Bengal News

Former West Bengal minister Partha Chatterjee speaking on TMC leadership and Abhishek Banerjee
अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने से शुरू हुआ तृणमूल का पतन: पार्थ चटर्जी का बड़ा दावा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस की चुनावी हार के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच पार्टी के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के संगठनात्मक कमजोर होने की शुरुआत उस समय हुई, जब अभिषेक बनर्जी को संगठन में प्रमुखता दी जाने लगी। "अभिषेक को आगे बढ़ाने की कीमत पार्टी ने चुकाई" एक निजी चैनल से बातचीत में पार्थ चटर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को स्थापित करने की प्रक्रिया में कई वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की गई। उनका आरोप है कि इसी वजह से संगठन कमजोर होता गया और अंततः इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ा।उन्होंने कहा कि पार्टी धीरे-धीरे आम लोगों से दूर होती चली गई, जिसका परिणाम वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के रूप में सामने आया। शुभेंदु अधिकारी को नहीं मिला उचित सम्मान पार्थ चटर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने के दौरान शुभेंदु अधिकारी जैसे नेताओं को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। उनके अनुसार, वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा ने संगठन के भीतर असंतोष बढ़ाया और इसका असर पार्टी की एकजुटता पर पड़ा। "हर पार्टी छोड़ने वाला गद्दार नहीं" पूर्व मंत्री ने कहा कि तृणमूल छोड़ने वाले सभी नेताओं को गद्दार कहना उचित नहीं है। उन्होंने ममता बनर्जी के हालिया बयान का जिक्र करते हुए तंज कसते हुए कहा कि यदि अभिषेक बनर्जी को "बाघ" कहा जा रहा है, तो बाकी नेताओं को क्या कहा जाएगा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, "अगर अभिषेक बाघ हैं, तो फिर बाघ के अत्याचार से बाकी बिल्लियां भाग गईं।" पार्टी के भीतर बढ़ सकती है सियासी हलचल पार्थ चटर्जी के इस बयान को तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से उनके आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
Realme China Exit
OnePlus के बाद Realme का बड़ा फैसला, चीन से समेटेगी कारोबार; वैश्विक बाजारों पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन ब्रांड Realme ने अपनी वैश्विक रणनीति में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। कंपनी अब अपने घरेलू बाजार चीन से स्मार्टफोन कारोबार चरणबद्ध तरीके से समेटने की तैयारी कर रही है और भविष्य में यूरोप समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर अधिक ध्यान देगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाल ही में OnePlus ने भी अपनी वैश्विक रणनीति में बड़े बदलाव की घोषणा की थी।   क्यों लिया गया यह फैसला?   रिपोर्ट के मुताबिक, Realme की मूल कंपनी Oppo अपने विभिन्न ब्रांडों के पुनर्गठन पर काम कर रही है। इसी रणनीति के तहत Realme चीन में नए स्मार्टफोन लॉन्च कम करेगी और वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर फोकस करेगी। कंपनी खासतौर पर यूरोप के नॉर्डिक देशों में विस्तार की योजना बना रही है।   भारत पर नहीं पड़ेगा असर   Realme ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का भारत में कंपनी के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत कंपनी के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है और यहां नए स्मार्टफोन लॉन्च, बिक्री, सर्विस और सॉफ्टवेयर अपडेट पहले की तरह जारी रहेंगे। कंपनी ने हाल ही में भारतीय बाजार के लिए नए स्मार्टफोन और रिटेल विस्तार की योजनाओं का भी ऐलान किया है।   सॉफ्टवेयर रणनीति में भी बदलाव   कंपनी ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में Realme के स्मार्टफोन ColorOS आधारित सॉफ्टवेयर पर चलेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य सॉफ्टवेयर अपडेट प्रक्रिया को अधिक तेज और बेहतर बनाना बताया गया है। हालांकि, मौजूदा ग्राहकों को नियमित अपडेट और सपोर्ट मिलता रहेगा।   बाजार की नजर अगले कदम पर   विशेषज्ञों का मानना है कि Oppo समूह की यह रणनीति वैश्विक स्तर पर ब्रांडों के बीच जिम्मेदारियों को नए सिरे से तय करने की दिशा में बड़ा कदम है। फिलहाल Realme का फोकस चीन की बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर रहेगा, जबकि भारत कंपनी के लिए प्रमुख रणनीतिक बाजार बना रहेगा।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
West Bengal School Controversy
पश्चिम बंगाल के स्कूल में धार्मिक प्रतीकों को लेकर विवाद, छात्रा के परिवार ने टीसी देने का लगाया आरोप

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के एक स्कूल में धार्मिक प्रतीकों को लेकर विवाद सामने आया है। एक 11वीं कक्षा की छात्रा के परिवार ने आरोप लगाया है कि छात्रा के गले में तुलसी की माला पहनने और माथे पर तिलक लगाने पर स्कूल प्रबंधन ने आपत्ति जताई और बाद में उसे ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) भेज दिया। हालांकि, स्कूल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि छात्रा को अब तक टीसी जारी नहीं किया गया है और तुलसी की माला पहनने पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है।   परिवार ने धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का लगाया आरोप मामला पारा थाना क्षेत्र के एक स्कूल का बताया जा रहा है। छात्रा के परिवार का कहना है कि वह नियमित रूप से तुलसी की माला पहनकर और माथे पर तिलक लगाकर स्कूल जाती थी। परिवार के अनुसार, इस पर स्कूल की ओर से आपत्ति जताई गई और उन्हें बातचीत के लिए स्कूल बुलाया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। परिवार का आरोप है कि यह छात्रा की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का मामला है।   व्हाट्सऐप पर टीसी भेजने का दावा छात्रा की मां का आरोप है कि एक शिक्षिका बार-बार उनकी बेटी को तुलसी की माला न पहनने की सलाह देती थीं और तिलक लगाने पर भी आपत्ति जताती थीं। परिवार का यह भी दावा है कि अगले दिन छात्रा का ट्रांसफर सर्टिफिकेट व्हाट्सऐप के माध्यम से भेज दिया गया। इस कार्रवाई को परिवार ने अनुचित बताते हुए स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।   स्कूल ने कहा- मामला अनुशासन से जुड़ा दूसरी ओर, स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि किसी छात्र या छात्रा पर धार्मिक प्रतीक पहनने को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। प्रबंधन का कहना है कि विद्यालय में सभी विद्यार्थियों से केवल निर्धारित अनुशासन और नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। स्कूल ने यह भी कहा कि छात्रा को अब तक आधिकारिक रूप से टीसी जारी नहीं किया गया है।   पुलिस कर रही है जांच छात्रा के परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और क्या किसी पक्ष की ओर से नियमों का उल्लंघन हुआ है।

