Kenya में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे हैं। राजधानी Nairobi समेत कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। हिंसा और झड़पों में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट का असर अब अफ्रीकी देशों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों से तेल आयात पर निर्भर केन्या में ईंधन संकट तेजी से गहराता जा रहा है। सड़कों पर उतरे लोग, ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप सोमवार सुबह नैरोबी के बाहरी इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं। कई जगहों पर बैरिकेड लगाए गए और टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कारों और “बोड़ा-बोड़ा” मोटरसाइकिलों को भी रोकने की कोशिश की। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राजधानी का सार्वजनिक परिवहन लगभग ठप पड़ गया। स्कूल बंद रहे और कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द करने पड़े। ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी केन्या सरकार ने हाल ही में वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार: पेट्रोल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है डीजल की कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत तक उछाल आया है डीजल की कीमत बढ़ने के बाद परिवहन कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी, जिससे हालात और बिगड़ गए। गृह मंत्री ने की मौतों की पुष्टि केन्या के गृह मंत्री Kipchumba Murkomen ने मीडिया से बातचीत में कहा, “आज की हिंसा में चार केन्याई नागरिकों की मौत हुई है और 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं।” उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर सीधे केन्या जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ा। सरकार ने राहत पैकेज का किया ऐलान केन्या सरकार ने कहा है कि वह डीजल और मिट्टी तेल की बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए लगभग 3 करोड़ 85 लाख डॉलर खर्च कर रही है। इसके अलावा ईंधन सप्लाई बनाए रखने के लिए गुणवत्ता मानकों में अस्थायी छूट भी दी गई है। महंगाई और गरीबी से बढ़ा दबाव पूर्वी अफ्रीका की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद केन्या की बड़ी आबादी अब भी आर्थिक संकट से जूझ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की लगभग एक-तिहाई आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है। अगर तेल संकट और महंगाई पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में केन्या में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने कहा है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने में भारत बड़ी और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा अमेरिका है। नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने कहा कि ईरान से जुड़े मुद्दों का कोई सैन्य समाधान नहीं है और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। ‘अमेरिका पर भरोसा नहीं’ अराघची ने कहा, “40 दिनों की लड़ाई के बाद जब अमेरिका को यह समझ आ गया कि वह ईरान के खिलाफ अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता, तब उसने बातचीत का प्रस्ताव रखा। हमें अमेरिकियों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के कई कारण हैं, जबकि अमेरिका के पास ईरान पर अविश्वास करने का कोई ठोस कारण नहीं है। भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार ईरानी विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि भारत फारसी खाड़ी के सभी देशों का मित्र है और उसकी अच्छी साख है। उन्होंने कहा, “भारत इस क्षेत्र में कूटनीति को बढ़ावा देने, शांति और सुरक्षा स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। हम भारत की किसी भी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे।” होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दिया बड़ा बयान अराघची ने कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही जारी रखने के पक्ष में है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात बेहद जटिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के जहाजों के लिए खुला रहेगा, सिवाय उन देशों के जहाजों के जो ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में हैं। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और हालिया तनाव के कारण इस क्षेत्र पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। चाबहार पोर्ट पर भारत की तारीफ ईरानी विदेश मंत्री ने Chabahar Port परियोजना को भारत-ईरान सहयोग का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “हमें खुशी है कि भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण काम कुछ धीमा हुआ है, लेकिन यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंच का सुनहरा दरवाजा साबित होगा।” भारत से सहयोग जारी रखने की उम्मीद अराघची ने उम्मीद जताई कि भारत चाबहार पोर्ट परियोजना पर काम जारी रखेगा ताकि इसका पूर्ण विकास हो सके और इससे भारत सहित पूरे क्षेत्र को आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत संतुलित कूटनीति के जरिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने अपने नूर खान एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों को उतरने की अनुमति दी थी, ताकि उन्हें संभावित अमेरिकी हमलों से बचाया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब पाकिस्तान खुद को तेहरान और वॉशिंगटन के बीच मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा था। क्या है दावा? अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल की शुरुआत में, जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सीजफायर की घोषणा की, उसके तुरंत बाद ईरान ने अपने कई सैन्य विमान पाकिस्तान भेजे। बताया गया कि ये विमान रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस (PAF Base Nur Khan) पर उतारे गए। रिपोर्ट में दावा है कि इनमें ईरानी एयरफोर्स का RC-130 जासूसी विमान भी शामिल था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने अपने सैन्य संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया। पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर यह रिपोर्ट सही है, तो पाकिस्तान की भूमिका पर दोबारा गंभीरता से विचार करने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के पहले के इजरायल विरोधी बयानों को देखते हुए ऐसी खबर पूरी तरह असंभव नहीं लगती। ग्राहम के बयान के बाद इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान ने क्या कहा? हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नूर खान एयरबेस घनी आबादी वाले इलाके में स्थित है, इसलिए वहां ऐसी किसी गतिविधि को गुप्त रखना संभव नहीं है। पाकिस्तानी अधिकारी ने दावा किया कि एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों के उतरने की खबरें गलत और भ्रामक हैं। अफगानिस्तान भेजे गए कुछ नागरिक विमान रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान भेजा था। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं है कि उन विमानों में सैन्य संसाधन भी शामिल थे या नहीं। क्यों अहम है यह मामला? अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो इससे कई बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं— क्या पाकिस्तान पर्दे के पीछे ईरान की मदद कर रहा था? क्या उसकी मध्यस्थ की भूमिका निष्पक्ष थी? क्या इससे अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर असर पड़ेगा? फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.57 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान टूटकर 95.63 के ऑल टाइम लो तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 35 पैसे की गिरावट है। सोमवार को भी रुपया 79 पैसे टूटकर 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार गिरते रुपये ने निवेशकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल में उछाल से बढ़ा दबाव रुपये में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। Saudi Aramco ने भी चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर तेल का भंडार काफी कम हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल में OPEC देशों का उत्पादन साल 2000 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट संकट का असर Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण कुवैत और इराक जैसे देश तेल निर्यात में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को भारतीय बाजार में करीब 8,437 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। ईरान संकट शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 20 अरब डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हुआ। शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट कमजोर रुपये और वैश्विक तनाव का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 525 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि NIFTY 50 में भी 164 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। क्यों गिर रहा है रुपया? डॉलर के मुकाबले रुपया 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली शेयर बाजार में कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता आम लोगों पर क्या होगा असर? रुपये में गिरावट का सीधा असर आयात पर पड़ता है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामान, विदेश यात्रा और आयातित वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi के भारत दौरे की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि वह मई में नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं. यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में लगातार अस्थिरता बनी हुई है और ईरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक समर्थन मजबूत करने में जुटा है. भारत फिलहाल BRICS का चेयरमैन है और 14-15 मई को विदेश मंत्रियों की अहम बैठक की मेजबानी करेगा. यह बैठक सितंबर 2026 में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है. जयशंकर-अराघची बातचीत के बाद बढ़ी हलचल यह संभावित दौरा भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi के बीच हुई हाई-लेवल फोन बातचीत के बाद चर्चा में आया है. माना जा रहा है कि दोनों देशों ने पश्चिम एशिया की स्थिति और बहुपक्षीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया है. रूस के विदेश मंत्री भी आएंगे भारत रूस ने भी पुष्टि की है कि उसके विदेश मंत्री Sergey Lavrov 14-15 मई को भारत में होने वाली बैठक में शामिल होंगे. रूस के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह बैठक वैश्विक मुद्दों और ग्लोबल गवर्नेंस पर गंभीर चर्चा का बड़ा मंच बनेगी. क्या है इस बार BRICS की थीम? भारत की अध्यक्षता में इस बार ब्रिक्स की थीम रखी गई है: “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” इस थीम का उद्देश्य विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करना और टिकाऊ विकास पर जोर देना है. क्यों अहम मानी जा रही है यह बैठक? विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बैठक कई वजहों से महत्वपूर्ण है: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बड़े देशों की कूटनीतिक रणनीति पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति पर चर्चा वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर समन्वय सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS समिट की तैयारी रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Maria Zakharova ने कहा है कि इस बैठक में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने और वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाने पर विशेष फोकस रहेगा. नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक अब सिर्फ कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच एक बड़े भू-राजनीतिक मंच के रूप में देखी जा रही है.
