Election News

Congress leaders announcing West Bengal Election 2026 candidate list at AICC meeting press conference
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: कांग्रेस ने जारी की 284 उम्मीदवारों की पहली सूची, बहरमपुर से अधीर रंजन, भवानीपुर में ममता बनर्जी को चुनौती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करते हुए कुल 284 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। यह सूची नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की पार्लियामेंटरी बोर्ड की दो दिवसीय बैठक के बाद जारी की गई। इस सूची में पार्टी ने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की रणनीति अपनाई है, जिससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों-उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक-राजनीतिक समीकरण साधे जा सकें। प्रमुख सीटों पर दिग्गजों की तैनाती कांग्रेस की सूची में सबसे चर्चित नाम Adhir Ranjan Chowdhury का है, जिन्हें उनके गढ़ बहरमपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। अधीर रंजन चौधरी लंबे समय से इस क्षेत्र में पार्टी का मजबूत चेहरा रहे हैं और उन्होंने पहले ही यहां से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। भवानीपुर में त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारी भवानीपुर सीट इस बार सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल हो गई है। यहां मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदीप प्रसाद को मैदान में उतारा है। इस सीट पर नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari की मौजूदगी से मुकाबला और भी दिलचस्प होने की संभावना है। अन्य महत्वपूर्ण सीटों पर उम्मीदवार नंदीग्राम से शेख जरियातुल हुसैन को टिकट दिया गया है खड़गपुर सदर में भाजपा नेता Dilip Ghosh के खिलाफ डॉ. पापिया चक्रवर्ती मैदान में हैं संदेशखाली (ST) सीट से युधिष्ठिर भुइयां को उम्मीदवार बनाया गया है डायमंड हार्बर से गौतम भट्टाचार्य, सिंगूर से बरुण कुमार मलिक और रायगंज से मोहित सेनगुप्ता को मौका मिला है क्षेत्रीय समीकरणों पर खास ध्यान कांग्रेस ने अपनी रणनीति में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे पारंपरिक गढ़ों में मुस्लिम उम्मीदवारों और पुराने कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताया है। वहीं उत्तर बंगाल की चाय बागान सीटों-जैसे कालचीनी और मदारीहाट-पर जनजातीय चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। सिलीगुड़ी से आलोक धारा और दार्जिलिंग से माधव राय को टिकट देकर क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह सूची राज्य में पार्टी की मौजूदगी को मजबूत करने और प्रमुख सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Uttar Pradesh assembly building with discussion on increasing seats from 403 to 605 amid delimitation talks
UP में बढ़ सकती है विधानसभा सीटें! 403 से बढ़कर 605 होने की चर्चा, जानिए पूरा मामला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मौजूदा 403 सीटों के मुकाबले भविष्य में यह संख्या बढ़कर 605 तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव में लागू नहीं होगा। क्यों बढ़ सकती हैं सीटें? यह चर्चा संभावित परिसीमन (Delimitation) और नारी वंदन अधिनियम के तहत प्रस्तावित बदलावों के कारण शुरू हुई है। सूत्रों के मुताबिक: लोकसभा और विधानसभा सीटों में करीब 50% तक बढ़ोतरी हो सकती है यूपी में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं विधानसभा सीटें 403 से बढ़कर 605 होने का अनुमान 2027 चुनाव पर क्या असर? 2027 के विधानसभा चुनाव पुरानी 403 सीटों पर ही होंगे सीटों में बढ़ोतरी परिसीमन के बाद लागू होगी संभावना है कि 2032 के बाद नए ढांचे पर चुनाव हो आबादी के हिसाब से क्यों जरूरी? यूपी में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण: एक विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या काफी बढ़ गई है आंकड़ों पर नजर: 1952: 347 सीटें, प्रति सीट ~1.82 लाख आबादी 1973: 425 सीटें, प्रति सीट ~2.8 लाख वर्तमान (403 सीट): प्रति सीट ~4.95 लाख आबादी अगर 605 सीटें होती हैं तो: प्रति सीट आबादी घटकर करीब 3.30 लाख रह जाएगी जिलों में क्या होगा बदलाव? अभी 75 जिलों में औसतन 3-5 विधानसभा सीटें हैं बढ़ोतरी के बाद यह संख्या 6-8 सीट प्रति जिला हो सकती है बड़े और छोटे विधानसभा क्षेत्र सबसे बड़े क्षेत्र: साहिबाबाद, लोनी, मुरादनगर (7-12 लाख मतदाता) छोटे क्षेत्र: महोबा, सीसामऊ

