30 July in History

Important Events
Important Events: 30 जुलाई की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

1602 – इंडोनेशिया में नीदरलैंड का राजनैतिक एंव साम्राज्यवादी प्रभाव आरंभ हुआ। 1729 – मैरीलैंड में बाल्टीमोर शहर की स्थापना हुई। 1733 -  पहला अमेरिकी लॉज बोस्टन के फ़ॉरिमेसिस की सोसाइटी में बनाया गया। 1756 -  बर्तोलोमेओ रास्ट्रेलि नव निर्मित कैथरीन पैलेस को महारानी एलिज़ाबेथ और उसके दरबारियों को प्रस्तुत किया गया। 1824 - जीयोचिनो रॉसीनी थिएटर इटालियन, पेरिस के नए प्रबंधक बने। 1825 – माल्दन द्वीप की खोज हुई।  1836 – अमेरिका के हवाई में अंग्रेजी भाषा का पहला अखबार प्रकाशित हुआ। 1864 - क्रेटर की लड़ाई:छं जनरल बर्न्सइड्स पीटर्सबर्ग के हमले में विफल रहे। 1877 - पीलेन की घेराबंदी में दूसरी लड़ाई शुरू हुई। 1909 – राइट बंघुओं ने सेना के लिए पहला विमान बनाया। 1914 - ऑस्ट्रिया की आर्टिलरीर बेलग्रेड शहर सर्बिया की राजधानी बना। 1930 – एनबीसी रेडियो पर देथ वैली डेज का पहला प्रसारण हुआ। 1932 – अमेरिका के लास एंजिल्स में दसवें आधुनिक ओलंपिक खेल की शुरुआत हुई। 1938 - पहला बच्चों का कॉमिक द बीनो ब्रिटेन में प्रकाशित हुआ। 1942 – जर्मन की सेना ने बेलारूस के मिंस्क में 25000 यहूदियों की हत्या की। 1957 – एक्सपोर्ट रिस्क इंस्योरेंस कोर्पोरेशन आफ इंडिया (प्राइवेट) लिमिटेड की स्थापना हुई। 1958 - औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडशिप डे (विश्व मैत्री दिवस) की घोषणा की गई थी। 1966 – आठवें फीफा विश्वकप में पश्चिम जर्मनी को हराकर इंग्लैंड ने पहली बार विश्व कप फुटबॉल जीता। 1980 – वनूआटो देश को स्वतंत्रता मिली। 1982 – सोवियत संघ ने भूमिगत परमाणु परीक्षण किया। 1989 – चिली ने अपने संविधान में संशोधन किया। 2000 – तीन बार लगातार फ्रांस का भ्रमण करने वाले लांस अर्मस्ट्रांग पहले अमेरिकी बनें। 2000 - संयुक्त राष्ट्र ने इस्रायल द्वारा ख़ाली किये क्षेत्रों में शांति सेना की तैनाती प्रारम्भ की। 2001 - श्रीलंका सरकार ने मुक्ति चीतों पर से प्रतिबंध हटाने से इन्कार किया। 2002 - कनाडा ने अलकायदा सहित सात संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया। 2004 - भारत और पाकिस्तान के बीच तुलबुल परियोजना पर बातचीत बिना किसी सहमति के समाप्त हो गयी।  2004 - पाकिस्तानी प्रधानमंत्री (मनोनीत) शौकत अजीत आत्मघाती हमले में बाल-बाल बचे। 2006 - टॉप ऑफ द पॉप्स - एक ब्रिटिश संगीत चार्ट टेलीविजन कार्यक्रम जिसे बीबीसी द्वारा बनाया गया जिसका मूल रूप से 1 जनवरी 1964 से 30 जुलाई 2006 तक के बीच साप्ताहिक प्रसारण किया गया था। टॉप ऑफ द पॉप्स दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला साप्ताहिक संगीत शो था।  2006 - हालीवुड अभिनेत्री पामेला एडंरसन ने गायक किड रॉक से विवाह किया। 2007 - चीनी वैज्ञानिकों ने झेंगझाऊ में लगभग 50 लाख साल पुरानी चट्टानों की खोज की। 2008 - नेपाल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला को कोलम्बो में आयोजित सार्क शिखर सम्मेलन में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति मिली। 2012 – आंध प्रदेश में एक रेलगाड़ी में आग लग जाने से 32 लोगों की मौत हुई और 27 घायल हुए। 2012 – भारत में पावर ग्रिड फेल होने की वजह से 12 राज्यों की 30 करोड़ आबादी प्रभावित हुई। 2014 - महाराष्ट्र के पुणे ज़िले के एक आदिवासी गांव में 29 जुलाई सुबह आए भूस्खलन के मलबे में दब कर मरने वालों की संख्या बढ़कर 41 हो गई। 2019 - तीन तलाक बिल (Triple Talaq Bill) राज्यसभा से पास हो गया । राज्यसभा में बिल के समर्थन में 99, जबकि विरोध में 84 वोट पड़े। 2019 - भारत और बेनिन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और ई-वीजा सुविधाओं पर चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। 2020 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रवींद जगन्नाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संयुक्त रूप से मॉरिशस के नए सुप्रीम कोर्ट भवन का उद्घाटन किया।  2020 - पांच ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के पर्यावरण मंत्रियों ने रूस की अध्यक्षता में ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की छठी बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। 2020 - अमेरिका का परसेवरेंस यान मंगल पर रवाना हो गया। यह दुनिया में पिछले 11 दिनों में तीसरा मंगल मिशन है। इससे पहले 19 जुलाई को यूएई ने और 23 जुलाई को चीन ने अपने-अपने मिशन मंगल ग्रह के लिए रवाना किए थे। 2021 - भारत और अमेरिका ने एक और पांच साल के लिए वैश्विक विकास साझेदारी समझौते का नवीनीकरण किया। 2021 - पहली बार भारत के सुदूरवर्ती जिलों के कृषि निर्यातक संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और जापान के अंतरराष्ट्रीय क्रेताओं से जुड़े। 