बाबूलाल मरांडी

JPSC-JSSC आंदोलन के बीच हिरासत में लिए गए बाबूलाल मरांडी और भाजपा नेता
JPSC-JSSC Protest: बाबूलाल मरांडी समेत BJP नेता हिरासत में, विधानसभा सत्र से दूर रहे भाजपा विधायक

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के बीच सोमवार को सियासी हलचल भी तेज हो गई। छात्रों के विधानसभा घेराव के समानांतर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत भाजपा विधायक और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने पहुंचे। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। सभी को रांची के खेलगांव ले जाया गया।   CM आवास के बाहर BJP का जोरदार प्रदर्शन     भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने JPSC-JSSC छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग की।   प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा विधायक, नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।   बाबूलाल मरांडी और आदित्य साहू भी हिरासत में     पुलिस कार्रवाई में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू समेत कई भाजपा नेता और विधायक हिरासत में लिए गए। हिरासत में लिए गए सभी नेताओं को रांची के खेलगांव ले जाया गया, जहां उन्हें डिटेन किया गया है।   बताया जा रहा है कि नेताओं को सोमवार शाम तक खेलगांव में ही रखा जा सकता है।   विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हो सके BJP विधायक     भाजपा विधायकों के हिरासत में लिए जाने का सीधा असर विधानसभा की कार्यवाही पर पड़ा। पार्टी के कई विधायक हिरासत में होने के कारण सोमवार को विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हो सके।   भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार JPSC-JSSC छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की।   छात्रों के विधानसभा घेराव के बीच बढ़ी सुरक्षा     सोमवार को JPSC-JSSC आंदोलनकारी छात्रों ने भी विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। छात्रों के मार्च और भाजपा के प्रदर्शन को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।   विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।   JPSC-JSSC आंदोलन ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी     भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। एक ओर छात्र सरकार पर मांगों को लेकर दबाव बना रहे हैं, वहीं भाजपा ने भी आंदोलन के समर्थन में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।   सोमवार को छात्रों और भाजपा के अलग-अलग प्रदर्शन के कारण रांची में राजनीतिक गतिविधियां और सुरक्षा व्यवस्था दोनों चरम पर रहीं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
Babulal Marandi
JPSC-JSSC विवाद पर बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, सीबीआई जांच और अधिकारियों पर एफआईआर की मांग

हजारीबाग। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हजारीबाग के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और भारतीय जनता पार्टी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करती है।   सीआईडी जांच पर उठाए सवाल   बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार द्वारा कराई जा रही सीआईडी जांच केवल खानापूर्ति है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे ही परीक्षा अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सकेगी।   अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग   मरांडी ने मांग की कि JPSC और JSSC में कार्यरत सभी संबंधित अधिकारियों और पदाधिकारियों को तत्काल पदमुक्त कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।   अभय तिवारी मामले का किया जिक्र   प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने हाल ही में गिरफ्तार अभय तिवारी का भी उल्लेख किया। मरांडी ने दावा किया कि जांच में सामने आया है कि उसके परिवार के कुछ सदस्यों को हालिया भर्ती परीक्षाओं में नौकरी मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरे भर्ती घोटाले की ओर इशारा करता है और इसकी गहन जांच आवश्यक है।   छात्रों के आंदोलन को बताया जायज   मरांडी ने कहा कि राज्यभर में छात्र परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांगें उचित हैं। उनके अनुसार, यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो युवाओं का सरकारी भर्ती परीक्षाओं से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि JPSC और JSSC जैसी महत्वपूर्ण भर्ती एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय भर्ती प्रक्रिया को विवादों में डाल रही हैं, इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
BJP Delegation
हिमांशु सिंह ह'त्याकांड मामले में राज्यपाल से मिले भाजपा प्रतिनिधिमंडल

रांची। जमशेदपुर के चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक शिष्टमंडल प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में राजभवन पहुंचा और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच केवल केंद्रीय एजेंसी से ही संभव है।   पुलिस की कार्यशैली पर भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल भाजपा ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि 27 जून 2026 को जमशेदपुर के आदित्यपुर क्षेत्र में करणी सेना से जुड़े हिमांशु सिंह की पुलिस की मौजूदगी में हत्या कर दी गई। आरोप है कि हमलावरों ने पुलिस वैन से हिमांशु को बाहर खींचकर धारदार हथियार से हमला किया, जबकि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकी। इस घटना में घायल प्रत्युष सिंह का इलाज कोलकाता में चल रहा है।   भाजपा का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी में इस तरह की वारदात राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पार्टी ने आरोप लगाया कि अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो चुका है और कई मामलों में पुलिस जांच की दिशा बदलने का प्रयास करती रही है।   निष्पक्ष जांच की उठाई मांग ज्ञापन में भाजपा ने कहा कि पुलिस द्वारा जिन तथ्यों को सामने लाया जा रहा है, उनकी भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि जिस कारोबारी का नाम इस मामले में जोड़ा जा रहा है, उसके संबंध में सामने आए तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। भाजपा का दावा है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और दोषियों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है।   भाजपा नेताओं ने राज्यपाल से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र हस्तक्षेप किया जाए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और राज्य में कानून-व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रहे। अब इस मामले में राज्यपाल के स्तर पर होने वाली कार्रवाई और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Hemant Soren Babulal Marandi
जमशेदपुर घटना पर गरजे बाबूलाल, बोले - इसके जिम्मेदार हेमंत सरकार

