Rajya Sabha Election

Saryu Roy Hemant Soren
झारखंडः हेमंत को सरयू राय के ऑफर पर भड़की कांग्रेस

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के बाद से ही सियासी हलचल जारी है। जदयू विधायक सरयू राय की ओर से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ये सुझाव दिया गया कि वो कांग्रेस से नाता तोड़ लें। सरयू राय का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा के बिना भी राज्य में गठबंधन की सरकार आराम से चल सकती है। जेएमएम के 34, राजद के 4, भाकपा-माले के 2 विधायकों को मिलाकर संख्या 40 तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा जदयू और जेएलकेएम के एक विधायक के समर्थन से ये आंकड़ा 42 तक पहुंच जाएगा, जो बहुमत से लिए पर्याप्त है।   सरयू राय ने क्या अमित शाह से अनुमति ली है? जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय के इस सुझाव के बाद जेएमएम की ओर से तो कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस भड़क गई है। कांग्रेस की ओर से सरयू राय के सुझाव के बयान पर कड़ा पलटवार किया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के महासचिव और मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि झारखंड में सरकार बनाने का जो फॉर्मूला सरयू राय दे रहे हैं, क्या उसके लिए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुमति ले ली है? झारखंड में बीजेपी का मंसूबा सफल नहीं होगा-कांग्रेस... कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा और एनडीए नेताओं की सत्तालोलुपता भी साफ देखी जा सकती है, लेकिन वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड की जनता ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने का जनादेश दिया था और आने वाले समय में भी बीजेपी का नापाक मंसूबा झारखंड में सफल नहीं होगा। सरयू राय को क्या पूरे एनडीए का समर्थन है? लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि सरयू राय को सबसे पहले जनता को यह बताना चाहिए कि वे किस गठबंधन और किस पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर आए हैं। उन्होंने कहा कि वे जिस समर्थन की बात कर रहे हैं, क्या उनके साथ पूरा एनडीए गठबंधन भी इस ओर कदम बढ़ा रहा है, या फिर यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत कल्पना मात्र है? लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि विपक्ष चाहे जितने हथकंडे अपना ले, चुनी हुई सरकार को गिराने की उनकी मंशा कभी कामयाब नहीं होगी। सरयू राय के फॉर्मूला की कोई विश्वसनीयता नहीं... कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राजनीति में नए साथियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन क्या इंडी गठबंधन के अन्य घटक दल राजद और भाकपा-माले भी इस बात से सहमत हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहा है। लाल किशोर नाथ शाहदेव ने साफ तौर पर कहा कि सरयू राय जो फॉर्मूला पेश कर रहे हैं, उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।

abhishek singh जून 22, 2026 0
Irfan Ansari
राज्यसभा चुनाव के बाद इरफान अंसारी भावुक, बोले— हार नहीं, अपनों का धोखा सबसे बड़ा दर्द

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव परिणामों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें हार का उतना दुख नहीं है, जितना “अपनों द्वारा भरोसा तोड़े जाने” का दर्द है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।   भाजपा पर धनबल और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप इरफान अंसारी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस चुनाव में धनबल, छल और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। उनके अनुसार, यदि सभी सहयोगी दल एकजुट रहते तो परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की जीत जनभावनाओं की नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत और संसाधनों के इस्तेमाल की जीत है।   “दिल आहत है, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी” मंत्री ने कहा कि उनका मन आहत जरूर है, लेकिन वह निराश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया है और यह स्थायी नहीं होती। अंसारी ने भरोसा जताया कि जनता का समर्थन उनके साथ है और वे संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां भले ही आज उनके पक्ष में नहीं हैं, लेकिन भविष्य में बदलाव संभव है।   “आज उनका दिन है, कल हमारा भी आएगा” अपने संदेश में इरफान अंसारी ने कहा कि राजनीति में किसी की जीत स्थायी नहीं होती। उन्होंने कहा कि आज भाजपा का समय है, लेकिन आने वाले समय में हालात बदलेंगे। उनकी इस प्रतिक्रिया को महागठबंधन के भीतर बढ़ती असहमति और राजनीतिक असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Mizoram Chief Minister and ZPM leaders celebrate K Lalhmingliana's historic Rajya Sabha victory in Aizawl.
राज्यसभा चुनाव: ZPM उम्मीदवार के. लालतलुआंगकिमा जीते, पहली बार उच्च सदन पहुंची पार्टी

