भारतीय जहाज

Oil and cargo ships safely transit the Strait of Hormuz carrying supplies bound for India.
अमेरिका-ईरान समझौते से भारत को राहत, तेल और LPG लेकर 11 जहाजों ने सुरक्षित पार किया होर्मुज जलडमरूमध्य

  अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत की ओर आने वाले तेल, एलपीजी और अन्य जरूरी सामान लेकर चल रहे 11 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर चुके हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। 11 जहाजों ने सुरक्षित पार किया रणनीतिक समुद्री मार्ग रणधीर जायसवाल ने बताया कि 17 जून को समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने के बाद से भारत आने वाले 11 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय ध्वज वाले 10 जहाज अब भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं, जबकि हाल ही में दो अन्य जहाज भी इस क्षेत्र में पहुंचे हैं। तीन भारतीय तेल टैंकरों में लाखों टन कच्चा तेल विदेश मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षित रूप से गुजरने वाले जहाजों में भारतीय ध्वज वाले तीन बड़े कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक जहाज में 2.85 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है। इसके अलावा एक विदेशी ध्वज वाला एलपीजी वाहक और एक विदेशी ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर भी इस काफिले का हिस्सा रहे। खाद लेकर आ रहे छह भारी मालवाहक पोत जायसवाल ने बताया कि छह विदेशी ध्वज वाले भारी मालवाहक जहाज भी सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इन जहाजों में खाद (फर्टिलाइजर) लदा हुआ है, जो भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बाकी भारतीय जहाजों के भी जल्द पार होने की उम्मीद विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय ध्वज वाले शेष जहाज भी जल्द ही सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लेंगे। सरकार लगातार क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भारतीय जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के संपर्क में है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपने कच्चे तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से प्राप्त करता है। ऐसे में इस मार्ग पर जहाजों की निर्बाध आवाजाही भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
Donald Trump speaks on Iran allegations as tensions rise over Indian ships in Strait of Hormuz
ईरान ने भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला किया? ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने आरोपों को बताया झूठ

ट्रंप ने ईरान पर लगाया भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की, जिसे विफल कर दिया गया। उन्होंने इस घटना को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया और ईरान की कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि भारतीय जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए चिंताजनक है। ओमान तट के पास हमलों के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब इस सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय क्रू वाले कई जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें सबसे चर्चित मामला एमटी सेटेबेलो जहाज का रहा, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं को लेकर भारत पहले ही चिंता जता चुका है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। ईरान ने ट्रंप के आरोपों को किया खारिज ट्रंप के आरोपों के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत में ईरानी दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। ईरान का कहना है कि यह आरोप लोगों का ध्यान उन घटनाओं से हटाने की कोशिश है, जिनमें हाल के दिनों में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान भारतीय जहाज प्रभावित हुए और भारतीय नागरिकों की जान गई। तेहरान ने कहा कि भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंध हैं और भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप तथ्यहीन है। प्रस्तावित शांति समझौते पर भी बढ़ा विवाद इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से सामने आया समझौते का कथित मसौदा वास्तविक सहमति से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा प्रस्तुत जानकारी सच्चाई से दूर है और वार्ता में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व से जल्द स्पष्ट रुख अपनाने की अपील भी की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने दी सफाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी समझौते को लेकर फैल रही अफवाहों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को कोई नकद भुगतान नहीं किया जा रहा है और न ही सिर्फ समझौते पर हस्ताक्षर करने के बदले आर्थिक सहायता दी जाएगी। उनके अनुसार, किसी भी आर्थिक राहत को ईरान द्वारा तय शर्तों के पालन से जोड़ा गया है। ईरान बोला- समझौता पहले से ज्यादा करीब वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पहले की तुलना में कहीं ज्यादा करीब पहुंच चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत के लिए क्यों अहम है यह पूरा घटनाक्रम? होर्मुज जलडमरूमध्य Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आने वाले तेल और गैस आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव, जहाजों पर हमले और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक खींचतान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर सीधा असर डाल सकती है। इसलिए नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Indian cargo vessel Haji Ali attacked near Oman coast amid rising tensions around the Strait of Hormuz.
होर्मुज स्ट्रेट के पास भारतीय जहाज ‘हाजी अली’ पर हमला, भारत ने कहा- व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना अस्वीकार्य

