रांची। हर साल 16 जुलाई को दुनिया भर में विश्व सर्प दिवस (World Snake Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों में सांपों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उनसे जुड़े भ्रम दूर करना और पर्यावरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को समझाना है। झारखंड जैसे राज्यों में, जहां मानसून के दौरान सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 से अप्रैल 2026 तक झारखंड में स्नेकबाइट के 9,438 मामले दर्ज किए गए हैं। इस दौरान कई लोगों की जान भी गई है। हर साल बढ़ रहे हैं स्नेकबाइट के मामले स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्ष 2022 में 392, 2023 में 1,647, 2024 में 2,760 और 2025 में 4,078 स्नेकबाइट के मामले दर्ज किए गए। अप्रैल 2026 तक ही 561 मामले सामने आ चुके हैं। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों और चिकित्सकों को केंद्र सरकार की स्नेकबाइट उपचार संबंधी गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। झारखंड में 40 से 50 प्रजाति के सांप वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक झारखंड में 40 से 50 प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं। इनमें इंडियन कोबरा (नाग), कॉमन करैत, बैंडेड करैत, रसेल वाइपर और बांस पिट वाइपर प्रमुख विषैले सांप हैं। वहीं धामिन, ग्रीन वाइन स्नेक और वुल्फ स्नेक जैसी कई प्रजातियां विषहीन हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश सांप इंसानों पर हमला नहीं करते और वे पर्यावरण में चूहों व अन्य कीटों की संख्या नियंत्रित कर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। सांप काटने पर झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल जाएं डॉक्टरों का कहना है कि सांप काटने की स्थिति में घबराने के बजाय मरीज को शांत रखें और जितनी जल्दी हो सके अस्पताल पहुंचाएं। प्रभावित अंग को स्थिर रखें, रस्सी या कपड़ा कसकर न बांधें और झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय समय पर एंटी स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध कराना सबसे प्रभावी इलाज है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर चिकित्सकीय उपचार मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
कार्डिफ, एजेंसियां। भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला गुरुवार को कार्डिफ के सोफिया गार्डन्स मैदान में खेला जाएगा। पहला मुकाबला छह विकेट से जीतकर टीम इंडिया सीरीज में 1-0 की बढ़त बना चुकी है। अब भारतीय टीम की नजर इंग्लैंड के खिलाफ लगातार चौथी वनडे सीरीज जीतने पर होगी। भारत ने इससे पहले 2021 में घरेलू मैदान पर 2-1, 2022 में इंग्लैंड में 2-1 और 2025 में भारत में 3-0 से सीरीज अपने नाम की थी। कार्डिफ में शानदार रहा है भारत का रिकॉर्ड कार्डिफ में भारतीय टीम का रिकॉर्ड बेहद मजबूत रहा है। टीम इंडिया को इस मैदान पर आखिरी वनडे हार 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ मिली थी। इसके बाद भारत ने यहां 2013 चैंपियंस ट्रॉफी में दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका को हराया, जबकि 2014 में इंग्लैंड को 133 रन से शिकस्त दी थी। ऐसे में भारतीय टीम आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेगी। गिल, अक्षर और बुमराह पर रहेंगी नजरें कप्तान शुभमन गिल शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने इस साल सात वनडे मैचों में 453 रन बनाए हैं और पहले वनडे में भी 80 रनों की कप्तानी पारी खेली थी। हालांकि उन्हें हल्की चोट के कारण रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा था, लेकिन दूसरे मुकाबले में उनके खेलने की उम्मीद है। वहीं अक्षर पटेल ने पहले मैच में नाबाद अर्धशतक लगाने के साथ चार विकेट भी झटके थे। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की वापसी से भारतीय गेंदबाजी और मजबूत हुई है, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा भी लगातार विकेट निकाल रहे हैं। इंग्लैंड वापसी की कोशिश में इंग्लैंड की उम्मीदें अनुभवी बल्लेबाज जो रूट पर टिकी होंगी, जिन्होंने पहले वनडे में नाबाद 76 रन बनाए थे। कप्तान हैरी ब्रूक की टीम गेंदबाजी संयोजन में बदलाव कर चौथे तेज गेंदबाज को मौका दे सकती है। पिच और मौसम बल्लेबाजी के अनुकूल सोफिया गार्डन्स की पिच पर शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की संभावना है, लेकिन बाद में बल्लेबाजी आसान हो जाती है। पिछले वर्षों में यहां लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों का रिकॉर्ड बेहतर रहा है। मौसम साफ रहने और बारिश की संभावना नहीं होने से पूरे 50 ओवर का मुकाबला होने की उम्मीद है। भारत इस मैच को जीतकर सीरीज अपने नाम करने के इरादे से मैदान में उतरेगा।
बर्मिंघम, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का शानदार आगाज़ करते हुए पहले मुकाबले में 6 विकेट से जीत दर्ज की। एजबेस्टन में खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया और सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। शुभमन गिल ने खेली कप्तानी पारी कप्तान शुभमन गिल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 80 रन बनाए और भारत की जीत की मजबूत नींव रखी। हालांकि पारी के दौरान उन्हें ऐंठन (क्रैम्प) की शिकायत हुई, जिसके चलते उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने पारी को संभालते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया। अक्षर पटेल बने जीत के हीरो ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पहले गेंदबाजी में 4 विकेट झटके और फिर नाबाद 57 रन की पारी खेली। उनके साथ वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन बनाए। शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए अक्षर पटेल को 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। इंग्लैंड की पारी लड़खड़ाई टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन 61 रन तक बिना विकेट गंवाने के बाद उसने तेजी से विकेट खो दिए। जो रूट (76)* और लियाम डॉसन (68) ने पारी संभालते हुए टीम को 258 रन तक पहुंचाया, लेकिन यह स्कोर भारत के सामने कम साबित हुआ। भारत ने लक्ष्य आसानी से हासिल कर इंग्लैंड के एजबेस्टन में लंबे समय से चले आ रहे वनडे दबदबे को भी खत्म कर दिया।
मैनचेस्टर, एजेंसियां। भारतीय ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 विकेट पूरे करते हुए यह मुकाम हासिल करने वाले भारत के पहले स्पिनर बनने का गौरव हासिल किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ अक्षर अब भारत के उन चुनिंदा गेंदबाजों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय में 100 या उससे अधिक विकेट लिए हैं। हैरी ब्रूक का विकेट लेकर पूरा किया शतक अक्षर पटेल ने इंग्लैंड की पारी के दौरान खतरनाक बल्लेबाज हैरी ब्रूक को आउट कर अपना 100वां टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेट हासिल किया। इस विकेट के साथ उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। अक्षर से पहले कोई भी भारतीय स्पिनर टी20 अंतरराष्ट्रीय में 100 विकेट के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया था। भारत के चौथे गेंदबाज बने इस उपलब्धि के साथ अक्षर पटेल टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 