राष्ट्रीय

Bengal Tense After Post-Poll Violence

बंगाल में कत्लेआम-बमबाजी: शुभेंदु के PA की हत्या, हावड़ा में बमबाजी, कमरहट्टी में BJP कार्यकर्ता के घर हमला

surbhi मई 7, 2026 0
Police and security forces deployed in West Bengal after post-election violence and political clashes
West Bengal Election Violence 2026

West Bengal Election Violence 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में हिंसा का दौर लगातार जारी है. अलग-अलग जिलों से गोलीबारी, बमबाजी, हत्या और राजनीतिक हमलों की खबरें सामने आ रही हैं. मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या ने पूरे राज्य की राजनीति में सनसनी फैला दी है. वहीं हावड़ा, कमरहट्टी, बशीरहाट और आसनसोल में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.

मध्यमग्राम में शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या

बुधवार रात करीब 11:15 बजे मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ पर अंधाधुंध फायरिंग की गयी. हमलावरों ने उन्हें चार गोलियां मारीं, जिनमें तीन गोलियां उनके सीने में लगीं. गंभीर हालत में उन्हें वीवी सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. इस हमले में उनका ड्राइवर भी गंभीर रूप से घायल हुआ है और उसका इलाज जारी है.

हावड़ा के उलुबेड़िया में बमबाजी, 45 लोग गिरफ्तार

हावड़ा जिले के उलुबेड़िया में बुधवार को हिंसा भड़क उठी. बीरशिवपुर इलाके में तृणमूल कांग्रेस कार्यालय में तोड़फोड़ के बाद दो गुटों के बीच जमकर बमबाजी हुई. इलाके में अफरा-तफरी मच गयी और बाजार बंद हो गये. इस दौरान पांच राहगीर घायल हो गये. उदयनारायणपुर में भाजपा कार्यकर्ता की हत्या की खबर सामने आयी, जबकि श्यामपुर में एक टीएमसी नेता के घर लूटपाट का आरोप लगा. पुलिस ने मामले में 45 लोगों को गिरफ्तार किया है.

कमरहट्टी में भाजपा कार्यकर्ता के घर हमला

उत्तर 24 परगना के कमरहट्टी में भाजपा कार्यकर्ता गोविंद झा के घर पर करीब 50 लोगों ने हमला कर दिया. आरोप है कि लाठी, डंडे और लोहे की रॉड से लैस हमलावरों ने घर का दरवाजा तोड़ दिया और परिवार के सदस्यों की पिटाई की. पीड़ित परिवार ने तृणमूल समर्थकों पर हमला करने का आरोप लगाया है. पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गयी है. बताया जा रहा है कि हमले के बाद परिवार दहशत में है.

आसनसोल और पश्चिम बर्धमान में भी तनाव

आसनसोल और पश्चिम बर्धमान जिले में भी चुनाव बाद हिंसा के आरोप लगे हैं. तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त डॉ. प्रणव कुमार से मुलाकात कर जिले में हिंसा, लूटपाट और पार्टी कार्यालयों पर कब्जे के आरोप लगाये. टीएमसी नेताओं का दावा है कि उनके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की जा रही है और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आयी हैं.

बशीरहाट में भाजपा कार्यकर्ता को गोली मारी

उत्तर 24 परगना के बशीरहाट में भाजपा कार्यकर्ता रोहित राय को गोली मार दी गयी. घायल रोहित राय ने आरोप लगाया कि वह पार्टी का झंडा लगा रहा था, तभी तृणमूल समर्थक वहां पहुंचे और उस पर फायरिंग कर दी. गोली उसके पेट में लगी है और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है.

प्रशासन की अपील, लेकिन हालात तनावपूर्ण

राज्य प्रशासन और पुलिस लगातार शांति बनाये रखने की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. भाजपा ने इन घटनाओं को लोकतंत्र पर हमला बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने कई घटनाओं को स्थानीय विवाद और भाजपा की अंदरूनी लड़ाई करार दिया है. 9 मई को होने वाले शपथ ग्रहण से पहले बंगाल की राजनीतिक स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है.

