अंतरराष्ट्रीय खबर

Iranian and Indian diplomats discussing BRICS cooperation amid rising US-Iran geopolitical tensions
BRICS बैठक के लिए भारत आ सकते हैं ईरान के उप विदेश मंत्री, अमेरिका से तनाव के बीच अहम होगा दौरा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi के भारत दौरे की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि वह मई में नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं. यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में लगातार अस्थिरता बनी हुई है और ईरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक समर्थन मजबूत करने में जुटा है. भारत फिलहाल BRICS का चेयरमैन है और 14-15 मई को विदेश मंत्रियों की अहम बैठक की मेजबानी करेगा. यह बैठक सितंबर 2026 में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है. जयशंकर-अराघची बातचीत के बाद बढ़ी हलचल यह संभावित दौरा भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi के बीच हुई हाई-लेवल फोन बातचीत के बाद चर्चा में आया है. माना जा रहा है कि दोनों देशों ने पश्चिम एशिया की स्थिति और बहुपक्षीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया है. रूस के विदेश मंत्री भी आएंगे भारत रूस ने भी पुष्टि की है कि उसके विदेश मंत्री Sergey Lavrov 14-15 मई को भारत में होने वाली बैठक में शामिल होंगे. रूस के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह बैठक वैश्विक मुद्दों और ग्लोबल गवर्नेंस पर गंभीर चर्चा का बड़ा मंच बनेगी. क्या है इस बार BRICS की थीम? भारत की अध्यक्षता में इस बार ब्रिक्स की थीम रखी गई है: “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” इस थीम का उद्देश्य विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करना और टिकाऊ विकास पर जोर देना है. क्यों अहम मानी जा रही है यह बैठक? विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बैठक कई वजहों से महत्वपूर्ण है: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बड़े देशों की कूटनीतिक रणनीति पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति पर चर्चा वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर समन्वय सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS समिट की तैयारी रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Maria Zakharova ने कहा है कि इस बैठक में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने और वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाने पर विशेष फोकस रहेगा. नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक अब सिर्फ कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच एक बड़े भू-राजनीतिक मंच के रूप में देखी जा रही है.

surbhi मई 7, 2026 0
murder of a five-year-old Indigenous girl
ऑस्ट्रेलिया में 5 साल की बच्ची की हत्या के बाद हिंसा, गुस्साई भीड़ ने मचाया बवाल

Violence in Australia: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और नॉर्दर्न टेरिटरी क्षेत्र में उस समय तनाव फैल गया, जब 5 साल की एक आदिवासी बच्ची की हत्या के मामले ने हिंसक रूप ले लिया. बच्ची की हत्या के आरोप में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आये और कई जगहों पर हिंसा व झड़पें देखने को मिलीं. बच्ची की हत्या से भड़का गुस्सा रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची शनिवार देर शाम लापता हो गयी थी. बाद में पुलिस ने उसका शव बरामद किया. नॉर्दर्न टेरिटरी के पुलिस कमिश्नर मार्टिन डोल ने बताया कि जेफरसन लुईस नामक व्यक्ति पर बच्ची के अपहरण और हत्या का आरोप है. बताया गया कि आरोपी खुद एलिस स्प्रिंग्स के एक टाउन कैंप में पहुंचा था, जिसके बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा फैल गया. आरोपी की भीड़ ने की पिटाई गुस्साई भीड़ ने आरोपी को पकड़कर बुरी तरह पीटा, जिससे वह बेहोश हो गया. बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसी दौरान अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग जमा हो गये. रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 400 लोगों की भीड़ ने इलाके में विरोध प्रदर्शन किया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प प्रदर्शन के दौरान हालात हिंसक हो गये. भीड़ ने पत्थरबाजी की और पुलिस वाहनों, एंबुलेंस तथा फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया. झड़प में कई पुलिसकर्मी और मेडिकल स्टाफ घायल हुए. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया. “पेबैक” की मांग ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग “पेबैक” की मांग कर रहे थे. आदिवासी समुदायों में “पेबैक” का मतलब पारंपरिक या शारीरिक सजा से होता है. घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आये, जिनमें भीड़ आरोपी के खिलाफ गुस्सा जाहिर करती दिखाई दी. जंगल में चला सर्च ऑपरेशन बच्ची के लापता होने के बाद सैकड़ों लोगों ने घने जंगलों में तलाशी अभियान चलाया था. बाद में पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से बच्ची का शव बरामद किया गया. पुलिस ने सुरक्षा कारणों से आरोपी जेफरसन लुईस को नॉर्दर्न टेरिटरी की राजधानी डार्विन भेज दिया है. पीएम ने की शांति की अपील ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री Anthony Albanese ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि वह लोगों के गुस्से और दर्द को समझते हैं. उन्होंने समुदाय से शांति और एकजुटता बनाये रखने की अपील की. वहीं पुलिस कमिश्नर मार्टिन डोल ने भी लोगों से कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की है. पूरे इलाके में तनाव फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है. इस घटना ने ऑस्ट्रेलिया में आदिवासी समुदायों की सुरक्षा, सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है.  

surbhi मई 7, 2026 0
Chinese naval warships operating near Taiwan amid rising Indo-Pacific military tensions
ताइवान के पास बढ़ी चीनी सैन्य गतिविधि, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में फिर बढ़ा तनाव

