारी में 178 रन की बढ़त हासिल की। सुथार का प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि गाले की पिच पर उनकी गेंदों को रविंद्र जडेजा और कुलदीप यादव से अधिक टर्न मिली। उपलब्ध गेंद-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, सुथार की 74 प्रतिशत गेंदों ने 4.5 डिग्री से ज्यादा टर्न हासिल की, जबकि जडेजा के लिए यह आंकड़ा 58 प्रतिशत और कुलदीप यादव के लिए 50 प्रतिशत रहा। पहली गेंद पर विकेट लेकर किया शानदार आगाज मानव सुथार ने अपनी पहली ही गेंद पर अनुभवी बल्लेबाज दिनेश चांदीमल को आउट करके भारत को शुरुआती सफलता दिलाई। इसके बाद उन्होंने लगातार दबाव बनाए रखा और श्रीलंका की पारी में चार महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। हालांकि श्रीलंका ने एक समय 100 रन के भीतर पांच विकेट गंवा दिए थे, लेकिन सोनल दिनुशा और निरोशन डिकवेला ने छठे विकेट के लिए 146 रन की साझेदारी कर भारतीय गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। अंततः भारतीय स्पिनरों ने श्रीलंका को 284 रन पर रोक दिया। COE की ट्रेनिंग को दिया सफलता का श्रेय मैच के बाद मानव सुथार ने अपनी तैयारी का श्रेय बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) को दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने सीरीज से पहले वहां करीब 10 दिन कूकाबुरा गेंद से अभ्यास किया था और ऐसी परिस्थितियों में ट्रेनिंग की, जो गाले की परिस्थितियों से काफी हद तक मेल खाती थीं। सुथार ने बताया कि अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट के बाद उन्होंने कूकाबुरा गेंद से अभ्यास जारी रखा। उनका फोकस सही लेंथ, सही लाइन और नियंत्रित गति से गेंदबाजी करने पर था। गाले की पिच पर मिलने वाले उछाल को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्टंप-टू-स्टंप गेंदबाजी को अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया। जडेजा से सीखना चाहते हैं बहुत कुछ युवा स्पिनर ने अनुभवी रविंद्र जडेजा की भी जमकर तारीफ की। सुथार के मुताबिक, जडेजा की सबसे बड़ी ताकत लगातार एक ही जगह पर गेंद डालना और बल्लेबाज पर दबाव बनाए रखना है। सुथार का कहना है कि वह जडेजा से यह सीखना चाहते हैं कि बल्लेबाज चाहे कितने भी तरीके अपनाए, गेंदबाज किस तरह लगातार स्टंप पर गेंद डालते हुए उसे गलती करने के लिए मजबूर कर सकता है। दिलचस्प बात यह है कि जडेजा ने भी सुथार की गेंदबाजी की तारीफ की और चांदीमल को पहली गेंद पर आउट करने वाली डिलीवरी को बाएं हाथ के स्पिनर के लिए बेहद खास गेंद बताया। क्या टीम इंडिया को मिला नया स्पिन विकल्प? गाले में सुथार के प्रदर्शन ने भारतीय क्रिकेट में एक दिलचस्प बहस को जन्म दिया है। जडेजा जैसे अनुभवी स्पिनर के साथ खेलते हुए युवा सुथार का प्रभावशाली प्रदर्शन बताता है कि भारत के पास बाएं हाथ की स्पिन में एक और मजबूत विकल्प तैयार हो रहा है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सुथार लंबे समय में जडेजा की जगह लेंगे। लेकिन लगातार अच्छे प्रदर्शन के साथ वह भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह जरूर मजबूत कर सकते हैं। पूर्व भारतीय बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने भी सुथार की क्षमता को लेकर उन्हें जडेजा के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा है।  

surbhi अगस्त 18, 2026 0
India and Pakistan placed on opposite sides of Asian Games 2026 cricket draw, allowing clash only in medal round
IND vs PAK: एशियन गेम्स में मेडल मैच में ही हो सकती है भारत-पाकिस्तान की टक्कर, शुरुआती दौर में आमना-सामना नहीं

नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट प्रशंसकों को एक बार फिर दोनों टीमों के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबले का इंतजार रहेगा। हालांकि इस बार टूर्नामेंट के ड्रॉ ने साफ कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान की टीमें शुरुआती चरण में एक-दूसरे के सामने नहीं होंगी। दोनों का मुकाबला तभी संभव है, जब वे मेडल राउंड तक पहुंचें। जापान के नागोया में सितंबर-अक्टूबर के दौरान होने वाले एशियन गेम्स में पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका को सीधे क्वार्टरफाइनल में प्रवेश मिला है। दूसरी ओर अफगानिस्तान समेत छह अन्य टीमों को पहले ग्रुप चरण में मुकाबले खेलने होंगे। यहां से प्रदर्शन के आधार पर चार टीमें क्वार्टरफाइनल में जगह बनाएंगी। भारत और पाकिस्तान के क्वार्टरफाइनल भी अलग-अलग ड्रॉ के मुताबिक भारत को क्वार्टरफाइनल-2, जबकि पाकिस्तान को क्वार्टरफाइनल-1 में रखा गया है। दोनों टीमों के क्वार्टरफाइनल मुकाबले 28 सितंबर को निर्धारित हैं। भारत और पाकिस्तान की राह इस तरह रखी गई है कि दोनों सेमीफाइनल में भी एक-दूसरे के सामने नहीं आ सकते। क्वार्टरफाइनल-1 की विजेता टीम का सामना सेमीफाइनल में क्वार्टरफाइनल-4 की विजेता से होगा। वहीं दूसरे सेमीफाइनल में क्वार्टरफाइनल-2 और क्वार्टरफाइनल-3 की विजेता टीमें आमने-सामने होंगी। इसका मतलब है कि अगर भारत और पाकिस्तान अपने-अपने क्वार्टरफाइनल और फिर सेमीफाइनल मुकाबले जीतते हैं, तभी दोनों की भिड़ंत गोल्ड मेडल के फाइनल में होगी। सेमीफाइनल में हार मिली तो ब्रॉन्ज मेडल मैच में भिड़ंत भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबले की दूसरी संभावना ब्रॉन्ज मेडल मैच है। अगर दोनों टीमें अपने-अपने क्वार्टरफाइनल जीतती हैं, लेकिन सेमीफाइनल में हार जाती हैं, तो तीसरे स्थान के मुकाबले में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने हो सकते हैं। यानी टूर्नामेंट के नॉकआउट प्रारूप में भारत-पाकिस्तान मुकाबले के लिए दो ही रास्ते हैं—गोल्ड मेडल फाइनल या ब्रॉन्ज मेडल मैच। हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। यदि दोनों में से केवल एक टीम फाइनल तक पहुंचती है और दूसरी सेमीफाइनल में हारकर किसी अलग टीम से ब्रॉन्ज मेडल मुकाबला खेलती है, तो एशियन गेम्स में भारत-पाकिस्तान का मुकाबला देखने को नहीं मिलेगा। 2022 में भी नहीं हुआ था भारत-पाकिस्तान मुकाबला यह स्थिति एशियन गेम्स 2022 में भी देखने को मिली थी। उस प्रतियोगिता में भारत फाइनल तक पहुंच गया था, जबकि पाकिस्तान को सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद ब्रॉन्ज मेडल मैच में पाकिस्तान को बांग्लादेश से भी हार मिली। इस तरह टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान की टीमें एक-दूसरे के खिलाफ नहीं खेल सकी थीं। एशियन गेम्स 2026 में भी कुछ ऐसा ही होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। क्रिकेट प्रशंसकों को भारत-पाकिस्तान मुकाबले के लिए दोनों टीमों के लगातार जीतते हुए मेडल राउंड तक पहुंचने की उम्मीद करनी होगी। क्वालिफाइंग राउंड में छह टीमें क्वालिफाइंग राउंड में छह टीमों को दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप ए में अफगानिस्तान, जापान और नेपाल हैं, जबकि ग्रुप बी में हांगकांग, मलेशिया और ओमान को रखा गया है। दोनों ग्रुप की टीमें आपस में एक-एक मुकाबला खेलेंगी। प्रत्येक ग्रुप की शीर्ष दो टीमें नॉकआउट चरण यानी क्वार्टरफाइनल में पहुंचेंगी। भारत और पाकिस्तान को सीधे क्वार्टरफाइनल में प्रवेश मिलने से दोनों टीमों के प्रशंसकों की नजर अब नॉकआउट मुकाबलों पर होगी। भारत-पाकिस्तान मुकाबला क्रिकेट में हमेशा से दर्शकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहा है, लेकिन इस बार एशियन गेम्स में यह टक्कर तभी देखने को मिलेगी, जब दोनों टीमें मेडल जीतने की दौड़ में अंतिम चरण तक बनी रहेंगी।  

surbhi अगस्त 13, 2026 0
India and Afghanistan will play a three-match T20I series in Delhi, with young batter Vaibhav Suryavanshi attracting attention.
भारत-अफगानिस्तान टी20 सीरीज में एक्शन में दिख सकते हैं वैभव सूर्यवंशी, 13 सितंबर से शुरू होगा मुकाबला

