Babulal Marandi

JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर बाबूलाल मरांडी की CBI जांच की मांग
JPSC-JSSC परीक्षा रद्द करने पर बाबूलाल मरांडी का हमला, बोले- CBI जांच से ही मिलेगा छात्रों को न्याय

रांची। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड की सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि परीक्षाएं रद्द करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच CBI से कराई जाए, ताकि कथित गड़बड़ी, नौकरी खरीद-फरोख्त और इसके पीछे शामिल लोगों का पता चल सके।   परीक्षाएं रद्द करना समाधान नहीं- बाबूलाल   बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बीजेपी शुरू से ही परीक्षाएं रद्द करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार परीक्षा रद्द करने का फैसला लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि छात्रों की मुख्य मांग कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच है। उन्होंने कहा कि मीडिया में सामने आई रिपोर्टों में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।   CID जांच पर भी उठाए सवाल   बीजेपी नेता ने CID की जांच पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि CID पहले इन मामलों की जांच कर चुकी है और अदालत के समक्ष ऐसी रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें परीक्षा में गड़बड़ी या नौकरी की बिक्री से इनकार किया गया था। बाबूलाल ने कहा कि अगर पहले की जांच पर ही सवाल उठ रहे हैं तो उसी एजेंसी से दोबारा जांच कराने से छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद कम है। उन्होंने जांच को कथित तौर पर गलत दिशा में ले जाने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की।   JSSC चेयरमैन को हटाने पर सवाल   बाबूलाल मरांडी ने JSSC की कई परीक्षाओं को लेकर सामने आए विवादों का हवाला देते हुए आयोग के चेयरमैन पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब आयोग लगातार विवादों में है तो उसके चेयरमैन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कथित तौर पर परीक्षा में शामिल भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों को बचाने की कोशिश कर रही है।   सरकार पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप   नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार छात्रों के आंदोलन को खत्म करने के लिए परीक्षा रद्द करने का फैसला लाई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य छात्रों की मांग का स्थायी समाधान करना नहीं, बल्कि आंदोलन को शांत करना है। बाबूलाल ने यह भी दावा किया कि परीक्षा रद्द करने के फैसले को लेकर सरकार को अदालत में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार को परीक्षा रद्द करने के पर्याप्त आधार और सबूत अदालत के सामने रखने होंगे।   अन्नपूर्णा देवी ने भी साधा निशाना   वहीं, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी JPSC-CGL परीक्षा को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। बोकारो में उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लेने में काफी देर की। उनके मुताबिक, छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे और कथित धांधली की CBI जांच की मांग कर रहे थे। अन्नपूर्णा देवी ने सवाल उठाया कि जब छात्र CBI जांच की मांग कर रहे हैं तो राज्य सरकार इससे क्यों बच रही है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।   'CBI जांच से ही सामने आएगा पूरा सच'   बाबूलाल मरांडी ने कहा कि CBI जांच होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित तौर पर पैसे देकर नौकरी किसने खरीदी, नौकरी बेचने वाले कौन थे और पूरी प्रक्रिया के पीछे कौन लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि छात्रों को न्याय दिलाने के लिए बीजेपी CBI जांच की मांग पर कायम रहेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
MMDR Bill को लेकर बाबूलाल मरांडी का हेमंत सोरेन और JMM पर हमला
MMDR Bill: JMM के आंदोलन पर भड़के बाबूलाल, हेमंत सोरेन पर साधा निशाना

रांची। खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड में सियासत तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से विधेयक के विरोध में आंदोलन की घोषणा के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज विधेयक को लेकर सरकार की ओर से किया जा रहा विरोध छात्रों के आंदोलन को भटकाने की कोशिश है।   संशोधन विधेयक में बड़ा बदलाव नहीं: बाबूलाल     बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संशोधन विधेयक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, इसमें राज्यों की ओर से प्रमुख खनिजों पर अलग-अलग तरीके से लगाए जाने वाले कर पर नियंत्रण की व्यवस्था की गई है।   उन्होंने कहा कि विधेयक के कानून बनने के बाद राज्य सरकारों के लिए इस तरह से सेस लगाने की व्यवस्था प्रभावित होगी। बाबूलाल ने झारखंड सरकार पर कोयला और लौह अयस्क पर सेस लगाने को लेकर भी सवाल उठाए।   'सांसदों ने संसद में विरोध क्यों नहीं किया?'     बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पारित हो रहा था, तब विपक्षी सांसदों को सदन में बहस और विरोध करना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय इस मुद्दे पर प्रभावी तरीके से चर्चा नहीं की गई और अब झारखंड में आंदोलन की बात कही जा रही है।   उन्होंने कहा कि MMDR एक्ट में एकरूपता लाने का प्रावधान किया गया है। उनका दावा है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग शुल्क की वजह से छोटे कारोबारियों को परेशानी होती थी।   'बिना केंद्र की अनुमति के राज्य नहीं लगा सकेंगे टैक्स'     बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नए प्रावधान के तहत केंद्र की अनुमति के बिना राज्य सरकारों द्वारा कुछ प्रकार के अतिरिक्त कर लगाने पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून सिर्फ झारखंड के लिए नहीं है, क्योंकि देश के कई राज्यों में खनिज संसाधन मौजूद हैं।   उन्होंने रॉयल्टी में राज्य और केंद्र के हिस्से का भी जिक्र किया। बाबूलाल के अनुसार, पहले रॉयल्टी में राज्यों को 60.24 फीसदी हिस्सा मिलता था, जबकि अब यह हिस्सा बढ़कर 88.53 फीसदी और केंद्र का हिस्सा 11.47 फीसदी हो गया है।   सेस को लेकर राज्य सरकार पर हमला     नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड सरकार ने 2024 में सेस से जुड़े नियम बनाए और इसके बाद तीन बार सेस की राशि बढ़ाई गई। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल कोयले पर राज्य सरकार 450 रुपये प्रति टन और लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन सेस ले रही है।   उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सेस की दरें इससे कम हैं। उनके मुताबिक, इस तरह के अतिरिक्त सेस से झारखंड को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।   'छात्र आंदोलन को भटकाने की कोशिश'     बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार MMDR एक्ट को लेकर आंदोलन की बात करके JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों पर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।   उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को बार-बार वार्ता के नाम पर लटकाया और भटकाया जा रहा है। बाबूलाल ने कहा कि सरकार की ओर से दोबारा वार्ता के लिए बुलाए जाने को लेकर भी छात्रों को सतर्क रहना चाहिए।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
Babulal Marandi addressing concerns over alleged irregularities in JSSC-CGL and JPSC recruitment exams in Jharkhand
JSSC-CGL और JPSC घोटाले पर बाबूलाल मरांडी का हमला, बोले- दोषियों पर FIR हो, CBI जांच कराए सरकार

