बिहार राजनीति

Nitin Navin addressing supporters after resigning from Bankipur seat, expressing gratitude to public and party
20 साल बाद बांकीपुर से इस्तीफा: नितिन नवीन का भावुक संदेश, ‘जनता ही मेरा परिवार’

पटना की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने का फैसला लिया है। करीब 20 वर्षों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करने के बाद उनका यह कदम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। 20 साल का सफर, भावुक विदाई इस्तीफे से पहले नितिन नवीन ने एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने दो दशक लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने बताया कि 2006 में अपने पिता के निधन के बाद उपचुनाव के जरिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा और उसी के बाद से जनता की सेवा में जुटे रहे। लगातार पांच बार विधायक चुने गए नितिन नवीन ने अपने पोस्ट में बांकीपुर की जनता को “परिवार” बताया और उनके विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। ‘जनता ने रास्ता दिखाया’ अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि जनता ने उन्हें सिर्फ समस्याएं ही नहीं बताईं, बल्कि उनके समाधान का रास्ता भी दिखाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका सहयोग ही उनकी सफलता का आधार रहा है। उन्होंने बांकीपुर की जनता को “देवतुल्य” बताते हुए आभार जताया। नई जिम्मेदारी, लेकिन रिश्ता कायम नितिन नवीन ने स्पष्ट किया कि विधायक पद छोड़ने के बावजूद उनका जनता से रिश्ता खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें नई जिम्मेदारी दी है और वे उसी के माध्यम से बिहार और देश के विकास में योगदान देते रहेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने के अनुभव को भी अहम बताया। बांकीपुर में बढ़ेगी सियासी हलचल उनके इस्तीफे के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो जाएगी, जिससे उपचुनाव की स्थिति बनेगी। यह सीट बीजेपी के लिए काफी अहम मानी जाती है, ऐसे में आने वाले समय में उम्मीदवार चयन और रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर हलचल तेज होना तय है। नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत राजनीतिक जानकारों के अनुसार, नितिन नवीन का इस्तीफा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत है। माना जा रहा है कि अब उनकी भूमिका राज्य से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा सक्रिय हो सकती है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Nitish Kumar and JDU leaders announcing decision to stay out of assembly elections in five Indian states
JDU का बड़ा राजनीतिक दांव: 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव से बाहर रहेगी नीतीश कुमार की पार्टी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह इस बार पांच राज्यों-पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी-में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। चुनाव से दूरी बनाने का ऐलान देश के इन पांच राज्यों में चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सभी दल रणनीति बनाने में जुटे हैं। इसी बीच जनता दल यूनाइटेड के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पार्टी ने इस बार चुनावी मैदान से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। ‘गठबंधन धर्म’ का हवाला पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि यह फैसला गठबंधन की भावना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन होने के कारण जेडीयू ने इन राज्यों में चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय किया है। तैयारी की कमी भी बनी वजह राजीव रंजन ने यह भी स्वीकार किया कि इन राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक तैयारी उतनी मजबूत नहीं है। इसी कारण वर्तमान हालात का आकलन करते हुए चुनाव से दूर रहने का फैसला लिया गया। भविष्य के लिए दरवाजे खुले हालांकि पार्टी ने भविष्य के लिए संभावनाओं को खारिज नहीं किया है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि जब संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत होगा, तब सीट बंटवारे और चुनाव लड़ने को लेकर गठबंधन के भीतर बातचीत की जा सकती है। कब होंगे चुनाव? इन पांचों राज्यों में चुनाव की तारीखें घोषित हो चुकी हैं: पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान सभी राज्यों के नतीजे 4 मई को घोषित होंगे बदलती रणनीति के संकेत गौरतलब है कि जनता दल यूनाइटेड पहले बिहार के बाहर भी चुनाव लड़ती रही है, लेकिन इस बार पार्टी की रणनीति बदली हुई नजर आ रही है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Bihar CM Nitish Kumar addressing public during Samriddhi Yatra while reviewing development projects in districts
समृद्धि यात्रा पर CM नीतीश कुमार: आज कैमूर और रोहतास को देंगे विकास योजनाओं की सौगात

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को अपनी महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत कैमूर और रोहतास जिलों के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे कई विकास योजनाओं का उद्घाटन करेंगे और चल रही परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे। कैमूर और रोहतास में कार्यक्रम तय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुबह के समय कैमूर जिले पहुंचेंगे, जहां वे विभिन्न योजनाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद दोपहर में उनका कार्यक्रम रोहतास जिले में निर्धारित है, जहां वे विकास कार्यों की समीक्षा के साथ नई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। जनता से सीधा संवाद करेंगे CM इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री दोनों जिलों में जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे। इन सभाओं के माध्यम से वे आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे और सरकार की योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे। विकास कार्यों की होगी समीक्षा ‘समृद्धि यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य जिलों में चल रही योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करना है। नीतीश कुमार अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे और जरूरी दिशा-निर्देश देंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर दोनों जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने पहले से ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। जिलों को मिलेंगी नई योजनाओं की सौगात इस दौरे के दौरान कैमूर और रोहतास जिले को कई नई विकास योजनाओं की सौगात मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Nitish Kumar with Samrat Chaudhary during Samriddhi Yatra sparking Bihar CM succession speculation
‘सम्राट होंगे अगला CM?’-नीतीश के इशारे पर बढ़ा सस्पेंस, विजय चौधरी ने किया बड़ा खुलासा