2022 - मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत को पहला स्वर्ण दिलाया व स्नैच राउंड में सबसे ज्यादा वजन उठाने का रिकॉर्ड भी बनाया। 2022 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विद्युत क्षेत्र की पुर्नोत्थान वितरण क्षेत्र योजना का शुभारंभ किया। 2022 - भारतीय और फ्रांसीसी नौसेना द्वारा अटलांटिक में सैन्याभ्यास का समापन हुआ। 2022 - श्रम और रोज़गार मंत्री भूपेन्द्र यादव ने नई दिल्ली में डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र के लिए चेहरा पहचान प्रणाली की शुरूआत की। 2023 - पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बम धमाके  से 44 लोगों की मौत व लगभग 200  घायल हुए। 2023 - ISRO ने एक साथ 7 सैटेलाइट्स को लॉन्च किया ( इनमें 1 स्वदेशी व सिंगापुर के छह)। 2023 - लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुवाहाटी में असम के नए विधानसभा भवन का उद्घाटन किया। 2024 - मनु भाकर इतिहास रचते हुए एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी। 2024 - झारखंड में मालगाड़ी से भिड़ी हावड़ा-मुंबई मेल, 20 डिब्बे पटरी से उतरे; 2 की मौत और कई घायल हुए। 2024 - केरल के वायनाड में लैंडस्लाइड से 80 लोगों की मौत, 400 लापता हुए। 2025 - रूस में दुनिया का छठा सबसे बड़ा 8.8 तीव्रता का भूकंप आया। 2025 - ISRO और NASA के संयुक्त मिशन निसार (NISAR - NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F16 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।   30 जुलाई को जन्मे व्यक्ति   1882 - सत्येंद्र नाथ बोसु अनुशीलन समिति के एक भारतीय राष्ट्रवादी थे। 1886 - मुत्तू लक्ष्मी रेड्डी - भारत की प्रसिद्ध महिला चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता , पहली महिला विधायक और पद्म भूषण प्राप्तकर्ता थीं। 1923 - गोविन्द चन्द्र पाण्डे - 20वीं सदी के जानेमाने चिंतक, इतिहासवेत्ता, संस्कृतज्ञ तथा सौंदर्यशास्त्री थे। 1927 - शीशराम ओला राजस्थान से भारतीय राजनीतिज्ञ थे।  1945 - नवीन चावला भारत के चुनाव आयुक्त थे। 1947 – हॉलीवुड अभिनेता और कैलिफोर्निया के पूर्व गवर्नर आरनोल्ड श्वार्जनेगर। 1962 - सुधीर सच्चिदानंद मुनगंटीवार महाराष्ट्र राज्य में वन आदि अनेक विभागों के मंत्री बन चुके। 1973 - सोनू सूद - भारतीय फिल्म अभिनेता।   30 जुलाई को हुए निधन   1771 - थॉमस ग्रे - 18वीं शताब्दी के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी कवियों में से एक। 1912 - मैजी जापान के १२२वें सम्राट थे। उन्हें 'मैजी महान' के नाम से जाना जाता है। 1979 - बिष्णुपाद मुखर्जी या बिष्णुपाद मुखोपाध्याय (भेषजगुण विज्ञानी) एक भारतीय फार्माकोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन थे। 2019 - श्री सुबीर गोकर्ण भारत के एक विख्यात अर्थशास्त्री थे। 2020 - भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव के पूर्व कोच अशोक मुस्तफी (86) का लंबी बीमारी के बाद निधन हुआ। 2020 - पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित रेन सोनम शेरिंग लेप्चा (92) का पश्चिम बंगाल के कालिम्पोंग में निधन हुआ। 2020 - ताइवान के पूर्व राष्ट्रपति ली तेंग-हुयी का निधन ,वे 97 वर्ष के थे।  2020 - मलयालम एक्टर अनिल मुरली का 56 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2023 - जर्मन चित्रकार व ग्राफिक कलाकार कोनराड क्लाफेक (88) का निधन हुआ। 2023 - अर्जेंटीनियन फुटबॉल खिलाड़ी जॉर्ज डोमिंगुएज़ (64) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी अभिनेता पॉल रूबेंस (70) का निधन। 2024 - फुआद शुक्र लेबनानी कमांडर और हिज़्बुल्लाह के सह-संस्थापक, इज़राइली हवाई हमले में मारे गए (जन्म 1961 या 1962)। 2025 - IDBI बैंक के चेयरमैन पद्मश्री टीएन मनोहरन (69) का निधन हुआ।   30 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   🌟 श्री महावीर शासन / वीर शासन जयन्ती (श्रावण कृष्ण प्रतिपदा)। 🌟 श्री साईबाबा उत्सव समाप्त (शिरडी)। 🌟 श्री बाजीप्रभू देशपांडे पुण्यतिथि। 🌟 श्री मुत्तू लक्ष्मी रेड्डी जन्म दिवस। 🌟 मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस (World Day Against Trafficking in Persons)। 🌟 अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस (संयुक्त राष्ट्र - UN)।   कृपया ध्यान दें    यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

anjali kumari जुलाई 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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US-Iran War: मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान, बोले- 'अब जिहाद और प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता'

kalpana जुलाई 27, 2026 0