सिलहट टेस्ट में बांग्लादेश की पकड़ मजबूत, बढ़त पहुंची 249 रन Litton Das और Mushfiqur Rahim की शानदार बल्लेबाज़ी के दम पर Bangladesh national cricket team ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में मजबूत स्थिति बना ली है। सिलहट में खेले जा रहे मुकाबले के तीसरे दिन लंच तक बांग्लादेश ने दूसरी पारी में चार विकेट के नुकसान पर 203 रन बना लिए और कुल बढ़त 249 रन तक पहुंचा दी। टीम के अभी छह विकेट बाकी हैं, जिससे पाकिस्तान पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। लिटन और मुशफिकुर की साझेदारी बनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी चुनौती लिटन दास 48 रन बनाकर नाबाद लौटे, जबकि मुशफिकुर रहीम 39 रन पर टिके रहे। दोनों बल्लेबाज़ों ने पांचवें विकेट के लिए अब तक 88 रन की नाबाद साझेदारी की है। इस साझेदारी ने पाकिस्तान के गेंदबाज़ों को पूरी तरह थका दिया और मैच को बांग्लादेश की तरफ मोड़ दिया। पहली पारी में 126 रन की शानदार शतकीय पारी खेलने वाले लिटन एक बार फिर बेहतरीन लय में दिखे। उन्होंने खराब मौसम और धीमे आउटफील्ड के बावजूद संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। सुबह के सत्र में पाकिस्तान को मिली शुरुआती सफलता बादलों से घिरे मौसम और तेज़ हवा का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ Khurram Shahzad ने दिन की शुरुआत में शानदार गेंदबाज़ी की। उन्होंने बांग्लादेश के कप्तान Najmul Hossain Shanto को LBW आउट कर टीम को शुरुआती सफलता दिलाई। शांतो 46 गेंदों में सिर्फ 15 रन बना सके। खुर्रम लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद को मूव करा रहे थे और बल्लेबाज़ों को परेशान कर रहे थे। धीरे-धीरे संभली बांग्लादेश की पारी सुबह के शुरुआती आठ ओवर तक बांग्लादेश कोई बाउंड्री नहीं लगा सका, लेकिन इसके बाद लिटन दास ने कवर ड्राइव के जरिए शानदार चौका जड़कर दबाव कम किया। उन्होंने पुल शॉट पर भी बेहतरीन चौका लगाया। दूसरी ओर मुशफिकुर रहीम शुरुआत में सतर्क रहे, लेकिन बाद में उन्होंने स्पिनर Sajid Khan के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने लॉन्ग-ऑन के ऊपर शानदार छक्का लगाकर पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दीं। पाकिस्तान ने गंवाया बड़ा मौका लिटन दास को एक अहम जीवनदान भी मिला। 47वें ओवर में वह रन लेने के दौरान मिड-पिच पर फंस गए थे। मुशफिकुर ने उन्हें देर से वापस भेजा, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के पास रन आउट का आसान मौका था। हालांकि Babar Azam सीधे स्टंप पर थ्रो नहीं लगा सके और लिटन बच गए। उस समय लिटन 38 रन पर बल्लेबाज़ी कर रहे थे। यह मौका पाकिस्तान को भारी पड़ सकता है। पहले दिन से ही बांग्लादेश का पलड़ा रहा भारी इससे पहले दूसरे दिन बांग्लादेश ने पाकिस्तान को पहली पारी में 232 रन पर ऑल आउट कर 46 रन की बढ़त हासिल की थी। बांग्लादेश की ओर से Nahid Rana और Taijul Islam ने तीन-तीन विकेट झटके। वहीं Mehidy Hasan Miraz और Taskin Ahmed को दो-दो सफलताएं मिलीं। पाकिस्तान की ओर से बाबर आज़म ने 68 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली और Salman Agha के साथ 63 रन की साझेदारी की। महमुदुल हसन जॉय ने भी दिखाई दमदार बल्लेबाज़ी बांग्लादेश की दूसरी पारी में Mahmudul Hasan Joy ने तेज़ अर्धशतक लगाकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। उन्होंने Mominul Haque के साथ दूसरे विकेट के लिए 76 रन की अहम साझेदारी की। इस साझेदारी ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया और बांग्लादेश को बड़ी बढ़त की दिशा में पहुंचा दिया। पाकिस्तान के लिए बढ़ी मुश्किलें तीसरे दिन लंच तक मुकाबला पूरी तरह बांग्लादेश के नियंत्रण में नजर आया। अगर लिटन दास और मुशफिकुर रहीम की साझेदारी लंबे समय तक जारी रहती है, तो पाकिस्तान के लिए इस टेस्ट मैच में वापसी करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