‘समृद्धि यात्रा’ के बयान से गर्म हुई सियासत बिहार की राजनीति में इन दिनों उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान दिए गए एक बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी। मंच से उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि “आगे ये ही सब काम संभालेंगे”, जिसके बाद उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें तेज हो गईं। जेडीयू ने दी सफाई, ‘अभी ऐसा कोई फैसला नहीं’ हालांकि इन अटकलों पर विराम लगाते हुए जनता दल यूनाइटेड ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री के बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। विजय चौधरी ने ‘संकेत’ को किया डिकोड बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस पूरे मामले पर स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की यह पुरानी कार्यशैली रही है कि वे अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें आगे जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने साफ कहा, “मैं उस कार्यक्रम में मौजूद था, इसे उत्तराधिकारी का संकेत मानना सही नहीं है। मुख्यमंत्री अपने सहयोगियों का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसा कहते रहते हैं।” सम्राट चौधरी की भूमिका पर क्या बोले नेता? विजय चौधरी ने यह जरूर माना कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार में पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से काम कर रहे हैं। लेकिन उन्हें अगला मुख्यमंत्री घोषित करने जैसी कोई बात फिलहाल नहीं है। जमुई में बयान के बाद क्यों बढ़ी चर्चा? दरअसल, जमुई में ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान नीतीश कुमार लगातार दो-तीन दिनों से इसी तरह के बयान दे रहे थे। जब उन्होंने सार्वजनिक मंच से सम्राट चौधरी के लिए लोगों से समर्थन भी मांगा, तब यह चर्चा और तेज हो गई कि वह अपने उत्तराधिकारी का संकेत दे रहे हैं। आगे क्या? नीतीश कुमार के संभावित तौर पर राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलों के बीच यह मुद्दा और अहम हो गया है। हालांकि जेडीयू की सफाई के बाद फिलहाल यह स्पष्ट हो गया है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में उत्तराधिकारी को लेकर सस्पेंस बरकरार है। नीतीश कुमार के संकेतों और जेडीयू की सफाई के बीच आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Nitish Kumar with JD(U) leaders amid speculation over Bihar political shift after Delhi move
नीतीश के दिल्ली कूच से बदलेगी बिहार की राजनीति? ललन-संजय पर सस्पेंस, विजय चौधरी रहेंगे मजबूत!

सियासत में नई हलचल, ‘सम्मानजनक विदाई’ की चर्चा तेज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में इसे उनकी सक्रिय राज्य राजनीति से ‘सम्मानजनक विदाई’ के रूप में देखा जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके बाद जनता दल यूनाइटेड की कमान किसके हाथ में और किस रणनीति के तहत चलेगी। बदल सकती है सत्ता की पूरी संरचना विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद सत्ता के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। खासकर मुख्यमंत्री आवास ‘एक अणे मार्ग’ से लेकर प्रशासनिक ढांचे तक बदलाव संभव है। नई नेतृत्व शैली के अनुसार अफसरशाही में भी फेरबदल देखने को मिल सकता है। ललन सिंह और संजय झा की भूमिका पर सवाल जेडीयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और संजय झा को लेकर सियासी चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन में इनकी अहम भूमिका रही है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी भूमिका आगे भी उतनी ही प्रभावी रहेगी या सीमित हो जाएगी। हालांकि, राजनीति के जानकारों का एक वर्ग मानता है कि ललन सिंह अपनी लचीली राजनीतिक शैली के कारण हर परिस्थिति में खुद को ढाल सकते हैं। वहीं, संजय झा कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में संगठन की कमान संभालते हुए नए नेतृत्व को स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। निशांत कुमार की एंट्री से बदलेगा समीकरण? राजनीतिक हलकों में निशांत कुमार की संभावित एंट्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि अगर युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया गया, तो पार्टी की दिशा और कार्यशैली दोनों में बदलाव देखने को मिल सकता है। अशोक चौधरी की राजनीति पर भी असर अशोक चौधरी को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। लेकिन बदलते समीकरण में उनकी राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, उनका धार्मिक और संतुलित व्यक्तित्व नए नेतृत्व के साथ तालमेल बैठाने में मददगार साबित हो सकता है। विजय चौधरी की विश्वसनीयता बनी रहेगी मजबूत इन सभी बदलावों के बीच विजय कुमार चौधरी की स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है। वे लंबे समय से नीतीश कुमार के भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं और ‘सेकंड मैन’ की भूमिका में रहे हैं। उनकी विश्वसनीयता और प्रशासनिक अनुभव के चलते आने वाली सरकार में भी उनकी अहम भूमिका बनी रह सकती है। आगे क्या? कुल मिलाकर, नीतीश कुमार के दिल्ली कूच के बाद बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन, नए चेहरों की एंट्री और पुराने नेताओं की भूमिका को लेकर कई तरह के समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अब देखना होगा कि जेडीयू इस बदलाव को किस तरह संभालती है और क्या यह परिवर्तन पार्टी के लिए मजबूत साबित होता है या नई चुनौतियां लेकर आता है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Nitish Kumar and Anand Mohan amid Bihar political debate over Rajya Sabha move
नीतीश के राज्यसभा जाने पर सियासी घमासान: आनंद मोहन नाराज, बोले- निशांत की एंट्री से बदलेगी बिहार की राजनीति

पूर्व सांसद का बड़ा बयान-‘जनता खुश नहीं’, तेजस्वी पर भी साधा निशाना, युवा नेतृत्व की वकालत पटना: पटना समेत पूरे बिहार की राजनीति इन दिनों गरमा गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इस फैसले पर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने खुलकर नाराजगी जताई है और इसे जनता की भावना के खिलाफ बताया है। ‘जनता खुश नहीं’, फैसले पर उठाए सवाल मीडिया से बातचीत में आनंद मोहन ने साफ कहा कि नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाना जनता को स्वीकार नहीं है। उनके अनुसार, जिस चेहरे पर चुनाव लड़ा गया, अचानक उसका बदल जाना लोगों को निराश कर सकता है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में बड़ा असर डालेगा और आने वाले समय में इसके परिणाम देखने को मिलेंगे। मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर बढ़ी चर्चा आनंद मोहन ने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा गया था, इसलिए स्वाभाविक रूप से आगे भी उसी आधार पर निर्णय होना चाहिए था। उनके अनुसार, मौजूदा हालात में राज्य की राजनीतिक दिशा बदलती नजर आ रही है। तेजस्वी यादव पर तंज राज्यसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी यादव के ‘लोकतंत्र की हत्या’ वाले बयान पर भी आनंद मोहन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी हार के बाद तेजस्वी के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें विपक्ष की भूमिका जिम्मेदारी से निभानी चाहिए, क्योंकि जनता ने उन्हें यही जिम्मेदारी दी है। निशांत कुमार की एंट्री पर जताया भरोसा राजनीति में संभावित बदलाव का संकेत देते हुए आनंद मोहन ने निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बिहार को अब युवा नेतृत्व की जरूरत है और निशांत के आने से राजनीति को नई ऊर्जा और दिशा मिल सकती है। बदलाव के दौर में बिहार की सियासत आनंद मोहन के इस बयान को बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि निशांत कुमार राजनीति में सक्रिय होते हैं, तो राज्य की सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले और उस पर उठ रहे सवालों के बीच बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है, जहां आने वाले समय में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
Tejashwi Yadav during political event as NDA wins Rajya Sabha seat and RJD faces setback
राज्यसभा चुनाव में RJD को बड़ा झटका: तेजस्वी की रणनीतिक चूक से हारे एडी सिंह, NDA ने पलट दी बाजी

