जर्मन कार निर्माता Volkswagen ने अपनी लोकप्रिय मिड-साइज SUV टाइगुन का फेसलिफ्ट मॉडल भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। नए अवतार में कार को कॉस्मेटिक बदलावों के साथ कई नए फीचर्स और अपडेटेड टेक्नोलॉजी दी गई है।
कीमत और ऑफर
नई टाइगुन फेसलिफ्ट की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹11 लाख रखी गई है, जो टॉप वेरिएंट में ₹19.3 लाख तक जाती है।
कंपनी ने ग्राहकों के लिए Assured Buyback Scheme भी पेश की है:
एक्सटीरियर में क्या नया?
नई टाइगुन को ज्यादा प्रीमियम और मॉडर्न लुक दिया गया है:
इंटीरियर और फीचर्स
केबिन में टेक्नोलॉजी और कम्फर्ट दोनों को अपग्रेड किया गया है:
इंजन और परफॉर्मेंस
इंजन ऑप्शन वही हैं, लेकिन गियरबॉक्स में बड़ा बदलाव हुआ है:
नया अपडेट:
माइलेज:
सेफ्टी फीचर्स
सुरक्षा के मामले में भी कार को मजबूत बनाया गया है:
किनसे होगा मुकाबला?
नई टाइगुन फेसलिफ्ट का मुकाबला भारतीय बाजार में इन SUVs से रहेगा:
Volkswagen Taigun फेसलिफ्ट अब पहले से ज्यादा फीचर-लोडेड, स्टाइलिश और टेक्नोलॉजी से लैस हो गई है। खासकर पैनोरमिक सनरूफ और नया ऑटोमैटिक गियरबॉक्स इसे सेगमेंट में और मजबूत बनाते हैं।
अगर आप 10–20 लाख के बजट में प्रीमियम SUV देख रहे हैं, तो यह नया मॉडल एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
जर्मन कार निर्माता Volkswagen ने अपनी लोकप्रिय मिड-साइज SUV टाइगुन का फेसलिफ्ट मॉडल भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। नए अवतार में कार को कॉस्मेटिक बदलावों के साथ कई नए फीचर्स और अपडेटेड टेक्नोलॉजी दी गई है। कीमत और ऑफर नई टाइगुन फेसलिफ्ट की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹11 लाख रखी गई है, जो टॉप वेरिएंट में ₹19.3 लाख तक जाती है। कंपनी ने ग्राहकों के लिए Assured Buyback Scheme भी पेश की है: 31 मई 2026 तक बुकिंग पर लागू 3 साल या 30,000 किमी बाद 75% तक वैल्यू वापस मिलने का दावा एक्सटीरियर में क्या नया? नई टाइगुन को ज्यादा प्रीमियम और मॉडर्न लुक दिया गया है: नए डिजाइन की LED हेडलाइट्स और बंपर फ्रंट और रियर में इल्युमिनेटेड लोगो पीछे LED लाइट बार के साथ सीक्वेंशियल इंडिकेटर्स नए अलॉय व्हील्स और नए कलर ऑप्शन इंटीरियर और फीचर्स केबिन में टेक्नोलॉजी और कम्फर्ट दोनों को अपग्रेड किया गया है: 10.25-इंच डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले 10.1-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम पहली बार पैनोरमिक सनरूफ वेंटिलेटेड सीट्स, एम्बिएंट लाइटिंग वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto वायरलेस चार्जिंग और 6-स्पीकर साउंड सिस्टम इंजन और परफॉर्मेंस इंजन ऑप्शन वही हैं, लेकिन गियरबॉक्स में बड़ा बदलाव हुआ है: 1.0-लीटर टर्बो पेट्रोल (115hp) 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल (150hp) नया अपडेट: 1.0L इंजन के साथ अब 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स 1.5L इंजन के साथ 7-स्पीड DCT माइलेज: 1.0L मैन्युअल: 19.98 kmpl 1.0L ऑटोमैटिक: 19.54 kmpl 1.5L DCT: 18.85 kmpl सेफ्टी फीचर्स सुरक्षा के मामले में भी कार को मजबूत बनाया गया है: 6 एयरबैग (स्टैंडर्ड) ABS + EBD इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम हायर वेरिएंट में रियर डिस्क ब्रेक्स किनसे होगा मुकाबला? नई टाइगुन फेसलिफ्ट का मुकाबला भारतीय बाजार में इन SUVs से रहेगा: Hyundai Creta Kia Seltos Skoda Kushaq Renault Duster Volkswagen Taigun फेसलिफ्ट अब पहले से ज्यादा फीचर-लोडेड, स्टाइलिश और टेक्नोलॉजी से लैस हो गई है। खासकर पैनोरमिक सनरूफ और नया ऑटोमैटिक गियरबॉक्स इसे सेगमेंट में और मजबूत बनाते हैं। अगर आप 10–20 लाख के बजट में प्रीमियम SUV देख रहे हैं, तो यह नया मॉडल एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आया है।
