मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता सनी देओल की आगामी ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'बंटवारा 1947' को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से मंजूरी मिल गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म को सेंसर बोर्ड ने बिना किसी कट के पास कर दिया है। फिल्म को 'A' (एडल्ट) सर्टिफिकेट दिया गया है और अब यह अपनी तय रिलीज डेट पर सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। 14 अगस्त को रिलीज होगी फिल्म राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी 'बंटवारा 1947' भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म है। सेंसर प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा, जो स्वतंत्रता दिवस वीकेंड के मौके पर दर्शकों के सामने आएगी। फिल्म की कहानी 1947 के विभाजन के दौरान आम लोगों की जिंदगी, दर्द, संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों को दिखाती है। मेकर्स ने इसे सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि उस दौर में बंटे परिवारों और इंसानी रिश्तों की कहानी के रूप में पेश करने की कोशिश की है। सनी देओल के साथ नजर आएंगे प्रीति जिंटा और शबाना आजमी फिल्म में सनी देओल मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। उनके साथ प्रीति जिंटा, शबाना आजमी, अली फजल, करण देओल और अन्य कलाकार भी महत्वपूर्ण किरदारों में दिखाई देंगे। यह फिल्म सनी देओल और निर्देशक राजकुमार संतोषी की लंबे समय बाद वापसी वाली जोड़ी को भी दर्शाती है। राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी पहले भी कई सफल फिल्मों में काम कर चुकी है। ऐसे में इस फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता बनी हुई है। बिना कट के पास होने से बढ़ी चर्चा सेंसर बोर्ड से बिना किसी बदलाव के मंजूरी मिलना फिल्म के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को एडल्ट सर्टिफिकेट दिया गया है, जिसका कारण इसकी गंभीर कहानी और विभाजन काल की परिस्थितियों का यथार्थ चित्रण बताया जा रहा है। फिल्म में 1947 के दौरान हुए सामाजिक और मानवीय संघर्षों को दिखाया गया है, इसलिए इसकी कहानी को लेकर पहले से ही काफी चर्चा थी। सेंसर मंजूरी के बाद अब दर्शकों की नजर फिल्म के ट्रेलर और प्रमोशन पर है। राजकुमार संतोषी की पीरियड ड्रामा पर बड़ी उम्मीदें 'बंटवारा 1947' को एक बड़े स्तर की पीरियड फिल्म के रूप में तैयार किया गया है। फिल्म के जरिए मेकर्स विभाजन की त्रासदी और उस समय के लोगों के अनुभवों को पर्दे पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। सनी देओल की पिछली फिल्मों की सफलता के बाद इस फिल्म से भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है। अब दर्शकों को 14 अगस्त को फिल्म की रिलीज का इंतजार है।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता सनी देओल की बहुप्रतीक्षित पीरियड ड्रामा फिल्म 'बंटवारा 1947' की रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। फिल्म 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले सिनेमाघरों में रिलीज होगी। मेकर्स ने रिलीज डेट के साथ फिल्म का नया पोस्टर भी जारी किया है, जिसने सोशल मीडिया पर चर्चा तेज कर दी है। विभाजन की त्रासदी पर आधारित है कहानी फिल्म भारत के 1947 के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। नए पोस्टर में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा और जलता हुआ दीपक दिखाई देता है, जो धर्म, मानवता और साहस का प्रतीक माना जा रहा है। पोस्टर के साथ टैगलाइन दी गई है— "जब दुनिया ने पक्ष चुना, उसने धर्म चुना।" राजकुमार संतोषी और आमिर खान की