Indo-Pacific Tension: मिडिल ईस्ट में ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसके आसपास चीन के सात नौसैनिक युद्धपोत और एक सरकारी पोत सक्रिय पाए गए हैं. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और चीन-ताइवान संबंधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ताइवान के आसपास दिखे चीनी युद्धपोत ताइवान के रक्षा मंत्रालय (MND) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि ताइवान के आसपास सात PLAN (People’s Liberation Army Navy) जहाज और एक आधिकारिक पोत की गतिविधि दर्ज की गयी है. मंत्रालय ने कहा कि ताइवान की सशस्त्र सेनाओं ने पूरी स्थिति पर नजर रखी और आवश्यक प्रतिक्रिया दी. हालांकि इस दौरान चीनी वायुसेना की कोई गतिविधि दर्ज नहीं की गयी. लगातार दूसरे दिन बढ़ी सैन्य गतिविधि यह लगातार दूसरा दिन है जब ताइवान के आसपास चीनी सैन्य गतिविधि देखी गयी है. इससे एक दिन पहले भी ताइवान ने एक चीनी सैन्य विमान, छह नौसैनिक जहाज और एक सरकारी पोत की मौजूदगी दर्ज की थी. ताइवान के मुताबिक, उस दौरान एक चीनी सैन्य विमान ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) के उत्तरी हिस्से में भी प्रवेश कर गया था. इसे क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाला संकेत माना जाता है. चीन की “ग्रे ज़ोन” रणनीति? विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब ताइवान पर दबाव बनाने के लिए “ग्रे ज़ोन टैक्टिक्स” का इस्तेमाल कर रहा है. इसका मतलब है कि बिना खुला युद्ध छेड़े लगातार सैन्य मौजूदगी और गतिविधियों के जरिए दबाव बनाना. इस रणनीति के तहत चीन नियमित रूप से अपने नौसैनिक जहाजों और विमानों को ताइवान के आसपास भेजता है, ताकि सैन्य और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस बार केवल नौसैनिक गतिविधि और वायुसेना की अनुपस्थिति यह संकेत देती है कि चीन फिलहाल सीमित लेकिन लगातार दबाव की नीति अपना रहा है. ताइवान ने कहा- स्थिति पर नजर ताइवान की सेना ने कहा कि उसने पूरी स्थिति पर नजर रखी और जरूरत के मुताबिक जवाबी कदम उठाये. हालांकि सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसकी प्रतिक्रिया क्या रही. लगातार दो दिनों तक चीनी नौसैनिक गतिविधियों के बढ़ने से यह संकेत मिल रहे हैं कि बीजिंग क्षेत्र में अपना दबदबा लगातार दिखाना चाहता है. ताइवान-चीन विवाद क्या है? चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और “वन चाइना पॉलिसी” के तहत उस पर दावा करता है. दूसरी तरफ ताइवान खुद को अलग लोकतांत्रिक शासन वाला क्षेत्र मानता है, जिसकी अपनी सरकार, सेना और आर्थिक व्यवस्था है. इतिहास के अनुसार, 1895 में चीन-जापान युद्ध के बाद ताइवान जापान के नियंत्रण में चला गया था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह फिर चीन के प्रभाव में आया, लेकिन इसकी राजनीतिक स्थिति को लेकर विवाद आज तक जारी है. इंडो-पैसिफिक में बढ़ी वैश्विक चिंता मिडिल ईस्ट संकट के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता भी बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गतिविधियां लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में बड़े सैन्य अभ्यास या और आक्रामक कदम भी देखने को मिल सकते हैं.  

surbhi मई 7, 2026 0
IAS officers posting delay
12 आईएएस समेत 72 अफसरों को पोस्टिंग का इंतजार

रांची। राज्य भर में प्रशासनिक सेवा के 72 अधिकारी बिना पोस्टिंग के बैठे हैं, जबकि कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। इन 72 अधिकारियों में 12 आईएएस अधिकारी हैं। 17 अप्रैल की रात राज्य सरकार ने 17 जिलों के उपायुक्तों का तबादला किया था। उस तबादला में 11 जिलों के डीसी की कहीं पदस्थापना नहीं हुई थी। उन्हें मुख्यालय में योगदान करने का निर्देश दिया गया था। कार्मिक विभाग में योगदान के बाद वे अबतक पदस्थापन की प्रतीक्षा में हैं। उनकी कहीं पोस्टिंग नहीं हुई है। इसके अलावा कृषि विभाग में बदलाव के बाद जीशान कमर भी वेटिंग फॉर पोस्टिंग में बैठे हैं। JAS के 60 अफसर पोस्टिंग के इंतजार मे इसके अलावा झारखंड प्रशासनिक सेवा के 60 अधिकारी भी पोस्टिंग की प्रतीक्षा में हैं। इधर, ट्रेनिंग पूरा होने के ढाई साल बाद भी 39 नवनियुक्त डीएसपी को पोस्टिंग नहीं मिल सकी है। राज्य के कई अनुमंडलों में एसडीएम के पद खाली हैं। कई महत्वपूर्ण पद प्रभार में हैं। सचिवालय सेवा के करीब डेढ़ दर्जन अधिकारी भी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।

Anjali Kumari मई 7, 2026 0
Donald Trump speaking on Middle East tensions and warning Iran over the Strait of Hormuz crisis
ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- समझौता नहीं किया तो होगी भीषण बमबारी

Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तों को नहीं मानता और होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता, तो उस पर पहले से ज्यादा तीव्र और ताकतवर बमबारी की जाएगी. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि यदि ईरान तय शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो अमेरिकी सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को समाप्त कर दिया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट को ईरान सहित सभी देशों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा. ट्रंप बोले- नहीं माने तो बरसेंगे बम ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ कहा कि अगर ईरान समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और ज्यादा आक्रामक होगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने देगा. उन्होंने लिखा कि “अगर ईरान सहमत नहीं होता, तो बमबारी पहले से कहीं अधिक ताकतवर होगी.” ट्रंप के इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. ईरान ने भी दी चेतावनी ट्रंप का यह बयान ईरानी संसद अध्यक्ष एमबी गालिबफ की टिप्पणी के बाद आया है. गालिबफ ने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर “नया समीकरण” तैयार हो रहा है और अमेरिका की नाकाबंदी नीति उसके लिए भारी साबित होगी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने युद्धविराम का उल्लंघन कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है. ईरान ने आरोप लगाया कि नाकाबंदी की वजह से जहाजों, तेल और गैस आपूर्ति की सुरक्षा प्रभावित हुई है. प्रोजेक्ट फ्रीडम अस्थायी रूप से रोका गया इस बीच ट्रंप प्रशासन ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए शुरू किये गये “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया है. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच “पूर्ण और अंतिम समझौते” को लेकर बातचीत में कुछ प्रगति हुई है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समेत कई देशों के अनुरोध और कूटनीतिक प्रयासों को देखते हुए यह फैसला लिया गया. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री नाकाबंदी अभी भी जारी रहेगी. पाकिस्तान ने ट्रंप को कहा धन्यवाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ट्रंप का यह कदम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देगा. शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा कूटनीति और संवाद के जरिए विवादों के समाधान का समर्थन करता है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत से स्थायी शांति का रास्ता निकलेगा. होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है.  

surbhi मई 7, 2026 0
Israeli Air Force fighter jets F-35 and F-15 flying amid rising Middle East tensions
Israel US Fighter Jet Deal: ईरान तनाव के बीच इजराइल ने बढ़ाई ताकत, F-35 और F-15IA फाइटर जेट की बड़ी डील को मंजूरी