नई दिल्ली: श्रीलंका के बाद भारतीय क्रिकेट टीम का अगला बड़ा मुकाबला अफगानिस्तान के खिलाफ होने जा रहा है। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सितंबर में भारत के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज की तारीखों का ऐलान किया है। खास बात यह है कि पूरी सीरीज नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेली जाएगी। क्रिकेट प्रशंसकों की नजर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर भी रहेगी। हालांकि उनकी टीम में जगह और प्लेइंग इलेवन में चयन की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन युवा खिलाड़ी के प्रदर्शन को देखते हुए इस सीरीज में उनके संभावित एक्शन को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। 13, 15 और 17 सितंबर को होंगे मुकाबले अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अनुसार भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन टी20 मैच खेले जाएंगे। तारीख मुकाबला स्थान 13 सितंबर 2026 पहला टी20 अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली 15 सितंबर 2026 दूसरा टी20 अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली 17 सितंबर 2026 तीसरा टी20 अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली यानी क्रिकेट फैंस के लिए सितंबर में लगातार तीन बड़े मुकाबले देखने को मिलेंगे। भारत में ही अफगानिस्तान करेगा ‘होम’ सीरीज की मेजबानी इस सीरीज की सबसे खास बात इसका आयोजन है। अफगानिस्तान भारत की जमीन पर ही भारत के खिलाफ अपनी ‘होम’ सीरीज की मेजबानी करेगा। अफगानिस्तान पहले भी भारत को अपने घरेलू मुकाबलों के लिए वैकल्पिक होम वेन्यू के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। लखनऊ, देहरादून और ग्रेटर नोएडा में अफगानिस्तान ने अन्य टीमों के खिलाफ मुकाबले खेले हैं। लेकिन भारत के खिलाफ भारतीय जमीन पर द्विपक्षीय सीरीज की मेजबानी करना उसके लिए नया अनुभव होगा। वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी निगाहें युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में आगामी टी20 सीरीज में उनके संभावित चयन को लेकर फैंस के बीच खास उत्साह है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें भारतीय टीम की अंतिम सूची में जगह मिलेगी या वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनेंगे। इसलिए फिलहाल उनकी भागीदारी को संभावित माना जाना चाहिए, आधिकारिक नहीं। बांग्लादेश दौरे पर भी पड़ा असर अफगानिस्तान के खिलाफ सितंबर में होने वाली सीरीज का असर भारत के प्रस्तावित बांग्लादेश दौरे पर भी पड़ सकता है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 1 से 13 सितंबर के बीच भारत के खिलाफ वनडे और टी20 मैचों की योजना बनाई थी। अब अफगानिस्तान सीरीज की तारीखें सामने आने के बाद दोनों कार्यक्रमों में टकराव की स्थिति बन रही है। ऐसे में भारतीय टीम के बांग्लादेश दौरे की संभावना कमजोर मानी जा रही है। क्रिकेट फैंस के लिए सितंबर होगा खास भारत-अफगानिस्तान सीरीज टी20 क्रिकेट के लिहाज से खास रहने वाली है। एक तरफ भारतीय टीम अपनी युवा प्रतिभाओं को आजमाने की कोशिश कर सकती है, वहीं अफगानिस्तान की टीम राशिद खान समेत अपने टी20 विशेषज्ञ खिलाड़ियों के साथ कड़ी चुनौती पेश कर सकती है। दिल्ली में होने वाले तीनों मुकाबले क्रिकेट प्रशंसकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहने की उम्मीद है।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
Shikhar Dhawan
शिखर धवन थे टीम इंडिया के सबसे मजेदार खिलाड़ी, शमी ने सुनाया ड्रेसिंग रूम का मजेदार किस्सा

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने टीम इंडिया के अपने पूर्व साथी शिखर धवन को ड्रेसिंग रूम के सबसे मजेदार खिलाड़ियों में से एक बताया है। शमी ने धवन से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा करते हुए बताया कि वह हार के बाद भी टीम का माहौल खुशनुमा बनाए रखते थे।   हार के बाद भी धवन नहीं होने देते थे मायूस   मोहम्मद शमी के मुताबिक, मैच हारने के बाद जब ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ी मायूस होकर बैठे होते थे, तब शिखर धवन माहौल को हल्का करने की कोशिश करते थे। वह अचानक जोर-जोर से हंसने लगते थे और अपनी मस्ती से बाकी खिलाड़ियों को भी हंसने पर मजबूर कर देते थे।   शमी ने बताया कि धवन कभी-कभी टेबल पर खड़े होकर पंजाबी गानों पर डांस भी करने लगते थे। उनके मुताबिक, धवन की ऐसी हरकतों से खिलाड़ियों का तनाव कम होता था और ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक माहौल बना रहता था।   जीत-हार खेल का हिस्सा: शमी   शमी ने कहा कि क्रिकेट में जीत और हार दोनों होती हैं। खिलाड़ी पूरे साल लगातार मुकाबले खेलते हैं, ऐसे में हर हार के बाद ड्रेसिंग रूम में ज्यादा निराशा का माहौल रखना सही नहीं है। धवन अपनी मस्ती और हंसी-मजाक से टीम के माहौल को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते थे।   टीम इंडिया में पहली बार पहुंचे तो घबरा गए थे शमी   शमी ने अपने शुरुआती दिनों का भी एक मजेदार किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब वह पहली बार भारतीय टीम में शामिल हुए तो ड्रेसिंग रूम में मौजूद बड़े खिलाड़ियों को देखकर काफी नर्वस हो गए थे।   मैच से एक दिन पहले टीम मीटिंग के दौरान शमी ने जब कमरे में मौजूद खिलाड़ियों को देखा तो उन्हें लगभग सभी ऐसे खिलाड़ी लगे, जिनके नाम वह पहले सुन चुके थे और जिन्हें वह बड़े स्टार के तौर पर देखते थे। वह चुपचाप जाकर बैठ गए।   युवराज सिंह ने शमी को दिया था भाषण का मौका   शमी ने बताया कि उस समय युवराज सिंह ने उन्हें कुर्सी पर खड़ा होकर भाषण देने के लिए कहा। लेकिन बड़े खिलाड़ियों के सामने वह इतने घबरा गए कि उन्हें कुछ समझ नहीं आया।   शमी के मुताबिक, वह सिर्फ अपना नाम और अपने शहर के बारे में बता पाए। इसके बाद उन्हें कुछ और याद नहीं रहा। शमी और धवन ने लंबे समय तक भारतीय टीम के लिए साथ क्रिकेट खेला और दोनों की मैदान के बाहर दोस्ती भी काफी चर्चित रही।

anjali kumari अगस्त 10, 2026 0
Rishabh Pant seeks Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami's help to buy land and build his first home
ऋषभ पंत ने आधी रात उत्तराखंड CM से मांगी मदद, बोले- 3 साल से जमीन तलाश रहा हूं, अपने पहाड़ में बनाना चाहता हूं पहला घर

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने अपने गृह राज्य उत्तराखंड में बसने की इच्छा जताई है। श्रीलंका दौरे पर मौजूद पंत ने देर रात सोशल मीडिया के जरिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद की अपील की। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से अपना बेस उत्तराखंड शिफ्ट करना चाहते हैं और वहां अपना पहला घर बनाना चाहते हैं, लेकिन पिछले करीब तीन वर्षों से जमीन तलाशने के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली है। पंत ने मुख्यमंत्री को टैग करते हुए अपनी परेशानी साझा की और कहा कि उन्हें रहने के लिए बड़ी और सुविधाजनक जगह की तलाश है। उन्होंने उत्तराखंड के प्रति अपने लगाव का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने पहाड़ी लोगों के बीच वापस लौटना चाहते हैं और राज्य के विकास में योगदान देना चाहते हैं। पंत ने CM धामी से क्या कहा? ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जमीन खरीदने की प्रक्रिया में मदद करने की अपील की। उन्होंने बताया कि वह काफी समय से उत्तराखंड में जमीन खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उचित जगह और स्पष्ट प्रक्रिया के अभाव में उन्हें परेशानी हो रही है। पंत ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह उत्तराखंड से बहुत प्यार करते हैं और दिल्ली से अपना बेस अपने गृह राज्य में स्थानांतरित करना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में मार्गदर्शन और सहायता देने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि वह अपने राज्य में वापस लौटकर अपने पहाड़ी लोगों के बीच रहना चाहते हैं और उत्तराखंड के विकास में भी अपना योगदान देना चाहते हैं। 'सरकार से मुफ्त जमीन नहीं चाहिए' ऋषभ पंत ने अपनी अगली पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि वह सरकार से किसी तरह की मुफ्त जमीन या विशेष उपहार नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार अनुमति देती है तो वह सरकारी तय दरों के अनुसार जमीन खरीदना चाहते हैं। पंत ने लिखा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी तरह का उपहार मिलना निश्चित रूप से उनके लिए खुशी की बात होगी, लेकिन उनकी इच्छा है कि वह सरकार की निर्धारित दरों पर जमीन खरीदें और वहां अपना पहला घर बना सकें। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है और इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से इसमें मदद करने का अनुरोध किया है। उत्तराखंड से पंत का पुराना जुड़ाव ऋषभ पंत का जन्म हरिद्वार जिले के रुड़की में हुआ था और उनका उत्तराखंड से गहरा जुड़ाव रहा है। क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने के बाद भी वह अपने गृह राज्य से जुड़े मुद्दों और लोगों के प्रति अपना लगाव जाहिर करते रहे हैं। अब उत्तराखंड में अपना घर बनाने की उनकी इच्छा ने उनके प्रशंसकों के बीच भी चर्चा पैदा कर दी है। पंत का कहना है कि वह अपने राज्य में रहकर वहां के लोगों और विकास से जुड़ना चाहते हैं। श्रीलंका दौरे पर हैं पंत पंत इस समय भारतीय टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर हैं। टीम को 15 अगस्त से दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। इससे पहले भारतीय टीम अभ्यास मुकाबला खेल रही है। अभ्यास मैच के दौरान पंत ने शुरुआत में विकेटकीपिंग की, लेकिन श्रीलंका की गर्म और उमस भरी परिस्थितियों में खिलाड़ियों के वर्कलोड को मैनेज करने के लिए बाद में ध्रुव जुरेल ने विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाली। क्रिकेट के मैदान से दूर पंत की जमीन और घर से जुड़ी अपील अब चर्चा का विषय बन गई है। देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस अनुरोध पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
India Test captain Shubman Gill suffers a finger injury before the Sri Lanka Test series as KL Rahul leads the warm-up match.
IND vs SL: प्रैक्टिस मैच से पहले टीम इंडिया को झटका, चोटिल हुए शुभमन गिल; KL राहुल संभालेंगे कप्तानी

