छात्र प्रदर्शन

तेजस्वी यादव का 19 अगस्त को लोकभवन मार्च का ऐलान
तेजस्वी यादव का बड़ा ऐलान, छात्रों पर पुलिस फायरिंग के विरोध में 19 अगस्त को लोकभवन मार्च

पटना, एजेंसियां। बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस लाठीचार्ज और फायरिंग को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने 19 अगस्त को पटना में लोकभवन तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। मार्च में राजद के सांसद, विधायक, विधान पार्षद और पार्टी कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही गई है।   सीवान में AK-47 से फायरिंग का मामला बना मुद्दा   इस विरोध का प्रमुख मुद्दा सीवान में 25 जुलाई को छात्र प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से कथित फायरिंग का मामला है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में विवाद बढ़ गया था। पुलिस के मुताबिक, संबंधित कांस्टेबल ने प्रदर्शन के दौरान खुद को और सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए हवा में चार राउंड फायर किए थे। इसके बाद उसे निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। वहीं, तेजस्वी यादव का आरोप है कि केवल एक निचले स्तर के पुलिसकर्मी को जिम्मेदार ठहराने से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर फायरिंग का आदेश नहीं था तो पुलिसकर्मी के पास AK-47 से गोली चलाने की स्थिति कैसे बनी।   19 अगस्त को RJD निकालेगा मार्च   राजद के प्रस्तावित मार्च की शुरुआत वीरचंद पटेल पथ स्थित पार्टी कार्यालय से होगी और कार्यकर्ता लोकभवन की ओर बढ़ेंगे। मार्च का नेतृत्व तेजस्वी यादव करेंगे। पार्टी के सांसदों, विधायकों, विधान पार्षदों और कार्यकर्ताओं के इसमें शामिल होने की संभावना है। तेजस्वी यादव ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।   तेजस्वी ने सरकार पर लगाया ‘पुलिसिया स्टेट’ बनाने का आरोप   तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में ‘पुलिसिया राज’ जैसी स्थिति पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि छात्रों के घायल होने के बाद मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों ने उनसे मुलाकात क्यों नहीं की। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री से घटना को लेकर माफी मांगने की मांग भी की है।   सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ सकता है टकराव   19 अगस्त का यह मार्च बिहार में छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है। राजद जहां पुलिस कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही को मुद्दा बना रहा है, वहीं सरकार की ओर से घटना में संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
PM MOdi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्र प्रदर्शनकारियों को माफ करने की बात कही, बोले- गाली देने से समस्या का समाधान नहीं होगा

नई दिल्ली, एजेंसियां। जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के मामले के बीच प्रधानमंत्री ने शुक्रवार देर रात प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में मोदी ने कहा कि अपशब्द किसी समस्या का समाधान नहीं करते। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल युवाओं को ‘भटके हुए बच्चे’ बताते हुए उन्हें माफ करने और सही दिशा दिखाने की बात कही।   जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया   यह मामला 23 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का मामला सामने आया, जिसके बाद राजनीतिक स्तर पर भी विवाद बढ़ गया।   ‘गलत राह पर गए युवाओं को रास्ता दिखाना हमारा काम’   प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि युवाओं से गलतियां हो सकती हैं और ऐसी गलतियों को सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन युवाओं को सजा दिलाने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने और समझाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने समाज से भी संयम बरतने की अपील की।   प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ भी आपत्तिजनक भाषा का जिक्र   मोदी ने कहा कि जंतर-मंतर की घटना में उनके खिलाफ ही नहीं, बल्कि उनकी दिवंगत मां के लिए भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इस पर दुख जताया, लेकिन इसके बावजूद युवाओं को माफ करने की बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि अपशब्दों और टकराव से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता।   प्रदर्शन से जुड़े कुछ लोगों ने जताया खेद   प्रधानमंत्री के संदेश के बाद प्रदर्शन से जुड़े कुछ लोगों की ओर से माफी मांगने के वीडियो भी सामने आए हैं। एक नाबालिग लड़की ने कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर माफी मांगते हुए इसे अपनी गलती बताया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है।

abhishek singh अगस्त 1, 2026 0
Siwan AK-47
सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 लहराने वाले पुलिसकर्मी पर कार्रवाई, कांस्टेबल निलंबित

सिवान, एजेंसियां। बिहार के सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर AK-47 लहराने का मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।   प्रदर्शन के दौरान सामने आया वीडियो   मामला सिवान में हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी का वीडियो सामने आया, जिसमें वह हाथ में AK-47 लिए दिखाई दे रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की। इसके बाद पुलिस विभाग ने तत्काल कदम उठाते हुए संबंधित पुलिसकर्मी की पहचान कर कार्रवाई शुरू की।   पुलिस विभाग ने लिया सख्त एक्शन   मामले को गंभीरता से लेते हुए सिवान पुलिस ने संबंधित कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों ने कहा कि पुलिस बल में अनुशासन और हथियारों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम हैं और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।   छात्र प्रदर्शन और पेपर लीक विवाद से जुड़ा मामला   यह मामला बिहार में चल रहे छात्र प्रदर्शन और परीक्षा से जुड़े विवादों के बीच सामने आया है। छात्र संगठन परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों को लेकर आवाज उठाने के दौरान पुलिस ने सख्ती दिखाई। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।   प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की   घटना के बाद प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी स्थिति में कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। इस घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।

abhishek singh जुलाई 28, 2026 0
Sonu Nigam
सोनू निगम ने दिल्ली कॉन्सर्ट टाला, छात्र प्रदर्शन के बीच लिया फैसला

