टेक बाजार में लॉन्च से पहले ही Oppo Pad 5 Pro को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। चीन टेलीकॉम डेटाबेस पर लिस्टिंग के जरिए इस अपकमिंग टैबलेट के डिजाइन और प्रमुख फीचर्स का खुलासा हुआ है। माना जा रहा है कि यह डिवाइस 21 अप्रैल 2026 को चीन में लॉन्च हो सकता है।
लीक के मुताबिक Oppo Pad 5 Pro में स्लिम और प्रीमियम डिजाइन देखने को मिलेगा।
टैबलेट में 13.2-इंच का LCD डिस्प्ले दिया जा सकता है, जिसका रेजोल्यूशन 1920×1200 पिक्सल और 16:9 आस्पेक्ट रेशियो होगा।
इस टैबलेट में Qualcomm का लेटेस्ट Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है, जो इसे हाई-परफॉर्मेंस डिवाइस बना सकता है।
यह टैबलेट Android 16 बेस्ड UI के साथ आ सकता है, जिससे यूजर्स को लेटेस्ट सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस मिलेगा।
Oppo Pad 5 Pro को कई वेरिएंट्स में लॉन्च किया जा सकता है:
इससे यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चुन सकेंगे।
टैबलेट में 13MP का रियर कैमरा मिलने की उम्मीद है, हालांकि फ्रंट कैमरा को लेकर जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
बैटरी की बात करें तो इसमें 13,380mAh की बड़ी बैटरी दी जा सकती है, जो 80W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगी। दावा है कि यह डिवाइस करीब 120 मिनट में फुल चार्ज हो सकता है।
यह टैबलेट खासतौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जो एंटरटेनमेंट और प्रोडक्टिविटी दोनों के लिए एक पावरफुल डिवाइस चाहते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Oppo इस टैबलेट के साथ अपने अन्य डिवाइस जैसे Find X9 Ultra, Find X9s Pro और Watch X3 Mini भी लॉन्च कर सकता है, जिससे यह इवेंट टेक वर्ल्ड में काफी बड़ा होने वाला है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Android यूजर्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। Google जल्द ही एक नया NFC-आधारित फीचर Tap to Share लॉन्च करने की तैयारी में है, जो iPhone के AirDrop की तरह काम करेगा। हाल ही में लीक हुई जानकारी में इस फीचर का इंटरफेस और काम करने का तरीका सामने आया है। कैसे काम करेगा Tap to Share? लीक के मुताबिक, इस फीचर के जरिए यूजर्स सिर्फ दो Android स्मार्टफोन को पास लाकर या हल्का ओवरलैप करके डेटा शेयर कर सकेंगे। दोनों फोन अनलॉक होने चाहिए फोन के ऊपरी हिस्से को एक-दूसरे के करीब रखना होगा कनेक्शन बनने पर स्क्रीन पर एनिमेशन दिखाई देगा अगर कनेक्शन नहीं बनता, तो फोन को बैक-टू-बैक रखकर दोबारा ट्राई करने का सुझाव दिया गया है। क्या-क्या शेयर कर पाएंगे? Tap to Share के जरिए यूजर्स कई तरह का डेटा तुरंत शेयर कर सकेंगे: कॉन्टैक्ट्स फोटो और वीडियो लिंक लोकेशन अन्य फाइल्स यह फीचर Android के मौजूदा शेयरिंग सिस्टम को और तेज और आसान बना सकता है। AirDrop से कितना अलग? हालांकि यह फीचर AirDrop जैसा है, लेकिन इसमें थोड़ा अलग तरीका अपनाया गया है। Android स्मार्टफोन्स में NFC एंटेना अलग-अलग जगहों पर होता है, इसलिए Google ने “ओवरलैप” करने का तरीका अपनाया है, ताकि कनेक्शन जल्दी बन सके। कब होगा लॉन्च? रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फीचर Android 17 के साथ लॉन्च किया जा सकता है। यह पहले से कुछ डिवाइसेस जैसे Pixel और Samsung (One UI 8.5) में टेस्टिंग फेज में देखा गया है। आने वाले समय में Oppo समेत अन्य ब्रांड्स भी इसे अपने डिवाइसेस में शामिल कर सकते हैं। Android यूजर्स के लिए क्या है फायदा? Tap to Share फीचर Android यूजर्स के लिए फाइल शेयरिंग को बेहद आसान और इंस्टेंट बना देगा। बिना इंटरनेट, बिना ऐप–सिर्फ फोन टच करते ही डेटा ट्रांसफर हो सकेगा।
भारत में ₹30,000 के बजट में स्मार्टफोन खरीदना पहले जितना आसान नहीं रहा। बढ़ती कीमतों, AI फीचर्स और हाई-एंड हार्डवेयर के चलते इस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा काफी तेज हो गई है। ऐसे में यूज़र्स अब सिर्फ स्पेसिफिकेशन नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकने वाला स्मार्टफोन चाहते हैं। इसी बीच realme का नया स्मार्टफोन realme 16 5G इस सेगमेंट में चर्चा का केंद्र बन गया है। क्या उम्मीद करें ₹30,000 के स्मार्टफोन से? आज के समय में इस बजट में फोन खरीदते वक्त यूज़र्स की प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं। अब सिर्फ कैमरा या प्रोसेसर नहीं, बल्कि बैटरी बैकअप, डिजाइन, स्मूद परफॉर्मेंस