रांची: झारखंड में JSSC-CGL और JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गयी है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए भर्ती परीक्षाओं की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि परीक्षाओं से जुड़े मामलों में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गयी है. उन्होंने सरकार से छात्रों के सवालों का जवाब देने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की. JSSC अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग बाबूलाल मरांडी ने जेएसएससी के प्रभारी चेयरमैन आईएएस प्रशांत कुमार और सचिव सुधीर गुप्ता को पद से हटाने तथा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या करते हुए जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने के मामले में सरकार अपनी मजबूरी बता रही है. उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं, तो सरकार को जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई करनी चाहिए. JPSC और JSSC मामलों में अलग-अलग कार्रवाई पर सवाल नेता प्रतिपक्ष ने जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े मामलों में कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि जेपीएससी प्रकरण में इस्तीफा देने वाले तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते जेल गये, तो जेएसएससी मामले में इस्तीफा देने वाले नीरज सिन्हा के खिलाफ उसी तरह की कार्रवाई क्यों नहीं हुई. बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि दोनों मामलों में कार्रवाई के तरीके अलग-अलग हैं. उन्होंने सरकार से इस अंतर को स्पष्ट करने की मांग की. 'घूस देकर नौकरी पाने वालों पर भी हो कार्रवाई' बाबूलाल मरांडी ने भर्ती परीक्षाओं में कथित तौर पर पैसे देकर नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम रिश्वत देकर नौकरी पाने के आरोपों में सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए. उन्होंने मांग की कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ऐसे लोगों को तत्काल पद से हटाकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए. छात्रों के सवालों का जवाब दे सरकार नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा कि सरकार को आंदोलन कर रहे छात्रों के सवालों का जवाब देना चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्र लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत साफ है तो आरोपी अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने में देरी नहीं होनी चाहिए. CBI जांच की मांग बाबूलाल मरांडी ने छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए JSSC-CGL और JPSC से जुड़े मामलों की जांच CBI को सौंपने की मांग की. उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही सच्चाई सामने आ सकेगी और दोषियों की जिम्मेदारी तय हो सकेगी. उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई, एफआईआर और जांच को लेकर ठोस कदम नहीं उठाये जाते, तब तक छात्रों का आंदोलन समाप्त नहीं होगा.  

kalpana अगस्त 17, 2026 0
JPSC JSSC विवाद को लेकर बाबूलाल मरांडी की प्रतिक्रिया
JPSC-JSSC विवाद: वार्ता से पहले बाबूलाल मरांडी के तीखे सवाल, नीरज सिन्हा-प्रशांत कुमार पर कार्रवाई की मांग

रांची। JPSC और JSSC परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सोमवार दोपहर 2 बजे वार्ता प्रस्तावित है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कई सवाल पूछते हुए कथित गड़बड़ियों से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।   प्रशांत कुमार और नीरज सिन्हा पर कार्रवाई का सवाल     बाबूलाल मरांडी ने JSSC-CGL विवाद का जिक्र करते हुए प्रभारी चेयरमैन IAS प्रशांत कुमार और सचिव सुधीर गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर सरकार परीक्षा रद्द करने को लेकर कोर्ट के आदेश की व्याख्या के कारण मजबूर है, तो अधिकारियों को पद से हटाने, FIR दर्ज कराने और जांच शुरू करने में क्या परेशानी है।   उन्होंने JSSC के पूर्व अध्यक्ष नीरज सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर भी सरकार से जवाब मांगा।   ‘दो मामलों में अलग-अलग रवैया क्यों?’     बाबूलाल मरांडी ने JPSC मामले में इस्तीफा देने वाले ख्यांगते की गिरफ्तारी और JSSC मामले में इस्तीफा देने वाले नीरज सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की तुलना की। उन्होंने सवाल उठाया कि दोनों मामलों में अलग-अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है।   उन्होंने यह भी पूछा कि क्या अधिकारियों के IAS और IPS कैडर से होने के कारण कार्रवाई में अंतर किया जा रहा है।   वायरल नामों की जांच और FIR की मांग     नेता प्रतिपक्ष ने परीक्षा विवाद में कथित तौर पर घूस देकर नौकरी हासिल करने से जुड़े वायरल हो रहे 10-12 नामों की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ है तो संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर उन्हें पद से हटाया जाए और जरूरत पड़ने पर FIR दर्ज की जाए।     CBI जांच की मांग दोहराई     बाबूलाल मरांडी ने JPSC और JSSC से जुड़े विवादित मामलों की जांच CBI से कराने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार को सिर्फ आंदोलन खत्म कराने की कोशिश करने के बजाय छात्रों की ओर से उठाए जा रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।     आज दोपहर 2 बजे सरकार-छात्र वार्ता     JPSC-JSSC विवाद को लेकर सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच सोमवार दोपहर 2 बजे वार्ता होनी है। सरकार की ओर से मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल छात्रों से बातचीत करेगा। इस बैठक में छात्रों की मांगों और परीक्षा विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।   इससे पहले रविवार को आंदोलनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन कर विरोध जताया था। ऐसे में आज होने वाली वार्ता पर सभी की नजरें टिकी हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
Police and administration officials reach Jaipal Singh Stadium amid ongoing JPSC student protest in Ranchi
जयपाल सिंह स्टेडियम में आधी रात पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम, बाबूलाल मरांडी बोले- छात्रों के आंदोलन को दबाने की कोशिश न करे सरकार

रांची। झारखंड में 14वीं JPSC परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। इसी बीच मंगलवार देर रात रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में पुलिस-प्रशासन की टीम के पहुंचने को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि देर रात प्रशासन ने धरने पर बैठे छात्रों को हटाने की कोशिश की और धरनास्थल की बिजली भी काट दी गई। मरांडी ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच सिटी एसपी, एसएसपी और डीसी समेत कई अधिकारी जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचे थे। छात्रों को हटाने की कोशिश का लगाया आरोप बाबूलाल मरांडी के मुताबिक, प्रशासन की ओर से छात्रों से कहा गया कि JPSC से संबंधित मामला सुलझ चुका है और अब धरना जारी रखने की जरूरत नहीं है। हालांकि, रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने इस दावे से अलग पक्ष रखा। उनके अनुसार, वह छात्रों का हालचाल जानने और उनकी परेशानियों को समझने के लिए धरनास्थल पहुंचे थे। मरांडी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से धरना और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को आधी रात में परेशान करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया। बिजली काटने का भी लगाया आरोप नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि देर रात धरनास्थल की बिजली काट दी गई। इसके बाद छात्रों ने अपने सहयोगियों और अन्य लोगों को फोन कर मौके पर बुलाया। आरोप के अनुसार, भाजपा प्रदेश महामंत्री अमर बावरी, भानु राज सिन्हा समेत कई अन्य लोग भी रात में जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचे। इसके बाद पुलिस और प्रशासन की टीम धीरे-धीरे वहां से वापस लौट गई। 14वीं JPSC परीक्षा रद्द होने के बावजूद क्यों जारी है आंदोलन? मरांडी ने कहा कि सरकार की ओर से 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने का निर्णय छात्रों की सभी मांगों का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, आंदोलन कर रहे छात्रों की सबसे बड़ी मांग परीक्षा में कथित गड़बड़ी की CBI जांच है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कराई जा रही CID जांच पर भी सवाल उठाया। मरांडी का कहना है कि छात्रों और झारखंड की जनता का इस जांच पर भरोसा नहीं है। CBI जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पूरे मामले की जांच CBI से कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने हाई कोर्ट की निगरानी में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की मांग की। उनके अनुसार, इससे परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े सबूत रखने वाले छात्रों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई और निर्दोष लोगों को राहत मिल सकेगी। मरांडी ने सरकार से सवाल किया कि यदि उसे अपनी जांच और कार्रवाई पर पूरा भरोसा है, तो CBI जांच कराने में उसे आपत्ति क्यों है। रात में कार्रवाई को बताया अनुचित नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने का अधिकार है। उन्होंने प्रशासन से धरना खत्म कराने के बजाय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धरनास्थल पर बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहनी चाहिए। साथ ही किसी भी परिस्थिति में लाठीचार्ज या बल प्रयोग करके आंदोलन खत्म करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। आंदोलन बढ़ने की दी चेतावनी मरांडी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्रों के आंदोलन को बलपूर्वक खत्म करने का प्रयास किया गया तो इसकी प्रतिक्रिया पूरे झारखंड में देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि JPSC की परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र राज्य के अलग-अलग जिलों और गांवों से आते हैं। ऐसे में आंदोलन के व्यापक रूप लेने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने 10 अगस्त को बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इससे पहले इतना बड़ा और अनुशासित छात्र आंदोलन नहीं देखा। सरकार से की संयम बरतने की अपील बाबूलाल मरांडी ने सरकार और जिला प्रशासन से छात्रों को चुनौती देने के बजाय उनकी बात सुनने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक खत्म करने के बजाय सरकार को छात्रों की मुख्य मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। नोट: उपरोक्त खबर उपलब्ध कराए गए समाचार पाठ के आधार पर पूरी तरह पुनर्लिखित है। इसमें प्रशासन और विपक्ष की ओर से सामने आए अलग-अलग दावों को उनके पक्ष के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
JPSC JSSC Controversy
JPSC-JSSC विवाद: बाबूलाल का हमला, बोले- CBI जांच से क्यों भाग रही सरकार?