तेल अवीव/वॉशिंगटन, 4 मई: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Israel ने अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। United States से अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी देते हुए इजराइल ने दो स्क्वाड्रन फाइटर जेट लेने का फैसला किया है, जिसमें F-35 Lightning II और F-15EX Eagle II शामिल हैं। अरबों डॉलर की डील, एयरफोर्स होगी और मजबूत इजराइल के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस सौदे के तहत एक स्क्वाड्रन स्टील्थ मल्टी-रोल F-35 Lightning II और एक स्क्वाड्रन एडवांस्ड F-15EX Eagle II खरीदे जाएंगे। इस डील में विमानों के साथ-साथ उनका रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है। इन विमानों का निर्माण अमेरिकी रक्षा कंपनियां Lockheed Martin और Boeing करेंगी। नेतन्याहू का बड़ा बयान प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस फैसले को इजराइल की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि देश अपनी “हवाई श्रेष्ठता” को और मजबूत करने के लिए यह कदम उठा रहा है। नेतन्याहू ने जोर देते हुए कहा कि इजराइली वायुसेना पहले ही कई अभियानों में अपनी क्षमता साबित कर चुकी है और नए विमान उसे किसी भी समय, किसी भी स्थान पर कार्रवाई करने में और सक्षम बनाएंगे। 350 अरब शेकेल का रक्षा निवेश सरकार ने आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र में लगभग 350 अरब शेकेल (करीब 118 अरब डॉलर) निवेश करने की योजना भी बनाई है। इस निवेश का मकसद घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी निर्भरता को कम करना है। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि भविष्य में इजराइल अपने स्वदेशी अत्याधुनिक फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में भी काम करेगा। ड्रोन खतरे से निपटने की तैयारी इजराइल ने बढ़ते ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए एक नई रक्षा परियोजना भी शुरू की है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के जरिए ड्रोन हमलों को रोकना और हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाना है। ईरान से तनाव बना बड़ी वजह हाल के महीनों में Iran के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और टकराव ने इजराइल को अपनी रक्षा रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा कि हालिया घटनाओं से मिले अनुभवों ने यह साफ कर दिया है कि देश को अपनी सैन्य क्षमता और अधिक मजबूत करनी होगी। कितनी बढ़ेगी ताकत? इस डील के बाद इजराइल की वायुसेना में: F-35 Lightning II की संख्या करीब 100 तक पहुंच सकती है F-15EX Eagle II की संख्या लगभग 50 हो सकती है रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए F-35 विमानों की डिलीवरी 2028 तक और F-15IA की डिलीवरी 2031 से शुरू होने की संभावना है। दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा इजराइल का कहना है कि यह खरीद केवल मौजूदा हालात के लिए नहीं, बल्कि आने वाले दशकों तक क्षेत्रीय सैन्य बढ़त बनाए रखने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।  

surbhi मई 4, 2026 0
Cargo ship attacked by small boats in Strait of Hormuz raising global maritime security concerns
Strait of Hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज पर हमला, छोटी नौकाओं से टारगेट– बढ़ा वैश्विक तनाव

मस्कट/तेहरान, 4 मई: दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल Strait of Hormuz में एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रिटेन की समुद्री निगरानी एजेंसी United Kingdom Maritime Trade Operations ने जानकारी दी है कि ईरान के सिरिक तट के पास एक मालवाहक जहाज पर कई छोटी नौकाओं के जरिए हमला किया गया। कैसे हुआ हमला? रिपोर्ट के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने छोटी-छोटी तेज गति वाली नौकाओं का इस्तेमाल करते हुए कार्गो शिप को निशाना बनाया। इस तरह के हमले आमतौर पर ‘स्वार्म टैक्टिक्स’ के रूप में देखे जाते हैं, जिसमें कई नावें एक साथ हमला कर जहाज को घेर लेती हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले के पीछे कौन था और इसका मकसद क्या था। चालक दल सुरक्षित, लेकिन खतरा बरकरार सबसे राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं। United Kingdom Maritime Trade Operations ने क्षेत्र से गुजरने वाले अन्य जहाजों को हाई अलर्ट पर रहने और सावधानीपूर्वक मार्ग तय करने की सलाह दी है। ईरान का दावा– ‘हमारा नियंत्रण कायम’ घटना के बाद ईरानी अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा कि Strait of Hormuz पर उनका नियंत्रण पूरी तरह बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि जो जहाज अमेरिका या इजराइल से जुड़े नहीं हैं, वे निर्धारित शुल्क देकर सुरक्षित तरीके से इस मार्ग से गुजर सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका-ईरान टकराव की पृष्ठभूमि Donald Trump प्रशासन द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रखी गई है। अमेरिकी नौसेना इस इलाके में सक्रिय है और हर आने-जाने वाले जहाज पर नजर रख रही है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें 30 दिनों के भीतर विवाद सुलझाने की बात कही गई है। हालांकि Donald Trump ने इस प्रस्ताव को लेकर संदेह जताया है और किसी ठोस समझौते की संभावना को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। क्यों बेहद अहम है होर्मुज? Strait of Hormuz वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है खाड़ी देशों से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है बढ़ती घटनाएं और सुरक्षा चिंता पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले, जब्ती और सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा कमजोर हो रही है।  

surbhi मई 4, 2026 0
Donald Trump warns Iran amid rising tensions over oil pipelines and nuclear deal
ईरान को ट्रंप का अल्टीमेटम: ‘तीन दिन में मानो समझौता, वरना तेल पाइपलाइनें फट जाएंगी’

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump ने ईरान को कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तेहरान ने जल्द समझौता नहीं किया, तो उसकी तेल आपूर्ति व्यवस्था गंभीर संकट में पड़ सकती है। “तीन दिन का समय, नहीं तो बड़ा नुकसान” फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में Donald Trump ने कहा कि ईरान के पास समझौते के लिए केवल तीन दिन हैं। उनका दावा है कि अगर ईरान तेल निर्यात जारी नहीं रख पाया, तो उसकी पाइपलाइनें तकनीकी और प्राकृतिक कारणों से खराब होकर फट सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक बार नुकसान होने के बाद ईरान अपनी पाइपलाइन क्षमता को पूरी तरह बहाल नहीं कर पाएगा और उत्पादन करीब 50% तक सीमित हो सकता है। बातचीत के लिए अमेरिका की शर्त Donald Trump ने दोहराया कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है, तो उसे खुद पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि तेहरान सीधे वॉशिंगटन से संपर्क कर सकता है—“फोन मौजूद हैं और सुरक्षित लाइनें भी।” पाकिस्तान में बढ़ी कूटनीतिक हलचल इस बीच अब्बास अराघची एक बार फिर पाकिस्तान पहुंचे हैं। तीन दिनों में यह उनका दूसरा दौरा है, जहां उन्होंने आर्मी चीफ असीम मुनीर और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को कुछ अहम मुद्दों पर लिखित संदेश भी भेजा है, जिससे संकेत मिलता है कि बैक-चैनल डिप्लोमेसी जारी है। रूस भी बना अहम खिलाड़ी कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए अब्बास अराघची अब रूस के दौरे पर जा रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति Vladimir Putin से होने वाली है। क्या बढ़ेगा टकराव या बनेगी डील? एक तरफ Donald Trump का सख्त अल्टीमेटम है, तो दूसरी ओर ईरान लगातार कूटनीतिक रास्ते तलाश रहा है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या दोनों देशों के बीच समझौता होगा या तनाव और गहराएगा।  

surbhi अप्रैल 27, 2026 0
uncertain Iran-US peace talks
‘मैदान-ए-जंग में नए पत्ते खोलने को तैयार’–बातचीत के बीच ईरान का सख्त संदेश