और लॉन्ग-टर्म यूसेज अहम हो गया है। यूज़र चाहते हैं कि उनका फोन सालों तक बिना स्लो हुए चलता रहे और रोजमर्रा के कामों में भरोसेमंद साबित हो। दमदार बैटरी: दिनभर का भरोसा realme 16 5G की सबसे बड़ी ताकत इसकी 7000mAh बैटरी है, जो भारी इस्तेमाल के बावजूद पूरे दिन आराम से चल सकती है। खास बात यह है कि इतनी बड़ी बैटरी के बावजूद फोन हल्का और स्लिम डिजाइन में आता है। साथ ही 60W फास्ट चार्जिंग इसे और भी प्रैक्टिकल बनाती है, जिससे यूज़र को बार-बार चार्जिंग की चिंता नहीं रहती। कैमरा: सोशल मीडिया यूज़र्स के लिए खास आज के दौर में कैमरा ही फोन की असली पहचान बन चुका है। इस फोन में 50MP फ्रंट और 50MP रियर कैमरा दिया गया है, जो खासतौर पर पोर्ट्रेट और सोशल मीडिया फोटोग्राफी के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें दिया गया “Selfie Mirror” फीचर यूज़र्स को रियर कैमरा से ही हाई-क्वालिटी सेल्फी लेने की सुविधा देता है, जो इस प्राइस रेंज में एक अलग और उपयोगी इनोवेशन माना जा रहा है। प्रीमियम डिजाइन और हल्का अनुभव फोन का “Gleaming Wings” डिजाइन इसे भीड़ से अलग बनाता है। लाइट पड़ने पर बैक पैनल का कलर बदलता है, जिससे यह देखने में प्रीमियम लगता है। हल्का वजन और स्लिम बॉडी इसे लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए आरामदायक बनाते हैं। परफॉर्मेंस: लंबे समय तक स्मूद एक्सपीरियंस realme 16 5G को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह लंबे समय तक स्मूद परफॉर्मेंस दे सके। चाहे मल्टीटास्किंग हो, गेमिंग हो या वीडियो स्ट्रीमिंग - फोन बिना लैग के काम करता है। रियल-लाइफ यूज़ के लिए तैयार आज के स्मार्टफोन को सिर्फ फीचर्स से नहीं, बल्कि उसकी मजबूती से भी आंका जाता है। यह फोन डस्ट और स्प्लैश रेजिस्टेंस के साथ आता है, जिससे यह रोजमर्रा के इस्तेमाल में ज्यादा भरोसेमंद बनता है। डिस्प्ले: हर स्थिति में शानदार व्यू इसमें दिया गया AMOLED डिस्प्ले तेज धूप में भी साफ नजर आता है। ब्राइटनेस, कलर और स्मूद रिफ्रेश रेट इसे वीडियो देखने और गेमिंग के लिए बेहतर बनाते हैं। क्यों खास है यह स्मार्टफोन? इस सेगमेंट में अक्सर यूज़र्स को किसी न किसी फीचर पर समझौता करना पड़ता है - कहीं बैटरी कमजोर होती है, तो कहीं कैमरा या डिजाइन। लेकिन realme 16 5G इन सभी पहलुओं को संतुलित तरीके से पेश करता है। अगर आप ₹30,000 के बजट में ऐसा स्मार्टफोन ढूंढ रहे हैं जो बैटरी, कैमरा, परफॉर्मेंस और डिजाइन - चारों में संतुलन बनाए रखे, तो realme 16 5G एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है।
आज के स्मार्टफोन में यूजर की सुरक्षा और प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कई खास फीचर्स दिए गए हैं। इन्हीं में से एक है स्क्रीन के ऊपर दिखने वाला छोटा सा हरा डॉट, जिसे कई लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका मतलब बेहद महत्वपूर्ण होता है। हरा डॉट क्या संकेत देता है? जब भी आपके फोन की स्क्रीन के ऊपर हरे रंग का डॉट दिखाई देता है, तो इसका मतलब होता है कि आपका कैमरा एक्टिव है। यानी कोई ऐप उस समय आपके कैमरे का इस्तेमाल कर रहा है। यह फीचर Android और iOS दोनों में यूजर की प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए दिया गया है, ताकि बिना जानकारी के कैमरा इस्तेमाल न हो सके। माइक्रोफोन के लिए क्या होता है? कुछ स्मार्टफोन्स में माइक्रोफोन के उपयोग के लिए अलग संकेत मिलता है। खासकर iPhone में अगर सिर्फ माइक्रोफोन चालू है, तो ऑरेंज डॉट दिखाई देता है। वहीं हरा डॉट कैमरा या कैमरा+माइक्रोफोन दोनों के एक्टिव होने का संकेत देता है। कब हो जाना चाहिए सावधान? अगर आप कैमरा इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, फिर भी हरा डॉट दिख रहा है, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है। इसका मतलब है कि कोई ऐप बैकग्राउंड में आपके कैमरे को एक्सेस कर रहा है। ऐसी स्थिति में तुरंत: हाल ही में इस्तेमाल किए गए ऐप्स चेक करें कैमरा परमिशन देखें संदिग्ध ऐप्स को हटाएं या उनकी एक्सेस बंद करें प्राइवेसी सुरक्षित कैसे रखें? Settings में जाकर Camera और Microphone permissions को कंट्रोल करें केवल भरोसेमंद ऐप्स को ही एक्सेस दें समय-समय पर ऐप परमिशन की समीक्षा करते रहें फोन की स्क्रीन पर दिखने वाला हरा डॉट एक छोटा संकेत जरूर है, लेकिन यह आपकी डिजिटल सुरक्षा का बड़ा हिस्सा है। इसे नजरअंदाज करना आपकी प्राइवेसी के लिए जोखिम भरा हो सकता है।