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच कराने से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें संरक्षण देने की कोशिश कर रही है, ताकि जांच की आंच ऊपर तक न पहुंच सके।   ED की ECIR के बाद पूर्व मुख्य सचिव की गिरफ्तारी पर सवाल   बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि सरकार अब तक छात्रों से JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली की ED से जांच कराने की बात कहती रही है। लेकिन ED की ओर से ECIR दर्ज किए जाने के बाद पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया।   उन्होंने कहा कि एल. ख्यांग्ते को CID पहले ही चार बार पूछताछ के लिए बुला चुकी थी। मरांडी ने दावा किया कि कुछ वर्ष पहले इसी तरह ACB ने विनय चौबे को ED की जांच से बचाने के लिए गिरफ्तार किया था।   राज्य की एजेंसियों की निष्पक्षता पर उठाए सवाल   नेता प्रतिपक्ष ने JPSC और JSSC में कथित तौर पर नौकरी बेचने के मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के करीबी बताए जाने वाले विनोद सिंह, मुख्य सचिव अविनाश कुमार के सहयोगी धर्मेंद्र और पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते जैसे नामों के सामने आने के बाद राज्य की जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।   मरांडी ने JSSC-CGL मामले में हुई CID जांच का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस मामले में भी छात्रों ने जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए थे।   ‘CBI जांच से क्यों भाग रही सरकार?’   बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार आरोपियों को गिरफ्तार कर केंद्रीय एजेंसियों की जांच की पहुंच को सीमित करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि अगर JPSC-JSSC की कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष CBI जांच होती है, तो उसकी आंच मुख्यमंत्री तक भी पहुंच सकती है।   मरांडी ने इसी आशंका को सरकार के CBI जांच से बचने की वजह बताया। हालांकि, ये सभी आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।   11 अगस्त को विधानसभा में CM ने क्या कहा?   JPSC-JSSC विवाद के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 11 अगस्त को विधानसभा में सरकार का रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा कि सरकार 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने के लिए तैयार है। इसके अलावा जिन परीक्षाओं के आयोजन में TDPL एजेंसी की भूमिका रही है, उनकी भी जांच कराने की बात कही।   मुख्यमंत्री ने भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए IIT, IIM और XLRI जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों से सलाह लेने की बात कही। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाया जाएगा।   छात्रों की मांग पर अब भी कायम है गतिरोध   वहीं, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा परिणाम रद्द करना और TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की जांच CBI से कराने की मांग शामिल है।   ऐसे में सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच गतिरोध बना हुआ है। अब बाबूलाल मरांडी के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

anjali kumari अगस्त 12, 2026 0
BJP MLAs protesting outside the Jharkhand Chief Minister’s residence in Ranchi
विधानसभा छोड़ CM आवास घेरने पहुंचे भाजपा विधायक,स्पीकर ने कहा- अच्छी परंपरा नहीं

रांची: झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को सदन में बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला. JPSC-JSSC विवाद को लेकर भाजपा विधायक विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने के बजाय मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने पहुंच गये. इसके चलते विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष का एक भी विधायक मौजूद नहीं रहा. सोमवार सुबह मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले ही छात्रों के विधानसभा घेराव को लेकर राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं. भाजपा विधायक पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के आवास पर जुटे. इसके बाद बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा विधायक और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए निकल गये. मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान भाजपा नेता हिरासत में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने छात्रों के मुद्दे और JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक दिया. इसके बाद कई भाजपा विधायकों और नेताओं को हिरासत में लेकर खेलगांव ले जाया गया. विधायकों के हिरासत में लिये जाने के कारण विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष की मौजूदगी नहीं रही. सदन में प्रश्नकाल से लेकर अनुपूरक बजट पर चर्चा तक केवल सत्ता पक्ष के विधायक ही नजर आये. राज्य गठन के बाद पहली बार विपक्षी विधायक सदन से रहे बाहर बताया गया कि राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है, जब विपक्षी विधायक हिरासत में लिये जाने के कारण सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सके. हालांकि, इससे पहले भी विपक्ष के वॉकआउट के कारण विधानसभा की कार्यवाही बिना विपक्ष के चल चुकी है. इस बार स्थिति अलग रही, क्योंकि भाजपा विधायकों ने पहले मुख्यमंत्री आवास के घेराव का कार्यक्रम किया और प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया. स्पीकर ने जतायी नाराजगी विपक्षी विधायकों की अनुपस्थिति पर विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने नाराजगी जतायी. उन्होंने कहा कि यह संसदीय परंपरा के लिहाज से उचित नहीं है. उनका कहना था कि विधायकों को सदन में रहकर सवाल उठाने चाहिए और सरकार से जवाब मांगना चाहिए. स्पीकर ने कहा कि सवाल पूछकर सदन में मौजूद नहीं रहना संसदीय व्यवस्था के लिए अच्छी परंपरा नहीं है. अरूप चटर्जी ने सदन में उठाया छात्रों का मुद्दा इधर, सदन में छात्रों के विधानसभा घेराव का मुद्दा भी उठा. विधायक अरूप चटर्जी ने JPSC-JSSC विवाद और छात्रों के आंदोलन का मामला सदन में रखा. उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की मांगों को लेकर काफी हद तक कदम उठाये हैं, लेकिन JSSC CGL परीक्षा को लेकर कोर्ट का हवाला दिया जा रहा है. उन्होंने मांग की कि सरकार कोर्ट के माध्यम से मामले में हस्तक्षेप कर जांच कराये. अरूप चटर्जी ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, हालांकि आंदोलन के बीच कुछ उपद्रवी तत्वों के शामिल होने की बात भी सामने आयी है. सदन के बाहर छात्र आंदोलन, अंदर सियासी टकराव एक तरफ रांची की सड़कों पर JPSC-JSSC अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ भाजपा विधायकों ने भी मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की. भाजपा नेताओं की गैरमौजूदगी के बीच विधानसभा की कार्यवाही सत्ता पक्ष के विधायकों के साथ चलती रही. इस पूरे घटनाक्रम ने छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड की राजनीति में टकराव और बढ़ा दिया है.  

