Bengal News

Mamata Banerjee addresses TMC leaders amid political developments and strategy meeting in West Bengal.
बंगाल में तेज हुई सियासत: ममता बनर्जी ने बुलाई नवनिर्वाचित TMC विधायकों की बैठक

पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनावों के बाद हलचल तेज हो गई है। Mamata Banerjee ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 80 नवनिर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। चुनाव परिणामों के बाद अब टीएमसी राज्य में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाने जा रही है। इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच विपक्ष की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा होगी। नगर निकायों को लेकर रणनीति बनेगी पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक का प्रमुख मुद्दा राज्य के नगर निकायों के कामकाज से जुड़ा होगा। पश्चिम बंगाल के कई नगर निकायों में अभी भी टीएमसी का नियंत्रण है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर सहयोग में कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। टीएमसी नेतृत्व इस बात पर चर्चा करेगा कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी अपने नगर निकायों और संगठनात्मक ढांचे को कैसे मजबूत बनाए रखे। अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों पर KMC का नोटिस यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब Kolkata Municipal Corporation (KMC) ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को कथित अवैध निर्माण के मामले में नोटिस जारी किया है। KMC अधिनियम की धारा 400(1) के तहत जारी इन नोटिसों में संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। अधिकारियों ने संबंधित संपत्तियों की दीवारों पर नोटिस की प्रतियां भी चस्पा की हैं। शुभेंदु अधिकारी ने दिए थे संकेत पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने पिछले सप्ताह ही इन संपत्तियों की जांच के संकेत दिए थे। उन्होंने बिना नाम लिए अभिषेक बनर्जी को “मिस्टर नेफ्यू” कहकर संबोधित किया था। मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि उनके पास एक कंपनी से जुड़ी 24 संपत्तियों की सूची है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पिछली टीएमसी सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। दो नए जांच आयोग बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए दो अलग-अलग आयोग बनाने की घोषणा भी की है। उन्होंने बताया कि संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच की जिम्मेदारी कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज Biswajit Basu को सौंपी जाएगी। वहीं महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच रिटायर्ड जज Samapti Chatterjee की अध्यक्षता में गठित आयोग करेगा। सरकार के अनुसार, दोनों आयोग जून महीने से अपना काम शुरू कर देंगे।  

surbhi मई 19, 2026 0
Mamata Banerjee arrives at Calcutta High Court in lawyer’s robe for post-poll violence case hearing
वकील के कोट में कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, चुनाव बाद हिंसा मामले में रखेंगी पक्ष

चुनाव बाद हिंसा से जुड़ी याचिका पर खुद करेंगी पैरवी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee गुरुवार को वकील की पोशाक पहनकर Calcutta High Court पहुंचीं। बताया जा रहा है कि वह विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक जनहित याचिका (PIL) मामले में खुद अदालत के सामने दलीलें पेश करेंगी। सूत्रों के मुताबिक यह मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल की बेंच में सूचीबद्ध है, जहां ममता बनर्जी कार्यवाही और जांच से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठा सकती हैं। अदालत परिसर में उन्हें वकीलों के पारंपरिक काले चोगे में देखा गया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया। पहले भी सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुकी हैं दलील यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी अदालत में वकील की भूमिका में नजर आई हों। इससे पहले वह एसआईआर मुद्दे को लेकर Supreme Court of India में भी बतौर अधिवक्ता अपना पक्ष रख चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, यह याचिका टीएमसी नेता और वरिष्ठ वकील Kalyan Banerjee के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय की ओर से दाखिल की गई थी। ममता बनर्जी ने वर्ष 1982 में जोगेश चंद्र कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई पूरी की थी। बंगाल चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव गौरतलब है कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी 80 सीटों तक सिमट गई। इसके बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। ममता बनर्जी लगातार आरोप लगाती रही हैं कि बीजेपी ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी कर करीब 100 सीटें “छीन” लीं। वहीं, बीजेपी नेता Suvendu Adhikari ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।  

surbhi मई 14, 2026 0
Police and security forces deployed in West Bengal after post-election violence and political clashes
बंगाल में कत्लेआम-बमबाजी: शुभेंदु के PA की हत्या, हावड़ा में बमबाजी, कमरहट्टी में BJP कार्यकर्ता के घर हमला

