August 21 Important Events

Important Events
Important Events: 21 अगस्त की महत्त्वपूर्ण  घटनाएं

1689 – स्कॉटलैंड में डंकल्ड का युद्ध हुआ। 1703 - एडिर्न घटना: तुर्की सेना ने सुल्तान मुस्तफा द्वितीय को हटाया, जिससे सुल्तानों की शक्ति कम हुई। 1718 – तुर्की और वेनिस के बीच शांति संधि हुई। 1772 – स्वीडन में गुस्ताव तृतीय ने विद्रोह कर 50 वर्ष पुराने संसद के शासन को समाप्त कर तानाशाही स्थापित की। 1790 – जनरल मीडोस की अगुआई में ब्रिटेन की सेना ने तमिलनाडु के डिंडीगुल पर कब्जा किया। 1808 -  वीमेइरो की लड़ाई: सर आर्थर वेलेस्ले के तहत ब्रिटिश सैनिकों ने जनरल जीन-एंडोच जुनोट के तहत फ्रेंच को हराया। 1810 -  फ्रांस के मार्शल जीन बैप्टिस्ट बेर्नडॉट, स्वीडन के क्राउन प्रिंस ऑफ इस्टेट्स के स्वीडिश रिक्समैंड द्वारा चुने गए। 1842 – तस्मानिया के शहर होबर्ट की स्थापना हुई।  1878 -  अमेरिकन बार एसोसिएशन सरसोटा में आयोजित किया गया। 1911 – लौवर के कर्मचारी ने मोनालिसा पेटिंग चोरी की, दो साल बाद मिली। 1914 – जर्मनी की सेना ने बेल्जियम के टेमिन्स पर कब्जा किया। 1915 - पहले विश्व युद्ध के दौरान इटली ने तुर्की के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1938 – इटली में सार्वजनिक और हाई स्कूलों में यहूदी शिक्षकों के पढ़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया। 1957 – सोवियत संघ ने दुनिया की पहली अंतरमहाद्यीपीय बैलिस्टिक मिसाइल आर-7 सेमेयोर्का का परीक्षण किया। 1959 - हवाई अमेरिका का 50वां प्रांत बना। 1959 – ईरान, तुर्की, पाकिस्तान व ब्रिटेन की सम्मिलिति से सिन्टो नामक संगठन की स्थापना हुई। 1963 – बुद्ध मंदिर पैगोड़ा में छापे के विरोध में दक्षिण वियतनाम में मार्शल लॉ की घोषणा हुई। 1965 - यूरोपीय देश रोमानिया में संविधान को अंगीकार किया गया। 1968 – चेकोस्लोवाकिया के पराग्वे पर सोवियत संघ के नेतृत्व में हमले की घोषणा स्थानीय रेडियो पर की गई। 1972 - वन्यजीव संरक्षण अधिनियम संसद में पारित। 1972 - भारत में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित। 1986 – कैमरुन में ज्वालामुखी विस्फोट से निकली जहरीली गैसों से 2000 की मौत हुई। 1988 – भारत नेपाल सीमा पर आये तीव्र भूकंप से एक हजार लोगों की मौत हुई। 1991 – लातविया ने संयुक्त सोवियत संघ रूस से आजाद हाने की घोषणा की। 1991 - सोवियत संघ में राष्ट्रपति गोर्बाचोव अपदस्थ, मास्को में कर्फ़्यू, क्रान्ति विफल एवं गोर्बाचोव पुन: सत्ता में। 1993 – मार्स आब्र्जवर के साथ नासा का सुपर्क टूटा। 1993 - राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने रूसी संसद भंग किया। 1997 – पूर्वी चीन में चक्रवाती तूफान विन्नी से 140 लोगों की मौत हुई और तीन हजार लोग घायल हुए। 2000 - दक्षिण-पूर्वी आर्देक प्रान्त में लगी आग से 1600 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़े वन नष्ट, रूसी पनडुब्बी के सभी 118 सदस्यों के मारे जाने की पुष्टि। 2003 - संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने इराक में संयुक्त शांति सेना भेजने का प्रस्ताव खारिज किया। 2005 - बांग्लादेश और भारत की सीमा सुरक्षा बल के जवानों के बीच संघर्ष विराम का समझौता सम्पन्न। 2006 - इराक के अपदस्थ राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने नरसंहार ट्रायल में भाग लेने से इन्कार किया। 2008 - श्रीनगर और 'पाक अधीकृत कश्मीर' की राजधानी मुजफ्फराबाद के बीच चलने वाली कारवां-ए-अमन बस सेवा पुनः प्रारम्भ। 