गिरिडीह। झारखंड में कानून व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) व्यवस्था पर प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके सामने बेबस नजर आते हैं।   जमशेदपुर हत्याकांड को लेकर सरकार पर निशाना बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में जमशेदपुर में हुई करणी सेना के एक नेता की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। उनके अनुसार, मामले में सिर्फ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) का तबादला कर देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की मौजूदगी में हत्या होती है तो जवाबदेही भी पुलिस की तय होनी चाहिए।   एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल मरांडी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद होटल संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जबकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। उनका कहना था कि केवल प्रशासनिक बदलाव से कानून व्यवस्था में सुधार नहीं होगा।   सरकार से जवाबदेही की मांग नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की है। उन्होंने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पुलिस की जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।   गौरतलब है कि हाल ही में जमशेदपुर में एक बार के बाहर चाकूबाजी की घटना में घायल हुए हिमांशु की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Candidate
राज्यसभा की 2 सीटों पर सुबह 9 बजे से वोटिंग, देर शाम आएंगे नतीजे

रांची। झारखंड में आज 18 जून को राज्यसभा की दो सीटों पर मतदान होगा। विधानसभा में सुबह 9 बजे से वोटिंग शुरू होगी, जो शाम 4 बजे तक चलेगी। शाम करीब 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और रात 8 बजे तक नतीजे आ सकते हैं। 3 उम्मीदवार मैदान मे झारखंड में 2 सीटों पर 3 कैंडिडेट चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें सबसे अहम मुकाबला NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी और कांग्रेस के प्रणव झा के बीच है। जबकि, JMM के बैजनाथ राम की जीत तय मानी जा रही है। महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक संख्या बल की बात करें तो महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त माने जा रहे हैं। वहीं NDA के पास 24 वोट ही हैं। ऐसे में 4 अतिरिक्त वोटों की जुगाड़ को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिसने पूरे चुनाव को रोचक बना दिया है। मतदान से पहले राजधानी रांची में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। सभी दल सतर्क किसी भी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए सभी दल सतर्क हैं। कांग्रेस के विधायकों को होटल में रखा गया, जबकि NDA के विधायक भी मंगलवार से ही होटल में ठहरे हुए हैं। सभी विधायकों को मतदान प्रक्रिया और रणनीति को लेकर लगातार दिशा-निर्देश दिए गए। मॉक पोलिंग भी कराई गई। बस से विधानसभा पहुंचेंगे एनडीए व कांग्रेस के विधायक मतदान के लिए होटलों में ठहरे एनडीए व कांग्रेस के विधायक बसों से विधानसभा पहुंचेंगे। NDA के विधायक बस से होटल से निकलेंगे। इसके लिए सुबह 9 बजे का समय तय किया गया है। भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने कहा कि सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं। सभी की तैयारी पूरी है। उन्होंने बताया कि सुबह 9 बजे सभी विधायक एक साथ बस से विधानसभा के लिए रवाना होंगे। सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा पहुंचने के बाद सभी विधायक एक जगह एकत्र होंगे और अंतिम रणनीति पर चर्चा करेंगे। इसके बाद सभी विधायक बारी-बारी से मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।  वहीं होटल बीएनआर चाणक्य में कांग्रेस के अधिकांश विधायक और शीर्ष नेतृत्वकर्ता ठहरे हुए हैं। वैसे विधायक जो होटल में नहीं है। उन्हें भी होटल पहुंचने को कहा गया है। इसके बाद सभी विधायक सुबह 8 से 9 बजे के बीच बस से विधानसभा के लिए निकलेंगे।   दिन भर चला बैठकों और मॉक पोल का दौर एनडीए के बाद कांग्रेस विधायक भी बुधवार को होटल में शिफ्ट हो गए। बुधवार को होटल में दो-तीन बार बैठक कर रणनीति तय की गई। राजनीतिक समीकरणों पर मंथन का दौर चला। राजद के केंद्रीय महासचिव भोला यादव भी अपने चारों विधायकों संजय प्रसाद यादव, संजय सिंह यादव, सुरेश पासवान और नरेश प्रसाद सिंह के साथ पहुंचे। बैठक में हिस्सा लेकर वापस लौट गए। वहीं माले के विधायक अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो भी बैठक में शामिल हुए और अपना समर्थन देने की घोषणा की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि होटल में रुकने की बाध्यता नहीं है। जो रुकना चाहते थे, उनके लिए व्यवस्था की गई है। दो बार मॉल पोल कराया गया एनडीए विधायकों को इसके साथ ही होटल रेडिशन में रूके एनडीए के विधायकों को दो बार मॉक पोल कराया गया। पहली बार दोपहर 12:30 बजे और दूसरे बार दोपहर तीन बजे। दोनों बार सभी 24 विधायकों के बैलेट पेपर सही पाए गए। वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई होटल में विधायकों की बैठक भी हुई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मौजूदगी में विधायकों को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई। तय हुआ कि सभी विधायक होटल से सुबह नौ बजे बस से विधानसभा जाएंगे। जयराम बोले- ऑन दि स्पॉट लेंगे फैसला एनडीए के एक विधायक ने जेएलकेएम विधायक जयराम महतो का समर्थन मिलने का दावा किया है। लेकिन, जयराम ने इससे साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मेरे बारे में सारे पक्ष सिर्फ कयास लगा रहे हैं। राज्यसभा चुनाव पर मेरी न एनडीए से कोई बात हुई है और न महागठबंधन से। मैं किसी के संपर्क में नहीं हूँ। वोटिंग पर गुरुवार की सुबह निर्णय लूंगा।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Resort Politics
झारखंड राज्यसभा चुनाव: 'नंबर गेम' में फंसी BJP, क्रॉस-वोटिंग के डर से NDA विधायकों की होटल में बाड़ेबंदी