anjali kumari जुलाई 8, 2026 0
Kriti Sanon Egg Freezing
कृति सेनन का बड़ा खुलासा, 'मिमी' की तैयारी के दौरान एग फ्रीज करवाने का लिया था फैसला

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन ने पहली बार अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा बड़ा खुलासा किया है। कृति ने बताया कि उन्होंने फिल्म 'मिमी' की तैयारी के दौरान अपने एग फ्रीज करवाने का फैसला लिया था। उनका कहना है कि वह शादी या मातृत्व को किसी सामाजिक दबाव या "बायोलॉजिकल क्लॉक" के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी इच्छा और सही समय पर चुनना चाहती हैं।   'मिमी' की तैयारी के दौरान लिया फैसला   कृति ने बताया कि 'मिमी' के लिए उन्हें वजन बढ़ाना था और उसी दौरान उन्होंने एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया पूरी कराई। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया के दौरान शरीर में सूजन और हार्मोनल बदलाव आते हैं, इसलिए उन्हें लगा कि यह इसके लिए सबसे उपयुक्त समय है।   'यह मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा था'   कृति सेनन ने कहा कि एग फ्रीजिंग का फैसला आसान नहीं था, लेकिन यह उनके जीवन के सबसे अच्छे फैसलों में से एक है। उन्होंने कहा कि वह खुद को भविष्य के लिए एक विकल्प देना चाहती थीं, ताकि शादी और परिवार शुरू करने का निर्णय पूरी तरह उनकी इच्छा पर आधारित हो।   महिलाओं को दिया अपना फैसला खुद लेने का संदेश   अभिनेत्री ने कहा कि हर महिला को अपनी जिंदगी के बड़े फैसले खुद लेने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने माना कि यह प्रक्रिया महंगी है और हर किसी के लिए संभव नहीं होती, लेकिन यदि अवसर मिले तो महिलाओं को अपने भविष्य के बारे में स्वतंत्र रूप से सोचने का अधिकार होना चाहिए।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee during a Trinamool Congress meeting amid the party symbol dispute before the Election Commission.
TMC चुनाव चिह्न विवाद: ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग को सौंपा जवाब, कहा- 2027 तक वैध है राष्ट्रीय समिति

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी आंतरिक विवाद के बीच पार्टी के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ को लेकर मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। इस बीच ममता बनर्जी गुट ने निर्वाचन आयोग को अपना विस्तृत जवाब सौंपते हुए दावा किया है कि पार्टी की वर्तमान राष्ट्रीय कार्यसमिति वर्ष 2027 तक पूरी तरह वैध है और उससे पहले किसी समानांतर संगठन का गठन पार्टी संविधान के अनुरूप नहीं है। आयोग को सौंपे कानूनी और संगठनात्मक दस्तावेज ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग को दिए गए दस्तावेजों में कहा है कि पार्टी के संविधान और संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया के अनुसार मौजूदा राष्ट्रीय समिति का कार्यकाल 2027 तक निर्धारित है। ऐसे में इस अवधि के दौरान किसी अन्य गुट द्वारा खुद को "असली तृणमूल कांग्रेस" घोषित करना या समानांतर समिति बनाना नियमों के विरुद्ध है। पार्टी का कहना है कि वर्तमान नेतृत्व को निर्धारित कार्यकाल तक संगठन चलाने का पूर्ण वैधानिक अधिकार प्राप्त है। बागी गुट ने 22 जून को बनाई थी नई समिति तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने 22 जून को नई राष्ट्रीय समिति गठित करने का दावा किया था। इस गुट ने खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बताते हुए चुनाव चिह्न पर अधिकार जताया था। हालांकि, ममता बनर्जी गुट ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी के अधिकृत संगठन में इस तरह के किसी बदलाव का कोई संवैधानिक आधार नहीं है। डेरेक ओब्रायन और अभिषेक बनर्जी ही अधिकृत प्रतिनिधि चुनाव आयोग को दिए गए जवाब में ममता गुट ने स्पष्ट किया है कि आयोग के समक्ष पार्टी का आधिकारिक पक्ष रखने के लिए केवल डेरेक ओब्रायनऔर राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ही अधिकृत प्रतिनिधि हैं। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाली चंद्रिमा भट्टाचार्य या बागी गुट का कोई अन्य नेता पार्टी की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष प्रतिनिधित्व करने का अधिकार नहीं रखता। बहुमत का भी किया दावा ममता बनर्जी खेमे ने दावा किया है कि पार्टी के अधिकांश सांसद, जिला संगठन और जमीनी कार्यकर्ता आज भी उनके नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनका कहना है कि कुछ विधायकों या नेताओं के अलग होने से पार्टी के मूल संगठन की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। अब चुनाव आयोग के फैसले पर नजर दोनों गुटों द्वारा अपने-अपने दावे और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बाद अब फैसला चुनाव आयोग के हाथ में है। आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच करेगा और उसके बाद व्यक्तिगत सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। आयोग के अंतिम निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक संगठन और उसके चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ पर किस गुट का अधिकार रहेगा।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
TMC leader Humayun Kabir detained by Debra Police in West Midnapore district amid an ongoing investigation
बंगाल के डेबरा में TMC नेता हुमायूं कबीर गिरफ्तार, आरोपों का खुलासा नहीं; पुलिस जांच जारी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के डेबरा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक प्रभावशाली नेता हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी के बाद इलाके की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। डेबरा ब्लॉक पंचायत समिति के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हुमायूं कबीर को डेबरा थाना पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस ने अभी तक उनके खिलाफ दर्ज आरोपों का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है। शिकायतों के आधार पर हुई कार्रवाई पुलिस के अनुसार, हुमायूं कबीर के खिलाफ कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनकी जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में पर्याप्त तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मामला किस प्रकृति का है और किन धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। जिले की राजनीति में बढ़ी हलचल एक प्रभावशाली टीएमसी नेता की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम मेदिनीपुर के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय स्तर पर भी इस कार्रवाई को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। विभिन्न राजनीतिक दल इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस ने कहा- जांच जारी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगी हुई है। आरोपों पर अब भी सस्पेंस हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि उनके खिलाफ आरोप क्या हैं। ऐसे में मामले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। आगे क्या? जिले के राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब पुलिस जांच की दिशा और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है। इस मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई और संभावित खुलासों का इंतजार किया जा रहा है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Former West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee amid controversy over changes in her security personnel and Z-category protection.
बंगाल में ‘सुरक्षा’ पर संग्राम! ममता बनर्जी के पसंदीदा बॉडीगार्ड हटाने पर टीएमसी-भाजपा आमने-सामने, डेरेक बोले- रातभर बिना सुरक्षा रहीं दीदी