Iran US Tension: ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत की अटकलों के बीच तेहरान ने सख्त रुख अपनाया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी दबाव और धमकियों के बीच किसी भी वार्ता को स्वीकार नहीं करेगा। ईरान का तीखा बयान ईरानी संसद (मजलिस) के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा: “ट्रंप घेराबंदी और युद्धविराम तोड़कर बातचीत की मेज़ को आत्मसमर्पण की मेज़ बनाना चाहते हैं या फिर युद्ध को सही ठहराना चाहते हैं।” ग़ालिबाफ़ ने साफ कहा कि ईरान “धमकियों के साये में बातचीत” नहीं करेगा। ‘मैदान-ए-जंग में नए पत्ते खोलने की तैयारी’ ग़ालिबाफ़ ने अपने बयान में संकेत दिया कि ईरान सैन्य विकल्पों के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा: “पिछले दो हफ्तों से हमने मैदान-ए-जंग में नए पत्ते खोलने की तैयारी कर ली है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रंप की रणनीति पर सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं और समझौते की बात कर रहे हैं। लेकिन ईरान का आरोप है कि: अमेरिका एक तरफ बातचीत की बात करता है दूसरी तरफ सैन्य दबाव और नाकेबंदी जारी रखता है पाकिस्तान में वार्ता पर अनिश्चितता Islamabad में दूसरे दौर की बातचीत की तैयारियां चल रही हैं। अमेरिका ने अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कही है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा: अभी तक वार्ता को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है ईरान फिलहाल स्थिति का आकलन कर रहा है पहले दौर की बातचीत का संदर्भ ईरान और अमेरिका के बीच पहले दौर की बातचीत पहले ही हो चुकी है, जिसमें Mohammad Bagher Ghalibaf ने ईरान का नेतृत्व किया था। हालांकि, वह वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Iran Refuses Talks
होर्मुज पर अड़ा ईरान, दूसरे दौर की वार्ता पर संशय; मुनीर ने ट्रंप को किया फोन

US Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता फिलहाल स्थगित हो गई है, क्योंकि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल किसी भी बातचीत में शामिल होने के मूड में नहीं है। इसी बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत की खबर सामने आई है। ईरान ने बातचीत से किया इनकार ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ कहा है कि तेहरान के पास फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी नए दौर की वार्ता की कोई योजना नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में शांति वार्ता की कोशिशें तेज थीं और मध्यस्थता की तैयारी चल रही थी। मुनीर-ट्रंप फोन कॉल में क्या हुआ? रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में बताया गया कि: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव वार्ता के लिए सबसे बड़ा रोड़ा है ईरान की स्थिति के कारण बातचीत आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है बताया जा रहा है कि ट्रंप ने इस मुद्दे पर “गंभीरता से विचार करने” की बात कही है। होर्मुज संकट बना मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। हाल ही में: अमेरिका ने ईरानी ध्वज वाले मालवाहक पोत को रोका ईरान ने इसे “समुद्री डकैती” बताया दोनों देशों के बीच समुद्री तनाव और बढ़ गया अमेरिकी कार्रवाई और ईरान की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, ईरानी जहाज “तुस्का” को रुकने की चेतावनी दी गई और फिर उसे नियंत्रित कर लिया गया। अमेरिका का दावा है कि: जहाज प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा था अमेरिकी मरीन ने उसे सुरक्षित रूप से कब्जे में लिया वहीं ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पहली बार नाकेबंदी के बाद बड़ी घटना अमेरिकी नाकेबंदी अभियान शुरू होने के बाद यह पहली बड़ी घटना है जब किसी ईरानी पोत को सीधे रोका गया है। ईरान का कहना है कि यह: समुद्री डकैती जैसा कदम है और युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन है सीजफायर पर भी खतरा ईरान और अमेरिका के बीच जारी 14 दिनों का सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म हो रहा है। ऐसे में: वार्ता की अनिश्चितता बढ़ गई है होर्मुज तनाव ने स्थिति और जटिल बना दी है पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भी सवाल उठ रहे हैं

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
High level talks
पाकिस्तान में सज रही वार्ता की सेज, क्या होर्मुज पर छिड़ा ‘संग्राम’ फिर बिगाड़ेगा खेल?

Iran US Ceasefire: ईरान और अमेरिका के बीच जारी 14 दिनों का युद्धविराम 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है। ऐसे में दोनों देशों के बीच नए दौर की बातचीत की तैयारी तेज हो गई है। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और ईरानी जहाज की कथित जब्ती के बाद हालात फिर से अनिश्चित हो गए हैं। पाकिस्तान इस बातचीत का मध्यस्थ बनकर एक बार फिर शांति वार्ता कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मौजूदा हालात इसे मुश्किल बना रहे हैं। होर्मुज तनाव से बढ़ी चिंता हाल ही में अमेरिका द्वारा एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज को रोककर जब्त करने के बाद ईरान ने कड़ा विरोध जताया है। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज उसके लगाए गए प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से बातचीत में कहा कि अमेरिका का रवैया “दोहरा और अस्थिर” है। ईरान का सख्त रुख: अभी कोई वार्ता नहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा: “अभी हमारे पास अगले दौर की वार्ता के लिए कोई निर्णय नहीं है।” यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान में दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी चल रही थी। ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान को एक “बेहतरीन डील” दी है और अब फैसला ईरान को करना है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा: ईरान या तो समझौता करे या फिर “तबाही” के लिए तैयार रहे अमेरिकी सेना ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बना सकती है उनके इस बयान ने तनाव और बढ़ा दिया है। बातचीत में सबसे बड़ा रोड़ा क्या है? ईरान का आरोप है कि अमेरिका लगातार युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। इनमें शामिल हैं: ईरानी जहाजों पर कार्रवाई समुद्री रास्तों पर दबाव क्षेत्रीय संघर्षों में हस्तक्षेप ईरान का कहना है कि इन हालात में बातचीत का माहौल नहीं बन पा रहा है। पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें तेज पाकिस्तान एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पिछले 24 घंटों में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान दोनों से संपर्क तेज कर दिए हैं। पाक गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ईरानी दूतावास का दौरा किया ईरान को बातचीत के लिए मनाने की कोशिश जारी दूसरे दौर की बैठक की तैयारी चल रही है पहली वार्ता रही थी बेनतीजा 11–12 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच 21 घंटे लंबी बातचीत हुई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अब सभी की नजरें दूसरे दौर की संभावित बैठक पर टिकी हैं, जो या तो तनाव कम कर सकती है या हालात और बिगाड़ सकती है।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Donald Trump angrily reacting during press briefing over question on Indian ships attack
Iran-US War: भारतीय जहाजों पर हमले के सवाल पर ट्रंप भड़के, पत्रकार को कहा–“Out”