West Bengal Election Violence 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में हिंसा का दौर लगातार जारी है. अलग-अलग जिलों से गोलीबारी, बमबाजी, हत्या और राजनीतिक हमलों की खबरें सामने आ रही हैं. मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या ने पूरे राज्य की राजनीति में सनसनी फैला दी है. वहीं हावड़ा, कमरहट्टी, बशीरहाट और आसनसोल में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. मध्यमग्राम में शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या बुधवार रात करीब 11:15 बजे मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ पर अंधाधुंध फायरिंग की गयी. हमलावरों ने उन्हें चार गोलियां मारीं, जिनमें तीन गोलियां उनके सीने में लगीं. गंभीर हालत में उन्हें वीवी सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. इस हमले में उनका ड्राइवर भी गंभीर रूप से घायल हुआ है और उसका इलाज जारी है. हावड़ा के उलुबेड़िया में बमबाजी, 45 लोग गिरफ्तार हावड़ा जिले के उलुबेड़िया में बुधवार को हिंसा भड़क उठी. बीरशिवपुर इलाके में तृणमूल कांग्रेस कार्यालय में तोड़फोड़ के बाद दो गुटों के बीच जमकर बमबाजी हुई. इलाके में अफरा-तफरी मच गयी और बाजार बंद हो गये. इस दौरान पांच राहगीर घायल हो गये. उदयनारायणपुर में भाजपा कार्यकर्ता की हत्या की खबर सामने आयी, जबकि श्यामपुर में एक टीएमसी नेता के घर लूटपाट का आरोप लगा. पुलिस ने मामले में 45 लोगों को गिरफ्तार किया है. कमरहट्टी में भाजपा कार्यकर्ता के घर हमला उत्तर 24 परगना के कमरहट्टी में भाजपा कार्यकर्ता गोविंद झा के घर पर करीब 50 लोगों ने हमला कर दिया. आरोप है कि लाठी, डंडे और लोहे की रॉड से लैस हमलावरों ने घर का दरवाजा तोड़ दिया और परिवार के सदस्यों की पिटाई की. पीड़ित परिवार ने तृणमूल समर्थकों पर हमला करने का आरोप लगाया है. पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गयी है. बताया जा रहा है कि हमले के बाद परिवार दहशत में है. आसनसोल और पश्चिम बर्धमान में भी तनाव आसनसोल और पश्चिम बर्धमान जिले में भी चुनाव बाद हिंसा के आरोप लगे हैं. तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त डॉ. प्रणव कुमार से मुलाकात कर जिले में हिंसा, लूटपाट और पार्टी कार्यालयों पर कब्जे के आरोप लगाये. टीएमसी नेताओं का दावा है कि उनके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की जा रही है और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आयी हैं. बशीरहाट में भाजपा कार्यकर्ता को गोली मारी उत्तर 24 परगना के बशीरहाट में भाजपा कार्यकर्ता रोहित राय को गोली मार दी गयी. घायल रोहित राय ने आरोप लगाया कि वह पार्टी का झंडा लगा रहा था, तभी तृणमूल समर्थक वहां पहुंचे और उस पर फायरिंग कर दी. गोली उसके पेट में लगी है और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है. प्रशासन की अपील, लेकिन हालात तनावपूर्ण राज्य प्रशासन और पुलिस लगातार शांति बनाये रखने की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. भाजपा ने इन घटनाओं को लोकतंत्र पर हमला बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने कई घटनाओं को स्थानीय विवाद और भाजपा की अंदरूनी लड़ाई करार दिया है. 9 मई को होने वाले शपथ ग्रहण से पहले बंगाल की राजनीतिक स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है.  

surbhi मई 7, 2026 0
Suvendu Adhikari celebrating Bhabanipur victory with BJP supporters, waving flags and addressing cheering crowd
‘टारगेट अचीवर’ बने शुभेंदु अधिकारी, भवानीपुर जीत के बाद पहली प्रतिक्रिया आई सामने