कोलंबो: भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। भारतीय टेस्ट कप्तान शुभमन गिल दाईं हाथ की रिंग फिंगर में चोट लगने के कारण श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के खिलाफ तीन दिवसीय वॉर्म-अप मैच के पहले दिन नहीं खेल पाए। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आधिकारिक मेडिकल अपडेट जारी कर इसकी पुष्टि की है। अभ्यास सत्र में लगी चोट बीसीसीआई के अनुसार, गुरुवार को कोलंबो में आयोजित अभ्यास सत्र के दौरान शुभमन गिल की दाईं रिंग फिंगर में चोट लगी। इसके बाद मेडिकल टीम ने उनका परीक्षण किया और एहतियात के तौर पर उन्हें वॉर्म-अप मैच के पहले दिन आराम देने का फैसला लिया गया। बोर्ड ने बताया कि मेडिकल स्टाफ लगातार उनकी फिटनेस और रिकवरी पर नजर बनाए हुए है। वॉर्म-अप मैच में KL राहुल बने कप्तान शुभमन गिल की अनुपस्थिति में अनुभवी बल्लेबाज केएल राहुल को अभ्यास मैच के लिए भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई है। राहुल इस मुकाबले में टीम की रणनीति और मैदान पर नेतृत्व की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह वॉर्म-अप मैच खिलाड़ियों को श्रीलंका की स्पिन-अनुकूल परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से खेला जा रहा है। टेस्ट सीरीज से पहले बढ़ी चिंता हालांकि बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि गिल को आराम देना केवल एहतियाती कदम है, लेकिन टेस्ट सीरीज से ठीक पहले कप्तान का चोटिल होना टीम इंडिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। भारतीय टीम मैनेजमेंट उम्मीद कर रहा है कि गिल जल्द पूरी तरह फिट होकर 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में उपलब्ध रहेंगे। शानदार फॉर्म में चल रहे हैं शुभमन गिल शुभमन गिल इस समय अपने करियर की बेहतरीन टेस्ट फॉर्म में हैं। पिछले 10 टेस्ट मैचों में उन्होंने 1109 रन बनाए हैं, जिसमें 6 शानदार शतक शामिल हैं। ऐसे में उनका फिट रहना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गॉल में खेला जाने वाला पहला मुकाबला श्रीलंका के टेस्ट इतिहास का 600वां टेस्ट मैच भी होगा, जिससे इस सीरीज का महत्व और बढ़ गया है। अब सभी की नजर बीसीसीआई की अगली मेडिकल अपडेट पर रहेगी। यदि गिल समय पर फिट हो जाते हैं तो टीम इंडिया को बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन अगर चोट गंभीर साबित होती है तो सीरीज से पहले चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।  

surbhi अगस्त 7, 2026 0
Ajinkya Rahane shares advice for young batter Vaibhav Suryavanshi, urging patience before expecting success in international cricket.
अजिंक्य रहाणे की वैभव सूर्यवंशी को सलाह: IPL और इंटरनेशनल क्रिकेट में बड़ा अंतर, जल्दबाजी से बचें

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी को लेकर पूर्व भारतीय कप्तान अजिंक्य रहाणे ने अहम सलाह दी है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले रहाणे का मानना है कि 15 वर्षीय बल्लेबाज पर अभी से बड़ी उम्मीदों का बोझ डालना सही नहीं होगा, क्योंकि IPL और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का स्तर और दबाव पूरी तरह अलग होता है। 'इंटरनेशनल क्रिकेट का दबाव अलग होता है' एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान अजिंक्य रहाणे ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी को समय दिया जाना चाहिए ताकि वह अपने खेल को स्वाभाविक रूप से विकसित कर सकें। उन्होंने कहा कि लोग पहले से ही युवा खिलाड़ी से बड़ी उम्मीदें लगा रहे हैं, लेकिन यह उसके विकास के लिए सही नहीं है। रहाणे ने कहा, "वैभव ने अभी केवल दो IPL सीजन खेले हैं। IPL और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जमीन-आसमान का अंतर होता है। देश के लिए खेलते समय दबाव कहीं ज्यादा होता है। IPL में कुछ ओवरों में तेजी से रन बनाना अलग बात है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वही प्रदर्शन दोहराना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिए उसे बिना अतिरिक्त दबाव के अपना खेल खेलने देना चाहिए।" इंग्लैंड में संघर्ष, जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार वापसी वैभव सूर्यवंशी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत इंग्लैंड के खिलाफ की थी, जहां शुरुआती तीन पारियों में उन्होंने 14, 13 और 15 रन बनाए। हालांकि इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 50, 20 और 81 रन की पारियां खेलीं और अपनी प्रतिभा का दम दिखाया। मोहम्मद कैफ ने टीम मैनेजमेंट पर उठाए सवाल वहीं, पूर्व भारतीय बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने टीम मैनेजमेंट के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि वैभव सूर्यवंशी को इंग्लैंड दौरे से पहले आयरलैंड के खिलाफ ही अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का मौका मिल जाना चाहिए था। कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि IPL 2026 में ऑरेंज कैप जीतने वाले बल्लेबाज को शुरुआती मौके देने से उसका आत्मविश्वास और बढ़ता। उनके अनुसार, आयरलैंड दौरे पर खेलने से वैभव की झिझक खत्म हो जाती और इंग्लैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में वह ज्यादा सहज महसूस करते। 'स्पेशल खिलाड़ी को स्पेशल मौका मिलना चाहिए' मोहम्मद कैफ ने कहा कि वैभव केवल कुछ अच्छी पारियों के कारण चर्चा में नहीं आए, बल्कि पूरे IPL सीजन में लगातार शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीती। ऐसे खिलाड़ी को टीम में सिर्फ रिजर्व रखकर पानी पिलाने के बजाय मैदान पर मौका मिलना चाहिए था। उनका मानना है कि सही समय पर अवसर मिलने से युवा खिलाड़ी का आत्मविश्वास और प्रदर्शन दोनों बेहतर हो सकते हैं।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
Ajit Agarkar and VVS Laxman amid speculation over India’s chief selector role and 2027 World Cup plans
रोहित-विराट के भविष्य पर फैसले के बीच अजीत अगरकर की कुर्सी पर भी संकट? वीवीएस लक्ष्मण बन सकते हैं अगले चीफ सिलेक्टर

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में इस समय खिलाड़ियों के भविष्य से लेकर चयन समिति की भूमिका तक कई बड़े सवाल चर्चा में हैं। इसी बीच मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के भविष्य को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। पहले माना जा रहा था कि अगरकर का कार्यकाल 2027 वनडे विश्व कप तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के भीतर उनके कार्यकाल को लेकर नए सिरे से विचार किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड के सामने दो विकल्पों पर चर्चा हो रही है। पहला, अगरकर को करीब एक साल का विस्तार दिया जाए और उन्हें 2027 वनडे विश्व कप तक चयन समिति की कमान संभालने का मौका मिले। दूसरा विकल्प वीवीएस लक्ष्मण का नाम है, जिन्हें अगरकर की जगह मुख्य चयनकर्ता की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में अगरकर की विदाई तय मानना जल्दबाजी होगी। वीवीएस लक्ष्मण के नाम पर क्यों हो रहा विचार? वीवीएस लक्ष्मण भारतीय क्रिकेट के अनुभवी चेहरों में शामिल हैं। वह राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी से जुड़े रहे हैं और भारतीय टीम के कोचिंग सेटअप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं। खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन के साथ उनका लंबा अनुभव उन्हें इस भूमिका के लिए मजबूत दावेदार बना सकता है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बोर्ड के कुछ पदाधिकारी लक्ष्मण के अनुभव और खिलाड़ियों के बीच उनकी स्वीकार्यता को सकारात्मक पहलू मानते हैं। खासतौर पर वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ उनके संबंधों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि चयन समिति की भूमिका में बदलाव की स्थिति बनती है तो लक्ष्मण का नाम चर्चा में आ सकता है। हालांकि, यह अभी संभावित विकल्प है, आधिकारिक नियुक्ति नहीं। अगरकर को भी मिल सकता है विस्तार दूसरी तरफ अजीत अगरकर के लिए रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। बोर्ड का एक वर्ग 2027 वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए उन्हें आगे भी मुख्य चयनकर्ता बनाए रखने के पक्ष में बताया जा रहा है। भारतीय क्रिकेट के लिए 2027 वनडे विश्व कप महत्वपूर्ण लक्ष्य है। ऐसे में चयन समिति में निरंतरता बनाए रखना भी बोर्ड के लिए एक अहम पहलू हो सकता है। श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज का प्रदर्शन भी इस पूरे समीकरण में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर भारतीय टीम अच्छा प्रदर्शन करती है, तो अगरकर के कार्यकाल को आगे बढ़ाने की संभावना मजबूत हो सकती है। रोहित शर्मा के भविष्य ने बढ़ाई थी हलचल अगरकर की भूमिका पर चर्चा ऐसे समय हो रही है जब भारतीय क्रिकेट में वरिष्ठ खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर पहले से ही बहस चल रही है। इंग्लैंड दौरे के दौरान रोहित शर्मा के वनडे करियर को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। दूसरे वनडे से पहले ऐसी चर्चाएं सामने आईं कि लॉर्ड्स में होने वाला मुकाबला रोहित का आखिरी मैच हो सकता है। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके भविष्य को लेकर बहस और तेज हो गई। मामले को स्पष्ट करते हुए बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा था कि जब तक रोहित टीम की योजनाओं का हिस्सा हैं, तब तक वह भारतीय टीम के नियमित सदस्य बने रहेंगे। इसके बाद रोहित ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 138 रन की पारी खेली। हालांकि, उनकी इस बेहतरीन पारी के बावजूद भारत मुकाबला जीतने में सफल नहीं रहा। 2027 विश्व कप को लेकर चयन समिति में मतभेद? रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर चयन समिति के भीतर भी अलग-अलग विचार होने की बात सामने आई है। एक पक्ष का मानना है कि 2027 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए अभी से नई पीढ़ी की टीम तैयार करने की जरूरत है। वहीं दूसरी तरफ बोर्ड के कुछ अधिकारी वरिष्ठ खिलाड़ियों के अनुभव और टीम में उनकी भूमिका को भी महत्व दे रहे हैं। इसके अलावा सार्वजनिक प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर बनने वाली धारणा भी इस पूरे मामले का एक पहलू बन चुकी है। ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने चुनौती सिर्फ टीम चुनने की नहीं, बल्कि अनुभव और भविष्य की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की भी है। भारत के हालिया प्रदर्शन की भी होगी समीक्षा इंग्लैंड और आयरलैंड दौरों पर भारत के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने इन दौरों पर खेले गए 10 मुकाबलों में से 8 में हार का सामना किया। दौरे के बाद प्रदर्शन की समीक्षा के लिए बैठक होनी थी, लेकिन बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया की तबीयत खराब होने के कारण इसे टाल दिया गया। अब आने वाले दिनों में समीक्षा बैठक होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर इस बैठक में ऑनलाइन माध्यम से शामिल हो सकते हैं। इस समीक्षा में टीम के प्रदर्शन, चयन संबंधी फैसलों और आगे की रणनीति पर चर्चा संभव है। अब नजर बीसीसीआई की अगली बैठक पर मुख्य चयनकर्ता के भविष्य को लेकर स्थिति सितंबर में होने वाली बीसीसीआई की वार्षिक आम सभा की बैठक के दौरान और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल अगरकर को हटाने या लक्ष्मण को उनकी जगह नियुक्त करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल तस्वीर दो संभावनाओं के बीच दिखाई दे रही है—एक तरफ अगरकर को 2027 विश्व कप तक बनाए रखने का विकल्प है, तो दूसरी तरफ वीवीएस लक्ष्मण जैसे अनुभवी नाम को चयन समिति की कमान सौंपने की चर्चा है। आखिरकार फैसला बीसीसीआई की रणनीति, टीम के प्रदर्शन और 2027 विश्व कप की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय क्रिकेट में चयन की कमान अगरकर के हाथ में रहती है या लक्ष्मण को नई जिम्मेदारी मिलती है।  

