गश्त के दौरान हुआ हादसा श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास बारूदी सुरंग (लैंडमाइन) में विस्फोट होने से भारतीय सेना के दो जवान घायल हो गए। यह हादसा कमालकोट सब-सेक्टर स्थित अपर गढ़ फॉरवर्ड पोस्ट के पास गश्त के दौरान हुआ। दोनों जवानों को तत्काल सुरक्षित निकालकर हेलीकॉप्टर से श्रीनगर के सेना के बेस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों की हालत स्थिर है। बारिश के बीच हादसे की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह विस्फोट संभवतः एक पुरानी लैंडमाइन के सक्रिय होने से हुआ। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान भारी बारिश और मिट्टी के कटाव के कारण LoC के आसपास बिछाई गई बारूदी सुरंगें अपनी जगह से खिसक जाती हैं, जिससे ऐसे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। घटना के सही कारणों की जांच की जा रही है। इलाके में सर्च और सैनिटाइजेशन अभियान घटना के तुरंत बाद सेना ने पूरे इलाके में सर्च और सैनिटाइजेशन ऑपरेशन शुरू कर दिया। जवान यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आसपास कहीं अन्य सक्रिय विस्फोटक या बारूदी सुरंगें तो नहीं हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र की गहन जांच कर रही हैं ताकि आगे किसी तरह की दुर्घटना न हो। सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ाई गई इस घटना के बाद नियंत्रण रेखा के संवेदनशील इलाकों में सेना ने गश्त और निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने कहा कि सीमा पर तैनात जवानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि जांच पूरी होने के बाद हादसे के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल के वीरों का अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने देशवासियों से शहीदों के बलिदान को सदैव स्मरण रखने का आह्वान किया। देशभर में हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम कारगिल विजय दिवस के अवसर पर लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल सहित देशभर के युद्ध स्मारकों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। सेना, अर्धसैनिक बलों, पूर्व सैनिकों, शहीदों के परिजनों और आम नागरिकों ने पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को नमन किया। कई राज्यों में शौर्य यात्राएं, स्कूलों में विशेष कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े सांस्कृतिक आयोजन भी आयोजित किए गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दी श्रद्धांजलि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने द्रास में आयोजित मुख्य समारोह में कहा कि भारतीय सशस्त्र बल किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध के वीरों का बलिदान भारत की सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने जवानों के साहस को नमन करते हुए कहा कि देश उनकी वीरता का सदैव ऋणी रहेगा। 1999 की ऐतिहासिक जीत को किया गया याद हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1999 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों को कारगिल की चोटियों से खदेड़कर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इस युद्ध में भारतीय सेना के सैकड़ों जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। कारगिल विजय दिवस उन वीर सैनिकों की बहादुरी, त्याग और देशभक्ति को याद करने का दिन है, जिनकी वजह से भारत ने अपनी सीमाओं की रक्षा करते हुए विजय प्राप्त की।
भारतीय सेना ने 68वें शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) टेक्निकल महिला कोर्स के लिए आधिकारिक भर्ती अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत अविवाहित महिला इंजीनियरिंग स्नातकों को सेना में अधिकारी बनने का अवसर मिलेगा। इच्छुक उम्मीदवार 8 जुलाई 2026 से 6 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। चयनित अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण अप्रैल 2027 से ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), गया (बिहार) में शुरू होगा। 30 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के तहत विभिन्न इंजीनियरिंग शाखाओं में कुल 30 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके अलावा सेवा के दौरान शहीद हुए रक्षा कर्मियों की विधवाओं के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी श्रेणी में विशेष प्रवेश का प्रावधान भी रखा गया है। भर्ती से जुड़ी प्रमुख जानकारी विवरण जानकारी भर्ती का नाम Indian Army SSC Tech Women 68 Course पद शॉर्ट सर्विस कमीशन (तकनीकी) महिला अधिकारी कुल पद 30 आवेदन शुरू 8 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि 6 अगस्त 2026 प्रशिक्षण शुरू अप्रैल 2027 प्रशिक्षण स्थल OTA, गया (बिहार) कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाली उम्मीदवारों को निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी। उम्मीदवार अविवाहित महिला इंजीनियरिंग स्नातक हो। इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत छात्राएं भी आवेदन कर सकती हैं, यदि उनका परिणाम 1 अप्रैल 2027 तक घोषित हो जाए। 