नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट प्रशंसकों को एक बार फिर दोनों टीमों के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबले का इंतजार रहेगा। हालांकि इस बार टूर्नामेंट के ड्रॉ ने साफ कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान की टीमें शुरुआती चरण में एक-दूसरे के सामने नहीं होंगी। दोनों का मुकाबला तभी संभव है, जब वे मेडल राउंड तक पहुंचें। जापान के नागोया में सितंबर-अक्टूबर के दौरान होने वाले एशियन गेम्स में पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका को सीधे क्वार्टरफाइनल में प्रवेश मिला है। दूसरी ओर अफगानिस्तान समेत छह अन्य टीमों को पहले ग्रुप चरण में मुकाबले खेलने होंगे। यहां से प्रदर्शन के आधार पर चार टीमें क्वार्टरफाइनल में जगह बनाएंगी। भारत और पाकिस्तान के क्वार्टरफाइनल भी अलग-अलग ड्रॉ के मुताबिक भारत को क्वार्टरफाइनल-2, जबकि पाकिस्तान को क्वार्टरफाइनल-1 में रखा गया है। दोनों टीमों के क्वार्टरफाइनल मुकाबले 28 सितंबर को निर्धारित हैं। भारत और पाकिस्तान की राह इस तरह रखी गई है कि दोनों सेमीफाइनल में भी एक-दूसरे के सामने नहीं आ सकते। क्वार्टरफाइनल-1 की विजेता टीम का सामना सेमीफाइनल में क्वार्टरफाइनल-4 की विजेता से होगा। वहीं दूसरे सेमीफाइनल में क्वार्टरफाइनल-2 और क्वार्टरफाइनल-3 की विजेता टीमें आमने-सामने होंगी। इसका मतलब है कि अगर भारत और पाकिस्तान अपने-अपने क्वार्टरफाइनल और फिर सेमीफाइनल मुकाबले जीतते हैं, तभी दोनों की भिड़ंत गोल्ड मेडल के फाइनल में होगी। सेमीफाइनल में हार मिली तो ब्रॉन्ज मेडल मैच में भिड़ंत भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबले की दूसरी संभावना ब्रॉन्ज मेडल मैच है। अगर दोनों टीमें अपने-अपने क्वार्टरफाइनल जीतती हैं, लेकिन सेमीफाइनल में हार जाती हैं, तो तीसरे स्थान के मुकाबले में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने हो सकते हैं। यानी टूर्नामेंट के नॉकआउट प्रारूप में भारत-पाकिस्तान मुकाबले के लिए दो ही रास्ते हैं—गोल्ड मेडल फाइनल या ब्रॉन्ज मेडल मैच। हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। यदि दोनों में से केवल एक टीम फाइनल तक पहुंचती है और दूसरी सेमीफाइनल में हारकर किसी अलग टीम से ब्रॉन्ज मेडल मुकाबला खेलती है, तो एशियन गेम्स में भारत-पाकिस्तान का मुकाबला देखने को नहीं मिलेगा। 2022 में भी नहीं हुआ था भारत-पाकिस्तान मुकाबला यह स्थिति एशियन गेम्स 2022 में भी देखने को मिली थी। उस प्रतियोगिता में भारत फाइनल तक पहुंच गया था, जबकि पाकिस्तान को सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद ब्रॉन्ज मेडल मैच में पाकिस्तान को बांग्लादेश से भी हार मिली। इस तरह टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान की टीमें एक-दूसरे के खिलाफ नहीं खेल सकी थीं। एशियन गेम्स 2026 में भी कुछ ऐसा ही होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। क्रिकेट प्रशंसकों को भारत-पाकिस्तान मुकाबले के लिए दोनों टीमों के लगातार जीतते हुए मेडल राउंड तक पहुंचने की उम्मीद करनी होगी। क्वालिफाइंग राउंड में छह टीमें क्वालिफाइंग राउंड में छह टीमों को दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप ए में अफगानिस्तान, जापान और नेपाल हैं, जबकि ग्रुप बी में हांगकांग, मलेशिया और ओमान को रखा गया है। दोनों ग्रुप की टीमें आपस में एक-एक मुकाबला खेलेंगी। प्रत्येक ग्रुप की शीर्ष दो टीमें नॉकआउट चरण यानी क्वार्टरफाइनल में पहुंचेंगी। भारत और पाकिस्तान को सीधे क्वार्टरफाइनल में प्रवेश मिलने से दोनों टीमों के प्रशंसकों की नजर अब नॉकआउट मुकाबलों पर होगी। भारत-पाकिस्तान मुकाबला क्रिकेट में हमेशा से दर्शकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहा है, लेकिन इस बार एशियन गेम्स में यह टक्कर तभी देखने को मिलेगी, जब दोनों टीमें मेडल जीतने की दौड़ में अंतिम चरण तक बनी रहेंगी।
