Bihar Politics

Nitin Navin addressing supporters after resigning from Bankipur seat, expressing gratitude to public and party
20 साल बाद बांकीपुर से इस्तीफा: नितिन नवीन का भावुक संदेश, ‘जनता ही मेरा परिवार’

पटना की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने का फैसला लिया है। करीब 20 वर्षों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करने के बाद उनका यह कदम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। 20 साल का सफर, भावुक विदाई इस्तीफे से पहले नितिन नवीन ने एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने दो दशक लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने बताया कि 2006 में अपने पिता के निधन के बाद उपचुनाव के जरिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा और उसी के बाद से जनता की सेवा में जुटे रहे। लगातार पांच बार विधायक चुने गए नितिन नवीन ने अपने पोस्ट में बांकीपुर की जनता को “परिवार” बताया और उनके विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। ‘जनता ने रास्ता दिखाया’ अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि जनता ने उन्हें सिर्फ समस्याएं ही नहीं बताईं, बल्कि उनके समाधान का रास्ता भी दिखाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका सहयोग ही उनकी सफलता का आधार रहा है। उन्होंने बांकीपुर की जनता को “देवतुल्य” बताते हुए आभार जताया। नई जिम्मेदारी, लेकिन रिश्ता कायम नितिन नवीन ने स्पष्ट किया कि विधायक पद छोड़ने के बावजूद उनका जनता से रिश्ता खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें नई जिम्मेदारी दी है और वे उसी के माध्यम से बिहार और देश के विकास में योगदान देते रहेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने के अनुभव को भी अहम बताया। बांकीपुर में बढ़ेगी सियासी हलचल उनके इस्तीफे के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो जाएगी, जिससे उपचुनाव की स्थिति बनेगी। यह सीट बीजेपी के लिए काफी अहम मानी जाती है, ऐसे में आने वाले समय में उम्मीदवार चयन और रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर हलचल तेज होना तय है। नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत राजनीतिक जानकारों के अनुसार, नितिन नवीन का इस्तीफा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत है। माना जा रहा है कि अब उनकी भूमिका राज्य से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा सक्रिय हो सकती है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Bihar political leaders Highlighting new Chief Minister possibilities with caste representation chart
बिहार में नए सीएम की रेस: क्या सवर्ण नेता बन सकते हैं मुख्यमंत्री? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

बिहार की सियासत इन दिनों नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर तेज चर्चाओं के दौर से गुजर रही है। Nitish Kumar द्वारा मुख्यमंत्री पद छोड़ने के संकेत के बाद सत्ता पक्ष में नए चेहरे को लेकर मंथन तेज हो गया है। इस बीच जहां पहले पिछड़ा, अतिपिछड़ा और दलित वर्ग के नेताओं की चर्चा थी, वहीं अब सवर्ण नेताओं के नाम भी रेस में शामिल होने लगे हैं। सवर्ण विधायकों का मजबूत आंकड़ा 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA की जीत में सवर्ण विधायकों की अहम भूमिका रही। कुल 69 सवर्ण विधायक चुनकर आए, जिनमें- राजपूत: 32 विधायक भूमिहार: 23 विधायक ब्राह्मण: 12 विधायक कायस्थ: 2 विधायक संख्या बल के आधार पर सवर्ण वर्ग अपनी दावेदारी मजबूत बता रहा है। किन नेताओं के नाम चर्चा में? राजपूत वर्ग से Rajiv Pratap Rudy और जनार्दन सिग्रीवाल के नाम चर्चा में हैं। भूमिहार समुदाय से उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha और रजनीश कुमार का नाम लिया जा रहा है। वहीं ब्राह्मण वर्ग से स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की दावेदारी की चर्चा है। क्या सवर्ण मुख्यमंत्री बनना संभव है? मानना है कि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए सवर्ण मुख्यमंत्री बनने की संभावना काफी कम है। उनका कहना है कि बिहार की राजनीति लंबे समय से पिछड़ा, अतिपिछड़ा और दलित वर्ग के इर्द-गिर्द घूमती रही है, ऐसे में रणनीतिक रूप से NDA किसी सवर्ण चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने से बच सकती है। राजनीतिक गणित क्या कहता है? विशेषज्ञों के अनुसार, सवर्ण नेताओं को सत्ता में संतुलन बनाए रखने के लिए अन्य महत्वपूर्ण पद दिए जा सकते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता दी जाएगी। फिलहाल बिहार की राजनीति में अटकलों का दौर जारी है और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और केंद्रीय रणनीति पर निर्भर करेगा।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Anant Singh leads 50 km roadshow in Mokama with huge crowd, supporters cheering after release from jail
मोकामा में अनंत सिंह का मेगा शक्ति प्रदर्शन: 50 किमी रोड शो के बाद मंदिर में पूजा, समर्थकों में जबरदस्त उत्साह

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बाहुबली विधायक अनंत सिंह चर्चा के केंद्र में हैं। बेऊर जेल से रिहाई के बाद आज वह अपने विधानसभा क्षेत्र मोकामा में 50 किलोमीटर लंबा मेगा रोड शो कर शक्ति प्रदर्शन करने जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम है, जिसे लेकर समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। रिहाई के बाद पहला शक्ति प्रदर्शन पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अनंत सिंह सोमवार को बेऊर जेल से रिहा हुए। जेल से बाहर आते ही समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद वह करीब 50 गाड़ियों के काफिले के साथ पटना स्थित अपने आवास पहुंचे, जहां जश्न का माहौल देखने को मिला। उनके स्वागत में आयोजित कार्यक्रम में हजारों समर्थक शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक, इस मौके पर भव्य भोज का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 15 हजार लोगों के लिए व्यवस्था की गई थी। मोकामा से बड़हिया तक 50 किमी रोड शो आज का कार्यक्रम मोकामा से शुरू होकर बड़हिया स्थित महारानी स्थान मंदिर तक जाएगा। इस दौरान अनंत सिंह रास्ते में विभिन्न स्थानों पर रुककर लोगों का अभिवादन करेंगे और अपने समर्थकों का आभार जताएंगे। पूरे मार्ग पर समर्थकों ने स्वागत के लिए तोरण द्वार, फूल-मालाएं और बैनर-पोस्टर लगाए हैं। यह रोड शो केवल विजय जुलूस नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी माना जा रहा है। मंदिर में पूजा के साथ होगा समापन रोड शो का समापन बड़हिया के प्रसिद्ध महारानी स्थान मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होगा। इसे धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किस मामले में मिली जमानत? अनंत सिंह को अक्टूबर 2025 में दुलारचंद यादव हत्याकांड के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनके वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान गोलीबारी की पुष्टि नहीं करते हैं। इन्हीं आधारों पर उन्हें जमानत मिली। कौन हैं अनंत सिंह? मोकामा से पांच बार विधायक रह चुके हैं जदयू, राजद और निर्दलीय-तीनों रूपों में जीत दर्ज की समर्थकों के बीच “छोटे सरकार” के नाम से लोकप्रिय कई आपराधिक मामलों के कारण विवादों में भी रहे नीतीश कुमार के साथ संबंध समय-समय पर चर्चा में रहे सुरक्षा के कड़े इंतजाम इतने बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Samrat Choudhary compares Nitish Kumar to Jarasandh amid Bihar political debate and Mahabharata reference
बिहार की सियासत में ‘जरासंध’ की एंट्री: सम्राट चौधरी ने क्यों की नीतीश कुमार से तुलना, जानिए महाभारत के इस शक्तिशाली सम्राट की पूरी कहानी