  मिजोरम की एकमात्र राज्यसभा सीट पर हुए चुनाव में सत्तारूढ़ Zoram People's Movement (जेडपीएम) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। पार्टी के उम्मीदवार K. Lalhmingliana (के. लालतलुआंगकिमा) ने चुनाव जीतकर पहली बार पार्टी को संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिलाया है। 26 वोट हासिल कर दर्ज की शानदार जीत विधानसभा सचिव एवं निर्वाचन अधिकारी Jothansanga Ralte के अनुसार, चुनाव में कुल 36 वोट पड़े। इनमें जेडपीएम उम्मीदवार के. लालतलुआंगकिमा को 26 वोट मिले, जबकि विपक्षी Mizo National Front (एमएनएफ) की उम्मीदवार Jothansangi Hmar को 10 वोट प्राप्त हुए। एमएनएफ उम्मीदवार को उनकी पार्टी के सभी 10 विधायकों का समर्थन मिला, लेकिन विधानसभा में स्पष्ट बहुमत होने के कारण जेडपीएम उम्मीदवार की जीत पहले से ही लगभग तय मानी जा रही थी। पहली बार राज्यसभा में पहुंचेगी जेडपीएम यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि जेडपीएम के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है। पहली बार पार्टी का कोई प्रतिनिधि राज्यसभा पहुंचेगा, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में उसकी उपस्थिति और प्रभाव बढ़ने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत से जेडपीएम को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने और पूर्वोत्तर के मुद्दों को संसद में अधिक प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर मिलेगा। तीन विधायकों ने नहीं किया मतदान राज्यसभा चुनाव में तीन विधायकों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। इनमें शामिल हैं— K. Beichhua (भाजपा) K. Hrahmo (भाजपा) C. Ngunlianchunga (कांग्रेस) कांग्रेस विधायक सी. न्गुनलिआनचुंगा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उन्होंने पार्टी आलाकमान के निर्देशों के अनुसार मतदान से दूरी बनाई। वहीं, भाजपा के मीडिया संयोजक Johnny Lalthanpuia ने बताया कि पार्टी के दोनों विधायकों ने भी मतदान नहीं किया। स्वास्थ्य कारणों से वोट नहीं डाल सके एक विधायक निर्वाचन अधिकारी जोथानसांगा राल्ते ने बताया कि विधायक W. Chhuanawma स्वास्थ्य संबंधी कारणों से मतदान नहीं कर सके। इस प्रकार 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में से 36 विधायकों ने मतदान किया, जबकि चार सदस्य वोटिंग प्रक्रिया से बाहर रहे। जेडपीएम के लिए क्यों अहम है यह जीत? के. लालतलुआंगकिमा की जीत जेडपीएम के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है— पहली बार पार्टी को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिला। राष्ट्रीय राजनीति में जेडपीएम की उपस्थिति मजबूत होगी। पूर्वोत्तर और मिजोरम से जुड़े मुद्दों को संसद में नई आवाज मिलेगी। पार्टी को भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विस्तार का अवसर मिल सकता है। यह परिणाम मिजोरम की राजनीति में जेडपीएम की बढ़ती ताकत और उसके मजबूत जनाधार का भी संकेत माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
JMM
क्या JMM के कुछ विधायकों ने की क्रॉस वोटिंग?

रांची। झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चल रहे वोटिंग के बीच बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। महागठबंधन के सभी विधायकों का मतदान संपन्न हो गया है। हालांकि एनडीए का मतदान जारी है। मतदान के बाद सभी विधायक अपने-अपने चेंबर की ओर जा रहे हैं। इसी बीच बड़ी खबर सामने आ रही है कि झामुमो के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है। हालांकि फिलहाल यह सूचना अपुष्ट है। इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि अभी तक नहीं की जा सकी है। लेकिन, पूरे विधानसभा परिसर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Parimal Nathwani 's Son
राज्यसभा चुनाव : परिमल नाथवानी के बेटे पहुंचे मतदान केंद्र

रांची।  राज्यसभा चुनाव सुबह नौ बजे से जारी है। जहां एनडीए और इंडी गठबंधन ने मतदान पूर्ण कर लिया है। वहीं, परिमल नाथवानी के बेटे धनराज नाथवानी विधानसभा पहुंचे। राज्यसभा चुनाव तीन उम्मीदवारों के बीच हो रहा है। जिसमें निर्दलीय भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी, कांग्रेस के पीके झा और झामुमो के बैजनाथ राम शामिल है। मतगणना शाम पांच बजे से होगी।

abhishek singh जून 18, 2026 0
MDA MLAs
राज्यसभा चुनावः एनडीए के सभी विधायकों ने डाल दिया वोट

रांची। राज्यसभा चुनाव में सभी एनडीए विधायकों ने मतदान कर लिया है। विधानसभा के कमरा नंबर 42 में मतदान हो रहा है। सबसे पहले विधायक प्रदीप प्रसाद और विधायक सीपी सिंह ने भी मतदान किया। बता दें कि दो सीटों के लिये राज्यसभा चुनाव हो रहा है। मतदान सुबह नौ बजे से जारी है, जो शाम चार बजे तक चलेगा। वहीं, पांच बजे के बाद मतगणना होगा। राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार है, जिनमें कांग्रेस के पीके झा, झामुमो से वैजनाथ राम और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी है। चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी और इंडी गठबंधन के कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के बीच सीधी टक्कर है।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Rajya Sabha Election Confidence
राज्यसभा चुनावः कांग्रेस को 56 नहीं 61 का भरोसा, 5 अतिरिक्त वोट किसके ?