West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार शुभेंदु अधिकारी एक बड़े ‘टारगेट  अचीवर’ के रूप में उभरे हैं। नंदीग्राम के बाद अब भवानीपुर में भी उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो उनकी पिछली नंदीग्राम जीत (1956 वोट) से कहीं ज्यादा है। जीत के बाद भावुक हुए शुभेंदु अपनी जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने इसे भाजपा कार्यकर्ताओं को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन 300 कार्यकर्ताओं की है, जिन्होंने राजनीतिक हिंसा में अपनी जान गंवाई। उन्होंने समर्थकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें हिंदू, जैन और सिख समुदायों का भरपूर समर्थन मिला, जिससे यह जीत संभव हो सकी। मोदी-शाह को दिया श्रेय शुभेंदु अधिकारी ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह का विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया था। वहीं, अमित शाह ने भी जीत के बाद प्रतिक्रिया देते हुए भवानीपुर की जनता को बधाई दी और इसे बदलाव का संकेत बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाजपा की जीत पर कहा कि “बंगाल बदल गया है, एक नए युग की शुरुआत हुई है।” भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न शुभेंदु अधिकारी की जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कोलकाता सहित कई इलाकों में जश्न का माहौल रहा और समर्थक सड़कों पर उतरकर खुशी मनाते नजर आए। राजनीतिक संदेश साफ भवानीपुर जैसी सीट पर जीत को भाजपा के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। यह न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी की मजबूती को दिखाता है, बल्कि बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों का भी संकेत देता है।  

surbhi मई 5, 2026 0
BJP supporters celebrating massive election victory in West Bengal with party flags and cheering crowds
बंगाल में सत्ता परिवर्तन: भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत, तृणमूल कांग्रेस का किला ढहा

West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार ऐतिहासिक नतीजे सामने आए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ राज्य की सत्ता पर कब्जा जमाने की ओर निर्णायक बढ़त बना ली है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 148 सीटों के आंकड़े को पार करते हुए भाजपा 190 से अधिक सीटों पर जीत या बढ़त के साथ सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। करीब 15 साल से सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में लड़ी गई इस लड़ाई में कई दिग्गज नेता अपने-अपने क्षेत्रों में पिछड़ गए, जिससे पार्टी के जनाधार में गिरावट साफ नजर आई। कैसे बदला बंगाल का राजनीतिक समीकरण 2011 में जहां भाजपा का खाता तक नहीं खुला था, वहीं 2016 में उसने 3 सीटें जीतीं और 2021 में 77 सीटों के साथ मजबूत विपक्ष बनकर उभरी। इस बार पार्टी ने 40% से ज्यादा वोट शेयर हासिल कर ग्रामीण, आदिवासी और औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ बना ली। इन इलाकों में भाजपा की बड़ी बढ़त चुनाव नतीजों से साफ है कि भाजपा ने उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती इलाकों में शानदार प्रदर्शन किया। इन क्षेत्रों में पार्टी को भारी जनसमर्थन मिला, जबकि टीएमसी शहरी इलाकों और कुछ पारंपरिक सीटों तक सिमटती नजर आई। भाजपा की जीत के बड़े कारण भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे कई अहम वजहें रहीं। पार्टी का मजबूत संगठन, आक्रामक चुनाव प्रचार और बढ़ा हुआ वोट प्रतिशत इसके प्रमुख कारण बने। इसके अलावा सीमावर्ती और आदिवासी क्षेत्रों में गहरी पैठ बनाना भी भाजपा के लिए निर्णायक साबित हुआ। सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कमजोर रणनीति ने भी भाजपा को फायदा पहुंचाया। टीएमसी की हार के कारण तृणमूल कांग्रेस की हार के पीछे सत्ता विरोधी माहौल, संगठनात्मक कमजोरी और नेताओं के खिलाफ बढ़ता असंतोष प्रमुख कारण रहे। कई मंत्री अपने ही क्षेत्रों में पिछड़ गए, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ कमजोर साबित हुई। कल्याणकारी योजनाएं भी इस बार मतदाताओं को पूरी तरह प्रभावित नहीं कर सकीं। नया राजनीतिक अध्याय शुरू इस चुनाव परिणाम के साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। वामपंथ और कांग्रेस के बाद टीएमसी का दौर खत्म होता दिख रहा है और अब भाजपा के नेतृत्व में राज्य में नई राजनीतिक दिशा तय होती नजर आ रही है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।  