बड़ी साझेदारी फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जबकि इसे आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनाया गया है। फिल्म में सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा, शबाना आज़मी, अली फ़ज़ल और करण देओल भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है, जबकि गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं। स्वतंत्रता दिवस वीकेंड पर बड़ी टक्कर 'बंटवारा 1947' स्वतंत्रता दिवस वीकेंड पर रिलीज होगी, जिसे बॉक्स ऑफिस के लिए सबसे बड़े कारोबारी सप्ताहांतों में माना जाता है। फिल्म से दर्शकों और ट्रेड विशेषज्ञों को बड़ी उम्मीदें हैं, खासकर सनी देओल की हालिया सफल फिल्मों के बाद।
मुंबई, एजेंसियां। निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण पार्ट 1' को लेकर दर्शकों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। फिल्म के निर्माताओं ने आधिकारिक तौर पर ट्रेलर रिलीज की तारीख का एलान कर दिया है। मेकर्स के अनुसार, 24 जुलाई को फिल्म का ट्रेलर दुनियाभर में एक साथ रिलीज किया जाएगा। इस घोषणा के साथ एक नया पोस्टर भी साझा किया गया है, जिसमें भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण राजमहल की पृष्ठभूमि में दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर के साथ साझा किया भावनात्मक संदेश फिल्म के निर्माताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्टर साझा करते हुए लिखा कि हजारों वर्षों से रामायण ने कई पीढ़ियों को धर्म, मर्यादा, साहस और धैर्य का मार्ग दिखाया है। अब इसी कालजयी महाकाव्य को आधुनिक तकनीक और भव्यता के साथ बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जाएगा। मेकर्स का दावा है कि यह भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में से एक होगी। मल्टीस्टारर फिल्म में नजर आएंगे कई बड़े कलाकार फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। इसके अलावा यश, सनी देओल, रवि दुबे, अरुण गोविल, काजल अग्रवाल और लारा दत्ता सहित कई प्रमुख कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म को नमित मल्होत्रा की प्राइम फोकस स्टूडियोज, ऑस्कर विजेता वीएफएक्स स्टूडियो डीएनईजी और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं। दो भागों में रिलीज होगी 'रामायण' निर्माताओं के अनुसार, यह फिल्म दो भागों में रिलीज की जाएगी। 'रामायण पार्ट 1' दिवाली 2026 पर दुनियाभर के सिनेमाघरों और आईमैक्स स्क्रीन पर रिलीज होगी, जबकि 'रामायण पार्ट 2' दिवाली 2027 में दर्शकों के सामने आएगी। भव्य विजुअल इफेक्ट्स, बड़े स्टारकास्ट और पौराणिक कथा के आधुनिक प्रस्तुतीकरण के कारण फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्साह देखा जा रहा है। अब 24 जुलाई को रिलीज होने वाला ट्रेलर इस बहुप्रतीक्षित फिल्म की पहली विस्तृत झलक पेश करेगा।
मुंबई, एजेंसियां। फिल्म 'इक्का' की रिलीज से पहले निर्देशक सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने अभिनेता अक्षय खन्ना की अभिनय क्षमता की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि अक्षय बेहद प्रतिभाशाली कलाकार हैं और उन्हें उनकी काबिलियत के अनुरूप ज्यादा से ज्यादा फिल्में मिलनी चाहिए। आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने कहा कि वह वर्षों से अक्षय के काम के प्रशंसक रहे हैं और हर किरदार में वह गहराई और प्रभाव छोड़ने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। 