राजनीति

Voting Begins for 11 Rajya Sabha Seats in Three States

राज्यसभा चुनाव: 11 सीटों पर आज मतदान, बिहार-ओडिशा-हरियाणा में कड़ा मुकाबला, क्रॉस-वोटिंग पर नजर

surbhi मार्च 16, 2026 0
Rajya Sabha election voting underway in Bihar, Odisha and Haryana amid cross-voting concerns and tight contests.
Rajya Sabha Elections Voting in Bihar Odisha Haryana

 

देश के तीन राज्यों-बिहार, ओडिशा और हरियाणा-में आज राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। वोटिंग सुबह 11 बजे से शुरू होगी और मतगणना के बाद नतीजे भी आज ही शाम तक घोषित किए जाने की संभावना है।

इस बार कुल 37 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है, जिनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इन निर्विरोध चुने गए नेताओं में शरद पवार, रामदास अठावले, अभिषेक मनु सिंघवी, थंबी दुरई, विनोद तावड़े और बाबुल सुप्रियो जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं। हालांकि बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

 

बिहार: पांचवीं सीट पर टिकी सबकी नजर

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान हो रहा है। सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों-नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन और शिवम कुमार-की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

लेकिन असली मुकाबला पांचवीं सीट पर है, जहां NDA के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा और महागठबंधन समर्थित एडी सिंह आमने-सामने हैं। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत है। माना जा रहा है कि AIMIM के पांच और BSP के एक विधायक का समर्थन मिलने से मुकाबला कड़ा हो सकता है।

वहीं NDA को उम्मीद है कि महागठबंधन के कुछ विधायक क्रॉस-वोटिंग कर सकते हैं। कांग्रेस और बीएसपी के कुछ विधायकों पर भी सभी दलों की नजर बनी हुई है।

 

ओडिशा: भाजपा और बीजद के बीच संतुलन

ओडिशा की चार सीटों पर भी दिलचस्प राजनीतिक समीकरण बन गए हैं। अनुमान है कि भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल दो-दो सीटें जीत सकती हैं।

ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी उसे प्राप्त है, जिससे दो सीटें लगभग उसके खाते में तय मानी जा रही हैं। हालांकि तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए भाजपा को आठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।

वहीं बीजद के पास 48 विधायक हैं, जिससे उसकी एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है। अगर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का समर्थन मिल जाता है तो पार्टी दूसरी सीट भी जीत सकती है। चौथी सीट पर भाजपा समर्थित दिलीप रे और बीजद के उम्मीदवार के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।

 

हरियाणा: निर्दलीय प्रत्याशी से बढ़ा रोमांच

हरियाणा की दो सीटों पर चुनाव हो रहा है। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 48 विधायक हैं, जबकि Indian National Lok Dal के दो और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन उसे प्राप्त है।

ऐसे में भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस के 37 विधायक हैं और उसके उम्मीदवार करमवीर बोध भी जीत की स्थिति में नजर आ रहे हैं।

हालांकि निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। उन्हें जीतने के लिए अतिरिक्त नौ वोटों की जरूरत होगी, जो बिना क्रॉस-वोटिंग के संभव नहीं माने जा रहे। इसी आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने कई विधायकों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है।

 

शाम तक साफ होगी तस्वीर

तीनों राज्यों में मतदान पूरा होने के बाद आज शाम तक परिणाम सामने आ जाएंगे। कई सीटों पर जीत-हार का फैसला क्रॉस-वोटिंग पर निर्भर माना जा रहा है, इसलिए कुछ जगहों पर चौंकाने वाले नतीजों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

राजनीति

View more
शशि थरूर नए संसद भवन की डिजाइन और माहौल पर बोलते हुए
शशि थरूर ने नए संसद भवन को बताया ‘बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर’, बोले- पुराने भवन में था अपनापन