kalpana अगस्त 11, 2026 0
Babulal Marandi Statement
JPSC-JSSC विवाद पर बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, छात्रों के समर्थन में उठाई आवाज

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। मरांडी ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा और आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।   छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना   रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद भाजपा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा और तेज कर दिया है। बाबूलाल मरांडी समेत भाजपा के कई नेता छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं।   मरांडी का कहना है कि रोजगार की मांग कर रहे युवाओं की समस्याओं को सुनने के बजाय उन पर पुलिस बल का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से छात्रों के साथ बातचीत कर उनकी मांगों का समाधान निकालने की मांग की।   भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता का आरोप   बाबूलाल मरांडी ने JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर भी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इससे पहले उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है और अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है।   भाजपा लगातार इन मामलों की निष्पक्ष जांच और कथित पेपर लीक एवं अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग कर रही है। पार्टी का कहना है कि छात्रों को न्याय मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।   विधानसभा मार्च के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव   सोमवार को JPSC-JSSC अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर मार्च किया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी और पुलिस कार्रवाई की गई।   घटना के बाद भाजपा ने 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान किया। बंद का मुख्य मुद्दा छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर दबाव बनाना है।   सरकार पर बढ़ा दबाव   JPSC-JSSC आंदोलन अब सिर्फ छात्र संगठनों तक सीमित नहीं रहा है। भाजपा समेत विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। वहीं, छात्रों की मांगों और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है।   बाबूलाल मरांडी के ताजा हमले के बाद सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और आंदोलन को खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाती है या नहीं।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
JPSC-JSSC protestors gathered near barricades during the Assembly gherao in Ranchi
JPSC-JSSC विधानसभा घेराव: चौथे बैरिकेड तक पहुंचे छात्र, देवेंद्र महतो भी आंदोलन में शामिल; BJP नेता हिरासत में

रांची: JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में छात्रों का विधानसभा घेराव आंदोलन सोमवार को उग्र हो गया. राज्य के अलग-अलग जिलों से रांची पहुंचे छात्र पुराने विधानसभा से नयी विधानसभा की ओर बढ़े. इस दौरान कई जगह पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर छात्र आगे बढ़े. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और वाटर कैनन भी तैयार रखा गया है. चौथे बैरिकेड तक पहुंचे छात्र जगन्नाथपुर मंदिर के पास छात्रों को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया. इसके बाद प्रदर्शनकारी धरने पर बैठ गये और नारेबाजी करने लगे. इससे पहले छात्रों ने मौसीबाड़ी के पास दूसरी बैरिकेडिंग और फिर आगे की बैरिकेडिंग तोड़ दी. छात्र चौथे बैरिकेड तक पहुंच गये हैं. शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर पहुंचे देवेंद्र महतो JLKM नेता देवेंद्रनाथ महतो भी छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए. वह पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर प्रदर्शन करते नजर आये. बताया जा रहा है कि महतो पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. वह एंबुलेंस से विधानसभा की ओर रवाना हुए थे. वाटर कैनन और ड्रोन से निगरानी प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस ने विधानसभा के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है. रास्ते में तीन लेयर की बैरिकेडिंग की गयी है. मौके पर वाटर कैनन तैनात है, जबकि ड्रोन कैमरे से पूरे प्रदर्शन की निगरानी और रिकॉर्डिंग की जा रही है. BJP नेताओं को भी हिरासत में लिया गया छात्र आंदोलन के बीच भाजपा ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की कोशिश की. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई विधायक और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया. पुलिस सभी हिरासत में लिये गये प्रदर्शनकारियों को बसों से खेलगांव स्टेडियम लेकर गयी, जहां उन्हें गेस्ट हाउस में रखा गया है. 24 जिलों से पहुंचे छात्र आंदोलनकारियों के अनुसार, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर विधानसभा घेराव में शामिल होने के लिए राज्य के 24 जिलों से छात्र रांची पहुंचे हैं. छात्रों का आरोप है कि कई जगह उन्हें रांची आने से रास्ते में ही रोका गया. प्रदर्शनकारी सरकार से परीक्षा में कथित गड़बड़ियों पर ठोस कार्रवाई और अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन की मांग कर रहे हैं. विधानसभा में विपक्ष नदारद विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन JPSC-JSSC मुद्दे पर हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही जारी है. शुरुआती कार्यवाही के दौरान विपक्ष का कोई विधायक सदन में मौजूद नहीं था और सत्ता पक्ष के विधायकों के सवाल लिये जा रहे थे.  

kalpana अगस्त 10, 2026 0
JPSC-JSSC आंदोलन के बीच हिरासत में लिए गए बाबूलाल मरांडी और भाजपा नेता
JPSC-JSSC Protest: बाबूलाल मरांडी समेत BJP नेता हिरासत में, विधानसभा सत्र से दूर रहे भाजपा विधायक

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के बीच सोमवार को सियासी हलचल भी तेज हो गई। छात्रों के विधानसभा घेराव के समानांतर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत भाजपा विधायक और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने पहुंचे। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। सभी को रांची के खेलगांव ले जाया गया।   CM आवास के बाहर BJP का जोरदार प्रदर्शन     भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने JPSC-JSSC छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग की।   प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा विधायक, नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।   बाबूलाल मरांडी और आदित्य साहू भी हिरासत में     पुलिस कार्रवाई में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू समेत कई भाजपा नेता और विधायक हिरासत में लिए गए। हिरासत में लिए गए सभी नेताओं को रांची के खेलगांव ले जाया गया, जहां उन्हें डिटेन किया गया है।   बताया जा रहा है कि नेताओं को सोमवार शाम तक खेलगांव में ही रखा जा सकता है।   विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हो सके BJP विधायक     भाजपा विधायकों के हिरासत में लिए जाने का सीधा असर विधानसभा की कार्यवाही पर पड़ा। पार्टी के कई विधायक हिरासत में होने के कारण सोमवार को विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हो सके।   भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार JPSC-JSSC छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की।   छात्रों के विधानसभा घेराव के बीच बढ़ी सुरक्षा     सोमवार को JPSC-JSSC आंदोलनकारी छात्रों ने भी विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। छात्रों के मार्च और भाजपा के प्रदर्शन को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।   विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।   JPSC-JSSC आंदोलन ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी     भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। एक ओर छात्र सरकार पर मांगों को लेकर दबाव बना रहे हैं, वहीं भाजपा ने भी आंदोलन के समर्थन में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।   सोमवार को छात्रों और भाजपा के अलग-अलग प्रदर्शन के कारण रांची में राजनीतिक गतिविधियां और सुरक्षा व्यवस्था दोनों चरम पर रहीं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
BJP leaders and workers protesting near the Jharkhand Chief Minister’s residence in Ranchi
CM आवास घेरने पहुंचे BJP नेता और कार्यकर्ता, पुलिस से झड़प; बाबूलाल समेत कई नेता हिरासत में