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक हैरान करने वाला दावा चर्चा में है–क्या ईरान डॉल्फ़िन को विस्फोटक पहनाकर अमेरिकी जहाजों पर हमला करने की योजना बना रहा है? इन अटकलों पर अब पीट हेगसेथ ने प्रतिक्रिया दी है। रक्षा मंत्री का जवाब अमेरिकी रक्षा विभाग की एक ब्रीफिंग में जब पत्रकार ने “आत्मघाती डॉल्फ़िन” से जुड़े दावों पर सवाल किया, तो पीट हेगसेथ ने कहा, “मैं यह पुष्टि या खंडन नहीं कर सकता कि हमारे पास ऐसी कोई क्षमता है या नहीं, लेकिन मैं यह जरूर कह सकता हूं कि ईरान के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।” उनके इस बयान ने इन दावों को लेकर संदेह और बढ़ा दिया है। दावों की शुरुआत कैसे हुई? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ मीडिया संस्थानों में यह चर्चा शुरू हुई कि ईरान ऐसे “असामान्य हथियारों” पर काम कर सकता है, जिनमें पनडुब्बियों के साथ-साथ विस्फोटक ले जाने वाली डॉल्फ़िनें भी शामिल हैं। इसके बाद CNN और Fox News जैसे प्लेटफॉर्म पर इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई। ईरान ने उड़ाया मजाक इन दावों पर ईरानी पक्ष की प्रतिक्रिया अलग रही। ईरान के कुछ सरकारी और विदेश कार्यालयों ने इन खबरों का मजाक उड़ाया। हैदराबाद स्थित एक ईरानी दफ्तर ने सोशल मीडिया पर एक AI-जनरेटेड तस्वीर शेयर की, जिसमें एक डॉल्फ़िन के साथ “विस्फोटक” दिखाया गया था। पोस्ट में तंज करते हुए लिखा गया कि “राज़ सामने आ गया।” सच्चाई क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि ईरान डॉल्फ़िन को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। हालांकि यह सच है कि अमेरिकी नौसेना जैसे कुछ देशों ने समुद्री जानवरों–जैसे डॉल्फ़िन और सी-लायन–को पानी के भीतर माइन खोजने और संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करने के लिए ट्रेनिंग दी है। अफवाह या रणनीतिक मनोवैज्ञानिक युद्ध? विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की खबरें अक्सर “इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर” का हिस्सा भी हो सकती हैं, जिनका मकसद दुश्मन को भ्रमित करना या माहौल बनाना होता है। “डॉल्फ़िन बम” जैसी बातें ज्यादा अटकलें और अफवाह ही नजर आती हैं। न तो ईरान ने इसकी पुष्टि की है और न ही कोई ठोस प्रमाण सामने आया है। हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इस तरह के दावे यह जरूर दिखाते हैं कि सूचना युद्ध भी आधुनिक संघर्ष का अहम हिस्सा बन चुका है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz पर बनी नाकेबंदी के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारत से जुड़ा एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ इस संवेदनशील जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार करने में कामयाब रहा है। ऐसे समय में जब ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग ठप पड़ी थी, यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। 45 हजार टन LPG के साथ जोखिम भरा सफर शिपिंग डेटा के अनुसार, यह टैंकर करीब 45,000 टन एलपीजी (LPG) लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। जहाज ने ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीपों के पास से गुजरते हुए ओमान की खाड़ी में प्रवेश किया। इस दौरान उसने तेहरान द्वारा तय किए गए सुरक्षित मार्ग का पालन किया। इस जहाज पर 18 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार हैं, और यह विशाखापत्तनम स्थित एक बड़े ऊर्जा टर्मिनल की ओर बढ़ रहा है। संकट के बीच ‘दुर्लभ’ पारगमन हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना इस समय बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है। हाल ही में कई जहाजों को हमले और फायरिंग के खतरे के चलते वापस लौटना पड़ा था। ऐसे में ‘सर्व शक्ति’ का सफल पारगमन एक दुर्लभ और रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि यह टैंकर मार्शल आइलैंड्स के झंडे के तहत संचालित हो रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में आम प्रथा है। इंडियन ऑयल बना खरीदार रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस एलपीजी कार्गो का खरीदार Indian Oil Corporation है। हालांकि कंपनी की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह खेप भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत के लिए क्यों अहम है यह यात्रा? भारत दुनिया का: तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट से सप्लाई बाधित होने पर देश में: गैस की कमी लंबी कतारें सप्लाई संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। ‘सर्व शक्ति’ की यह खेप भारत के लिए राहत लेकर आ सकती है और बाजार में स्थिरता ला सकती है। पहले क्यों बिगड़ी थी स्थिति? अप्रैल में हालात तब और बिगड़ गए थे जब ईरान ने पहले जहाजों को गुजरने की अनुमति दी, लेकिन बाद में कुछ जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। इससे कई अंतरराष्ट्रीय टैंकरों को अपनी यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी। हालांकि, इससे पहले एक भारतीय टैंकर ‘देश गरिमा’ भी जोखिम उठाकर इस मार्ग से गुजरने में सफल रहा था।
दुमका। 16 साल पुराने सड़क जाम के एक मामले में सोमवार को एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पोड़ैयाहाट से कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 225 के तहत दोषी मानते हुए 1 साल के कारावास की सजा सुनाई। अदालत के फैसले के तुरंत बाद ही विधायक प्रदीप यादव को सशर्त जमानत भी दे दी गई, जिससे उन्हें फिलहाल राहत मिल गई है। पूर्व भाजपा विधायक समेत अन्य आरोपी बरी इस मामले में साक्ष्य के अभाव के चलते पूर्व भाजपा विधायक रणधीर सिंह सहित सभी अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया। यह मामला करीब 16 साल पहले हुए सड़क जाम से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सार्वजनिक मार्ग को बाधित किया गया था। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद अब जाकर इस पर अदालत का फैसला आया है।
