टेक्नोलॉजी की दुनिया में Apple ने एक बार फिर अपनी ताकत साबित करने की कोशिश की है। कंपनी के नए इन-हाउस नेटवर्क चिप C1X को लेकर आई रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है कि यह अब दिग्गज चिपमेकर Qualcomm के फ्लैगशिप मॉडेम X80 के बराबर प्रदर्शन करने लगा है।
नेटवर्क एनालिटिक्स फर्म Ookla की रिपोर्ट के अनुसार, Apple का C1X नेटवर्क चिप “रियल-वर्ल्ड” टेस्टिंग में Qualcomm X80 मॉडेम के बराबर प्रदर्शन करता है।
यह चिप फिलहाल iPhone Air और iPhone 17e में इस्तेमाल हो रहा है। रिपोर्ट बताती है कि यह चिप अलग-अलग नेटवर्क कंडीशंस-चाहे आदर्श हों या चुनौतीपूर्ण-दोनों में संतुलित प्रदर्शन देने में सक्षम है।
रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि iPhone Air ने कई मामलों में iPhone 17 Pro Max को भी पीछे छोड़ दिया, जो Qualcomm X80 मॉडेम पर चलता है।
डेटा के मुताबिक, 22 में से 19 मार्केट्स में iPhone Air ने latency के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया। इसका मुख्य कारण Apple का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच बेहतर इंटीग्रेशन माना जा रहा है।
हालांकि, हर मामले में Apple आगे नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार:
इसका कारण Qualcomm की UL-CA (Uplink Carrier Aggregation) टेक्नोलॉजी को माना गया है, जो फिलहाल इंडस्ट्री बेंचमार्क बनी हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि C1X चिप अब कोई “समझौता” नहीं रहा, बल्कि यह परफॉर्मेंस के मामले में बराबरी का खिलाड़ी बन चुका है।
यह Apple के लिए एक बड़ा कदम है, क्योंकि कंपनी अब धीरे-धीरे अपने डिवाइस में थर्ड-पार्टी चिप्स पर निर्भरता कम कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, iPhone Air की डिमांड Plus मॉडल्स से ज्यादा देखी जा रही है।
खासतौर पर दक्षिण कोरिया, जापान और यूरोप के कुछ बाजारों में इस फोन को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि Qualcomm जल्द ही अपने नए X85 मॉडेम के साथ बाजार में आने वाला है, जो परफॉर्मेंस को और बेहतर बना सकता है। ऐसे में Apple और Qualcomm के बीच यह तकनीकी प्रतिस्पर्धा और तेज होने वाली है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार लगातार तेज हो रही है, और इसी दिशा में Microsoft ने एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने तीन नए एडवांस्ड AI मॉडल्स लॉन्च किए हैं - MAI-Transcribe-1, MAI-Voice-1 और MAI-Image-2 जो टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन, रियलिस्टिक वॉइस और हाई-क्वालिटी इमेज जनरेशन जैसे कामों को और आसान और तेज बनाएंगे। तीनों AI मॉडल्स में क्या है खास? MAI-Transcribe-1: सबसे एडवांस ट्रांसक्रिप्शन MAI-Transcribe-1 को लेकर Microsoft का दावा है कि यह 25 प्रमुख भाषाओं में स्पीच-टू-टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन में बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है। कंपनी के अनुसार, यह मॉडल Google और OpenAI के मौजूदा मॉडल्स से भी कम एरर रेट देता है। यह मॉडल खास तौर पर तेज स्पीड और बेहतर प्राइस-परफॉर्मेंस के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे डेवलपर्स और एंटरप्राइज यूजर्स को फायदा मिलेगा। MAI-Voice-1: इंसानों जैसी आवाज़ MAI-Voice-1 की मदद से अब AI द्वारा जनरेट की गई आवाज़ पहले से ज्यादा नेचुरल और इमोशनल होगी। कुछ सेकंड की ऑडियो से कस्टम वॉइस तैयार 1 सेकंड में 60 सेकंड की ऑडियो जनरेशन लंबे कंटेंट में भी आवाज़ की स्थिरता यह मॉडल Copilot Audio Expressions और Podcasts जैसे फीचर्स को भी पावर देगा। MAI-Image-2: बेहतर और तेज इमेज जनरेशन MAI-Image-2 इमेज जनरेशन को एक नए स्तर पर ले जाता है। ज्यादा नैचुरल लाइटिंग और टेक्सचर इमेज में टेक्स्ट की बेहतर क्लैरिटी फास्ट प्रोसेसिंग इस मॉडल को डिजाइनर्स और फोटोग्राफर्स के साथ मिलकर तैयार किया गया है, जिससे प्रोफेशनल क्वालिटी आउटपुट मिल सके। कहां उपलब्ध होंगे ये मॉडल्स? ये सभी मॉडल्स Microsoft Foundry और MAI Playground के जरिए उपलब्ध हैं। इसके अलावा, MAI-Image-2 को Copilot, Bing और PowerPoint जैसे प्रोडक्ट्स में भी रोलआउट किया जा रहा है। AI रेस में Microsoft की मजबूत पकड़ इन नए मॉडल्स के साथ Microsoft ने साफ संकेत दे दिया है कि वह AI की वैश्विक रेस में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है। कंपनी का फोकस बेहतर स्पीड, कम लागत और उच्च गुणवत्ता वाले AI सॉल्यूशंस देने पर है। निष्कर्ष Microsoft के ये नए AI मॉडल्स न सिर्फ टेक्नोलॉजी को आसान बनाएंगे, बल्कि कंटेंट क्रिएशन, बिजनेस और डेवलपमेंट के नए अवसर भी खोलेंगे। आने वाले समय में AI का इस्तेमाल और ज्यादा व्यापक और प्रभावी होता नजर आएगा।