रांची: झारखंड में जारी छात्र आंदोलन के बीच भाजपा ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा विधायक और सैकड़ों कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर पहुंचे और प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी थी. बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गयी. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए. इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक और हल्की झड़प भी हुई. बाबूलाल मरांडी समेत कई नेता हिरासत में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे भाजपा नेताओं, विधायकों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू किया. आदित्य साहू और बाबूलाल मरांडी समेत कई नेताओं को हिरासत में लेकर खेलगांव ले जाया गया. भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है. प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी की. बाबूलाल बोले- मुख्यमंत्री तत्काल इस्तीफा दें नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों के मुद्दे पर सरकार पूरी तरह विफल रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की. वहीं, पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने भी सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. छात्र आंदोलन के बीच राजधानी में सुरक्षा कड़ी गौरतलब है कि JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है. आज विधानसभा घेराव का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है. इसे देखते हुए रांची के कई इलाकों में बैरिकेडिंग कर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. मुख्यमंत्री आवास के घेराव की सूचना के बाद सुरक्षा और बढ़ा दी गयी. पुलिस अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं. खेलगांव में डिटेन किए गए भाजपा नेता पुलिस ने हिरासत में लिए गए भाजपा विधायकों और नेताओं को खेलगांव पहुंचाया. वहां सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गयी. भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ भी मौके पर जुटी रही. फिलहाल मुख्यमंत्री आवास और आसपास के इलाकों में पुलिस की तैनाती जारी है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन अलर्ट है.  

kalpana अगस्त 10, 2026 0
Bihar political leaders during election discussions as the Bankipur bypoll sparks debate over changing caste equations and voter trends.
क्या नीतीश से दूर हो रहा 'लव' समीकरण? बांकीपुर उपचुनाव ने बदली बिहार की जातीय राजनीति की चर्चा

पटना: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। चुनाव परिणाम के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या राज्य की पारंपरिक जातीय राजनीति में बदलाव की शुरुआत हो रही है? खासकर यादव और कुर्मी वोटों के एक साथ आने की चर्चा ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को मिले समर्थन के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या कुर्मी समाज का एक वर्ग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू से दूरी बना रहा है, या फिर यह केवल उपचुनाव तक सीमित एक राजनीतिक संदेश था। बिहार की राजनीति में 'सोशल इंजीनियरिंग' का इतिहास मंडल राजनीति के बाद बिहार में जातीय समीकरण चुनावी राजनीति की धुरी रहे हैं। एक समय लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण बेहद प्रभावी रहा। दूसरी ओर, वर्ष 1994 में नीतीश कुमार ने लालू यादव से अलग होकर जॉर्ज फर्नांडिस के साथ समता पार्टी बनाई और बाद में जनता दल (यूनाइटेड) के जरिए 'लव-कुश' (कुर्मी-कोइरी/कुशवाहा) सामाजिक समीकरण को मजबूत किया। इसी सामाजिक समीकरण और भाजपा के सवर्ण एवं वैश्य समर्थन के साथ एनडीए ने बिहार की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई और लंबे समय तक सत्ता में रहा। क्या यादव और कुर्मी वोट एक मंच पर आ रहे हैं? बांकीपुर उपचुनाव के बाद चर्चा इस बात की है कि जन सुराज के उम्मीदवार को यादव और कुर्मी दोनों वर्गों का समर्थन मिला। यदि यह आकलन सही है, तो यह बिहार की पारंपरिक जातीय राजनीति में एक नए समीकरण की संभावना का संकेत माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि एक उपचुनाव के आधार पर पूरे राज्य की राजनीति का आकलन नहीं किया जा सकता। कुर्मी समाज की नाराजगी बनी चर्चा का विषय राजनीतिक विश्लेषणों में यह भी कहा जा रहा है कि बांकीपुर उपचुनाव ऐसे समय हुआ जब मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के हटने को लेकर कुर्मी समाज के एक वर्ग में असंतोष था। इसके साथ ही जदयू के संगठनात्मक नेतृत्व में बदलाव और पार्टी की कार्यशैली को लेकर भी कुछ वर्गों में नाराजगी की चर्चा रही। विश्लेषकों का मानना है कि इन परिस्थितियों का असर उपचुनाव में देखने को मिला, जहां कुछ पारंपरिक वोट बैंक में बदलाव के संकेत दिखाई दिए। क्या यह बदलाव स्थायी है? वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क का मानना है कि बांकीपुर में दिखाई दिया यह राजनीतिक समीकरण फिलहाल परिस्थितिजन्य हो सकता है। उनके अनुसार, कुर्मी समाज में नाराजगी जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह स्थायी रूप से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ जाएगा। उनका कहना है कि यदि जदयू भविष्य में अपने पारंपरिक समर्थकों का भरोसा दोबारा जीतने में सफल नहीं होती, तो कुर्मी वोटों का एक हिस्सा जन सुराज की ओर जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं और भविष्य के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना अभी संभव नहीं है। राजनीतिक संकेतों पर सबकी नजर बांकीपुर उपचुनाव ने यह जरूर संकेत दिया है कि बिहार की राजनीति में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि यह बदलाव स्थायी होगा या सिर्फ उपचुनाव तक सीमित रहेगा, इसका जवाब आने वाले विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियां ही देंगी।  

surbhi अगस्त 7, 2026 0
BJP legislators protesting over the alleged JPSC-JSSC recruitment irregularities outside the Jharkhand Assembly in Ranchi.
JPSC-JSSC मामले पर विधानसभा में हंगामा, BJP विधायकों का प्रदर्शन तेज; अनशन कर रहे छात्र की बिगड़ी तबीयत