Iraq के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में एक चरवाहे की रहस्यमयी मौत ने कथित तौर पर Israel के गुप्त सैन्य अड्डों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। 29 वर्षीय अवाद अल-शम्मारी अपनी पिकअप गाड़ी से सामान लेने निकला था, लेकिन कुछ घंटों बाद उसकी गोलियों से छलनी और जली हुई गाड़ी रेगिस्तान में मिली। स्थानीय लोगों का दावा है कि एक हेलिकॉप्टर उसका पीछा कर रहा था और लगातार फायरिंग कर रहा था। परिवार का आरोप है कि अवाद गलती से इजराइल के एक कथित सीक्रेट सैन्य ठिकाने तक पहुंच गया था, जहां उसने हेलिकॉप्टर, सैनिक और अस्थायी हवाई पट्टी देखी थी। परिवार का दावा- सेना को फोन करने के बाद हुई हत्या परिजनों के मुताबिक अवाद ने कथित सैन्य गतिविधियों की सूचना तुरंत इराकी सेना के क्षेत्रीय कमांड को दी थी। परिवार का मानना है कि इसी के बाद उसे निशाना बनाया गया। Israel Defense Forces (IDF) ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। रिपोर्ट में दो गुप्त सैन्य अड्डों का दावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल पिछले एक साल से अधिक समय से इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में दो गुप्त सैन्य अड्डे चला रहा था। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल Iran के खिलाफ सैन्य अभियानों के समर्थन के लिए किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक ठिकाना वही था जिसे अवाद ने कथित तौर पर देख लिया था। अमेरिका पर भी उठे सवाल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कम से कम एक कथित अड्डे की जानकारी United States को पहले से थी। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका ने इराक से यह जानकारी छिपाई कि उसकी जमीन पर एक विदेशी सेना सक्रिय थी। इराकी सांसद Waad al-Qaddo ने इसे इराक की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। इराकी सेना को पहले से था शक इराकी सेना के यूफ्रेट्स यूनिट कमांडर Ali al-Hamdani ने कहा कि स्थानीय बेदुइन समुदाय कई हफ्तों से रेगिस्तान में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दे रहा था। लोगों ने हेलिकॉप्टरों की आवाजाही, सैनिकों की मौजूदगी और अस्थायी ढांचे देखे थे। उन्होंने कहा कि सेना को शक था कि वहां विदेशी सैन्य गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन सीधे कार्रवाई करने के बजाय निगरानी का फैसला लिया गया। जांच के लिए पहुंची सेना पर भी हमला अवाद की सूचना के बाद इराकी सेना ने इलाके में जांच के लिए टुकड़ी भेजी थी। मेजर जनरल हमदानी के अनुसार, सैनिक जैसे ही इलाके के करीब पहुंचे उन पर हमला हुआ। इस हमले में एक सैनिक की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए। सेना की गाड़ियों पर भी बमबारी की गई, जिसके बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा। सरकार की चुप्पी पर सवाल रिपोर्ट के मुताबिक इराकी सरकार ने अब तक आधिकारिक तौर पर इजराइली अड्डों की मौजूदगी स्वीकार नहीं की है। United States Central Command (CENTCOM) ने भी इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से इराक के सामने गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या उसकी सुरक्षा एजेंसियों को विदेशी सैन्य मौजूदगी की जानकारी नहीं थी या फिर उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। ईरान-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी चिंता यदि इराक में इजराइल की गुप्त मौजूदगी के दावे सही साबित होते हैं, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।इससे Iran समर्थित समूहों को इराक में और सक्रिय होने का बहाना मिल सकता है, जबकि Iraq के लिए अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखना और कठिन हो जाएगा।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच United States Navy ने ईरान के समुद्री रास्तों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। United States Central Command (CENTCOM) द्वारा जारी वीडियो में अमेरिकी जंगी जहाज USS Michael Murphy (DDG-112) को ओमान की खाड़ी में एक मर्चेंट शिप को रोकते हुए देखा गया। नेवी अधिकारियों ने जहाज के क्रू को निर्देश दिया कि वे अब अमेरिकी निगरानी में अगले बंदरगाह तक जाएंगे। इस ऑपरेशन के दौरान हेलिकॉप्टर भी ऊपर से लगातार नजर रख रहे थे। 