बिहार की राजनीति इन दिनों नए मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और नए चेहरे की चर्चा के बीच सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। इसी क्रम में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने जहानाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार की तुलना महाभारत कालीन मगध सम्राट जरासंध से कर दी। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सम्राट चौधरी ने न सिर्फ नीतीश कुमार को पंडित चाणक्य जैसी रणनीतिक सोच वाला नेता बताया, बल्कि उन्हें चंद्रगुप्त मौर्य और जरासंध जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों की श्रेणी में भी रखा। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर जरासंध कौन थे और उनकी तुलना का राजनीतिक अर्थ क्या है। कौन थे जरासंध? महाभारत के अनुसार, जरासंध प्राचीन मगध (आज का बिहार) के एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली सम्राट थे। उनकी राजधानी राजगृह (आज का राजगीर) थी। वे राजा बृहद्रथ के पुत्र थे और अपनी सैन्य शक्ति तथा रणनीति के लिए प्रसिद्ध थे। जरासंध का नाम विशेष रूप से इसलिए भी चर्चित है क्योंकि वे भगवान श्रीकृष्ण के सबसे बड़े विरोधियों में गिने जाते थे। श्रीकृष्ण से दुश्मनी की वजह जरासंध की श्रीकृष्ण से दुश्मनी का मुख्य कारण पारिवारिक संबंध था। दरअसल, वे मथुरा के राजा कंस के ससुर थे। जब श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया, तो जरासंध ने इसे व्यक्तिगत अपमान माना और कृष्ण के खिलाफ कई बार युद्ध छेड़ा। कहा जाता है कि जरासंध ने बार-बार मथुरा पर आक्रमण कर श्रीकृष्ण को चुनौती दी और उन्हें काफी समय तक परेशान किया। शक्ति और महत्वाकांक्षा जरासंध सिर्फ एक योद्धा ही नहीं, बल्कि चक्रवर्ती सम्राट बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले शासक थे। उन्होंने 99 राजाओं को बंदी बनाकर रखा था, ताकि एक विशेष यज्ञ के जरिए अपनी सार्वभौमिक सत्ता स्थापित कर सकें। हालांकि, उन्होंने इन राजाओं की हत्या नहीं की थी। कैसे हुई जरासंध की मृत्यु? महाभारत के अनुसार, जरासंध की शक्ति को खत्म करना श्रीकृष्ण के लिए जरूरी हो गया था। इसके लिए उन्होंने भीम को मल्लयुद्ध के लिए आगे किया। राजगीर के अखाड़े में भीम और जरासंध के बीच लंबा और भीषण युद्ध हुआ। अंततः श्रीकृष्ण की रणनीति से भीम ने जरासंध के शरीर के दो हिस्से कर उन्हें विपरीत दिशाओं में फेंक दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनके पुत्र सहदेव को मगध का राजा बनाया गया। बिहार की राजनीति में जरासंध का जिक्र क्यों? हाल के वर्षों में बिहार की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान में जरासंध का नाम फिर से प्रमुखता से उभरा है। 2025 में नीतीश कुमार ने राजगीर में 21 फीट ऊंची जरासंध की प्रतिमा का अनावरण किया था। यह स्मारक करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बना है। राजगीर स्थित जरासंध स्मृति पार्क में उनके जीवन और युद्धों को भित्तिचित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। इसके अलावा, राज्य में “जरासंध महोत्सव” का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह ऐतिहासिक पात्र अब राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा बन चुका है। सियासी संकेत क्या हैं? सम्राट चौधरी द्वारा की गई यह तुलना केवल ऐतिहासिक संदर्भ नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी मानी जा रही है। बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच यह बयान इस ओर इशारा करता है कि सत्ता हस्तांतरण की जमीन तैयार हो रही है। करीब दो दशकों तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के संभावित पदत्याग के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Nitish Kumar and JDU leaders announcing decision to stay out of assembly elections in five Indian states
JDU का बड़ा राजनीतिक दांव: 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव से बाहर रहेगी नीतीश कुमार की पार्टी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह इस बार पांच राज्यों-पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी-में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। चुनाव से दूरी बनाने का ऐलान देश के इन पांच राज्यों में चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सभी दल रणनीति बनाने में जुटे हैं। इसी बीच जनता दल यूनाइटेड के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पार्टी ने इस बार चुनावी मैदान से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। ‘गठबंधन धर्म’ का हवाला पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि यह फैसला गठबंधन की भावना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन होने के कारण जेडीयू ने इन राज्यों में चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय किया है। तैयारी की कमी भी बनी वजह राजीव रंजन ने यह भी स्वीकार किया कि इन राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक तैयारी उतनी मजबूत नहीं है। इसी कारण वर्तमान हालात का आकलन करते हुए चुनाव से दूर रहने का फैसला लिया गया। भविष्य के लिए दरवाजे खुले हालांकि पार्टी ने भविष्य के लिए संभावनाओं को खारिज नहीं किया है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि जब संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत होगा, तब सीट बंटवारे और चुनाव लड़ने को लेकर गठबंधन के भीतर बातचीत की जा सकती है। कब होंगे चुनाव? इन पांचों राज्यों में चुनाव की तारीखें घोषित हो चुकी हैं: पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान सभी राज्यों के नतीजे 4 मई को घोषित होंगे बदलती रणनीति के संकेत गौरतलब है कि जनता दल यूनाइटेड पहले बिहार के बाहर भी चुनाव लड़ती रही है, लेकिन इस बार पार्टी की रणनीति बदली हुई नजर आ रही है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Bihar CM Nitish Kumar addressing public during Samriddhi Yatra while reviewing development projects in districts
समृद्धि यात्रा पर CM नीतीश कुमार: आज कैमूर और रोहतास को देंगे विकास योजनाओं की सौगात

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को अपनी महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत कैमूर और रोहतास जिलों के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे कई विकास योजनाओं का उद्घाटन करेंगे और चल रही परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे। कैमूर और रोहतास में कार्यक्रम तय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुबह के समय कैमूर जिले पहुंचेंगे, जहां वे विभिन्न योजनाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद दोपहर में उनका कार्यक्रम रोहतास जिले में निर्धारित है, जहां वे विकास कार्यों की समीक्षा के साथ नई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। जनता से सीधा संवाद करेंगे CM इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री दोनों जिलों में जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे। इन सभाओं के माध्यम से वे आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे और सरकार की योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे। विकास कार्यों की होगी समीक्षा ‘समृद्धि यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य जिलों में चल रही योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करना है। नीतीश कुमार अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे और जरूरी दिशा-निर्देश देंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर दोनों जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने पहले से ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। जिलों को मिलेंगी नई योजनाओं की सौगात इस दौरे के दौरान कैमूर और रोहतास जिले को कई नई विकास योजनाओं की सौगात मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Anant Singh supporters celebrating his release outside Beur Jail in Patna
‘छोटे सरकार’ की वापसी: 4 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे अनंत सिंह, पटना से मोकामा तक जश्न की तैयारी