1 अप्रैल 2027 को उम्मीदवार की आयु 20 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यानी अभ्यर्थी का जन्म 1 अप्रैल 2000 से 31 मार्च 2007 के बीच हुआ होना चाहिए। शहीद रक्षा कर्मियों की विधवाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित की गई है। ऐसे होगा चयन भारतीय सेना इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में करेगी। आवेदन पत्रों की जांच और शॉर्टलिस्टिंग सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू मेडिकल परीक्षण अंतिम मेरिट सूची जॉइनिंग लेटर जारी SSB इंटरव्यू लगभग पांच दिनों तक चलेगा, जिसमें उम्मीदवारों की नेतृत्व क्षमता, मानसिक योग्यता और व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाएगा। फिजिकल फिटनेस भी होगी जरूरी चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को निर्धारित शारीरिक मानकों पर भी खरा उतरना होगा। इसके तहत उम्मीदवार को— 13 मिनट में 2.4 किलोमीटर दौड़ पूरी करनी होगी। कम से कम 15 पुश-अप्स करने होंगे। 2 पुल-अप्स पूरे करने होंगे। 25 सिट-अप्स करने होंगे। तैराकी का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए। ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन कर आवेदन कर सकते हैं— भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट Join Indian Army पर जाएं। Officer Entry Apply/Login विकल्प चुनें। यदि पहले से पंजीकरण नहीं है तो नया रजिस्ट्रेशन करें। आधार या मैट्रिक प्रमाणपत्र के माध्यम से सत्यापन पूरा करें। लॉगिन करने के बाद Short Service Commission (Technical) Women Course का चयन करें। व्यक्तिगत, शैक्षणिक और संपर्क संबंधी जानकारी भरें। यदि पहले SSB में शामिल हुए हैं तो उसका विवरण दर्ज करें। सभी जानकारियां जांचने के बाद आवेदन पत्र सबमिट करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट सुरक्षित रखें। महिला इंजीनियरों के लिए सुनहरा अवसर अगर आप इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं और भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं, तो यह भर्ती आपके लिए बेहतरीन अवसर है। इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को उनके 54वें जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बड़ा सम्मान दिया है। आईसीसी ने उन्हें प्रतिष्ठित ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल करने की घोषणा की। यह फैसला स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग में आयोजित आईसीसी बोर्ड की वार्षिक बैठक में लिया गया। गांगुली इस सम्मान को हासिल करने वाले कुल 12वें भारतीय क्रिकेटर और पुरुष वर्ग में 10वें भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। गांगुली ने इस सम्मान पर खुशी जताते हुए आईसीसी और चेयरमैन जय शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हॉल ऑफ फेम में शामिल होना उनके लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट के महान खिलाड़ियों के साथ इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बनना उनके करियर का यादगार पल है। कप्तान के रूप में बदली भारतीय क्रिकेट की तस्वीर सौरव गांगुली का क्रिकेट करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने 113 टेस्ट मैचों में 7,212 रन बनाए, जबकि 311 वनडे मुकाबलों में 22 शतकों की मदद से 11,363 रन बनाए। इसके अलावा उन्होंने वनडे में 132 विकेट भी अपने नाम किए। वर्ष 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंतिम टेस्ट खेलने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया। गांगुली का सबसे बड़ा योगदान क्या क्या है? साल 2000 से 2005 के बीच भारतीय टीम की कप्तानी के दौरान माना जाता है। मैच फिक्सिंग विवाद के बाद उन्होंने टीम इंडिया को नई दिशा दी। उनकी कप्तानी में भारत ने 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी जीती, 2002 चैंपियंस ट्रॉफी में संयुक्त विजेता बना, 2003 विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा और 2004 में पाकिस्तान में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतकर इतिहास रचा। 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता टेस्ट की ऐतिहासिक जीत भी उनके नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि रही। संन्यास के बाद गांगुली ने क्रिकेट प्रशासन में अहम भूमिका निभाई। वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष, SA20 में प्रिटोरिया कैपिटल्स के मुख्य कोच तथा आईपीएल और डब्ल्यूपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के क्रिकेट डायरेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
