कलकत्ता हाईकोर्ट

TMC Relief
कलकत्ता हाईकोर्ट से टीएमसी को अंतरिम राहत, फ्रीज बैंक खातों से सीमित खर्च की मिली अनुमति

कोलकाता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये फ्रीज किए जाने के मामले में अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए सीमित वित्तीय लेन-देन की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि टीएमसी अपने दैनिक संगठनात्मक कार्य, प्रशासनिक खर्च और अदालतों में चल रहे मामलों से जुड़े कानूनी खर्चों के लिए इन खातों से राशि निकाल सकती है। हालांकि, खातों का संचालन पूरी तरह पार्टी के नियंत्रण में नहीं होगा।   स्पेशल ऑफिसर रखेंगे हर लेन-देन पर नजर जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूर्व न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया है। वे 30 सितंबर 2026 तक खातों के संचालन और धन निकासी की निगरानी करेंगे। अदालत के निर्देशानुसार, पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा जारी प्रत्येक चेक पर स्पेशल ऑफिसर के काउंटर सिग्नेचर के बाद ही बैंक भुगतान करेगा।   केवल आवश्यक खर्चों की अनुमति हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि खातों से केवल नियमित संगठनात्मक खर्च, कर्मचारियों के वेतन और कानूनी मामलों से जुड़े भुगतान ही किए जा सकेंगे। किसी भी बड़े, असामान्य या पूंजीगत खर्च पर फिलहाल रोक रहेगी। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी होने तक धन का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही हो।   पुलिस कार्रवाई पर अदालत ने जताई नाराजगी सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायत दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर बैंक खाते फ्रीज किए जाने पर सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सामान्य मामलों में पुलिस की कार्रवाई धीमी रहती है, लेकिन इस प्रकरण में असाधारण तेजी दिखाई गई, जिसके पर्याप्त कारण रिकॉर्ड पर नजर नहीं आते।   गुटबाजी पर फैसला नहीं, अगली सुनवाई सितंबर में टीएमसी के भीतर नेतृत्व विवाद को लेकर उठे सवालों पर अदालत ने कहा कि यह आदेश केवल अंतरिम राहत के लिए है और इससे किसी भी गुट के वैध होने का फैसला नहीं माना जाएगा। पार्टी के वास्तविक नेतृत्व का मुद्दा अभी निर्वाचन आयोग के समक्ष विचाराधीन है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी, जिसमें आगे की स्थिति पर निर्णय लिया जाएगा।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Mamata Banerjee Abhishek Banerjee
शहीद दिवस रैली अवमानना मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से मांगा जवाब

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शहीद दिवस रैली से जुड़े कथित अवमानना मामले में दोनों नेताओं से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करें।    क्या है पूरा मामला?   याचिकाकर्ता का आरोप है कि शहीद दिवस रैली के आयोजन के दौरान हाईकोर्ट के पहले जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था।    हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा   सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वे आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की नई तारीख भी तय की है, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Mahua Moitra
अंडे-बैंगन हमले के बाद महुआ मोइत्रा ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, मांगी सुरक्षा

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा पर कथित तौर पर अंडे, बैंगन और कीचड़ फेंके जाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करते हुए सुरक्षा और कानूनी संरक्षण की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई नहीं की, जबकि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर पर तेजी दिखाई जा रही है।   हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल करने की दी अनुमति शुक्रवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में महुआ मोइत्रा की ओर से याचिका दायर करने की अनुमति मांगी गई। उनके वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस का रवैया पक्षपातपूर्ण है और उनकी शिकायत को नजरअंदाज किया जा रहा है। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी। अब अगली सुनवाई में इस मामले में पुलिस की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अदालत का रुख स्पष्ट हो सकता है।   कार्यकर्ता सभा के दौरान हुआ था विरोध प्रदर्शन यह पूरा मामला एक जुलाई को नदिया जिले के कालीगंज में आयोजित टीएमसी की कार्यकर्ता सभा से जुड़ा है। महुआ मोइत्रा कार्यक्रम में मौजूद थीं, तभी पार्टी कार्यालय के बाहर राष्ट्रीय राजमार्ग पर काले झंडे लेकर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने “गो बैक” और “हाय-हाय” के नारे लगाए और पार्टी कार्यालय की खिड़की की ओर अंडे, बैंगन और कीचड़ फेंके। इतना ही नहीं, टीएमसी कार्यकर्ताओं और महुआ को बाहर निकलने से रोकने की भी कोशिश की गई।   पुलिस पर निष्क्रिय रहने का आरोप घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा कर दावा किया कि प्रदर्शनकारी भाजपा समर्थक थे और पुलिस पूरे घटनाक्रम के दौरान मूकदर्शक बनी रही। उन्होंने कहा कि पुलिस ने न तो भीड़ को हटाने की कोशिश की और न ही हमलावरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की। महुआ का कहना है कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। अब इस पूरे विवाद पर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Scotland batter Darcey Carter breaks down in the dugout after a narrow defeat against West Indies.
हार सामने देख टूट गईं स्कॉटलैंड की क्रिकेटर, डगआउट में फूट-फूट कर रोने लगीं डार्सी कार्टर, भावुक वीडियो वायरल