surbhi मई 5, 2026 0
Voters queue at West Bengal re-poll booth amid EVM glitch and tight security
पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर दोबारा मतदान जारी: EVM पर सवाल, वोटर्स को करना पड़ा इंतजार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के तहत शनिवार को राज्य के 15 बूथों पर पुनर्मतदान (री-पोल) कराया जा रहा है। इनमें डायमंड हार्बर के 4 और मगरहाट पश्चिम के 11 बूथ शामिल हैं। मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक जारी रहेगा। EVM खराबी का आरोप, वोटर्स परेशान डायमंड हार्बर के रॉयनगर प्राइमरी स्कूल स्थित बूथ नंबर 243 पर मतदाताओं ने EVM में खराबी की शिकायत की। एक वोटर ने कहा कि मशीन ठीक से काम नहीं कर रही लोगों को आधे घंटे से ज्यादा समय तक लाइन में इंतजार करना पड़ा तकनीकी टीम को मौके पर बुलाया गया हालांकि प्रशासन की ओर से स्थिति को जल्द सामान्य करने का दावा किया गया है। क्यों कराना पड़ा री-पोल? दरअसल, 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान इन बूथों पर: EVM से छेड़छाड़ के आरोप राजनीतिक दलों के बीच झड़प मतदान प्रक्रिया में बाधा जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग ने दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया। दक्षिण 24 परगना के सभी बूथ प्रभावित ये सभी 15 बूथ दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित हैं, जिसे चुनाव के लिहाज से संवेदनशील इलाका माना जाता है। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और केंद्रीय बलों की तैनाती भी की गई है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई सियासी हलचल इस बार पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड स्तर पर मतदान हुआ है: पहले चरण (23 अप्रैल): 93.19% वोटिंग दूसरे चरण (29 अप्रैल): 92.48% वोटिंग कुल 294 सीटों पर औसत मतदान: 92.84% इतने बड़े मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक दलों के बीच मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। TMC का BJP पर आरोप री-पोल के बीच शशि पांजा ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि BJP ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की ज्यादा जगहों पर री-पोल कराकर बंगाल की छवि खराब करने की साजिश रची गई TMC ने उकसावे के बावजूद संयम बनाए रखा पांजा ने यह भी दावा किया कि बीजेपी चुनावी तौर पर कमजोर स्थिति में है, इसलिए इस तरह की रणनीति अपना रही है। 4 मई को आएंगे नतीजे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले री-पोल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी माहौल काफी गर्म है।  

surbhi मई 2, 2026 0
Violence, EVM glitches and clashes reported during Phase 2 voting in West Bengal Assembly Elections
बंगाल चुनाव Phase 2: मतदान के बीच हिंसा, EVM में गड़बड़ी और कई इलाकों में बवाल

सुबह से ही कई जिलों में तनावपूर्ण माहौल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के दौरान बुधवार सुबह से ही कई इलाकों में हिंसा, तोड़फोड़ और EVM में गड़बड़ी की खबरें सामने आईं। नदिया, हावड़ा, शांतिपुर और भांगर जैसे क्षेत्रों में मतदान के शुरुआती घंटों में ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। यह चुनाव राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विवाद के बीच हो रहा है, जिसने पहले से ही राजनीतिक तापमान बढ़ा रखा है। चापड़ा में BJP एजेंट पर हमले का आरोप नदिया जिले के चापड़ा में बीजेपी ने आरोप लगाया कि उसके पोलिंग एजेंट मोशारेफ मीर पर तृणमूल समर्थकों ने हमला किया। बताया गया कि उन्हें लोहे की रॉड से पीटा गया, जिससे वह घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। बीजेपी उम्मीदवार सैकत सरकार ने घटना के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हावड़ा में EVM खराब, मतदान प्रभावित हावड़ा के एक मतदान केंद्र पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में तकनीकी खराबी की शिकायत मिली। इसके कारण कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया बाधित रही। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने जल्द ही समस्या का समाधान कर मतदान दोबारा शुरू करा दिया। EVM को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच पहले से ही तीखी बहस चलती रही है। एंटाली में प्रियंका तिबरेवाल की अधिकारियों से बहस कोलकाता के एंटाली विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार प्रियंका तिबरेवाल की मतदान केंद्र पर चुनाव अधिकारियों और सुरक्षा बलों से तीखी बहस हो गई। उनके पोलिंग एजेंट को बूथ से बाहर निकाले जाने पर विवाद बढ़ गया। प्रियंका ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र के भीतर पक्षपातपूर्ण गतिविधियां हो रही थीं। शांतिपुर और भांगर में भी तनाव शांतिपुर में बीजेपी के चुनावी कैंप में तोड़फोड़ की खबर आई। वहीं, दक्षिण 24 परगना के भांगर में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के पोलिंग एजेंट को बूथ में प्रवेश से रोके जाने का आरोप लगा। इन घटनाओं ने कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ममता बनर्जी ने केंद्रीय बलों पर लगाए गंभीर आरोप मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय सुरक्षा बलों पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बाहरी पर्यवेक्षक और केंद्रीय बल मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। ममता ने कहा, "वोट मतदाता डालेंगे, सुरक्षा बल नहीं। इस तरह चुनाव नहीं कराए जा सकते।" 4 मई को आएंगे नतीजे पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड 92.88 प्रतिशत मतदान हुआ था। दूसरे और अंतिम चरण के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। राज्य की राजनीति में इस बार ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच सीधी और बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
IPS Ajay Pal Sharma faces Supreme Court petition over alleged bias during West Bengal election duty
बंगाल चुनाव विवाद: IPS अजय पाल शर्मा पर निष्पक्षता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