रांची: झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र दूसरे दिन भी JPSC-JSSC कथित धांधली मामले को लेकर गरमाया रहा. विपक्षी दल बीजेपी ने सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. बीजेपी विधायक सदन के बाहर से लेकर अंदर तक इस मुद्दे पर सरकार को घेरते नजर आए. वहीं, दूसरी ओर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अपनी मांगों को लेकर अनशन कर रहे एक छात्र की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. 'JPSC रेट चार्ट' पहनकर विधानसभा पहुंचे BJP विधायक विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले बीजेपी विधायकों ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया. कई विधायक शरीर पर 'JPSC रेट चार्ट' लिखे चोले पहनकर विधानसभा पहुंचे. इन चोलों पर जेपीएससी की विभिन्न नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर आरोप लिखे गए थे. बीजेपी विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई. सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी विपक्षी विधायक शांत नहीं हुए और वेल में पहुंचकर हंगामा किया. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब तक सरकार पूरे मामले की सीबीआई जांच का आदेश नहीं देती, तब तक पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है. अनशन कर रहे छात्र राहुल की बिगड़ी तबीयत इधर, जेपीएससी-जेडएसएससी मामले को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है. शुक्रवार को अनशन पर बैठे छात्र राहुल की अचानक तबीयत खराब हो गई. स्थिति बिगड़ने के बाद साथी छात्रों ने तुरंत एंबुलेंस की व्यवस्था की और उसे इलाज के लिए रांची सदर अस्पताल भेजा गया. फिलहाल छात्र का इलाज जारी है. घटना की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी गई है. छात्रों की मांगों को लेकर जारी है आंदोलन अभ्यर्थी लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. वहीं सरकार की ओर से मामले में बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही जा रही है. JPSC-JSSC विवाद को लेकर विधानसभा के अंदर और बाहर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है. आने वाले दिनों में भी इस मुद्दे पर विपक्ष के आक्रामक रुख जारी रहने के संकेत हैं.  

kalpana अगस्त 7, 2026 0
Babulal Marandi
JPSC-JSSC विवाद पर बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, सीबीआई जांच और अधिकारियों पर एफआईआर की मांग

हजारीबाग। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हजारीबाग के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और भारतीय जनता पार्टी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करती है।   सीआईडी जांच पर उठाए सवाल   बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार द्वारा कराई जा रही सीआईडी जांच केवल खानापूर्ति है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे ही परीक्षा अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सकेगी।   अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग   मरांडी ने मांग की कि JPSC और JSSC में कार्यरत सभी संबंधित अधिकारियों और पदाधिकारियों को तत्काल पदमुक्त कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।   अभय तिवारी मामले का किया जिक्र   प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने हाल ही में गिरफ्तार अभय तिवारी का भी उल्लेख किया। मरांडी ने दावा किया कि जांच में सामने आया है कि उसके परिवार के कुछ सदस्यों को हालिया भर्ती परीक्षाओं में नौकरी मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरे भर्ती घोटाले की ओर इशारा करता है और इसकी गहन जांच आवश्यक है।   छात्रों के आंदोलन को बताया जायज   मरांडी ने कहा कि राज्यभर में छात्र परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांगें उचित हैं। उनके अनुसार, यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो युवाओं का सरकारी भर्ती परीक्षाओं से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि JPSC और JSSC जैसी महत्वपूर्ण भर्ती एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय भर्ती प्रक्रिया को विवादों में डाल रही हैं, इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
पलामू में समय पर मातृत्व अवकाश न मिलने से गर्भवती शिक्षिका के बच्चे की मौत का मामला
पलामू में गर्भवती शिक्षिका को छुट्टी न मिलने का आरोप, गर्भ में बच्चे की मौत; अधिकारियों पर एफआईआर की मांग

पलामू। झारखंड के पलामू जिले में एक गर्भवती सरकारी शिक्षिका को समय पर मातृत्व अवकाश नहीं मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि छुट्टी नहीं मिलने के कारण स्कूल में ही उनकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाने पर गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई। मामले को लेकर परिजनों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और शिक्षा विभाग के दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।   छुट्टी नहीं मिलने से बिगड़ी तबीयत   जानकारी के अनुसार, शिक्षिका भारती पांडेय तरहसी स्थित प्लस-2 हाई स्कूल में पदस्थापित हैं और उनकी प्रतिनियुक्ति चैनपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में थी। परिजनों का आरोप है कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में होने के बावजूद उन्हें मातृत्व अवकाश नहीं दिया गया। स्कूल में प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई।   रिश्वत मांगने का भी आरोप   परिजनों का आरोप है कि अवकाश स्वीकृत करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों और दो क्लर्कों ने ₹50,000 रिश्वत की मांग की थी। उनका कहना है कि शिक्षिका ने कई बार अधिकारियों से छुट्टी की गुहार लगाई थी और शिक्षक संघ के साथ जिला प्रशासन से भी शिकायत की थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।   एफआईआर की मांग, पुलिस ने शुरू की जांच   शिक्षिका के पति मुकेश कुमार तिवारी ने मेदिनीनगर टाउन थाना में आवेदन देकर जिला शिक्षा अधीक्षक और दो क्लर्कों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। थाना प्रभारी ने बताया कि आवेदन प्राप्त हो गया है और मामले की जांच की जा रही है।   शिक्षा विभाग ने आरोपों से किया इनकार   जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप कुमार ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। वहीं, मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और भाजपा नेताओं ने घटना की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 27, 2026 0
JPSC controversy deepens
JPSC विवाद गहराया: बाबूलाल मरांडी ने सदस्य जमाल अहमद को हटाने और ACB जांच की उठाई मांग

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े विवादों के बीच नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने आयोग के सदस्य जमाल अहमद को पद से हटाने तथा उनकी कथित आय से अधिक संपत्ति की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।   मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में लगाए गंभीर आरोप   बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जमाल अहमद ने पिछले कुछ वर्षों में अपने पद का दुरुपयोग कर बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्ति अर्जित की है। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।   रांची और हजारीबाग में संपत्तियों का लगाया आरोप   पत्र में मरांडी ने दावा किया कि जमाल अहमद के पास रांची में 3000 से 4000 वर्गफुट का एक आलीशान फ्लैट है और वे शहर में एक अन्य बड़े फ्लैट की भी तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा हजारीबाग में भी उनके नाम या कथित बेनामी संपत्तियां होने का आरोप लगाया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।   नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल   भाजपा नेता ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की नियुक्ति प्रक्रिया स्वयं जांच एजेंसियों के दायरे में हो, तो उसे JPSC जैसी संवैधानिक संस्था का सदस्य नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी कर जमाल अहमद की नियुक्ति की गई।   ACB जांच और पदमुक्त करने की मांग   मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जमाल अहमद की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और आय के स्रोतों की ACB से विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और JPSC की गरिमा बनाए रखने के लिए उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए।   JPSC की साख और युवाओं के भविष्य का मुद्दा   मरांडी ने कहा कि JPSC जैसी संस्था पर लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य निर्भर करता है। ऐसे में आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर किसी भी प्रकार का सवाल युवाओं के विश्वास को प्रभावित करता है। उन्होंने सरकार से इस मामले में शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की।   पहले से विवादों में है JPSC   हाल के दिनों में 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर आयोग पहले से ही विवादों में है। छात्र संगठनों के विरोध के बीच अब इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप ले लिया है। फिलहाल, जमाल अहमद या राज्य सरकार की ओर से बाबूलाल मरांडी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

anjali kumari जुलाई 25, 2026 0
BJP Delegation
हिमांशु सिंह ह'त्याकांड मामले में राज्यपाल से मिले भाजपा प्रतिनिधिमंडल