2008 - मून मिशन पर भारत ने नासा से हाथ मिलाया। 2009 - भारतीय नौसेना का लड़ाकू विमान ‘सी हेरियर’ गोवा से उड़ान भरने के पश्चात् अरब सागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 2009 - विमान चालक ले. कमाण्डर सौरभ सक्सेना का निधन। 2012 - अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में इबोला वायरस के संक्रमण से 20 लोगों की जानें गई। 2013 - मलेशिया में चिन स्वी मंदिर के समीप बस हादसे में 37 लोग मारे गए और 16 घायल लोग हुए। 2014 - राफा में इजरायली हवाई हमले में हमास के तीन शीर्ष कमांडर मारे गए। 2019 - केन्‍द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने देशभर में 42 लाख सरकारी शिक्षकों के प्रशिक्षण की अभूतपूर्व राष्‍ट्रीय पहल ‘निष्‍ठा’ का शुभारंभ किया। 2019 - अमेरिकी विदेश विभाग ने ताइवान को 66 एफ-16 लड़ाकू विमान बेचने के लिए अपनी स्वीकृति दी। 2019 - बीजिंग में भारत और चीन के बीच 9 वीं वार्षिक रक्षा और सुरक्षा वार्ता आयोजित हुई।  2020 - खेल मंत्रालय ने देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार खेल रत्न के लिये जिन पांच खिलाड़ियों के नाम की सिफारिश की गयी थी, उन्हें स्वीकार कर लिया । 2021 - तालिबान का अफगानिस्तान में पहला फतवा जारी , लड़के - लड़कियों के साथ पढ़ने पर रोक लगाई। 2022 - केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुणे में KPIT - CSIR द्वारा विकसित भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल बस का शुभारंभ किया। 2022 - महिला पुलिस का 10वां राष्ट्रीय सम्‍मेलन शिमला में शुरू हुआ। 2022 - हरियाणा (हिसार के भगाना गांव) की अंतिम पंघाल अंडर-20 विश्‍व कुश्‍ती चैंपियनशिप में स्‍वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। 2023 - भारत ने इंडोनेशिया के सेमारंग में आयोजित आसियान-भारत आर्थिक मंत्रियों की 20वीं बैठक में भाग लिया। 2023 - मालाबार अभ्यास का 27वां संस्करण सिडनी के पास ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर संपन्न हुआ। 2023 - स्वामित्व योजना के तहत अधिकारों के रिकॉर्ड की बैंकिंग संबंधी योग्यता पर गोलमेज चर्चा आयोजित की गई। 2023- निनटेंडो के वीडियो गेम में मारियो की आवाज़ देने वाले चार्ल्स मार्टिनेट 27 साल बाद सेवानिवृत्त हुए। 2023 - भारत और समोआ के बीच पहली विदेश कार्यालय परामर्श की बैठक आपिया में आयोजित हुई। 2024 - PM मोदी ने पोलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। 2024 - आंध्रप्रदेश की फार्मा फैक्ट्री में आग लगने से 18 की मौत हुई व 36 लोगों को अस्पताल ले जाया गया। 2025 - राज्यसभा में 'ऑनलाइन गेमिंग का प्रमोशन और रेगुलेशन बिल पारित हुआ।   21 अगस्त को जन्मे व्यक्ति   1871 - गोपाल कृष्ण देवधर - भारत के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता तथा सेवक। 1910 - नारायण श्रीधर बेन्द्रे - प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार थे। 1912 - डॉ. ब्रह्म प्रकाश - पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित भारतीय वैज्ञानिक थे। 1915 - इस्मत चुग़ताई - भारतीय साहित्य में एक चर्चित और सशक्त कहानीकार के रूप में विख्यात। 1927 - बी. सत्य नारायण रेड्डी - एक स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी नेता और उत्तर प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल। 1931 - प्राध्यापक विजयशंकर व्यास एक कृषि-अर्थशास्त्री हैं जिन्हें अर्थशास्त्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने सन् 2005 पद्मभूषण से सम्मानित किया। 