  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आरोप लगाया है कि नई भाजपा सरकार ने ममता बनर्जी की सुरक्षा में वर्षों से तैनात अधिकारियों को हटाकर उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ किया है। वहीं, मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने स्पष्ट कर दिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी पसंद के सुरक्षा अधिकारी चुनने का अधिकार नहीं है और सुरक्षा तैनाती का फैसला पुलिस प्रशासन करेगा। क्या है पूरा विवाद? 2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात कुछ पुराने सुरक्षा अधिकारियों को हटाकर नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। टीएमसी का दावा है कि ये अधिकारी कई वर्षों से, यहां तक कि ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहने के समय से उनकी सुरक्षा में तैनात थे। ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात कर पुराने अधिकारियों को वापस तैनात करने की मांग की, लेकिन सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया। टीएमसी का आरोप- ‘राजनीतिक प्रतिशोध का नया निचला स्तर’ All India Trinamool Congress (AITC) की आधिकारिक वेबसाइट से जुड़े नेताओं ने इस कदम को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया है। टीएमसी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि: “ममता बनर्जी की सुरक्षा में लंबे समय से तैनात कर्मियों को हटाना कोई प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि उन्हें अलग-थलग करने और खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश है।” पार्टी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कदम ‘बदले की राजनीति’ और ‘सत्ता के दुरुपयोग’ का उदाहरण है। डेरेक ओब्रायन का दावा- रातभर नहीं था कोई सुरक्षाकर्मी Derek O'Brien ने दावा किया कि ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास से लंबे समय से तैनात निजी सुरक्षा अधिकारियों (PSO) को हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि: “बुधवार रात ममता बनर्जी के घर के बाहर कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था।” डेरेक ने इसे पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही बताया। सागरिका घोष ने उठाए सवाल टीएमसी की राज्यसभा सांसद Sagarika Ghose ने भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि: पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा राजनीति का विषय नहीं है। यह राज्य सरकार की संस्थागत जिम्मेदारी है। अचानक सुरक्षा अधिकारियों को हटाने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए। यदि ममता बनर्जी को देर रात बिना सुरक्षा छोड़ा गया, तो यह बेहद गंभीर मामला है। शुभेंदु सरकार का रुख क्या है? मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि: सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती पुलिस प्रशासन का अधिकार है। किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी पसंद के अधिकारियों की मांग करने का विशेष अधिकार नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था पेशेवर और प्रशासनिक मानकों के आधार पर तय की जाएगी। ममता बनर्जी को किस स्तर की सुरक्षा प्राप्त है? ममता बनर्जी को वर्तमान में ‘जेड श्रेणी (Z Category) सुरक्षा’ प्राप्त है। इस श्रेणी में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की एक बड़ी टीम, व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (PSO) और अन्य सुरक्षा प्रबंध शामिल होते हैं। राजनीतिक महत्व यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर उठा यह विवाद राज्य की राजनीति में एक नए टकराव का केंद्र बन गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करती है या नहीं, और क्या टीएमसी इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी स्तर पर आगे बढ़ाती है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
TMC leader Sougata Roy addresses media, calling rebel MPs who joined NCPI a group of traitors amid Bengal political crisis.
टीएमसी के बागी सांसदों पर सौगत रॉय का हमला, बोले- पार्टी छोड़ने वाले ‘गद्दार’; ममता ही असली तृणमूल की नेता

  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में मचे सियासी घमासान के बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को उन्होंने एनसीपीआई (नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया) में विलय करने वाले 20 सांसदों को ‘गद्दारों का समूह’ करार देते हुए कहा कि असली तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं और बागी गुट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के इशारे पर काम कर रहा है। ‘दो टीमें हैं- एक तृणमूल की, दूसरी गद्दारों की’ सौगत रॉय ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में दो अलग-अलग टीमें दिखाई दे रही हैं। एक टीम तृणमूल कांग्रेस की है, जिसका नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरी ‘गद्दारों की टीम’ है, जो एनडीए के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। हमारी पार्टी का चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ है, जबकि गद्दारों की टीम का नेतृत्व नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।” एनसीपीआई में विलय के दावे पर बरसे रॉय टीएमसी के बागी गुट ने दावा किया है कि उसे लोकसभा में पार्टी के दो-तिहाई सांसदों का समर्थन प्राप्त है और उसने एनसीपीआई में विलय का फैसला किया है। इसी दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी छोड़ने वाले सांसद जनादेश और पार्टी की विचारधारा से विश्वासघात कर रहे हैं। ‘एजेंसियों के दुरुपयोग के बावजूद टीएमसी को मिला 41 फीसदी वोट’ वरिष्ठ टीएमसी नेता ने कहा कि हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग और राजनीतिक दबाव के बावजूद तृणमूल कांग्रेस को करीब 41 प्रतिशत वोट मिले। उन्होंने कहा, “भाजपा ने सभी एजेंसियों का इस्तेमाल किया, लेकिन इसके बावजूद जनता ने तृणमूल कांग्रेस पर भरोसा जताया और हमें लगभग 41 फीसदी मत मिले।” क्या है एनसीपीआई? नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) एक अपेक्षाकृत नया राजनीतिक दल है, जिसे वर्ष 2023 में निर्वाचन आयोग में पंजीकृत किया गया था। टीएमसी के बागी सांसदों द्वारा इसी पार्टी में विलय की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Mamata Banerjee arrives at Calcutta High Court to challenge Bhabanipur election result and Suvendu Adhikari's victory.
भवानीपुर सीट के चुनाव परिणाम को ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती, दायर की चुनाव याचिका