निष्पक्ष चुनाव पर उठे सवाल पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन पर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका, चुनाव आयोग पर कार्रवाई का दबाव यह जनहित याचिका आदित्य दास नामक याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल की गई है। इसमें चुनाव आयोग से अपील की गई है कि अजय पाल शर्मा को उनके पद से हटाया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी भूमिका के अनुरूप निष्पक्षता नहीं बरती और मतदाताओं पर प्रभाव डालने या उन्हें डराने-धमकाने जैसा व्यवहार किया। वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत उस वायरल वीडियो से हुई, जिसमें अजय पाल शर्मा को फाल्टा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान को कथित तौर पर चेतावनी देते हुए देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई और उनके आचरण पर सवाल उठने लगे। निष्पक्ष चुनाव को लेकर उठी मांग याचिका में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि ऐसे अधिकारियों को हटाया जाए, जिन पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा? अजय पाल शर्मा 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें कड़े और सख्त पुलिसिंग के लिए जाना जाता है और उनकी छवि अक्सर ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और ‘यूपी के सिंघम’ के रूप में देखी जाती है। वर्तमान में उन्हें पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया गया है। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों की नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी हो सकती है। वहीं टीएमसी की ओर से भी इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए जा रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Closed liquor shops and bars in West Bengal ahead of elections due to dry day restrictions
बंगाल चुनाव से पहले सख्ती: 16 जिलों में शराब बिक्री पर रोक, रात 9 बजे से बार भी बंद

West Bengal में आगामी विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के उत्पाद शुल्क (Excise) विभाग ने 16 जिलों में शराब की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत आज रात 9 बजे से न सिर्फ शराब की दुकानें बंद रहेंगी, बल्कि बार और पब को भी संचालन रोकना होगा। क्यों लिया गया यह फैसला? चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar पहले ही कह चुके हैं कि स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए हर जरूरी उपाय किए जाएंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि शराब बिक्री पर यह रोक चुनाव आयोग की उसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि: मतदान के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी न हो शराब के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश रोकी जा सके हिंसा या अव्यवस्था की आशंका कम हो अचानक फैसले से दुकानदार हैरान दिलचस्प बात यह है कि: पहले जानकारी थी कि 21 अप्रैल से शराब की दुकानें बंद होंगी लेकिन उत्पाद शुल्क विभाग ने अचानक तीन दिन पहले ही आदेश जारी कर दिया इस अचानक फैसले से शराब विक्रेताओं में असमंजस की स्थिति बन गई है। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि वे सरकारी निर्देशों का पालन करेंगे, लेकिन बिना पूर्व सूचना के ऐसा निर्णय उनके व्यापार को प्रभावित करता है। किन जिलों में लागू है प्रतिबंध? पहले चरण के मतदान के तहत कुल 16 जिलों में यह प्रतिबंध लागू किया गया है। इनमें शामिल हैं: Cooch Behar Alipurduar Jalpaiguri Kalimpong Darjeeling Uttar Dinajpur Dakshin Dinajpur Malda Murshidabad Birbhum Paschim Bardhaman Bankura Purulia Paschim Medinipur Purba Medinipur Jhargram इन सभी जिलों में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है। कितनी सीटों पर होगा मतदान? पहले चरण में राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी। यह चरण खास तौर पर उत्तर बंगाल और कुछ दक्षिणी जिलों को कवर करता है, जहां सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर है। चुनाव के दौरान ‘ड्राई डे’ का नियम भारत में चुनाव के दौरान शराब बिक्री पर रोक लगाना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे ‘ड्राई डे’ कहा जाता है। इसका मकसद होता है: मतदाताओं को किसी भी तरह के लालच या दबाव से बचाना चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाना कानून-व्यवस्था बनाए रखना