हाई कोर्ट से मिली जमानत के बाद आज रिहाई, समर्थकों में उत्साह; सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मोकामा से विधायक और ‘छोटे सरकार’ के नाम से चर्चित अनंत सिंह आज करीब चार महीने बाद जेल से रिहा होने जा रहे हैं। पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि दोपहर 2 बजे के बाद वे बेऊर जेल से बाहर आ सकते हैं। इसको लेकर पटना से लेकर मोकामा तक समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। हाई कोर्ट से मिली जमानत पटना हाई कोर्ट के जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा की एकलपीठ ने अनंत सिंह को शर्तों के साथ जमानत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर वे गवाहों को प्रभावित करने या डराने की कोशिश करते हैं, तो उनकी जमानत रद्द कर दी जाएगी। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस के बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद उन्हें राहत मिली। रिपोर्ट में मौत का कारण वाहन से कुचलना बताया गया, जबकि उन पर गोली मारने का आरोप था। साथ ही घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी भी स्पष्ट नहीं हो पाई। रिहाई के बाद दर्शन-पूजन का कार्यक्रम जेल से निकलने के बाद अनंत सिंह सीधे पटना स्थित अपने ‘मॉल रोड’ आवास जाएंगे। इसके बाद 24 मार्च को बड़हिया के प्रसिद्ध देवी स्थल पर पूजा-अर्चना करने का कार्यक्रम तय किया गया है। उनका काफिला बख्तियारपुर के पुराने मार्ग से होकर गुजरेगा, जहां जगह-जगह स्वागत के लिए तोरण द्वार लगाए गए हैं। पटना से मोकामा तक जश्न का माहौल अनंत सिंह की रिहाई को लेकर उनके समर्थकों ने बड़े स्तर पर तैयारी की है। पटना से मोकामा तक मिठाइयों और दावत का इंतजाम किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, विधायक बनने के बाद पहली बार वे अपने क्षेत्र पहुंचेंगे, जिससे कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड यह मामला 1 नवंबर 2025 का है, जब चुनाव प्रचार के दौरान राजद से जुड़े दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनंत सिंह पर गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने मोकामा सीट से चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन किया।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Nitish Kumar and Samrat Choudhary during a political meeting in Bihar
क्या सम्राट चौधरी को आगे कर बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं नीतीश? बिहार की राजनीति में नई रणनीति पर चर्चा तेज

बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लगातार सम्राट चौधरी को लेकर दिए जा रहे संकेतों ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह महज राजनीतिक संदेश है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है? क्या बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के बयान बीजेपी के अंदरूनी समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकते हैं। अगर बीजेपी सम्राट चौधरी को आगे नहीं बढ़ाती है, तो इससे कुशवाहा वोट बैंक में नाराजगी की आशंका बन सकती है। वहीं अगर उन्हें आगे किया जाता है, तो इसका श्रेय भी नीतीश कुमार ले सकते हैं। ऐसे में दोनों ही परिस्थितियों में जदयू को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। बीजेपी के लिए ‘धर्मसंकट’ की स्थिति यह मामला बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। पार्टी खुलकर यह भी नहीं कह पा रही कि उसका मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी फिलहाल चुप्पी साधे हुए है और सही समय का इंतजार कर रही है, ताकि राजनीतिक समीकरणों के अनुसार फैसला लिया जा सके। ‘लव-कुश’ समीकरण साधने की कोशिश? राजनीति के जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कुशवाहा) सामाजिक समीकरण को मजबूत करने का संदेश देना चाहते हैं। सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाकर वे यह दिखाना चाहते हैं कि इस सामाजिक एकता में उनकी अहम भूमिका है, जो आने वाले चुनावों में निर्णायक साबित हो सकती है। क्या दोहराई जाएगी सुशील कुमार मोदी जैसी कहानी? राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कहीं सम्राट चौधरी की स्थिति भी दिवंगत सुशील कुमार मोदी जैसी न हो जाए। 2005 के बाद जदयू-भाजपा गठबंधन में सुशील मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी काफी मजबूत मानी जाती थी। लेकिन बाद में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ समीकरण बदलने पर सुशील मोदी को राज्य की राजनीति से हटाकर दिल्ली भेज दिया गया था। गृह मंत्री के तौर पर प्रदर्शन पर भी सवाल सम्राट चौधरी को गृह मंत्री बनाए जाने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर कई बार विपक्ष ने सरकार को घेरा है। हालांकि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री की ओर से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे यह संकेत भी मिलता है कि राजनीतिक समीकरणों के चलते उन्हें फिलहाल खुला समर्थन दिया जा रहा है। आगे क्या? बिहार की राजनीति में यह पूरा घटनाक्रम आने वाले समय में और दिलचस्प हो सकता है। क्या यह रणनीति बीजेपी को दबाव में लाने के लिए है, या फिर गठबंधन की मजबूती दिखाने का प्रयास-इसका जवाब आने वाले दिनों में ही साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है और सभी की नजरें अगले बड़े फैसले पर टिकी हैं।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
RJD leader Tejashwi Yadav during political meeting amid Rajya Sabha election controversy in Bihar
राज्यसभा चुनाव में RJD को झटका: फैसल रहमान बने तेजस्वी के लिए ‘मुश्किल की वजह’, कार्रवाई करने में क्यों बंधे हाथ?

बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। पांच सीटों के लिए हुए इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया। जहां चार सीटों पर NDA की जीत पहले से तय मानी जा रही थी, वहीं पांचवीं सीट का विपक्ष के हाथ से निकलना कई सवाल खड़े कर गया। इस हार के पीछे कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कुछ विधायकों की गैरमौजूदगी अहम कारण बनी। खासकर RJD विधायक फैसल रहमान का वोटिंग से दूर रहना पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। RJD विधायक की ‘चुप्पी वाली बगावत’ ने बढ़ाई परेशानी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीन विधायकों ने मतदान नहीं किया, जिसकी आशंका पहले से जताई जा रही थी। लेकिन RJD के 25 में से एक विधायक फैसल रहमान का वोट न देना अप्रत्याशित रहा। पूर्वी चंपारण के ढाका सीट से विधायक रहमान मतदान के दिन अचानक गायब रहे। देर शाम तक उनका इंतजार होता रहा, लेकिन वे वोट देने नहीं पहुंचे। इस घटना ने पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए। बीमारी का बहाना या सियासी रणनीति? फैसल रहमान ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनकी मां दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थीं, जिस कारण उन्हें अचानक जाना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे पटना आए थे, लेकिन हालात बिगड़ने पर वापस लौट गए। हालांकि, उनकी इस सफाई पर विपक्षी दलों और खुद पार्टी के भीतर भी संदेह जताया जा रहा है। रहमान ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें खरीदने की किसी की हैसियत नहीं है। तेजस्वी यादव की बढ़ी मुश्किलें इस पूरे घटनाक्रम ने RJD नेता Tejashwi Yadav की स्थिति को असहज बना दिया है। पार्टी उम्मीदवार को वोट न मिलने से उनकी राजनीतिक साख पर असर पड़ा है। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मामले में पार्टी विधायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन इस बार मामला इतना आसान नहीं है। क्यों नहीं कर सकते कोई सख्त कार्रवाई? दरअसल, बिहार विधानसभा में RJD की संख्या बेहद सीमित है। कुल 243 सदस्यीय सदन में पार्टी के पास ठीक 25 विधायक हैं, जो विपक्ष के नेता का पद बनाए रखने के लिए न्यूनतम जरूरी संख्या (10%) है। यदि पार्टी का एक भी विधायक कम होता है, तो Tejashwi Yadav विपक्ष के नेता का दर्जा खो सकते हैं। ऐसे में फैसल रहमान के खिलाफ कार्रवाई करना खुद पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। राजनीतिक मजबूरी में फंसे तेजस्वी फैसल रहमान की गैरमौजूदगी ने RJD को नुकसान तो पहुंचाया, लेकिन अब वे पार्टी के लिए ऐसी ‘गले की हड्डी’ बन गए हैं, जिसे न हटाया जा सकता है और न नजरअंदाज किया जा सकता है। अगर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है, तो इसका सीधा असर पार्टी की विधानसभा में स्थिति पर पड़ेगा। यही वजह है कि तमाम नाराजगी के बावजूद नेतृत्व फिलहाल चुप्पी साधे हुए है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Nitish Kumar with Samrat Chaudhary during Samriddhi Yatra sparking Bihar CM succession speculation
‘सम्राट होंगे अगला CM?’-नीतीश के इशारे पर बढ़ा सस्पेंस, विजय चौधरी ने किया बड़ा खुलासा

‘समृद्धि यात्रा’ के बयान से गर्म हुई सियासत बिहार की राजनीति में इन दिनों उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान दिए गए एक बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी। मंच से उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि “आगे ये ही सब काम संभालेंगे”, जिसके बाद उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें तेज हो गईं। जेडीयू ने दी सफाई, ‘अभी ऐसा कोई फैसला नहीं’ हालांकि इन अटकलों पर विराम लगाते हुए जनता दल यूनाइटेड ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री के बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। विजय चौधरी ने ‘संकेत’ को किया डिकोड बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस पूरे मामले पर स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की यह पुरानी कार्यशैली रही है कि वे अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें आगे जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने साफ कहा, “मैं उस कार्यक्रम में मौजूद था, इसे उत्तराधिकारी का संकेत मानना सही नहीं है। मुख्यमंत्री अपने सहयोगियों का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसा कहते रहते हैं।” सम्राट चौधरी की भूमिका पर क्या बोले नेता? विजय चौधरी ने यह जरूर माना कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार में पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से काम कर रहे हैं। लेकिन उन्हें अगला मुख्यमंत्री घोषित करने जैसी कोई बात फिलहाल नहीं है। जमुई में बयान के बाद क्यों बढ़ी चर्चा? दरअसल, जमुई में ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान नीतीश कुमार लगातार दो-तीन दिनों से इसी तरह के बयान दे रहे थे। जब उन्होंने सार्वजनिक मंच से सम्राट चौधरी के लिए लोगों से समर्थन भी मांगा, तब यह चर्चा और तेज हो गई कि वह अपने उत्तराधिकारी का संकेत दे रहे हैं। आगे क्या? नीतीश कुमार के संभावित तौर पर राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलों के बीच यह मुद्दा और अहम हो गया है। हालांकि जेडीयू की सफाई के बाद फिलहाल यह स्पष्ट हो गया है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में उत्तराधिकारी को लेकर सस्पेंस बरकरार है। नीतीश कुमार के संकेतों और जेडीयू की सफाई के बीच आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Nitish Kumar with JD(U) leaders amid speculation over Bihar political shift after Delhi move
नीतीश के दिल्ली कूच से बदलेगी बिहार की राजनीति? ललन-संजय पर सस्पेंस, विजय चौधरी रहेंगे मजबूत!

सियासत में नई हलचल, ‘सम्मानजनक विदाई’ की चर्चा तेज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में इसे उनकी सक्रिय राज्य राजनीति से ‘सम्मानजनक विदाई’ के रूप में देखा जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके बाद जनता दल यूनाइटेड की कमान किसके हाथ में और किस रणनीति के तहत चलेगी। बदल सकती है सत्ता की पूरी संरचना विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद सत्ता के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। खासकर मुख्यमंत्री आवास ‘एक अणे मार्ग’ से लेकर प्रशासनिक ढांचे तक बदलाव संभव है। नई नेतृत्व शैली के अनुसार अफसरशाही में भी फेरबदल देखने को मिल सकता है। ललन सिंह और संजय झा की भूमिका पर सवाल जेडीयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और संजय झा को लेकर सियासी चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन में इनकी अहम भूमिका रही है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी भूमिका आगे भी उतनी ही प्रभावी रहेगी या सीमित हो जाएगी। हालांकि, राजनीति के जानकारों का एक वर्ग मानता है कि ललन सिंह अपनी लचीली राजनीतिक शैली के कारण हर परिस्थिति में खुद को ढाल सकते हैं। वहीं, संजय झा कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में संगठन की कमान संभालते हुए नए नेतृत्व को स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। निशांत कुमार की एंट्री से बदलेगा समीकरण? राजनीतिक हलकों में निशांत कुमार की संभावित एंट्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि अगर युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया गया, तो पार्टी की दिशा और कार्यशैली दोनों में बदलाव देखने को मिल सकता है। अशोक चौधरी की राजनीति पर भी असर अशोक चौधरी को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। लेकिन बदलते समीकरण में उनकी राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, उनका धार्मिक और संतुलित व्यक्तित्व नए नेतृत्व के साथ तालमेल बैठाने में मददगार साबित हो सकता है। विजय चौधरी की विश्वसनीयता बनी रहेगी मजबूत इन सभी बदलावों के बीच विजय कुमार चौधरी की स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है। वे लंबे समय से नीतीश कुमार के भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं और ‘सेकंड मैन’ की भूमिका में रहे हैं। उनकी विश्वसनीयता और प्रशासनिक अनुभव के चलते आने वाली सरकार में भी उनकी अहम भूमिका बनी रह सकती है। आगे क्या? कुल मिलाकर, नीतीश कुमार के दिल्ली कूच के बाद बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन, नए चेहरों की एंट्री और पुराने नेताओं की भूमिका को लेकर कई तरह के समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अब देखना होगा कि जेडीयू इस बदलाव को किस तरह संभालती है और क्या यह परिवर्तन पार्टी के लिए मजबूत साबित होता है या नई चुनौतियां लेकर आता है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Nitish Kumar and Anand Mohan amid Bihar political debate over Rajya Sabha move
नीतीश के राज्यसभा जाने पर सियासी घमासान: आनंद मोहन नाराज, बोले- निशांत की एंट्री से बदलेगी बिहार की राजनीति