रांची। झारखंड में हो रहे राज्यसभा चुनाव में इंडी गठबंधन गजब का कॉन्फिडेंस दिखा रहा है। पहले 56 विधायकों को एकजुट रखने पर ही सवाल उठाए जा रहे थे, अब तो बात 61 विधायकों तक पहुंच गई है। राज्यसभा की दो सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले शह-मात का खेल शुरू हो गया है।   एक ओर सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन अपने 56 विधायकों की एकजुटता का प्रदर्शन कर जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर संख्या बल में पीछे होने के बावजूद एनडीए भी जीत का दावा कर रहा है। अपने विधायकों को रांची के एक होटल में शिफ्ट कर एनडीए ने भी मोर्चाबंदी कर रखी है। सीएम हेमंत सोरेन की देखरेख में हुआ मॉक पोल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में इंडिया गठबंधन के विधायकों की बैठक हुई। इसमें विधायकों को प्रशिक्षित कर मॉक पोल कराया गया। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, मॉक पोल में झामुमो के बैद्यनाथ राम को 29 और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 27 वोट मिले। विधानसभा अध्यक्ष का वोट झामुमो को और माले विधायक अरूप चटर्जी पूर्व सूचना के आधार पर बैठक में शामिल नहीं हुए। उनका वोट भी कांग्रेस को मिलेगा। उन्होंने कहा कि मॉक पोल में हमारा एक भी वोट अमान्य नहीं हुआ। वहीं मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि दोनों सीटों पर महागठबंधन के दोनों उम्मीदवार की जीत तय है। पूरा गठबंधन एकजुट होकर मतदान करेगा। राज्यसभा चुनाव में '56 नहीं 61' का नारा इंडी गठबंधन खेमे में चर्चा तब और तेज हो गई जब झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने सोशल मीडिया पर '56 नहीं 61' का नारा उछाल दिया। सियासी गलियारों में इसे महागठबंधन के दावे से पांच अतिरिक्त वोट मिलने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक के बाद कांग्रेस नेता भाजपा पर हमलावर दिखे। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि भाजपा की कारगुजारी से साबित होता है कि बीजेपी कॉरपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है।   मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि जिस पर विधायक-सांसद की खरीद-फरोख्त के आरोप लगते रहे हैं, वही अपने विधायकों को होटल में शिफ्ट कर रही है। वहीं प्रदीप यादव ने कहा कि हम बुधवार को अपनी अगली रणनीति तय करेंगे।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Parimal Nathwani Narendra Modi
पीएम आवास पहुंचे परिमल नाथवाणी, नरेंद्र मोदी से की मुलाकात

रांची। झारखंड से भाजपा समर्थित राज्यसभा के निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। यहां उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस अवसर परिमल नाथवाणी के पुत्र धनराज नाथवाणी भी मौजूद थे।   राज्यसभा चुनाव के बीच परिमल नाथवाणी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात बहुत कुछ राजनीतिक संदेश भी देती है। कई राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार परिमल नाथवाणी 16 जून को रांची आएंगे। वह दो दिनों तक रांची में रह कर चुनावी तैयारी को मुकाम तक पहुंचाएंगे। बता दें कि 18 को राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Minakshi Natrajan
कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज

नई दिल्ली, एजेंसियां। राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनके नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन खारिज होने जैसे मामलों में आमतौर पर न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करता और ऐसे विवादों का समाधान चुनाव के बाद चुनाव याचिका के माध्यम से किया जाता है। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत का हस्तक्षेप सीमित सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 329(b) का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत का हस्तक्षेप सीमित होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि हर नामांकन विवाद में तत्काल सुनवाई शुरू कर दी जाए, तो चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होगी और संविधान की मंशा के विपरीत स्थिति पैदा हो सकती है। कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन क्यों हुआ था रद्द? मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि भाजपा ने उनके नामांकन पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी। इसके बाद रिटर्निंग अधिकारी ने 9 जून को उनका नामांकन निरस्त कर दिया था। अभिषेक मनु सिंघवी ने रखा था पक्ष सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मीनाक्षी नटराजन को चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला मतदाता करते हैं और यदि उन्हें पर्याप्त वोट नहीं मिलते तो वे चुनाव हार जाएंगी। भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित हो गए। निर्वाचन अधिकारियों ने उन्हें प्रमाण पत्र भी सौंप दिया है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Rajya Sabha Election
राज्यसभा चुनाव में आज होगा तस्वीर साफ, नाम वापसी की अंतिम तारीख पर है सबकी नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। राज्यसभा चुनाव 2026 के तहत नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख आज है। इसके बाद 10 राज्यों की 24 सीटों के लिए मैदान में बचे उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होगी। कई राज्यों में उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना है, जबकि मध्य प्रदेश और झारखंड में मुकाबला बेहद रोचक बना हुआ है। 18 जून को होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।   10 राज्यों की 24 सीटों पर चुनाव इस बार आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की 24 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। कुल 26 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन सीटों पर कई वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नाम शामिल हैं।   झारखंड और मध्य प्रदेश पर सबकी नजर झारखंड की दो सीटों के लिए जेएमएम ने बैद्यनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को भाजपा का समर्थन मिलने की चर्चा है। विधानसभा में संख्या बल के बावजूद यहां क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। मध्य प्रदेश में तीन सीटों के लिए भाजपा ने तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को मैदान में उतारा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस इस मामले को लेकर न्यायिक और संवैधानिक लड़ाई लड़ रही है।   गुजरात और आंध्र प्रदेश में NDA मजबूत गुजरात में भाजपा के चारों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है क्योंकि विपक्ष ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। वहीं आंध्र प्रदेश में टीडीपी और जनसेना गठबंधन की मजबूत स्थिति के कारण एनडीए उम्मीदवारों को बढ़त मिलती दिख रही है।   कैसे होता है राज्यसभा चुनाव? राज्यसभा सदस्य का चुनाव संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायक करते हैं। चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) से होता है, जिसमें विधायक उम्मीदवारों को वरीयता के आधार पर वोट देते हैं। यदि आवश्यक संख्या में प्रथम वरीयता वोट नहीं मिलते, तो दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती होती है। इसी वजह से कई राज्यों में क्रॉस वोटिंग और अतिरिक्त समर्थन चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।   आज के बाद होगी स्थिति स्पष्ट नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि किन राज्यों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाएंगे और किन सीटों पर मतदान की जरूरत पड़ेगी। खासकर मध्य प्रदेश और झारखंड के नतीजों पर राष्ट्रीय राजनीति की नजर बनी हुई है, क्योंकि इनके परिणाम राज्यसभा में दलों के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Rajya Sabha Election
Rajya Sabha Election: सेकेंड प्रेफरेंस वोट से बदलेगा समीकरण!  जानें नाथवाणी, JMM-कांग्रेस का दांव