स्मार्टफोन बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Google के आगामी फ्लैगशिप स्मार्टफोन Google Pixel 11 Pro XL के CAD रेंडर्स लीक हो गए हैं, जिससे इसके डिजाइन और संभावित फीचर्स की झलक सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार कंपनी डिजाइन में बड़ा बदलाव करने के बजाय पुराने फॉर्मूले को ही आगे बढ़ाती नजर आ रही है। डिजाइन में नहीं होगा बड़ा बदलाव लीक हुए रेंडर्स के अनुसार Pixel 11 Pro XL का डिजाइन लगभग अपने पिछले मॉडल Google Pixel 10 Pro XL जैसा ही होगा। वही सिग्नेचर horizontal camera bar ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप बॉडी और कैमरा मॉड्यूल का समान डिजाइन यह दर्शाता है कि Google इस बार डिजाइन के बजाय परफॉर्मेंस और इंटरनल अपग्रेड पर ज्यादा ध्यान दे सकता है। बड़ी स्क्रीन के साथ XL एक्सपीरियंस Pixel 11 Pro XL में बड़ा डिस्प्ले देखने को मिल सकता है: 6.8-इंच LTPO AMOLED स्क्रीन बड़ा फॉर्म फैक्टर, प्रीमियम लुक पावर और वॉल्यूम बटन दाईं तरफ यह डिवाइस उन यूजर्स को टारगेट करेगा जो बड़ी स्क्रीन और प्रीमियम अनुभव चाहते हैं। संभावित स्पेसिफिकेशन लीक्स के मुताबिक इस स्मार्टफोन में दमदार हार्डवेयर मिल सकता है: नया Tensor G6 प्रोसेसर 16GB RAM 256GB स्टोरेज लगभग 162.7 x 76.5 x 8.5mm डाइमेंशन हालांकि, अभी तक कंपनी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। क्या है खास? Pixel 11 Pro XL में भले ही डिजाइन पुराना लगे, लेकिन इसकी ताकत इसके अंदर छिपी हो सकती है। बेहतर AI और कैमरा प्रोसेसिंग की उम्मीद Tensor चिप के साथ स्मार्ट फीचर्स फ्लैगशिप परफॉर्मेंस निष्कर्ष Google Pixel 11 Pro XL उन यूजर्स के लिए दिलचस्प हो सकता है जो डिजाइन से ज्यादा परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस को प्राथमिकता देते हैं। अब देखना होगा कि लॉन्च के समय कंपनी इसमें क्या नए इनोवेशन जोड़ती है
चीनी टेक कंपनी Xiaomi भारत में अपने इकोसिस्टम को तेजी से विस्तार दे रही है। स्मार्टफोन के बाद अब कंपनी प्रीमियम स्मार्ट टीवी सेगमेंट में बड़ा दांव खेलने जा रही है। Xiaomi ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि उसकी नई Xiaomi TV S Mini LED Series 15 अप्रैल 2026 को भारतीय बाजार में लॉन्च होगी। भारत में किन मॉडल्स के साथ एंट्री? कंपनी शुरुआत में इस सीरीज के 55 इंच और 65 इंच मॉडल लॉन्च कर सकती है। हालांकि ग्लोबल मार्केट में यह सीरीज 55, 65, 75, 85 और 98 इंच जैसे बड़े स्क्रीन ऑप्शन के साथ पहले ही पेश की जा चुकी है। भारत में आगे चलकर अन्य साइज भी लाए जा सकते हैं। डिस्प्ले में मिलेगा प्रीमियम अनुभव Xiaomi की इस नई टीवी सीरीज में Quantum MagiQ Mini LED डिस्प्ले टेक्नोलॉजी दी जाएगी, जो बेहतर ब्राइटनेस और कलर एक्युरेसी के लिए जानी जाती है। टीवी में मिलेगा: 4K रेजोल्यूशन (3840×2160 पिक्सल) 120Hz रिफ्रेश रेट 1200 निट्स तक पीक ब्राइटनेस 94% DCI-P3 कलर गामट HDR10+ और HLG सपोर्ट ये फीचर्स मिलकर यूजर्स को शानदार विजुअल एक्सपीरियंस देने का वादा करते हैं। दमदार ऑडियो और स्मार्ट फीचर्स ऑडियो के मामले में भी यह टीवी पीछे नहीं है। इसमें 15W के ड्यूल स्पीकर्स दिए जा सकते हैं, जो Dolby Atmos सपोर्ट के साथ इमर्सिव साउंड देंगे। यह टीवी Google TV पर चलेगा, जिससे यूजर्स को Netflix, Prime Video, Disney+ Hotstar जैसी सभी प्रमुख OTT ऐप्स का एक्सेस मिलेगा। साथ ही Chromecast और AirPlay सपोर्ट भी मिलेगा। कनेक्टिविटी और पोर्ट्स कनेक्टिविटी के लिए टीवी में Wi-Fi 5 और Bluetooth 5.0 का सपोर्ट मिल सकता है। इसके अलावा: HDMI 2.1 और HDMI 2.0 पोर्ट्स USB पोर्ट्स Ethernet पोर्ट जैसे जरूरी विकल्प भी शामिल होंगे। कीमत और उपलब्धता फिलहाल Xiaomi ने कीमत का खुलासा नहीं किया है। उम्मीद है कि लॉन्च के करीब कंपनी इसकी कीमत और सेल डेट की पूरी जानकारी साझा करेगी। यह लॉन्च भारत के स्मार्ट टीवी मार्केट में Xiaomi की पकड़ को और मजबूत कर सकता है, खासकर उन ग्राहकों के बीच जो प्रीमियम फीचर्स किफायती कीमत में चाहते हैं।