10 हजार सैनिक और 100 से ज्यादा विमान तैनात CENTCOM के मुताबिक, इस घेराबंदी में अमेरिका ने भारी सैन्य ताकत तैनात की है: 10,000 से अधिक सैनिक 12+ युद्धपोत 100+ लड़ाकू विमान इस मिशन का नेतृत्व एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln (CVN-72) कर रहा है, जो अरब सागर में मौजूद है। इस पर F-35C स्टील्थ फाइटर, F/A-18 जेट्स और आधुनिक हेलिकॉप्टर तैनात हैं। इसके अलावा गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black (DDG-119) भी संदिग्ध जहाजों पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, सिर्फ ईरानी पोर्ट्स पर पाबंदी अमेरिकी सेना ने साफ किया है कि Strait of Hormuz को बंद नहीं किया गया है। यह कार्रवाई केवल Iran के बंदरगाहों और उसकी तटीय सीमा तक सीमित है। ट्रम्प का सख्त संदेश अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा: “हमारी नेवी शानदार काम कर रही है। अब कोई भी जहाज हमारी मंजूरी के बिना ईरान की सीमा में घुसने की सोच भी नहीं सकता।” बातचीत फेल होने के बाद बढ़ा तनाव रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता बेनतीजा रही, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया। हालांकि, दोनों देशों के बीच फिलहाल दो हफ्ते का सीजफायर लागू है। जमीनी हकीकत भी अलग शिपिंग डेटा के अनुसार, घेराबंदी के बावजूद कुछ जहाज–जिनमें ईरानी टैंकर भी शामिल हैं–इस मार्ग से गुजरने में सफल रहे हैं। इससे स्थिति की जटिलता और बढ़ गई है। ईरान के खिलाफ अमेरिका की यह समुद्री घेराबंदी क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है। हालांकि, अमेरिका इसे सुरक्षा और रणनीतिक कदम बता रहा है, लेकिन इससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Gaza Strip एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। ताजा हमलों में कम से कम सात फिलिस्तीनियों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह घटनाएं ऐसे समय पर हुई हैं जब क्षेत्र में पहले से ही संघर्ष और मानवीय संकट गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य गाज़ा के Bureij refugee camp में सुबह-सुबह एक ड्रोन हमले ने नागरिकों के एक समूह को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों और राहत एजेंसियों के मुताबिक, मिसाइलें एक पुलिस पोस्ट के पास गिरीं, जिससे कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि Al-Aqsa Hospital में छह शव और कई घायल पहुंचाए गए, जबकि Al-Awda Hospital में एक और मृतक तथा दो घायल लाए गए। राहत कार्य में जुटी टीमों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि हमले के बाद हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए थे। इसी के साथ दक्षिणी गाज़ा के Khan Younis इलाके में भी एक ड्रोन हमले में विस्थापित लोगों के तंबू को निशाना बनाया गया। इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं। इलाके में लगातार गोलाबारी और टैंक फायरिंग की भी खबरें सामने आ रही हैं, जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने हालिया हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही हत्याएं और हमले यह दर्शाते हैं कि क्षेत्र में जवाबदेही की कमी बनी हुई है और नागरिकों की सुरक्षा गंभीर रूप से खतरे में है। आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 72,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। हाल के दिनों में भी हिंसा थमने के बजाय बढ़ती नजर आ रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और गहरी हो गई है। पश्चिमी तट यानी West Bank में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां छापेमारी और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। कई गांवों में आगजनी और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है।