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump का गुस्सा कैमरे पर देखने को मिला। Strait of Hormuz में भारतीय टैंकरों पर हुए हमले को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने सख्त प्रतिक्रिया दी और पत्रकार को बाहर जाने के लिए कह दिया। क्या हुआ था? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों को निशाना बनाया। इस घटना पर India ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे बेहद गंभीर बताया। सवाल पर क्यों भड़के ट्रंप? 18 अप्रैल को व्हाइट हाउस में प्रेस इंटरैक्शन के दौरान: CBS News की रिपोर्टर Olivia Rinaldi ने ट्रंप से सवाल पूछा सवाल था: भारतीय जहाजों पर हुए हमले पर अमेरिका का क्या रुख है? जैसे ही सवाल पूछा गया, ट्रंप नाराज हो गए और उन्होंने रिपोर्टर को “Out” कहकर बाहर जाने को कहा। यह पूरा वाकया कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर विवाद इस घटना के बाद: कई लोगों ने ट्रंप के व्यवहार की आलोचना की पत्रकारिता की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठे खुद ओलिविया रिनाल्डी ने भी वीडियो शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ एक अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर सवाल पूछा था। कौन हैं ओलिविया रिनाल्डी? Olivia Rinaldi: CBS News में व्हाइट हाउस रिपोर्टर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान को कवर कर चुकी हैं “CBS Evening News” और “60 Minutes” जैसे कार्यक्रमों से जुड़ी रही हैं क्यों बढ़ा तनाव? United States और ईरान के बीच तनाव चरम पर है होर्मुज में जहाजों पर हमलों से स्थिति और गंभीर हो गई है कूटनीतिक बातचीत में फिलहाल कोई खास प्रगति नहीं दिख रही

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Military drones flying over US warship in Gulf of Oman amid rising Iran-US tensions
ओमान की खाड़ी में टकराव तेज: US की कार्रवाई के बाद ईरान ने भेजे ड्रोन, बढ़ा युद्ध का खतरा

मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। Gulf of Oman में United States और Iran के बीच सीधा सैन्य टकराव जैसी स्थिति बन गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका द्वारा ईरानी मर्चेंट शिप पर कार्रवाई के बाद तेहरान ने जवाबी कदम उठाते हुए अमेरिकी युद्धपोतों की ओर ड्रोन भेजे हैं। क्या हुआ ओमान की खाड़ी में? ईरानी मीडिया के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार: अमेरिकी सेना ने ईरान के एक व्यापारिक जहाज़ को निशाना बनाया जहाज़ को रोककर उसे वापस ईरानी समुद्री सीमा में भेजने की कोशिश की गई इस कार्रवाई को ईरान ने “उकसावे वाली” कार्रवाई बताया इसके जवाब में: ईरान की सेना और Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अमेरिकी युद्धपोतों की दिशा में ड्रोन तैनात किए IRGC का दावा है कि अमेरिकी नौसेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, जिससे स्थिति और धुंधली बनी हुई है। होर्मुज और खाड़ी की रणनीतिक अहमियत Strait of Hormuz और Gulf of Oman वैश्विक तेल व्यापार के सबसे अहम मार्गों में गिने जाते हैं। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव सीधे तेल कीमतों और सप्लाई पर असर डाल सकता है इसी वजह से इस क्षेत्र में बढ़ती हर गतिविधि को वैश्विक स्तर पर गंभीरता से देखा जा रहा है। जहाज़ ‘टूस्का’ पर कार्रवाई अमेरिका ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि उसने ‘टूस्का’ नाम के ईरानी जहाज़ को रोक लिया है। United States Central Command (CENTCOM) के अनुसार कई बार चेतावनी देने के बाद भी जहाज़ नहीं रुका इसके बाद अमेरिकी युद्धपोत USS Spruance ने उसके इंजन रूम पर फायरिंग की जहाज़ को निष्क्रिय कर अमेरिका ने अपने कब्जे में ले लिया इस कार्रवाई की पुष्टि Donald Trump ने भी की है। ईरान का पलटवार और आरोप ईरान ने इस पूरी घटना को “समुद्री डकैती” करार दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर नाकेबंदी जारी रही तो होर्मुज पूरी तरह बंद रहेगा साथ ही, ईरान ने कुछ विदेशी टैंकरों को भी रास्ते से वापस भेजा है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। सीजफायर पर भी सवाल ईरान ने आरोप लगाया है कि 8 अप्रैल को घोषित युद्धविराम का अमेरिका ने उल्लंघन किया है। तेहरान का कहना है कि पहले अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटाए तभी किसी भी तरह की बातचीत संभव होगी यानी कूटनीतिक रास्ते फिलहाल कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। क्या बढ़ सकता है युद्ध? विशेषज्ञ मानते हैं कि हालात बेहद नाजुक हैं: दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं छोटे-छोटे टकराव बड़े संघर्ष में बदल सकते हैं ड्रोन, नौसैनिक कार्रवाई और नाकेबंदी–तीनों मिलकर जोखिम बढ़ा रहे हैं ओमान की खाड़ी में हुआ यह घटनाक्रम सिर्फ एक क्षेत्रीय झड़प नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का संकेत हो सकता है। एक ओर अमेरिका अपनी सैन्य ताकत दिखा रहा है, तो दूसरी ओर ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि: क्या यह टकराव कूटनीति से सुलझेगा या फिर मिडिल ईस्ट एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
US Navy warship intercepting Iranian-flagged cargo vessel in Strait of Hormuz amid rising tensions
खाड़ी में बढ़ता टकराव: अमेरिकी नेवी ने ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज़ को रोका, क्या और बिगड़ेंगे हालात?