टेक्नोलॉजी जगत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां Amazon ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी Globalstar के अधिग्रहण की घोषणा की है। इस डील के साथ ही Amazon ने Apple के साथ साझेदारी भी की है, जिससे iPhone और Apple Watch में सैटेलाइट फीचर्स को और मजबूत किया जाएगा। क्या है Amazon की बड़ी योजना? Amazon इस अधिग्रहण के जरिए अपने लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) नेटवर्क को मजबूत करना चाहता है। कंपनी अपने Project Kuiper और Amazon Leo नेटवर्क के साथ Globalstar की तकनीक को जोड़कर एक बड़ा सैटेलाइट इकोसिस्टम तैयार करेगी। डील 2027 तक पूरी होने की उम्मीद 2028 से नए Direct-to-Device (D2D) सैटेलाइट सिस्टम की शुरुआत दुनिया भर में करोड़ों डिवाइसेस को कनेक्ट करने का लक्ष्य यह तकनीक स्मार्टफोन को सीधे सैटेलाइट से जोड़ने में सक्षम बनाएगी, जिससे बिना मोबाइल नेटवर्क के भी कॉल, मैसेज और डेटा सेवाएं मिल सकेंगी। iPhone और Apple Watch को क्या मिलेगा फायदा? Apple के साथ नई साझेदारी के तहत: iPhone 14 और उससे नए मॉडल्स Apple Watch में मिलने वाले सैटेलाइट फीचर्स जारी रहेंगे और बेहतर होंगे। इन फीचर्स में शामिल हैं: Emergency SOS via Satellite मैसेजिंग और लोकेशन शेयरिंग Find My और रोडसाइड असिस्टेंस Globalstar पहले से ही Apple डिवाइसेस को सैटेलाइट सपोर्ट देता है, और अब Amazon इस इकोसिस्टम को और मजबूत करेगा। क्यों है यह डील अहम? यह अधिग्रहण कई मायनों में गेमचेंजर साबित हो सकता है: दूर-दराज और नेटवर्क-फ्री इलाकों में कनेक्टिविटी आपातकाल (जैसे प्राकृतिक आपदा) में बेहतर नेटवर्क सपोर्ट मोबाइल नेटवर्क पर निर्भरता कम Amazon का लक्ष्य है कि दुनिया के उन हिस्सों तक इंटरनेट और कम्युनिकेशन पहुंचाया जाए, जहां अभी नेटवर्क नहीं है। भविष्य की झलक Amazon का अगला D2D सैटेलाइट नेटवर्क हजारों सैटेलाइट्स के जरिए काम करेगा, जिससे आने वाले समय में मोबाइल कनेक्टिविटी का पूरा ढांचा बदल सकता है। यह डील दिखाती है कि टेक कंपनियां अब सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को अगले बड़े डिजिटल रिवोल्यूशन के रूप में देख रही हैं। Amazon और Apple की यह साझेदारी सिर्फ एक बिजनेस डील नहीं, बल्कि भविष्य की कनेक्टिविटी की दिशा तय करने वाला कदम है। आने वाले वर्षों में यह तकनीक स्मार्टफोन यूजर्स के अनुभव को पूरी तरह बदल सकती है।
चीनी स्मार्टफोन बाजार में जल्द दस्तक देने जा रहा Redmi K90 Max लॉन्च से पहले ही सुर्खियों में आ गया है। Xiaomi के सब-ब्रांड Redmi का यह आगामी फ्लैगशिप डिवाइस Geekbench बेंचमार्किंग साइट पर स्पॉट हुआ है, जहां इसकी परफॉर्मेंस और प्रमुख स्पेसिफिकेशंस का खुलासा हुआ है। दमदार प्रोसेसर: Dimensity 9500 का मिलेगा साथ Geekbench लिस्टिंग के अनुसार, Redmi K90 Max में MediaTek Dimensity 9500 चिपसेट दिया जा सकता है। यह एक ऑक्टा-कोर प्रोसेसर है, जिसमें “All Big Core” आर्किटेक्चर देखने को मिलता है। इसमें: 1 Ultra core (4.21GHz) 3 Premium cores (3.50GHz) 4 Pro cores (2.70GHz) जैसी हाई-एंड कॉन्फ़िगरेशन दी गई है, जो इसे प्रीमियम फ्लैगशिप सेगमेंट में मजबूती से खड़ा करती है। 16GB RAM और Android 16 का सपोर्ट लिस्टिंग से यह भी सामने आया है कि यह फोन करीब 14.88GB RAM के साथ आएगा, जिसे मार्केट में 16GB RAM के रूप में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही यह डिवाइस लेटेस्ट Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करेगा, जिसके ऊपर Xiaomi का नया HyperOS 3 इंटरफेस मिलने की संभावना है। Geekbench स्कोर ने बढ़ाई उम्मीदें परफॉर्मेंस के मामले में Redmi K90 Max ने शानदार स्कोर दर्ज किए हैं: सिंगल-कोर: 3,513 मल्टी-कोर: 10,711 ये आंकड़े बताते हैं कि यह फोन फ्लैगशिप डिवाइसेज के बराबर परफॉर्मेंस देने में सक्षम होगा। अन्य फ्लैगशिप से सीधी टक्कर Redmi K90 Max का मुकाबला सीधे Vivo X300 Pro और Oppo Find X9 Pro जैसे हाई-एंड स्मार्टफोन्स से माना जा रहा है, जो इसी चिपसेट के साथ आते हैं। परफॉर्मेंस आंकड़ों के आधार पर यह साफ है कि Redmi का यह फोन फ्लैगशिप सेगमेंट में मजबूत प्रतिस्पर्धा पेश करेगा। जल्द हो सकता है लॉन्च कंपनी ने पहले ही संकेत दे दिया है कि Redmi K90 Max को चीन में जल्द लॉन्च किया जाएगा। इसके बाद इसे ग्लोबल मार्केट में भी पेश किया जा सकता है।