भारत ऊर्जा सुरक्षा

Oil and cargo ships safely transit the Strait of Hormuz carrying supplies bound for India.
अमेरिका-ईरान समझौते से भारत को राहत, तेल और LPG लेकर 11 जहाजों ने सुरक्षित पार किया होर्मुज जलडमरूमध्य

  अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत की ओर आने वाले तेल, एलपीजी और अन्य जरूरी सामान लेकर चल रहे 11 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर चुके हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। 11 जहाजों ने सुरक्षित पार किया रणनीतिक समुद्री मार्ग रणधीर जायसवाल ने बताया कि 17 जून को समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने के बाद से भारत आने वाले 11 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय ध्वज वाले 10 जहाज अब भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं, जबकि हाल ही में दो अन्य जहाज भी इस क्षेत्र में पहुंचे हैं। तीन भारतीय तेल टैंकरों में लाखों टन कच्चा तेल विदेश मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षित रूप से गुजरने वाले जहाजों में भारतीय ध्वज वाले तीन बड़े कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक जहाज में 2.85 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है। इसके अलावा एक विदेशी ध्वज वाला एलपीजी वाहक और एक विदेशी ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर भी इस काफिले का हिस्सा रहे। खाद लेकर आ रहे छह भारी मालवाहक पोत जायसवाल ने बताया कि छह विदेशी ध्वज वाले भारी मालवाहक जहाज भी सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इन जहाजों में खाद (फर्टिलाइजर) लदा हुआ है, जो भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बाकी भारतीय जहाजों के भी जल्द पार होने की उम्मीद विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय ध्वज वाले शेष जहाज भी जल्द ही सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लेंगे। सरकार लगातार क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भारतीय जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के संपर्क में है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपने कच्चे तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से प्राप्त करता है। ऐसे में इस मार्ग पर जहाजों की निर्बाध आवाजाही भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
Indian-flagged LNG vessel Disha carrying 62,370 tonnes of LNG safely crosses the Strait of Hormuz towards Dahej port.
62370 टन LNG लेकर भारत आ रहा जहाज ‘दिशा’, तीन महीने बाद होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित पार

  नई दिल्ली: भारतीय ध्वज वाला LNG जहाज ‘दिशा’ 62,370 टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। यह जहाज तीन महीने से अधिक समय बाद युद्ध प्रभावित इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र से सुरक्षित निकलने वाला पहला बड़ा जहाज माना जा रहा है। जहाज के सुरक्षित पार होने को भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। दहेज बंदरगाह पर 18 जून को पहुंचने की संभावना पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि जहाज ‘दिशा’ 62,370 टन LNG लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है और इसके 18 जून के आसपास दहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि यह जहाज भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड (SCI) के नेतृत्व वाले समूह द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है। तीन महीने बाद पहली सुरक्षित निकासी जानकारी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव के बीच यह पहला बड़ा जहाज है जो इस मार्ग से सुरक्षित बाहर निकल पाया है। इससे पहले इस क्षेत्र में सुरक्षा जोखिमों के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हो रहा था। नाविकों की सुरक्षा पर लगातार निगरानी नौवहन महानिदेशालय ने बताया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों और पोत परिवहन कंपनियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, समुद्री मार्गों पर स्थिति की निगरानी के लिए एक नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय है। हजारों कॉल और ईमेल का निपटारा अधिकारियों ने बताया कि नियंत्रण कक्ष में पिछले 96 घंटों के दौरान 12,737 कॉल और 28,299 से अधिक ईमेल का निपटारा किया गया है। इस दौरान नाविकों और उनके परिवारों से 406 कॉल और 784 ईमेल प्राप्त हुए। 3,500 से अधिक नाविकों की सुरक्षित वापसी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 3,587 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा चुकी है। इसमें पिछले 96 घंटों में 50 नाविकों की वापसी भी शामिल है। बंदरगाहों पर परिचालन सामान्य मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि देशभर में बंदरगाहों का संचालन सामान्य रूप से जारी है और कहीं भी जाम या व्यवधान की स्थिति की सूचना नहीं है। ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम विशेषज्ञों का मानना है कि LNG जहाज ‘दिशा’ की सुरक्षित वापसी भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कठिन भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद समुद्री व्यापारिक गतिविधियां धीरे-धीरे स्थिर हो रही हैं।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Oil tanker at sea symbolizing US sanctions on Russian and Iranian crude affecting global energy markets
अमेरिका का बड़ा फैसला: रूस-ईरान तेल पर फिर सख्ती, भारत के लिए बढ़ी चुनौती

  वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने पर दी गई अस्थायी छूट को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के तेल पर पाबंदियां फिर से कड़ी हो जाएंगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल और भारत जैसे बड़े आयातकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जनरल लाइसेंस खत्म, सख्त हुए नियम अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि 11 मार्च से पहले समुद्र में मौजूद तेल को निकालने के लिए दिया गया जनरल लाइसेंस अब समाप्त हो चुका है। इसका मतलब है कि अब: रूस और ईरान के तेल पर सख्त प्रतिबंध लागू होंगे इन देशों से तेल खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी सैंक्शंस लग सकते हैं बैंकों और कंपनियों पर भी कार्रवाई का खतरा बढ़ेगा ट्रंप प्रशासन की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ “मैक्सिमम प्रेशर” रणनीति अपनाई है। ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश तेल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई कई कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध अमेरिका का उद्देश्य ईरान की आय के प्रमुख स्रोतों को सीमित करना है। भारत पर संभावित असर भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। इस फैसले का असर: सस्ते तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है वैकल्पिक सप्लायर की तलाश करनी पड़ सकती है हालांकि सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त स्टॉक है और सप्लाई के कई विकल्प मौजूद हैं। ईरान पर बढ़ी आर्थिक मार रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसी OFAC ने ईरान के तेल तस्करी नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसमें कई कंपनियां, जहाज और व्यक्तियों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका का मकसद है कि ईरान के अवैध तेल कारोबार को पूरी तरह खत्म किया जाए। ओमान में वार्ता पर टिकी नजर इस बीच ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत होने वाली है। समझौते की उम्मीद में तेल कीमतों में हल्की नरमी असफल वार्ता की स्थिति में कीमतों में तेजी संभव व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वह विवाद का समाधान चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर आर्थिक दबाव और बढ़ाया जाएगा। आगे क्या? अमेरिका के इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ना तय माना जा रहा है। अगर प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो: तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है भारत जैसे देशों की आयात लागत बढ़ सकती है भू-राजनीतिक तनाव और गहरा सकता है दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता और उसके नतीजों पर टिकी है, जो आगे के हालात तय करेंगे।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0