मस्कट/तेहरान, 4 मई: दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल Strait of Hormuz में एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रिटेन की समुद्री निगरानी एजेंसी United Kingdom Maritime Trade Operations ने जानकारी दी है कि ईरान के सिरिक तट के पास एक मालवाहक जहाज पर कई छोटी नौकाओं के जरिए हमला किया गया। कैसे हुआ हमला? रिपोर्ट के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने छोटी-छोटी तेज गति वाली नौकाओं का इस्तेमाल करते हुए कार्गो शिप को निशाना बनाया। इस तरह के हमले आमतौर पर ‘स्वार्म टैक्टिक्स’ के रूप में देखे जाते हैं, जिसमें कई नावें एक साथ हमला कर जहाज को घेर लेती हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले के पीछे कौन था और इसका मकसद क्या था। चालक दल सुरक्षित, लेकिन खतरा बरकरार सबसे राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं। United Kingdom Maritime Trade Operations ने क्षेत्र से गुजरने वाले अन्य जहाजों को हाई अलर्ट पर रहने और सावधानीपूर्वक मार्ग तय करने की सलाह दी है। ईरान का दावा– ‘हमारा नियंत्रण कायम’ घटना के बाद ईरानी अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा कि Strait of Hormuz पर उनका नियंत्रण पूरी तरह बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि जो जहाज अमेरिका या इजराइल से जुड़े नहीं हैं, वे निर्धारित शुल्क देकर सुरक्षित तरीके से इस मार्ग से गुजर सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका-ईरान टकराव की पृष्ठभूमि Donald Trump प्रशासन द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रखी गई है। अमेरिकी नौसेना इस इलाके में सक्रिय है और हर आने-जाने वाले जहाज पर नजर रख रही है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें 30 दिनों के भीतर विवाद सुलझाने की बात कही गई है। हालांकि Donald Trump ने इस प्रस्ताव को लेकर संदेह जताया है और किसी ठोस समझौते की संभावना को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। क्यों बेहद अहम है होर्मुज? Strait of Hormuz वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है खाड़ी देशों से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है बढ़ती घटनाएं और सुरक्षा चिंता पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले, जब्ती और सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा कमजोर हो रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान दौरे को लेकर जारी असमंजस के बीच अब संभावित तारीख सामने आ गई है, जिससे शांति वार्ता की उम्मीदें फिर जगी हैं। कब जाएंगे वेंस? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेडी वेंस मंगलवार (21 अप्रैल) को इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का सीजफायर खत्म होने वाला है और हालात फिर से बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। हालांकि, इसे लेकर कुछ विरोधाभासी जानकारी भी सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि वेंस का नेतृत्व वाला अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल रवाना हो चुका है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में उनके वॉशिंगटन में ही मौजूद होने की बात कही गई है। किन मुद्दों पर होगी बातचीत? इस संभावित वार्ता का मुख्य उद्देश्य अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष को खत्म करना और सीजफायर को आगे बढ़ाने का रास्ता निकालना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वेंस के साथ अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर भी इस डेलिगेशन में शामिल हो सकते हैं। ईरान की ओर से कौन करेगा नेतृत्व? ईरान की ओर से इस वार्ता में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल शामिल हो सकता है। हालांकि, तेहरान की तरफ से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मध्यस्थ देशों की भूमिका इस बातचीत को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये जैसे देश सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और दोनों पक्षों को वार्ता के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं। बढ़ता दबाव, कम समय सीजफायर खत्म होने से पहले यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो क्षेत्र में फिर से बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के भीतर ही सत्ता के शीर्ष स्तर पर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। अमेरिका के साथ संभावित वार्ता को लेकर ईरानी नेतृत्व दो धड़ों में बंटा दिख रहा है–एक पक्ष बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, जबकि दूसरा टकराव के रास्ते पर अडिग है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम भूमिका Ahmad Vahidi की मानी जा रही है, जिन पर यह तय करने की जिम्मेदारी आ टिकी है कि ईरान शांति की राह चुनेगा या संघर्ष को आगे बढ़ाएगा। IRGC बनाम सिविल नेतृत्व: बढ़ती खींचतान रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के प्रमुख अहमद वाहिदी के बीच गंभीर मतभेद उभर आए हैं। जहां गालिबाफ जैसे नागरिक नेता अमेरिका के साथ वार्ता के जरिए तनाव कम करने के पक्ष में हैं, वहीं IRGC के कई वरिष्ठ अधिकारी बातचीत का विरोध कर रहे हैं। मौजूदा संकेतों से यह भी लग रहा है कि इस समय सत्ता संतुलन में वाहिदी का प्रभाव ज्यादा मजबूत है। कौन हैं अहमद वाहिदी? अहमद वाहिदी को ईरान के सबसे प्रभावशाली और कठोर रुख वाले नेताओं में गिना जाता है। मार्च 2026 में उन्हें IRGC का कमांडर-इन-चीफ बनाया गया। इससे पहले वे गृह मंत्री और रक्षा मंत्री जैसे अहम पदों पर भी रह चुके हैं। उनका नाम 1994 के अर्जेंटीना AMIA बम धमाके में भी सामने आया था, जिसके चलते इंटरपोल ने उन्हें वांटेड घोषित किया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन पर कई प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वाहिदी का रुख हमेशा से आक्रामक रहा है और वे “अमेरिका विरोधी” रणनीति के मजबूत समर्थक हैं। ईरान के प्रॉक्सी संगठनों पर भी उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। वार्ता पर सस्पेंस, इस्लामाबाद बैठक अनिश्चित अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद जाएगा या नहीं, इस पर अभी भी संशय बना हुआ है। जहां अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल रवाना हो चुका है, वहीं ईरान की ओर से