विकेट लेने वाले भारत के चौथे गेंदबाज बन गए। उनसे पहले यह कारनामा तेज गेंदबाजों हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह कर चुके हैं। अब अक्षर इस विशिष्ट सूची में शामिल होने वाले पहले भारतीय स्पिनर हैं। हार के बीच भी यादगार रहा दिन हालांकि भारत को दूसरे टी20 मुकाबले में इंग्लैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा, लेकिन अक्षर पटेल की यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के लिए यादगार बन गई। क्रिकेट विशेषज्ञों ने उनकी निरंतरता और सीमित ओवरों के क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन की सराहना की है।
मैनचेस्टर, एजेंसियां। भारत और इंग्लैंड के बीच ओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में इंग्लैंड ने रोमांचक अंदाज में 4 विकेट से जीत दर्ज कर ली। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 190/7 का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया, लेकिन इंग्लैंड ने 19 ओवर में 191/6 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। ईशान किशन और अभिषेक शर्मा ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत की शुरुआत तेज रही। अभिषेक शर्मा ने 24 गेंदों में 43 रन, जबकि ईशान किशन ने 40 गेंदों पर 49 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अपने अंतरराष्ट्रीय पदार्पण पर 10 गेंदों में 14 रन बनाए, जिसमें दो छक्के शामिल रहे। अंत में तिलक वर्मा की उपयोगी पारी की बदौलत भारत ने 190/7 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। इंग्लैंड की ओर से सैम करन ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। जैकब बेथेल की विस्फोटक पारी ने पलटा मैच 191 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। फिल सॉल्ट और जोस बटलर पहले ही ओवर में बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद जैकब बेथेल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 46 गेंदों में नाबाद 76 रन बनाए। उन्हें हैरी ब्रूक (39 रन) और टॉम बैंटन (39 रन) का अच्छा साथ मिला। इंग्लैंड ने 19वें ओवर में लक्ष्य हासिल कर मुकाबला जीत लिया। अर्शदीप की शानदार गेंदबाजी भी नहीं बचा सकी भारत को भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में 40 रन देकर 3 विकेट झटके। अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती को एक-एक सफलता मिली, लेकिन डेथ ओवरों में भारतीय गेंदबाज इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर दबाव नहीं बना सके। मैच का निर्णायक मोड़ रवि बिश्नोई का 17वां ओवर रहा, जिसमें इंग्लैंड ने तेजी से 29 रन बटोरे और जीत की नींव रखी।
आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम को 2-0 से मिली हार के बाद खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस बीच भारत के पूर्व मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा की बल्लेबाजी पर कड़ी नाराजगी जताई है। श्रीकांत ने आरोप लगाया कि तिलक वर्मा ने टीम की जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी नहीं की, बल्कि मैच को अंत तक ले जाकर खुद मैच जिताने की कोशिश में धीमी पारी खेली। उनके मुताबिक मिडिल ओवरों में धीमी बल्लेबाजी भारतीय टीम की हार की बड़ी वजह बनी। मिडिल ऑर्डर का प्रदर्शन रहा निराशाजनक पूरी टी20 सीरीज में भारतीय टीम का मिडिल ऑर्डर उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। खासकर स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आए। रिपोर्ट के अनुसार, तिलक वर्मा, शिवम दुबे और अक्षर पटेल का स्ट्राइक रेट मिडिल ओवरों में काफी धीमा रहा, जिससे टीम पावरप्ले में मिली