मुंबई, एजेंसियां। अभिनेत्री दीपिका पादुकोण इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘Raaka’ को लेकर चर्चा में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दीपिका आठ महीने की गर्भावस्था के बावजूद फिल्म की शूटिंग जारी रखे हुए हैं। वह अभिनेता अल्लू अर्जुन के साथ इस बड़े प्रोजेक्ट के अपने बचे हुए हिस्से की शूटिंग पूरी करने में जुटी हैं। फिल्म की टीम उनकी शूटिंग जल्द पूरी करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि उनकी डिलीवरी सितंबर में होने की उम्मीद है। देर रात तक शूटिंग कर रही हैं दीपिका रिपोर्ट के अनुसार दीपिका फिल्म की शूटिंग को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। उनके बचे हुए दृश्यों को प्राथमिकता के आधार पर शूट किया जा रहा है, ताकि उनके मातृत्व अवकाश पर जाने से पहले उनका हिस्सा पूरा हो सके। फिल्म की टीम भी दीपिका की स्थिति को ध्यान में रखते हुए शूटिंग शेड्यूल तैयार कर रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अभिनेत्री ने फिल्म के महत्वपूर्ण हिस्सों को पूरा करने के लिए अपनी व्यावसायिक प्रतिबद्धता जारी रखी है। अल्लू अर्जुन के साथ पहली बड़ी फिल्म ‘Raaka’ में दीपिका पादुकोण के साथ अल्लू अर्जुन मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म को बड़े पैमाने पर बनाया जा रहा है और इसमें विज्ञान-कथा तथा फैंटेसी के तत्व देखने को मिलेंगे। दीपिका के इस प्रोजेक्ट को लेकर पहले से ही दर्शकों में उत्सुकता है। अल्लू अर्जुन के साथ उनकी जोड़ी भी फिल्म के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। सितंबर में डिलीवरी की उम्मीद रिपोर्टों के मुताबिक दीपिका की डिलीवरी सितंबर 2026 में होने की उम्मीद है। ऐसे में फिल्म की टीम उनके शूटिंग शेड्यूल को जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश कर रही है। दीपिका और रणवीर सिंह ने अप्रैल 2026 में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा की थी। अब अभिनेत्री के फिल्म की शूटिंग जारी रखने की खबर सामने आने के बाद उनके काम के प्रति समर्पण की चर्चा हो रही है। ‘Raaka’ के बाद ‘King’ पर भी नजर दीपिका पादुकोण के पास ‘Raaka’ के अलावा शाहरुख खान के साथ ‘King’ भी प्रमुख आगामी फिल्मों में शामिल है। वहीं अभिनेत्री के करियर को लेकर आगे की योजनाओं पर भी दर्शकों की नजर बनी हुई है। फिलहाल ‘Raaka’ की शूटिंग पूरी करना उनकी प्राथमिकता है और टीम डिलीवरी से पहले उनके हिस्से का काम पूरा करने में जुटी है।
मुंबई, एजेंसियां। पंकज त्रिपाठी और माही राय की फिल्म ‘ओह्ह माई डॉग’ 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। अमित राय के निर्देशन में बनी इस पारिवारिक फिल्म ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर ₹85 लाख की कमाई की है। रिलीज से पहले टली थी फिल्म ‘ओह्ह माई डॉग’ को पहले 31 जुलाई को रिलीज किया जाना था, लेकिन निर्माताओं ने इसकी रिलीज को एक सप्ताह आगे बढ़ाकर 7 अगस्त कर दिया। निर्देशक अमित राय ने बताया था कि फिल्म को पर्याप्त स्क्रीन नहीं मिल पाने और दूसरी बड़ी फिल्मों से प्रतिस्पर्धा के कारण रिलीज टालने का फैसला लिया गया। पंकज त्रिपाठी के साथ माही राय भी मुख्य भूमिका में फिल्म में पंकज त्रिपाठी, माही राय, पवन मल्होत्रा, राजेश कुमार और गीता अग्रवाल शर्मा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। कहानी एक बच्चे और एक कुत्ते के बीच बने भावनात्मक रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में कुत्तों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और पारिवारिक भावनाओं को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है। बॉक्स ऑफिस पर आगे का प्रदर्शन अहम फिल्म की वास्तविक कमाई का आकलन करने के लिए पहले सप्ताहांत के आंकड़े ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे। खासकर शनिवार और रविवार को दर्शकों की संख्या बढ़ती है या नहीं, इससे फिल्म के आगे के प्रदर्शन की तस्वीर साफ होगी।
मुंबई, एजेंसियां। हॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ ने भारत में रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। टॉम हॉलैंड और जेंडाया स्टारर इस फिल्म ने पहले दिन भारत में करीब ₹60.6 करोड़ नेट का कारोबार किया। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक यह भारत में किसी हॉलीवुड फिल्म की सबसे बड़ी ओपनिंग है। पहले दिन ही बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त शुरुआत ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ ने 30 जुलाई को भारतीय सिनेमाघरों में दस्तक दी। फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही जबरदस्त उत्साह था, जिसका असर टिकट बिक्री पर भी देखने को मिला। शुरुआती दिन फिल्म की ऑक्यूपेंसी करीब 72 फीसदी रही और दिनभर बड़ी संख्या में दर्शक सिनेमाघरों तक पहुंचे। ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ का भी रिकॉर्ड पीछे छूटा फिल्म की ओपनिंग ने भारत में हॉलीवुड फिल्मों के पिछले बड़े रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ ने पहले दिन की कमाई के मामले में ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ सहित कई बड़ी हॉलीवुड फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। फिल्म के अंग्रेजी और हिंदी संस्करणों से भी मजबूत कमाई हुई। दो दिनों में ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार पहले दिन की रिकॉर्ड कमाई के बाद फिल्म ने दूसरे दिन भी बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाए रखी। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ने भारत में दो दिनों के भीतर ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया और शुक्रवार तक इसकी कमाई करीब ₹130 करोड़ पहुंच गई। इससे फिल्म के आगे भी मजबूत प्रदर्शन करने की उम्मीद बढ़ गई है। टॉम हॉलैंड की वापसी ने बढ़ाया उत्साह ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ में टॉम हॉलैंड एक बार फिर पीटर पार्कर/स्पाइडर-मैन की भूमिका में नजर आ रहे हैं। फिल्म में जेंडाया के साथ सैडी सिंक, जैकब बैटलॉन और अन्य कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। फिल्म के शानदार शुरुआती प्रदर्शन ने भारत में मार्वल और स्पाइडर-मैन फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता को एक बार फिर साबित कर दिया है।
रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों के शौकीनों के लिए आई जिन्नी वेड्स सनी 2 ने रिलीज के पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर निराशाजनक प्रदर्शन किया है। 24 अप्रैल को सिनेमाघरों में उतरी इस फिल्म को दर्शकों से उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई, जिसका सीधा असर इसकी ओपनिंग डे कमाई पर देखने को मिला। फिल्म में अविनाश तिवारी और मेधा शंकर मुख्य भूमिका में हैं। हालांकि दोनों कलाकारों की पिछली फिल्मों को सराहा गया था, लेकिन इस बार उनकी जोड़ी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में असफल रही। खाली रहे सिनेमाघर, बेहद कम कलेक्शन देशभर में करीब 1000 शोज के साथ रिलीज हुई इस फिल्म के कई शो लगभग खाली रहे। दर्शकों की कमी के कारण फिल्म का ओपनिंग डे कलेक्शन महज 0.30 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो इस साल की सबसे कमजोर शुरुआत करने वाली फिल्मों में गिना जा रहा है। पिछली फिल्मों से भी कमजोर प्रदर्शन अगर तुलना की जाए, तो लैला मजनूं जैसी फिल्म, जो रिलीज के वक्त फ्लॉप मानी गई थी, उसने भी पहले दिन इससे बेहतर कमाई की थी। वहीं 12वीं फेल, जिसमें मेधा शंकर नजर आई थीं, ने 1.10 करोड़ रुपये के साथ शानदार शुरुआत की थी और बाद में वर्ड ऑफ माउथ के चलते बड़ी हिट साबित हुई। क्या संभल पाएगी फिल्म? इतनी धीमी शुरुआत के बाद किसी फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर वापसी करना आसान नहीं होता। अब फिल्म की आगे की कमाई पूरी तरह दर्शकों की प्रतिक्रिया और पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ पर निर्भर करेगी। फिल्म की खास बातें इस फिल्म का निर्देशन प्रशांत झा ने किया है और यह साल 2020 में आई जिन्नी वेड्स सनी का सीक्वल है। पहली फिल्म में विक्रांत मैसी और यामी गौतम मुख्य भूमिका में थे, जिसे कोविड-19 के दौरान नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया गया था।
हिंदी सिनेमा के इतिहास में अपनी गहरी छाप छोड़ने वाली फिल्मों में से एक ‘खलनायक’ एक बार फिर सुर्खियों में है। लगभग तीन दशक बाद इस कल्ट क्लासिक की दुनिया को आगे बढ़ाने का ऐलान किया गया है। अभिनेता संजय दत्त ने अपनी नई फिल्म ‘खलनायक रिटर्न्स’ की आधिकारिक घोषणा कर दी है, जिसमें वह एक बार फिर अपने चर्चित किरदार ‘बल्लू’ के अवतार में नजर आएंगे। फिल्म का पहला लुक 24 अप्रैल को जारी किया गया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बैकग्राउंड में बजता मशहूर गाना ‘खलनायक हूं मैं’ दर्शकों को सीधे 90 के दशक की यादों में ले गया। संजय दत्त का संदेश: “कहानियां खत्म नहीं होतीं” फिल्म के अनाउंसमेंट के साथ संजय दत्त ने लिखा– “कुछ कहानियां खत्म नहीं होतीं… वो दोबारा शुरू होती हैं। खलनायक रिटर्न्स।” हालांकि अभी तक फिल्म की कास्ट, कहानी और रिलीज डेट को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन केवल इस घोषणा ने ही फिल्म प्रेमियों में उत्साह बढ़ा दिया है। 1993 की ‘खलनायक’ की विरासत मूल फिल्म Khalnayak (1993) का निर्देशन दिग्गज फिल्मकार Subhash Ghai ने किया था। इस फिल्म में संजय दत्त ने ‘बल्लू’ का किरदार निभाकर हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित एंटी-हीरो में अपनी जगह बनाई थी। फिल्म में Madhuri Dixit और Jackie Shroff ने भी अहम भूमिकाएं निभाई थीं। कहानी एक खतरनाक अपराधी और पुलिस के बीच संघर्ष, धोखे और इमोशंस के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसने उस दौर में दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी थी। संजय दत्त के नए प्रोजेक्ट्स संजय दत्त हाल के वर्षों में लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बने हुए हैं। वह हाल ही में फिल्म Dhurandhar 2 में नजर आए, जो बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई। अब वह जल्द ही आगामी फिल्म Akhiri Sawaal में दिखाई देंगे, जिसका निर्देशन अभिजीत वारंग कर रहे हैं और जो 8 मई को रिलीज होने वाली है। फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ी हलचल ‘खलनायक रिटर्न्स’ की घोषणा के बाद फिल्म इंडस्ट्री में भी चर्चा तेज हो गई है। दर्शक यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या यह फिल्म पुरानी कहानी को आगे बढ़ाएगी या पूरी तरह नए अंदाज में पेश होगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।