बिहार

Bihar CM Face in NDA’s Hands

बिहार में CM फेस पर सस्पेंस, 5 दल मिलकर करेंगे फैसला

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Speculation over the next Bihar Chief Minister.
Bihar CM Face Suspense After Nitish Kumar Move

Bihar Politics Update: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद अब राज्य में नए सीएम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

दिल्ली पहुंचे नीतीश कुमार

  • राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने दिल्ली पहुंचे
  • जदयू नेताओं ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत
  • कहा: “मैं यहां शपथ लेने आया हूं”

कौन बनेगा अगला मुख्यमंत्री?

  • मंत्री विजय कुमार चौधरी का बड़ा बयान:
    “CM वही बनेगा, जिसे NDA विधायक दल का नेता चुनेगा”
    “अब बस कुछ दिन की बात है”

5 दल मिलकर करेंगे फैसला

  • यह सिर्फ एक पार्टी का निर्णय नहीं होगा
  • NDA के 5 सहयोगी दल मिलकर बैठेंगे
  • सभी दल अपने-अपने प्रस्ताव रखेंगे
  • फिर सर्वसम्मति या बहुमत से नेता का चुनाव होगा
    वही नेता बनेगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री

इसका मतलब क्या है?

  • CM फेस पर अभी कोई फाइनल नाम तय नहीं
  • गठबंधन की राजनीति में सहमति जरूरी
  • कई नामों पर चर्चा संभव

JDU की प्रतिक्रिया

  • नेता संतोष निराला ने कहा:
    नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना गर्व की बात है, उनकी राजनीति से बिहार को आगे बढ़ने की उम्मीद है।
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में उद्योग लगाना हुआ आसान, 30 दिनों में मिलेगी मंजूरी

पटना, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि बिहार में नए उद्योगों को अब 30 दिनों के भीतर आवश्यक मंजूरियां मिलेंगी। सिंगल विंडो सिस्टम और SIPB सचिवालय को मजबूत कर निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की तैयारी की गई है। नये उद्योगों के लिए सारी प्रक्रिया आसान बना दी गई हैं। यह निर्णय मंत्रीपरिषद की बैठक में लिया गया। इससे राज्य् में निवेश को बढ़ावा, रोजगार सृजन, आर्थिक आत्मनिर्भरता औऱ तीव्र औद्य़ोगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौघरी ने सोशल मीडिया पर साझा की।  निवेशकों को मिलेगी तेज और पारदर्शी सेवा मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेशकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से सिंगल विंडो प्रणाली को और मजबूत किया गया है। इसके तहत स्टेट इंवेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड (SIPB) सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया है। उनका मानना है कि इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा। साथ ही अनुमोदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेगी। रोजगार बढ़ेगा और आर्थिक विकास होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नई व्यवस्था से राज्य में निवेश आकर्षित होगा। नए उद्योगों की स्थापना को गति मिलेगी। इससे रोजगार के नए-नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि निवेश, उद्योग और रोजगार के विस्तार के साथ बिहार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से अग्रसर होगा।

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पटना नगर निगम का डिजिटल कदम, अब एक क्लिक में मिलेंगे पार्षद और अधिकारियों का नंबर

पटना, एजेंसियां। राजधानी पटना को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में पटना नगर निगम ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। नागरिक सुविधाओं को बेहतर और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने अपने मोबाइल ऐप में बड़ा डिजिटल अपडेट किया है। अब शहरवासी केवल एक क्लिक में अपने वार्ड पार्षद से लेकर संबंधित अधिकारियों तक की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।   नगर निगम द्वारा ऐप में जोड़े गए नए “फाइंड योर वार्ड” फीचर के माध्यम से नागरिक अपने क्षेत्र से जुड़े वार्ड पार्षद, कार्यपालक पदाधिकारी, सिटी मैनेजर और इंजीनियरों के मोबाइल नंबर आसानी से देख सकेंगे। इससे किसी भी समस्या या शिकायत के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से सीधे संपर्क करना आसान हो जाएगा।   व्हाट्सएप चैटबॉट से दर्ज होगी शिकायत नई व्यवस्था के तहत नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ऐप में उपलब्ध व्हाट्सएप चैटबॉट सुविधा के जरिए लोग घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उसकी स्थिति की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। नगर निगम का मानना है कि इससे शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी होगी।   डिजिटल मैप से मिलेगी वार्ड की पूरी जानकारी पटना नगर निगम ने शहर का विस्तृत डिजिटल मैप भी तैयार किया है। इस मैप में प्रत्येक वार्ड की सीमा को लाल रंग से चिन्हित किया गया है। नागरिक जूम इन और जूम आउट की मदद से अपने इलाके की सटीक स्थिति और वार्ड की सीमा को आसानी से समझ सकेंगे।   सार्वजनिक सुविधाओं की जानकारी भी होगी उपलब्ध स्मार्ट ऐप के माध्यम से अब शहर की सड़कों, नालों, पार्कों, पार्किंग स्थलों और सार्वजनिक शौचालयों की जानकारी भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा नजदीकी निगम कार्यालय, श्मशान घाट और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुविधाओं की लोकेशन भी आसानी से देखी जा सकेगी। नगर निगम के इस डिजिटल कदम को स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है, जिससे नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद और सेवाओं की पहुंच पहले से अधिक आसान और प्रभावी होगी।

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Bihar: सफाई सुपरवाइजरों से मारपीट, अपहरण और लूट का आरोप; पूर्व MLC के परिजनों पर FIR की मांग

सीवान, एजेंसियां।  जिले के आंदर नगर पंचायत में सफाई व्यवस्था की निगरानी कर रहे दो सुपरवाइजरों के साथ कथित मारपीट, अपहरण और लूटपाट का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। पीड़ितों ने पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के परिजनों समेत 8 से 10 लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से सख्त कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है। पीड़ित अमृत कुमार ने आंदर थाना में दिए आवेदन में बताया कि वह और उनके सहयोगी शुभम कुमार पाठक नगर पंचायत में सफाई सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत हैं। 5 जून को दोनों वार्ड संख्या-6 में सफाई कार्य का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों के साथ कहासुनी हुई। अमृत का आरोप है कि शिकायत लिखित रूप में देने की बात कहने के बाद मामला शांत हो गया था, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति अचानक बिगड़ गई।   हथियारों से हमला करने का आरोप शिकायत के अनुसार, कुछ लोग रॉड, चाकू और पिस्टल लेकर उनके कमरे में पहुंचे और दोनों पर हमला कर दिया। आरोप है कि पिस्टल की बट और अन्य हथियारों से की गई मारपीट में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के बाद उन्हें जबरन एक घर ले जाया गया, जहां दोबारा मारपीट की गई।   60 हजार रुपये लूटने का दावा पीड़ितों का कहना है कि हमलावरों ने सफाई कर्मियों के भुगतान के लिए रखे गए करीब 60 हजार रुपये भी छीन लिए। साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल शुभम कुमार पाठक को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया है।   पुलिस जांच में जुटी पीड़ित पक्ष ने नामजद आरोपियों के खिलाफ अपहरण, लूट, जानलेवा हमला और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। आंदर थाना पुलिस ने आवेदन मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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