बिहार के राज्यसभा चुनाव में सियासी खेल आखिरी वक्त में पूरी तरह पलट गया। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार एडी सिंह को हार का सामना करना पड़ा, जबकि NDA ने अप्रत्याशित तरीके से बाजी अपने नाम कर ली। इस हार के पीछे पार्टी के भीतर की रणनीतिक कमजोरी और नेतृत्व की जल्दबाजी को बड़ा कारण माना जा रहा है।   नतीजों से पहले ही साफ हो गई थी तस्वीर चुनाव के नतीजे आने से पहले ही यह लगभग तय हो गया था कि तेजस्वी यादव के इकलौते उम्मीदवार की राह मुश्किल हो चुकी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, जिस तरह से विधायकों का समर्थन टूटता गया, उससे संकेत मिल गए थे कि परिणाम RJD के पक्ष में नहीं जाएगा।   रणनीति में चूक और ‘जल्दबाजी’ बनी बड़ी वजह विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रबंधन में वही गलती दोहराई, जो पहले भी उनके लिए भारी पड़ चुकी है। AIMIM विधायकों का समर्थन मिलने के बाद उन्होंने जीत लगभग तय मान ली थी, लेकिन अंतिम समय में समीकरण बदल गए। इससे पहले भी विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने समय से पहले सरकार बनाने का दावा कर दिया था, जो बाद में उनके खिलाफ गया। इस बार भी कुछ वैसी ही स्थिति देखने को मिली।   विधायकों का ‘गच्चा’, RJD को नहीं था अंदाजा RJD को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उसके अपने एक विधायक और कांग्रेस के तीन विधायकों ने साथ नहीं दिया। पार्टी को इस तरह की अंदरूनी टूट की उम्मीद नहीं थी, जिससे पूरा गणित बिगड़ गया। राजनीतिक गलियारों में इसे NDA की सटीक रणनीति और विपक्ष की कमजोर पकड़ के रूप में देखा जा रहा है।   फैसल रहमान की भूमिका पर उठे सवाल ढाका से RJD विधायक फैसल रहमान का समर्थन न मिलना भी चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। सवाल उठ रहा है कि खुद को मुस्लिम समुदाय का बड़ा चेहरा बताने वाले तेजस्वी यादव अपने ही विधायक को साथ रखने में क्यों असफल रहे। सूत्रों के अनुसार, फैसल रहमान की विधायकी को लेकर कानूनी चुनौती और कम अंतर से जीत जैसे कारण उनके फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।   कांग्रेस की अनुपस्थिति से बिगड़ा खेल इस चुनाव में कांग्रेस के कुछ विधायकों की गैरहाजिरी भी RJD के लिए भारी पड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन के भीतर तालमेल की कमी साफ दिखी, जिससे विपक्ष की पूरी रणनीति कमजोर पड़ गई।   NDA की चाल के आगे RJD बेबस जहां RJD अपने समीकरण को लेकर आश्वस्त दिख रही थी, वहीं NDA ने आखिरी वक्त में ऐसी रणनीति अपनाई कि पूरा खेल बदल गया। इसे राजनीतिक ‘चेकमेट’ की तरह देखा जा रहा है, जहां विपक्ष को संभलने का मौका ही नहीं मिला।   भविष्य की राजनीति पर असर यह हार सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं, बल्कि RJD की रणनीति और नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल खड़े करती है। आने वाले चुनावों में तेजस्वी यादव के लिए यह एक बड़ी सीख मानी जा रही है कि केवल समर्थन जुटाना ही नहीं, बल्कि उसे अंत तक बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Nitish Kumar at JDU meeting amid discussion on party president election and leadership future
जदयू अध्यक्ष चुनाव का ऐलान: क्या फिर नीतीश कुमार के हाथ में होगी कमान या आएगा नया चेहरा?

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर पार्टी की कमान संभालेंगे या इस बार किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा।   चुनाव कार्यक्रम घोषित, तारीखें तय जदयू द्वारा जारी आधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 22 मार्च रखी गई है। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 24 मार्च को नाम वापस लेने की आखिरी तारीख होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो 27 मार्च को मतदान कराया जाएगा।   नीतीश कुमार का फिर अध्यक्ष बनना लगभग तय? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार का दोबारा निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। 29 दिसंबर 2023 को पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने संगठन को एकजुट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसा कोई दूसरा चेहरा नहीं है, जिस पर सभी गुटों की सहमति बन सके। ऐसे में अगर 24 मार्च तक केवल एक ही नामांकन आता है, तो उसी दिन औपचारिक रूप से उनके नाम का ऐलान हो सकता है।   दिल्ली से पटना तक तेज हुई राजनीतिक हलचल चुनाव की घोषणा के साथ ही पटना और दिल्ली स्थित जदयू दफ्तरों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस संगठनात्मक चुनाव को पार्टी की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण में व्यस्त हैं। 17 से 20 मार्च के बीच वे भागलपुर, बांका, जमुई और गया समेत कई जिलों का दौरा कर रहे हैं और विकास योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं।   क्या संगठन में होगा बदलाव या जारी रहेगी पुरानी रणनीति? यह चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे जदयू के आगामी राजनीतिक दिशा के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर नई पीढ़ी को लेकर चर्चा हो रही है और निशांत कुमार की संभावित सक्रियता को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, यह चुनाव और भी अहम हो गया है। अब सबकी नजरें 24 मार्च और उसके बाद की स्थिति पर टिकी हैं- क्या जदयू फिर से नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा या पार्टी किसी नए नेतृत्व की ओर कदम बढ़ाएगी।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Rajya Sabha Election 2026 results show Bihar clean sweep and Odisha gains
राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार में NDA का क्लीन स्वीप, ओडिशा में मिला बढ़त; हरियाणा में मतगणना पर विवाद