पूर्व सांसद का बड़ा बयान-‘जनता खुश नहीं’, तेजस्वी पर भी साधा निशाना, युवा नेतृत्व की वकालत पटना: पटना समेत पूरे बिहार की राजनीति इन दिनों गरमा गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इस फैसले पर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने खुलकर नाराजगी जताई है और इसे जनता की भावना के खिलाफ बताया है। ‘जनता खुश नहीं’, फैसले पर उठाए सवाल मीडिया से बातचीत में आनंद मोहन ने साफ कहा कि नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाना जनता को स्वीकार नहीं है। उनके अनुसार, जिस चेहरे पर चुनाव लड़ा गया, अचानक उसका बदल जाना लोगों को निराश कर सकता है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में बड़ा असर डालेगा और आने वाले समय में इसके परिणाम देखने को मिलेंगे। मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर बढ़ी चर्चा आनंद मोहन ने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा गया था, इसलिए स्वाभाविक रूप से आगे भी उसी आधार पर निर्णय होना चाहिए था। उनके अनुसार, मौजूदा हालात में राज्य की राजनीतिक दिशा बदलती नजर आ रही है। तेजस्वी यादव पर तंज राज्यसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी यादव के ‘लोकतंत्र की हत्या’ वाले बयान पर भी आनंद मोहन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी हार के बाद तेजस्वी के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें विपक्ष की भूमिका जिम्मेदारी से निभानी चाहिए, क्योंकि जनता ने उन्हें यही जिम्मेदारी दी है। निशांत कुमार की एंट्री पर जताया भरोसा राजनीति में संभावित बदलाव का संकेत देते हुए आनंद मोहन ने निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बिहार को अब युवा नेतृत्व की जरूरत है और निशांत के आने से राजनीति को नई ऊर्जा और दिशा मिल सकती है। बदलाव के दौर में बिहार की सियासत आनंद मोहन के इस बयान को बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि निशांत कुमार राजनीति में सक्रिय होते हैं, तो राज्य की सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले और उस पर उठ रहे सवालों के बीच बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है, जहां आने वाले समय में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
CM Nitish Kumar addressing public during Samriddhi Yatra in Bihar reviewing development projects
समृद्धि यात्रा पर CM नीतीश कुमार: आज जमुई-नवादा को मिलेंगी 900 करोड़ से अधिक की सौगात

जनसंवाद के साथ विकास परियोजनाओं की समीक्षा, कई योजनाओं का होगा लोकार्पण और शिलान्यास बिहार में विकास कार्यों को रफ्तार देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ जारी है। इस यात्रा के चौथे चरण के दूसरे दिन बुधवार को मुख्यमंत्री जमुई और नवादा जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान वे दोनों जिलों में सैकड़ों करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। जमुई को 914 करोड़ की 370 परियोजनाओं की सौगात मुख्यमंत्री का मुख्य कार्यक्रम जमुई जिले में होगा, जहां वे कुल 914 करोड़ रुपये की 370 विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इनमें 602 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 181 परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जबकि 312 करोड़ रुपये की 189 नई योजनाओं का शिलान्यास होगा। इससे जिले में आधारभूत संरचना और जनसुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। सिकंदरा में जनसंवाद, विकास कार्यों की समीक्षा जमुई के सिकंदरा में मुख्यमंत्री का जनसंवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है। यहां वे स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करेंगे और क्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। इसके साथ ही नवादा जिले में भी वे विभिन्न विकास परियोजनाओं का जायजा लेंगे और नई योजनाओं की घोषणा करेंगे। पहले दिन भागलपुर और बांका को मिली सौगात ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण की शुरुआत मंगलवार से हुई थी। पहले दिन मुख्यमंत्री ने भागलपुर और बांका जिले का दौरा किया। इस दौरान भागलपुर में 441.32 करोड़ रुपये की 144 परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया, जबकि बांका में करीब 708 करोड़ रुपये की 497 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ। 20 मार्च तक तय कार्यक्रम, बढ़ सकती है अवधि आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार ‘समृद्धि यात्रा’ का यह चरण 20 मार्च तक चलना है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा की अवधि बढ़ाकर 30 मार्च तक किए जाने की संभावना है। इससे राज्य के अन्य जिलों में भी विकास योजनाओं की समीक्षा और घोषणाएं की जा सकती हैं। आगे की राजनीतिक हलचल पर नजर सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अप्रैल के दूसरे सप्ताह में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। वहीं 14 अप्रैल के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की भी चर्चा तेज हो गई है, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ सकती है। विकास और संवाद पर फोकस ‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए मुख्यमंत्री का जोर विकास कार्यों को जमीन पर उतारने और आम जनता से सीधा संवाद स्थापित करने पर है। इस पहल से राज्य के विभिन्न जिलों में चल रही योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
Bihar Congress leaders amid internal conflict during Rajya Sabha elections with missing MLAs controversy
राज्यसभा चुनाव में ‘गायब’ विधायक बने सिरदर्द, बिहार कांग्रेस में गहराया संकट, 2025 की कलह फिर आई सामने

तीन विधायकों की गैरमौजूदगी से उठे सवाल, प्रदेश नेतृत्व पर बढ़ा दबाव, पार्टी में असंतोष खुलकर आया सामने राज्यसभा चुनाव ने खोली अंदरूनी कलह की परतें बिहार की राजनीति में कांग्रेस इस समय गंभीर अंदरूनी संकट से जूझ रही है। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी के तीन विधायकों का मतदान से अनुपस्थित रहना संगठन में गहरी दरार की ओर इशारा करता है। इस घटना ने प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह मामला अब केवल अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे असंतोष को उजागर कर चुका है। स्थिति ऐसी बन गई है कि केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी इस विवाद को सुलझाना आसान नहीं दिख रहा। विधायकों की नाराजगी ने बढ़ाई मुश्किलें मतदान से दूर रहने वाले विधायकों में मनिहारी के मनोहर सिंह और वाल्मीकि नगर के सुरेंद्र प्रसाद ने खुलकर प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं ने संगठन में उपेक्षा और सम्मान की कमी का आरोप लगाया है। वहीं, फारबिसगंज के विधायक मनोज विश्वास का रुख भी अलग नहीं दिखा। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी नेतृत्व पर डालते हुए संकेत दिया कि फैसलों में पारदर्शिता की कमी है, जिससे असंतोष बढ़ा है। 2025 के टिकट विवाद से जुड़ा है मौजूदा संकट इस विवाद की जड़ें 2025 के विधानसभा चुनाव तक जाती हैं। उस समय टिकट वितरण को लेकर पार्टी में भारी असंतोष देखने को मिला था। कई पुराने और जमीनी नेताओं को नजरअंदाज कर नए चेहरों को मौका दिया गया, जिससे कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी फैल गई। पार्टी के अंदर यह धारणा बनी कि टिकट बंटवारे में पारदर्शिता नहीं रखी गई, जिसके चलते संगठन में भरोसे का संकट लगातार गहराता गया। अनुशासनात्मक कार्रवाई से बढ़ी बगावत स्थिति को संभालने के बजाय पार्टी नेतृत्व द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई ने विवाद को और भड़का दिया। सात नेताओं को निष्कासित करने और कई को कारण बताओ नोटिस देने से असंतुष्ट गुट और आक्रामक हो गया। पटना में आयोजित ‘कांग्रेस बचाओ महासम्मेलन’ के जरिए नाराज नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन किया और साफ संकेत दिया कि वे प्रदेश नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं। गठबंधन में भी कमजोर हो रही पकड़ कांग्रेस की यह अंदरूनी खींचतान अब उसके सहयोगी दलों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। विपक्षी गठबंधन INDIA में पार्टी की साख पर असर पड़ रहा है। सहयोगी दलों को अब कांग्रेस की एकजुटता और वोट ट्रांसफर करने की क्षमता पर संदेह होने लगा है। केंद्रीय नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती मौजूदा हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि अगर जल्द ही केंद्रीय नेतृत्व ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो पार्टी को आगामी चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बिहार में अपनी खोई हुई पकड़ को वापस पाने के लिए कांग्रेस को न सिर्फ आंतरिक विवाद सुलझाने होंगे, बल्कि संगठन में भरोसा भी दोबारा कायम करना होगा। वरना यह संकट आने वाले समय में और गहराता जा सकता है।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
Bihar Rajya Sabha election
राज्यसभा चुनाव में ‘क्रॉस वोटिंग’ का खुलासा: कांग्रेस विधायक के बयान से मचा सियासी घमासान, प्रदेश नेतृत्व पर उठे सवाल