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले व्यावसायिक जहाज ‘हाजी अली’ पर हमला हुआ है। भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अस्वीकार्य” बताया है। Ministry of External Affairs ने गुरुवार को कहा कि भारतीय जहाज पर हमला व्यावसायिक नौवहन और आम नाविकों की सुरक्षा के खिलाफ गंभीर घटना है। ओमान के जलक्षेत्र में हुआ हमला जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Mukesh Mangal के मुताबिक, ‘हाजी अली’ नाम का यह पारंपरिक लकड़ी का पाल वाला भारतीय जहाज सोमालिया से Sharjah जा रहा था। बताया गया कि 13 मई 2026 की सुबह ओमान के जलक्षेत्र में जहाज पर हमला हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई और बाद में वह समुद्र में डूब गया। सभी 14 चालक दल सदस्य सुरक्षित राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल सदस्यों को Oman Coast Guard ने सुरक्षित बचा लिया। सभी लोगों को ओमान के दिब्बा बंदरगाह पहुंचाया गया है और उनकी हालत सुरक्षित बताई जा रही है। भारत ने जताया कड़ा विरोध विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि व्यावसायिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को लगातार निशाना बनाया जाना पूरी तरह गलत है। भारत ने कहा कि समुद्री व्यापार, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य में बाधा डालने वाली किसी भी गतिविधि से बचा जाना चाहिए। हमलावरों की पहचान नहीं फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि जहाज पर हमला किसने किया। घटना की जांच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज स्ट्रेट Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता माना जाता है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Indian LPG carrier Green Asha safely crossing Strait of Hormuz amid rising Iran-Israel tensions
होर्मुज संकट के बीच राहत: LPG जहाज ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित पार, अब ‘जग विक्रम’ का इंतजार

ईरान-इजरायल तनाव के बीच खतरनाक बने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी लेकर खाड़ी में फंसा भारतीय जहाज ‘ग्रीन आशा’ सफलतापूर्वक इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर चुका है और अब भारतीय नौसेना की निगरानी में सुरक्षित भारत की ओर लौट रहा है। ‘ग्रीन सान्वी’ के बाद ‘ग्रीन आशा’ ने पार किया रास्ता डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 अप्रैल को एलपीजी कैरियर ‘ग्रीन सान्वी’ के सुरक्षित निकलने के बाद रविवार को ‘ग्रीन आशा’ ने भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया। इसके साथ ही इस खतरनाक क्षेत्र में अब केवल एक भारतीय जहाज ‘जग विक्रम’ बचा है, जिसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार किया जा रहा है। बताया गया है कि ‘जग विक्रम’ भारतीय नौसेना से आगे के निर्देशों का इंतजार कर रहा है, ताकि वह सुरक्षित तरीके से इस क्षेत्र से बाहर निकल सके। 28 फरवरी के बाद बढ़ा खतरा गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद से होर्मुज स्ट्रेट बेहद संवेदनशील हो गया था। इस दौरान कई तेल और गैस से भरे जहाज इस इलाके में फंस गए थे। कुछ जहाजों पर हमले भी हुए, जिससे यह मार्ग लगभग बंद हो गया था। हालांकि, अब राजनयिक प्रयासों और सुरक्षा इंतजामों के चलते धीरे-धीरे जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो रही है। कब पहुंचेगा ‘ग्रीन सान्वी’? करीब 46,655 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर लौट रहा ‘ग्रीन सान्वी’ 7 अप्रैल को गुजरात के भरूच जिले के दहेज बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, BW TYR नामक एलपीजी कैरियर फिलहाल मुंबई के बाहरी बंदरगाह पर ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर के जरिए अपना माल उतार रहा है। एक अन्य जहाज BW ELM को चेन्नई के एन्नोर पोर्ट की ओर मोड़ा गया है। पहले भी पहुंचे कई जहाज पिछले सप्ताह ‘जग वसंत’ करीब 47,612 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के कांडला पहुंचा, जबकि ‘पाइन गैस’ ने न्यू मैंगलोर में 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की। अब भी खाड़ी में मौजूद हैं कई भारतीय जहाज शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल: 16 भारतीय जहाज फारसी खाड़ी में 4 जहाज ओमान की खाड़ी में 1 जहाज अदन की खाड़ी में 2 जहाज लाल सागर में मौजूद हैं इनमें से 5 जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। 20,000 भारतीय नाविकों की मौजूदगी रिपोर्ट के अनुसार, पूरे खाड़ी क्षेत्र में करीब 20,000 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इनमें: 528 नाविक भारतीय झंडे वाले जहाजों पर 433 फारसी खाड़ी में 95 ओमान की खाड़ी में तैनात हैं 5 अप्रैल तक विभिन्न शिपिंग कंपनियों ने 1,479 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। नौसेना की निगरानी में ऑपरेशन भारतीय नौसेना लगातार इस पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए है और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रही है। ‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित पार होना भारत के लिए बड़ी राहत है, जबकि अब सभी की नजरें ‘जग विक्रम’ की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0