राज्यसभा चुनाव 2026 में भारतीय राजनीति का समीकरण साफ तौर पर सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बिहार में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि ओडिशा में भी पार्टी ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वहीं हरियाणा में वोटों को लेकर विवाद के कारण परिणाम अब तक अधर में लटका हुआ है।   बिहार: NDA का दबदबा कायम बिहार की पांचों सीटों पर NDA उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इनमें नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश राम शामिल हैं। इस जीत ने राज्य में NDA की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत कर दिया है।   ओडिशा: BJP आगे, BJD और निर्दलीय को भी सफलता ओडिशा की चार सीटों में से दो पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सांसद सुजीत कुमार ने 35-35 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। वहीं बीजू जनता दल के संतृप्त मिश्रा ने 31 वोट पाकर जीत हासिल की। चौथी सीट पर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय ने दूसरे वरीयता मतों के जरिए जीत दर्ज की।   हरियाणा: मतगणना पर बवाल, नतीजे लंबित हरियाणा में चुनावी प्रक्रिया के दौरान वोटों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मतगणना के बीच हंगामे के कारण काउंटिंग को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। फिलहाल यहां के नतीजों का इंतजार जारी है।   देशभर का परिदृश्य देश में कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहा है, जिनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। शेष 11 सीटों पर हुई वोटिंग के नतीजों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। अब तक के रुझानों से साफ है कि भाजपा और NDA का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
MLA Abidur Rahman alleging NDA offering deals to MLAs
राज्यसभा चुनाव के बीच सियासी हलचल: कांग्रेस के 3 विधायक वोटिंग से गायब, आबिदुर रहमान का दावा-NDA दे रहा ऑफर

  वोटिंग के दौरान बढ़ी राजनीतिक हलचल बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चल रही वोटिंग के बीच अचानक सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के तीन विधायक मतदान प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस बीच कांग्रेस विधायक Abidur Rahman ने दावा किया है कि इन विधायकों का फोन बंद है और उन्हें NDA की ओर से लगातार ऑफर दिए जा रहे हैं।   वोटिंग में नहीं पहुंचे तीन विधायक जानकारी के मुताबिक राज्यसभा चुनाव के मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन विधायक विधानसभा नहीं पहुंचे। इनमें फारबिसगंज से विधायक Manoj Kumar Singh, वाल्मीकिनगर से विधायक Surendra Prasad Kushwaha और मनिहारी से विधायक Manohar Prasad Singh शामिल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन तीनों नेताओं के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ मिल रहे हैं। सुबह तक वे होटल या बैठक स्थल पर भी नहीं पहुंचे थे, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया।   कांग्रेस का आरोप – NDA की ओर से मिल रहे ऑफर कांग्रेस विधायक आबिदुर रहमान ने आरोप लगाया कि NDA की ओर से इन विधायकों को ऑफर दिए जा रहे हैं और लगातार संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि इसी वजह से उनके फोन बंद हैं और वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ पा रहे हैं। हालांकि इस आरोप पर अभी तक NDA की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।   पांचवीं सीट पर बढ़ा सस्पेंस बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। मौजूदा विधानसभा गणित के मुताबिक इस सीट पर जीत के लिए NDA को कुछ अतिरिक्त वोटों की जरूरत बताई जा रही है। ऐसे में हर विधायक का वोट बेहद महत्वपूर्ण हो गया है, जिसकी वजह से दोनों राजनीतिक खेमे अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हुए हैं।   नतीजों से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी और बढ़ गई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गायब बताए जा रहे विधायक कब सामने आते हैं और वोटिंग के अंतिम परिणाम पर इसका क्या असर पड़ता है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Rajya Sabha election voting underway in Bihar, Odisha and Haryana amid cross-voting concerns and tight contests.
राज्यसभा चुनाव: 11 सीटों पर आज मतदान, बिहार-ओडिशा-हरियाणा में कड़ा मुकाबला, क्रॉस-वोटिंग पर नजर

  देश के तीन राज्यों-बिहार, ओडिशा और हरियाणा-में आज राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। वोटिंग सुबह 11 बजे से शुरू होगी और मतगणना के बाद नतीजे भी आज ही शाम तक घोषित किए जाने की संभावना है। इस बार कुल 37 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है, जिनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इन निर्विरोध चुने गए नेताओं में शरद पवार, रामदास अठावले, अभिषेक मनु सिंघवी, थंबी दुरई, विनोद तावड़े और बाबुल सुप्रियो जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं। हालांकि बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।   बिहार: पांचवीं सीट पर टिकी सबकी नजर बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान हो रहा है। सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों-नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन और शिवम कुमार-की जीत लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन असली मुकाबला पांचवीं सीट पर है, जहां NDA के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा और महागठबंधन समर्थित एडी सिंह आमने-सामने हैं। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत है। माना जा रहा है कि AIMIM के पांच और BSP के एक विधायक का समर्थन मिलने से मुकाबला कड़ा हो सकता है। वहीं NDA को उम्मीद है कि महागठबंधन के कुछ विधायक क्रॉस-वोटिंग कर सकते हैं। कांग्रेस और बीएसपी के कुछ विधायकों पर भी सभी दलों की नजर बनी हुई है।   ओडिशा: भाजपा और बीजद के बीच संतुलन ओडिशा की चार सीटों पर भी दिलचस्प राजनीतिक समीकरण बन गए हैं। अनुमान है कि भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल दो-दो सीटें जीत सकती हैं। ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी उसे प्राप्त है, जिससे दो सीटें लगभग उसके खाते में तय मानी जा रही हैं। हालांकि तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए भाजपा को आठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। वहीं बीजद के पास 48 विधायक हैं, जिससे उसकी एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है। अगर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का समर्थन मिल जाता है तो पार्टी दूसरी सीट भी जीत सकती है। चौथी सीट पर भाजपा समर्थित दिलीप रे और बीजद के उम्मीदवार के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।   हरियाणा: निर्दलीय प्रत्याशी से बढ़ा रोमांच हरियाणा की दो सीटों पर चुनाव हो रहा है। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 48 विधायक हैं, जबकि Indian National Lok Dal के दो और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन उसे प्राप्त है। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस के 37 विधायक हैं और उसके उम्मीदवार करमवीर बोध भी जीत की स्थिति में नजर आ रहे हैं। हालांकि निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। उन्हें जीतने के लिए अतिरिक्त नौ वोटों की जरूरत होगी, जो बिना क्रॉस-वोटिंग के संभव नहीं माने जा रहे। इसी आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने कई विधायकों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है।   शाम तक साफ होगी तस्वीर तीनों राज्यों में मतदान पूरा होने के बाद आज शाम तक परिणाम सामने आ जाएंगे। कई सीटों पर जीत-हार का फैसला क्रॉस-वोटिंग पर निर्भर माना जा रहा है, इसलिए कुछ जगहों पर चौंकाने वाले नतीजों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Nitish Kumar pats Samrat Choudhary during Samriddhi Yatra event, sparking Bihar CM speculation
बिहार का नया सीएम तय? सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाते दिखे नीतीश कुमार, समृद्धि यात्रा में बताया विकास का रोडमैप