पटना: बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद सियासत गरमा गई है। राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह की हार के बाद अब कांग्रेस के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। वोटिंग से गैरहाजिर रहे तीन कांग्रेस विधायकों में से एक मनोज विश्वास ने मीडिया के सामने आकर बड़ा बयान दिया है।   वोटिंग से दूरी पर कांग्रेस विधायक का बड़ा खुलासा 16 मार्च को हुई वोटिंग में कांग्रेस के तीन विधायक-मनिहारी से मनोहर सिंह, फारबिसगंज से मनोज विश्वास और वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र कुशवाहा-ने मतदान नहीं किया था। अब मनोज विश्वास ने साफ कहा कि उम्मीदवार चयन में पार्टी के प्रदेश नेतृत्व की अनदेखी की गई, जिसके चलते यह स्थिति बनी।   “नेतृत्व का सम्मान नहीं, तो वोट क्यों दें?” विधायक मनोज विश्वास ने आरोप लगाया कि उम्मीदवार चयन में न तो प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका रही और न ही स्थानीय नेताओं को विश्वास में लिया गया। उनका कहना था कि जब पार्टी के नेताओं को ही महत्व नहीं दिया गया, तो विधायकों को वोट देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।   अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने पर नाराजगी उन्होंने दावा किया कि पहले किसी अन्य नाम पर चर्चा चल रही थी, लेकिन अंतिम समय में अचानक अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार बना दिया गया, जिनका राजनीतिक अनुभव सीमित है। इस फैसले से कई विधायकों में असंतोष पैदा हुआ।   प्रदेश अध्यक्ष पर ही उठाए सवाल अपने बयान में मनोज विश्वास ने सीधे तौर पर राजेश राम को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी के शीर्ष नेताओं को पूरी तरह शामिल नहीं किया गया, जिससे कार्यकर्ताओं और विधायकों में भ्रम की स्थिति बनी रही।   “हमें स्वतंत्र निर्णय लेने को कहा गया” विधायक ने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट निर्देश नहीं मिला, बल्कि विधायकों को अपने विवेक से निर्णय लेने को कहा गया। ऐसे में उन्होंने मतदान से दूरी बनाई।   राजद की हार के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव इस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्षी गठबंधन में दरार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। तेजस्वी यादव की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उम्मीदवार चयन और सहयोगी दलों के साथ समन्वय में कहां चूक हुई।   दल के प्रति निष्ठा पर भी दी सफाई हालांकि, मनोज विश्वास ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी के साथ कोई गलत नहीं किया है और आगे भी कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा वंचित, अल्पसंख्यक और कमजोर वर्गों की आवाज उठाती रही है, लेकिन उम्मीदवार चयन में इन मूल्यों को नजरअंदाज किया गया।   सियासी असर दूर तक संभव बिहार की राजनीति में यह बयान किसी ‘सियासी विस्फोट’ से कम नहीं माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इसका असर गठबंधन की रणनीति और आंतरिक समीकरणों पर साफ दिखाई दे सकता है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Tejashwi Yadav during political event as NDA wins Rajya Sabha seat and RJD faces setback
राज्यसभा चुनाव में RJD को बड़ा झटका: तेजस्वी की रणनीतिक चूक से हारे एडी सिंह, NDA ने पलट दी बाजी

बिहार के राज्यसभा चुनाव में सियासी खेल आखिरी वक्त में पूरी तरह पलट गया। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार एडी सिंह को हार का सामना करना पड़ा, जबकि NDA ने अप्रत्याशित तरीके से बाजी अपने नाम कर ली। इस हार के पीछे पार्टी के भीतर की रणनीतिक कमजोरी और नेतृत्व की जल्दबाजी को बड़ा कारण माना जा रहा है।   नतीजों से पहले ही साफ हो गई थी तस्वीर चुनाव के नतीजे आने से पहले ही यह लगभग तय हो गया था कि तेजस्वी यादव के इकलौते उम्मीदवार की राह मुश्किल हो चुकी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, जिस तरह से विधायकों का समर्थन टूटता गया, उससे संकेत मिल गए थे कि परिणाम RJD के पक्ष में नहीं जाएगा।   रणनीति में चूक और ‘जल्दबाजी’ बनी बड़ी वजह विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रबंधन में वही गलती दोहराई, जो पहले भी उनके लिए भारी पड़ चुकी है। AIMIM विधायकों का समर्थन मिलने के बाद उन्होंने जीत लगभग तय मान ली थी, लेकिन अंतिम समय में समीकरण बदल गए। इससे पहले भी विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने समय से पहले सरकार बनाने का दावा कर दिया था, जो बाद में उनके खिलाफ गया। इस बार भी कुछ वैसी ही स्थिति देखने को मिली।   विधायकों का ‘गच्चा’, RJD को नहीं था अंदाजा RJD को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उसके अपने एक विधायक और कांग्रेस के तीन विधायकों ने साथ नहीं दिया। पार्टी को इस तरह की अंदरूनी टूट की उम्मीद नहीं थी, जिससे पूरा गणित बिगड़ गया। राजनीतिक गलियारों में इसे NDA की सटीक रणनीति और विपक्ष की कमजोर पकड़ के रूप में देखा जा रहा है।   फैसल रहमान की भूमिका पर उठे सवाल ढाका से RJD विधायक फैसल रहमान का समर्थन न मिलना भी चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। सवाल उठ रहा है कि खुद को मुस्लिम समुदाय का बड़ा चेहरा बताने वाले तेजस्वी यादव अपने ही विधायक को साथ रखने में क्यों असफल रहे। सूत्रों के अनुसार, फैसल रहमान की विधायकी को लेकर कानूनी चुनौती और कम अंतर से जीत जैसे कारण उनके फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।   कांग्रेस की अनुपस्थिति से बिगड़ा खेल इस चुनाव में कांग्रेस के कुछ विधायकों की गैरहाजिरी भी RJD के लिए भारी पड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन के भीतर तालमेल की कमी साफ दिखी, जिससे विपक्ष की पूरी रणनीति कमजोर पड़ गई।   NDA की चाल के आगे RJD बेबस जहां RJD अपने समीकरण को लेकर आश्वस्त दिख रही थी, वहीं NDA ने आखिरी वक्त में ऐसी रणनीति अपनाई कि पूरा खेल बदल गया। इसे राजनीतिक ‘चेकमेट’ की तरह देखा जा रहा है, जहां विपक्ष को संभलने का मौका ही नहीं मिला।   भविष्य की राजनीति पर असर यह हार सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं, बल्कि RJD की रणनीति और नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल खड़े करती है। आने वाले चुनावों में तेजस्वी यादव के लिए यह एक बड़ी सीख मानी जा रही है कि केवल समर्थन जुटाना ही नहीं, बल्कि उसे अंत तक बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Nitish Kumar at JDU meeting amid discussion on party president election and leadership future
जदयू अध्यक्ष चुनाव का ऐलान: क्या फिर नीतीश कुमार के हाथ में होगी कमान या आएगा नया चेहरा?