स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, यदि ईरान बातचीत के लिए सहमत भी होता है, तो उसकी शर्तें पहले जैसी ही सख्त रह सकती हैं। समुद्री तनाव और बढ़ती सख्ती इस बीच अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास अपनी नौसैनिक गतिविधियां और नाकेबंदी जारी रखी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक कई जहाजों को अपना मार्ग बदलने के निर्देश दिए गए हैं और एक ईरानी जहाज को जब्त भी किया गया है। वहीं ईरानी संसद होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर एक नया विधेयक तैयार कर रही है। इसके तहत ‘शत्रु देशों’ के जहाजों पर सख्त प्रतिबंध और टोल वसूली जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। यह कदम वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है। आगे क्या? मौजूदा हालात में यह स्पष्ट है कि ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष ही यह तय करेगा कि देश अमेरिका के साथ टकराव बढ़ाएगा या कूटनीतिक रास्ता अपनाएगा।
पश्चिम एशिया इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है, जहां एक तरफ युद्धविराम और बातचीत की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर हिंसा और अविश्वास कम होने का नाम नहीं ले रहे। इज़राइल और लेबनान के बीच लागू 10 दिन के युद्धविराम के बावजूद छिटपुट हमले जारी हैं, जिससे हालात पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाए हैं। दक्षिण लेबनान में इज़राइली हमले, 6 घायल दक्षिण लेबनान में इज़राइली हमले में कम से कम छह लोग घायल हो गए हैं। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला सीमा के पास हुआ, जहां पहले से ही तनाव बना हुआ है। युद्धविराम लागू होने के बावजूद ऐसी घटनाएं शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही हैं। गाजा में फिर बढ़ी हिंसा गाज़ा पट्टी में हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। उत्तरी तट पर इज़राइली नौसेना की गोलीबारी में एक फलस्तीनी महिला की मौत हो गई। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सोमवार को अलग-अलग हमलों में कुल पांच लोगों की जान गई है। लगातार हो रही हिंसा से क्षेत्र में मानवीय संकट और गहरा सकता है। ईरान का सख्त रुख–‘धमकियों में बातचीत नहीं’ इस बीच ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित वार्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ईरानी नेतृत्व ने साफ कहा है कि वह किसी भी तरह की धमकी या दबाव के माहौल में बातचीत स्वीकार नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और समुद्री नाकाबंदी को लेकर टकराव चरम पर है। कूटनीतिक कोशिशें जारी, लेकिन अनिश्चितता बरकरार संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालिया घटनाओं ने वार्ता की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है। क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां शांति बहाल करने की कोशिश कर रही हैं, मगर जमीनी हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं।
मेष राशि : बाहर का और खुला खाना खाते वक़्त ख़ास तौर पर बचाव पर ध्यान देने की ज़रूरत है. हालाँकि बिना वजह तनाव न लें, क्योंकि यह आपको मानसिक कष्ट दे सकता है. आपका धन कहां खर्च हो रहा है इसपर आपको नजर बनाए रखने की जरुरत है नहीं तो आने वाले समय में आपको परेशानी हो सकती है. काम का तनाव आपके दिमाग़ पर छा सकता है जिसकी वजह से परिवार और मित्रों के लिए वक़्त नहीं निकाल सकेंगे. आज आप अपने जीवन की परेशानियों को अपने संगी से साझा करना चाहेंगे लेकिन वो अपनी परेशानियों के बारें में बता के आपको और ज्यादा परेशान कर देंगे. ऐसे लोगों से साथ जुड़ें जो स्थापित हैं और भविष्य के रुझानों को समझने में आपकी मदद कर सकते हैं. बातचीत में कुशलता आज आपका मज़बूत पक्ष साबित होगी. आपके और आपके जीवनसाथी के बीच कोई बाहरी व्यक्ति दूरी पैदा करने की कोशिश कर सकता है, लेकिन आप दोनों चीज़ें संभाल लेंगे। उपाय :- पारिवारिक जीवन में खुशहाली के लिए पुरुष मस्तक पर लाल टीके का व गृहणियाँ लाल सिंदूर का प्रयोग करें। वृषभ राशि : मानसिक तौर पर आप स्थिर महसूस नहीं करेंगे- इसलिए इस बात का ख़याल रखें कि दूसरों के सामने आप कैसे बर्ताव करते और बोलते हैं. माता-पिता की मदद से आप आर्थिक तंगी से बाहर निकलने में क़ामयाब रहेंगे. शाम के वक़्त अचानक मिली कोई अच्छी ख़बर पूरे परिवार की ख़ुशी और उत्साह की वजह साबित होगी. आज आपकी मुस्कान बेमानी है, हँसी में वो खनक नहीं है, दिल धड़कने में आनाकानी कर रहा है; क्योंकि आप किसी ख़ास के साथ की कमी महसूस कर रहे हैं. कुछ सहकर्मी कई अहम मुद्दों पर आपकी कार्यशैली से नाख़ुश होंगे, लेकिन यह वे आपको बताएंगे नहीं. अगर आपको लगता है कि परिणाम आपकी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं आ रहे हैं, तो अपनी योजनाओं का फिर से विश्लेषण कर उनमें सुधार लाना बेहतर रहेगा. आज घर के लोगों के साथ बातचीत करते दौरान आपके मुंह से कोई ऐसी बात निकल सकती है जिससे घर के लोग नाराज हो सकते हैं. इसके बाद घर के लोगों को मनाने में आपका काफी समय जा सकता है. अगर आप अपने जीवनसाथी की छोटी-छोटी बातों को नज़रअन्दाज़ करेंगे, तो उन्हें बुरा लग सकता है। उपाय :- खीर का सेवन करने से स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। मिथुन राशि : बहुत ज़्यादा रोमांच और दीवानगी की ऊँचाई आपके तंत्रिका-तंत्र को नुक़सान पहुँचा सकती है. इन दिक़्क़तों से बचने के लिए अपने जज़्बात क़ाबू में रखें. आज आपके माता-पिता में से कोई आपको धन की बचत करने को लेकर लेक्चर दे सकता है, आपको उनकी बातोें को बहुत गौर से सुनने की जरुरत है नहीं तो आने वाले समय में परेशानी आपको ही उठानी पड़ेगी. अपने घर के वातावरण में कुछ बदलाव करने से पहले आपको सभी की राय जानने की कोशिश करनी चाहिए. काम के दबाव के चलते मानसिक उथल-पुथल और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. दिन के उत्तरार्ध में ज़्यादा तनाव न लें और आराम करें. आप दफ़्तर में माहौल में बेहतरी और कामकाज के स्तर में सुधार को महसूस कर सकते हैं. अगर आपके पास हालात से उबरने के लिए दृढ़ इच्छा-शक्ति है, तो कुछ भी असंभव नहीं है. आज आपका जीवनसाथी आपकी सेहत के प्रति असंवेदनशील हो सकता है। उपाय :- अपने प्रेमी/प्रेमिका को सुगन्धित