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Nagaland CM Neiphiu Rio
FCRA संशोधन पर नागालैंड के CM ने जताई चिंता, नेफ्यू रियो ने अमित शाह से JPC को भेजने का किया आग्रह

कोहिमा, एजेंसियां। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पुनर्विचार की मांग की है। रियो ने अमित शाह को पत्र लिखकर विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने और व्यापक स्तर पर हितधारकों से चर्चा कराने का आग्रह किया है।   चर्च और सामाजिक संस्थाओं पर असर की चिंता   मुख्यमंत्री रियो ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों को लेकर नागालैंड में कई वर्गों ने चिंता जताई है। खास तौर पर चर्च, शैक्षणिक संस्थानों, धर्मार्थ संगठनों और सामाजिक कल्याण संस्थाओं के कामकाज पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं।   नागालैंड में इन संस्थाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका है। रियो ने कहा कि राज्य की विशिष्ट सामाजिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संशोधनों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए।   JPC से विस्तृत जांच की मांग   रियो ने सुझाव दिया कि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाए, ताकि प्रस्तावित प्रावधानों का विस्तार से अध्ययन किया जा सके और विभिन्न हितधारकों की राय सुनी जा सके।   उन्होंने व्यापक परामर्श की जरूरत पर भी जोर दिया है, ताकि संशोधन लागू होने की स्थिति में धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं के कामकाज में अनावश्यक कठिनाइयां न आएं।   FCRA विधेयक को लेकर बढ़ा राजनीतिक दबाव   FCRA संशोधन विधेयक को लेकर संसद में भी राजनीतिक चर्चा तेज है। सरकार की ओर से विधेयक को JPC के पास भेजने की संभावना के संकेत मिले हैं, जबकि विपक्ष इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहा है।   ऐसे में नागालैंड के मुख्यमंत्री की मांग महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार रियो की आपत्तियों और JPC को भेजने के सुझाव पर क्या रुख अपनाती है।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
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कांवड़ यात्रा के कारण दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ा, NH-9 और ईस्टर्न पेरिफेरल पर लगा लंबा जाम

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ई-वीजा धारकों के लिए 11 नए अंतरराष्ट्रीय पोर्ट, भारत में प्रवेश के विकल्प बढ़कर 88 हुए