surbhi मार्च 25, 2026 0
DMK alliance leaders finalize Tamil Nadu election seat sharing ahead of April 23 assembly polls
Tamil Nadu Election: डीएमके का सीट बंटवारा लगभग पूरा, आज VCK के साथ होगा फाइनल समझौता

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ DMK (द्रमुक) ने अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। अब सिर्फ VCK (विदुथलाई चिरुथैगल काची) के साथ समझौता बाकी है, जिसे आज फाइनल किया जा सकता है। राज्य के परिवहन और बिजली मंत्री एस.एस. शिवशंकर ने बताया कि DMK और VCK के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। किसे कितनी सीटें मिलीं? DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में सीटों का बंटवारा इस तरह हुआ है- कांग्रेस: 28 सीटें भाकपा (CPI): 5 सीटें माकपा (CPM): 5 सीटें एमडीएमके: 4 सीटें IUML, MMK, KMDK: 2-2 सीटें कई दौर की बातचीत के बाद वाम दलों के साथ भी सहमति बन गई है। 23 अप्रैल को होंगे चुनाव तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। DMK ने शुरू किया प्रचार अभियान DMK ने पहले ही अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन लगातार रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। मंत्री शिवशंकर के मुताबिक, पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतर चुकी है और गठबंधन भी मजबूत स्थिति में है। क्या है राजनीतिक मायने? सीट बंटवारे का लगभग पूरा होना यह संकेत देता है कि DMK गठबंधन चुनाव से पहले एकजुट दिखना चाहता है। VCK के साथ समझौता होते ही गठबंधन पूरी तरह तैयार हो जाएगा।    

surbhi मार्च 24, 2026 0
Asaduddin Owaisi and Humayun Kabir announcing alliance for West Bengal elections 2026 at public event
बंगाल चुनाव 2026: हुमायूं कबीर और ओवैसी का गठबंधन, तीसरे मोर्चे की राजनीति को नई दिशा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया समीकरण उभरता दिख रहा है। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित नेता हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी के साथ हाथ मिलाकर आगामी विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बड़ा राजनीतिक गठबंधन किया है। यह गठबंधन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के बीच हुआ है, जिसका उद्देश्य राज्य में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ तीसरा विकल्प खड़ा करना है। हैदराबाद से गठबंधन का ऐलान इस राजनीतिक गठबंधन की घोषणा हैदराबाद में एक सभा के दौरान ओवैसी ने की। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन बंगाल में गरीबों, वंचितों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। ओवैसी ने इसे “अन्याय और अभाव के खिलाफ संयुक्त लड़ाई” बताया। लंबे समय से सहयोगी की तलाश हुमायूं कबीर ने पिछले वर्ष 22 दिसंबर को अपनी पार्टी का गठन किया था और तब से ही वे एक मजबूत सहयोगी की तलाश में थे। उन्होंने वाम दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों से भी संपर्क साधा, लेकिन बात नहीं बन पाई। आखिरकार AIMIM के साथ यह गठबंधन आकार ले पाया। सीट शेयरिंग पर नजर गठबंधन के बाद अब सबसे अहम सवाल सीट बंटवारे को लेकर है। हुमायूं कबीर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उनकी पार्टी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि लगभग 150 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम भी घोषित किए जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि AIMIM और आम जनता उन्नयन पार्टी के बीच सीटों को लेकर बातचीत जारी है और जल्द ही अंतिम फार्मूला सामने आ सकता है। किन क्षेत्रों पर खास फोकस AIMIM ने पिछले कुछ वर्षों में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है। ऐसे में यह गठबंधन इन क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकता है। क्या बदलेगा चुनावी गणित? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन बंगाल में तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव चुनाव परिणामों में ही स्पष्ट होगा।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Rajya Sabha election voting underway in Bihar, Odisha and Haryana amid cross-voting concerns and tight contests.
राज्यसभा चुनाव: 11 सीटों पर आज मतदान, बिहार-ओडिशा-हरियाणा में कड़ा मुकाबला, क्रॉस-वोटिंग पर नजर