मध्य-पूर्व में तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान खुद उन समुद्री बारूदी सुरंगों (माइन्स) का पता नहीं लगा पा रहा है, जिन्हें उसने हालिया संघर्ष के दौरान बिछाया था। यही वजह है कि इस रणनीतिक जलमार्ग को पूरी तरह से दोबारा खोलने में देरी हो रही है। जल्दबाजी में बिछाई गई माइन्स बनीं बड़ी समस्या अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के साथ संघर्ष शुरू हुआ, तब ईरान ने छोटे-छोटे नावों के जरिए होर्मुज में माइन्स बिछानी शुरू की। हालांकि यह प्रक्रिया न तो व्यवस्थित थी और न ही तकनीकी रूप से सटीक। कई माइन्स के स्थान रिकॉर्ड ही नहीं किए गए, जबकि कुछ समुद्री धाराओं के कारण अपनी जगह से बह भी गए, जिससे उन्हें ढूंढना और हटाना और मुश्किल हो गया है। वैश्विक व्यापार पर पड़ा सीधा असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है। इसके प्रभावित होते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति पर असर पड़ा और कीमतों में तेजी देखने को मिली। माइन्स बिछाए जाने के बाद जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई। ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया। सीमित रास्ता, टोल और बढ़ता दबाव रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने एक संकीर्ण रास्ता खुला रखा, जहां से केवल कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई - वह भी भारी शुल्क (टोल) के साथ। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि संभावित युद्धविराम और बातचीत की शर्तों में होर्मुज का सुरक्षित और पूर्ण रूप से खुलना जरूरी है। तकनीकी कमजोरी से जूझ रहा ईरान विशेषज्ञों का मानना है कि माइन्स बिछाना जितना आसान होता है, उन्हें हटाना उससे कहीं ज्यादा जटिल प्रक्रिया है। यहां तक कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी सैन्य ताकत भी इसके लिए विशेष जहाजों और तकनीक का सहारा लेती है। ऐसे में ईरान के पास सीमित तकनीकी क्षमता होने के कारण वह खुद ही अपनी बिछाई माइन्स को जल्दी साफ नहीं कर पा रहा है। शांति वार्ता पर भी असर यह मुद्दा अब इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता में बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी संकेत दिया है कि जलमार्ग को खोलने में “तकनीकी सीमाएं” बाधा बन रही हैं। यानी साफ है कि होर्मुज की स्थिति सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक संकट का भी बड़ा कारण बन चुकी है।
Middle East Conflict Update: अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिन का सीजफायर लागू होने के बावजूद हालात सामान्य नहीं हुए हैं। इजरायल लगातार लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर हमले कर रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। ईरान का बड़ा बयान ईरान ने खाड़ी देशों पर हमलों से साफ इनकार किया कहा: ये हमले इजरायल या अमेरिका का काम हो सकते हैं रिवोल्यूशनरी गार्ड ने आधिकारिक बयान में अपनी भूमिका नकार दी इजरायल का एक्शन जारी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले IDF चीफ ने बिन्त जबील इलाके का दौरा किया सैनिकों को निर्देश: “उत्तर के नागरिकों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित करें” पाकिस्तान में अहम बातचीत अमेरिका–ईरान के बीच फाइनल सीजफायर पर बातचीत पाकिस्तान में प्रस्तावित पाकिस्तान इसे अपनी डिप्लोमैटिक अग्निपरीक्षा मान रहा है लेकिन पाक रक्षा मंत्री के इजरायल पर विवादित बयान से माहौल तनावपूर्ण है अमेरिकी ड्रोन हुआ गायब US Navy का MQ-4C Triton surveillance drone फारस की खाड़ी में उड़ान के दौरान अचानक संपर्क टूटा आखिरी बार ईरान की दिशा में मुड़ते देखा गया तेल बाजार पर असर सऊदी अरब के मुताबिक: कई तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले East-West pipeline प्रभावित उत्पादन क्षमता में 7 लाख बैरल/दिन की कमी कुल मिलाकर सीजफायर सिर्फ अस्थायी राहत है जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण है कूटनीति और युद्ध दोनों साथ-साथ चल रहे हैं आने वाले दिनों में पाकिस्तान में होने वाली बातचीत इस पूरे संकट की दिशा तय कर सकती है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह मौजूदा संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान ने कहा है कि जब तक उसे युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिलता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। ईरानी सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रजेई ने कहा कि ईरान की शर्तें बिल्कुल स्पष्ट हैं- सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और अमेरिका यह गारंटी दे कि भविष्य में वह किसी भी तरह की दखलंदाजी नहीं करेगा। रजेई ने टीवी बयान में कहा कि ईरानी सेना पूरी ताकत से ऑपरेशन चला रही है और नया नेतृत्व हालात को मजबूती से संभाल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह युद्ध एक हफ्ते में खत्म हो सकता था, लेकिन इजराइल के रुख की वजह से संघर्ष लंबा खिंच गया। इजराइल पर लगातार मिसाइल हमले इजराइल की सेना (IDF) के मुताबिक, ईरान ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइल दागी। हालांकि ताजा हमले में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और मिसाइल खुले इलाके में गिरी। तेल अवीव, पेटाह टिक्वा और आसपास के इलाकों में सायरन बजाए गए, जिसके बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। बाद में इजराइल की होम फ्रंट कमांड ने खतरा टलने की पुष्टि की। अमेरिका में मतभेद, ट्रम्प के बयान चर्चा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनके रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान की मिसाइल, ड्रोन और नौसेना क्षमता को खत्म करना जरूरी है। हालांकि, अमेरिकी सरकार के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं बताए जा रहे, जबकि कुछ अधिकारियों ने विरोध में इस्तीफा भी दिया है। वैश्विक असर: तेल संकट और कूटनीतिक हलचल तेज ईरान-इजराइल तनाव का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। जापान ने तेल संकट को देखते हुए अपने भंडार जारी करने का फैसला लिया है। दक्षिण कोरिया ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर को लेकर चिंता जताई है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। जमीनी हालात: हमले, मौतें और राहत कार्य जारी तेहरान में एक हमले में एक प्रोफेसर और उनके दो बच्चों की मौत हो गई, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं, मलबे में फंसे एक बच्चे को सुरक्षित निकालने का वीडियो भी सामने आया है।
वॉशिंगटन: ईरान के साथ जारी युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके साथ ही अमेरिकी प्रशासन के भीतर फैसलों को लेकर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक नया बयान देकर विवाद को और बढ़ा दिया है, जिसमें उन्होंने युद्ध की शुरुआत के लिए अपने रक्षा मंत्री Pete Hegseth की भूमिका की ओर इशारा किया है। “लेट्स डू इट” से शुरू हुआ विवाद टेनेसी में आयोजित एक राउंडटेबल चर्चा के दौरान ट्रंप ने कहा कि सैन्य कार्रवाई का सुझाव सबसे पहले हेगसेथ ने दिया था। ट्रंप के अनुसार, हेगसेथ ने कहा था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए कार्रवाई जरूरी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब युद्ध की शुरुआत को लेकर प्रशासन के भीतर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। किसी के अनुसार, इजरायल पहले ही हमले की तैयारी में था, जिससे अमेरिका की भागीदारी अनिवार्य हो गई, जबकि अन्य का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार के करीब था। विरोधाभासी दावे और बढ़ती उलझन ट्रंप के बयान में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। कुछ ही घंटे पहले उन्होंने दावा किया था कि ईरान की जवाबी कार्रवाई अप्रत्याशित थी, जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि संभावित हमलों को लेकर पहले से चेतावनी दी गई थी। इन विरोधाभासों ने प्रशासन की रणनीति और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युद्ध का चेहरा बने हेगसेथ इस पूरे घटनाक्रम में Pete Hegseth लगातार अग्रिम पंक्ति में नजर आ रहे हैं। पेंटागन में उन्होंने ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, ड्रोन उत्पादन और नौसैनिक शक्ति को कमजोर करने के लक्ष्य को दोहराया है। हालांकि, युद्ध की समयसीमा को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। प्रशासन के भीतर मतभेद रिपोर्ट्स के अनुसार, उपराष्ट्रपति JD Vance इस सैन्य कार्रवाई को