नई दिल्ली: महिला एशिया कप 2026 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। टूर्नामेंट के आयोजन की तस्वीर अब काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार महिला एशिया कप का आयोजन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में किया जा सकता है। टूर्नामेंट की शुरुआत 28 अगस्त 2026 से होने की संभावना है, जबकि खिताबी मुकाबला 13 सितंबर को खेला जा सकता है। हालांकि, एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने अभी तक टूर्नामेंट का आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, संभावित तारीखों की जानकारी भाग लेने वाले देशों को पहले ही दी जा चुकी है, ताकि टीमें अपनी तैयारियों, खिलाड़ियों की उपलब्धता और यात्रा कार्यक्रम को लेकर योजना बना सकें। 8 टीमें लेंगी हिस्सा महिला एशिया कप 2026 टी20 प्रारूप में खेला जाएगा और यह टूर्नामेंट का छठा संस्करण होगा। इसमें कुल आठ टीमें हिस्सा लेंगी। प्रतियोगिता में मौजूदा चैंपियन श्रीलंका के अलावा भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, मलेशिया, थाईलैंड और मेजबान UAE के शामिल होने की संभावना है। पिछले संस्करण में श्रीलंका ने भारत को हराकर पहली बार महिला एशिया कप का खिताब अपने नाम किया था। ऐसे में इस बार भी श्रीलंकाई टीम पर खास नजर रहेगी, जबकि भारतीय टीम पिछली हार का हिसाब चुकता करने के इरादे से मैदान पर उतर सकती है। 27 अगस्त तक UAE पहुंच सकती हैं टीमें मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ACC की ओर से 22 जुलाई को सदस्य देशों को भेजे गए ईमेल में टूर्नामेंट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई थी। इसी क्रम में टीमों को 27 अगस्त तक UAE पहुंचने के लिए कहा गया है। इसके बाद 28 अगस्त से मुकाबले शुरू होने की संभावना है और 13 सितंबर को फाइनल खेला जा सकता है। हालांकि, टूर्नामेंट के आयोजन स्थल, मुकाबलों के क्रम और अन्य विवरणों पर अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ACC की आधिकारिक घोषणा और अंतिम मंजूरी के बाद ही तारीखों और कार्यक्रम की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। एशिया कप के बाद एशियन गेम्स की चुनौती महिला एशिया कप 2026 की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि टूर्नामेंट खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद खिलाड़ियों को 2026 एशियन गेम्स में हिस्सा लेना होगा। जापान के नागोया में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स में महिला क्रिकेट प्रतियोगिता 17 से 24 सितंबर के बीच प्रस्तावित है। यानी एशिया कप के फाइनल और एशियन गेम्स के बीच बहुत कम समय रहेगा। ऐसे में भारत समेत एशिया की प्रमुख टीमों के लिए महिला एशिया कप केवल खिताब जीतने का मौका नहीं होगा, बल्कि एशियन गेम्स से पहले टीम संयोजन, खिलाड़ियों की फॉर्म और रणनीति को परखने का भी महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है। भारत के लिए क्यों अहम है टूर्नामेंट? भारतीय महिला टीम के लिए महिला एशिया कप 2026 कई मायनों में महत्वपूर्ण रहेगा। पिछले संस्करण के फाइनल में श्रीलंका से मिली हार के बाद टीम इस बार बेहतर प्रदर्शन के साथ खिताब वापस हासिल करने की कोशिश करेगी। टी20 क्रिकेट में छोटे-छोटे अंतर मुकाबले का परिणाम तय कर सकते हैं। इसलिए भारत को बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग के साथ-साथ दबाव वाले मुकाबलों में सही रणनीति पर भी ध्यान देना होगा। अगर संभावित कार्यक्रम की पुष्टि होती है, तो अगस्त के अंत से सितंबर के मध्य तक UAE में होने वाला यह टूर्नामेंट महिला क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक बड़ा क्रिकेटिंग आकर्षण बनने वाला है।
भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 की तैयारियां तेज कर दी हैं। हॉकी इंडिया ने जापान में होने वाले एशियन गेम्स के लिए 20 सदस्यीय भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। टीम की कप्तानी एक बार फिर झारखंड की स्टार मिडफील्डर सलीमा टेटे को सौंपी गई है। इस बार भारतीय टीम का लक्ष्य सिर्फ पदक जीतना नहीं, बल्कि स्वर्ण पदक हासिल कर 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधा क्वालिफाई करना है। जापान में होगा एशियन गेम्स 2026 का आयोजन एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में होगा। वहीं महिला हॉकी प्रतियोगिता 18 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच गिफू प्रीफेक्चरल ग्रीन स्टेडियम, काकामिगाहारा में खेली जाएगी। इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम को 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक का सीधा टिकट मिलेगा, जिससे इस टूर्नामेंट का महत्व और बढ़ गया है। अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवाओं पर भी भरोसा टीम चयन में अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं का संतुलन देखने को मिला है। हाल ही में FIH Nations Cup में शानदार प्रदर्शन करने वाले अधिकांश खिलाड़ियों को टीम में बरकरार रखा गया है। चयनकर्ताओं का मानना है कि मौजूदा टीम अनुभव, गति और आक्रामक खेल का बेहतरीन मिश्रण है, जो बड़े टूर्नामेंट में भारत को मजबूत दावेदार बना सकता है। गोलकीपिंग की जिम्मेदारी सविता और बिचू देवी पर गोलकीपिंग विभाग में अनुभवी सविता पुनिया और बिचू देवी खारीबाम को जगह मिली है। हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित सविता भारतीय महिला हॉकी की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने हांगझोऊ एशियन गेम्स 2023 में टीम की कप्तानी करते हुए भारत को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। डिफेंस और मिडफील्ड में मजबूत संयोजन रक्षा पंक्ति में सुषिला चानू पुखरामबाम, ज्योति, लालथांतलुआंगी, शिल्पी डबास और इशिका चौधरी को शामिल किया गया है। मिडफील्ड की कमान कप्तान सलीमा टेटे संभालेंगी। उनके साथ निक्की प्रधान, साक्षी राणा, सुनेलिता टोप्पो, नेहा और दीपिका सोरेंग टीम को मजबूती देंगी। सलीमा अपनी तेज रफ्तार, शानदार बॉल कंट्रोल और नेतृत्व क्षमता के लिए जानी जाती हैं। झारखंड की इस खिलाड़ी से टीम को बड़ी उम्मीदें हैं। आक्रामक फॉरवर्ड लाइन पर बड़ी जिम्मेदारी भारतीय टीम की फॉरवर्ड लाइन में लालरेमसियामी, नवनीत कौर, दीपिका, रुतुजा पिसाल, इशिका, बलजीत कौर और ब्यूटी डुंगडुंग शामिल हैं। इन खिलाड़ियों से उम्मीद होगी कि वे विपक्षी टीमों के खिलाफ अधिक से अधिक गोल कर भारत को स्वर्ण पदक की दौड़ में बनाए रखें। मुख्य कोच ने जताया भरोसा मुख्य कोच शोर्ड मारिन ने टीम चयन के बाद विश्वास जताया कि खिलाड़ी शानदार फिटनेस और अच्छी लय में हैं। उन्होंने कहा कि टीम एशियन गेम्स जैसी बड़ी चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है और स्वर्ण पदक जीतने की क्षमता रखती है। एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम गोलकीपर सविता पुनिया बिचू देवी खारीबाम डिफेंडर इशिका चौधरी सुषिला चानू पुखरामबाम लालथांतलुआंगी ज्योति शिल्पी डबास मिडफील्डर सलीमा टेटे (कप्तान) निक्की प्रधान साक्षी राणा सुनेलिता टोप्पो नेहा दीपिका सोरेंग फॉरवर्ड लालरेमसियामी रुतुजा पिसाल नवनीत कौर दीपिका इशिका बलजीत कौर ब्यूटी डुंगडुंग 44 साल बाद स्वर्ण जीतने का लक्ष्य भारतीय महिला हॉकी टीम का एशियन गेम्स में शानदार रिकॉर्ड रहा है। टीम अब तक 1 स्वर्ण, 2 रजत और 4 कांस्य सहित कुल 7 पदक जीत चुकी है। 1982 में भारत ने महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीता था। वहीं हांगझोऊ एशियन गेम्स 2023 में टीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया था। अब सलीमा टेटे की कप्तानी में भारतीय टीम 44 साल बाद फिर से स्वर्ण जीतकर सीधे LA 2028 ओलंपिक का टिकट हासिल करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।
भारत के उभरते हुए स्टार जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव ने 65वीं नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए नया इतिहास रच दिया। कलिंगा स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिता के अंतिम दिन रोहित ने 87.05 मीटर का शानदार थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने न केवल प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक जीता, बल्कि 2026 एशियन गेम्स के लिए भी क्वालिफाई कर लिया। इसके अलावा वह 87 मीटर से अधिक जैवलिन थ्रो करने वाले भारत के तीसरे खिलाड़ी भी बन गए। 87 मीटर क्लब में शामिल हुए रोहित 87.05 मीटर के थ्रो के साथ रोहित यादव ने भारतीय जैवलिन इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। इससे पहले केवल चुनिंदा भारतीय एथलीट ही 87 मीटर का आंकड़ा पार कर पाए थे। उनका यह प्रदर्शन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने अपना पुराना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (Personal Best) भी पीछे छोड़ दिया। टूटा व्यक्तिगत और मीट रिकॉर्ड रोहित यादव का पिछला व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83.04 मीटर था, जो उन्होंने वर्ष 2023 में बनाया था। इस बार उन्होंने सीधे 87.05 मीटर का थ्रो कर अपना पर्सनल बेस्ट लगभग चार मीटर से बेहतर किया। साथ ही उन्होंने प्रतियोगिता का पुराना मीट रिकॉर्ड 84.35 