रांची। झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन प्रत्याशी बैजनाथ राम, प्रणव झा और परिमल नाथवाणी मैदान में हैं। चुनाव मैदान में तीन प्रत्याशियों आ जाने के कारण मुकाबला रोचक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार सेकेंड प्रेफरेंस के वोट से समीकरण बदल सकता है। 56 वोटों का जादुई आंकड़ा इंडिया गठबंधन के पक्ष मे झारखंड की दोनों सीटों पर जीत के लिए आवश्यक 56 वोटों का जादुई आंकड़ा इंडिया गठबंधन के पक्ष में है, लेकिन क्रॉस वोटिंग से तस्वीर बदल सकती है। निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी को भाजपा, जदयू, आजसू पार्टी और लोजपा-आर के 24 विधायकों का समर्थन हासिल है। इसके अलावा तटस्थ माने जाने वाले जेएलकेएम के एक विधायक जयराम महतो का वोट भी निर्णायक हो सकता है। एक वोट से बदल सकता है पूरा समीकरण राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 56 वोट जरूर है। ऐसी स्थिति में जेएमएम प्रत्याशी बैजनाथ राम और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 28-28 वोट मिल जाए, तो दोनों उम्मीदवारों की जीत हो सकती है। लेकिन, सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए 28 मतों का दांव लगाना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि एक भी वोट रद्द होने से पूरा समीकरण बिगड़ सकता है। दूसरी तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए रणनीतिक पेच ये भी है कि इंडिया गठबंधन के एक प्रत्याशी के पक्ष में 28 वोट से अधिक मतदान कराया जाए, तो गठबंधन के दूसरे प्रत्याशी का वोट कम जाएगा। इस स्थिति में निर्दलीय प्रत्याशी को फायदा मिल सकता है। प्रथम के साथ द्वितीय वरीयता का वोट भी होगा निर्णायक राज्यसभा चुनाव में मतदाताओं के इस अधिकार से चुनाव परिणाम का पूरा समीकरण बदल सकता है। इंडिया गठबंधन के विधायकों की कोशिश होगी कि 28-28 वोट उन्हें प्रथम वरीयता का मिले और इतना ही वोट उन्हें द्वितीय वरीयता का भी मिल जाए, ऐसी स्थिति में सत्तारूढ़ गठबंधन के दोनों उम्मीदवारों की जीत तय हो जाएगी। लेकिन, कुछ वोट रद्द होने या अनुपस्थित रहने की स्थिति में सत्ता पक्ष के 56 विधायकों में से जितने मतदाताओं का द्वितीय वरीयता का वोट निर्दलीय प्रत्याशी को मिलेगा, उसके अनुसार समीकरण में बदलाव होगा। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए सभी 81 मतदाताओं यानी विधायकों के पास प्रथम के अलावा द्वितीय वरीयता का वोट देने का अधिकार होगा। मतदाता चाहे, तो किसी एक उम्मीदवार को ही वोट कर सकते हैं, लेकिन इच्छा होने पर द्वितीय वरीयता का वोट भी कर सकते हैं। दोनों ही स्थिति में उनका वोट वैध होगा। क्या है वोटों का गणित झारखंड विधानसभा के सदस्यों की संख्या 81 है, यदि सभी सदस्य वोट करते हैं और उनका मत वैध पाया जाता है, तो किसी भी उम्मीदवार को निर्वाचित होने के लिए 2701 अंक का कोटा यानी प्रथम वरीयता का 28 मात प्राप्त करना होगा। सत्तारूढ़ जेएमएम-कांग्रेस- राजद और माले गठबंधन के पास पास दो उम्मीदवारों की जीत के लिए पर्याप्त वोट हैं। एनडीए विधायकों की संख्या 24 है, जबकि जेएलकेएम के जयराम महतो तटस्थ माने जा रहे हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों की संख्या दल    विधायक  जेएमएम    34 कांग्रेस    16 राजद    4 भाकपा-माले    2 कुल वोट    56 एनडीए विधायकों की संख्याः दल    विधायक भाजपा    21 जदयू    1 लोजपा-आर    1 आजसू पार्टी    1 कुल    24   JMM-कांग्रेस का दांव राज्यसभा चुनाव में जेएमएम उम्मीदवार बैजनाथ राम सिर्फ अपनी पार्टी के ही 34 में से 28 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट से आसानी से जीत हासिल कर लेंगे। लेकिन, कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को अपनी पार्टी के 16 विधायकों के अलावा जेएमएम के बचे 6 वोट के साथ राजद और भाकपा-माले के 2 विधायकों का भी प्रथम वरीयता का वोट प्राप्त करना होगा, तभी उनकी जीत सुनिश्चित होगी। लेकिन, मामला तभी फंसेगा, जब भीतरघात या क्रॉस वोटिंग होगी। कैसे जीतेंगे नाथवाणी? निर्दलीय परिमल नाथवाणी को भाजपा के 21 के साथ जदयू, आजसू पार्टी और लोजपा आर के एक-एक विधायकों का समर्थन मिल सकता है। इसके बाद भी प्रथम वरीयता के चार वोट की जरूरत उन्हें पड़ेगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि परिमल नाथवानी के जेएलकेएम के जयराम महतो का समर्थन मिल सकता है। इसके बाद भी उन्हें तीन वोट की जरूरत हो सकती है। ऐसी स्थिति में क्रॉस वोटिंग या सेकेंड प्रेफरेंस का वोट निर्णायक साबित हो सकता है।