  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जीत के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की है। 15,105 वोटों से मिली थी हार भवानीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से पराजित किया था। इस जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने। हाईकोर्ट की रजिस्ट्री पहुंचीं ममता टीएमसी सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी चुनाव याचिका की औपचारिक पुष्टि (वेरिफिकेशन) के लिए मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की रजिस्ट्री पहुंचीं। पार्टी का कहना है कि चुनाव परिणाम को लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में चुनौती दी गई है। 4 मई को हुई थी मतगणना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना 4 मई को हुई थी। चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला, जिसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अब क्या होगा आगे? चुनाव याचिका दायर होने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट मामले की सुनवाई करेगा। अदालत तय करेगी कि याचिका स्वीकार करने के पर्याप्त आधार हैं या नहीं। इसके बाद चुनाव परिणाम से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई हो सकती है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Rebel TMC MPs announce merger with NCPI, triggering political turmoil in West Bengal and national attention.
‘दलबदलुओं को नकारें’ का नारा देने वाली पार्टी में शामिल हुए TMC के 20 बागी सांसद, जानिए क्या है NCPI और क्यों अचानक चर्चा में आ गई?

  नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार को उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का दावा कर दिया। यह वही पार्टी है, जिसने वर्ष 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में ‘दलबदलुओं को नकारें’ के नारे के साथ चुनाव लड़ा था। अब एक छोटे और लगभग गुमनाम राजनीतिक दल का अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या है NCPI? नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, पार्टी का पंजीकृत कार्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराईल में स्थित है और इसकी अध्यक्ष शेउली कुंडू हैं। पार्टी लंबे समय तक राजनीतिक रूप से हाशिये पर रही और उसका प्रभाव किसी भी राज्य में उल्लेखनीय नहीं रहा। TMC के बागी सांसदों के विलय के दावे के बाद अचानक यह दल राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चाओं में आ गया है। ‘दलबदलुओं को नकारें’ था पार्टी का प्रमुख नारा NCPI ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के दौरान अपने प्रचार अभियान में नारा दिया था: "अपने अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक दलबदलुओं को नकारें, समाजसेवियों का समर्थन करें।" पार्टी ने खुद को राजनीतिक अवसरवाद और दल-बदल की राजनीति के खिलाफ एक विकल्प के रूप में पेश किया था। ऐसे में अब उसी पार्टी में बड़े पैमाने पर बागी सांसदों के शामिल होने का दावा राजनीतिक विडंबना के रूप में देखा जा रहा है। त्रिपुरा चुनाव में बेहद कमजोर रहा प्रदर्शन NCPI ने वर्ष 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में महज चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इनमें चावमानु, अंबासा और कैलाशहर जैसी सीटें शामिल थीं।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
TMC MP Sayoni Ghosh seen in a modern casual outfit amid political discussions over her changing public image.
सायोनी घोष का बदला लुक, छोड़ी 'ममता बनर्जी की स्टाइल'; जींस, स्नीकर्स और न्यू हेयरकट के पीछे क्या है सियासी संदेश?

  कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी घमासान के बीच जादवपुर की फायरब्रांड सांसद सायोनी घोष का नया अवतार चर्चा का विषय बन गया है। कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरह सफेद सूती साड़ी, बड़ी बिंदी और सादगी भरे अंदाज में नजर आने वाली सायोनी अब जींस-टीशर्ट, कैजुअल कुर्तियों, मॉडर्न हेयरस्टाइल और स्नीकर्स में दिखाई दे रही हैं। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक राजनीतिक गलियारों में उनके इस बदलाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल फैशन में बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश का संकेत हो सकता है। साड़ी से स्नीकर्स तक, क्यों बदला सायोनी का अंदाज? हाल के दिनों में सायोनी घोष कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक दौरों के दौरान अपने नए लुक में नजर आई हैं। उन्होंने पारंपरिक सफेद साड़ी और हवाई चप्पलों की जगह आधुनिक परिधान और स्नीकर्स को अपनाया है। उनका यह बदलाव ऐसे समय सामने आया है, जब टीएमसी के भीतर नेतृत्व, रणनीति और संगठनात्मक दिशा को लेकर बहस तेज है। ऐसे में उनके नए मेकओवर को राजनीतिक संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है। कभी कहा था- 'दीदी की सादगी मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा बन गई' नवंबर 2025 में एक टीवी इंटरव्यू के दौरान सायोनी घोष ने ममता बनर्जी की सादगी से अपनी प्रेरणा का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि जिस पार्टी और नेता के साथ वे काम करती हैं, उनके मूल्यों और जीवनशैली का असर स्वाभाविक रूप से उनके व्यक्तित्व पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा था कि वे अपनी नेता की तरह आम लोगों, 'मां-माटी-मानुष' और जमीनी राजनीति के करीब रहना चाहती हैं। अभिनय की दुनिया से राजनीति तक का सफर टॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री रहीं सायोनी घोष ने राजनीति में आने के बाद अपनी ग्लैमरस छवि को काफी हद तक पीछे छोड़ दिया था। उन्होंने खुद कई मौकों पर कहा कि अभिनय के दौरान भी वह व्यक्तिगत जीवन में सादगी पसंद करती थीं और राजनीति में आने के बाद ममता बनर्जी के व्यक्तित्व ने उन पर गहरा प्रभाव डाला। क्या टीएमसी की अंदरूनी खींचतान से जुड़ा है मेकओवर? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टीएमसी में जारी कथित 'ओल्ड गार्ड बनाम न्यू गार्ड' की खींचतान, पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर चल रही बहस और हालिया विवादों के बीच सायोनी घोष अपनी एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, यह बदलाव उनकी 'इंडिपेंडेंट ब्रांडिंग' की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिससे वे खुद को केवल किसी नेता की छवि तक सीमित न रखकर एक अलग राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में पेश कर सकें। सियासी संदेश या व्यक्तिगत पसंद? सायोनी घोष की ओर से उनके नए लुक को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनका बदला हुआ अंदाज राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत पसंद का मामला है या फिर बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच एक नया राजनीतिक संदेश देने की कोशिश। फिलहाल, टीएमसी के अंदरूनी संकट के दौर में सायोनी घोष का यह नया अवतार बंगाल की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे चुका है।  