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर पार्टी की कमान संभालेंगे या इस बार किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा।   चुनाव कार्यक्रम घोषित, तारीखें तय जदयू द्वारा जारी आधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 22 मार्च रखी गई है। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 24 मार्च को नाम वापस लेने की आखिरी तारीख होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो 27 मार्च को मतदान कराया जाएगा।   नीतीश कुमार का फिर अध्यक्ष बनना लगभग तय? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार का दोबारा निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। 29 दिसंबर 2023 को पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने संगठन को एकजुट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसा कोई दूसरा चेहरा नहीं है, जिस पर सभी गुटों की सहमति बन सके। ऐसे में अगर 24 मार्च तक केवल एक ही नामांकन आता है, तो उसी दिन औपचारिक रूप से उनके नाम का ऐलान हो सकता है।   दिल्ली से पटना तक तेज हुई राजनीतिक हलचल चुनाव की घोषणा के साथ ही पटना और दिल्ली स्थित जदयू दफ्तरों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस संगठनात्मक चुनाव को पार्टी की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण में व्यस्त हैं। 17 से 20 मार्च के बीच वे भागलपुर, बांका, जमुई और गया समेत कई जिलों का दौरा कर रहे हैं और विकास योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं।   क्या संगठन में होगा बदलाव या जारी रहेगी पुरानी रणनीति? यह चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे जदयू के आगामी राजनीतिक दिशा के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर नई पीढ़ी को लेकर चर्चा हो रही है और निशांत कुमार की संभावित सक्रियता को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, यह चुनाव और भी अहम हो गया है। अब सबकी नजरें 24 मार्च और उसके बाद की स्थिति पर टिकी हैं- क्या जदयू फिर से नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा या पार्टी किसी नए नेतृत्व की ओर कदम बढ़ाएगी।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Rajya Sabha Election 2026 results show Bihar clean sweep and Odisha gains
राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार में NDA का क्लीन स्वीप, ओडिशा में मिला बढ़त; हरियाणा में मतगणना पर विवाद

राज्यसभा चुनाव 2026 में भारतीय राजनीति का समीकरण साफ तौर पर सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बिहार में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि ओडिशा में भी पार्टी ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वहीं हरियाणा में वोटों को लेकर विवाद के कारण परिणाम अब तक अधर में लटका हुआ है।   बिहार: NDA का दबदबा कायम बिहार की पांचों सीटों पर NDA उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इनमें नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश राम शामिल हैं। इस जीत ने राज्य में NDA की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत कर दिया है।   ओडिशा: BJP आगे, BJD और निर्दलीय को भी सफलता ओडिशा की चार सीटों में से दो पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सांसद सुजीत कुमार ने 35-35 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। वहीं बीजू जनता दल के संतृप्त मिश्रा ने 31 वोट पाकर जीत हासिल की। चौथी सीट पर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय ने दूसरे वरीयता मतों के जरिए जीत दर्ज की।   हरियाणा: मतगणना पर बवाल, नतीजे लंबित हरियाणा में चुनावी प्रक्रिया के दौरान वोटों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मतगणना के बीच हंगामे के कारण काउंटिंग को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। फिलहाल यहां के नतीजों का इंतजार जारी है।   देशभर का परिदृश्य देश में कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहा है, जिनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। शेष 11 सीटों पर हुई वोटिंग के नतीजों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। अब तक के रुझानों से साफ है कि भाजपा और NDA का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Bihar leaders hold late-night strategy meeting in Patna ahead of Rajya Sabha election voting.
राज्यसभा की 5 सीटों के लिए आज वोटिंग: पटना में देर रात तक चली NDA और महागठबंधन की रणनीति बैठक

  बिहार की सियासत में बढ़ी हलचल बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए आज मतदान होना है। वोटिंग से पहले रविवार को राजधानी पटना में राजनीतिक हलचल तेज रही। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और जीत सुनिश्चित करने के लिए देर रात तक रणनीति बनाई। सूत्रों के मुताबिक चार सीटों पर NDA उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला अभी भी दिलचस्प बना हुआ है। इसी वजह से दोनों पक्षों ने रात करीब 11 बजे तक बैठकों का दौर जारी रखा।   होटल में महागठबंधन की बैठक रविवार को पटना के एक होटल में विपक्षी गठबंधन की अहम बैठक हुई। इस बैठक की अगुवाई Tejashwi Yadav ने की। बैठक में महागठबंधन के नेताओं के साथ AIMIM और Bahujan Samaj Party के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई। हालांकि बैठक के बाद तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में चुनावी रणनीति पर ज्यादा कुछ नहीं कहा।   AIMIM से समर्थन की कोशिश बताया जा रहा है कि पांचवीं सीट पर मुकाबला कड़ा होने के कारण महागठबंधन अन्य दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। इसी क्रम में तेजस्वी यादव ने All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) से भी समर्थन मांगा है। रविवार को AIMIM की ओर से आयोजित इफ्तार कार्यक्रम में तेजस्वी यादव पहुंचे थे, जहां उन्होंने पार्टी नेताओं से मुलाकात कर सहयोग की उम्मीद जताई। राजनीतिक गलियारों में AIMIM विधायकों के रुख को लेकर काफी चर्चा हो रही है।   कांग्रेस का दावा – सभी विधायक साथ महागठबंधन की बैठक के बाद Akhilesh Singh ने कहा कि उनके सभी विधायक मौजूद हैं और कोई भी गायब नहीं है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष पूरी तरह एकजुट है और महागठबंधन के उम्मीदवार की जीत तय है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि NDA के कुछ विधायक संपर्क में नहीं हैं, जिससे सत्ता पक्ष की चिंता बढ़ गई है।   NDA की भी देर रात तक बैठक दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन ने भी देर रात तक रणनीति बैठक की। यह बैठक भाजपा नेता और राज्यसभा उम्मीदवार Nitin Nabin के आवास पर हुई। बैठक में Vijay Sharma, Nityanand Rai और बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने विधायकों को एकजुट रखने और मतदान की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।   वोटिंग के बाद आएगा अंतिम फैसला अब सभी की नजरें आज होने वाली वोटिंग और उसके नतीजों पर टिकी हैं। खासकर पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। माना जा रहा है कि छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका इस सीट के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Rajya Sabha election voting underway in Bihar, Odisha and Haryana amid cross-voting concerns and tight contests.
राज्यसभा चुनाव: 11 सीटों पर आज मतदान, बिहार-ओडिशा-हरियाणा में कड़ा मुकाबला, क्रॉस-वोटिंग पर नजर