नई दिल्ली, एजेंसियां। मशहूर गायक सोनू निगम ने दिल्ली में होने वाला अपना कॉन्सर्ट स्थगित कर दिया है। यह कार्यक्रम 25 जुलाई 2026 (शनिवार) को दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, द्वारका में आयोजित होना था। यह कॉन्सर्ट "BOSSitivity – Sonu Nigam Remembers Rafi" सीरीज का हिस्सा था, जिसमें वह महान गायक मोहम्मद रफी को श्रद्धांजलि देने वाले थे।   छात्र प्रदर्शन के माहौल को देखते हुए टाला कार्यक्रम   सोनू निगम ने कॉन्सर्ट स्थगित करने की पुष्टि करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों और माहौल को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। दिल्ली में चल रहे छात्र प्रदर्शन और उससे जुड़े माहौल के बीच उन्होंने कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कार्यक्रम को लेकर टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर बदलाव दिखने लगे थे और बाद में इसकी नई तारीख 15 अगस्त 2026 बताई गई।   मोहम्मद रफी को श्रद्धांजलि देने वाला था खास कार्यक्रम   यह कॉन्सर्ट सोनू निगम के लिए एक विशेष संगीत कार्यक्रम था। इसके जरिए वह भारतीय संगीत के महानतम गायकों में शामिल मोहम्मद रफी के गीतों और उनकी विरासत को सम्मान देने वाले थे। सोनू निगम कई बार रफी साहब को अपना प्रेरणास्रोत बता चुके हैं। इस शो में रफी के लोकप्रिय गीतों को सोनू निगम अपनी आवाज में पेश करने वाले थे, जिसे लेकर संगीत प्रेमियों में काफी उत्साह था।   प्रदर्शन को लेकर पहले भी सवालों में आए थे सोनू निगम   कॉन्सर्ट टालने का फैसला उस समय आया, जब एक कार्यक्रम के दौरान सोनू निगम से छात्र प्रदर्शन को लेकर सवाल किया गया था। इस पर उनका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया था। बाद में उन्होंने कॉन्सर्ट स्थगित करने का फैसला किया। सोनू निगम ने अपने फैसले को किसी विवाद से जोड़ने के बजाय मौजूदा माहौल को ध्यान में रखते हुए लिया गया निर्णय बताया।   अब 15 अगस्त को होगा कार्यक्रम   कॉन्सर्ट की नई तारीख 15 अगस्त 2026 तय की गई है। आयोजकों की ओर से कार्यक्रम से जुड़ी अन्य जानकारी जल्द साझा की जा सकती है। सोनू निगम का यह ट्रिब्यूट कॉन्सर्ट अब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित होगा, जिसमें वह मोहम्मद रफी के सदाबहार गीतों के जरिए संगीत प्रेमियों को खास अनुभव देने की तैयारी में हैं।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Students protest against NEET-UG 2026 cancellation amid paper leak controversy and nationwide demonstrations.
NEET-UG 2026 रद्द: दिल्ली से केरल तक छात्रों का प्रदर्शन, नासिक से पेपर लीक आरोपी गिरफ्तार

NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। अब मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी गई है और जांच पूरी होने के बाद दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद छात्रों का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला। दिल्ली से लेकर केरल तक छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दिल्ली में NSUI का प्रदर्शन, केरल में पुलिस से झड़प दिल्ली में National Students' Union of India (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने परीक्षा प्रणाली और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं Thiruvananthapuram में Students' Federation of India (SFI) ने कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड तोड़कर परिसर में घुस गए, जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की स्थिति बन गई। नासिक से पेपर लीक का आरोपी गिरफ्तार पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। महाराष्ट्र के Nashik से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान शुभम खैरनार के रूप में हुई है। नासिक क्राइम ब्रांच ने राजस्थान पुलिस के अनुरोध पर यह कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। विपक्ष ने सरकार पर बोला हमला कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं और इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने कहा कि “NEET अब परीक्षा नहीं, बल्कि नीलामी बन चुकी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के सपनों के लिए मौजूदा व्यवस्था सबसे बड़ा खतरा बन गई है। वहीं Arvind Kejriwal ने दावा किया कि देश में पेपर लीक एक संगठित नेटवर्क के तहत हो रहा है। उन्होंने छात्रों से अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने की अपील की। तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल Tejashwi Yadav ने कहा कि NEET परीक्षा रद्द होने से करीब 23 लाख छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लगातार हो रही पेपर लीक घटनाएं प्रशासनिक विफलता को दिखाती हैं। NTA महानिदेशक बोले- सभी दोषियों को जेल भेजेंगे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक Abhishek Singh ने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोबारा होने वाली परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष होगी और छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे सामने आया पेपर लीक का मामला अभिषेक सिंह के मुताबिक 7 मई की रात एजेंसी को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि परीक्षा से पहले कुछ प्रश्न व्हाट्सएप पर साझा किए गए थे। जांच में पाया गया कि 3 मई की परीक्षा से पहले कुछ मोबाइल फोन पर प्रश्नपत्र की पीडीएफ फाइलें भेजी गई थीं। जांच के दौरान कई सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए, जिसके बाद पेपर लीक की आशंका मजबूत हो गई। अब CBI यह पता लगाने में जुटी है कि 1 और 2 मई को ये फाइलें किन-किन लोगों तक पहुंची थीं और पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।  

surbhi मई 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 11, 2026 0