Deepshikha जून 15, 2026 0
TMC leaders amid growing political debate over leadership, strategy and internal party differences in West Bengal.
कल्याण बनर्जी के बयान से टीएमसी में नई बहस, संगठनात्मक दिशा पर चर्चा तेज

  पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी मतभेदों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के हालिया बयान ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक रणनीति को लेकर चल रही बहस को नई दिशा दे दी है। अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर उठाए सवाल कल्याण बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से पार्टी की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेतृत्व को संगठन के भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट दिशा तय करनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर पुराने नेताओं और नई पीढ़ी के नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। उनके बयान को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर अप्रत्यक्ष आलोचना के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, टीएमसी नेतृत्व की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा कल्याण बनर्जी के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों और राजनीतिक सूत्रों में दावा किया जा रहा है कि संगठन की रणनीति, विपक्षी दलों के साथ संबंधों और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर अलग-अलग राय मौजूद हैं। सांसदों और विधायकों की कथित बगावत या दल के भीतर बड़े पैमाने पर टूट की खबरों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस से संबंधों पर भी उठे सवाल राजनीतिक चर्चाओं के बीच कांग्रेस नेतृत्व और टीएमसी नेताओं की हालिया बैठकों को भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ सूत्रों का दावा है कि विपक्षी एकजुटता और संभावित राजनीतिक सहयोग को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग मत हैं। हालांकि, टीएमसी या कांग्रेस की ओर से किसी संभावित विलय अथवा औपचारिक राजनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं की गई है। महुआ मोइत्रा सहित कई नेता नेतृत्व के समर्थन में दूसरी ओर, पार्टी के कई नेता खुलकर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के समर्थन में सामने आए हैं। टीएमसी का आधिकारिक रुख यही है कि पार्टी एकजुट है और संगठन को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। आगे क्या? कल्याण बनर्जी के बयान ने यह संकेत जरूर दिया है कि टीएमसी के भीतर नेतृत्व, संगठन और राजनीतिक रणनीति को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है। अब राजनीतिक नजरें ममता बनर्जी की अगली रणनीति और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले समय में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
TMC MP Sayoni Ghosh amid political speculation over party strategy and Delhi meeting discussions.
सायोनी घोष के बागी खेमे में शामिल होने की चर्चा, दिल्ली बैठक ने बढ़ाई सियासी हलचल

  नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में कथित अंदरूनी असंतोष और नेताओं के रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। इसी बीच जादवपुर से सांसद सायोनी घोष का नाम भी उन नेताओं में शामिल किया जा रहा है, जिनके बारे में विभिन्न राजनीतिक दावे किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई एक बैठक के बाद राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है। बैठक में क्या चर्चा हुई और उसमें शामिल नेताओं ने किस तरह का फैसला लिया, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। दिल्ली बैठक पर बढ़ी चर्चा राजनीतिक सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि बैठक में पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और कुछ सांसदों की भावी रणनीति पर चर्चा हुई। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नेताओं की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सायोनी घोष का नाम सामने आने के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वह लंबे समय से टीएमसी की प्रमुख युवा चेहरों में गिनी जाती रही हैं और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। सांसदों को लेकर अलग-अलग दावे राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ सांसदों के एक अलग समूह के रूप में सामने आने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में न तो किसी संसदीय प्राधिकरण की ओर से कोई पुष्टि हुई है और न ही संबंधित सांसदों ने सार्वजनिक रूप से कोई औपचारिक घोषणा की है। टीएमसी की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान इन सभी दावों और अटकलों के बीच तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और सांसदों के रुख से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दिल्ली में हुई कथित बैठक और उससे जुड़ी चर्चाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
CPI leader D Raja questions TMC leadership amid resignations and political uncertainty in West Bengal.
टीएमसी पर डी राजा का हमला, बोले- पार्टी वैचारिक और संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही

  नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी राजा ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राजनीतिक दिशा और संगठनात्मक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पार्टी को अपने भीतर उभर रही चुनौतियों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं और सांसदों के इस्तीफों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। डी राजा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती उसकी वैचारिक स्पष्टता और संगठनात्मक एकजुटता पर निर्भर करती है। उनके अनुसार, यदि वरिष्ठ नेता और सांसद लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं, तो नेतृत्व को इसके कारणों पर खुलकर बात करनी चाहिए। टीएमसी की वैचारिक दिशा पर सवाल सीपीआई नेता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी राजनीतिक और वैचारिक प्राथमिकताएं क्या हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद असंतोष जताकर अलग रास्ता चुन रहे हैं, तो इसके पीछे के कारणों पर चर्चा होनी चाहिए। डी राजा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करे। इस्तीफों के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा डी राजा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं और राज्यसभा सदस्यों के इस्तीफों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है। विपक्षी दल इन घटनाओं को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि टीएमसी की ओर से इस पर अलग दृष्टिकोण सामने रखा जा रहा है। राजनीतिक बहस तेज राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दलों द्वारा टीएमसी पर लगातार हमले किए जा रहे हैं और आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस तरह के बयान आने वाले दिनों में और तेज हो सकते हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक संदेश को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। फिलहाल डी राजा के बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और विपक्षी खेमे में नई बहस को जन्म दे दिया है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
International media coverage highlights political developments and organizational challenges within Trinamool Congress in West Bengal.
टीएमसी में अंदरूनी संकट पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर, ममता बनर्जी के नेतृत्व पर उठे सवाल