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने ई-वीजा धारक विदेशी नागरिकों के लिए 11 नए अंतरराष्ट्रीय प्रवेश पोर्ट को मंजूरी दी है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के बाद अब विदेशी यात्री ई-वीजा के जरिए भारत में प्रवेश के लिए अधिक विकल्पों का इस्तेमाल कर सकेंगे। नए पोर्ट जुड़ने के साथ देश में ई-वीजा के जरिए प्रवेश की सुविधा वाले अंतरराष्ट्रीय पोर्ट की कुल संख्या 88 हो गई है।   9 लैंड पोर्ट और 2 एयरपोर्ट शामिल   नए जोड़े गए 11 प्रवेश बिंदुओं में 9 लैंड पोर्ट और 2 एयरपोर्ट शामिल हैं। नए लैंड पोर्ट हैं—अगरतला, दाररंगा, गेडे, घोजाडांगा, हरिदासपुर, जयगांव, डॉकी, मोरेह और अटारी (रोड)। वहीं भोपाल और तिरुपति एयरपोर्ट को भी ई-वीजा प्रवेश सूची में शामिल किया गया है।   अब 37 एयरपोर्ट और 13 लैंड पोर्ट   नए प्रवेश बिंदु जुड़ने के बाद ई-वीजा धारकों के लिए निर्धारित 88 अंतरराष्ट्रीय पोर्ट में 37 एयरपोर्ट, 38 सीपोर्ट और 13 लैंड पोर्ट शामिल हो गए हैं। इससे खासकर पड़ोसी देशों से सड़क मार्ग के जरिए आने वाले विदेशी यात्रियों के लिए भारत में प्रवेश के विकल्प बढ़ेंगे।   172 देशों के नागरिकों के लिए उपलब्ध है ई-वीजा   भारत ने वर्ष 2014 में 43 देशों के नागरिकों के लिए ई-वीजा सुविधा शुरू की थी। अब यह सुविधा 172 देशों के नागरिकों के लिए उपलब्ध है। सरकार के अनुसार करीब 95 प्रतिशत ई-वीजा आवेदन 72 घंटे से कम समय में प्रोसेस किए जाते हैं।   ई-वीजा के तहत पर्यटन, कारोबार, चिकित्सा, शिक्षा, ट्रांजिट और अन्य निर्धारित श्रेणियों में भारत आने वाले विदेशी नागरिकों को सुविधा मिलती है।   पर्यटन और कारोबार को मिलेगा फायदा   सरकार के इस कदम से विदेशी पर्यटकों, कारोबारी यात्रियों और चिकित्सा या शिक्षा के लिए भारत आने वाले लोगों के लिए यात्रा आसान होने की उम्मीद है। खासकर भोपाल, तिरुपति और विभिन्न भूमि सीमाओं को जोड़ने से विदेशी यात्रियों को प्रमुख महानगरों के अलावा दूसरे क्षेत्रों तक सीधे पहुंचने के विकल्प मिलेंगे।   हालांकि, पाकिस्तानी पासपोर्ट धारकों और पाकिस्तानी मूल के उन लोगों के लिए यह ई-वीजा सुविधा लागू नहीं है, जिन्हें भारत सरकार की मौजूदा नीति के तहत नियमित वीजा के लिए भारतीय मिशन में आवेदन करना होता है।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
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Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मॉनसून सत्र में दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार जारी है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर संसद में जवाब मांग रहे हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर सदन में चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष को जवाब के दौरान सदन में मौजूद रहकर शांतिपूर्ण तरीके से चर्चा सुननी चाहिए। इसी राजनीतिक टकराव के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA ने विपक्ष को घेरने की रणनीति तैयार की है। मंगलवार को होने वाली गठबंधन की 'मंगल मिलन' बैठक के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी की गई है। NDA की बैठक में बनेगी विपक्ष को घेरने की रणनीति मॉनसून सत्र के दौरान NDA संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत गठबंधन के सांसदों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के बाद NDA सांसद ऐसे पोस्टर लेकर सामने आ सकते हैं, जिनमें सरकार का संदेश होगा कि गृह मंत्री चर्चा और जवाब के लिए तैयार हैं, जबकि विपक्ष चर्चा से पीछे हट रहा है। यह रणनीति सीधे तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी के उस रुख का जवाब है, जिसमें वे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से संसद में जवाब की मांग कर रहे हैं। सरकार का दावा- गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से कहा है कि सरकार छात्रों के आंदोलनों और उनसे जुड़ी घटनाओं पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह इस चर्चा का जवाब देने के लिए भी तैयार हैं। हालांकि सरकार की शर्त है कि गृह मंत्री के जवाब के दौरान विपक्ष सदन में व्यवधान पैदा न करे। सरकार का कहना है कि चर्चा के बाद जवाब देने के दौरान विपक्षी सांसदों का सदन से बाहर चले जाना उचित नहीं होगा। सरकार चाहती है कि गृह मंत्री को बिना व्यवधान अपनी बात रखने का अवसर मिले। राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना दूसरी ओर, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री संसद में आकर विपक्ष के सवालों का सामना करने से बच रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि पिछले कई दिनों से छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी। राहुल गांधी की मुख्य मांग क्या है? राहुल गांधी का कहना है कि विपक्ष की मांग किसी सामान्य संसदीय भाषण की नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि गृह मंत्री छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब दें। उनके मुताबिक, सरकार को यह बताना चाहिए कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था और गृह मंत्रालय को इस कार्रवाई की जानकारी थी या नहीं। राहुल गांधी ने दावा किया कि यदि गृह मंत्री को इसकी जानकारी थी तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि उन्हें जानकारी नहीं थी तो भी यह गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है। छात्रों के प्रदर्शन को लेकर क्यों है विवाद? दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। विपक्ष इस घटना की जिम्मेदारी तय करने और संसद में सरकार से जवाब की मांग कर रहा है। सरकार दूसरी तरफ चर्चा के लिए तैयार होने की बात कह रही है। यही अंतर अब संसद में राजनीतिक गतिरोध का प्रमुख कारण बना हुआ है। दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने पूरे विवाद में सरकार और विपक्ष के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। सरकार का पक्ष: सरकार का कहना है कि छात्र आंदोलनों और संबंधित घटनाओं पर संसद में विस्तृत चर्चा की जा सकती है और गृह मंत्री अमित शाह चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं। सरकार विपक्ष से जवाब के दौरान सदन में मौजूद रहने की अपील कर रही है। विपक्ष का पक्ष: राहुल गांधी और कांग्रेस इस मुद्दे पर गृह मंत्री से सीधे जवाब और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका मुख्य सवाल छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल के आदेश को लेकर है। 'मंगल मिलन' के जरिए राजनीतिक संदेश देने की तैयारी NDA की 'मंगल मिलन' बैठक को केवल संसदीय समन्वय तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इस बैठक के जरिए गठबंधन विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी आगे बढ़ा सकता है। यदि NDA सांसद 'गृह मंत्री चर्चा के लिए तैयार, विपक्ष भाग रहा' जैसे संदेश वाले पोस्टर लेकर सामने आते हैं, तो यह सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे विवाद को संसद से बाहर भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश होगी। वहीं विपक्ष इस पूरे मामले को छात्रों के अधिकार, पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है। संसद में गतिरोध कब खत्म होगा? फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। सरकार चर्चा और जवाब के लिए तैयार होने का दावा कर रही है, जबकि विपक्ष गृह मंत्री से छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जवाब चाहता है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा राजनीतिक टकराव का केंद्र बना रह सकता है। गतिरोध तभी खत्म होने की संभावना है जब दोनों पक्ष चर्चा के तरीके और गृह मंत्री के जवाब को लेकर किसी साझा रास्ते पर पहुंचें।  

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