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने United States और Iran के बीच टकराव को और तेज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में ईरानी झंडे वाले एक विशाल कार्गो जहाज़ को रोककर अपने नियंत्रण में ले लिया। क्या है पूरा मामला? ट्रंप के अनुसार “टोस्का” नाम का यह जहाज़ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। यह जहाज़ करीब 900 फीट लंबा बताया जा रहा है आकार और वजन के लिहाज से इसे एक छोटे एयरक्राफ्ट कैरियर के बराबर बताया गया अमेरिकी नेवी ने पहले जहाज़ को रुकने की चेतावनी दी लेकिन जब जहाज़ ने चेतावनी को नजरअंदाज किया, तो अमेरिकी बलों ने कार्रवाई करते हुए: जहाज़ के इंजन रूम को निशाना बनाया फायरिंग कर उसे आगे बढ़ने से रोक दिया अंततः जहाज़ को अपने नियंत्रण में ले लिया गया इस ऑपरेशन का वीडियो भी United States Central Command (CENTCOM) द्वारा जारी किया गया, जिसमें एक अमेरिकी युद्धपोत कार्गो जहाज़ को रोकते हुए और उसकी दिशा में फायरिंग करता दिखाई देता है। ईरान की चुप्पी और सख्त रुख इस घटना के बाद अब तक Iran की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि तेहरान का रुख नरम नहीं होने वाला। ईरानी सरकारी मीडिया पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि: जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं करता तब तक ईरान किसी भी नई वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा यानी यह घटना दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे गतिरोध को और गहरा कर सकती है। बातचीत पर मंडराया संकट यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब: अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल Pakistan जाने वाला है वहां ईरान के साथ दूसरे दौर की शांति वार्ता की संभावना जताई जा रही थी लेकिन जहाज़ की जब्ती और फायरिंग की घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान अब बातचीत की मेज पर आएगा भी या नहीं। होर्मुज पर बढ़ता खतरा इस घटना का सबसे बड़ा असर Strait of Hormuz पर पड़ सकता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है किसी भी सैन्य टकराव से तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग पर भी असर पड़ सकता है पहले से ही इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को लेकर तनाव बना हुआ है, और इस नई कार्रवाई ने जोखिम को और बढ़ा दिया है। क्या यह टकराव बढ़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सिर्फ एक नौसैनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी है। अमेरिका अपनी नाकेबंदी को सख्ती से लागू करना चाहता है ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान सकता है ऐसे में दोनों देशों के बीच “टिट-फॉर-टैट” (जवाबी कार्रवाई) की आशंका बढ़ गई है।      अमेरिकी नेवी द्वारा ईरानी झंडे वाले जहाज़ को रोकने की घटना ने मिडिल ईस्ट के हालात को और नाजुक बना दिया है। एक तरफ बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी ओर जमीनी स्तर पर सैन्य कार्रवाई हो रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि: क्या ईरान इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देगा? क्या प्रस्तावित वार्ता आगे बढ़ पाएगी? या फिर यह टकराव एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा?

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
China, US and Iran flags symbolizing diplomatic role in ceasefire and global geopolitical tensions
ईरान-अमेरिका सीजफायर के पीछे चीन की ‘खामोश कूटनीति’? पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल

ईरान और अमेरिका के बीच हालिया युद्धविराम ने वैश्विक राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। शुरुआती तौर पर जहां इस सीजफायर का श्रेय Shehbaz Sharif और पाकिस्तान की मध्यस्थता को दिया गया, वहीं अब नई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि असल ‘गेम चेंजर’ China रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने तक चले संघर्ष के दौरान चीन ने खुलकर कोई भूमिका नहीं निभाई, लेकिन आखिरी समय में उसकी ‘डिस्क्रीट डिप्लोमेसी’ यानी पर्दे के पीछे की बातचीत ने हालात बदल दिए। जब युद्ध तेज होने की कगार पर था और Donald Trump ने सख्त चेतावनी दी, उसी दौरान चीन ने सीधे हस्तक्षेप कर ईरान को वार्ता के लिए तैयार किया। 10 घंटे में बदला खेल बताया जा रहा है कि ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद महज 10 घंटों में हालात पूरी तरह बदल गए। ईरान ने न केवल सीजफायर पर सहमति दी, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम Strait of Hormuz को फिर से खोलने का फैसला भी किया। चीन की रणनीतिक चाल सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में चीन ने पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से बातचीत कराई। लेकिन जैसे ही पूर्ण युद्ध का खतरा बढ़ा, चीन ने सीधे ईरान से संपर्क साधा। यही निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन और रूस ने उस प्रस्ताव को भी रोक दिया, जिसमें हॉरमुज़ जलडमरूमध्य को बलपूर्वक खोलने की बात थी। चीन ने इसे ईरान के खिलाफ पक्षपाती बताया। अमेरिका ने क्यों नहीं दिया खुला श्रेय? हालांकि Donald Trump ने अनौपचारिक तौर पर चीन की भूमिका को स्वीकार किया, लेकिन आधिकारिक बयान में पाकिस्तान को ही श्रेय दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिका की रणनीति का हिस्सा था, ताकि चीन को वैश्विक स्तर पर ‘बराबरी का मध्यस्थ’ न माना जाए। पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान सिर्फ संदेशवाहक की भूमिका में था, जबकि असली कूटनीतिक दबाव चीन ने बनाया। Shehbaz Sharif के एक सोशल मीडिया पोस्ट के ड्राफ्ट को लेकर भी विवाद हुआ, जिसमें “Draft” शब्द दिखने के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि संदेश कहीं और से तैयार किया गया था। चीन के हित भी जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इस सक्रियता के पीछे उसके आर्थिक हित भी हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और मध्य पूर्व में अस्थिरता उसकी ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती थी। अगर युद्ध बढ़ता, तो न केवल ईरान का तेल निर्यात रुक सकता था, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित होती-जिसका सीधा असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ता। निष्कर्ष कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम दिखाता है कि वैश्विक राजनीति में कई बार असली फैसले पर्दे के पीछे लिए जाते हैं। इस मामले में चीन की चुप्पी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी, जिसने अंतिम समय में युद्धविराम को संभव बनाया।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
US and Iran flags with Strait of Hormuz map symbolizing ceasefire agreement and rising tensions
US–Iran Ceasefire: आखिरी घंटों में कैसे बनी सहमति, क्या ट्रंप झुके या ईरान?

