रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और मरीजों के अनुकूल बनाने की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए हैं। रिम्स की 64वीं शासी परिषद (गवर्निंग बॉडी) की बैठक में अस्पताल के बुनियादी ढांचे, चिकित्सा सुविधाओं और मेडिकल शिक्षा को नई तकनीकों से लैस करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने की। बैठक का सबसे बड़ा फैसला बैठक का सबसे बड़ा फैसला रिम्स में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू करने का रहा। इस तकनीक के लागू होने से जटिल ऑपरेशन अधिक सटीक, सुरक्षित और कम समय में किए जा सकेंगे, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा। इसके साथ ही मेडिकल छात्रों की पढ़ाई को आधुनिक बनाने के लिए संस्थान में स्मार्ट क्लासरूम भी शुरू किए जाएंगे। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए 200 नए वेंटिलेटर खरीदने का निर्णय लिया गया है। इन वेंटिलेटरों को इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में स्थापित किया जाएगा, ताकि गंभीर मरीजों का समय पर बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों की आवासीय सुविधा को बेहतर बनाने के लिए पीपीपी मॉडल पर नए हॉस्टल के निर्माण और संचालन को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा 100 बेड के नए पेइंग वार्ड के निर्माण, रेडियोथेरेपी विभाग के लिए अतिरिक्त बजट, सुपर स्पेशियलिटी सीटों में वृद्धि और मेडिकल ऑफिसरों की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी सहमति बनी। बैठक में कर्मचारियों की सेवा नियमावली, चयन समिति के गठन, दैनिक मजदूरों के सेवा विस्तार, आयुष्मान भारत और डिजिटल हेल्थ मिशन से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। साथ ही हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन और लंबित प्रशासनिक मामलों के समाधान पर भी निर्णय लिए गए। रिम्स प्रबंधन का मानना है रिम्स प्रबंधन का मानना है कि इन फैसलों से न केवल मरीजों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि मेडिकल शिक्षा, शोध और अस्पताल की कार्यप्रणाली भी नई तकनीक और बेहतर संसाधनों के साथ अधिक प्रभावी बन सकेगी।
रांची। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है। इससे पहले झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता और विधायक जयराम महतो नई दिल्ली जाकर वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में शामिल हुए थे। अब इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से वांगचुक के अनशन को लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय हित से जुड़ा मुद्दा बताया है। अपने फेसबुक पोस्ट में स्वास्थ्य मंत्री ने लिखा कि सोनम वांगचुक का अनशन केवल व्यक्तिगत मांगों का आंदोलन नहीं, बल्कि राष्ट्र और देश के युवाओं के हितों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने भी अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह और अनशन का मार्ग अपनाया था तथा वांगचुक उसी गांधीवादी विचारधारा का अनुसरण कर रहे हैं। 'सरकार का पहला दायित्व संवाद और स्वास्थ्य की रक्षा' डॉ. अंसारी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं, बल्कि उसकी आत्मा होती है। यदि कोई व्यक्ति अपनी मांगों को लेकर अनशन करता है, तो उसे किसी राजनीतिक दल या विचारधारा के नजरिए से नहीं, बल्कि एक नागरिक और राष्ट्रभक्त के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली जिम्मेदारी अनशनकारी की बात सुनना, उसके स्वास्थ्य की रक्षा करना और संवाद का रास्ता खोलना है। स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक ताकत विरोध को दबाने में नहीं, बल्कि उसे सुनने और उसका समाधान खोजने में होती है। उन्होंने कहा कि चाहे सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, उसकी संवेदनशीलता इस बात से आंकी जाती है कि वह सबसे कमजोर और पीड़ित नागरिक के साथ कैसा व्यवहार करती है। डॉ. इरफान अंसारी ने कहा डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन मानवीय मूल्य हमेशा स्थायी रहते हैं। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर संवाद, सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने की अपील की। उनके अनुसार, सरकार को ऐसा रास्ता अपनाना चाहिए जिससे न किसी अनशनकारी का जीवन संकट में पड़े और न ही लोकतंत्र की गरिमा पर कोई प्रश्नचिह्न लगे।
रांची। झारखंड के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिली है। राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) परिसर में अत्याधुनिक क्षेत्रीय नेत्र संस्थान (रीजनल आई इंस्टीट्यूट) का विधिवत उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने किया। इस संस्थान के शुरू होने से अब राज्य के मरीजों को आंखों की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। अत्याधुनिक सुविधाओं से होगा इलाज उद्घाटन के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य झारखंडवासियों को अपने ही राज्य में बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि संस्थान में मोतियाबिंद, रेटिना और आंखों से जुड़ी अन्य जटिल बीमारियों का इलाज एवं ऑपरेशन अत्याधुनिक तकनीक के साथ किया जाएगा। इससे मरीजों को बेहतर उपचार के साथ समय और खर्च दोनों की बचत होगी। मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार रिम्स को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है और क्षेत्रीय नेत्र संस्थान राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती देगा। हजारों मरीजों को मिलेगा लाभ इस अवसर पर कांके विधायक एवं रिम्स शासी परिषद के सदस्य सुरेश बैठा ने कहा कि इस संस्थान के शुरू होने से राज्य के हजारों मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा। अब बेहतर नेत्र चिकित्सा के लिए लोगों को राज्य से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। सुरक्षा विवाद पर भी दी प्रतिक्रिया कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा सरकारी सुरक्षा और कारकेड लौटाने के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध में कोई चिंता थी तो उसे कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखा जाना चाहिए था। मंत्री ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री सभी मंत्रियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर गंभीरता से निर्णय लेते हैं।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार ने पद छोड़ने के एक दिन बाद शुक्रवार को अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो गए। रवाना होने से पहले उन्होंने संस्थान की प्रशासनिक जिम्मेदारियां नव नियुक्त प्रभारी निदेशक डॉ. दीपेंद्र कुमार (डीके) सिन्हा को सौंप दीं। हाल ही में सीआईडी जांच और प्रशासनिक विवादों के बीच उनके इस्तीफे के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। प्रभारी निदेशक को सौंपा कार्यभार, खाली किया सरकारी आवास शुक्रवार सुबह डॉ. राजकुमार रिम्स निदेशक कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने सभी प्रशासनिक दस्तावेज और कार्यभार डॉ. डीके सिन्हा को विधिवत हस्तांतरित किया। इसके बाद उन्होंने निदेशक आवास भी खाली कर उसकी चाबी संबंधित अधिकारियों को सौंप दी। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। कार्यभार सौंपने के बाद वे लखनऊ के लिए रवाना हो गए। बेटे को भी साथ ले गए, इस्तीफे की चर्चा तेज डॉ. राजकुमार अपने बेटे को भी अपने साथ ले गए, जिनकी रिम्स में ट्यूटर पद पर नियुक्ति को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, संभावना है कि वे अपने बेटे से भी रिम्स की नौकरी से इस्तीफा दिला सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। गुरुवार को दिया था इस्तीफा डॉ. राजकुमार ने गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को अपना इस्तीफा सौंपा था। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने तत्काल प्रभाव से उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए अधिसूचना जारी की और रिम्स के सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को अगले आदेश तक संस्थान का प्रभारी निदेशक नियुक्त कर दिया। रिम्स में हाल में हुई सीआईडी जांच और प्रशासनिक मामलों के बीच हुए इस बदलाव को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।