  बिहार की राजनीति में उस समय चर्चाएं तेज हो गईं जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने समृद्धि यात्रा के दौरान मंच पर उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary की पीठ थपथपाते हुए राज्य के विकास की बात कही। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कोई संकेत दिया गया है।   पूर्णिया और कटिहार में समृद्धि यात्रा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत Purnia और Katihar पहुंचे। यहां आयोजित सभाओं में उन्होंने बिहार के विकास के लिए आने वाले पांच वर्षों का रोडमैप जनता के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और खेल जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार में विकास की रफ्तार और तेज होगी।   हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज खोलने की योजना पर काम कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अपने इलाके में ही उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।   अस्पतालों को बनाया जाएगा विशेष अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रखंड स्तर के अस्पतालों को विशेष अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण सड़कों को दो लेन में बदलने की योजना भी बनाई गई है, ताकि गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर हो सके।   पटना में बनेगी आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी राजधानी Patna में एक आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना भी सामने रखी गई है। इसके जरिए खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं दी जाएंगी। सरकार खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की योजना पर भी काम कर रही है, ताकि खेलों को बढ़ावा मिल सके।   मखाना किसानों के लिए विशेष योजना मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि Makhana उत्पादन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इससे मिथिलांचल क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।   मंच पर भावुक हुईं मंत्री लेशी सिंह कटिहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री Leshi Singh अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए भावुक हो गईं और मंच पर ही रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कठिन समय में उनका साथ दिया और राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया।   सम्राट चौधरी को लेकर बढ़ी चर्चा कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच पर मौजूद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाकर भरोसा जताया कि राज्य में विकास कार्य इसी तरह आगे बढ़ते रहेंगे। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि क्या यह भविष्य के नेतृत्व को लेकर कोई संकेत है।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
NDA leaders meeting in Patna to discuss strategy for Bihar Rajya Sabha Election 2026
राज्यसभा चुनाव 2026: पटना में 14–15 मार्च को NDA की अहम बैठक, पांचों सीटों पर जीत की रणनीति होगी तय

  बिहार में Rajya Sabha Election 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ National Democratic Alliance (NDA) और विपक्षी Mahagathbandhan दोनों ही खेमों में लगातार बैठकों का दौर जारी है। इसी कड़ी में पटना में 14 और 15 मार्च को NDA की महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकें होने जा रही हैं, जिनमें राज्यसभा की पांचों सीटों पर जीत का फॉर्मूला तय किया जाएगा।   उपेंद्र कुशवाहा और विजय चौधरी के आवास पर बैठक जानकारी के मुताबिक 14 मार्च को बैठक Upendra Kushwaha के आवास पर होगी। कुशवाहा Rashtriya Lok Morcha के अध्यक्ष हैं और NDA के राज्यसभा उम्मीदवार भी हैं। इसके बाद 15 मार्च को अंतिम रणनीतिक बैठक Vijay Kumar Chaudhary के आवास पर होगी। इस बैठक में NDA के विधायक और विधान पार्षद शामिल होंगे और मतदान की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। सभी जनप्रतिनिधियों से कहा गया है कि वे मतदान तक Patna में ही रहें।   सम्राट चौधरी के आवास पर पहले ही हो चुकी है बैठक इससे पहले गुरुवार को Samrat Choudhary के आवास पर भी NDA नेताओं की बैठक हुई थी। इस बैठक में Sanjay Saraogi (भाजपा प्रदेश अध्यक्ष)   Umesh Singh Kushwaha (जदयू प्रदेश अध्यक्ष)   Sanjay Suman (हम नेता)   Raju Tiwari (लोजपा-रामविलास प्रदेश अध्यक्ष)   सहित कई नेता मौजूद रहे। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि सभी विधायक और पार्षद NDA के पांचों उम्मीदवारों को वोट देकर जीत दिलाएंगे।   महागठबंधन भी बना रहा रणनीति दूसरी ओर विपक्षी महागठबंधन भी अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटा है। नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav अपने आवास पर सहयोगी दलों के नेताओं के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं। हाल ही में Akhtarul Iman ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि अंतिम फैसला Asaduddin Owaisi लेंगे।   जीत के लिए चाहिए 41 वोट राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत है। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं।   उसे उम्मीद है कि All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के 5 और Bahujan Samaj Party के 1 विधायक का समर्थन मिलने पर उसके उम्मीदवार की जीत संभव हो सकती है।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Prashant Kishor speaking at Sasaram press conference criticizing Nitish Kumar over Rajya Sabha speculation
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर प्रशांत किशोर का तंज: ‘अब बिहार से मुख्यमंत्री का भी पलायन’