1934 - सुधाकरराव नाईक - महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री। 1949 - अहमदभाई मुहम्मदभाई पटेल प्रचलित नाम (अहमद पटेल) राज्य सभा व लोकसभा के पूर्व सदस्य। 1953 - शैलेश नायक एक भारतीय वैज्ञानिक। 1961 - कृष्ण कन्हाई - एक भारतीय कलाकार और चित्रकार। 1978 - भूमिका चावला - भारतीय अभिनेत्री। 1979 - पेमा खांडू - भारत के सबसे युवा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री। 1986 – दुनिया के सबसे तेज तर्रार धावक यूसैन बोल्ट (आठ बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता) का जमैका में जन्म हुआ।   21 अगस्त को हुए निधन   1931 - पंडित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर, प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक। 1945 – ब्रिटेन के प्रख्यात विद्वान व पूर्वी मामलों के विशेषज्ञ रेनॉल्ड निकोल्सन। 1948 - वामनराव बलिराम लाखे - भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों में से एक। 1978 - वीनू मांकड़ - भारत के महान् क्रिकेट खिलाड़ियों में से एक थे। 1981 - काका कालेलकर - भारत के प्रसिद्ध गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद, पत्रकार और लेखक। 1982 – स्विटजर लैंड के राजा सोभूजा द्वितीय का निधन हुआ। 1983 – फिलीपीन्‍स के विपक्षी नेता बेनिग्‍नो अक्‍कीनो की हत्‍या हुई। 1995 - सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर - खगोल भौतिक शास्त्री। 2004 - सच्चिदानंद राउतराय एक उड़िया साहित्यकार। 2006 - उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँन - 'भारत रत्न' से सम्मानित प्रख्यात शहनाई वादक। 2007 - क़ुर्रतुलऐन हैदर - उर्दू की प्रसिद्ध लेखिका थी।  2019 - मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का 89 की उम्र में निधन हुआ। 2021 - उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री कल्याण सिंह जी का निधन हुआ। 2022 - पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना के बचपन के कोच सतपाल कृष्णन का निधन हुआ। 2023 - दुनिया के सबसे उम्रदराज हाथियों में से एक बिजुली प्रसाद की 89 वर्ष की अनुमानित आयु में एक भारतीय चाय बागान में मृत्यु हुई। 2025 - भारत के प्रसिद्ध खगोल भौतिक विज्ञानी व खगोल विज्ञान के इतिहासकार प्रो. रमेश चंद्र कपूर (76) का निधन हुआ।   21 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   श्री सुधाकरराव नाईक जयन्ती। श्री पेमा खांडू जन्म दिवस। उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ स्मृति दिवस। श्री बाबूलाल गौर स्मृति दिवस। श्री कल्याण सिंह स्मृति दिवस। अन्तर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस। पद्म भूषण सम्मानित भारतीय क्रिकेट के ऑलराउंडर भूतपूर्व कप्तान वीनू मांकड़ जी पुण्यतिथि। महान खगोल व भौतिक शास्त्री पद्म भूषण सम्मानित सुब्रह्मण्यम् चंद्रशेखर जी पुण्यतिथि। विश्व उद्यमी दिवस (World Entrepreneurs' Day)। आतंकवाद के पीड़ितों की याद और श्रद्धांजलि देने का अंतरराष्ट्रीय दिवस  (International Day of Remembrance and Tribute to the Victims of Terrorism)। कृपया ध्यान दें    यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

anjali kumari अगस्त 21, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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लखीसराय के अशोक धाम में करंट का कहर, 7 महिलाओं की मौत; कई श्रद्धालु घायल, चार मृतकों की पहचान

surbhi अगस्त 17, 2026 0