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन की डिजाइन और वहां के माहौल को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नए संसद भवन को ‘बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर’ बताते हुए कहा कि पुराने संसद भवन में सांसदों के बीच बातचीत और आपसी जुड़ाव के लिए ज्यादा सहज माहौल था। शोभना के. नायर की किताब ‘हाउसिंग द रिपब्लिक: ए बायोग्राफी ऑफ द इंडियन पार्लियामेंट’ के विमोचन कार्यक्रम में थरूर ने नए संसद भवन की बनावट पर अपनी राय रखी।   ऊंची छत और बैठने की व्यवस्था पर सवाल   थरूर ने कहा कि नए संसद भवन की छत काफी ऊंची है और सांसदों के बैठने की व्यवस्था भी ऐसी है, जिससे सदस्यों के बीच सहज संवाद की गुंजाइश कम होती है। उन्होंने पुराने संसद भवन के कक्षों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक तरह का अपनापन महसूस होता था। उन्होंने नए भवन में सांसदों के पंखे जैसी बैठने की व्यवस्था को भी राजनीतिक दूरी और बढ़ते ध्रुवीकरण से जोड़कर देखा।   सेंट्रल हॉल की कमी का किया जिक्र   कांग्रेस नेता ने नए संसद भवन में सेंट्रल हॉल नहीं होने को भी एक बड़ी कमी बताया। उनके मुताबिक, पुराने संसद भवन का सेंट्रल हॉल सांसदों, पूर्व सांसदों, मीडिया और अन्य लोगों के बीच अनौपचारिक बातचीत का महत्वपूर्ण केंद्र था। थरूर ने कहा कि इसी तरह की अनौपचारिक बातचीत से अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच संबंध और संवाद मजबूत होते थे। नए भवन में ऐसी बातचीत के लिए जगह कम होने से संसदीय माहौल प्रभावित हो सकता है।   850 सांसदों की प्रस्तावित संख्या पर जताई चिंता   थरूर ने लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाकर करीब 850 किए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नए भवन में ज्यादा सांसदों के बैठने की क्षमता भले ही हो, लेकिन संख्या बढ़ने से सार्थक बहस और सदस्यों के बीच संवाद प्रभावित हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि बहुत बड़ी संख्या में सांसद होने पर सदस्य एक-दूसरे से अनजान हो सकते हैं और संसद में प्रभावी चर्चा की जगह केवल औपचारिक गतिविधियां रह सकती हैं।   नई इमारत की एक सुविधा की तारीफ भी की   हालांकि, थरूर ने नए संसद भवन की एक सुविधा को बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि पुराने भवन में सीटों की संकरी व्यवस्था के कारण सांसदों को अपनी सीट तक पहुंचने में काफी असुविधा होती थी। कई बार उन्हें दूसरे सांसदों के घुटनों के पास से होकर निकलना पड़ता था। नए भवन में यह समस्या दूर हो गई है।   जॉन ब्रिटास ने भी उठाए सवाल   कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी नए संसद भवन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल नई इमारत बनाने से संसद या संसदीय चर्चा मजबूत नहीं होती। उनके अनुसार, असली मुद्दा संसद में होने वाली बहस और चर्चा की गुणवत्ता है। नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में किया था। यह सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है और इसमें पुराने भवन की तुलना में अधिक सांसदों के बैठने की क्षमता तथा आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 21, 2026 0
राहुल गांधी, सोनिया गांधी और कांग्रेस नेताओं ने वीर भूमि पर राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दी

राजीव गांधी की जयंती पर राहुल गांधी, सोनिया गांधी और कांग्रेस नेताओं ने वीर भूमि पर दी श्रद्धांजलि

तमिलनाडु CM विजय और अमित शाह की दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से पहले मुलाकात

तमिलनाडु के CM विजय से अमित शाह की मुलाकात, दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक से पहले बढ़ी हलचल

महुआ मोइत्रा के खिलाफ अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया

महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, कोर्ट में पेश न होने पर हुई कार्रवाई

राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी के राजनीतिक दौर को लेकर बड़ा दावा किया
राहुल गांधी का बड़ा दावा, बोले- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक दौर अंतिम चरण में

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की भाजपा सरकार को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया। समाचार एजेंसी ANI के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी का राजनीतिक दौर अंतिम चरण में है और उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो चुकी है।   मोदी सरकार पर राहुल गांधी का हमला     CWC बैठक में राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा कि मोदी सरकार राजनीतिक रूप से पीछे चल रही है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सरकार के खिलाफ अधिक आक्रामक राजनीतिक रणनीति अपनाने की अपील भी की।     उत्तराधिकारी की तलाश का किया दावा     राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो चुकी है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह राहुल गांधी का राजनीतिक दावा है, न कि भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से घोषित कोई आधिकारिक प्रक्रिया।     CWC बैठक में राजनीतिक रणनीति पर मंथन     कांग्रेस की बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संसद के हालिया मानसून सत्र और आगे की पार्टी रणनीति पर चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने और युवाओं व छात्रों से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार किया।     22 अगस्त को पुणे में राहुल गांधी का कार्यक्रम     राहुल गांधी 22 अगस्त को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। कांग्रेस की ओर से युवाओं और छात्रों के बीच सीधा संवाद बढ़ाने की रणनीति के तहत यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
केंद्रीय मंत्रियों के सोशल मीडिया प्रदर्शन की समीक्षा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे

केंद्रीय कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को मिला सोशल मीडिया प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड, PM मोदी रहे सबसे आगे

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद

वंदे मातरम् को लेकर सियासी घमासान तेज, कांग्रेस ने केवल पहले दो अंतरों पर कायम रहने की बात कही

तमिलनाडु सरकार के छात्रों को राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से दूर रखने के निर्देश

CJP से जुड़े विरोध प्रदर्शन को लेकर तमिलनाडु सरकार सख्त, छात्रों को आंदोलन से दूर रखने के निर्देश

अमृता फडणवीस ने वंदे मातरम् विवाद पर कांग्रेस की आलोचना की
वंदे मातरम् विवाद पर अमृता फडणवीस का कांग्रेस पर हमला, बोलीं- संसद का सम्मान करे विपक्ष

मुंबई, एजेंसियां। ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस से संसद और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने की अपील की। अमृता फडणवीस ने इस विवाद को केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश की भावनाओं और राष्ट्रभक्ति से जुड़ा विषय बताया।   कांग्रेस के रुख पर उठाए सवाल     अमृता फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस को संसद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘वंदे मातरम्’ के गायन के तरीके और इसके सभी अंतरों को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी चल रही है।   विवाद की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर हुई। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने गीत के पूर्ण गायन का विरोध किया, जबकि कांग्रेस का कहना है कि पार्टी ऐतिहासिक रूप से प्रचलित पहले दो अंतरों के गायन का अनुसरण करती है।   अमृता फडणवीस ने कांग्रेस पर साधा निशाना     अमृता फडणवीस ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय गीत को लेकर इस तरह का विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से संसद की परंपराओं और देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बनाए रखने की बात कही।   इससे पहले भी उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि पार्टी देश के लिए अलग तरह की संवैधानिक व्यवस्था चाहती है। हालांकि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने बीजेपी पर ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया है।   खरगे के बयान से बढ़ा राजनीतिक टकराव     कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी की आलोचना का जवाब देते हुए कहा है कि कांग्रेस जिस संस्करण का गायन कर रही है, वही संस्करण महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे नेताओं के समय भी गाया जाता था। खरगे ने बीजेपी और आरएसएस के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को लेकर भी सवाल उठाए हैं।   दूसरी ओर, बीजेपी लगातार कांग्रेस से ‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान पर माफी मांगने की मांग कर रही है। गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के रुख की आलोचना की है।   महाराष्ट्र में भी विवाद ने पकड़ा जोर     ‘वंदे मातरम्’ को लेकर महाराष्ट्र में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बुधवार को ठाणे के एक सरकारी कार्यक्रम में लता मंगेशकर द्वारा गाया गया संस्करण बजाए जाने के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भविष्य के सरकारी कार्यक्रमों में केवल आधिकारिक संस्करण बजाने का निर्देश दिया।   इस पूरे विवाद के बीच ‘वंदे मातरम्’ अब राष्ट्रीय गीत, इतिहास, राष्ट्रवाद और राजनीतिक विचारधारा को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच बड़े सियासी टकराव का मुद्दा बन गया है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मंत्रियों के फैसलों की समीक्षा का अधिकार

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री की शक्तियां बढ़ीं, अब मंत्रियों के फैसले पलट सकेंगे सीएम फडणवीस

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर राजनीतिक विवाद

‘ये दिमागी नक्सल हैं’, निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर साधा निशाना, जानें किसे लेकर छिड़ा विवाद

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश और पंजाब के लिए नए प्रदेश प्रभारी नियुक्त किए

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश और पंजाब के लिए नए प्रभारी नियुक्त किए, चुनावी तैयारियों को मिली रफ्तार

0 Comments

Top week

Lakhisarai Ashok Dham temple where seven women died after an electric shock during Sawan prayers
बिहार

लखीसराय के अशोक धाम में करंट का कहर, 7 महिलाओं की मौत; कई श्रद्धालु घायल, चार मृतकों की पहचान

surbhi अगस्त 17, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?