anjali kumari जून 11, 2026 0
BJP leader Kailash Vijayvargiya speaks on Meenakshi Natarajan nomination controversy before Rajya Sabha polls.
कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान: “हमें कांग्रेस के लोगों ने ही दी जानकारी”, मीनाक्षी नटराजन नामांकन रद्द पर बढ़ा सियासी विवाद

  मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस बीच भाजपा नेता और राज्य सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। उन्होंने संकेत दिया कि नामांकन में कथित खामियों की जानकारी भाजपा को कांग्रेस के ही भीतर से मिली हो सकती है। “जानकारी हमें तेलंगाना से मिली”—कैलाश विजयवर्गीय कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नामांकन से जुड़ी अहम जानकारियां तेलंगाना से सामने आईं, जहां कांग्रेस की सरकार है। उन्होंने कहा, “हमें तेलंगाना से पेपर्स मिले। वहीं से जानकारी मिली कि नामांकन पत्र में कुछ त्रुटियां हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस के लोग ही यह जानकारी साझा कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति और आपसी मतभेद भी सामने आते हैं। कांग्रेस का पलटवार: लोकतंत्र पर हमला कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि नामांकन रद्द करना राजनीतिक दबाव का परिणाम है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। मीनाक्षी नटराजन का आरोप: “लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है” मीनाक्षी नटराजन ने भी इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारा, तभी से राजनीतिक दबाव बढ़ने लगा था। भाजपा का दावा: प्रक्रिया के तहत हुआ फैसला भाजपा का कहना है कि नामांकन रद्द होना पूरी तरह चुनावी प्रक्रिया और नियमों के अनुसार हुआ है। पार्टी नेताओं ने कहा कि दस्तावेजों में कथित त्रुटियों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई थी, जिसके बाद जांच में नामांकन रद्द किया गया। चुनाव आयोग पहुंचा विवाद इस मामले को लेकर कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग भी पहुंचा और फैसले पर आपत्ति जताई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया। 18 जून को वोटिंग मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है। उससे पहले यह विवाद राज्य की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Congress leader Meenakshi Natarajan reacts after Rajya Sabha nomination rejection amid political controversy.
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस का आरोप—‘सीट चोरी’; चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर हंगामा, सियासत गरमाई

  भोपाल/नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के बाद राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए “सीट चोरी” का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस ने फैसले को बताया लोकतंत्र पर हमला कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया। मंगलवार को कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचा और औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। पार्टी ने चेतावनी दी है कि वह इस मामले को अदालत में भी चुनौती देगी। सचिन पायलट ने उठाए गंभीर सवाल कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि यह बेहद दुर्लभ मामला है कि बिना स्पष्ट और ठोस आधार के किसी उम्मीदवार का नामांकन रद्द किया गया हो। उन्होंने दावा किया कि नटराजन के खिलाफ न कोई FIR है और न ही कोई आपराधिक चार्जशीट दाखिल है। पायलट ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। मीनाक्षी नटराजन का आरोप—‘वोट से आगे अब सीट की चोरी’ नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में उनका नामांकन खारिज किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले “वोट चोरी” की बात होती थी, लेकिन अब मामला “सीट चोरी” तक पहुंच गया है। नटराजन ने दावा किया कि उन्हें पर्याप्त सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। नामांकन रद्द करने का क्या है आधार? सूत्रों के अनुसार, भाजपा प्रत्याशी पक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई थी कि नटराजन ने अपने शपथपत्र में एक लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी थी। बताया गया कि तेलंगाना की एक अदालत में CrPC की धारा 223 के तहत एक मामला दर्ज है, जिसका उल्लेख नामांकन पत्र में नहीं किया गया। इसी आधार पर निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया। भाजपा ने फैसले को बताया सही मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “न्याय की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार हुई है और नियमों के तहत ही आपत्ति दर्ज की गई थी। कांग्रेस का पलटवार कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि नटराजन के खिलाफ न कोई एफआईआर है और न ही कोई आपराधिक मुकदमा लंबित है। तन्खा के अनुसार केवल CrPC की धारा 223 के तहत एक नोटिस जारी हुआ था, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। चुनाव आयोग में शिकायत, अदालत जाने की तैयारी कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने संकेत दिया है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तनाव मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल इस मामले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Congress and BJP leaders amid intense political contest before Madhya Pradesh Rajya Sabha elections.
राज्यसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में सियासी हलचल तेज, डिनर पॉलिटिक्स से बढ़ी कांग्रेस की चिंता

  मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। Bharatiya Janata Party (बीजेपी) द्वारा तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है, वहीं Indian National Congress (कांग्रेस) में क्रॉस वोटिंग और टूट के डर को लेकर हलचल तेज हो गई है। डिनर मीटिंग से कांग्रेस ने साधे विधायकों के सुर भोपाल में कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक के साथ डिनर का आयोजन किया गया, जिसकी अगुवाई नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने की। इस बैठक में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई और विधायकों की एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया गया। उमंग सिंघार ने कहा कि पार्टी को अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है और सभी मिलकर चुनावी रणनीति के तहत काम करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि कांग्रेस अपने विधायकों को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जा सकती है ताकि क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके। बीजेपी ने उतारा तीसरा उम्मीदवार, मुकाबला हुआ और दिलचस्प बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने राज्यसभा चुनाव के लिए तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट के नाम की घोषणा की है। इससे पहले पार्टी दो उम्मीदवारों के नाम पहले ही घोषित कर चुकी थी। कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया गया है, जिन्होंने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। पार्टी ने दावा किया है कि उनके पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। मध्य प्रदेश का सियासी गणित बना चर्चा का विषय मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं, जिनमें से वर्तमान में 228 विधायकों का प्रभावी वोट माना जा रहा है। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास प्रभावी रूप से 62 विधायक बचे हैं। राज्यसभा सीट जीतने के लिए लगभग 58 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में बीजेपी के पास दो सीटों पर आसान जीत का रास्ता दिख रहा है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ी बीजेपी द्वारा तीसरा उम्मीदवार उतारे जाने के बाद कांग्रेस की रणनीति पर दबाव बढ़ गया है। पार्टी को अपने सभी विधायकों को एकजुट रखना और क्रॉस वोटिंग से बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। बीना विधायक निर्मला सप्रे के रुख को लेकर भी अटकलें हैं कि वे बीजेपी के पक्ष में जा सकती हैं, जबकि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर रोक लगी हुई है। इससे कांग्रेस का गणित और कमजोर हुआ है। सियासी डिनर के बाद बढ़ी रणनीतिक गतिविधियां कांग्रेस ने अपने विधायकों के साथ डिनर और बैठक के जरिए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है, जबकि बीजेपी अपने संख्याबल के आधार पर तीसरी सीट पर भी रणनीति बना रही है। राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दल अब अपने-अपने विधायकों को साधने में जुट गए हैं और आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Jharkhand Resort Politics
झारखंड में अब रिसार्ट पालिटिक्स

रांची। झारखंड में 2 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव के लिए नामाकंन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा पर फिर से भरोसा जताया है। वहीं, बीजेपी की बात करें तो गौरव वल्लभ ने भले ही नामांकन पर्चा खरीदा है, लेकिन अभी तक बीजेपी ने नाम की घोषणा नहीं की है। उधर परिमल नाथवाणी भी निदर्लीय मैदान में उतरने को तैयार हैं। उन्होंने नामांकन पर्चा दाखिल भी कर दिया है।  2 सीटों के लिए 3 उम्मीदवारों के उतरने से चुनाव का माहौल रोचक हो गया है। हालांकि कांग्रेस ने देर रात जेएमएम प्रमुख और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर काफी हद तक विवाद को सुलझा लिया है। माना जा रहा है कि गठबंधन में शामिल कांग्रेस के उम्मीदवार को जेएमएम का समर्थन मिल सकता है। उधर बीजेपी ने अभी तक पत्ता नहीं खोला है। लेकिन, परिमल नाथवाणी के नामांकन में बीजेपी नेताओं ने प्रस्तावक बन कर इशारा दे दिया है कि बीजेपी उनके साथ है।  माना जा रहा है कि एनडीए के विधायक परिमल नाथवाणी को अपना समर्थन देने जा रहे हैं।  इसके बावजूद भी उन्हें 4 विधायक जुटाने होंगे, क्योंकि एनडीए के पास 24 विधायक ही ही हैं और जीत के लिए 28 विधायकों की जरूरत होगी। जेकेएलएम विधायक जयराम महतो का समर्थन उन्हें मिल सकता है, लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें 3 विधायक जुटाने होंगे। इसका मतलब हुआ कि क्रॉस वोटिंग का ही सहारा लेना होगा। अगर क्रॉस वोटिंग होती है तो कांग्रेस के हाथ से सीट छिटक सकती है। यही से एक बार फिर रिसॉर्ट पालिटिक्स देखने को मिल सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही अपने सारे विधायकों को रांची बुला लिया है और सभी को एकसाथ-एकजुट रहने का निर्देश दिया गया है। वहीं, बीजेपी जब नाथवाणी को समर्थन दे ही रही है, तो उसके विधायकों के छिटकने का सवाल ही नहीं है। ऐसे भी नाथवाणी ने सोमवार को बीजेपी विधायक नवीन जायसवाल के आवास पर पहुंच कर उनके साथ आगे की रणनीति तय की।  कांग्रेस और राजद के विधायकों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसलिए दोनों ही दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं। राज्य के मंत्री और राजद नेता संजय प्रसाद यादव ने साफ किया कि वे सभी लालू प्रसाद यादव के शिष्य हैं, इसलिए गद्दारी तो उनके खून में ही नहीं है। यह भी संभव है कि जल्द ही कांग्रेस के विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें भी कहीं एकसाथ  ही रखा जाये। क्योंकि, आज 8 जून है और चुनाव 18 जून को होना है। यानी, 10 अभी बाकी हैं और इस दौरान काफी कुछ देखने को मिल सकता है।