'रहमान डकैत' के किरदार से बटोरी थी खूब वाहवाही कई वर्षों के ब्रेक के बाद अक्षय खन्ना ने बड़े पर्दे पर दमदार वापसी की। साल 2025 की शुरुआत में उन्होंने फिल्म 'छावा' में मुगल शासक औरंगजेब की भूमिका निभाई, जबकि वर्ष के अंत में फिल्म 'धुरंधर' में उनके निभाए 'रहमान डकैत' के किरदार ने दर्शकों और समीक्षकों का दिल जीत लिया। उनके संवाद, अभिनय, स्क्रीन प्रेजेंस और अलग अंदाज ने सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोरीं। 'इक्का' में फिर दिखेगा निगेटिव अवतार अब अक्षय खन्ना निर्देशक सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा की फिल्म 'इक्का' में एक बार फिर नकारात्मक भूमिका में नजर आएंगे। यह एक कोर्टरूम ड्रामा है, जिसमें सनी देओल दमदार वकील की भूमिका निभाते दिखाई देंगे। फिल्म में दीया मिर्जा और संजीदा शेख भी अहम किरदार निभा रही हैं। ट्रेलर और स्टारकास्ट को लेकर दर्शकों में पहले से ही उत्साह बना हुआ है। 10 जुलाई को होगी रिलीज निर्माताओं के अनुसार, 'इक्का' 10 जुलाई 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी। निर्देशक का मानना है कि अक्षय खन्ना जैसे कलाकारों की मौजूदगी फिल्म को और मजबूत बनाती है। ऐसे में दर्शकों को इस कोर्टरूम ड्रामा में एक बार फिर अभिनेता का प्रभावशाली और गहन अभिनय देखने को मिलेगा।
Batwara 1947 Teaser Out: सनी देओल और आमिर खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'बंटवारा 1947' का पहला टीजर रिलीज कर दिया गया है। आजादी और भारत-विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म पहले ही अपने मोशन पोस्टर और किरदारों के लुक्स की वजह से चर्चा में थी, वहीं अब टीजर ने दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। टीजर में इतिहास के उस दर्दनाक दौर की झलक दिखाई गई है, जब देश को आजादी तो मिली, लेकिन विभाजन की त्रासदी ने करोड़ों लोगों की जिंदगी बदलकर रख दी। भावनात्मक बैकग्राउंड म्यूजिक, दमदार संवाद और संघर्ष से भरे दृश्य इस कहानी को बेहद प्रभावशाली बनाते हैं। नफरत के बीच उम्मीद की कहानी 'बंटवारा 1947' का टीजर दर्शकों को 1947 के उस दौर में ले जाता है, जहां हिंसा, डर और बिछड़ने के दर्द के बीच एक ऐसा नायक सामने आता है, जो इंसानियत, साहस और उम्मीद की मिसाल बनकर उभरता है। सनी देओल का दमदार अंदाज एक बार फिर दर्शकों को आकर्षित करता नजर आ रहा है। स्टारकास्ट में कई बड़े नाम फिल्म में सनी देओल के साथ कई दिग्गज कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इनमें शामिल हैं— प्रीति जिंटा शबाना आजमी अली फजल अभिमन्यु सिंह करण देओल यह फिल्म सनी देओल और निर्देशक राजकुमार संतोषी की करीब तीन दशक बाद हो रही वापसी को भी खास बनाती है। इससे पहले दोनों की जोड़ी कई यादगार फिल्में दे चुकी है। ए.आर. रहमान का संगीत और जावेद अख्तर के गीत 'आमिर खान प्रोडक्शंस' के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक राजकुमार संतोषी ने किया है। फिल्म का संगीत ऑस्कर विजेता ए.आर. रहमान ने तैयार किया है, जबकि गीतों को जावेद अख्तर ने लिखा है। फिल्म का निर्माण आमिर खान और अपर्णा पुरोहित ने किया है। कब रिलीज होगी फिल्म? 'बंटवारा 1947' को 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस और 'पार्टीशन डे' के मौके पर रिलीज होने वाली यह फिल्म साल की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक मानी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता बॉबी देओल इन दिनों अपनी नई फिल्म बंदर को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत की है, लेकिन बॉबी देओल के अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। अब उनके बड़े भाई और अभिनेता Sunny Deol ने भी फिल्म और बॉबी की परफॉर्मेंस की खुलकर तारीफ की है। सनी देओल ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ‘बंदर’ का पोस्टर साझा करते हुए भाई के लिए भावुक संदेश लिखा। उन्होंने पोस्ट में