  जन सुराज अभियान के सूत्रधार Prashant Kishor ने बिहार की राजनीति को लेकर एक बार फिर तीखा बयान दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की चर्चा पर तंज कसते हुए कहा कि अब तक बिहार से केवल युवाओं का पलायन होता था, लेकिन अब तो मुख्यमंत्री का भी पलायन होने लगा है। मंगलवार को सासाराम में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रशांत किशोर ने राज्य की मौजूदा स्थिति और सरकार के कामकाज पर कई सवाल उठाए।   ‘सरकार के वादे पूरे नहीं हुए’ प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव के समय सरकार ने अपराध पर नियंत्रण, भ्रष्टाचार पर लगाम और पलायन रोकने जैसे कई बड़े वादे किए थे। लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए लगता है कि ये समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में युवाओं के सामने रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें दूसरे राज्यों में काम करने के लिए जाना पड़ रहा है।   ‘अन्य राज्यों में 50 से ज्यादा बिहारियों की मौत’ पलायन के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष नवंबर के बाद से 50 से अधिक बिहारियों की मौत अन्य राज्यों में हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अगर लोग धर्म, जाति और पैसे के लालच में वोट देते रहेंगे, तो बिहार की स्थिति में सुधार मुश्किल है।   चुनावी हार पर भी बोले प्रशांत किशोर प्रेस वार्ता में उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में मिली हार पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने जाति, धर्म या पैसों के आधार पर राजनीति नहीं की और ईमानदारी से लोगों से बिहार के बच्चों के भविष्य के नाम पर वोट देने की अपील की थी, लेकिन जनता उनकी बात समझ नहीं पाई। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बिहार में वास्तविक बदलाव नहीं होगा, तब तक जन सुराज आंदोलन अपनी कोशिश जारी रखेगा।   ‘नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री नहीं रहने की बात सच हुई’ प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने पहले ही दावा किया था कि नीतीश कुमार लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर नहीं रह पाएंगे। उस समय लोगों ने उनका मजाक उड़ाया था, लेकिन अब उनकी बात सही साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से वह लगातार यह कह रहे थे कि नीतीश कुमार की मानसिक और शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकें।   निशांत कुमार के राजनीति में आने पर क्या बोले मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar के राजनीति में आने की संभावना पर प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को राजनीति में आने का अधिकार है और उनका स्वागत है। हालांकि उन्होंने परिवारवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई नेताओं ने अपने बच्चों के लिए सत्ता का रास्ता तैयार कर दिया है, जबकि आम जनता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर उतनी गंभीर नहीं दिखती।   संगठन को मजबूत करने पर जोर प्रशांत किशोर ने बताया कि बिहार में व्यवस्था परिवर्तन और नवनिर्माण के लक्ष्य के साथ जन सुराज अभियान आने वाले छह महीनों में अपनी गतिविधियों को फिर तेज करेगा। इसके लिए पहले संगठन को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश के हर जिले में तीन दिनों का प्रवास करेंगे और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन को और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव लेंगे।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
Bihar CM Nitish Kumar launching Samriddhi Yatra while Tejashwi Yadav plans strategy meeting for Rajya Sabha elections
बिहार में सियासी हलचल तेज: आज से ‘समृद्धि यात्रा’ पर निकलेंगे सीएम नीतीश कुमार, राज्यसभा चुनाव पर रणनीति बनाएंगे तेजस्वी यादव

  बिहार की राजनीति में मंगलवार से हलचल और तेज होने वाली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज (10 मार्च) से अपनी बहुचर्चित ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर राज्यसभा चुनाव को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी अपनी पार्टी के विधायकों के साथ अहम बैठक कर रणनीति तय करेंगे।   सुपौल के निर्मली से शुरू होगी समृद्धि यात्रा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ का आगाज सुपौल जिले के निर्मली से होगा। इस दौरान सीएम विभिन्न विकास परियोजनाओं का निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री निर्मली में बन रहे रिंग बांध का निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा सरकारी योजनाओं से जुड़े स्टॉलों का अवलोकन भी करेंगे। कार्यक्रम के दौरान वे कई नई योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करने वाले हैं।   जनसभा को भी करेंगे संबोधित यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री दोपहर में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इस मौके पर वे क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिए सरकार जमीनी स्तर पर चल रहे विकास कार्यों का आकलन करना चाहती है।   राज्यसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी की बैठक उधर, राज्यसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर सियासी समीकरण बन रहे हैं। इसी को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आज अपनी पार्टी के विधायकों के साथ बैठक करेंगे। बताया जा रहा है कि इस बैठक में चुनावी रणनीति, वोट मैनेजमेंट और आगे की राजनीतिक योजना पर चर्चा की जाएगी।   जनता से संवाद की तैयारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने का फैसला कर चुके हैं। ऐसे में बिहार की सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने से पहले वे ‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए एक बार फिर जनता से सीधा संवाद स्थापित करना चाहते हैं। इस यात्रा के दौरान वे राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे और स्थानीय लोगों की समस्याओं को भी सुनेंगे।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Poster outside BJP office in Patna demanding Chirag Paswan as Bihar Chief Minister
“बिहार का CM सिर्फ चिराग हो” – पटना में BJP कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर से तेज हुई सियासी हलचल

  नीतीश कुमार के नामांकन के बाद बदला राजनीतिक माहौल मुख्यमंत्री Nitish Kumar द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच एनडीए खेमे के भीतर से एक नई मांग सामने आई है, जिसने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।   चिराग पासवान को CM बनाने की मांग लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री Chirag Paswan को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाई है। राजधानी Patna में Bharatiya Janata Party के कार्यालय के बाहर इस मांग को लेकर कई पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टर सामने आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चा का दौर तेज हो गया है।   पोस्टर में लिखे गए नारे बने चर्चा का विषय पोस्टरों में लिखा गया है- “ना दंगा हो, ना फसाद हो, बिहार का CM सिर्फ चिराग हो।” इसके साथ ही एक अन्य पंक्ति में लिखा गया है- “सजाओ इनके सर पर ताज, तभी आएगा बिहार में स्वर्ण काल।” इन नारों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि यदि बिहार में एनडीए की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री पद के लिए चिराग पासवान को आगे किया जाना चाहिए।   ‘मोदी के हनुमान’ वाला संदेश भी शामिल पोस्टर में आगे लिखा गया है- “मोदी जी का मिला अपने हनुमान को आशीर्वाद, चिराग होंगे बिहार के नए सरताज।” इसके अलावा यह भी लिखा गया है कि “बिहार मांग रहा है चिराग, अब समय आ गया है युवा मुख्यमंत्री बनाने का। NDA की होगी सरकार, CM होगा सिर्फ चिराग।”   LJP (रामविलास) नेताओं की पहल जानकारी के अनुसार, ये पोस्टर Lok Janshakti Party (Ram Vilas) के पटना जिला अध्यक्ष इमाम गजाली की ओर से लगवाए गए हैं। पोस्टर लगने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या भविष्य में एनडीए गठबंधन चिराग पासवान को मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में आगे बढ़ा सकता है।   राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा हालांकि इस मांग पर अभी तक NDA के शीर्ष नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पोस्टर के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Lohia Ashram in Sitamarhi linked to Nitish Kumar’s early political journey during JP Movement
लोहिया आश्रम में पसरी मायूसी: नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले से भावुक हुए पुराने साथी

