स्पोर्ट्स

बांग्लादेश क्रिकेट में बड़ा बदलाव, लिटन दास बने नए वनडे कप्तान; मेहदी हसन मिराज की हुई छुट्टी

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
Litton Das
Litton Das: Bangladesh ODI Captain

2027 विश्व कप को ध्यान में रखकर BCB का बड़ा फैसला

 

ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने वनडे टीम की कप्तानी में बड़ा बदलाव करते हुए विकेटकीपर-बल्लेबाज लिटन दास को नया कप्तान नियुक्त किया है। वह 2027 ICC वनडे विश्व कप तक टीम की कमान संभालेंगे। इस फैसले के साथ मेहदी हसन मिराज को वनडे कप्तानी से हटा दिया गया है।

 

विश्व कप की तैयारियों पर फोकस

 

बीसीबी का मानना है कि आगामी विश्व कप को देखते हुए टीम को स्थिर नेतृत्व की जरूरत है। लिटन दास पहले से टी20 टीम की कप्तानी कर चुके हैं और अब उन्हें वनडे टीम की भी जिम्मेदारी दी गई है। बोर्ड को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी।

 

टेस्ट टीम में कोई बदलाव नहीं

 

वनडे कप्तानी में बदलाव के बावजूद नजमुल हुसैन शांतो टेस्ट टीम के कप्तान बने रहेंगे। वहीं, मेहदी हसन मिराज टेस्ट टीम के उपकप्तान के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेंगे।

 

हालिया प्रदर्शन के बाद लिया गया फैसला

 

मेहदी हसन मिराज की कप्तानी में बांग्लादेश का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे सीरीज हारने के बाद टीम नेतृत्व की समीक्षा की गई, जिसके बाद बीसीबी ने कप्तानी में बदलाव का फैसला लिया।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

स्पोर्ट्स

View more
Neymar Retirement
नेमार ने इंटरनेशनल फुटबॉल को कहा अलविदा, 16 साल के शानदार करियर का हुआ अंत

ब्राजील के सर्वकालिक शीर्ष गोल स्कोरर ने राष्ट्रीय टीम से संन्यास की पुष्टि की   रियो डी जेनेरियो, एजेंसियां। ब्राजील के स्टार फुटबॉलर नेमार जूनियर ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से अपने संन्यास की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। 34 वर्षीय नेमार ने कहा कि अब राष्ट्रीय टीम के साथ उनका सफर समाप्त हो चुका है और वह इस फैसले को बदलने की कोई इच्छा नहीं रखते। यह घोषणा 2026 फीफा विश्व कप में ब्राजील के निराशाजनक प्रदर्शन और नॉर्वे के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल में हार के बाद आई है।   130 मैच, 80 गोल और कई यादगार पल   नेमार ने ब्राजील के लिए 130 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 80 गोल किए और देश के सर्वकालिक सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने। उन्होंने 2013 का फीफा कन्फेडरेशन कप जीतने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन विश्व कप खिताब जीतने का उनका सपना अधूरा रह गया।   भावुक संदेश में कहा- अब मेरा समय खत्म हो चुका है   संन्यास की घोषणा करते हुए नेमार ने कहा कि उन्होंने 16 वर्षों तक ब्राजील के लिए अपना "खून और पसीना" दिया। उन्होंने कहा कि वह अपने करियर पर गर्व महसूस करते हैं, लेकिन अब नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का मौका देने का समय आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अब राष्ट्रीय टीम में वापसी नहीं करना चाहते।   क्लब फुटबॉल में खेलना जारी रखेंगे   अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने के बावजूद नेमार क्लब स्तर पर खेलना जारी रखेंगे। वह फिलहाल ब्राजील के क्लब सैंटोस से जुड़े हुए हैं और अपना पूरा ध्यान क्लब फुटबॉल पर केंद्रित करेंगे। उनके संन्यास के साथ ही ब्राजील फुटबॉल के एक यादगार अध्याय का समापन हो गया है।

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
Smriti Mandhana

'द हंड्रेड' में स्मृति मंधाना का धमाका, 88 रन ठोक टीम को दिलाई शानदार जीत

RCB Brand Value

IPL में RCB का नया कीर्तिमान, 300 मिलियन डॉलर ब्रांड वैल्यू पार करने वाली पहली फ्रेंचाइज़ी बनी

Shubman Gill

ICC वनडे रैंकिंग में शुभमन गिल का दबदबा, फिर बने दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज

रांची के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में डूरंड कप का मुकाबला देखते दर्शक
रांची के मोरहाबादी में डूरंड कप का उत्साह, फुटबॉल प्रेमियों में दिखा जबरदस्त जुनून