surbhi अगस्त 5, 2026 0
Ravindra Jadeja bowling for India as Cheteshwar Pujara praises his aggressive Test bowling approach
'जडेजा पहले से ज्यादा खतरनाक हो गए हैं', श्रीलंका सीरीज से पहले चेतेश्वर पुजारा ने बताया बदली गेंदबाजी का राज

नई दिल्ली: श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा को लेकर पूर्व भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने बड़ा बयान दिया है। पुजारा का मानना है कि जडेजा की गेंदबाजी में सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं आया है, बल्कि उनकी सोच भी पहले से ज्यादा आक्रामक हो गई है। पुजारा के मुताबिक, जडेजा अब टेस्ट क्रिकेट में केवल रन रोकने या पिच से मदद मिलने का इंतजार करने वाले गेंदबाज नहीं रहे। उनकी कोशिश अब हर गेंद पर बल्लेबाज को आउट करने की होती है। यही बदलाव उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट में पहले से ज्यादा खतरनाक बनाता है। जडेजा के टेस्ट रिकॉर्ड की बात करें तो उन्होंने 89 टेस्ट मैचों में 25.12 की औसत से 348 विकेट अपने नाम किए हैं। गेंद के साथ उनकी उपयोगिता के अलावा बल्लेबाजी और फील्डिंग में योगदान भी उन्हें भारतीय टेस्ट टीम के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में शामिल करता है। डिफेंसिव से अटैकिंग माइंडसेट तक पहुंची सोच चेतेश्वर पुजारा के अनुसार, जडेजा के करियर के शुरुआती दौर में उनकी गेंदबाजी का मुख्य उद्देश्य रन रोकना हुआ करता था। खासतौर पर टेस्ट क्रिकेट में वह परिस्थितियों के हिसाब से गेंदबाजी करते थे और पिच से मदद मिलने पर विकेट लेने की कोशिश करते थे। लेकिन अब उनकी सोच में बड़ा बदलाव आया है। पुजारा के मुताबिक जडेजा हर गेंद को विकेट लेने के अवसर के रूप में देखते हैं और बल्लेबाज को स्टंप्स की लाइन में फंसाने की कोशिश करते हैं। यह मानसिक बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में लगातार आक्रमण बनाए रखना गेंदबाज के लिए आसान नहीं होता। जडेजा अब सिर्फ दबाव बनाने के बजाय उस दबाव को विकेट में बदलने की कोशिश करते नजर आते हैं। क्रीज और लेंथ का बेहतर इस्तेमाल बना हथियार पुजारा ने जडेजा की बदली गेंदबाजी के तकनीकी पहलू पर भी बात की। उनके अनुसार, आक्रामक सोच का असर गेंदबाजी की पूरी प्रक्रिया पर दिखाई देता है। जब गेंदबाज का उद्देश्य विकेट लेना होता है, तो वह बल्लेबाज की कमजोरियों के हिसाब से अपनी गेंदबाजी में बदलाव करने की कोशिश करता है। जडेजा भी अब क्रीज का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं। वह अलग-अलग कोणों से गेंद डालने और बल्लेबाज के अनुसार लेंथ में बदलाव करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यही विविधता टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। एक ही तरह की गेंदबाजी करने के बजाय कोण, लेंथ और गेंद की दिशा में बदलाव से जडेजा लगातार बल्लेबाज पर दबाव बना सकते हैं। लंबे समय बाद श्रीलंका के खिलाफ एक्शन में जडेजा अब जडेजा की इस बदली हुई गेंदबाजी सोच की परीक्षा श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में होगी। लंबे समय के बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी करने जा रहे जडेजा से भारतीय टीम को गेंद और बल्ले दोनों से महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद रहेगी। श्रीलंकाई परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका अहम हो सकती है। ऐसे में जडेजा की सटीक लाइन-लेंथ, क्रीज के इस्तेमाल की क्षमता और आक्रामक मानसिकता भारतीय टीम के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकती है। पुजारा की बात से बढ़ी जडेजा से उम्मीदें चेतेश्वर पुजारा का आकलन इस बात की ओर इशारा करता है कि जडेजा के खेल में अनुभव के साथ उनकी रणनीति भी विकसित हुई है। अब वह केवल बल्लेबाज को रोकने के बजाय उसे गलती करने के लिए मजबूर करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाज के लिए यही मानसिकता निर्णायक साबित हो सकती है। अगर जडेजा श्रीलंका के खिलाफ इसी आक्रामक दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, तो भारतीय टीम को बीच के ओवरों में विकेट हासिल करने का मजबूत विकल्प मिल सकता है। अब देखना होगा कि श्रीलंका के खिलाफ मैदान पर जडेजा की यह बदली हुई गेंदबाजी सोच कितनी प्रभावी साबित होती है।  

surbhi अगस्त 5, 2026 0
तिरुमला मंदिर में हार्दिक पांड्या का नया लुक
हार्दिक पांड्या का नया लुक देख फैंस रह गए हैरान, तिरुमला मंदिर में पूरी तरह मुंडवाया सिर

तिरुमला, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या अपने नए लुक को लेकर सुर्खियों में हैं। हार्दिक पांड्या हाल ही में तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर पहुंचे, जहां वह पूरी तरह से मुंडे हुए सिर के साथ नजर आए। उनका यह बदला हुआ अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।   नए लुक ने खींचा सबका ध्यान     हार्दिक पांड्या मंदिर में पारंपरिक सफेद पोशाक में नजर आए। उनके साथ महिका शर्मा भी मौजूद थीं। दोनों ने मंदिर में सुप्रभात सेवा में हिस्सा लिया और भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मंदिर से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में हार्दिक का पूरी तरह मुंडा हुआ सिर देखकर फैंस हैरान रह गए।   हार्दिक के नए लुक की तस्वीरें और वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर होने लगे। उनके प्रशंसक इस बदलाव को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।   क्या है सिर मुंडवाने की वजह?     हार्दिक पांड्या ने अभी तक सार्वजनिक तौर पर यह नहीं बताया है कि उन्होंने अपना सिर क्यों मुंडवाया। हालांकि, तिरुमला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा बाल अर्पित करना आस्था और कृतज्ञता से जुड़ी पारंपरिक प्रथा है। इसलिए माना जा रहा है कि हार्दिक ने भी धार्मिक आस्था के तहत अपने बाल अर्पित किए होंगे।   हालांकि, हार्दिक की ओर से इसकी आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है, इसलिए इसे निश्चित तौर पर किसी खास मन्नत या कारण से जोड़ना सही नहीं होगा।   चोट से उबरने के बाद वापसी पर नजर     हार्दिक पांड्या का मंदिर जाना ऐसे समय में हुआ है, जब वह चोट से उबरकर क्रिकेट में वापसी की तैयारी कर रहे हैं। आईपीएल 2026 के बाद पीठ में जकड़न और फिर जांघ की चोट के कारण वह प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अपना रिहैबिलिटेशन पूरा कर लिया है और अब वापसी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।   हार्दिक भारतीय टीम के लिए सीमित ओवरों के क्रिकेट में बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। ऐसे में फैंस को अब उनके नए लुक के साथ-साथ मैदान पर उनकी वापसी का भी बेसब्री से इंतजार है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
Shubdeep Ghosh appointed as India’s new fielding coach after coaching experience with NCA, KKR and Delhi Capitals
16 कैच लेने वाले शुभदीप घोष बने टीम इंडिया के नए फील्डिंग कोच, DC और KKR के साथ भी कर चुके हैं काम