कहा, “हर कोई तुम्हारी परफॉर्मेंस की तारीफ कर रहा है बॉब, लव यू।” सनी का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और फैंस दोनों भाइयों के बीच के मजबूत रिश्ते की सराहना कर रहे हैं। क्या है फिल्म ‘बंदर’ की कहानी? फिल्म की कहानी समर नाम के एक लोकप्रिय अभिनेता के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका करियर मुश्किल दौर से गुजर रहा होता है। हालात तब और बिगड़ जाते हैं जब उसकी पूर्व पार्टनर उस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा देती है। इसके बाद समर कानूनी लड़ाई, मीडिया ट्रायल और सार्वजनिक आलोचनाओं के बीच खुद को घिरा हुआ पाता है। ‘बंदर’ केवल एक कोर्टरूम ड्रामा नहीं है, बल्कि यह मीडिया, न्याय व्यवस्था, सार्वजनिक धारणा और सत्ता के प्रभाव जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी उजागर करती है। फिल्म यह सवाल उठाती है कि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले सच को कितना महत्व दिया जाता है। फिल्म में दमदार स्टारकास्ट फिल्म में बॉबी देओल के साथ Sanya Malhotra, Saba Azad, Sapna Pabbi, Raj B. Shetty, Jitendra Joshi और Riddhi Sen जैसे कलाकार नजर आ रहे हैं। साथ ही नाइजीरियाई कंटेंट क्रिएटर अगु स्टेनली चिएदोजी ने भी इस फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा है। फिल्म भले ही कमाई के मोर्चे पर संघर्ष कर रही हो, लेकिन बॉबी देओल की दमदार अदाकारी दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का ध्यान खींचने में सफल रही है।
हिंदी सिनेमा की चर्चित वॉर फ्रेंचाइजी ‘बॉर्डर’ अब अपने अगले अध्याय की ओर बढ़ रही है। Border 3 को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है कि फिल्म पर काम शुरू हो चुका है और इसे 2027 के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक बनाने की तैयारी की जा रही है। Sunny Deol एक बार फिर इस फ्रेंचाइजी का चेहरा बने रहेंगे, और उनकी देशभक्ति वाली छवि को इस बार और भी बड़े स्तर पर पेश करने की योजना है। वहीं, Varun Dhawan के साथ आई पिछली फिल्म Border 2 की सफलता ने इस फ्रेंचाइजी को नई ऊंचाई दी है। फिल्म ने दुनियाभर में 450 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर जबरदस्त सफलता हासिल की थी, जिससे मेकर्स का भरोसा और मजबूत हुआ है। सनी देओल की इमेज पर खास फोकस मेकर्स इस बार सनी देओल की ‘देशभक्त हीरो’ वाली छवि को और भव्य तरीके से पेश करने की तैयारी में हैं। Nidhi Dutta इस प्रोजेक्ट को लेकर खास रणनीति बना रही हैं और फिल्म की कहानी व लेखन में भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। वॉर जोन से आगे, अब वायुसेना और फैंटेसी पर फोकस रिपोर्ट्स के अनुसार, जेपी फिल्म्स अब पारंपरिक वॉर जोन से आगे बढ़ते हुए भारतीय वायुसेना पर आधारित एक नई फिल्म भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही एक बड़े बजट की फैंटेसी एडवेंचर फ्रेंचाइजी पर भी काम चल रहा है, जो स्टूडियो के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सनी देओल के लिए नया दौर Gadar 2 की ऐतिहासिक सफलता के बाद सनी देओल का करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। अब उनके पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स की लाइन है, जिनमें Ramayanam भी शामिल है, जहां वह ‘हनुमान’ के किरदार में नजर आएंगे। इसके अलावा Jaat 2 और Lahore 1947 जैसे प्रोजेक्ट्स भी चर्चा में हैं। जल्द होगी कास्टिंग की घोषणा फिल्म की शूटिंग देश के अलग-अलग हिस्सों में की जाएगी और उम्मीद है कि आने वाले महीनों में ‘बॉर्डर 3’ की आधिकारिक कास्टिंग और बाकी डिटेल्स का ऐलान कर दिया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।