  देश के तीन राज्यों-बिहार, ओडिशा और हरियाणा-में आज राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। वोटिंग सुबह 11 बजे से शुरू होगी और मतगणना के बाद नतीजे भी आज ही शाम तक घोषित किए जाने की संभावना है। इस बार कुल 37 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है, जिनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इन निर्विरोध चुने गए नेताओं में शरद पवार, रामदास अठावले, अभिषेक मनु सिंघवी, थंबी दुरई, विनोद तावड़े और बाबुल सुप्रियो जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं। हालांकि बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।   बिहार: पांचवीं सीट पर टिकी सबकी नजर बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान हो रहा है। सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों-नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन और शिवम कुमार-की जीत लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन असली मुकाबला पांचवीं सीट पर है, जहां NDA के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा और महागठबंधन समर्थित एडी सिंह आमने-सामने हैं। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत है। माना जा रहा है कि AIMIM के पांच और BSP के एक विधायक का समर्थन मिलने से मुकाबला कड़ा हो सकता है। वहीं NDA को उम्मीद है कि महागठबंधन के कुछ विधायक क्रॉस-वोटिंग कर सकते हैं। कांग्रेस और बीएसपी के कुछ विधायकों पर भी सभी दलों की नजर बनी हुई है।   ओडिशा: भाजपा और बीजद के बीच संतुलन ओडिशा की चार सीटों पर भी दिलचस्प राजनीतिक समीकरण बन गए हैं। अनुमान है कि भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल दो-दो सीटें जीत सकती हैं। ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी उसे प्राप्त है, जिससे दो सीटें लगभग उसके खाते में तय मानी जा रही हैं। हालांकि तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए भाजपा को आठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। वहीं बीजद के पास 48 विधायक हैं, जिससे उसकी एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है। अगर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का समर्थन मिल जाता है तो पार्टी दूसरी सीट भी जीत सकती है। चौथी सीट पर भाजपा समर्थित दिलीप रे और बीजद के उम्मीदवार के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।   हरियाणा: निर्दलीय प्रत्याशी से बढ़ा रोमांच हरियाणा की दो सीटों पर चुनाव हो रहा है। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 48 विधायक हैं, जबकि Indian National Lok Dal के दो और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन उसे प्राप्त है। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस के 37 विधायक हैं और उसके उम्मीदवार करमवीर बोध भी जीत की स्थिति में नजर आ रहे हैं। हालांकि निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। उन्हें जीतने के लिए अतिरिक्त नौ वोटों की जरूरत होगी, जो बिना क्रॉस-वोटिंग के संभव नहीं माने जा रहे। इसी आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने कई विधायकों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है।   शाम तक साफ होगी तस्वीर तीनों राज्यों में मतदान पूरा होने के बाद आज शाम तक परिणाम सामने आ जाएंगे। कई सीटों पर जीत-हार का फैसला क्रॉस-वोटिंग पर निर्भर माना जा रहा है, इसलिए कुछ जगहों पर चौंकाने वाले नतीजों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Mokama MLA Anant Singh arriving under police security to vote in Bihar Rajya Sabha election.
राज्यसभा चुनाव 2026: जेल में बंद विधायक अनंत सिंह डालेंगे वोट, NDA की पांचवीं सीट की राह हुई आसान

  कोर्ट के फैसले से NDA को मिली बड़ी राहत बिहार में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। मोकामा से विधायक Anant Singh को पटना की विशेष अदालत ने 16 मार्च को होने वाले मतदान में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है। दुलारचंद यादव हत्या मामले में फिलहाल जेल में बंद अनंत सिंह पुलिस सुरक्षा में विधानसभा पहुंचकर वोट डाल सकेंगे। पटना की MP-MLA कोर्ट ने आदेश दिया है कि मतदान के बाद उन्हें तुरंत वापस जेल भेज दिया जाएगा। अदालत के इस फैसले से National Democratic Alliance (NDA) को बड़ी राजनीतिक राहत मिली है।   बिहार में 16 मार्च को होगा मतदान बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। इन सीटों को लेकर सत्तारूढ़ NDA और विपक्षी महागठबंधन के बीच कड़ी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल रही है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह Janata Dal (United) से जुड़े हैं और उनका वोट NDA के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।   पांचवीं सीट के लिए कड़ा गणित बिहार विधानसभा में किसी भी उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। 243 सदस्यीय विधानसभा में NDA की चार सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ रहा है। NDA के पास फिलहाल 38 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में अनंत सिंह का वोट गठबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। यदि उन्हें मतदान की अनुमति नहीं मिलती, तो NDA को विपक्षी खेमे से ज्यादा क्रॉस वोटिंग की जरूरत पड़ती।   पुलिस सुरक्षा में विधानसभा लाए जाएंगे अनंत सिंह अदालत के आदेश के अनुसार अनंत सिंह को Beur Central Jail से पुलिस सुरक्षा में बिहार विधानसभा लाया जाएगा। मतदान पूरा होने के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया जाएगा। राज्यसभा चुनाव में हर वोट की अहमियत को देखते हुए इस फैसले को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   RJD ने भी उतारा उम्मीदवार इस चुनाव में विपक्षी खेमे की ओर से Tejashwi Yadav के नेतृत्व वाली Rashtriya Janata Dal ने भी उम्मीदवार उतारा है। इससे पांचवीं सीट की लड़ाई और दिलचस्प हो गई है। दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और समर्थन सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं।   पहले भी जेल से विधानसभा पहुंचे थे अनंत सिंह गौरतलब है कि अनंत सिंह फिलहाल दुलारचंद यादव हत्या मामले में जेल में बंद हैं। इससे पहले भी उन्हें बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक पद की शपथ लेने के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी गई थी।   मतदान के बाद साफ होगी तस्वीर 16 मार्च को होने वाले मतदान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि NDA बिहार की सभी पांच राज्यसभा सीटों पर जीत दर्ज कर पाता है या फिर महागठबंधन पांचवीं सीट पर कब्जा जमाने में सफल होता है। फिलहाल अनंत सिंह को वोट देने की अनुमति मिलने से सियासी समीकरण जरूर बदल गए हैं।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0