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी कथित असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। विभिन्न वैश्विक प्रकाशनों में प्रकाशित विश्लेषणों में पार्टी की मौजूदा स्थिति, नेतृत्व शैली और भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं पर चर्चा की गई है। वैश्विक मीडिया में टीएमसी संकट पर चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में प्रकाशित रिपोर्टों और विश्लेषणों में टीएमसी के भीतर उभर रहे मतभेदों को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया है। कई लेखों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लंबे राजनीतिक सफर और राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका का उल्लेख करते हुए वर्तमान परिस्थितियों का आकलन किया गया है। विश्लेषकों ने ममता बनर्जी को एक संघर्षशील और जनाधार वाली नेता बताया है, जिन्होंने लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद राज्य में अपनी मजबूत पहचान बनाई। कुछ रिपोर्टों में पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर उठ रहे सवालों का भी जिक्र किया गया है। संगठनात्मक चुनौतियों पर केंद्रित रहे विश्लेषण विदेशी मीडिया में प्रकाशित कुछ लेखों में दावा किया गया है कि पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों और नेतृत्व को लेकर असंतोष ने संगठन के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाए रखना टीएमसी के लिए बड़ी परीक्षा बन सकता है। कुछ विश्लेषणों में चुनावी रणनीतियों और संगठनात्मक ढांचे में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें पार्टी की वर्तमान स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग-अलग राय अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई दिखाई देती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि टीएमसी अभी भी पश्चिम बंगाल की एक प्रमुख राजनीतिक ताकत बनी हुई है और पार्टी नेतृत्व के पास हालात संभालने का पर्याप्त अनुभव है। वहीं, कुछ अन्य विश्लेषकों का कहना है कि यदि संगठन के भीतर मतभेद बढ़ते हैं, तो इसका असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। नेतृत्व और संगठन दोनों के लिए अहम दौर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियां टीएमसी नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकती हैं। पार्टी को एकजुट बनाए रखना और कार्यकर्ताओं का विश्वास कायम रखना आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती होगी। टीएमसी की ओर से अब तक पार्टी के भीतर किसी बड़े संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पार्टी नेतृत्व लगातार संगठन की एकता और मजबूती पर जोर देता रहा है। बंगाल की राजनीति पर बनी रहेगी नजर पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी की भूमिका को देखते हुए राजनीतिक पर्यवेक्षक आने वाले दिनों के घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। पार्टी के भीतर की स्थिति और नेतृत्व के फैसले न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
TMC rebel leader Rietbrat Banerjee addresses media amid claims of growing support from MLAs in West Bengal.
बागी टीएमसी गुट का दावा: 64 विधायक हमारे साथ, कांग्रेस में विलय की चर्चाओं को रीतब्रत ने किया खारिज

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी गुट ने अपनी ताकत बढ़ने का दावा किया है। बागी गुट के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रीतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके समर्थन वाले विधायकों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है। साथ ही उन्होंने टीएमसी के कांग्रेस में विलय से जुड़े सभी कयासों को सिरे से खारिज कर दिया। बागी खेमे ने बढ़ते समर्थन का किया दावा रीतब्रत बनर्जी ने कहा कि कुछ समय पहले तक उनके साथ 58 विधायक थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 64 हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही एक और विधायक उनके गुट में शामिल हो सकता है। उनके मुताबिक, बागी गुट को केवल विधायकों का ही नहीं बल्कि कई सांसदों, जिला स्तर के नेताओं और स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों का भी समर्थन प्राप्त है। "असली तृणमूल कांग्रेस हमारे साथ" विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रीतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनका गुट ही तृणमूल कांग्रेस की वास्तविक राजनीतिक विरासत और संगठनात्मक ताकत का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, "हम कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं। हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं और पार्टी के झंडे तथा विचारधारा के साथ आगे बढ़ते रहेंगे।" ममता-सोनिया मुलाकात के बाद तेज हुईं राजनीतिक चर्चाएं हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष Sonia Gandhi के बीच दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद टीएमसी और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसके अलावा टीएमसी नेता Abhishek Banerjee और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई बैठकों ने भी दोनों दलों के संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर कयासों को हवा दी थी। रीतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट किया कि इन बैठकों का उनके गुट की राजनीतिक दिशा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा जाएगा नया समर्थन पत्र बागी गुट अब अपनी संख्या बल को आधिकारिक रूप से दर्ज कराने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, गुट जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष को नया समर्थन पत्र सौंप सकता है, जिसमें उनके साथ खड़े विधायकों की अद्यतन संख्या दर्ज होगी। लोकसभा में NDA को समर्थन जारी रहेगा रीतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके समर्थक सांसद लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में उनका रुख पहले की तरह कायम रहेगा और वर्तमान परिस्थितियों में किसी बदलाव की संभावना नहीं है। टीएमसी के सामने गहराता संगठनात्मक संकट राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस अपने 28 वर्षों के इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस बीच, टीएमसी और कांग्रेस के बीच संभावित राजनीतिक नजदीकियों को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन बागी गुट ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के विलय या राजनीतिक समझौते का हिस्सा नहीं बनने जा रहा और खुद को ही पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि मानता है।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
TMC MP Shatabdi Roy amid speculation over internal party differences and political developments in West Bengal.
शताब्दी रॉय के बागी खेमे में शामिल होने के दावों से बंगाल की राजनीति में हलचल, टीएमसी और विपक्ष आमने-सामने

  नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय के पार्टी नेतृत्व से नाराज होने और बागी खेमे के साथ खड़े होने के दावे सामने आए। इन दावों के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में कुछ सांसदों और नेताओं की बैठकों के बाद यह अटकलें तेज हुईं कि टीएमसी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। इन दावों पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। शताब्दी रॉय को लेकर क्या हैं दावे? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शताब्दी रॉय ने पार्टी के कामकाज और नेतृत्व शैली को लेकर नाराजगी जताई है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्होंने पार्टी के भीतर संवाद की कमी और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में कोई औपचारिक बयान सार्वजनिक रूप से जारी किया गया है। दिल्ली की बैठकों पर टिकी नजर सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में दिल्ली में कई राजनीतिक बैठकें हुई हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल के राजनीतिक भविष्य और संसदीय रणनीति पर चर्चा की गई। इन बैठकों के बाद विपक्षी दलों और टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सही साबित होती हैं, तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर पड़ सकता है। टीएमसी का पलटवार टीएमसी नेताओं ने पार्टी छोड़ने या बड़े पैमाने पर टूट की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष जानबूझकर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस एकजुट है और नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं का विश्वास कायम है। वहीं विपक्ष का दावा है कि राज्य की राजनीति में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं और आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। आगे क्या? फिलहाल सभी की नजर शताब्दी रॉय और टीएमसी नेतृत्व की ओर से आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जब तक संबंधित पक्षों की ओर से स्पष्ट बयान नहीं आता, तब तक इन दावों को पुष्टि के बजाय राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी इस घटनाक्रम पर आने वाले दिनों में और तस्वीर साफ होने की संभावना है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
TMC leader Abhishek Banerjee faces CID notice in alleged forged signature investigation in West Bengal.
फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी को तीसरा समन, CID ने कोलकाता आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को तीसरा समन जारी किया है। जांच एजेंसी की टीम ने उनके कोलकाता स्थित आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा। सूत्रों के अनुसार, CID एक ऐसे मामले की जांच कर रही है, जिसमें विधानसभा से जुड़े एक दस्तावेज पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित दस्तावेज में कुछ हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता संदिग्ध है। मामले की जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न पक्षों से पूछताछ कर रही है। क्या है पूरा मामला? विवाद उस समय शुरू हुआ जब विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक दस्तावेज को लेकर सवाल उठे। कुछ विधायकों ने दावा किया कि दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इसके बाद मामले की शिकायत जांच एजेंसियों तक पहुंची और CID ने जांच शुरू की। जांच के दौरान कुछ विधायकों के बयान दर्ज किए गए हैं। एजेंसी दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। CID ने जारी किया तीसरा नोटिस जांच एजेंसी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को पहले भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजे गए थे। निर्धारित तिथि पर उपस्थित न होने के बाद अब उन्हें तीसरा नोटिस जारी किया गया है। CID अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए उनका बयान महत्वपूर्ण हो सकता है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस नए समन पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विवाद भी तेज मामले को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल इस घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि जांच को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। आगे क्या? अब सभी की नजर इस बात पर है कि अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसी के समक्ष कब पेश होते हैं और CID की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल एजेंसी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Congress leader Adhir Ranjan Chowdhury reacting to TMC political crisis in West Bengal
टीएमसी संकट पर अधीर रंजन का हमला, बोले- अब ममता अपने फैसलों का परिणाम देख रही हैं

  पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक संकट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात उन राजनीतिक घटनाओं की याद दिलाते हैं, जिनका सामना कांग्रेस ने पहले किया था। अधीर रंजन ने कहा कि राजनीति में किए गए फैसलों का असर समय के साथ सामने आता है और आज वही स्थिति तृणमूल कांग्रेस के सामने दिखाई दे रही है। ‘इतिहास खुद को दोहरा रहा है’ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि बंगाल की राजनीति में इतिहास एक बार फिर खुद को दोहराता नजर आ रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह अतीत में विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिशें हुई थीं, उसी प्रकार की परिस्थितियां अब तृणमूल कांग्रेस के सामने खड़ी हो गई हैं। रीतब्रत खेमे को मिला 58 विधायकों का समर्थन टीएमसी के भीतर राजनीतिक संकट उस समय और गहरा गया जब 58 विधायकों ने रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व का समर्थन किया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी खेमे को मान्यता मिलने से पार्टी के भीतर चल रहा विवाद और अधिक चर्चा का विषय बन गया। 2016 के घटनाक्रम का किया जिक्र अधीर रंजन चौधरी ने 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद के वर्षों में कांग्रेस के कई नेता और विधायक पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए, जिससे कांग्रेस की विधानसभा में ताकत कम होती गई। ‘राजनीतिक दलबदल का दौर जारी है’ कांग्रेस नेता ने कहा कि बंगाल की राजनीति में दलबदल की संस्कृति नई नहीं है। उनके अनुसार, पहले जो दल इस प्रक्रिया से लाभ उठाते थे, आज वे स्वयं इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ राजनीतिक समीकरण बदलते रहते हैं, लेकिन दलबदल की राजनीति का सिलसिला जारी रहता है। कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं को दिया संदेश अधीर रंजन चौधरी ने इस अवसर पर उन कार्यकर्ताओं और नेताओं का भी जिक्र किया, जिन्होंने वर्षों तक विभिन्न राजनीतिक संघर्षों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन अपने पुराने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का स्वागत करने के लिए तैयार है और पार्टी को मजबूत बनाने की दिशा में काम जारी रहेगा। बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल टीएमसी में जारी घटनाक्रम और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और बाहर होने वाले फैसले राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Durga Puja organizers in West Bengal discuss festival plans amid uncertainty over government grants
दुर्गा पूजा की तैयारियों पर छाया संकट! अनुदान और पंडाल अनुमति को लेकर बढ़ी चिंता

  पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के आयोजन से जुड़ी हजारों समितियां इस समय असमंजस की स्थिति में हैं। धार्मिक आयोजनों को मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता को लेकर उठे सवालों ने छोटे और मध्यम स्तर की पूजा समितियों की चिंता बढ़ा दी है। पूजा आयोजकों का कहना है कि उन्हें अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस वर्ष सरकार की ओर से वित्तीय सहायता जारी रहेगी या नहीं। चार महीने पहले ही शुरू हुई चिंता दुर्गा पूजा में अभी करीब चार महीने का समय है, लेकिन तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे समय में अनुदान को लेकर अनिश्चितता ने कई समितियों को बजट और आयोजन की योजनाओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। विशेष रूप से छोटे क्लब और स्थानीय समितियां सरकारी सहायता पर काफी हद तक निर्भर रहती हैं। आर्थिक मदद से मिलता था बड़ा सहारा पिछले कुछ वर्षों में पूजा समितियों को राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती रही है। समय के साथ यह सहायता राशि बढ़ती गई और हजारों समितियों को इसका लाभ मिला। इसके अलावा बिजली शुल्क में छूट, विभिन्न लाइसेंस शुल्कों में राहत और अन्य सुविधाओं के कारण आयोजकों का खर्च काफी कम हो जाता था। कई समितियों के लिए यह सहायता उनके कुल बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। छोटे आयोजनों पर सबसे ज्यादा असर की आशंका पूजा आयोजकों के अनुसार, राज्य की अधिकांश सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियों का बजट अपेक्षाकृत कम होता है। यदि सरकारी सहायता में कटौती होती है या उसे बंद किया जाता है, तो छोटे स्तर के आयोजनों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। आयोजकों का कहना है कि बढ़ती लागत और महंगाई के कारण बिना अतिरिक्त मदद के आयोजन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पंडाल निर्माण को लेकर भी बढ़ी उलझन वित्तीय सहायता के अलावा पंडालों के निर्माण और स्थान चयन को लेकर भी चिंता बनी हुई है। हाल में सार्वजनिक स्थानों और सड़कों से अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए गए अभियानों के बाद आयोजकों को आशंका है कि इस बार अनुमति प्रक्रिया अधिक सख्त हो सकती है। कई समितियां सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर पंडाल लगाती हैं, इसलिए वे प्रशासन के अंतिम दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रही हैं। नियमों के पालन पर रहेगा विशेष जोर पूजा पंडालों के निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही सुनिश्चित करना आवश्यक होता है। अदालत और प्रशासन पहले भी इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करते रहे हैं। इस कारण आयोजकों को उम्मीद है कि इस बार भी सुरक्षा और यातायात संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। प्रशासनिक स्पष्टता का इंतजार पूजा समितियों का कहना है कि तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए उन्हें जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है। अनुदान, पंडाल अनुमति और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर स्थिति साफ होने के बाद ही वे अपने आयोजन की रूपरेखा तय कर पाएंगे। पूजा अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है व्यापक प्रभाव दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ एक बड़े आर्थिक गतिविधि केंद्र के रूप में भी जानी जाती है। इस दौरान मूर्तिकार, सजावट कर्मी, बिजली मिस्त्री, ढाक वादक, मजदूर और छोटे व्यापारी बड़ी संख्या में रोजगार प्राप्त करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटे और मध्यम स्तर की पूजा समितियों के बजट प्रभावित होते हैं, तो इसका असर पूजा से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Mamata Banerjee leads TMC protest campaign against BJP government in Kolkata
अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर हमले के विरोध में सड़क पर उतरेगी TMC, 2 जून को धरने पर बैठेंगी ममता

  पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ते टकराव के बीच तृणमूल कांग्रेस ने राज्यव्यापी आंदोलन का एलान किया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए कथित हमलों के विरोध में टीएमसी अब सीधे सड़क पर उतरने जा रही है। इस अभियान की अगुवाई खुद पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करेंगी। तृणमूल कांग्रेस के कार्यक्रम के तहत 2 जून को ममता बनर्जी कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित रानी रासमणि रोड पर एक दिवसीय धरने पर बैठेंगी। सत्ता परिवर्तन के बाद इसे उनका पहला बड़ा जनआंदोलन और शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। राज्यभर में विरोध मार्च का आयोजन धरने से पहले पार्टी ने पूरे राज्य में विरोध कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं। सोमवार को विभिन्न नगर पालिका क्षेत्रों और ग्रामीण ब्लॉकों में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लेकर प्रदर्शन किया और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। हॉकर्स पर कार्रवाई को भी बनाएगी मुद्दा पार्टी केवल अपने नेताओं पर हुए कथित हमलों तक ही आंदोलन को सीमित नहीं रखना चाहती। हाल में दमदम स्टेशन और कोलकाता के कुछ अन्य इलाकों में अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए गए अभियान को भी टीएमसी ने बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया है। पार्टी का आरोप है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए छोटे दुकानदारों और फुटपाथ कारोबारियों को हटाया जा रहा है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है। ममता बनर्जी अपने धरने के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकती हैं। नेताओं की मौजूदगी पर रहेगी नजर यह धरना ऐसे समय हो रहा है जब हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर राजनीतिक हलचल और कई नेताओं के पार्टी से दूरी बनाने की चर्चाएं तेज रही हैं। पार्टी नेतृत्व ने सभी विधायकों, सांसदों और जिला स्तर के नेताओं को कार्यक्रम में शामिल होने का निर्देश दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह धरना केवल सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि संगठन की एकजुटता दिखाने का भी अवसर होगा। कार्यक्रम में नेताओं की मौजूदगी को पार्टी की अंदरूनी ताकत के पैमाने के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा ने आरोपों को किया खारिज भारतीय जनता पार्टी ने टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी के खिलाफ जो विरोध देखने को मिला, वह किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा नहीं था। भाजपा का दावा है कि यह स्थानीय लोगों की नाराजगी का परिणाम था। राज्य में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच अब सभी की नजरें 2 जून के धरने पर टिकी हैं, जहां ममता बनर्जी भाजपा सरकार के खिलाफ अपने अगले राजनीतिक अभियान का संदेश दे सकती हैं।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0