नई दिल्ली, एजेंसियां। 18 जून को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव से पहले झारखंड की सियासत में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' की एंट्री हो गई है। जहां एनडीए अपने विधायकों को गोलबंद कर रहा है, वहीं 'इंडिया' ब्लॉक ने मॉक पोल के जरिए अपनी जीत का दावा पुख्ता किया है।   झारखंड में राज्यसभा की दो खाली सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव ने राज्य के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। मतदान में महज कुछ ही घंटे बचे हैं और जीत-हार के जटिल 'नंबर गेम' को साधने के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है। इस चुनावी बिसात पर सबसे ज्यादा हलचल विपक्षी खेमे यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में देखने को मिल रही है, जिसने संभावित क्रॉस-वोटिंग के खतरे को भांपते हुए अपने सभी विधायकों को राजधानी के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है।   होटल में क्यों जुटे NDA विधायक? आधिकारिक तौर पर भाजपा इसे मतदान प्रक्रिया के लिए 'प्रशिक्षण शिविर' और रणनीतिक बैठक बता रही है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट किया है कि होटल में अगले दो दिनों तक विधायकों के साथ अहम बैठकें होंगी। वहीं, भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल का कहना है कि पार्टी में कई नए विधायक हैं, जिन्हें वोटिंग की सही प्रक्रिया समझाना जरूरी है। हालांकि, सियासी हलकों में इसे सेंधमारी से बचने की कवायद के रूप में ही देखा जा रहा है।   जीत का गणित और परिमल नथवानी की राह इस बार चुनावी मैदान में तीन चेहरे हैं: झामुमो (JMM) से बैद्यनाथ राम, कांग्रेस से प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी। जीत के लिए हर उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के कम से कम 28 वोटों की दरकार है।   यहीं पर एनडीए का गणित उलझता दिख रहा है। झारखंड विधानसभा में 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के पास 56 विधायकों का मजबूत बहुमत है (झामुमो-34, कांग्रेस-16, राजद-4, भाकपा-माले-2)। दूसरी ओर, एनडीए के पास केवल 24 विधायक हैं (भाजपा-21, आजसू-1, लोजपा-रामविलास-1, जदयू-1)। इसके अलावा जेएलकेएम (JLKM) का एक विधायक है। साफ है कि विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर, बिना भारी क्रॉस-वोटिंग के भाजपा समर्थित नथवानी की जीत लगभग नामुमकिन है।   'इंडिया' ब्लॉक का मॉक पोल और JMM का तंज एनडीए की इस घेराबंदी पर सत्ता पक्ष ने तीखा तंज कसा है। झामुमो की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि विधायकों को होटल भेजना यह साबित करता है कि भाजपा को अपने ही लोगों पर भरोसा नहीं है, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने किसी विधायक पर दबाव नहीं डाला है।   अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए मंगलवार को 'इंडिया' ब्लॉक ने सीएम आवास पर एक मॉक पोल (मॉक वोटिंग) का आयोजन किया। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, इस प्रशिक्षण नुमा मॉक पोल में झामुमो के बैद्यनाथ राम को 29 और कांग्रेस के प्रणव झा को 27 वोट मिले। भाकपा-माले के अरूप चटर्जी अनुपस्थित रहे, लेकिन उन्होंने इसकी पूर्व सूचना दे दी थी। कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने बताया कि चुनाव से पहले बुधवार को भी सीएम आवास पर एक अहम बैठक रखी गई है।   क्यों हो रहे हैं ये चुनाव झारखंड में राज्यसभा की ये दो सीटें हाल ही में खाली हुई हैं। इनमें से एक सीट झामुमो के दिग्गज नेता और सह-संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के कारण रिक्त हुई है। वहीं, दूसरी सीट पर भाजपा के सदस्य दीपक प्रकाश का कार्यकाल आगामी 21 जून को समाप्त हो रहा है। अब 18 जून के नतीजे ही तय करेंगे कि क्रॉस-वोटिंग का दांव सफल होता है या सत्ता पक्ष अपने दोनों उम्मीदवारों को संसद भेजने में कामयाब रहता है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0