मीटर भी पीछे छोड़ दिया। सीजन में भारत के नंबर-1 थ्रोअर बने इस प्रदर्शन के बाद रोहित यादव इस सीजन में भारत की ओर से सबसे लंबा जैवलिन थ्रो करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा सीजन की विश्व सूची में वह श्रीलंका के रमेश थरंगा पथिरगे (92.62 मीटर) के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं भारत के ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा 85.69 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सूची में चौथे स्थान पर हैं। आखिरी प्रयास में बदली किस्मत रोहित यादव की पूरी थ्रो सीरीज भी काफी दिलचस्प रही— 77.71 मीटर 77.63 मीटर फाउल 77.51 मीटर 79.40 मीटर 87.05 मीटर (अंतिम प्रयास) शुरुआती पांच प्रयासों में वह अपनी लय नहीं पकड़ पाए थे, लेकिन आखिरी थ्रो में उन्होंने बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। रोहित ने क्या कहा? मैच के बाद 25 वर्षीय रोहित यादव ने कहा कि इस प्रदर्शन से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि अभ्यास के दौरान वह लगातार 86 से 87 मीटर तक थ्रो कर रहे थे, लेकिन प्रतियोगिताओं में उस स्तर का प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें उम्मीद है कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में वह और बेहतर प्रदर्शन करेंगे। अन्य खिलाड़ियों ने भी किया प्रभावित पुरुषों की जैवलिन स्पर्धा में— यशवीर सिंह ने 83.72 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता। सचिन यादव ने 82.32 मीटर के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों ने भी 2026 एशियन गेम्स के लिए निर्धारित क्वालिफिकेशन मार्क हासिल कर लिया। भारतीय जैवलिन के लिए सकारात्मक संकेत रोहित यादव का यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बेहद उत्साहजनक माना जा रहा है। नीरज चोपड़ा के बाद अब कई भारतीय खिलाड़ी लगातार 80 मीटर से अधिक की थ्रो कर रहे हैं, जिससे आगामी एशियन गेम्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की पदक संभावनाएं और मजबूत होती नजर आ रही हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने एशियाई खेल 2026 के लिए भारतीय महिला और पुरुष क्रिकेट टीमों की घोषणा कर दी है। जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले इस बहु-खेल आयोजन में भारतीय महिला टीम अपने स्वर्ण पदक का बचाव करने उतरेगी, जबकि पुरुष टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर संभालेंगे। हरमनप्रीत कौर पर फिर जताया भरोसा महिला टीम की कमान एक बार फिर हरमनप्रीत कौर को सौंपी गई है, जबकि स्मृति मंधाना उप-कप्तान होंगी। चयनकर्ताओं ने लगभग उसी टीम पर भरोसा जताया है, जिसने हाल ही में महिला टी20 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। टीम में सिर्फ एक बदलाव किया गया है। विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया की जगह युवा खिलाड़ी जी. कामलिनी को मौका मिला है। संतुलित नजर आ रही महिला टीम बल्लेबाजी में स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा और जेमिमा रोड्रिग्स पर बड़ी जिम्मेदारी होगी। मध्यक्रम में ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा टीम को मजबूती देंगी, जबकि ऋचा घोष मुख्य विकेटकीपर की भूमिका निभाएंगी। तेज गेंदबाजी का जिम्मा रेणुका सिंह ठाकुर और अरुंधति रेड्डी के कंधों पर रहेगा। स्पिन विभाग में राधा यादव और श्रेयंका पाटिल शामिल हैं। हालांकि, श्रेयंका का अंतिम चयन उनकी फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर करेगा। श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में उतरेगी पुरुष टीम पुरुष टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर को सौंपी गई है। टीम में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, रवि बिश्नोई और वरुण चक्रवर्ती जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को जगह मिली है। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी टीम का हिस्सा होंगे। भारत की महिला टीम 2023 के हांगझोऊ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। ऐसे में इस बार भी उससे स्वर्ण पदक बरकरार रखने की उम्मीद होगी। वहीं, पुरुष टीम भी मजबूत संयोजन के साथ मैदान में उतरकर भारत को एक और स्वर्ण पदक दिलाने का लक्ष्य लेकर खेलेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।