अच्छी शुरुआत का फायदा नहीं उठा सकी। इसके अलावा, कहा गया कि आईपीएल 2024 के बाद से स्पिन के खिलाफ तिलक वर्मा के प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली है। इसी वजह से 2026 टी20 विश्व कप के दौरान टीम प्रबंधन ने उन्हें मिडिल ऑर्डर की बजाय फिनिशर की भूमिका में भी आजमाया था। दूसरे टी20 में नहीं दिला सके जीत सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारत को 155 रन का लक्ष्य मिला था। टीम की शुरुआत खराब रही और महज 19 रन पर तीन विकेट गिर गए। इसके बाद तिलक वर्मा ने एक छोर संभालकर बल्लेबाजी की और मुकाबले को आखिरी ओवर तक पहुंचाया। हालांकि अंतिम क्षणों में रन गति बढ़ाने में टीम सफल नहीं हो सकी और भारत को 1 रन से हार का सामना करना पड़ा। श्रीकांत ने क्या कहा? अपने यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान कृष्णमाचारी श्रीकांत ने भारतीय बल्लेबाजी की आलोचना करते हुए कहा कि— "आप मिडिल ओवरों में उस तरह बल्लेबाजी नहीं कर सकते जैसी भारत ने की। खासकर तिलक वर्मा, शिवम दुबे और अक्षर पटेल का स्ट्राइक रेट बेहद खराब था। शुरुआत में पारी संभालना जरूरी होता है, लेकिन उसके बाद तेजी से रन बनाने भी जरूरी हैं।" उन्होंने कहा कि यदि मिडिल ओवरों में रन गति रुक जाती है तो लक्ष्य हासिल करना काफी मुश्किल हो जाता है। 'सिर्फ अपने लिए खेल रहे थे' श्रीकांत ने तिलक वर्मा के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि— "तिलक वर्मा सिर्फ अपने लिए खेल रहे थे। वह सिंगल-डबल लेकर मैच को आखिरी तक ले जाना चाहते थे ताकि अंत में खुद मैच जिताकर हीरो बन सकें। ऐसे लक्ष्य का पीछा आखिरी गेंद तक नहीं, बल्कि एक ओवर पहले पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।" बहस का विषय बनी बल्लेबाजी हालांकि तिलक वर्मा की पारी को लेकर क्रिकेट जगत में अलग-अलग राय सामने आ सकती हैं। कुछ विशेषज्ञ मुश्किल परिस्थितियों में विकेट बचाकर खेलने को सही रणनीति मानते हैं, जबकि अन्य का मानना है कि टी20 क्रिकेट में आवश्यक रन गति बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण होता है। आयरलैंड के खिलाफ मिली सीरीज हार के बाद भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर की बल्लेबाजी और मैच फिनिश करने की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है।
नई दिल्ली: टी20 विश्व कप 2026 जीतने के बाद भारतीय टीम से आयरलैंड दौरे पर शानदार प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। दो मैचों की टी20 सीरीज में भारत को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। पहले मुकाबले में 183 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम 34 रन से हार गई, जबकि दूसरे मैच में 155 रन के लक्ष्य को भी हासिल नहीं कर सकी। सीरीज के दौरान कई खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीद से काफी नीचे रहा। आइए जानते हैं उन पांच खिलाड़ियों के बारे में, जिनका प्रदर्शन भारत की हार की बड़ी वजह बना। 1. श्रेयस अय्यर नई टी20 कप्तानी की शुरुआत श्रेयस अय्यर के लिए बेहद निराशाजनक रही। बल्लेबाजी के साथ-साथ कप्तानी में भी वह प्रभाव नहीं छोड़ सके। सीरीज प्रदर्शन: पहला मैच: 3 रन (7 गेंद) दूसरा मैच: 10 रन कप्तान होने के नाते उनसे बड़ी पारी और बेहतर रणनीति की उम्मीद थी, लेकिन दोनों मोर्चों पर टीम को निराशा मिली। 2. संजू सैमसन विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन भी टीम को अच्छी शुरुआत नहीं दिला सके। सीरीज प्रदर्शन: पहला मैच: 5 रन दूसरा मैच: पहली ही गेंद पर आउट लगातार दो खराब पारियों ने शीर्ष क्रम पर दबाव बढ़ा दिया। 