राष्ट्रीय

Iran Deputy FM Likely To Visit India

BRICS बैठक के लिए भारत आ सकते हैं ईरान के उप विदेश मंत्री, अमेरिका से तनाव के बीच अहम होगा दौरा

surbhi मई 7, 2026 0
Iranian and Indian diplomats discussing BRICS cooperation amid rising US-Iran geopolitical tensions
Iran Deputy Foreign Minister May Visit India For BRICS

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi के भारत दौरे की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि वह मई में नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं. यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में लगातार अस्थिरता बनी हुई है और ईरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक समर्थन मजबूत करने में जुटा है.

भारत फिलहाल BRICS का चेयरमैन है और 14-15 मई को विदेश मंत्रियों की अहम बैठक की मेजबानी करेगा. यह बैठक सितंबर 2026 में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है.

जयशंकर-अराघची बातचीत के बाद बढ़ी हलचल

यह संभावित दौरा भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi के बीच हुई हाई-लेवल फोन बातचीत के बाद चर्चा में आया है. माना जा रहा है कि दोनों देशों ने पश्चिम एशिया की स्थिति और बहुपक्षीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया है.

रूस के विदेश मंत्री भी आएंगे भारत

रूस ने भी पुष्टि की है कि उसके विदेश मंत्री Sergey Lavrov 14-15 मई को भारत में होने वाली बैठक में शामिल होंगे. रूस के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह बैठक वैश्विक मुद्दों और ग्लोबल गवर्नेंस पर गंभीर चर्चा का बड़ा मंच बनेगी.

क्या है इस बार BRICS की थीम?

भारत की अध्यक्षता में इस बार ब्रिक्स की थीम रखी गई है:

“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”

इस थीम का उद्देश्य विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करना और टिकाऊ विकास पर जोर देना है.

क्यों अहम मानी जा रही है यह बैठक?

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बैठक कई वजहों से महत्वपूर्ण है:

  • अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बड़े देशों की कूटनीतिक रणनीति

  • पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति पर चर्चा

  • वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर समन्वय

  • सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS समिट की तैयारी

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Maria Zakharova ने कहा है कि इस बैठक में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने और वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाने पर विशेष फोकस रहेगा.

नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक अब सिर्फ कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच एक बड़े भू-राजनीतिक मंच के रूप में देखी जा रही है.

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

राष्ट्रीय

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A symbolic image of the Calcutta High Court, representing the resignation of retired Justice Ranjit Kumar Bag from the SIR Tribunal handling West Bengal voter list cases.
पश्चिम बंगाल: SIR ट्रिब्यूनल से एक और सेवानिवृत्त जज का इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे SIR ट्रिब्यूनल को एक और झटका लगा है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले भी एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश इस ट्रिब्यूनल से अलग हो चुके हैं। स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा सूत्रों के अनुसार, सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग ने खराब स्वास्थ्य के कारण ट्रिब्यूनल में अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होने का निर्णय लिया। उनके इस्तीफे के बाद ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। पहले भी दे चुके हैं जज इस्तीफा इससे पहले मई में T. S. Sivagnanam ने भी SIR ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दिया था। लगातार दो वरिष्ठ न्यायाधीशों के हटने से ट्रिब्यूनल के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था गठन SIR ट्रिब्यूनल का गठन Supreme Court of India के निर्देश पर तत्कालीन Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश Sujoy Paul द्वारा किया गया था। इस ट्रिब्यूनल का उद्देश्य मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों के मामलों की जांच करना और उनके दस्तावेजों का सत्यापन कर उचित निर्णय देना है। 27 लाख मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी ट्रिब्यूनल के सामने करीब 27 लाख मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी है। इनमें उन लोगों के आवेदन शामिल हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हट गए हैं। दस्तावेजों की जांच की जा रही है और कई आवेदकों से फोन के माध्यम से भी संपर्क किया जा रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच से भी जुड़ा रहा नाम सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग इससे पहले पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती मामले की जांच से भी जुड़े रहे हैं। उनकी अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर कथित भर्ती अनियमितताओं का मामला सामने आया था, जिसके बाद जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई थी। ट्रिब्यूनल से उनके इस्तीफे की वजह केवल स्वास्थ्य संबंधी बताई गई है और इसे किसी अन्य विवाद से नहीं जोड़ा गया है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Modi Sanae Takaichi

भारत-जापान शिखर वार्ता आज, रक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग रहेगा प्रमुख एजेंडा

A heritage Kolkata tram on city streets, representing West Bengal's plan to introduce modern air-conditioned trams and expand the network for tourism and public transport.