परफ्यूम या इत्र गिफ्ट करें इससे लव लाइफ अच्छी रहेगी। कर्क राशि : ख़ुद को किसी रचनात्मक काम में लगाएँ. मानसिक शांति के लिए आपकी खाली बैठने की आदत ख़तरनाक साबित हो सकती है. हालाँकि आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा, लेकिन पैसे का लगातार पानी की तरह बहते जाना आपकी योजनाओं में रुकावट पैदा कर सकता है. अपने सामाजिक जीवन को दरकिनार न करें. अपनी व्यस्त दिनचर्या में से थोड़ा-सा समय निकालकर अपने परिवार के साथ किसी आयोजन में शिरकत करें. यह न सिर्फ़ आपका दबाव कम करेगा, बल्कि आपकी झिझक भी मिटा देगा. आज आपकी कोई बुरी आदत आपके प्रेमी को बुरी लग सकती है और वो आपसे नाराज हो सकते हैं. काम पर लोगों के साथ मेलजोल में समझ और धैर्य से सावधानी बरतें. खाली समय में आज आप अपने मोबाइल पर कोई वेब सीरीज देख सकते हैं. आज आप अपने जीवनसाथी के साथ सैर-सपाटे का मज़ा ले सकते हैं. साथ में समय गुज़ारने का यह बढ़िया मौक़ा है। उपाय :- बड़/बरगद के पेड को मीठे दूध से सींचे, इससे नौकरी/बिज़नेस में तरक्की होगी। सिंह राशि : आँखों के मरीज़ प्रदूषित जगहों पर जाने से बचें, क्योंकि धूँआ आपकी आँखों को और नुक़सान पहुँचा सकता है. अगर मुमकिन हो तो सूरज की तेज़ रोशनी से भी बचे. रुका हुआ धन मिलेगा और आर्थिक हालात में सुधार आएगा. परिवार के सदस्य कई चीज़ों की मांग कर सकते हैं. आज प्यार के मामले में सामाजिक बंधन तोड़ने से बचें. नए ग्राहकों से बात करने के लिए बेहतरीन दिन है. आप अपनी छुपी ख़ासियत का इस्तेमाल कर दिन को बेहतरीन बनाएंगे. आपके जीवनसाथी की सुस्ती आपके कई कामों पर पानी फेर सकती है। उपाय :- बहन, बेटी, मौसी, बुआ या साली की सहायता करना पारिवारिक जीवन के लिए शुभ है। कन्या राशि : दोस्त या सहकर्मी का स्वार्थी बर्ताव आपका मानसिक सुकून ख़त्म कर सकता है. अतिरिक्त धन को रिअल एस्टेट में निवेश किया जा सकता है. पढ़ाई की क़ीमत पर घर से ज़्यादा देर तक बाहर रहना आपको माता-पिता के ग़ुस्से का शिकार बना सकता है. करिअर के लिए योजना बनाना उतना ही आवश्यक है, जितना कि खेलना-कूदना. इसलिए माता-पिता को ख़ुश करने के लिए दोनों में संतुलन बनाना ज़रूरी है. अपने प्रिय के बिना समय बिताने में दिक़्क़त महसूस करेंगे. आज फ़ायदा हो सकता है, बशर्ते आप अपनी बात भली-भांति रखें और काम में लगन व उत्साह दिखाएँ. अगर आप किसी विवाद में उलझ जाएँ तो तल्ख़ टिप्पणी करने से बचिए. आपका जीवनसाथी आपसे नाराज़ हो सकता है, क्योंकि आप उनसे कोई बात साझा करना भूल गए थे। उपाय :- काले व सफेद तिल बराबर मात्रा में लेकर चितकबरे कपड़े में बांधकर अपने पास रखने से हेल्थ अच्छी रहेगी। तुला राशि : आज के दिन आराम करना ज़रूरी साबित होगा, क्योंकि आप हाल के दिनों में भारी मानसिक दबाव से गुज़रे हैं. नयी गतिविधियाँ और मनोरंजन आपके लिए विश्राम करने में सहायक सिद्ध होंगे. आज धन आपके हाथ में नहीं टिकेगा, आपको धन संचय करने में आज बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. घर वालों के साथ मिलकर कुछ अलग और रोमांचक किया जाना चाहिए. आपको प्यार में ग़म का सामना करना पड़ सकता है. अपनी कोशिशों को सही दिशा दें और आपको असाधारण क़ामयाबी से नवाज़ा जाएगा. मुमकिन है कि आपके अतीत से जुड़ा कोई शख़्स आज आपसे संपर्क करेगा और इस दिन को यादगार बना देगा. जीवनसाथी से बहुत ज़्यादा उम्मीदें रखना आपको वैवाहिक जीवन में उदासी की तरफ़ ले जा सकता है। उपाय :- अच्युतं केशवं विष्णुं हरिं सत्यं जनार्दनम्. हंसं नारायणं चैवमेतन्नमाष्टकम् पठेत.. विष्णु जी के इन 8 नामों का जाप करने से आर्थिक उन्नति होगी। वृश्चिक राशि : स्वास्थ्य के लिहाज़ से बहुत अच्छा दिन है. आपकी ख़ुशमिज़ाजी ही आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी करेगी. नया आर्थिक क़रार अंतिम रूप लेगा और धन आपकी तरफ़ आएगा. आपको अपनी भावनाओं को नियन्त्रित करने में कठिनाई होगी, लेकिन आस-पास के लोगों से झगड़ा न करें नहीं तो आप अकेले रह जाएंगे. अटके कामों के बावजूद रोमांस और बाहर घूमना-फिरना आपके दिलो-दिमाग़ पर छाया रहेगा. सहकर्मियों और वरिष्ठों के पूरे सहयोग के चलते दफ़्तर में काम तेज़ रफ़्तार पकड़ लेगा. इस राशि के जातक आज लोगों से मिलने से ज्यादा अकेले में वक्त बिताना पसंद करेंगे. आज आपका खाली समय घर की सफाई में बीत सकता है. आप और आपका जीवनसाथी मिलकर वैवाहिक जीवन की बेहतरीन यादें रचेंगे। उपाय :- गणेश या विष्णु जी के मंदिर में कांसे की ज्योत दान में देने से पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। धनु राशि : अपने जीवन को चिर-स्थायी न मानें और जीवन के प्रति सजगता को अपनाएँ. निवेश के लिए अच्छा दिन है, लेकिन उचित सलाह से ही निवेश करें. सामाजिक गतिविधियाँ मज़ेदार रहेंगी, लेकिन अपने रहस्य किसी के सामने उजागर न करें. फूल देकर अपने प्यार का इज़हार करें. भागीदार आपकी योजनाओं और व्यावसायिक ख़यालों के प्रति उत्साही होंगे. सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है. मुमकिन है कि आज आपका जीवनसाथी ख़ूबसूरत शब्दों में यह बताए कि आप उनके लिए कितने क़ीमती हैं। उपाय :- स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए खाना खाते समय तांबे या सोने (अगर संभव हो तो) के चम्मच का ही प्रयोग करें। मकर राशि : कुछ लोग सोच सकते हैं कि आप नया सीखने के लिए काफ़ी उम्रदराज़ हो चुके हैं- लेकिन यह सच्चाई से बहुत दूर है- आप अपने तेज़ और सक्रिय दिमाग़ की वजह से कुछ भी आसानी से सीख सकते हैं. संदिग्ध आर्थिक लेन-देन में फँसने से सावधान रहें. प्यार, मेलजोल और आपसी जुड़ाव में इज़ाफा होगा. आपको अपने प्रिय को ख़ुद के हालात समझाने में दिक़्क़त महसूस होगी. तब तक कोई वादा न करें, जब तक कि आप पूरी तरह उसे पूरा करने में सक्षम न हों. अगर आप अपने घर से बाहर रहकर अध्ययन या नौकरी करते हैं तो आज के दिन आप खाली समय में अपने घर वालों से बात कर सकते हैं. घर की किसी खबर को सुनकर आप भावुक भी हो सकते हैं. जन्मदिन भूलने जैसी किसी छोटी-सी बात को लेकर जीवनसाथी से तक़रार मुमकिन है. लेकिन अन्ततः सब ठीक हो जाएगा। उपाय :- आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए ॐ नीलवर्णाय विदमहे सैंहिकेयाय धीमहि तन्नों राहुः प्रचोदयात. इस मंत्र का 11 बार उच्चारण करें। कुम्भ राशि : अपना मूड बदलने के लिए सामाजिक मेलजोल का सहारा