3. ईशान किशन आईपीएल में शानदार फॉर्म के बावजूद ईशान किशन आयरलैंड के खिलाफ लय में नजर नहीं आए। सीरीज प्रदर्शन: पहला मैच: 1 रन दूसरा मैच: 12 रन दूसरे मुकाबले में रन आउट होना भी भारत के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। 4. अक्षर पटेल अनुभवी ऑलराउंडर अक्षर पटेल गेंद और बल्ले दोनों से अपेक्षित योगदान नहीं दे सके। प्रदर्शन: गेंदबाजी: पहले मैच में 2 विकेट, दूसरे में कोई विकेट नहीं बल्लेबाजी: 15 और 14 रन टीम को उनसे मैच जिताने वाले प्रदर्शन की उम्मीद थी। 5. तिलक वर्मा तिलक वर्मा ने रन जरूर बनाए, लेकिन उनकी बल्लेबाजी की गति सवालों के घेरे में रही। सीरीज प्रदर्शन: पहला मैच: 19 रन (21 गेंद) दूसरा मैच: 55 रन (46 गेंद) टी20 क्रिकेट की जरूरत के हिसाब से उनकी स्ट्राइक रेट अपेक्षाकृत धीमी रही, जिससे टीम पर दबाव बढ़ता गया। हार से मिले बड़े सबक आयरलैंड के खिलाफ यह सीरीज हार भारतीय टीम के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी, शीर्ष क्रम की विफलता और दबाव के क्षणों में खराब फैसलों ने टीम को दोनों मुकाबलों में नुकसान पहुंचाया। हालांकि, यह युवा टीम के लिए अपनी कमजोरियों को पहचानने और आने वाली सीरीज से पहले सुधार करने का भी अवसर है।
Delhi Capitals का Indian Premier League में सफर एक बार फिर प्लेऑफ से पहले खत्म हो गया। लगातार पांचवें सीजन टीम टॉप-4 में जगह बनाने में नाकाम रही। इस बार टीम ने शुरुआत तो शानदार की थी, लेकिन पूरे सीजन में छोटे-छोटे मौकों को भुनाने में असफल रहने का खामियाजा उसे भुगतना पड़ा। सीजन खत्म होने के बाद दिल्ली कैपिटल्स के कोच Hemang Badani ने माना कि टीम कई ऐसे मैच हार गई, जिन्हें आसानी से जीता जा सकता था। “कई मैच हमारे हाथ में थे” KKR के खिलाफ आखिरी मैच जीतने के बाद बदानी ने कहा कि टीम ने कई अहम मौकों पर गलतियां कीं। उनके मुताबिक: Gujarat Titans के खिलाफ टीम सिर्फ 1 रन से हार गई Punjab Kings के खिलाफ 264 रन का विशाल स्कोर भी डिफेंड नहीं कर पाई Chennai Super Kings और Sunrisers Hyderabad के खिलाफ महत्वपूर्ण कैच छोड़े गए बदानी ने कहा कि यही छोटी गलतियां आखिरकार टीम को प्लेऑफ से दूर ले गईं। विकेट लेने में रही बड़ी परेशानी दिल्ली कैपिटल्स ने पूरे सीजन में 14 मैचों में सिर्फ 64 विकेट लिए, जो लीग की सबसे खराब गेंदबाजी परफॉर्मेंस में शामिल रहा। Mitchell Starc का शुरुआती नौ मैचों में उपलब्ध न होना भी टीम के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। स्टार्क ने सिर्फ 6 मैच खेले और 11 विकेट लिए। हालांकि बदानी ने साफ कहा कि सिर्फ स्टार्क की गैरमौजूदगी को बहाना नहीं बनाया जा सकता। उनके अनुसार: “हमारे पास मौके थे, लेकिन हम उन छोटे अंतर को अपने पक्ष में नहीं बदल सके। आईपीएल छोटे मार्जिन का खेल है।” अक्षर पटेल ने कप्तानी को लेकर कही बड़ी बात टीम के कप्तान Axar Patel ने भी माना कि टीम लगातार संघर्ष करती रही, लेकिन अंत तक लड़ाई नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि कप्तानी के दौरान सबसे बड़ा सबक उन्हें मानसिक संतुलन बनाए रखने का मिला। अक्षर पटेल ने कहा: कप्तान के तौर पर खुद का शांत रहना बेहद जरूरी है निराशा में लिए गए फैसले टीम पर गलत असर डाल सकते हैं पहले खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखना जरूरी है IPL 2026 में अक्षर पटेल का प्रदर्शन: 13 पारियां बल्लेबाजी औसत 20 से कम 11 विकेट दिल्ली कैपिटल्स के लिए आगे क्या? अब अगले सीजन से पहले फ्रेंचाइजी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले दो वर्षों के लिए टीम का संचालन फिर से JSW Sports के हाथों में जाएगा, जबकि पिछले समय में कंट्रोल GMR Sports के पास था। दिल्ली कैपिटल्स के लिए IPL 2026 एक बार फिर “क्या होता अगर…” वाला सीजन बनकर रह गया। टीम में चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन सवाल अब भी वही बने हुए हैं। कुछ अहम मौकों पर हार, कमजोर गेंदबाजी और दबाव में गलत फैसले - यही इस सीजन की सबसे बड़ी कहानी रही।