मध्य पूर्व में तनाव चरम पर था, दुनिया युद्ध की आशंका से सहमी हुई थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अल्टीमेटम की समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम पर सहमति बन गई। इस फैसले ने खाड़ी क्षेत्र समेत पूरी दुनिया को राहत दी है। आखिरी घंटे का ड्रामा अमेरिका ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए सख्त चेतावनी दी थी। समयसीमा खत्म होने से करीब डेढ़ घंटे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सीजफायर का ऐलान किया। इसके तुरंत बाद ईरान की तरफ से भी इसकी पुष्टि कर दी गई। ट्रंप या मोज्तबा खामेनेई – कौन झुका? विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता “बीच का रास्ता” है। अमेरिका पर तेल कीमतों और वैश्विक दबाव का असर था ईरान पर हालिया हमलों और आर्थिक दबाव का प्रभाव पड़ा ईरान के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें मोज्तबा खामेनेई का नाम प्रमुख है, ने भी रणनीतिक तौर पर लचीलापन दिखाया। वहीं ट्रंप ने भी अपने सख्त रुख को कुछ हद तक नरम किया। पर्दे के पीछे कौन था? इस समझौते में पाकिस्तान ने अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई। पाकिस्तानी नेतृत्व ने दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाए शहबाज शरीफ ने बातचीत की पुष्टि की इसके अलावा चीन ने भी ईरान को मनाने में अहम भूमिका निभाई और कूटनीतिक दबाव बनाया। समझौते की मुख्य शर्तें 14 दिनों का अस्थायी संघर्षविराम होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए खोलना जहाजों पर शुल्क लगाने की सीमित अनुमति इस दौरान स्थायी समाधान पर बातचीत क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। इसके बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता था। आगे क्या? ईरान ने साफ किया है कि यह युद्ध का अंत नहीं, बल्कि अस्थायी विराम है अमेरिका ने भी सैन्य कार्रवाई की धमकी फिलहाल टाल दी है आने वाले 14 दिन स्थायी शांति के लिए बेहद अहम होंगे

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Mojtaba Khamenei with Iran flag backdrop and conflict visuals amid leadership crisis reports
Iran War: क्या मोजतबा खामेनेई कोमा में हैं? रिपोर्ट में बड़ा दावा, ईरान में सियासी हलचल तेज

ईरान में जारी तनाव के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि देश के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं और कोमा में हैं। बताया जा रहा है कि उनका इलाज फिलहाल कोम (Qom) शहर में चल रहा है। खुफिया रिपोर्ट में क्या दावा? ब्रिटेन के अखबार The Times की रिपोर्ट के मुताबिक- मोजतबा खामेनेई अचेत अवस्था (कोमा) में हैं उनकी हालत गंभीर बनी हुई है वे किसी भी सरकारी या सैन्य फैसले में हिस्सा लेने की स्थिति में नहीं हैं यह जानकारी कथित तौर पर अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों द्वारा साझा किए गए कूटनीतिक मेमो पर आधारित बताई गई है। सार्वजनिक तौर पर न दिखने से बढ़ी अटकलें पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए उनके नाम से संदेश जरूर जारी हो रहे हैं, लेकिन उन्हें ईरानी सरकारी मीडिया प्रसारित कर रहा है इससे उनके गंभीर रूप से घायल होने की खबरों को और बल मिला है। अलग-अलग रिपोर्ट्स में अलग दावे मोजतबा खामेनेई की हालत को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं- कुछ रिपोर्ट्स: वे कोमा में हैं और इलाज चल रहा है अन्य रिपोर्ट्स (जैसे The Sun): हमलों में एक हाथ और एक पैर गंवाने का दावा हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। ईरान सरकार का क्या कहना है? ईरानी अधिकारियों ने इन अटकलों के बीच कहा है कि- देश की कमान पूरी तरह नियंत्रण में है सर्वोच्च नेतृत्व सक्रिय है लेकिन उन्होंने खामेनेई की सेहत को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने- ईरान को तय समय सीमा तक समझौता करने का अल्टीमेटम दिया चेतावनी दी कि डेडलाइन के बाद पुल और पावर प्लांट तबाह किए जा सकते हैं ट्रंप ने कहा- “ईरान पहले शक्तिशाली था, लेकिन अब हमने उसका सिर काट दिया है।” क्या हो सकता है असर? विशेषज्ञों के मुताबिक- अगर खामेनेई वाकई गंभीर हालत में हैं, तो ईरान में नेतृत्व संकट पैदा हो सकता है इससे युद्ध और कूटनीतिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और बढ़ सकती है

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Rajnath Singh addressing public event warning Pakistan amid Iran conflict and rising geopolitical tensions
ईरान युद्ध के बीच राजनाथ सिंह की चेतावनी: “पाकिस्तान ने हरकत की तो मिलेगा करारा जवाब”

नई दिल्ली/केरल: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान युद्ध की आड़ में पाकिस्तान कोई “गलत हरकत” करता है, तो भारत उसे पहले से भी ज्यादा कड़ा और निर्णायक जवाब देगा। “पड़ोसी देश साजिश कर सकता है” केरल में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा: “मौजूदा हालात में हमारा पड़ोसी देश साजिश कर सकता है, लेकिन भारत पूरी तरह तैयार है।” ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की दिलाई याद राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर की याद दिलाते हुए कहा: भारतीय सेना ने सिर्फ 22 मिनट में जवाबी कार्रवाई की थी पाकिस्तान के अंदर घुसकर 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को सीज़फायर की मांग करनी पड़ी यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले (25 पर्यटकों की मौत) के बाद शुरू हुआ था। ऊर्जा संकट पर भी दिया भरोसा रक्षा मंत्री ने साफ किया कि: देश में ईंधन और गैस की कोई कमी नहीं है भारत किसी भी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए तैयार है होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर उन्होंने बताया कि: भारतीय नौसेना होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों की सुरक्षा कर रही है सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय भारत राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कूटनीतिक प्रयासों के जरिए खाड़ी क्षेत्र में भारत के हितों की रक्षा कर रहे हैं। पाकिस्तान के दावों पर सवाल पाकिस्तान खुद को अमेरिका-ईरान विवाद में मध्यस्थ बता रहा है लेकिन ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया, जिससे पाकिस्तान की स्थिति कमजोर दिख रही है