पहली बार रांची में हो रहा एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन, बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में उमड़ रहे दर्शक   रांची। झारखंड की राजधानी रांची में पहली बार आयोजित हो रहे प्रतिष्ठित डूरंड कप (Durand Cup) को लेकर फुटबॉल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में टूर्नामेंट के मुकाबलों को लेकर दर्शकों की भीड़ और फुटबॉल का जुनून देखने को मिल रहा है।   रांची को पहली बार मिली मेजबानी   135वें इंडियनऑयल डूरंड कप के तहत रांची को पहली बार मेजबान शहर बनाया गया है। यहां ग्रुप-सी के मुकाबले और एक क्वार्टर फाइनल मैच खेले जा रहे हैं। रांची में 26 जुलाई से 16 अगस्त तक बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में कई मुकाबलों का आयोजन होना है।   उद्घाटन समारोह में दिखी झारखंड की संस्कृति   डूरंड कप के रांची आगमन पर भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और सैन्य परंपराओं की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।   Jamshedpur FC के शानदार प्रदर्शन से बढ़ा रोमांच   रांची में खेले गए मुकाबले में जमशेदपुर FC ने श्रीलंका की Defenders FC को 5-0 से हराकर शानदार शुरुआत की। इस मैच में रेनियर फर्नांडिस ने हैट्रिक लगाकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।   मोरहाबादी में फुटबॉल का माहौल   टूर्नामेंट को लेकर शहर में खासा उत्साह है। बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रशंसक स्टेडियम पहुंच रहे हैं। दर्शकों के लिए प्रवेश को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे स्थानीय खेल प्रेमियों को मैच देखने का मौका मिल रहा है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
Ryan ten Doeschate

KKR में रयान टेन डोएशेट की नई जिम्मेदारी, बने 'हेड ऑफ क्रिकेट स्ट्रैटेजी'

Litton Das

बांग्लादेश क्रिकेट में बड़ा बदलाव, लिटन दास बने नए वनडे कप्तान; मेहदी हसन मिराज की हुई छुट्टी

WTC 2025-27 points table

WTC 2025-27 पॉइंट्स टेबल में बड़ा उलटफेर, पाकिस्तान सबसे नीचे; भारत पांचवें स्थान पर खिसका

Murali Sri Shankar
मुरली श्रीशंकर ने जीता सिल्वर मेडल, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को लंबी कूद में बड़ी सफलता

सिर्फ 6 सेंटीमीटर से चूके गोल्ड, लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक   ग्लासगो, एजेंसियां। भारत के स्टार लंबी कूद एथलीट मुरली श्रीशंकर ने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में रजत पदक (सिल्वर मेडल) जीत लिया। श्रीशंकर ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 8.09 मीटर की छलांग लगाई, लेकिन स्वर्ण पदक से केवल 6 सेंटीमीटर पीछे रह गए। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा रजत पदक है।   रोमांचक मुकाबले में बेहद मामूली अंतर से चूके गोल्ड   श्रीशंकर शुरुआती तीन राउंड के बाद बढ़त पर थे, लेकिन चौथे राउंड में जमैका के ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। वहीं, स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंज़ी ने 8.08 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। श्रीशंकर का प्रदर्शन पूरे मुकाबले में बेहद शानदार रहा और वह अंत तक स्वर्ण की दौड़ में बने रहे।   भारत के पदक अभियान को मिली मजबूती   मुरली श्रीशंकर के रजत पदक से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदकों की संख्या में इजाफा हुआ। एथलेटिक्स में उनका यह प्रदर्शन भारतीय दल के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और इससे पदक तालिका में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।   श्रीशंकर बोले- सिल्वर से खुश हूं, लेकिन लक्ष्य गोल्ड था   पदक जीतने के बाद श्रीशंकर ने कहा कि वह रजत पदक से खुश हैं, लेकिन उनका लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना था। उन्होंने कहा कि भविष्य की प्रतियोगिताओं में वह और बेहतर प्रदर्शन कर देश के लिए गोल्ड जीतने की कोशिश करेंगे।

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
Ajinkya Rahane Retirement

अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, खत्म हुआ भारतीय क्रिकेट का एक शानदार अध्याय

ICC Rankings 2026

ICC Rankings: वैभव सूर्यवंशी ने लगाई 230 स्थान की छलांग, टी20 के टॉप-50 बल्लेबाजों में बनाई जगह

Durand Cup 2026

Durand Cup 2026: भारतीय वायुसेना एफटी ने डिफेंडर्स एफसी को 2-1 से हराया, नाओरेम सोमनंदा बने जीत के हीरो

0 Comments

Top week

Mojtaba Khamenei delivering a statement on Iran, Hezbollah, and the Middle East conflict
दुनिया

US-Iran War: मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान, बोले- 'अब जिहाद और प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता'

kalpana जुलाई 27, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?