Delhi Capitals ने आईपीएल 2026 के 62वें मुकाबले में Rajasthan Royals को 5 विकेट से हराकर प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखा है। इस जीत के साथ दिल्ली कैपिटल्स अंकतालिका में सातवें स्थान पर पहुंच गई, जबकि राजस्थान रॉयल्स की राह अब और कठिन हो गई है। अब राजस्थान को प्लेऑफ में जगह बनाने के लिए अपने बाकी दोनों मुकाबले हर हाल में जीतने होंगे। राजस्थान की पारी: जुरेल और पराग ने संभाला मोर्चा टॉस जीतकर दिल्ली ने पहले गेंदबाजी का फैसला किया। राजस्थान की शुरुआत अच्छी नहीं रही और यशस्वी जायसवाल सिर्फ 12 रन बनाकर आउट हो गए। टीम का पहला विकेट 19 रन पर गिरा। इसके बाद वैभव सूर्यवंशी और ध्रुव जुरेल ने पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों के बीच दूसरे विकेट के लिए 70 रन की साझेदारी हुई। सूर्यवंशी 46 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद ध्रुव जुरेल और रियान पराग ने तीसरे विकेट के लिए 72 रन जोड़कर राजस्थान को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। रियान पराग ने 51 रन की शानदार पारी खेली, जबकि जुरेल ने 53 रन बनाए। हालांकि आखिरी ओवरों में राजस्थान की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई और टीम 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 193 रन ही बना सकी। दिल्ली के लिए गेंदबाजी में: मिचेल स्टार्क ने 4 विकेट लुंगी एनगिडी ने 2 विकेट माधव तिवारी ने 2 विकेट हासिल किए। दिल्ली की शानदार शुरुआत 194 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत बेहद मजबूत रही। अभिषेक पोरेल और केएल राहुल ने पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी कर राजस्थान के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। अभिषेक पोरेल ने 51 रन की अहम पारी खेली। इसके बाद साहिर पारख सिर्फ 9 रन बनाकर आउट हो गए। केएल राहुल ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए 56 रन बनाए। उनके आउट होने तक दिल्ली मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी थी। अक्षर पटेल और आशुतोष शर्मा ने दिलाई जीत मध्यक्रम में डेविड मिलर और ट्रिस्टन स्टब्स जल्दी आउट हो गए, लेकिन कप्तान अक्षर पटेल एक छोर पर टिके रहे। उन्होंने नाबाद 34 रन बनाकर टीम को जीत के करीब पहुंचाया। अंत में आशुतोष शर्मा ने तेज 18 रन बनाकर दिल्ली को 5 विकेट से यादगार जीत दिला दी। राजस्थान की ओर से: जोफ्रा आर्चर ने 2 विकेट बृजेश शर्मा ने 2 विकेट लिए। प्लेऑफ की रेस हुई और रोमांचक इस जीत के बाद दिल्ली कैपिटल्स ने प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखा है। वहीं राजस्थान रॉयल्स के लिए अब हर मुकाबला फाइनल जैसा हो गया है। आने वाले मैच तय करेंगे कि कौन सी टीम अंतिम चार में जगह बना पाएगी।
Indian Premier League में Punjab Kings की लगातार चौथी हार के बाद टीम की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। Delhi Capitals के खिलाफ 211 रन का बड़ा स्कोर बनाने के बावजूद पंजाब मुकाबला हार गया, और सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि कप्तान Shreyas Iyer ने अनुभवी स्पिनर Yuzvendra Chahal से एक भी ओवर क्यों नहीं करवाया। यह आईपीएल इतिहास में सिर्फ चौथा मौका था जब Yuzvendra Chahal ने पूरे मैच में एक भी गेंद नहीं डाली। खास बात यह रही कि धर्मशाला में खेले गए इस मुकाबले के सभी 39 ओवर तेज गेंदबाजों ने फेंके। अभिषेक