रांची। जमशेदपुर के चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक शिष्टमंडल प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में राजभवन पहुंचा और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच केवल केंद्रीय एजेंसी से ही संभव है।   पुलिस की कार्यशैली पर भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल भाजपा ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि 27 जून 2026 को जमशेदपुर के आदित्यपुर क्षेत्र में करणी सेना से जुड़े हिमांशु सिंह की पुलिस की मौजूदगी में हत्या कर दी गई। आरोप है कि हमलावरों ने पुलिस वैन से हिमांशु को बाहर खींचकर धारदार हथियार से हमला किया, जबकि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकी। इस घटना में घायल प्रत्युष सिंह का इलाज कोलकाता में चल रहा है।   भाजपा का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी में इस तरह की वारदात राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पार्टी ने आरोप लगाया कि अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो चुका है और कई मामलों में पुलिस जांच की दिशा बदलने का प्रयास करती रही है।   निष्पक्ष जांच की उठाई मांग ज्ञापन में भाजपा ने कहा कि पुलिस द्वारा जिन तथ्यों को सामने लाया जा रहा है, उनकी भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि जिस कारोबारी का नाम इस मामले में जोड़ा जा रहा है, उसके संबंध में सामने आए तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। भाजपा का दावा है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और दोषियों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है।   भाजपा नेताओं ने राज्यपाल से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र हस्तक्षेप किया जाए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और राज्य में कानून-व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रहे। अब इस मामले में राज्यपाल के स्तर पर होने वाली कार्रवाई और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Hemant Soren Babulal Marandi
जमशेदपुर घटना पर गरजे बाबूलाल, बोले - इसके जिम्मेदार हेमंत सरकार

गिरिडीह। झारखंड में कानून व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) व्यवस्था पर प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके सामने बेबस नजर आते हैं।   जमशेदपुर हत्याकांड को लेकर सरकार पर निशाना बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में जमशेदपुर में हुई करणी सेना के एक नेता की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। उनके अनुसार, मामले में सिर्फ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) का तबादला कर देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की मौजूदगी में हत्या होती है तो जवाबदेही भी पुलिस की तय होनी चाहिए।   एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल मरांडी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद होटल संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जबकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। उनका कहना था कि केवल प्रशासनिक बदलाव से कानून व्यवस्था में सुधार नहीं होगा।   सरकार से जवाबदेही की मांग नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की है। उन्होंने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पुलिस की जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।   गौरतलब है कि हाल ही में जमशेदपुर में एक बार के बाहर चाकूबाजी की घटना में घायल हुए हिमांशु की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Candidate
राज्यसभा की 2 सीटों पर सुबह 9 बजे से वोटिंग, देर शाम आएंगे नतीजे

रांची। झारखंड में आज 18 जून को राज्यसभा की दो सीटों पर मतदान होगा। विधानसभा में सुबह 9 बजे से वोटिंग शुरू होगी, जो शाम 4 बजे तक चलेगी। शाम करीब 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और रात 8 बजे तक नतीजे आ सकते हैं। 3 उम्मीदवार मैदान मे झारखंड में 2 सीटों पर 3 कैंडिडेट चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें सबसे अहम मुकाबला NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी और कांग्रेस के प्रणव झा के बीच है। जबकि, JMM के बैजनाथ राम की जीत तय मानी जा रही है। महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक संख्या बल की बात करें तो महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त माने जा रहे हैं। वहीं NDA के पास 24 वोट ही हैं। ऐसे में 4 अतिरिक्त वोटों की जुगाड़ को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिसने पूरे चुनाव को रोचक बना दिया है। मतदान से पहले राजधानी रांची में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। सभी दल सतर्क किसी भी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए सभी दल सतर्क हैं। कांग्रेस के विधायकों को होटल में रखा गया, जबकि NDA के विधायक भी मंगलवार से ही होटल में ठहरे हुए हैं। सभी विधायकों को मतदान प्रक्रिया और रणनीति को लेकर लगातार दिशा-निर्देश दिए गए। मॉक पोलिंग भी कराई गई। बस से विधानसभा पहुंचेंगे एनडीए व कांग्रेस के विधायक मतदान के लिए होटलों में ठहरे एनडीए व कांग्रेस के विधायक बसों से विधानसभा पहुंचेंगे। NDA के विधायक बस से होटल से निकलेंगे। इसके लिए सुबह 9 बजे का समय तय किया गया है। भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने कहा कि सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं। सभी की तैयारी पूरी है। उन्होंने बताया कि सुबह 9 बजे सभी विधायक एक साथ बस से विधानसभा के लिए रवाना होंगे। सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा पहुंचने के बाद सभी विधायक एक जगह एकत्र होंगे और अंतिम रणनीति पर चर्चा करेंगे। इसके बाद सभी विधायक बारी-बारी से मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।  वहीं होटल बीएनआर चाणक्य में कांग्रेस के अधिकांश विधायक और शीर्ष नेतृत्वकर्ता ठहरे हुए हैं। वैसे विधायक जो होटल में नहीं है। उन्हें भी होटल पहुंचने को कहा गया है। इसके बाद सभी विधायक सुबह 8 से 9 बजे के बीच बस से विधानसभा के लिए निकलेंगे।   दिन भर चला बैठकों और मॉक पोल का दौर एनडीए के बाद कांग्रेस विधायक भी बुधवार को होटल में शिफ्ट हो गए। बुधवार को होटल में दो-तीन बार बैठक कर रणनीति तय की गई। राजनीतिक समीकरणों पर मंथन का दौर चला। राजद के केंद्रीय महासचिव भोला यादव भी अपने चारों विधायकों संजय प्रसाद यादव, संजय सिंह यादव, सुरेश पासवान और नरेश प्रसाद सिंह के साथ पहुंचे। बैठक में हिस्सा लेकर वापस लौट गए। वहीं माले के विधायक अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो भी बैठक में शामिल हुए और अपना समर्थन देने की घोषणा की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि होटल में रुकने की बाध्यता नहीं है। जो रुकना चाहते थे, उनके लिए व्यवस्था की गई है। दो बार मॉल पोल कराया गया एनडीए विधायकों को इसके साथ ही होटल रेडिशन में रूके एनडीए के विधायकों को दो बार मॉक पोल कराया गया। पहली बार दोपहर 12:30 बजे और दूसरे बार दोपहर तीन बजे। दोनों बार सभी 24 विधायकों के बैलेट पेपर सही पाए गए। वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई होटल में विधायकों की बैठक भी हुई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मौजूदगी में विधायकों को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई। तय हुआ कि सभी विधायक होटल से सुबह नौ बजे बस से विधानसभा जाएंगे। जयराम बोले- ऑन दि स्पॉट लेंगे फैसला एनडीए के एक विधायक ने जेएलकेएम विधायक जयराम महतो का समर्थन मिलने का दावा किया है। लेकिन, जयराम ने इससे साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मेरे बारे में सारे पक्ष सिर्फ कयास लगा रहे हैं। राज्यसभा चुनाव पर मेरी न एनडीए से कोई बात हुई है और न महागठबंधन से। मैं किसी के संपर्क में नहीं हूँ। वोटिंग पर गुरुवार की सुबह निर्णय लूंगा।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Resort Politics
झारखंड राज्यसभा चुनाव: 'नंबर गेम' में फंसी BJP, क्रॉस-वोटिंग के डर से NDA विधायकों की होटल में बाड़ेबंदी