कोलकाता में फिर दौड़ेगी आधुनिक ट्राम, कालीघाट-दक्षिणेश्वर के बीच शुरू होगी AC सेवा

auto sector growth

जून में कारों की बिक्री ने पकड़ी रफ्तार, SUV और EV की मजबूत मांग से ऑटो सेक्टर को मिला बड़ा सहारा

Aditya Birla Group branding alongside an industrial facility, symbolizing West Bengal's appeal for fresh investments to boost the state's industrial growth.
बंगाल ने पांच दशक बाद बढ़ाया बिड़ला समूह की ओर दोस्ती का हाथ, निवेश के लिए किया आग्रह

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच राज्य सरकार ने देश के प्रमुख औद्योगिक घरानों में से एक Aditya Birla Group से राज्य में निवेश करने का आग्रह किया है। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब राज्य में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए नई रणनीतियों पर जोर दिया जा रहा है। शमिक भट्टाचार्य ने दी जानकारी Shamik Bhattacharya ने कोलकाता में आयोजित 'बिजनेस अपॉर्च्युनिटी प्लेटफॉर्म' कार्यक्रम में कहा कि राज्य सरकार ने आदित्य बिड़ला समूह से पश्चिम बंगाल में निवेश बढ़ाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल का बिड़ला समूह के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है और अब राज्य एक बार फिर इस औद्योगिक घराने को निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा है। मुख्यालय कभी कोलकाता में था शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि आज से करीब पांच दशक पहले आदित्य बिड़ला समूह का मुख्यालय कोलकाता में हुआ करता था, लेकिन उस समय श्रमिक अशांति और औद्योगिक माहौल के कारण समूह को अपना मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस दौर में कई बड़े औद्योगिक समूहों ने भी पश्चिम बंगाल से अपने मुख्यालय अन्य राज्यों में स्थानांतरित किए थे। 1978 की घटना का किया उल्लेख भट्टाचार्य ने वर्ष 1978 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित तौर पर तत्कालीन परिस्थितियों के कारण उद्योगपति आदित्य बिड़ला को कोलकाता स्थित Reserve Bank of India कार्यालय के पास अपनी कार से उतरकर पैदल जाना पड़ा था। उन्होंने दावा किया कि इसी तरह की घटनाओं और असुरक्षा की भावना के बाद समूह ने अपने व्यवसाय के विस्तार और सुरक्षा के लिए मुंबई जाने का फैसला किया। उनके अनुसार, बाद में कई अन्य उद्योगपति भी अपने मुख्यालय पश्चिम बंगाल से बाहर ले गए। बंगाल से पूरी तरह नहीं टूटा था रिश्ता भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित होने के बावजूद आदित्य बिड़ला समूह ने पश्चिम बंगाल में अपने औद्योगिक परिचालन पूरी तरह बंद नहीं किए और राज्य में अपनी व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखीं। निवेश आकर्षित करने पर सरकार का जोर पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न औद्योगिक समूहों से संपर्क कर रही है। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश से राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
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Hero MotoCorp आंध्र प्रदेश में ₹3,200 करोड़ का करेगी निवेश, EV और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित होगा तिरुपति

VHP International President Alok Kumar addresses the media, saying action against Champat Rai will be considered only after the SIT completes its investigation into the Ayodhya Ram Temple donation embezzlement allegations.

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जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची तीन दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचीं, पीएम मोदी के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन में लेंगी हिस्सा

India Petroleum Supply
भारत से रूस ने पेट्रोलियम आपूर्ति बढ़ाई, यूक्रेन हमलों के बाद ईंधन संकट गहराया

नई दिल्ली, एजेंसियां। रूस ने यूक्रेन के हमलों के बाद पैदा हुए ईंधन संकट के बीच भारत से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बढ़ानी शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस को घरेलू मांग पूरी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते वह भारत समेत एशियाई देशों से ईंधन आयात कर रहा है।   ऊर्जा संकट के बीच बढ़ा व्यापारिक दबाव   सूत्रों के अनुसार, रूस के कई रिफाइनरी और ऊर्जा ढांचे पर हाल के हमलों के बाद उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसी कारण पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में कमी देखने को मिल रही है, जिसे पूरा करने के लिए रूस भारत से खरीदारी कर रहा है।   भारत के ऊर्जा निर्यात पर असर की संभावना   विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो भारत के ऊर्जा व्यापार और निर्यात पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि फिलहाल इसे अल्पकालिक रणनीति माना जा रहा है।   वैश्विक तेल बाजार पर नजर   इस घटनाक्रम के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन पर असर पड़ सकता है।

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