मुकुंद ने बताया कहां हुई गलती पूर्व भारतीय ओपनर Abhinav Mukund ने मैच के बाद कहा कि पंजाब को मध्य ओवरों में चहल को कम से कम एक-दो ओवर जरूर देने चाहिए थे। उनके मुताबिक, जब स्कोरबोर्ड का दबाव था तब विकेट निकालने के लिए जोखिम लिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि सातवें से दसवें ओवर के बीच चहल को गेंदबाजी दी जा सकती थी, खासकर उस समय जब Axar Patel और Tristan Stubbs बल्लेबाजी कर रहे थे। अगर प्रयोग सफल नहीं होता, तो टीम के पास Marcus Stoinis जैसे विकल्प मौजूद थे। Miller और Axar ने बदल दिया मैच दिल्ली की जीत में David Miller और Axar Patel की अहम भूमिका रही। दोनों बल्लेबाजों ने मध्य ओवरों में रन गति बनाए रखी और पंजाब के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। पूर्व न्यूजीलैंड तेज गेंदबाज Mitchell McClenaghan का मानना है कि चहल को खास तौर पर डेविड मिलर के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि मिलर अपने शुरुआती ओवरों में लेग स्पिन के खिलाफ थोड़ा सतर्क रहते हैं और चहल उनके लिए खतरा बन सकते थे। पंजाब ने डेथ ओवरों में गंवाया नियंत्रण पंजाब ने डेथ ओवरों में Marcus Stoinis और युवा तेज गेंदबाज Yash Thakur पर भरोसा जताया। उस समय दिल्ली को जीत के लिए 38 रन चाहिए थे, लेकिन दिल्ली के बल्लेबाजों ने दोनों ओवरों में तेजी से रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया। श्रेयस अय्यर ने क्या कहा? मैच के बाद कप्तान Shreyas Iyer ने माना कि चहल को गेंदबाजी देने पर विचार किया गया था। हालांकि उनका कहना था कि पिच पर तेज गेंदबाजों को काफी मदद मिल रही थी और टीम को लगा कि सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी कर विकेट निकाले जा सकते हैं। लेकिन पंजाब के गेंदबाज उस योजना को पूरी तरह लागू नहीं कर सके और दिल्ली ने 19 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। अब भी प्लेऑफ की उम्मीद बरकरार लगातार चार हार के बावजूद Punjab Kings की प्लेऑफ उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं। टीम के तीन मुकाबले बाकी हैं, जिनमें दो मैच निचले पायदान पर मौजूद Mumbai Indians और Lucknow Super Giants के खिलाफ हैं। ऐसे में पंजाब के पास वापसी का मौका अभी भी मौजूद है।
Indian Premier League के 55वें मुकाबले में Delhi Capitals ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Punjab Kings को 3 विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ दिल्ली कैपिटल्स को अंक तालिका में बड़ा फायदा मिला है, जबकि पंजाब किंग्स की लगातार चौथी हार ने टीम की चिंता बढ़ा दी है। धर्मशाला के Himachal Pradesh Cricket Association Stadium में खेले गए मुकाबले में दिल्ली ने 211 रनों का बड़ा लक्ष्य हासिल कर सीजन की पांचवीं जीत दर्ज की। इस जीत के बाद दिल्ली की टीम सातवें स्थान पर पहुंच गई है। दिल्ली को जीत से मिला बड़ा फायदा Delhi Capitals अब 12 मैचों में 5 जीत और 10 अंकों के साथ अंक तालिका में सातवें स्थान पर पहुंच गई है। हालांकि टीम का नेट रन रेट अभी भी -0.993 है। वहीं Punjab Kings हार के बावजूद चौथे स्थान पर बनी हुई है। पंजाब के खाते में 11 मैचों में 6 जीत और 13 अंक हैं। अंक तालिका में फिलहाल शीर्ष स्थान पर Royal Challengers Bengaluru मौजूद है। टीम ने 11 मुकाबलों में 14 अंक हासिल किए हैं और उसका नेट रन रेट +1.103 है। IPL 2026 अपडेटेड पॉइंट्स टेबल स्थान टीम मैच जीत हार अंक नेट रन रेट 1 रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 11 7 4 14 +1.103 2 सनराइजर्स हैदराबाद 11 7 4 14 +0.737 3 गुजरात टाइटंस 11 7 4 14 +0.228 4 पंजाब किंग्स 11 6 4 13 +0.428 