Unknown जून 9, 2026 0
Rahul Gandhi Hemant Soren
झारखंड में राज्यसभा सीटों को लेकर इंडिया ब्लॉक में बढ़ा विवाद

रांची। झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले इंडिया ब्लॉक के भीतर शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर सहमति नहीं बन पाई है, जिससे गठबंधन में खींचतान तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने जहां अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा का कहना है कि यह फैसला बिना आपसी सहमति के लिया गया है, जिससे पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ी है।  JMM दोनों राज्यसभा सीटों पर उतार सकती है प्रत्याशी वहीं JMM ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोनों राज्यसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार सकती है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो सकते  हैं।  राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास मजबूत बल संख्या है, जिससे एक सीट पर उसकी जीत लगभग पक्की मानी जा रही है। लेकिन दूसरी सीट को लेकर कांग्रेस और JMM के बीच सीधा टकराव देखा जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बातचीत और समाधान की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है और टकराव के संकेत बने हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि जल्द सहमति नहीं बनी तो इसका असर राज्यसभा चुनाव परिणाम और गठबंधन की एकजुटता पर भी पड़ सकता है। इस विवाद ने झारखंड की सियासत में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलों को भी जन्म दे दिया है।

Unknown जून 7, 2026 0
Parimal Nathwani Vijay Sai Reddy
नथवाणी और विजय साई रेड्डी ने खरीदा नामांकन पत्र

रांची। झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नामांकन प्रक्रिया के बीच अब तक छह नेताओं ने नामांकन पत्र खरीदे हैं, जिनमें पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी और आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ नेता वी. विजय साईं रेड्डी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। इनके अलावा रवि कुमार यादव, बैजनाथ राम, गौरव वल्लभ और प्रणव झा ने भी नामांकन पत्र लिया है। अधिकृत उम्मीदवारों पर सबकी नजर राजनीतिक दलों ने अपने अधिकृत उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा पर भरोसा जताया है। दोनों उम्मीदवारों को महागठबंधन का समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। परिमल नाथवाणी की वापसी की चर्चा राज्यसभा चुनाव में सबसे दिलचस्प नाम परिमल नाथवाणी का है। वे वर्ष 2008 और 2014 में झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और राज्य की राजनीति से उनका पुराना संबंध रहा है। उनके नामांकन पत्र लेने के बाद राजनीतिक गलियारों में संभावित समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विजय साईं रेड्डी की एंट्री ने बढ़ाए सवाल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के पूर्व सांसद वी. विजय साईं रेड्डी का नाम सामने आने से भी राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बढ़ी है। चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे रेड्डी आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। वे राज्यसभा में वाईएसआरसीपी संसदीय दल के नेता भी रह चुके हैं। हालांकि हाल ही में उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा की थी। समर्थन को लेकर बना सस्पेंस राज्यसभा चुनाव में नामांकन दाखिल करने के लिए उम्मीदवार को कम से कम नौ विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि विजय साईं रेड्डी और अन्य स्वतंत्र दावेदारों को किस राजनीतिक समूह का समर्थन मिल सकता है। फिलहाल इस पर कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है, लेकिन नामांकन पत्रों की खरीद ने चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है।

Unknown जून 6, 2026 0
Parimal Nathwani
परिमल नाथवाणी रांची में!

रांची। पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी के रांची में होने की सूचना है। सूचना के मुताबिक विशेष विमान से परिमल नाथवाणी रांची आये हैं। हालांकि अब तक इसकी किसी ने पुष्टि नहीं की है। राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच उनके आने की सूचना ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। चर्चाओं के मुताबिक नाथवाणी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिल सकते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सचिवालय से भी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। नाथवाणी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाये जाने की चर्चा है। बता दें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, जबकि दूसरे देर शाम तक होने की संभावना है।

Unknown जून 6, 2026 0
Mallikarjun Kharge files Rajya Sabha nomination in Bengaluru with Rahul Gandhi and Congress leaders
राज्यसभा चुनाव: मल्लिकार्जुन खरगे ने किया नामांकन, कांग्रेस की एकजुटता पर दिया जोर