नई दिल्ली: भारतीय रक्षा क्षेत्र ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी नाइबे लिमिटेड (Nibe Limited) ने बुधवार को अपने अत्याधुनिक लॉन्ग-रेंज 120mm व्हीकल माउंटेड मोर्टार सिस्टम ‘गरुड़ास्त्र’ (Garudastra) का सफल प्रदर्शन किया। यह परीक्षण मध्य प्रदेश के महू स्थित इन्फैंट्री स्कूल में ‘नो कॉस्ट-नो कमिटमेंट’ (NC-NC) आधार पर आयोजित किया गया। परीक्षण के दौरान ‘गरुड़ास्त्र’ ने अपनी मारक क्षमता, सटीक निशानेबाजी और आधुनिक तकनीकों का प्रभावी प्रदर्शन किया। इस स्वदेशी प्रणाली को भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत विकसित किया गया है। विदेशी साझेदारी के साथ विकसित हुआ स्वदेशी सिस्टम नाइबे लिमिटेड ने एक विदेशी मूल उपकरण निर्माता (OEM) के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत इस रक्षा प्रणाली को विकसित किया है। कंपनी का दावा है कि यह सिस्टम भारतीय सशस्त्र बलों की भविष्य की परिचालन जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। 120mm लॉन्ग-रेंज मोर्टार से लंबी दूरी तक हमला ‘गरुड़ास्त्र’ एक 120 मिलीमीटर का हेवी-ड्यूटी मोर्टार सिस्टम है, जो लंबी दूरी तक दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है। इसे सैन्य वाहन पर स्थापित किया गया है, जिससे इसे तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात किया जा सकता है। ‘शूट एंड स्कूट’ क्षमता से जवाबी हमले से बचाव इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषताओं में ‘रैपिड शूट एंड स्कूट’ तकनीक शामिल है। इसके तहत मोर्टार दुश्मन पर तेजी से गोले दागने के बाद तुरंत अपनी स्थिति बदल सकता है। इससे दुश्मन को जवाबी हमला करने या उसकी लोकेशन को निशाना बनाने का अवसर नहीं मिलता। एक साथ कई गोले गिराने की MRSI तकनीक ‘गरुड़ास्त्र’ की सबसे घातक विशेषता ‘मल्टीपल राउंड्स सिमल्टेनियस इम्पैक्ट’ (MRSI) तकनीक है। इस तकनीक के जरिए अलग-अलग कोणों से दागे गए कई गोले एक ही समय में लक्ष्य पर गिरते हैं। इससे दुश्मन को संभलने या जवाबी कार्रवाई करने का मौका नहीं मिलता और नुकसान कई गुना बढ़ जाता है। कम समय में लगातार फायरिंग करने में सक्षम यह सिस्टम हाई-रेट ऑफ फायर क्षमता से लैस है, जिसके कारण कम समय में लगातार कई गोले दागे जा सकते हैं। इससे युद्ध के दौरान दुश्मन पर भारी दबाव बनाया जा सकता है। GPS और लेजर गाइडेंस से सटीक निशाना ‘गरुड़ास्त्र’ के गाइडेड गोला-बारूद जीपीएस और लेजर गाइडेंस तकनीक से लैस हैं। इससे यह प्रणाली अत्यधिक सटीकता के साथ लक्ष्य को भेद सकती है और आसपास होने वाले अनावश्यक नुकसान को भी कम करती है। आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की ओर एक और मजबूत कदम विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गरुड़ास्त्र’ जैसे स्वदेशी हथियार प्रणालियां भारतीय सेना की मारक क्षमता और गतिशीलता को बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान करेंगी। सफल परीक्षण के बाद इस प्रणाली को भारतीय सशस्त्र बलों की भविष्य की जरूरतों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का भारतीय सेना पर किया गया तंज अब उन्हीं पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली बरसी पर भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर टिप्पणी करने के बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर ही उनकी जमकर आलोचना हो रही है. दरअसल, 7 मई को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पहलगाम आतंकी हमले के बाद की रणनीतिक स्थिति और सैन्य तैयारियों पर जानकारी दी थी. इस दौरान अधिकारियों ने अंग्रेजी भाषा में मीडिया को संबोधित किया, जिस पर पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ISPR के प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी ने सवाल उठाए. “अंग्रेजी में क्यों बोले?” : पाक प्रवक्ता का तंज अहमद शरीफ चौधरी ने भारतीय अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा, “आपको अंग्रेजी में बोलने के लिए किसने कहा? क्या आप दुनिया को अपनी कहानी सुनाना चाहते हैं?” उन्होंने दावा किया कि भारतीय सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव बनाने के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन उनका यह बयान पाकिस्तान में ही विवाद का कारण बन गया. पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी ने खोली पोल पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी और वर्तमान पत्रकार मेजर आदिल फारूक राजा (रिटायर्ड) ने ISPR प्रमुख के बयान को “पाखंड” बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सेना में उच्च स्तर से लेकर निचले स्तर तक अधिकांश आधिकारिक संचार अंग्रेजी में ही होता है. मेजर राजा ने कहा, “उर्दू का इस्तेमाल सिर्फ पाकिस्तान की जनता को भ्रमित करने और प्रोपोगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है. असल रणनीतिक दस्तावेज और सूचनाएं अंग्रेजी में तैयार होती हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में अंग्रेजी एक “लिंक लैंग्वेज” के तौर पर इस्तेमाल होती है, इसलिए सैन्य ब्रीफिंग अंग्रेजी में देना कोई असामान्य बात नहीं है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उठाए सवाल मेजर आदिल राजा ने पाकिस्तान सेना से यह भी पूछा कि वह “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान हुए नुकसान की पूरी जानकारी जनता से क्यों छिपा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना केवल “एकतरफा कहानी” पेश कर रही है और जनता को वास्तविक स्थिति नहीं बताई जा रही. सोशल मीडिया पर भी कई पाकिस्तानी यूजर्स ने सेना से सवाल किए कि आखिर नुकसान और विफलताओं को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा. सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस अहमद शरीफ चौधरी के बयान के बाद पाकिस्तान में भाषा, सैन्य पारदर्शिता और मीडिया नैरेटिव को लेकर बहस तेज हो गई है. कई यूजर्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों और सैन्य कूटनीति में अंग्रेजी का इस्तेमाल सामान्य बात है, इसलिए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है. वहीं कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भाषा जैसे विषयों को उछाल रही है.
भारत सरकार ने सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए N S Raja Subramani को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया है. वहीं Krishna Swaminathan को भारतीय नौसेना का अगला प्रमुख चुना गया है. दोनों नियुक्तियों को रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. 30 मई के बाद संभालेंगे CDS की जिम्मेदारी सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि मौजूदा CDS Anil Chauhan का कार्यकाल पूरा होने के बाद पद संभालेंगे. जनरल अनिल चौहान 30 मई 2026 को रिटायर हो रहे हैं. CDS बनने के साथ ही एन एस राजा सुब्रमणि सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) में भारत सरकार के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे. सैन्य नेतृत्व का लंबा अनुभव एन एस राजा सुब्रमणि फिलहाल नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट में मिलिट्री एडवाइजर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने 1 सितंबर 2025 को यह जिम्मेदारी संभाली थी. इससे पहले वे भारतीय सेना में कई अहम पदों पर रह चुके हैं. जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक उन्होंने आर्मी के वाइस चीफ के रूप में काम किया. वहीं मार्च 2023 से जून 2024 तक वे सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-चीफ रहे. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा सुरक्षा, सामरिक योजना और सैन्य संचालन का उनका अनुभव उन्हें इस पद के लिए मजबूत विकल्प बनाता है. कृष्णा स्वामीनाथन होंगे नए नौसेना प्रमुख सरकार ने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का नया चीफ ऑफ नेवल स्टाफ नियुक्त किया है. वे 31 मई 2026 को अपना नया कार्यभार संभालेंगे. फिलहाल वे मुंबई स्थित वेस्टर्न नेवल कमांड के प्रमुख हैं. उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के विशेषज्ञ माने जाते हैं स्वामीनाथन कृष्णा स्वामीनाथन 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे. उन्हें कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का विशेषज्ञ माना जाता है. उन्होंने National Defence Academy, ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, करंजा के कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर और अमेरिका के यूएस नेवल वॉर कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से सैन्य शिक्षा प्राप्त की है. रक्षा नेतृत्व में बड़े बदलाव का संकेत रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार, इन नियुक्तियों से भारत की सैन्य रणनीति और तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन को नई दिशा मिल सकती है. आने वाले समय में सीमा सुरक्षा, समुद्री रणनीति और आधुनिक युद्ध तकनीक पर सरकार का फोकस और मजबूत होने की उम्मीद है.
Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना की बहादुरी और देश की आतंकवाद विरोधी नीति की सराहना की है. पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख, मजबूत इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत हर आतंकी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है. भारतीय सेना के शौर्य को किया सलाम पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्भुत साहस, सटीक रणनीति और मजबूत समन्वय का परिचय दिया. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वालों को भारतीय सुरक्षा बलों ने करारा जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि पूरा देश भारतीय जवानों की वीरता और समर्पण को सलाम करता है. उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दुनिया को भारतीय सेना की तैयारी, पेशेवर क्षमता और तीनों सेनाओं के मजबूत तालमेल की ताकत दिखायी. आत्मनिर्भर भारत की ताकत भी दिखी पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती क्षमता को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य तकनीक, स्वदेशी रक्षा उपकरण और बेहतर समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों के बीच बढ़ती एकजुटता और सामरिक क्षमता आज देश की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है. क्यों शुरू किया गया था ऑपरेशन सिंदूर? ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया सैन्य अभियान था. यह ऑपरेशन 7 मई से 10 मई 2025 के बीच पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकवादी ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर अंजाम दिया गया था. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गयी थी. उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे. आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को साफ संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ता रहेगा.
भारतीय सशस्त्र बलों की निष्पक्षता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारतीय सशस्त्र बलों के राजनीतिक रूप से निष्पक्ष बने रहने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना को राजनीति से जितना दूर रखा जाएगा, देश और लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। "सेना की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्षता" एक कार्यक्रम के दौरान जनरल नरवणे ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल हमेशा से गैर-राजनीतिक रहे हैं। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान और ताकत है। उन्होंने कहा, "सशस्त्र बलों को राजनीति से जितना संभव हो, उतना दूर रखा जाना चाहिए। यही हमारे लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।" लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ हैं सशस्त्र बल पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि न्यायपालिका और स्वतंत्र प्रेस की तरह सशस्त्र बल भी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उनके अनुसार, सेना की पेशेवर निष्पक्षता ही भारत को दुनिया के अन्य देशों से अलग बनाती है। व्यक्ति और संस्था में अंतर समझना जरूरी जनरल नरवणे ने स्पष्ट किया कि संस्थान के रूप में सेना पूरी तरह अपोलिटिकल है। हालांकि, सेना के जवान और अधिकारी व्यक्तिगत रूप से लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हर सैनिक को मतदान करने और अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक सोच रखने का पूरा अधिकार है। राहुल गांधी के बयान के बाद चर्चा में आए थे नरवणे गौरतलब है कि इसी वर्ष फरवरी में जनरल नरवणे अपने अप्रकाशित संस्मरण को लेकर चर्चा में आए थे। लोकसभा में राहुल गांधी ने उनके संस्मरण के कथित अंशों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। इस पर संसद में काफी हंगामा हुआ था। सैन्य संस्थानों की गरिमा बनाए रखना जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल नरवणे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक विमर्श लगातार तीखा हो रहा है। ऐसे में सेना की निष्पक्षता पर उनका जोर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।