  देश के तीन राज्यों-बिहार, ओडिशा और हरियाणा-में आज राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। वोटिंग सुबह 11 बजे से शुरू होगी और मतगणना के बाद नतीजे भी आज ही शाम तक घोषित किए जाने की संभावना है। इस बार कुल 37 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है, जिनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इन निर्विरोध चुने गए नेताओं में शरद पवार, रामदास अठावले, अभिषेक मनु सिंघवी, थंबी दुरई, विनोद तावड़े और बाबुल सुप्रियो जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं। हालांकि बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।   बिहार: पांचवीं सीट पर टिकी सबकी नजर बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान हो रहा है। सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों-नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन और शिवम कुमार-की जीत लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन असली मुकाबला पांचवीं सीट पर है, जहां NDA के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा और महागठबंधन समर्थित एडी सिंह आमने-सामने हैं। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत है। माना जा रहा है कि AIMIM के पांच और BSP के एक विधायक का समर्थन मिलने से मुकाबला कड़ा हो सकता है। वहीं NDA को उम्मीद है कि महागठबंधन के कुछ विधायक क्रॉस-वोटिंग कर सकते हैं। कांग्रेस और बीएसपी के कुछ विधायकों पर भी सभी दलों की नजर बनी हुई है।   ओडिशा: भाजपा और बीजद के बीच संतुलन ओडिशा की चार सीटों पर भी दिलचस्प राजनीतिक समीकरण बन गए हैं। अनुमान है कि भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल दो-दो सीटें जीत सकती हैं। ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी उसे प्राप्त है, जिससे दो सीटें लगभग उसके खाते में तय मानी जा रही हैं। हालांकि तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए भाजपा को आठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। वहीं बीजद के पास 48 विधायक हैं, जिससे उसकी एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है। अगर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का समर्थन मिल जाता है तो पार्टी दूसरी सीट भी जीत सकती है। चौथी सीट पर भाजपा समर्थित दिलीप रे और बीजद के उम्मीदवार के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।   हरियाणा: निर्दलीय प्रत्याशी से बढ़ा रोमांच हरियाणा की दो सीटों पर चुनाव हो रहा है। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 48 विधायक हैं, जबकि Indian National Lok Dal के दो और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन उसे प्राप्त है। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस के 37 विधायक हैं और उसके उम्मीदवार करमवीर बोध भी जीत की स्थिति में नजर आ रहे हैं। हालांकि निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। उन्हें जीतने के लिए अतिरिक्त नौ वोटों की जरूरत होगी, जो बिना क्रॉस-वोटिंग के संभव नहीं माने जा रहे। इसी आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने कई विधायकों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है।   शाम तक साफ होगी तस्वीर तीनों राज्यों में मतदान पूरा होने के बाद आज शाम तक परिणाम सामने आ जाएंगे। कई सीटों पर जीत-हार का फैसला क्रॉस-वोटिंग पर निर्भर माना जा रहा है, इसलिए कुछ जगहों पर चौंकाने वाले नतीजों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मार्च 31, 2026 0