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Mamata Banerjee addressing a political rally in Malda, targeting BJP and central government policies
बंगाल से दिल्ली तक BJP को हटाने का संकल्प: ममता बनर्जी का बड़ा राजनीतिक ऐलान

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को गर्माते हुए भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बड़ा ऐलान किया है। मालदा जिले के वैष्णव नगर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका लक्ष्य केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वे केंद्र की सत्ता से भी भाजपा को हटाने का संकल्प ले चुकी हैं। ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि वह पहले पश्चिम बंगाल से भाजपा को बाहर करेंगी और इसके बाद दिल्ली की सत्ता से भी उसे उखाड़ फेंकेंगी। उन्होंने इसे जनता के सामने किया गया वादा बताते हुए कहा कि देश की मौजूदा नीतियां जनता को नुकसान पहुंचा रही हैं और बदलाव की आवश्यकता है। निर्वाचन आयोग और केंद्र पर तीखा हमला सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने Election Commission of India पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आयोग ने राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों में बदलाव कर विकास कार्यों को बाधित किया है। उनके अनुसार, यह कदम निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक प्रभाव में लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य में राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। मालदा घटना पर सख्त रुख हाल ही में मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना पर ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे राज्य की छवि के लिए नुकसानदायक बताया और कहा कि ऐसी घटनाएं किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान संयम बरतने की सलाह दी। विपक्षी दलों पर मिलीभगत का आरोप मुख्यमंत्री ने भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस और वामपंथी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी पार्टियां अंदरखाने एक-दूसरे के साथ मिली हुई हैं और राज्य के विकास में बाधा डाल रही हैं। ममता बनर्जी ने जनता से अपील की कि वे इन दलों को चुनाव में जवाब दें। चुनावी माहौल में तेज हुआ सियासी घमासान पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ममता बनर्जी का यह बयान न केवल राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Mamata Banerjee protesting over voter list revision issue
कोलकाता में ममता बनर्जी का धरना दूसरे दिन भी जारी, वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर केंद्र पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee का धरना शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। वह पूरी रात कोलकाता के एस्प्लेनेड मेट्रो चैनल पर धरनास्थल पर ही मौजूद रहीं। ममता बनर्जी ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में 6 मार्च दोपहर 2 बजे से धरना शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने समर्थकों को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाना पश्चिम बंगाल को बांटने की साजिश है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कई योजनाओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है क्योंकि बंगाल कई सामाजिक योजनाओं को लागू करने में आगे रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार ने बजट में ‘बंगालर युवा साथी’ और ‘भूमिहीन खेत मजदूर’ जैसी योजनाओं की घोषणा की थी, जिन्हें अप्रैल से लागू किया जाना था। लेकिन अब सरकार ने इन्हें तुरंत लागू करने का फैसला किया है। उन्होंने महंगाई और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। ममता ने कहा कि रसोई गैस की कीमतें बढ़ने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। धरना स्थल पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद हैं। सुबह से ही समर्थक धरना स्थल पर पहुंचकर मुख्यमंत्री का समर्थन कर रहे हैं।   SIR के बाद लाखों नाम हटाए गए 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष नवंबर में शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद करीब 63.66 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है। इसके बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई है। इसके अलावा 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (मामले  पर न्यायिक निर्णय या जांच प्रक्रिया अभी चल रही है) श्रेणी में रखा गया है, जिनकी पात्रता की जांच आने वाले हफ्तों में की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बदलावों का असर राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0