नई दिल्ली, एजेंसियां। 18 जून को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव से पहले झारखंड की सियासत में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' की एंट्री हो गई है। जहां एनडीए अपने विधायकों को गोलबंद कर रहा है, वहीं 'इंडिया' ब्लॉक ने मॉक पोल के जरिए अपनी जीत का दावा पुख्ता किया है।   झारखंड में राज्यसभा की दो खाली सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव ने राज्य के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। मतदान में महज कुछ ही घंटे बचे हैं और जीत-हार के जटिल 'नंबर गेम' को साधने के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है। इस चुनावी बिसात पर सबसे ज्यादा हलचल विपक्षी खेमे यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में देखने को मिल रही है, जिसने संभावित क्रॉस-वोटिंग के खतरे को भांपते हुए अपने सभी विधायकों को राजधानी के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है।   होटल में क्यों जुटे NDA विधायक? आधिकारिक तौर पर भाजपा इसे मतदान प्रक्रिया के लिए 'प्रशिक्षण शिविर' और रणनीतिक बैठक बता रही है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट किया है कि होटल में अगले दो दिनों तक विधायकों के साथ अहम बैठकें होंगी। वहीं, भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल का कहना है कि पार्टी में कई नए विधायक हैं, जिन्हें वोटिंग की सही प्रक्रिया समझाना जरूरी है। हालांकि, सियासी हलकों में इसे सेंधमारी से बचने की कवायद के रूप में ही देखा जा रहा है।   जीत का गणित और परिमल नथवानी की राह इस बार चुनावी मैदान में तीन चेहरे हैं: झामुमो (JMM) से बैद्यनाथ राम, कांग्रेस से प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी। जीत के लिए हर उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के कम से कम 28 वोटों की दरकार है।   यहीं पर एनडीए का गणित उलझता दिख रहा है। झारखंड विधानसभा में 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के पास 56 विधायकों का मजबूत बहुमत है (झामुमो-34, कांग्रेस-16, राजद-4, भाकपा-माले-2)। दूसरी ओर, एनडीए के पास केवल 24 विधायक हैं (भाजपा-21, आजसू-1, लोजपा-रामविलास-1, जदयू-1)। इसके अलावा जेएलकेएम (JLKM) का एक विधायक है। साफ है कि विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर, बिना भारी क्रॉस-वोटिंग के भाजपा समर्थित नथवानी की जीत लगभग नामुमकिन है।   'इंडिया' ब्लॉक का मॉक पोल और JMM का तंज एनडीए की इस घेराबंदी पर सत्ता पक्ष ने तीखा तंज कसा है। झामुमो की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि विधायकों को होटल भेजना यह साबित करता है कि भाजपा को अपने ही लोगों पर भरोसा नहीं है, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने किसी विधायक पर दबाव नहीं डाला है।   अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए मंगलवार को 'इंडिया' ब्लॉक ने सीएम आवास पर एक मॉक पोल (मॉक वोटिंग) का आयोजन किया। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, इस प्रशिक्षण नुमा मॉक पोल में झामुमो के बैद्यनाथ राम को 29 और कांग्रेस के प्रणव झा को 27 वोट मिले। भाकपा-माले के अरूप चटर्जी अनुपस्थित रहे, लेकिन उन्होंने इसकी पूर्व सूचना दे दी थी। कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने बताया कि चुनाव से पहले बुधवार को भी सीएम आवास पर एक अहम बैठक रखी गई है।   क्यों हो रहे हैं ये चुनाव झारखंड में राज्यसभा की ये दो सीटें हाल ही में खाली हुई हैं। इनमें से एक सीट झामुमो के दिग्गज नेता और सह-संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के कारण रिक्त हुई है। वहीं, दूसरी सीट पर भाजपा के सदस्य दीपक प्रकाश का कार्यकाल आगामी 21 जून को समाप्त हो रहा है। अब 18 जून के नतीजे ही तय करेंगे कि क्रॉस-वोटिंग का दांव सफल होता है या सत्ता पक्ष अपने दोनों उम्मीदवारों को संसद भेजने में कामयाब रहता है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Babulal Marandi
रांची में बीजेपी ने गिनाई पीएम मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियां, कहा-25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आये

रांची। झारखंड प्रदेश बीजेपी ने गुरुवार को  PM मोदी के 12 साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से कहा कि PM मोदी ने 12 साल का कार्यकाल पूरा किया। यह देश के लिये काफी गौरवपूर्ण बात है। उन्होंने देश के विकास, सुशासन और गरीब कल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की। इस दौरान 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया।  उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों का गरीबी रेखा से बाहर निकलना, किसी भी सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि देश के गरीबों का उत्थान करना रहा है। 22 राज्यों में एनडीए की सरकार उन्होंने कहा कि आज देश के 22 राज्यों में एनडीए की सरकार है। विभिन्न राज्यों में भाजपा को जनता का लगातार समर्थन मिल रहा है। पीएम मोदी का कार्यकाल सत्ता नहीं साधना और तपस्या का कालखंड है।   जम्मू-कश्मीर से लेकर नॉर्थ ईस्ट तक विकास मरांडी ने कहा कि एक समय जम्मू-कश्मीर में रेल संपर्क की कल्पना भी नहीं की जाती थी। लेकिन, आज श्रीनगर तक ट्रेन पहुंच चुकी है। वहीं नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में भी अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं। जिन क्षेत्रों को कभी विकास से वंचित रखा गया था। वहां आज सड़क, रेल और अन्य आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। आर्टिकल 370 और 3 तलाक जैसे ऐतिहासिक फैसले उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का साहसिक निर्णय लिया। साथ ही तीन तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त कर महिलाओं को न्याय दिलाने का काम किया। ये ऐसे फैसले थे, जिनकी पहले कोई कल्पना भी नहीं करता था। ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई भारत की ताकत उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया ने भारत की सैन्य शक्ति और क्षमता को देखा। पहले रक्षा क्षेत्र की अधिकांश जरूरतें विदेशों से पूरी होती थीं। लेकिन, अब भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। लड़ाकू विमानों सहित कई रक्षा उपकरणों का निर्माण देश में ही किया जा रहा है। कोरोना काल में दिखी मजबूत नेतृत्व क्षमता मरांडी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों को एकजुट रखने और संकट से बाहर निकालने का सफल प्रयास किया। लगभग 50 करोड़ से अधिक लोगों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा गया है।   करोड़ों गरीबों को मिली छत मरांडी ने कहा कि करोड़ों गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान मिले हैं। अब तक लगभग 4 करोड़ मकानों का निर्माण कराया गया है।   दुनिया की अर्थव्यवस्था में पीछे था देश बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने कई दशकों तक देश में शासन किया, लेकिन गांव और शहरों के विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि 2014 से पहले भारत दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में काफी पीछे था, जबकि आज देश चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

anjali kumari जून 11, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

JPSC-JSSC aspirants demand permission for hospitalized student leader Devendra Nath Mahto to join protest
झारखंड

अस्पताल में भर्ती देवेंद्र नाथ महतो को धरना स्थल आने की अनुमति देने की मांग, 12वें दिन भी भूख हड़ताल जारी

kalpana अगस्त 14, 2026 0