  संघर्ष की शुरुआत का साक्षी रहा सीतामढ़ी का लोहिया आश्रम बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़े बदलाव की चर्चा तेज है। लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे Nitish Kumar के राज्यसभा जाने के फैसले ने उनके पुराने साथियों और समर्थकों को भावुक कर दिया है। सीतामढ़ी स्थित Lohia Ashram वह जगह है, जहां से नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन की कई महत्वपूर्ण यादें जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि उनके इस फैसले के बाद आश्रम से जुड़े लोगों के बीच उदासी का माहौल देखने को मिल रहा है।   जेपी आंदोलन के दौर से जुड़ा रहा नीतीश का सफर साल 1974 में हुए ऐतिहासिक JP Movement के समय लोहिया आश्रम आंदोलन की गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था। उस दौर में कई युवा नेता और सामाजिक कार्यकर्ता यहां जुटकर राजनीतिक रणनीतियों पर चर्चा करते थे। बताया जाता है कि इसी समय नीतीश कुमार भी इस आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े और कई बार लोहिया आश्रम आकर यहां कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों में हिस्सा लेते थे। यही वह दौर था जब उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत होने लगी और वे जनता के बीच लोकप्रिय होते गए।   पुराने साथियों ने जताई भावनाएं सीतामढ़ी के किसान नेता Nagendra Prasad Singh, जिन्हें नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है, ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल बिहार के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने पिछले करीब 20 वर्षों में राज्य में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में कई अहम सुधार किए। ऐसे में उनके मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने के फैसले से उनके समर्थकों को काफी दुख हुआ है।   आंदोलन के साथियों ने भी किया याद जेपी आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता Dr. Ramashankar Prasad ने कहा कि छात्र आंदोलन के समय से ही उनका नीतीश कुमार के साथ जुड़ाव रहा है। उनके अनुसार, नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया और बिहार को विकास की नई दिशा देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनके साथ बिताए गए आंदोलन के दिन आज भी लोगों को याद आते हैं।   आश्रम से जुड़ी हैं कई पुरानी यादें लोहिया आश्रम के लोगों का कहना है कि राजनीति के शुरुआती दौर में नीतीश कुमार कई बार यहां आए और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ घंटों चर्चा किया करते थे। उस समय यहां से आंदोलन और चुनावी रणनीतियों की योजनाएं भी बनाई जाती थीं। आज भी आश्रम में उनकी कई यादें जुड़ी हुई हैं, जिन्हें यहां के लोग गर्व के साथ याद करते हैं।   समर्थकों का कहना-बिहार को नई पहचान दी आश्रम से जुड़े लोगों का मानना है कि नीतीश कुमार ने अपने लंबे राजनीतिक सफर में बिहार के विकास और सामाजिक बदलाव के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। हालांकि उनके राज्यसभा जाने के फैसले से यहां के लोग भावुक जरूर हैं, लेकिन वे यह भी मानते हैं कि बिहार की राजनीति में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और उनके समर्थक उन्हें सम्मान के साथ याद करते रहेंगे।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Nand Kishore Yadav meets CM Nitish Kumar at Patna residence after Nagaland Governor appointment
नागालैंड के राज्यपाल बनने के बाद नंद किशोर यादव ने सीएम नीतीश कुमार से की मुलाकात

  बिहार की राजनीति के अनुभवी नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव को हाल ही में नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। लंबे समय तक बिहार में सक्रिय रहने वाले यादव ने राज्य सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है, जिसमें मंत्री पद भी शामिल है। राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक समझ के कारण उन्हें यह नई जिम्मेदारी दी गई है।   पटना में मुख्यमंत्री से हुई सम्मानजनक भेंट नंद किशोर यादव ने शनिवार को पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास में नीतीश कुमार से मुलाकात की। यह मुलाकात लगभग 15 मिनट तक चली, जिसमें दोनों नेताओं ने cordial बातचीत की। मुख्यमंत्री ने यादव के लंबे राजनीतिक करियर की सराहना की और उन्हें नई भूमिका निभाने के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर दोनों ने राजनीतिक अनुभव, राज्यपाल पद की जिम्मेदारियों और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की।   राष्ट्रपति द्वारा कई राज्यों में की गई नियुक्तियां 5 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल और उपराज्यपाल पदों पर बड़े फेरबदल की मंजूरी दी। इसी निर्णय के तहत सैयद अता हसनैन, जो भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं, को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनके पास सुरक्षा और रणनीतिक मामलों का व्यापक अनुभव है, और माना जा रहा है कि वे जल्द ही राज्यपाल के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
Nishant Kumar meeting JDU legislators for Bihar development strategies
निशांत कुमार की जेडीयू में एंट्री से पहले विधायकों संग बैठक, ‘विकसित बिहार’ पोस्टर जारी

  नवीन राजनीतिक कदम और पार्टी बैठक बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की सक्रियता बढ़ने लगी है। जेडीयू में शामिल होने से पहले ही निशांत कुमार पार्टी के नेताओं और विधायकों के बीच दिखाई देने लगे हैं। हाल ही में उन्होंने जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के पटना आवास पर पार्टी के विधायकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में लगभग 24 विधायक शामिल हुए, जिनमें परिवहन मंत्री श्रवण कुमार और कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। इसके अलावा 12 से अधिक युवा विधायक भी बैठक में शामिल होकर पार्टी के भविष्य की रणनीतियों और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा में शामिल हुए।   जेडीयू सदस्यता और प्रदेश दौरे की तैयारी सूत्रों के अनुसार, निशांत कुमार 8 मार्च को जेडीयू की सदस्यता ग्रहण करेंगे। सदस्यता लेने के बाद वे बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ने की संभावना है। इसी बीच, जेडीयू के प्रदेश कार्यालय के बाहर निशांत कुमार को लेकर पोस्टर भी लगाए गए हैं। पोस्टरों पर लिखा गया है: “विकसित बिहार के नए अध्याय की शुरुआत निशांत कुमार” “बिहार की कमान, युवा सोच की उड़ान, निशांत के साथ विकास का नया शंखनाद” निशांत कुमार के सक्रिय राजनीतिक कदमों ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्साह पैदा कर दिया है।   मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बख्तियारपुर दौरा वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को बख्तियारपुर का दौरा करेंगे। यह उनके लिए राज्यसभा के नामांकन के बाद पहला दौरा होगा। दौरे के दौरान वे बख्तियारपुर स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज का निरीक्षण करेंगे और क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे और जरूरी दिशा-निर्देश भी देंगे।