खेल में जीत और हार दोनों ही एक खिलाड़ी के सफर का हिस्सा होती हैं, लेकिन कई बार हार का दर्द भावनाओं पर इतना भारी पड़ता है कि उसे छिपा पाना मुश्किल हो जाता है। महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में स्कॉटलैंड और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए मुकाबले के बाद ऐसा ही एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। डगआउट में रोती नजर आईं डार्सी कार्टर 18 जून को खेले गए मुकाबले में वेस्टइंडीज ने स्कॉटलैंड को 7 रन से हराया। मैच के अंतिम क्षणों में कैमरा स्कॉटलैंड की बल्लेबाज डार्सी कार्टर की ओर गया, जहां वह डगआउट में बैठकर आंसू पोंछती हुई नजर आईं। उस समय स्कॉटलैंड को जीत के लिए 8 गेंदों में 17 रन की जरूरत थी, लेकिन टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। हार करीब देखकर डार्सी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाईं और फूट-फूट कर रोने लगीं। करीब 14 सेकंड का यह वीडियो क्रिकेट प्रशंसकों को भावुक कर रहा है। शानदार पारी के बावजूद नहीं दिला सकीं जीत डार्सी कार्टर का दर्द इसलिए भी ज्यादा था क्योंकि उन्होंने अपनी टीम को जीत दिलाने के लिए पूरा प्रयास किया था। 154 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने शानदार 59 रन की अर्धशतकीय पारी खेली, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका। स्कॉटलैंड की टीम निर्धारित 20 ओवर में 146 रन ही बना सकी और मुकाबला 7 रन से हार गई। टूर्नामेंट में स्कॉटलैंड की पहली हार महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में स्कॉटलैंड की यह पहली हार रही। टीम ने अपने पहले मैच में आयरलैंड को 40 रन से हराकर शानदार शुरुआत की थी। ग्रुप-2 की पॉइंट्स टेबल में स्थिति ग्रुप-2 में इंग्लैंड दो मैचों में दो जीत के साथ शीर्ष पर बना हुआ है। वेस्टइंडीज भी दो जीत के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि स्कॉटलैंड तीसरे स्थान पर मौजूद है। पहला स्थान – इंग्लैंड दूसरा स्थान – वेस्टइंडीज तीसरा स्थान – स्कॉटलैंड चौथा स्थान – श्रीलंका पांचवां स्थान – न्यूजीलैंड छठा स्थान – आयरलैंड हालांकि हार के बावजूद स्कॉटलैंड की टीम के पास सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने का मौका अभी भी बरकरार है।  

surbhi जून 19, 2026 0
Kolkata Red Road barricades and traffic arrangements ahead of International Yoga Day event led by PM Narendra Modi.
रेड रोड पर योग दिवस कार्यक्रम को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई, सरकार को वैकल्पिक यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश

  कोलकाता: 21 जून को कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि कार्यक्रम की तैयारियों के चलते रेड रोड बंद रहने की अवधि में आम लोगों और यात्रियों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए प्रभावी वैकल्पिक यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस कार्यक्रम के मद्देनजर 14 जून से रेड रोड के कुछ हिस्सों को बंद किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कार्यक्रम समाप्त होते ही रेड रोड खोलने का निर्देश मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि योग दिवस कार्यक्रम समाप्त होने के तुरंत बाद रेड रोड को आम जनता के उपयोग के लिए फिर से खोलने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं। अदालत ने कहा कि जब तक सड़क बंद रहती है, तब तक आम नागरिकों और याचिकाकर्ताओं के लिए वैकल्पिक मार्गों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। वकीलों ने उठाया आवाजाही में परेशानी का मुद्दा याचिकाकर्ता संगठन की ओर से कहा गया कि रेड रोड बंद होने के कारण वकीलों और अन्य लोगों को अदालत आने-जाने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने तर्क दिया कि सड़क को इतने लंबे समय तक बंद रखना उचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने दलील दी कि कोलकाता पुलिस आयुक्त के पास किसी सड़क को इतने लंबे समय तक बंद रखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने सड़क बंद करने संबंधी अधिसूचना को रद्द करने की मांग की। तीन सप्ताह में राज्य सरकार से हलफनामा मांगा मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सड़क बंद करने के आदेश की वैधता को चुनौती दिए जाने का संज्ञान लिया और राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं को भी सरकार के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। रक्षा मंत्रालय को भी बनाया जाएगा पक्षकार जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने याचिकाकर्ताओं को रक्षा मंत्रालय को भी मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि रेड रोड भारतीय सेना की पूर्वी कमान की भूमि पर स्थित है, इसलिए इस मामले में रक्षा मंत्रालय का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। सरकार का पक्ष: कोलकाता से दुनिया को जाएगा योग का संदेश राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) बिल्वदल भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम पश्चिम बंगाल सरकार और आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से "कोलकाता से पूरी दुनिया को योग और भारत की सांस्कृतिक विरासत का संदेश जाएगा।" ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजन क्यों नहीं? कोर्ट ने पूछा सवाल सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने से बचाने के लिए कार्यक्रम रेड रोड की बजाय ब्रिगेड परेड ग्राउंड में क्यों नहीं आयोजित किया गया। इस पर राज्य सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि इलाके में कई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं और प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी न हो। सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि याचिकाकर्ता संगठन के सदस्यों सहित आम नागरिकों की आवाजाही को यथासंभव सुगम बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
NCPI Party
TMC के 20 बागी सांसदों का NCPI में विलय

कोलकाता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों का विलय NCPI में हो गया है।  विलय के बाद नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) चर्चा में है। रिकॉर्ड के अनुसार, 3 साल पहले 2023 में बंगाल के उत्तिया कुंडू और शेउली कुंडू नाम के कपल ने पार्टी की नींव रखी थी। NCPI के डॉक्यूमेंट्स में उत्तिया कुंडू पार्टी के अध्यक्ष हैं। पत्नी शेउली का नाम कोषाध्यक्ष के रूप में दर्ज है। NCPI अध्यक्ष उत्तिया ने 13 मई को फेसबुक पर बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी के साथ अपनी फोटो शेयर करते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी थी। पति-पत्नी की है पार्टी हावड़ा में NCPI का ऑफिस है, जहां सोमवार को सुरक्षाबलों की तैनाती दिखी। ऑफिस के गेट पर उत्तिया ने खुद को बंगाली न्यूजपेपर का एडिटर और टीचर बताया है। उनकी पत्नी शेउली के नाम के नीचे कलकत्ता हाईकोर्ट की वकील लिखा है। NCPI बंगाल में रजिस्टर्ड, त्रिपुरा से चुनावी शुरुआत की NCPI का रजिस्टर्ड पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बानीपुर इलाके में है। पार्टी ने 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चार उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन, उसके उम्मीदवार या तो NOTA से पीछे रहे या फिर उससे थोड़ा ज्यादा वोट हासिल कर पाए। पार्टी को कुल मिलाकर लगभग 1,198 वोट मिले थे। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी को ₹1.13 लाख का चंदा मिला था। NCPI के चुनावी पोस्टरों में नारा था- अपने अधिकारों को बचाने के लिए दलबदलुओं को नकारें। त्रिपुरा चुनाव के बाद गायब हो गई थी पार्टी न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, NCPI ने 2023 में त्रिपुरा के चावामानु से बरजेडा त्रिपुरा को उम्मीदवार बनाया था। बरजेडा को 536 वोट मिले थे। TMC के बागी सांसदों के साथ विलय की बात सुनकर वे हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि वे दिहाड़ी मजदूर हैं। चुनाव के बाद उनका पार्टी से संपर्क खत्म हो गया था। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, त्रिपुरा के कैलाशहर से NCPI उम्मीदवार रहे जहांगीर अली ने बताया कि 2023 चुनाव के दौरान शेउली कुंडू कोलकाता से आई थीं और उम्मीदवारों से संपर्क किया था। चुनाव खत्म होने के बाद पार्टी ने गतिविधियां बंद कर दीं और संपर्क भी टूट गया। बागी TMC सांसद बोले- NDA के साथ काम करेंगे TMC के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय की घोषणा की। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की। मान्यता के लिए स्पीकर को पत्र सौंपा लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि TMC के दो-तिहाई लोकसभा सांसदों ने अलग गुट के रूप में मान्यता देने के लिए पत्र सौंपा है। उन्होंने कहा- हम PM मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ काम करेंगे। बिरला से TMC के बागी सांसदों की मुलाकात की जो फोटो सामने आई है, उसमें 17 TMC सांसद दिख रहे हैं। स्पीकर से मुलाकात से पहले सांसदों ने बंगाल भाजपा प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक की थी।

abhishek singh जून 16, 2026 0
Kalyan Banerjee Abhishek Banerjee
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कल्याण बनर्जी का बगावती तेवर

कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर मतभेद उस समय खुलकर सामने आ गए जब पार्टी के वरिष्ठ सांसद और जाने-माने वकील कल्याण बनर्जी ने सांसद अभिषेक बनर्जी के किसी भी कानूनी मामले की पैरवी करने से इनकार कर दिया। कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी का व्यवहार अत्यधिक घमंडी है और इसी कारण उन्होंने उनसे जुड़े सभी मामलों से खुद को अलग करने का फैसला किया है।   मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की सीआईडी द्वारा भेजे गए समन को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। यह समन विधायकों के हस्ताक्षर मिलान (सिग्नेचर मिसमैच) मामले से संबंधित बताया जा रहा है। साथ ही याचिका में गिरफ्तारी या किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई से अंतरिम राहत की मांग की गई है। गुरुवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक की ओर से वकील अयान भट्टाचार्य अदालत में पेश हुए।   कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने न केवल इस मामले बल्कि भविष्य में भी अभिषेक बनर्जी के किसी कानूनी प्रकरण में शामिल न होने का निर्णय लिया है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने स्वयं अदालत में मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी, जिसके बाद सुनवाई की तारीख तय हुई। लेकिन बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उनकी जगह किसी अन्य वकील को नियुक्त किया गया है।   वरिष्ठ सांसद ने यह भी आरोप लगाया वरिष्ठ सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में अभिषेक बनर्जी की भूमिका रही है, फिर भी उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। कल्याण बनर्जी ने कहा कि वह मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय लेने का आग्रह करेंगे।   उन्होंने कहा कि चार दशक से अधिक समय से कानूनी पेशे में रहने के बाद वह किसी भी प्रकार के अपमानजनक या अहंकारी व्यवहार को स्वीकार नहीं करेंगे। इस बयान के बाद टीएमसी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

abhishek singh जून 11, 2026 0
TMC leaders and legal representatives amid Calcutta High Court challenge over opposition leader recognition.
टीएमसी का हाईकोर्ट रुख, रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष मान्यता देने के फैसले को दी चुनौती

  पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अंदरूनी खींचतान अब अदालत तक पहुंच गई है। पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बागी नेता रीतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अदालत में होगी। कोर्ट ने इस याचिका को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करते हुए 11 जून को विस्तृत सुनवाई की तारीख तय की है। विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर कानूनी आपत्ति टीएमसी की ओर से दायर याचिका में विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय को चुनौती दी गई है। पार्टी का तर्क है कि नेता प्रतिपक्ष की मान्यता से जुड़ा फैसला पार्टी की आधिकारिक स्थिति और संगठनात्मक निर्णयों के अनुरूप नहीं है। याचिका में विधानसभा अध्यक्ष को मुख्य प्रतिवादी बनाया गया है। पार्टी का कहना है कि अध्यक्ष के फैसले के कारण विधानसभा के भीतर संवैधानिक और राजनीतिक विवाद पैदा हुआ है। बागी गुट के समर्थन से बढ़ा विवाद विवाद की जड़ टीएमसी विधायकों के भीतर उभरा मतभेद है। विधानसभा चुनाव 2026 के बाद विपक्ष की भूमिका में पहुंची टीएमसी के 80 विधायकों में से बड़ी संख्या ने कथित तौर पर रीतब्रत बनर्जी के समर्थन में रुख अपनाया। इसी समर्थन के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता प्रदान की थी। पार्टी नेतृत्व इस फैसले को चुनौती दे रहा है और आधिकारिक उम्मीदवार के पक्ष में अपनी दलील रख रहा है। नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर बढ़ी राजनीतिक लड़ाई टीएमसी नेतृत्व का दावा है कि पार्टी के संगठनात्मक निर्णयों की अनदेखी कर नेता प्रतिपक्ष के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। वहीं बागी गुट का तर्क है कि उन्हें पर्याप्त विधायकों का समर्थन प्राप्त है और इसी आधार पर उन्हें मान्यता मिली है। इस विवाद ने विधानसभा के भीतर विपक्ष की भूमिका और टीएमसी के आंतरिक नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विधानसभा में बदला राजनीतिक समीकरण 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर सरकार बनाई, जबकि टीएमसी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी। चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर उभरे मतभेदों ने उसके सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अब सभी की निगाहें 11 जून को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का फैसला न केवल नेता प्रतिपक्ष के पद की वैधता तय करेगा, बल्कि राज्य की विपक्षी राजनीति और टीएमसी के आंतरिक शक्ति संतुलन पर भी असर डाल सकता है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0