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के सपोर्ट स्टाफ में बड़ा बदलाव हुआ है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने असम के पूर्व घरेलू क्रिकेटर और अनुभवी कोच शुभदीप घोष को भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का नया फील्डिंग कोच नियुक्त किया है। वह टी. दिलीप की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगे। शुभदीप घोष भारतीय टीम के साथ 15 अगस्त से शुरू होने वाली श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज से अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। हाल के दौरों में टीम इंडिया की फील्डिंग में नजर आई कमियों, खासकर कैच छोड़ने और कैचिंग में हुई गलतियों के बीच उनका चयन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कौन हैं शुभदीप घोष? शुभदीप घोष को क्रिकेट जगत में 'जॉय' के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 1968 में असम के डिगबोई में हुआ था। वह अपने खेल के दिनों में दाएं हाथ के मध्यक्रम के बल्लेबाज और ऑफ स्पिनर थे। उन्होंने 1994-95 सीजन में घरेलू क्रिकेट में कदम रखा और असम तथा रेलवे की ओर से क्रिकेट खेला। अपने प्रथम श्रेणी करियर में उन्होंने 17 मुकाबलों में 316 रन बनाए, जबकि 17 लिस्ट-ए मैचों में उनके नाम 307 रन रहे। वर्ष 2005 में उन्होंने प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से संन्यास ले लिया। सिर्फ 16 कैच, फिर भी क्यों मिली बड़ी जिम्मेदारी? शुभदीप घोष के फील्डिंग कोच बनने के बाद उनकी खेल के दौरान की फील्डिंग से जुड़ा एक आंकड़ा चर्चा में है। उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी और लिस्ट-ए करियर को मिलाकर कुल 16 कैच पकड़े थे। हालांकि, फील्डिंग कोच के तौर पर उनकी नियुक्ति उनके खिलाड़ी के रूप में पकड़े गए कैचों से ज्यादा उनके लंबे कोचिंग अनुभव और युवा क्रिकेटरों के साथ काम करने की क्षमता को देखते हुए हुई है। NCA से लेकर टीम इंडिया तक लंबा अनुभव क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद शुभदीप घोष ने कोचिंग को अपना करियर बनाया। पिछले कई वर्षों से वह नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) से जुड़े रहे हैं। इस दौरान उन्होंने भारतीय क्रिकेट के कई प्रमुख खिलाड़ियों और टीमों के साथ काम किया। वह पूर्व भारतीय मुख्य कोच राहुल द्रविड़ के साथ भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा शुभदीप घोष भारत की अंडर-19 टीम, इंडिया ए और भारतीय महिला क्रिकेट टीम के साथ भी फील्डिंग कोच की भूमिका निभा चुके हैं। उनके अनुभव का दायरा केवल घरेलू और राष्ट्रीय क्रिकेट तक सीमित नहीं है। वह इंडियन प्रीमियर लीग में भी कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रहे हैं। KKR और दिल्ली कैपिटल्स से भी जुड़ चुके हैं शुभदीप घोष का आईपीएल में भी अच्छा अनुभव रहा है। वर्ष 2014 में जब कोलकाता नाइट राइडर्स ने आईपीएल खिताब जीता था, तब शुभदीप टीम के सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा थे। इसके बाद उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के साथ भी फील्डिंग कोच के तौर पर काम किया। आईपीएल और भारतीय क्रिकेट के विभिन्न स्तरों पर काम करने के कारण उन्हें आधुनिक क्रिकेट की फील्डिंग जरूरतों की अच्छी समझ मानी जाती है। टीम इंडिया की फील्डिंग सुधारने की होगी चुनौती शुभदीप घोष ऐसे समय में भारतीय टीम से जुड़ रहे हैं जब फील्डिंग में निरंतरता बढ़ाना टीम मैनेजमेंट की अहम प्राथमिकताओं में शामिल है। हाल के इंग्लैंड और आयरलैंड दौरों में भारतीय खिलाड़ियों से कुछ महत्वपूर्ण कैच छूटे और फील्डिंग के दौरान गलतियां भी देखने को मिलीं। ऐसे में नए फील्डिंग कोच के सामने सबसे बड़ी चुनौती खिलाड़ियों की कैचिंग, ग्राउंड फील्डिंग, थ्रो और मैदान पर तेजी को और बेहतर बनाना होगी। उनका NCA, इंडिया ए, अंडर-19, महिला टीम और आईपीएल का अनुभव इस जिम्मेदारी में काफी काम आ सकता है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया की फील्डिंग में कितना सुधार दिखाई देता है। शुभदीप घोष के सामने चुनौती साफ है—टीम इंडिया की फील्डिंग को और मजबूत बनाना और मैदान पर छोटी-छोटी गलतियों को कम करना। उनका लंबा कोचिंग अनुभव इस दिशा में कितना असरदार साबित होता है, यह आने वाले मुकाबलों में देखने को मिलेगा।  

surbhi अगस्त 4, 2026 0
Auqib Nabi joins India Test squad as Jasprit Bumrah replacement after taking 60 Ranji Trophy wickets
IND vs SL: बुमराह की जगह टीम इंडिया में शामिल हुए आकिब नबी, रणजी में 10 मैचों में 60 विकेट लेकर मचाया था धमाल

नई दिल्ली: श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है। स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह चोट के कारण पूरी टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। 28 वर्षीय आकिब के लिए यह उनके करियर का बड़ा पड़ाव है। बुमराह की अनुपस्थिति भारतीय टीम के लिए निश्चित तौर पर चुनौती है, लेकिन आकिब नबी का चयन घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले एक तेज गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि भी है। रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन से मिली टीम इंडिया में जगह आकिब नबी ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सीजन में अपनी गेंदबाजी से खास पहचान बनाई है। उन्होंने इन दो सीजन में कुल 104 विकेट हासिल किए। 2025-26 रणजी सीजन में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा, जहां उन्होंने सिर्फ 10 मैचों में 60 विकेट झटके। आकिब के इस शानदार प्रदर्शन ने जम्मू-कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट लेने की उनकी क्षमता ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। हाल ही में श्रीलंका दौरे पर गई इंडिया ए टीम में भी आकिब को मौका मिला था। वहां उन्होंने दो फर्स्ट क्लास मुकाबलों में छह विकेट हासिल किए। अब उन्हें सीनियर टीम की टेस्ट जर्सी पहनने का मौका मिला है। बुमराह की चोट से भारत को बड़ा झटका जसप्रीत बुमराह का बाहर होना भारतीय टीम के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। बाएं घुटने की चोट से पूरी तरह नहीं उबर पाने के कारण वह श्रीलंका के खिलाफ पूरी टेस्ट सीरीज नहीं खेल पाएंगे। बुमराह भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं। ऐसे में उनकी जगह आकिब नबी को शामिल करना युवा और घरेलू क्रिकेट में प्रभावी प्रदर्शन करने वाले गेंदबाज के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी। भारत के लिए श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज इसलिए भी अहम है क्योंकि टीम की नजर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के महत्वपूर्ण अंकों पर होगी। ऐसे में बुमराह की गैरमौजूदगी में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण पर अतिरिक्त दबाव रह सकता है। आकिब नबी के लिए संघर्ष से टीम इंडिया तक का सफर आकिब नबी का टीम इंडिया तक पहुंचना सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। जम्मू-कश्मीर के बारामूला से आने वाले आकिब ने सीमित संसाधनों के बीच क्रिकेट के अपने जुनून को जिंदा रखा। उनके पिता गुलाम नबी डार शिक्षक हैं और चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने। लेकिन आकिब का सपना क्रिकेटर बनने का था। शुरुआती दौर में क्रिकेट का सामान और स्पाइक्स खरीदना भी आसान नहीं था। उन्हें दोस्तों से जूते तक उधार लेने पड़े। हालांकि, समय के साथ परिवार का समर्थन मिला और आकिब ने घरेलू क्रिकेट में लगातार मेहनत की। अब वही खिलाड़ी भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा बन चुका है। अपडेटेड भारतीय टेस्ट स्क्वाड श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में शुभमन गिल कप्तान और केएल राहुल उप-कप्तान हैं। टीम में यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत, साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर ब्रार, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन और आकिब नबी शामिल हैं। अब आकिब के सामने बड़ी चुनौती आकिब नबी ने घरेलू क्रिकेट में खुद को साबित कर दिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट का स्तर अलग होता है। अब उनके सामने दुनिया के शीर्ष बल्लेबाजों के खिलाफ खुद को साबित करने की चुनौती होगी। बुमराह की जगह टीम में शामिल होना आकिब के लिए दबाव भी है और सुनहरा अवसर भी। अगर वह श्रीलंका के खिलाफ अपने प्रदर्शन से प्रभाव छोड़ने में सफल रहते हैं, तो यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की मजबूत शुरुआत हो सकती है। जम्मू-कश्मीर के घरेलू क्रिकेट से भारतीय टेस्ट टीम तक आकिब नबी का सफर उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े मंच का सपना देखते हैं।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
Auqib Nabi earns maiden India Test call-up after impressive Ranji Trophy performances and replaces Jasprit Bumrah
Who is Auqib Nabi: दोस्तों से उधार लेकर खरीदे जूते, पिता बनाना चाहते थे डॉक्टर; अब बुमराह की जगह टेस्ट टीम में मिला मौका