लें. आज बिना किसी की मदद के ही आप धन कमा पाने में सक्षम होंगे. शाम के समय अपने जीवनसाथी के साथ बाहर खाना या फ़िल्म देखना आपको सुकून देगा और ख़ुशमिज़ाज बनाए रखेगा. विवादित मुद्दों को उठाने से बचें, अगर आप आज 'डेट' पर जा रहे हैं तो. दफ़्तर में आपको कुछ ऐसा काम मिल सकता है, जिसे आप हमेशा से करना चाहते थे. आज आप अपने जीवनसाथी को सरप्राइज दे सकते हैं, अपने सारे कामों को छोड़कर आज आप उनके साथ वक्त बिता सकते हैं. अगर आपके जीवनसाथी की सेहत कर चलते किसी से मिलने की योजना रद्द हो जाए तो चिंता न करें, आप साथ में अधिक समय व्यतीत कर सकेंगे। उपाय :- प्लैटिनम की बनी कोई भी वस्तु अपने प्रेमी/प्रेमिका को गिफ्ट में देने से प्रेम सम्बन्ध मजबूत होंगे। मीन राशि : ख़याली पुलाव पकाने में वक़्त ज़ाया न करें. सार्थक कामों में लगाने के लिए अपनी ऊर्जा बचाकर रखें. पैसों की कमी आज घर में कलह की वजह बन सकती है, ऐसी स्थिति में अपने घर के लोगों से सोच-समझकर बात करें और उनसे सलाह लें. बुज़ुर्ग रिश्तेदार अपनी बेजा मांगों से आपको परेशान कर सकते हैं. अपने साथी को भावनात्मक तौर पर ब्लैकमेल करने से बचें. आपको कार्यक्षेत्र में अच्छे फल पाने के लिए अपने काम करने के तरीके पर गौर करने की जरुरत है नहीं तो आप बॉस की नजरों में आपकी नकारात्मक छवि बन सकती है. आज इस राशि के कुछ छात्र लेपटॉप या टीवी पर कोई मूवी देखकर अपना कीमती समय जाया कर सकते हैं. जीवनसाथी की ओर से जानबूझ कर भावनात्मक चोट मिल सकती है, जिसके चलते आप उदास हो सकते हैं। उपाय :- आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए गाय को गुड खिलाएँ। कृपया ध्यान दें यद्यपि शुद्ध राशिफल की पूरी कोशिश रही है फिर भी इन राशिफलों में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ अन्तर हो सकता है। ऐसी स्थिति में आप किसी ज्योतिषी से अवश्य सम्पर्क करें। किसी भी भिन्नता के लिए IDTV इन्द्रधनुष उत्तरदायी नहीं हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump का गुस्सा कैमरे पर देखने को मिला। Strait of Hormuz में भारतीय टैंकरों पर हुए हमले को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने सख्त प्रतिक्रिया दी और पत्रकार को बाहर जाने के लिए कह दिया। क्या हुआ था? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों को निशाना बनाया। इस घटना पर India ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे बेहद गंभीर बताया। सवाल पर क्यों भड़के ट्रंप? 18 अप्रैल को व्हाइट हाउस में प्रेस इंटरैक्शन के दौरान: CBS News की रिपोर्टर Olivia Rinaldi ने ट्रंप से सवाल पूछा सवाल था: भारतीय जहाजों पर हुए हमले पर अमेरिका का क्या रुख है? जैसे ही सवाल पूछा गया, ट्रंप नाराज हो गए और उन्होंने रिपोर्टर को “Out” कहकर बाहर जाने को कहा। यह पूरा वाकया कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर विवाद इस घटना के बाद: कई लोगों ने ट्रंप के व्यवहार की आलोचना की पत्रकारिता की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठे खुद ओलिविया रिनाल्डी ने भी वीडियो शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ एक अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर सवाल पूछा था। कौन हैं ओलिविया रिनाल्डी? Olivia Rinaldi: CBS News में व्हाइट हाउस रिपोर्टर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान को कवर कर चुकी हैं “CBS Evening News” और “60 Minutes” जैसे कार्यक्रमों से जुड़ी रही हैं क्यों बढ़ा तनाव? United States और ईरान के बीच तनाव चरम पर है होर्मुज में जहाजों पर हमलों से स्थिति और गंभीर हो गई है कूटनीतिक बातचीत में फिलहाल कोई खास प्रगति नहीं दिख रही
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Masoud Pezeshkian ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ट्रंप को किसने यह अधिकार दिया कि वह Iran को उसके परमाणु अधिकारों से वंचित करें। “ट्रंप कौन होते हैं रोकने वाले?” ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका बिना किसी वैध आधार के ईरान के तकनीकी और परमाणु अधिकारों पर रोक लगाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, “कोई भी देश किसी स्वतंत्र राष्ट्र को उसके अधिकारों से वंचित नहीं कर सकता।” होर्मुज को लेकर टकराव चरम पर तनाव का सबसे बड़ा केंद्र Strait of Hormuz बना हुआ है। ईरान ने एक बार फिर इस अहम समुद्री मार्ग पर आवाजाही सीमित कर दी जहाजों पर गोलीबारी की खबरों के बाद कई देशों के जहाजों को रास्ता बदलना पड़ा ईरान ने साफ कहा है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक वह होर्मुज में ढील नहीं देगा अमेरिका भी पीछे हटने को तैयार नहीं दूसरी ओर अमेरिका ने भी अपना रुख सख्त बनाए रखा है। ट्रंप ने कहा कि जब तक परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं होता, नाकेबंदी जारी रहेगी अमेरिकी बलों ने कई जहाजों को वापस मोड़ दिया है बातचीत की कोशिशें जारी हालांकि तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। Pakistan मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और 22 अप्रैल की डेडलाइन से पहले समझौते की कोशिशें तेज हैं। हाल ही में पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir ने तेहरान का दौरा कर अमेरिकी प्रस्ताव सौंपा, जिस पर ईरान विचार कर रहा है। सीजफायर की घड़ी नजदीक गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच लागू संघर्षविराम 22 अप्रैल को खत्म हो रहा है। ऐसे में आने वाले दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समुद्री मार्ग, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक राजनीति पर सीधा असर डाल रहा है। एक ओर प्रतिबंध और नाकेबंदी है, तो दूसरी ओर बातचीत की कोशिशें–अब देखना होगा कि हालात समझौते की ओर बढ़ते हैं या टकराव और गहराता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए तेहरान को अंतिम चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कहा है कि यदि Iran अमेरिका द्वारा प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए Islamabad जाएगा। ट्रंप का दोहरा संदेश: बातचीत भी, कार्रवाई की धमकी भी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए ईरान पर संघर्षविराम उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz में हुई गोलीबारी युद्धविराम समझौते के खिलाफ है, जिसमें फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के जहाजों को निशाना बनाया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने बातचीत का दरवाजा भी खुला रखा और कहा कि “हमने एक निष्पक्ष और उचित समझौता प्रस्तावित किया है।” पाकिस्तान में होगा अगला दौर ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पाकिस्तान पहुंचेगा और मंगलवार से वार्ता शुरू हो सकती है। इस प्रतिनिधिमंडल में Jared Kushner और Steve Witkoff शामिल हैं। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। “ईरान घुटने टेक देगा” – ट्रंप ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान अमेरिका के सामने ज्यादा देर टिक नहीं पाएगा और उसे अंततः समझौता करना ही होगा। उन्होंने कहा कि अगर ईरान नहीं मानता, तो अमेरिका वह कदम उठाएगा जो पिछले दशकों में नहीं उठाए गए। सीजफायर की डेडलाइन नजदीक गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को 14 दिनों का संघर्षविराम लागू हुआ था, जो 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। वैश्विक असर की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है, खासकर Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। Iran और United States के बीच बढ़ती तनातनी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को बाजार की शुरुआत सुस्त रही। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश जरूर की। शुरुआती गिरावट के बाद हल्की रिकवरी सुबह कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले, लेकिन धीरे-धीरे रिकवरी देखने को मिली। सुबह 9:23 बजे तक सेंसेक्स करीब 124 अंकों की बढ़त के साथ 78,618 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24 अंकों की तेजी के साथ 24,377 पर ट्रेड करता दिखा। बाजार में अनिश्चितता का माहौल विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर विरोधाभासी संकेत हैं। जहां पहले निवेशकों को समझौते की उम्मीद थी, वहीं अब आरोप-प्रत्यारोप ने स्थिति को जटिल बना दिया है। इस अनिश्चितता के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिसका असर ‘India VIX’ इंडेक्स में 5.82% की तेजी के रूप में देखा गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है। किन सेक्टर्स ने दिया सहारा बाजार की सुस्ती के बीच कुछ सेक्टर्स ने मजबूती दिखाई। PSU बैंक, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में खरीदारी देखी गई। इंडिविजुअल शेयरों में Trent, State Bank of India और ICICI Bank ने बाजार को सहारा दिया। वहीं Jio Financial Services, Hindalco Industries और Tata Motors जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स की राय मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक सीजफायर डेडलाइन पर स्पष्टता नहीं आती, बाजार में सतर्कता बनी रहेगी। निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 24,700 के स्तर को पार करना बाजार के लिए जरूरी होगा। फिलहाल विदेशी निवेशकों (FIIs) की खरीदारी जारी है, लेकिन घरेलू निवेशकों (DIIs) की बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है।
अमेरिका और Iran के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump बातचीत और समझौते के संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने ईरान के समुद्री रास्तों पर भारी सैन्य घेराबंदी कर दी है। United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, इस मिशन में 10,000 से ज्यादा सैनिक, 12 से अधिक युद्धपोत और 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं। समुद्र में अमेरिका की ताकत का प्रदर्शन इस ऑपरेशन में एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल हैं, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। CENTCOM का कहना है कि कोई भी जहाज अगर ईरानी बंदरगाहों की ओर जाता है या वहां से निकलता है, तो उसे रोका जाएगा और जांच की जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, लेकिन निगरानी कड़ी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने स्पष्ट किया है कि Strait of Hormuz को बंद नहीं किया गया है। यह घेराबंदी केवल ईरान के बंदरगाहों और तटीय सीमा तक सीमित है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी अमेरिकी सेना पूरी तरह सक्रिय है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। ‘डार्क फ्लीट’ पर भी शिकंजा अमेरिका ने उन जहाजों पर भी कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिन्हें ‘डार्क फ्लीट’ कहा जाता है। ये ऐसे जहाज होते हैं जो अंतरराष्ट्रीय नियमों को दरकिनार कर गुप्त रूप से ईरानी तेल की ढुलाई करते हैं। ट्रंप बोले- ईरान डील के लिए तैयार इसी बीच ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अब समझौते के लिए पहले से ज्यादा तैयार है। उन्होंने कहा, “ईरान आज उन शर्तों को मानने को तैयार है, जिनके लिए वह पहले राजी नहीं था।” ट्रंप ने साफ किया कि किसी भी संभावित डील की सबसे अहम शर्त यह होगी कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए। सीजफायर टूटा तो फिर जंग राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत असफल रही, तो युद्ध दोबारा शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा समुद्री सैन्य कदम उठाया है। United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, अरब सागर में ईरान के तटों और बंदरगाहों की घेराबंदी की गई है, जिसकी कमान अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln (CVN-72) संभाल रहा है। 100 से ज्यादा विमान और 10 हजार सैनिक तैनात CENTCOM की रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन में अमेरिका ने भारी सैन्य ताकत झोंकी है। 10,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक 12 से ज्यादा जंगी जहाज 100+ लड़ाकू विमान एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln पर अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और सर्विलांस सिस्टम तैनात हैं, जिनमें F-35C स्टील्थ फाइटर, F/A-18 जेट्स और E-2D कमांड कंट्रोल एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इसके अलावा गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black (DDG-119) को भी संदिग्ध जहाजों पर नजर रखने और उन्हें रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। क्या है अमेरिका की रणनीति? CENTCOM के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जहाज ईरानी सीमा में प्रवेश न करे और न ही वहां से बाहर निकले। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर उठाया गया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने साफ किया है कि यह नाकाबंदी केवल ईरान के तटों और बंदरगाहों तक सीमित है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नहीं है रोक अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) को ब्लॉक नहीं किया गया है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बेहद अहम मार्ग है, इसलिए इसे खुला रखा गया है। ट्रंप का बयान: ‘यह रूटीन ऑपरेशन’ Donald Trump ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘रूटीन ऑपरेशन’ बताया है। उनके मुताबिक, अमेरिकी नौसेना पूरी तरह नियंत्रण में है और कोई भी जहाज इस क्षेत्र में बिना अनुमति के आवाजाही नहीं कर पा रहा है। बढ़ा क्षेत्रीय तनाव अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव के चलते पूरे अरब सागर क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अमेरिकी बल हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे हालात और संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका की यह समुद्री घेराबंदी मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा सकती है। हालांकि, अमेरिका इसे ‘रूटीन’ बता रहा है, लेकिन इतने बड़े सैन्य जमावड़े ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच J. D. Vance ने Iran पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को रोककर “आर्थिक आतंकवाद” कर रहा है। ‘आर्थिक आतंकवाद’ का आरोप Fox News को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा: ईरान जहाजों की आवाजाही रोककर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहा है “अगर ईरान आर्थिक आतंकवाद करेगा, तो अमेरिका भी सख्त जवाब देगा” उन्होंने साफ किया कि अमेरिका ऐसी स्थिति में ईरानी जहाजों की आवाजाही भी रोक सकता है। ट्रंप की नीति का हवाला वेंस ने कहा कि Donald Trump ने यह दिखा दिया है कि: “यह खेल दोनों तरफ से खेला जा सकता है” अमेरिका जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है यहां किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है न्यूक्लियर मुद्दे पर भी सख्ती वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी कड़ा रुख अपनाया: ईरान को यूरेनियम संवर्धन पर नियंत्रण देना होगा एक मजबूत जांच प्रणाली लागू होनी चाहिए ताकि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके इस्लामाबाद वार्ता का जिक्र Islamabad में हुई हालिया वार्ता का जिक्र करते हुए वेंस ने कहा: बातचीत में “काफी प्रगति” हुई लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका “अब गेंद ईरान के पाले में है” बढ़ता टकराव इस बयान के बाद साफ है कि: अमेरिका और Iran के बीच तनाव और बढ़ सकता है कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन सैन्य और आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है दुनिया की नजर अब इस पर है कि क्या दोनों देश समझौते की दिशा में आगे बढ़ते हैं या टकराव और गहरा होता है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच Iran ने साफ कर दिया है कि वह United States के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस्लामाबाद वार्ता के बाद भी खुले हैं रास्ते Islamabad में हुई ईरान-अमेरिका शांति वार्ता भले ही बेनतीजा रही, लेकिन संवाद की संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं। भारत में ईरान के राजदूत Mohammad Fattahali ने कहा: ईरान बातचीत चाहता है लेकिन अमेरिका को “अवैध मांगों” से पीछे हटना होगा तेहरान की शर्तों को गंभीरता से लेना जरूरी है किन मांगों पर अटका मामला? ईरान ने अमेरिका की इन शर्तों को मानने से इनकार किया: परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करना Strait of Hormuz पर नियंत्रण कम करना तेहरान का कहना है कि ये मांगें उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ हैं। ‘शर्तें मानीं तो आगे बढ़ेगी बातचीत’ फताअली ने संकेत दिया कि: अगर अमेरिका रुख नरम करता है तो अगला दौर संभव है वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति J. D. Vance ने पहले कहा था कि वाशिंगटन को ईरान से यह गारंटी चाहिए कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। होर्मुज पर ईरान का दावा ईरान ने एक बार फिर Strait of Hormuz पर अपना दावा दोहराया। राजदूत के मुताबिक: यह जलमार्ग ईरान के अधिकार क्षेत्र में आता है सीमित जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी जा रही है ट्रंप की धमकी पर पलटवार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की नाकेबंदी वाली चेतावनी पर ईरान ने कड़ा जवाब दिया। फताअली ने कहा: “अगर तुम लड़ोगे, तो हम भी लड़ेंगे” “अमेरिका पहले ही ईरान की ताकत देख चुका है” वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर Mohsen Rezaei ने कहा कि: ईरान के पास जवाब देने के लिए पर्याप्त सैन्य ताकत है अमेरिकी सेना का रुख United States Central Command (CENTCOM) ने पहले ही साफ किया है: नाकेबंदी क्षेत्र में जहाजों को रोका या जब्त किया जा सकता है नियम तोड़ने वाले जहाजों पर कार्रवाई होगी, चाहे वे किसी भी देश के हों परमाणु मुद्दा बना सबसे बड़ा कारण ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम लंबे समय से अमेरिका और Israel के साथ तनाव की जड़ रहा है। तेहरान परमाणु हथियार बनाने से इनकार करता है लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अपने अधिकार पर जोर देता है आगे क्या? ईरान के इस रुख से साफ है कि: कूटनीति के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं लेकिन सैन्य टकराव का खतरा भी बना हुआ है अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों देश बातचीत से समाधान निकालेंगे या तनाव और बढ़ेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।