  बेंगलुरु: आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 18 जून को होने वाले इस चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के साथ पवन खेड़ा और मंसूर अली खान शामिल हैं। राहुल गांधी की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, रणदीप सिंह सुरजेवाला और के.सी. वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। खरगे ने कर्नाटक विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन विधानसभा सचिव एम.के. विशालाक्षी को सौंपा। ‘कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत पक्की करने के लिए एकजुट रहें’ नामांकन के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों और नेताओं ने एकमत से उनके नाम का समर्थन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में सभी कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी पूरी तरह एकजुट रहेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव 18 जून को होना है और कांग्रेस संगठन को मजबूत एकता के साथ मैदान में उतरना होगा। 25 जून को समाप्त हो रहा है खरगे का कार्यकाल मल्लिकार्जुन खरगे वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। इसी कारण पार्टी ने उन्हें एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने घोषित किए तीन उम्मीदवार कांग्रेस ने कर्नाटक से राज्यसभा के लिए तीन उम्मीदवार उतारे हैं। खरगे के अलावा पार्टी ने पवन खेड़ा, जो कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख हैं, और मंसूर अली खान, जो राष्ट्रीय सचिव हैं, को भी उम्मीदवार बनाया है। नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून तय की गई है। पवन खेड़ा और मंसूर अली खान अपने नामांकन बाद में दाखिल करेंगे।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Jharkhand Rajyasabha Election
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार ऐलान से नाराज झामुमो, दोनों सीटों पर ठोका दावा

रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले महागठबंधन में मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। कांग्रेस द्वारा बोकारो निवासी प्रणव झा को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की मंशा जाहिर की है। इससे गठबंधन के भीतर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और आने वाले दिनों में सियासी समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस के फैसले पर उठे सवाल कांग्रेस ने गुरुवार देर रात प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किया। इसके बाद पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह सवाल उठने लगे। राजनीतिक हलकों में प्रणव झा को "पैराशूट उम्मीदवार" बताया जा रहा है। उनका जन्म भले ही झारखंड में हुआ हो, लेकिन राज्य की सक्रिय राजनीति में उनकी भूमिका सीमित रही है। बताया जा रहा है कि उनके नाम पर अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान ने लिया, जिससे प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं में नाराजगी है। फुरकान अंसारी ने जताई नाराजगी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गोड्डा के पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संकेत दिया कि वर्षों तक पार्टी के लिए काम करने के बावजूद उनके नाम पर विचार नहीं किया गया। उनकी प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया कि उम्मीदवार चयन को लेकर कांग्रेस के भीतर भी असंतोष मौजूद है। झामुमो की बैठक में दोनों सीटों पर दावा शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर झामुमो की अहम बैठक हुई, जिसमें पार्टी के सांसद, विधायक, मंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक के बाद नेताओं ने स्पष्ट किया कि झामुमो राज्यसभा की दोनों सीटों पर अपना दावा पेश करेगा। नेताओं का कहना है कि राज्य में झामुमो सबसे बड़ा दल है, इसलिए दोनों सीटों पर उसका स्वाभाविक अधिकार बनता है। हफीजुल हसन और बैद्यनाथ राम के बयान मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि पार्टी का रुख पहले से स्पष्ट है और दोनों सीटों पर झामुमो उम्मीदवार उतारना चाहता है। वहीं विधायक बैद्यनाथ राम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति के बिना उम्मीदवार घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों ने दोनों सीटों पर झामुमो उम्मीदवार उतारने की इच्छा जताई है। हेमंत सोरेन के फैसले पर टिकी निगाहें राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस और झामुमो अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं तो महागठबंधन की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। फिलहाल अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अधिकृत किया गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गठबंधन आपसी सहमति से समाधान निकालता है या राज्यसभा चुनाव में टकराव की स्थिति बनती है।

Unknown जून 6, 2026 0
BJP leaders announce Rajya Sabha candidates for upcoming elections across multiple Indian states.
राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने की उम्मीदवारों की सूची जारी, कई नए चेहरों को मिला मौका

  भारतीय जनता पार्टी ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने पांच राज्यों में होने वाले चुनावों के लिए कई वरिष्ठ और नए चेहरों को मैदान में उतारा है। मध्य प्रदेश से तरुण चुघ और राजस्थान से सतीश पूनिया उम्मीदवार बीजेपी ने मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय महासचिव Tarun Chugh और राजस्थान से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Satish Poonia को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की इस सूची को संगठनात्मक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई मौजूदा सांसदों को नहीं मिला टिकट इस बार की सूची में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का नाम शामिल नहीं किया गया है। दोनों वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। गुजरात से चार उम्मीदवारों की घोषणा बीजेपी ने गुजरात से चार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इनमें राजुभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र मेघजीभाई कंजरिया के नाम शामिल हैं। ओडिशा उपचुनाव में देबाशीष सामंतराय पर भरोसा ओडिशा के राज्यसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी ने Debashish Samantaray को उम्मीदवार बनाया है। वह हाल ही में बीजू जनता दल छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। मध्य प्रदेश और राजस्थान से अन्य नाम भी शामिल मध्य प्रदेश से रजनीश अग्रवाल और राजस्थान से अलका गुर्जर को भी उम्मीदवार बनाया गया है। राजस्थान में उम्मीदवार बनाए जाने पर सतीश पूनिया ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया और इसे कार्यकर्ताओं का सम्मान बताया। पूर्वोत्तर राज्यों में भी उम्मीदवार घोषित बीजेपी ने मणिपुर से ए. शारदा देवी और अरुणाचल प्रदेश से ताई तागाक को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। 18 जून को होगा मतदान 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 18 जून को होगा। इसी दिन ओडिशा में राज्यसभा उपचुनाव भी कराया जाएगा।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0