Who is Auqib Nabi: जम्मू-कश्मीर के बारामूला की वादियों से निकलकर भारतीय क्रिकेट के बड़े मंच तक पहुंचने की आकिब नबी की कहानी संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। कभी क्रिकेट खेलने के लिए दोस्तों से जूते उधार लेने वाले आकिब नबी अब भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाने की दहलीज पर हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम में शामिल किए जाने की खबर है, जहां वह जसप्रीत बुमराह की जगह ले सकते हैं। पिता चाहते थे बेटा बने डॉक्टर आकिब नबी का जन्म जम्मू-कश्मीर के बारामूला में हुआ। उनके पिता गुलाम नबी डार पेशे से शिक्षक हैं। पिता चाहते थे कि उनका बेटा पढ़ाई पर ध्यान दे और आगे चलकर डॉक्टर बने, लेकिन आकिब का दिल क्रिकेट में था। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून बचपन से ही इतना गहरा था कि पढ़ाई के लिए कमरे में बंद किए जाने के बावजूद वह खिड़की से बाहर निकलकर खेलने चले जाते थे। हालांकि क्रिकेट का सपना आसान नहीं था। शुरुआती दिनों में उनके परिवार के पास महंगे क्रिकेट उपकरण और स्पाइक्स खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। कई बार उन्हें दोस्तों से जूते उधार लेकर मैदान पर उतरना पड़ा। समय के साथ उनके पिता ने भी बेटे के जुनून को समझा और उनका साथ देना शुरू किया। इसके बाद आकिब ने मेहनत जारी रखी और घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाते चले गए। 2020 में शुरू हुआ फर्स्ट क्लास करियर आकिब नबी ने 2020 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा। शुरुआती वर्षों में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी का ऐसा प्रभाव छोड़ा कि चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर गया। पिछले रणजी सीजन में जम्मू-कश्मीर को पहली बार चैंपियन बनाने में आकिब की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने सिर्फ 10 मैचों में 60 विकेट हासिल किए। इस दौरान उन्होंने सात बार पांच विकेट लेने का कारनामा भी किया। इससे पिछले रणजी सीजन में भी आकिब का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा था। उन्होंने 8 मैचों में 44 विकेट चटकाए थे। लगातार दो सीजन के इस प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के राष्ट्रीय स्तर के दरवाजे तक पहुंचा दिया। फर्स्ट क्लास में 162 विकेट आकिब नबी के घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उनकी गेंदबाजी की निरंतरता साफ दिखाई देती है। अब तक 43 फर्स्ट क्लास मैचों में उनके नाम 162 विकेट हैं। वहीं लिस्ट-ए क्रिकेट में उन्होंने 36 पारियों में 56 विकेट हासिल किए हैं। टी20 क्रिकेट में भी उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है। टी20 की 24 पारियों में उनके नाम 43 विकेट दर्ज हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि आकिब सिर्फ लंबे फॉर्मेट के गेंदबाज नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग फॉर्मेट में भी प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। आईपीएल में भी मिला बड़ा मौका आकिब नबी के करियर में इंडियन प्रीमियर लीग का अनुभव भी जुड़ चुका है। पिछले साल हुए आईपीएल ऑक्शन में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 8.40 करोड़ रुपये की बड़ी कीमत पर अपने साथ जोड़ा था। हालांकि आईपीएल के अपने पहले सीजन में वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। उन्हें पूरे सीजन में सिर्फ 5 मुकाबले खेलने का मौका मिला और उन्होंने कुल 13 ओवर गेंदबाजी की। इस दौरान वह एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके। हालांकि आईपीएल का अनुभव उनके लिए बड़े स्तर पर खेलने और दबाव से निपटने की सीख साबित हो सकता है। अब टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करने की चुनौती घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट लेने के बाद आकिब नबी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करने की होगी। श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में अगर उन्हें जसप्रीत बुमराह की जगह प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है, तो यह जम्मू-कश्मीर के इस तेज गेंदबाज के लिए करियर का सबसे बड़ा पड़ाव होगा। जिस खिलाड़ी ने कभी क्रिकेट के जूते खरीदने के लिए दोस्तों से मदद ली थी, उसके लिए भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। आकिब नबी की कहानी यह भी बताती है कि प्रतिभा को सही मौके तक पहुंचने में समय लग सकता है, लेकिन लगातार मेहनत और प्रदर्शन रास्ते खोल सकते हैं। अब क्रिकेट फैंस की नजर इस बात पर होगी कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आकिब अपने घरेलू क्रिकेट के शानदार रिकॉर्ड को कितना दोहरा पाते हैं।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
India hockey captain Harmanpreet Singh responds to controversy over the team’s new saffron jersey
Hockey Jersey Controversy: केसरिया जर्सी पर उठे सवालों से नाराज कप्तान हरमनप्रीत सिंह, बोले- इसे विवाद का नाम क्यों दिया जा रहा?

भारतीय हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह तक पहुंच गया है। जर्सी के रंग को लेकर कुछ पूर्व खिलाड़ियों और हॉकी से जुड़े लोगों की आपत्तियों के बीच कप्तान ने साफ कहा है कि टीम का पूरा ध्यान आगामी हॉकी विश्व कप पर होना चाहिए। उन्होंने जर्सी के रंग को लेकर उठ रहे सवालों को अनावश्यक विवाद बताते हुए फैंस से टीम का समर्थन करने की अपील की है। नई जर्सी के रंग को लेकर क्यों मचा विवाद? भारतीय हॉकी टीम लंबे समय से नीले रंग की जर्सी में मैदान पर उतरती रही है। लेकिन आगामी विश्व कप से पहले टीम के लिए नई जर्सी लॉन्च की गई है, जिसका प्रमुख रंग केसरिया है। जर्सी के रंग में बदलाव के बाद सोशल मीडिया और हॉकी जगत में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने भी जर्सी के रंग को लेकर सवाल उठाए। इसी बीच भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। हरमनप्रीत सिंह ने कहा- इसे कंट्रोवर्सी क्यों कहा जा रहा? हरमनप्रीत सिंह ने नई जर्सी को लेकर हो रही चर्चा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जर्सी बदलना कोई पहली बार होने वाली बात नहीं है। उनके मुताबिक, टीम के खिलाड़ियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ के साथ चर्चा के बाद ही जर्सी को लेकर फैसला किया गया है। कप्तान ने संकेत दिया कि जब टीम के भीतर इस बदलाव को लेकर बातचीत और सहमति हुई है, तो इसे विवाद का रूप देना उचित नहीं है। उनका जोर इस बात पर रहा कि जर्सी का रंग चाहे जो हो, मैदान पर टीम का लक्ष्य भारत का प्रतिनिधित्व करना और अच्छा प्रदर्शन करना है। 'ब्लू हो या पीला, हम भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं' हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि टीम पहले भी अलग-अलग रंगों की जर्सी में खेल चुकी है। उनके मुताबिक, खिलाड़ियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात जर्सी का रंग नहीं, बल्कि भारत के लिए मैदान पर प्रदर्शन करना है। कप्तान ने इस बात पर भी जोर दिया कि टीम विश्व कप खेलने जा रही है और ऐसे समय में खिलाड़ियों को विवादों में उलझाने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि फैंस का समर्थन खिलाड़ियों को सकारात्मक ऊर्जा देगा। फैंस से की टीम का समर्थन करने की अपील हरमनप्रीत सिंह ने भारतीय हॉकी फैंस से अपील की कि वे टीम को सकारात्मक संदेश दें और विश्व कप के लिए रवाना होने से पहले खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि टीम टूर्नामेंट में जीतने के इरादे से जा रही है। परिणाम खिलाड़ियों के हाथ में नहीं होता, लेकिन मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और पूरी मेहनत करना उनके नियंत्रण में है। कप्तान के मुताबिक, टीम को भरोसा है कि भारत के करोड़ों हॉकी प्रशंसकों का समर्थन उनके साथ रहेगा। विश्व कप से पहले टीम का फोकस प्रदर्शन पर नई जर्सी को लेकर चल रही बहस के बीच हरमनप्रीत सिंह का संदेश स्पष्ट है कि भारतीय टीम का ध्यान अब विश्व कप में अपने प्रदर्शन पर होना चाहिए। खिलाड़ियों के लिए टूर्नामेंट से पहले सकारात्मक माहौल और देशवासियों का समर्थन महत्वपूर्ण है। जर्सी का रंग आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बना रहता है या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन भारतीय टीम के लिए असली चुनौती विश्व कप के मैदान पर अपने प्रदर्शन से जवाब देना होगी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह भी यही चाहते हैं कि विवाद से ज्यादा चर्चा टीम के खेल और उसके प्रदर्शन की हो।  

surbhi अगस्त 1, 2026 0
Team India at World Cup 2027 venues with records across South Africa, Zimbabwe and Namibia cricket grounds
World Cup 2027: 12 मैदानों पर होंगे मुकाबले, 10 वेन्यू पर खेल चुकी है टीम इंडिया; जानिए कहां कैसा है रिकॉर्ड