5 चेन्नई सुपर किंग्स 11 6 5 12 +0.185 6 राजस्थान रॉयल्स 11 6 5 12 +0.082 7 दिल्ली कैपिटल्स 12 5 7 10 -0.993 8 कोलकाता नाइट राइडर्स 10 4 5 9 -0.169 9 मुंबई इंडियंस 11 3 8 6 -0.585 10 लखनऊ सुपर जायंट्स 11 3 8 6 -0.907 ऐसा रहा मुकाबला Delhi Capitals ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए Punjab Kings ने 4 विकेट के नुकसान पर 210 रन बनाए। पंजाब की ओर से Shreyas Iyer और Priyansh Arya ने शानदार अर्धशतकीय पारियां खेलीं। दोनों बल्लेबाजों की मदद से टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया। 211 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली की शुरुआत उतनी मजबूत नहीं रही, लेकिन कप्तान Axar Patel और David Miller ने शानदार अर्धशतक लगाकर टीम को मुकाबले में बनाए रखा। आखिर में Ashutosh Sharma ने तेज 24 रन बनाकर दिल्ली को 19 ओवर में जीत दिला दी। प्लेऑफ की रेस हुई और रोमांचक Indian Premier League में अब प्लेऑफ की जंग और दिलचस्प हो गई है। दिल्ली की जीत ने निचले क्रम की टीमों की उम्मीदें जिंदा रखी हैं, जबकि पंजाब की लगातार हार ने टीम पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले मुकाबले अब सभी टीमों के लिए बेहद अहम साबित होंगे।
आईपीएल 2026 में Delhi Capitals के लिए घरेलू मैदान पर प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। टीम ने Arun Jaitley Stadium में अब तक खेले गए 5 मुकाबलों में सिर्फ एक जीत दर्ज की है। इस प्रदर्शन के बीच टीम के हेड कोच Hemang Badani ने पिच की अनिश्चितता को बड़ी वजह बताया है। “पिच पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं” बदानी ने साफ तौर पर कहा कि टीमों के पास अपनी घरेलू पिच चुनने का अधिकार नहीं होता। उन्होंने बताया कि Board of Control for Cricket in India (BCCI) ही पिच तैयार करवाता है, ताकि किसी भी टीम को घरेलू फायदा न मिले। उनके मुताबिक, “आपको वही खेलना पड़ता है जो पिच पर मिलता है। दिल्ली में हमें अब तक यह समझने में दिक्कत हुई है कि किस तरह की पिच मिलेगी–कभी हाई-स्कोरिंग, तो कभी बेहद मुश्किल।” एक ही मैदान, अलग-अलग कहानियां दिल्ली के मैदान पर इस सीजन विरोधाभासी परिस्थितियां देखने को मिलीं। एक मैच में स्कोर 265 बनाम 264 तक पहुंच गया वहीं अगले ही मैच में टीम सिर्फ 75 रन पर ऑलआउट हो गई हालिया मुकाबले में पिच धीमी और स्पिन के अनुकूल रही, जिससे चेन्नई के स्पिनर्स ने मैच पर पकड़ बना ली। गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में संघर्ष स्पिनर Kuldeep Yadav का प्रदर्शन इस सीजन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। 30 ओवर में सिर्फ 7 विकेट इकॉनमी 10 से ज्यादा वहीं कप्तान Axar Patel गेंद से प्रभावी रहे, लेकिन बल्ले से संघर्ष करते दिखे। उन्होंने 7 पारियों में सिर्फ 33 रन बनाए हैं। कोच का भरोसा बरकरार खराब फॉर्म के बावजूद बदानी ने अपने खिलाड़ियों पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि ये खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित कर चुके हैं और वापसी करना जानते हैं। बदानी का मानना है कि अगर टीम 20-25 रन और जोड़ पाती, तो विरोधी टीम के बल्लेबाज–खासतौर पर Sanju Samson–के लिए मैच को नियंत्रित करना इतना आसान नहीं होता। क्या है आगे की चुनौती? दिल्ली कैपिटल्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब पिच की अनिश्चितता के बीच खुद को ढालना है। आईपीएल जैसे प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में जहां हर मैच अहम होता है, वहां टीम को हर परिस्थिति में जीत का रास्ता निकालना ही होगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।