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
US Iran tension escalation with Israel distancing from ground war amid rising Middle East conflict
ईरान जंग में बढ़ा तनाव: क्या अमेरिका अकेला पड़ेगा? इजरायल ने बनाई दूरी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के बीच एक अहम खबर सामने आई है-अगर अमेरिका जमीनी सैन्य कार्रवाई करता है, तो इजरायल उसमें सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लेगा। इजरायली मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला क्षेत्रीय रणनीति और बढ़ते तनाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे संकेत मिलते हैं कि संभावित ग्राउंड ऑपरेशन में अमेरिका को अकेले ही आगे बढ़ना पड़ सकता है। इजरायल ने क्यों बनाई दूरी? विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल का यह रुख कई रणनीतिक कारणों से जुड़ा है: जमीनी युद्ध में उतरने से क्षेत्रीय संघर्ष और भड़क सकता है इजरायल पहले से ही अपनी सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है बड़े युद्ध में सीधे शामिल होने से राजनीतिक और सैन्य जोखिम बढ़ सकता है हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इजरायल खुफिया या तकनीकी सहयोग देगा या नहीं। अमेरिका के लिए बढ़ी चुनौती अगर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करता है, तो यह मिशन काफी जटिल और जोखिम भरा हो सकता है। बिना बड़े सहयोगी के जमीनी युद्ध कठिन होगा ईरान जैसे विशाल और मजबूत देश में सैन्य कार्रवाई आसान नहीं लॉजिस्टिक्स, संसाधन और रणनीति की बड़ी चुनौती अमेरिका ने पहले ही क्षेत्र में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर, युद्धपोत और फाइटर जेट्स की संख्या बढ़ा दी है, जिससे दबाव की रणनीति अपनाई जा रही है। ईरान की ओर से भी सख्त रुख इस बीच IRGC (ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड) लगातार आक्रामक बयान दे रही है और अमेरिका को खुली चुनौती दे रही है। इससे यह साफ है कि अगर जमीनी युद्ध शुरू होता है, तो संघर्ष और भी उग्र हो सकता है। क्या होगा आगे? फिलहाल अमेरिका ने जमीनी सैनिक उतारने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। लेकिन मौजूदा हालात “तूफान से पहले की शांति” जैसे नजर आ रहे हैं। अगर हालात बिगड़ते हैं, तो यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक राजनीति पर इसका असर पड़ सकता है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Mojtaba Khamenei message controversy amid Trump claim of death and rising Iran-US tensions
ट्रंप के दावे से मचा भूचाल: ‘मारे गए’ बताए जा रहे सुप्रीम लीडर का नया संदेश, ईरान-यूएस टकराव और गहराया

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei मारे जा चुके हैं, वहीं दूसरी ओर ईरानी मीडिया में उनके नाम से लगातार नए संदेश सामने आ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस और अनिश्चितता पैदा कर दी है। ट्रंप का बड़ा दावा, लेकिन सवाल बरकरार रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने 27 मार्च को कहा था कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व खत्म हो चुका है और देश में कोई सक्रिय सुप्रीम लीडर नहीं है। उन्होंने यहां तक संकेत दिया कि मोजतबा खामेनेई या तो मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हैं। हालांकि, इस दावे की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। दूसरी तरफ जारी हो रहे संदेश ट्रंप के दावे के विपरीत, ईरान की तरफ से मोजतबा खामेनेई के नाम से लिखित संदेश जारी किए जा रहे हैं। एक हालिया संदेश में उन्होंने: अमेरिका और इजरायल के खिलाफ संघर्ष में समर्थन के लिए इराक की जनता का धन्यवाद किया खास तौर पर Ali al-Sistani का उल्लेख किया यह संदेश बगदाद में हुई एक बैठक के बाद सामने आया, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरानी नेतृत्व सक्रिय है। सार्वजनिक रूप से नहीं आए सामने मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। केवल लिखित बयान जारी किए जा रहे हैं उनके बयान टीवी पर दूसरे लोग पढ़कर सुनाते हैं उनकी ताजा तस्वीरों को लेकर भी संशय बना हुआ है इससे उनकी स्थिति और लोकेशन को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। पृष्ठभूमि: युद्ध और सत्ता का संकट ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी यह संघर्ष अब एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा है। पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की युद्ध की शुरुआत में ही मौत हो चुकी है इसके बाद मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी और विरोधाभासी खबरें सत्ता को लेकर असमंजस पैदा कर रही हैं क्या है इसका वैश्विक असर? यह घटनाक्रम कई बड़े सवाल खड़े करता है: क्या ट्रंप का दावा सही है या यह रणनीतिक बयान है? क्या ईरान में नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है? क्या इससे युद्ध और भड़क सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की विरोधाभासी सूचनाएं वैश्विक बाजार, कूटनीति और सुरक्षा स्थिति पर बड़ा असर डाल सकती हैं।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Drone attack at Kuwait airport causing fire as Middle East conflict escalates with US and Iran tensions
कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव; इराक में अमेरिकी ठिकानों को बनाया गया निशाना

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और व्यापक होता दिख रहा है। जंग के 26वें दिन मंगलवार रात कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां मौजूद फ्यूल टैंक में आग लग गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। कुवैत में हाई अलर्ट, कई ड्रोन मार गिराए गए कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उसने दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना के मुताबिक, अगर लोगों को धमाके सुनाई दे रहे हैं तो वह एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई का नतीजा है। कुवैत नेशनल गार्ड ने भी पुष्टि की है कि उसने अपने क्षेत्र में कम से कम 5 ड्रोन मार गिराए हैं। नागरिकों से सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की गई है। इराक में अमेरिका के ठिकानों पर 23 हमलों का दावा वहीं, इराक के उग्रवादी संगठन इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिका से जुड़े 23 ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। हालांकि, इन हमलों में हुए नुकसान को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। जंग का मानवीय असर गहराया ईरान में जारी हमलों का असर बेहद गंभीर होता जा रहा है। अब तक करीब 1,500 लोगों की मौत और 18,551 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में 8 महीने के बच्चे से लेकर 88 साल तक के बुजुर्ग शामिल करीब 200 महिलाओं की मौत 28 फरवरी को स्कूल पर हमले में 168 बच्चों की जान गई 55 हेल्थ वर्कर्स घायल, जिनमें 11 की मौत लेबनान और इजराइल में भी हमले तेज दक्षिणी लेबनान में इजराइल की एयरस्ट्राइक में 9 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, हिजबुल्लाह ने इजराइल पर करीब 30 रॉकेट दागे, जिससे उत्तरी इलाकों में सायरन बजने लगे। अमेरिका की सैन्य तैयारी तेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 2,000 पैराट्रूपर्स भेजने का फैसला किया है। ये सैनिक 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से हैं, जो तेजी से कार्रवाई के लिए जानी जाती है। इसे संभावित जमीनी ऑपरेशन की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। कूटनीतिक हल की कोशिशें भी जारी इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात कर हालात पर चिंता जताई और युद्ध खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध जारी रहा, तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं, खासकर ऊर्जा और व्यापार पर।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0