surbhi मार्च 7, 2026 0
Nitish Kumar addressing emotional JDU leaders during meeting on Rajya Sabha decision in Patna
राज्यसभा जाने के फैसले पर JDU में भावुक माहौल, बैठक में रो पड़े कई नेता; नीतीश कुमार बोले – “मैं हूं न”

  बिहार की राजनीति में उस समय भावुक माहौल बन गया जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने के फैसले पर पार्टी के भीतर चर्चा हुई। शुक्रवार शाम Janata Dal (United) की अहम बैठक के दौरान कई नेता और कार्यकर्ता भावुक हो गए। कुछ नेताओं की आंखों में आंसू भी आ गए, क्योंकि वे चाहते थे कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में पहले की तरह सक्रिय बने रहें। हालांकि मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों को भरोसा दिलाया कि उनके राज्यसभा जाने से न तो पार्टी कमजोर होगी और न ही बिहार के विकास कार्यों पर कोई असर पड़ेगा।   “मैं हूं न”, कहकर नेताओं को दिलाया भरोसा बैठक में जब कई नेताओं ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं तो नीतीश कुमार ने खुद स्थिति संभाली। उन्होंने सभी को आश्वस्त करते हुए कहा कि भले ही वे राज्यसभा जाएं, लेकिन बिहार और पार्टी के कामकाज पर उनकी नजर पहले की तरह बनी रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे दिल्ली और बिहार दोनों जगह सक्रिय रहेंगे और राज्य के विकास से जुड़े फैसलों पर लगातार निगरानी रखेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि बिहार के विकास की जो दिशा तय की गई है, उसे किसी भी हाल में रुकने नहीं दिया जाएगा।   किसी दबाव में नहीं लिया फैसला बैठक के दौरान कई विधायकों ने मुख्यमंत्री से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील भी की। लेकिन नीतीश कुमार ने साफ कहा कि राज्यसभा जाने का निर्णय उन्होंने पूरी तरह अपनी इच्छा से लिया है और इस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी को मजबूत बनाए रखना और राज्य के विकास को आगे बढ़ाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।   जल्द राजनीति में आ सकते हैं निशांत कुमार बैठक में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया। कई विधायकों ने मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar को पार्टी में शामिल करने की मांग रखी। इसके बाद JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha और केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh (Lalan Singh) ने घोषणा की कि निशांत कुमार ने राजनीति में आने के लिए सहमति दे दी है और वे जल्द ही औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होंगे।   पार्टी में अंतिम फैसला अब भी नीतीश का इस दौरान केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पार्टी में अंतिम फैसला आज भी नीतीश कुमार का ही होता है। उनके मुताबिक बिहार सरकार और JDU के भीतर कोई भी बड़ा निर्णय मुख्यमंत्री की सहमति के बिना नहीं लिया जाता। वहीं JDU नेता Neeraj Kumar ने बताया कि मंत्री Shravan Kumar ने बैठक में कार्यकर्ताओं और नेताओं की भावनाओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इसके बाद नीतीश कुमार ने सभी को शांत करते हुए कहा – “मैं हूं न।” इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि JDU के भीतर नीतीश कुमार का प्रभाव और नेतृत्व अब भी उतना ही मजबूत है, और उनके फैसले पार्टी की दिशा तय करते हैं।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
Nitish Kumar Rajya Sabha speculation.
नीतीश के राज्यसभा जाने की चर्चा से जेडीयू में हलचल, पटना में कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की अटकलें सामने आईं। इन खबरों के बाद उनकी पार्टी Janata Dal (United) के भीतर असंतोष की स्थिति दिखने लगी है। गुरुवार सुबह पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता जमा हो गए और उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना था कि यदि नेतृत्व में बदलाव करना है तो जनता के बीच जाकर दोबारा चुनाव कराया जाए। उनका दावा है कि जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया था, इसलिए वे अपना कार्यकाल पूरा करें। मंत्री पर हमला, सुरक्षा बढ़ाई गई प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री आवास के पास माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बीच राज्य के मंत्री Surendra Mehta जब आवास परिसर में प्रवेश कर रहे थे, तब उन पर कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा हमला किए जाने की खबर सामने आई। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी गई। मौके पर आईजी, एसएसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि राज्य के डीजीपी भी मुख्यमंत्री आवास में मौजूद बताए गए। कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी जेडीयू नेता Rajiv Ranjan Patel के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री राज्यसभा के लिए नामांकन भरने जाते हैं तो वे उन्हें ऐसा करने से रोकने का प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है और वे चाहते हैं कि वे ही राज्य की कमान संभाले रखें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई राजनीतिक फैसला लिया जाता है तो उसमें कार्यकर्ताओं की राय भी ली जानी चाहिए। उनका सुझाव था कि नीतीश कुमार की जगह किसी और को भेजना हो तो उनके बेटे Nishant Kumar को राज्यसभा भेजा जा सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर बदलाव नहीं होना चाहिए। पार्टी नेतृत्व का अलग रुख वहीं जेडीयू के एक अन्य नेता Sanjay Singh ने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार हैं और यदि उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला लिया है तो कार्यकर्ताओं को उसका सम्मान करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राज्य की बड़ी आबादी चाहती है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर ही बने रहें। बेटे की राजनीति में एंट्री की चर्चा इसी बीच यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं और पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं। इस संभावना ने भी जेडीयू के अंदर राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार वास्तव में राज्यसभा जाते हैं तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि लंबे समय से वे राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे हैं।  

surbhi मार्च 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0