लेकर पूरी तरह सहमत नहीं थे, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई विरोध नहीं जताया है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और मीडिया उद्योगपति Rupert Murdoch जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों के समर्थन की भी चर्चा है। इस बीच, राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के पूर्व प्रमुख जो केंट का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि प्रशासन के भीतर मतभेद गहरे हैं। बातचीत पर भी असमंजस ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ बातचीत की संभावना बनी हुई है और मध्यस्थता के लिए Jared Kushner तथा दूत स्टीव विटकॉफ सक्रिय हैं। हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। अनिश्चितता बरकरार ट्रंप द्वारा तय की गई समयसीमा को भी आगे बढ़ा दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि युद्ध की दिशा और परिणाम दोनों ही अभी अनिश्चित हैं। लगातार बदलते बयान, विरोधाभासी दावे और कूटनीतिक अस्पष्टता इस संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं।
सोशल मीडिया पर धुएं के वीडियो वायरल, सरकार ने दी सफाई मध्य पूर्व में जारी ईरान से जुड़े तनाव के बीच शनिवार को दुबई में कई जगह धमाकों की आवाज़ सुनाई देने की खबर सामने आई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ऊपर धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया, जिसके बाद अफवाहों का दौर शुरू हो गया। हालांकि दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किसी प्रकार की घटना नहीं हुई है और स्थिति पूरी तरह सामान्य है। शहर में गिरे मलबे से हुई छोटी घटना, कोई घायल नहीं सरकारी बयान के मुताबिक शहर में एक मामूली घटना उस समय हुई जब किसी हमले के मलबे का हिस्सा गिर गया। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवाई अड्डे के आसपास तेज धमाके की आवाज सुनाई दी थी, जिसके कुछ देर बाद आसमान में धुएं का गुबार दिखाई दिया। कई स्थानीय निवासियों ने भी शहर के अलग-अलग हिस्सों में विस्फोट जैसी आवाजें सुनने की बात कही है। हवाई यातायात पर पड़ा असर, उड़ानों में 60 से 90 मिनट की देरी फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, दुबई के हवाई क्षेत्र में उस समय सामान्य से कम विमान दिखाई दिए। वहीं एयरपोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर कई उड़ानों के आगमन और प्रस्थान का शेड्यूल जारी रहा, लेकिन औसतन 60 से 90 मिनट की देरी दर्ज की गई। एयरलाइंस की ओर से जारी एडवाइजरी में बताया गया कि दुबई के अलावा अबू धाबी के ज़ायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, शारजाह एयरपोर्ट, अक्रोटिरी एयरपोर्ट और फुजैरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी उड़ान संचालन जारी है। इन शहरों से दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद के लिए वापसी उड़ानें भी संचालित की जा रही हैं ताकि भारतीय नागरिक सुरक्षित लौट सकें। पिछले हफ्ते भी हमले से हुआ था नुकसान बीते शनिवार को भी दुबई एयरपोर्ट के एक हिस्से में हमले के कारण चार कर्मचारियों के घायल होने और एक कॉनकोर्स के क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की ओर से किए गए हमलों में पाम जुमेराह और बुर्ज अल अरब जैसे प्रमुख इलाकों को भी निशाना बनाया गया था। वहीं मंगलवार को ड्रोन के मलबे से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास परिसर में आग लगने की घटना भी सामने आई थी। ईरान-इजरायल संघर्ष में बढ़ता तनाव इस बीच ईरान की राजधानी तेहरान में भी शनिवार सुबह कई विस्फोटों की खबर आई। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल की ओर मिसाइलें दागीं। अमेरिका ने भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया जा सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल को 151 मिलियन डॉलर के नए हथियार सौदे को मंजूरी दे दी है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने कहा है कि देश अपनी रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। ऐसे में मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।