World Cup 2027: वनडे वर्ल्ड कप 2027 का मंच तैयार हो रहा है। दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए 12 मैदानों को चुना गया है। खास बात यह है कि भारतीय टीम इन 12 में से 10 मैदानों पर पहले ही वनडे मुकाबले खेल चुकी है। यानी वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय खिलाड़ियों के लिए अधिकांश मैदान पूरी तरह अनजान नहीं होंगे। आईसीसी ने वर्ल्ड कप 2027 के वेन्यू का ऐलान कर दिया है। टूर्नामेंट के मुकाबले दक्षिण अफ्रीका के आठ, जिम्बाब्वे के तीन और नामीबिया के एक मैदान पर खेले जाएंगे। 1983 और 2011 की विश्व चैंपियन टीम इंडिया भी इस टूर्नामेंट का हिस्सा होगी। हालांकि, दो मैदान ऐसे हैं जहां भारतीय टीम ने अभी तक वनडे मुकाबला नहीं खेला है। इनमें नामीबिया की राजधानी विंडहोक स्थित नामीबिया क्रिकेट ग्राउंड और जिम्बाब्वे का मोसि-ओ-तुन्या इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीका में भारत का रिकॉर्ड कैसा है? दक्षिण अफ्रीका में भारतीय टीम का वनडे रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है। खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने दक्षिण अफ्रीका में अब तक 59 वनडे मुकाबले खेले हैं, जिसमें टीम को 24 मैचों में जीत और 31 में हार मिली है। दक्षिण अफ्रीका में पिछला वनडे वर्ल्ड कप 2003 में खेला गया था। उस टूर्नामेंट में भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची थी, लेकिन खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। वहीं जिम्बाब्वे में भारत का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के मुकाबले काफी बेहतर रहा है। भारतीय टीम ने वहां 34 वनडे मैच खेले हैं, जिनमें 26 जीत और सिर्फ 8 हार दर्ज की हैं। 12 में से 10 वर्ल्ड कप वेन्यू पर खेल चुकी है टीम इंडिया वर्ल्ड कप 2027 के लिए चुने गए 12 मैदानों में से 10 पर भारतीय टीम के वनडे मुकाबले खेलने का अनुभव है। अलग-अलग मैदानों पर भारत का रिकॉर्ड इस प्रकार रहा है: 1. मंगौंग ओवल, ब्लोमफोंटेन ब्लोमफोंटेन के मंगौंग ओवल में भारत ने अब तक 3 वनडे मैच खेले हैं। टीम को इनमें 1 जीत और 2 हार मिली हैं। यानी इस मैदान पर भारतीय टीम का रिकॉर्ड फिलहाल उसके पक्ष में नहीं है। 2. न्यूलैंड्स क्रिकेट ग्राउंड, केपटाउन केपटाउन के न्यूलैंड्स मैदान पर भारत ने 1992 से 2022 के बीच 6 वनडे मुकाबले खेले हैं। इनमें टीम ने 3 मैच जीते और 3 गंवाए हैं। इस मैदान पर भारत का रिकॉर्ड पूरी तरह बराबरी का रहा है। 3. सुपरस्पोर्ट्स पार्क, सेंचुरियन सेंचुरियन के सुपरस्पोर्ट्स पार्क में भारत ने 13 वनडे मैच खेले हैं। इनमें 6 जीत और 5 हार दर्ज हैं, जबकि 2 मैच रद्द हुए। इस लिहाज से भारत का रिकॉर्ड यहां सकारात्मक रहा है। 4. किंग्समीड क्रिकेट ग्राउंड, डरबन डरबन के किंग्समीड मैदान की पिच को बल्लेबाजी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां भारत ने 10 वनडे मैच खेले हैं और उसे सिर्फ 3 मुकाबलों में जीत मिली है। यानी इस मैदान पर भारतीय टीम के सामने चुनौती आसान नहीं रही है। 5. बफेलो पार्क, ईस्ट लंदन ईस्ट लंदन के बफेलो पार्क में भारत ने अपना आखिरी वनडे मुकाबला 2001 में खेला था। यहां भारतीय टीम ने 3 मैच खेले, जिसमें उसे 2 मुकाबलों में हार मिली। 6. सेंट जॉर्ज पार्क, गकेबरहा सेंट जॉर्ज पार्क भारतीय टीम के लिए मुश्किल मैदानों में से एक रहा है। 1992 से 2023 के बीच यहां खेले 7 वनडे मुकाबलों में भारत को सिर्फ 1 जीत मिली, जबकि 6 मैचों में हार का सामना करना पड़ा। 7. वांडरर्स स्टेडियम, जोहानिसबर्ग जोहानिसबर्ग का वांडरर्स स्टेडियम भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए 2003 वर्ल्ड कप फाइनल की याद भी लेकर आता है। इसी मैदान पर भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में हार मिली थी। इस मैदान पर भारत ने अब तक 9 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें 4 जीत और 5 हार दर्ज हैं। 8. बोलैंड पार्क, पार्ल पार्ल के बोलैंड पार्क में भारतीय टीम ने 6 वनडे मुकाबले खेले हैं। यहां भारत ने 3 मैच जीते और 2 गंवाए, जबकि 1 मुकाबला टाई रहा। इस मैदान पर टीम इंडिया का रिकॉर्ड अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। 9. क्वींस स्पोर्ट्स पार्क, बुलावायो जिम्बाब्वे के बुलावायो स्थित क्वींस स्पोर्ट्स पार्क में भारत का रिकॉर्ड मजबूत रहा है। यहां खेले 10 वनडे मुकाबलों में टीम इंडिया ने 7 मैच जीते, जबकि 3 में हार मिली। 10. हरारे स्पोर्ट्स क्लब, हरारे हरारे स्पोर्ट्स क्लब भारतीय टीम के लिए सबसे सफल मैदानों में शामिल है। भारत ने यहां 24 वनडे मैच खेले हैं, जिनमें 19 में जीत दर्ज की और सिर्फ 5 मुकाबलों में हार का सामना किया। दो मैदानों पर पहली बार खेलने उतरेगी टीम इंडिया वर्ल्ड कप 2027 के 12 वेन्यू में से दो ऐसे हैं, जहां भारतीय टीम ने अभी तक वनडे मैच नहीं खेला है। इनमें नामीबिया क्रिकेट ग्राउंड, विंडहोक और मोसि-ओ-तुन्या इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, जिम्बाब्वे शामिल हैं। इसका मतलब है कि इन दोनों मैदानों पर भारतीय टीम को परिस्थितियों को समझने और पिच के मिजाज के अनुसार खुद को ढालने की नई चुनौती का सामना करना पड़ेगा। वर्ल्ड कप में अनुभव बन सकता है भारत की ताकत वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में परिस्थितियों की जानकारी टीम के लिए अहम होती है। भारतीय टीम के लिए राहत की बात यह है कि 12 में से 10 संभावित होस्ट मैदानों पर वह पहले ही वनडे मुकाबले खेल चुकी है। हालांकि, मैदान का अनुभव अपने आप में जीत की गारंटी नहीं होता। दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियां, तेज गेंदबाजों के लिए मददगार पिचें और टूर्नामेंट का दबाव भारतीय टीम के लिए असली परीक्षा होंगे। फिलहाल आंकड़ों पर नजर डालें तो जिम्बाब्वे के मैदानों पर भारत का रिकॉर्ड मजबूत है, जबकि दक्षिण अफ्रीका के कुछ मैदानों पर टीम को संघर्ष करना पड़ा है। 2027 वर्ल्ड कप में इन पुराने रिकॉर्ड्स के साथ-साथ मौजूदा फॉर्म और परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाना भी टीम इंडिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।  

surbhi अगस्त 1, 2026 0
Neeraj Chopra and Arshad Nadeem set for javelin throw final showdown at Commonwealth Games 2026
Neeraj Chopra vs Arshad Nadeem: नीरज चोपड़ा से फिर होगा अरशद नदीम का सामना, फाइनल से पहले पाकिस्तानी स्टार ने मांगी दुआ; CWG में आज महामुकाबला

ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में आज एथलेटिक्स के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक देखने को मिलेगा। पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में भारत के नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के अरशद नदीम आमने-सामने होंगे। दोनों खिलाड़ियों की प्रतिद्वंद्विता ने पिछले कुछ वर्षों में विश्व एथलेटिक्स में खास पहचान बनाई है। अरशद नदीम ने क्वालिफिकेशन राउंड में 78.63 मीटर का थ्रो करके फाइनल में जगह बनाई। वहीं नीरज चोपड़ा 79.61 मीटर के प्रयास के साथ पांचवें स्थान पर रहते हुए फाइनल में पहुंचे। भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह ने भी फाइनल के लिए क्वालिफाई किया है। दिलचस्प बात यह है कि क्वालिफिकेशन राउंड में किसी भी एथलीट ने 83 मीटर का ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क हासिल नहीं किया। ऐसे में शीर्ष 12 खिलाड़ियों को फाइनल में जगह मिली। अरशद नदीम ने फाइनल से पहले मांगी फैंस से दुआ फाइनल से पहले पाकिस्तान के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी अरशद नदीम ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया। उन्होंने पाकिस्तानी प्रशंसकों से अपने लिए दुआ करने और फाइनल में अच्छे प्रदर्शन के लिए समर्थन देने की अपील की। नदीम ने बताया कि वह फाइनल के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं और अब उनकी कोशिश पाकिस्तान के लिए पदक जीतने की होगी। उन्होंने अपने प्रशंसकों के समर्थन और दुआओं के लिए धन्यवाद भी दिया। नदीम के लिए यह मुकाबला इसलिए भी अहम है क्योंकि वह मौजूदा कॉमनवेल्थ चैंपियन हैं। उन्होंने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में 90.18 मीटर के रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था। उस प्रतियोगिता में नीरज चोपड़ा चोट के कारण हिस्सा नहीं ले पाए थे। पेरिस ओलंपिक के बाद फिर आमने-सामने नीरज और अरशद नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम की प्रतिद्वंद्विता ने पेरिस ओलंपिक 2024 में एक नया अध्याय लिखा था। उस फाइनल में अरशद नदीम ने 92.97 मीटर के ओलंपिक रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था, जबकि नीरज चोपड़ा ने रजत पदक अपने नाम किया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में दोनों के बीच एक और बड़ी भिड़ंत होने जा रही है। हालांकि इस बार मुकाबला सिर्फ नीरज और अरशद तक सीमित नहीं है। श्रीलंका के रुमेश थारंगा और ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स जैसे मजबूत दावेदार भी फाइनल में मौजूद हैं। फाइनल में भारत के तीन खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के अलावा भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह ने भी फाइनल में जगह बनाकर देश की पदक उम्मीदों को मजबूत किया है। क्वालिफिकेशन में नीरज ने 79.61 मीटर के थ्रो के साथ पांचवां स्थान हासिल किया। रोहित यादव 78.37 मीटर के साथ नौवें और यशवीर सिंह 78.36 मीटर के साथ दसवें स्थान पर रहे। इसका मतलब है कि फाइनल में 12 खिलाड़ियों के बीच भारत के तीन एथलीट पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। रुमेश थारंगा भी बन सकते हैं बड़ा खतरा भारत-पाकिस्तान की बहुप्रतीक्षित भिड़ंत के बीच श्रीलंका के रुमेश थारंगा को नजरअंदाज करना बड़ी भूल हो सकती है। वह इस समय शानदार फॉर्म में हैं और क्वालिफिकेशन राउंड में 82.84 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके शीर्ष स्थान पर रहे। थारंगा ने इससे पहले रोम में 92.62 मीटर का शानदार थ्रो किया था। यही वजह है कि नीरज और अरशद के साथ उनकी मौजूदगी फाइनल को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना रही है। एंडरसन पीटर्स भी 81.29 मीटर के प्रयास के साथ क्वालिफिकेशन में दूसरे स्थान पर रहे। उनके नाम 93.07 मीटर का करियर बेस्ट थ्रो है। ऐसे में फाइनल में सिर्फ भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता ही नहीं, बल्कि कई विश्वस्तरीय खिलाड़ियों के बीच पदक की जोरदार जंग देखने को मिलेगी। आज तय होगा किसका भाला लगाएगा सबसे लंबी उड़ान नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम के बीच मुकाबला हमेशा से खेल प्रशंसकों के लिए खास रहा है। दोनों की दोस्ती और मैदान पर कड़ी प्रतिस्पर्धा इस मुकाबले को और दिलचस्प बनाती है। नीरज की नजर कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने दूसरे स्वर्ण पदक पर होगी, जबकि अरशद अपने खिताब को बचाने उतरेंगे। वहीं भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह भी पदक की दौड़ में अपनी दावेदारी पेश करेंगे। क्वालिफिकेशन के प्रदर्शन से फाइनल का नतीजा तय नहीं होता। असली मुकाबला आज होगा, जहां एक शानदार थ्रो पूरा समीकरण बदल सकता है।  

surbhi जुलाई 31, 2026 0
I'm Game Trailer
दुलकर सलमान की 'I'm Game' का दमदार ट्रेलर रिलीज़, एक्शन और सस्पेंस से भरपूर दिखी फिल्म

कोच्चि, एजेंसियां। अभिनेता दुलकर सलमान की बहुप्रतीक्षित मलयालम एक्शन थ्रिलर 'I'm Game' का आधिकारिक ट्रेलर रिलीज़ कर दिया गया है। ट्रेलर में दुलकर सलमान एक दमदार और स्टाइलिश अवतार में नजर आ रहे हैं। फिल्म में एक्शन, सस्पेंस, जुए की दुनिया और बदले की कहानी को हाई-ऑक्टेन अंदाज़ में पेश किया गया है।   'Dan John' के किरदार में दिखेंगे दुलकर   फिल्म में दुलकर 'डैन जॉन' नाम के किरदार में हैं, जो किस्मत नहीं बल्कि गणना (एल्गोरिद्म) पर भरोसा करता है। ट्रेलर में तेज़ रफ्तार एक्शन, स्टाइलिश विजुअल्स और रहस्यमयी कहानी की झलक देखने को मिलती है, जिसने प्रशंसकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।   नहास हिदायत का निर्देशन, 20 अगस्त को रिलीज़   फिल्म का निर्देशन 'RDX' फेम नहास हिदायत ने किया है। इसे दुलकर सलमान के प्रोडक्शन हाउस Wayfarer Films ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म 20 अगस्त 2026 को ओणम के अवसर पर सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी और इसे दुलकर के करियर की सबसे बड़ी पैन-इंडिया फिल्मों में गिना जा रहा है।   जूनियर एनटीआर ने भी की ट्रेलर की तारीफ   ट्रेलर रिलीज़ होने के बाद अभिनेता जूनियर एनटीआर ने भी इसकी सराहना की और फिल्म की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया पर ट्रेलर को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है और प्रशंसक इसे दुलकर सलमान की अब तक की सबसे स्टाइलिश फिल्मों में से एक बता रहे हैं।

anjali kumari जुलाई 31, 2026 0
Four unbeaten Indian Test captains Hemu Adhikari Ravi Shastri Krishnamachari Srikkanth and Ajinkya Rahane
4 अजेय भारतीय टेस्ट कप्तान: कप्तानी में कभी नहीं मिली हार, एक ने ऑस्ट्रेलिया में रचा इतिहास

भारत के टेस्ट क्रिकेट इतिहास में कई दिग्गज खिलाड़ियों ने टीम इंडिया की कप्तानी की है। कुछ कप्तानों ने लंबे समय तक टीम का नेतृत्व किया और कई यादगार जीत दिलाईं, तो कुछ का कप्तानी करियर बेहद छोटा रहा। लेकिन इन सबके बीच चार ऐसे भारतीय कप्तान भी रहे हैं, जिनके नेतृत्व में टीम को टेस्ट क्रिकेट में कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा। भारत ने 1932 में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा था और तब से अब तक कई कप्तान टीम की कमान संभाल चुके हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इन कप्तानों में हेमू अधिकारी, रवि शास्त्री, कृष्णमाचारी श्रीकांत और अजिंक्य रहाणे ऐसे चार नाम हैं, जिनकी कप्तानी में भारत ने एक भी टेस्ट मैच नहीं गंवाया। हालांकि, इन चारों का कप्तानी करियर एक जैसा नहीं रहा। किसी को सिर्फ एक मैच में कप्तानी का मौका मिला, तो किसी ने कई टेस्ट मैचों में टीम का नेतृत्व किया। आइए जानते हैं इन चार अजेय कप्तानों की कहानी। 1. हेमू अधिकारी: एक मैच की कप्तानी, हार का सामना नहीं किया हेमू अधिकारी भारत के उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्हें टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ एक बार कप्तानी करने का मौका मिला। खास बात यह रही कि जिस मैच में उन्होंने टीम की कमान संभाली, वह उनके टेस्ट करियर का आखिरी मुकाबला भी था। वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली में खेले गए इस टेस्ट मैच में अधिकारी ने भारतीय टीम का नेतृत्व किया। मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ और इस तरह उनकी कप्तानी में भारत को हार का सामना नहीं करना पड़ा। उनका कप्तानी रिकॉर्ड छोटा जरूर रहा, लेकिन अजेय रहा। कप्तानी रिकॉर्ड: 1 टेस्ट, 0 जीत, 1 ड्रॉ, 0 हार 2. रवि शास्त्री: चोट के कारण मिली कप्तानी और दर्ज हुई बड़ी जीत भारतीय क्रिकेट के दिग्गज रवि शास्त्री को भी टेस्ट में कप्तानी करने का मौका मिला था। 1988 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एक टेस्ट मैच में नियमित कप्तान दिलीप वेंगसरकर की चोट के कारण शास्त्री को टीम की कमान सौंपी गई। शास्त्री ने इस मौके को यादगार बना दिया। उनकी कप्तानी में भारत ने वेस्टइंडीज को 255 रन से हराया। यह उनके टेस्ट कप्तानी करियर का इकलौता मैच था और इसमें मिली शानदार जीत के साथ उनका रिकॉर्ड भी 100 प्रतिशत अजेय रहा। कप्तानी रिकॉर्ड: 1 टेस्ट, 1 जीत, 0 ड्रॉ, 0 हार 3. कृष्णमाचारी श्रीकांत: पाकिस्तान दौरे पर चारों टेस्ट रहे ड्रॉ 1989 का पाकिस्तान दौरा भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक था। इसी दौरे पर महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने अपना टेस्ट डेब्यू किया था। चार टेस्ट मैचों की इस सीरीज में कृष्णमाचारी श्रीकांत भारतीय टीम के कप्तान थे। सीरीज के चारों टेस्ट मैच ड्रॉ रहे। यानी श्रीकांत की कप्तानी में भारत को एक भी हार नहीं मिली। इसके बाद उन्हें दोबारा टेस्ट टीम की कप्तानी करने का अवसर नहीं मिला। इस तरह उनका कप्तानी रिकॉर्ड भी बिना हार के ही समाप्त हुआ। कप्तानी रिकॉर्ड: 4 टेस्ट, 0 जीत, 4 ड्रॉ, 0 हार 4. अजिंक्य रहाणे: ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत के कप्तान इन चारों नामों में अजिंक्य रहाणे का कप्तानी रिकॉर्ड सबसे प्रभावशाली रहा। 2017 से 2021 के बीच रहाणे ने छह टेस्ट मैचों में भारतीय टीम का नेतृत्व किया। उनकी कप्तानी में भारत ने चार टेस्ट मैच जीते और दो मुकाबले ड्रॉ रहे। यानी छह मैचों में भारत को एक भी हार नहीं मिली। रहाणे की कप्तानी का सबसे यादगार अध्याय ऑस्ट्रेलिया दौरे से जुड़ा है। विराट कोहली की गैरमौजूदगी में रहाणे ने टीम की कमान संभाली और भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में मात दी। इस सीरीज में एडिलेड टेस्ट की निराशा के बाद रहाणे के नेतृत्व में भारतीय टीम ने शानदार वापसी की। मेलबर्न में जीत और ब्रिस्बेन में ऐतिहासिक सफलता ने उनकी कप्तानी को भारतीय क्रिकेट के यादगार अध्यायों में शामिल कर दिया। कप्तानी रिकॉर्ड: 6 टेस्ट, 4 जीत, 2 ड्रॉ, 0 हार चारों अजेय कप्तानों का रिकॉर्ड एक नजर में कप्तान टेस्ट जीत ड्रॉ हार हेमू अधिकारी 1 0 1 0 रवि शास्त्री 1 1 0 0 कृष्णमाचारी श्रीकांत 4 0 4 0 अजिंक्य रहाणे 6 4 2 0 अजेय कप्तानों की सूची में रहाणे सबसे आगे इन चार कप्तानों की कहानी यह बताती है कि कप्तानी का असर केवल मैचों की संख्या से नहीं मापा जाता। हेमू अधिकारी और रवि शास्त्री को जहां सिर्फ एक-एक टेस्ट में कप्तानी मिली, वहीं श्रीकांत ने चार मैचों में टीम की अगुआई की और सभी मुकाबले ड्रॉ रहे। दूसरी ओर, अजिंक्य रहाणे ने छह टेस्ट में कप्तानी करते हुए चार जीत दर्ज कीं और उनके नेतृत्व में भारत को एक भी हार नहीं मिली। खास तौर पर ऑस्ट्रेलिया में मिली ऐतिहासिक सफलता ने उनके कप्तानी करियर को खास पहचान दी। भारत के टेस्ट क्रिकेट इतिहास में कप्तानों की लंबी सूची के बीच इन चार नामों का अजेय रिकॉर्ड निश्चित रूप से एक खास उपलब्धि है।  

surbhi जुलाई 31, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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शेयर बाजार में गिरावट, Sensex 71 अंक टूटा; Nifty 24,400 के नीचे बंद

abhishek singh अगस्त 14, 2026 0