राजनीति

TVK Leads Tamil Nadu Polls

Tamil Nadu–Puducherry Election Results LIVE: ‘थलापति’ विजय का धमाका, रुझानों में TVK सबसे आगे; पारंपरिक दलों को कड़ी चुनौती

surbhi मई 4, 2026 0
Vijay TVK party leading Tamil Nadu election results with vote counting visuals and party workers celebrating
TVK Vijay Leads Tamil Nadu Elections 2026

चेन्नई/पुडुचेरी, 4 मई: दक्षिण भारत के सबसे अहम चुनावों में शामिल तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों ने बड़ा सियासी उलटफेर कर दिया है। अभिनेता से नेता बने Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने पहली ही बार में शानदार प्रदर्शन करते हुए रुझानों में बढ़त बना ली है।

234 सीटों वाले तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है और अब तक सामने आए रुझानों में मुकाबला त्रिकोणीय होते-होते अब TVK के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है।

रुझानों में TVK नंबर-1

अब तक करीब 130 सीटों के रुझानों के अनुसार:

  • TVK: 50 सीटों पर बढ़त
  • AIADMK: 47 सीटों पर आगे
  • DMK: 23 सीटों पर बढ़त

इन आंकड़ों ने यह संकेत दे दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

शुरुआत में AIADMK, फिर बदली तस्वीर

मतगणना के शुरुआती घंटों में तस्वीर कुछ अलग थी।

  • पहले 10 सीटों के रुझानों में AIADMK आगे दिखी
  • 40 सीटों के रुझानों में TVK ने तेजी से बढ़त बनानी शुरू की
  • 60 सीटों तक आते-आते AIADMK (23) और TVK (20) के बीच कांटे की टक्कर
  • 100+ सीटों के रुझानों के बाद TVK ने बढ़त लेकर बाकी दलों को पीछे छोड़ दिया

इससे साफ है कि जैसे-जैसे EVM के वोट खुल रहे हैं, रुझान TVK के पक्ष में मजबूत होते जा रहे हैं।

विजय फैक्टर बना गेम चेंजर

Vijay की लोकप्रियता इस चुनाव में सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभरी है। पहली बार चुनाव मैदान में उतरी उनकी पार्टी को शहरी और युवा मतदाताओं का खासा समर्थन मिलता दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TVK ने पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई है, जिससे DMK और AIADMK दोनों को नुकसान हुआ है।

DMK का दावा, लेकिन रुझान अलग

DMK के नेताओं ने पहले ही पूर्ण बहुमत का दावा किया था और 130-140 सीटें जीतने की बात कही थी, लेकिन शुरुआती रुझान उनके दावे के उलट नजर आ रहे हैं। फिलहाल पार्टी तीसरे नंबर पर चल रही है, जो उसके लिए चिंता का विषय हो सकता है।

पुडुचेरी में NDA की बढ़त बरकरार

पुडुचेरी की 30 सीटों में बहुमत का आंकड़ा 16 है। यहां शुरुआती रुझानों में NDA गठबंधन बढ़त बनाए हुए है:

  • All India N.R. Congress (AINRC): 2 सीटों पर आगे
  • कांग्रेस: 1 सीट पर बढ़त

यहां पहले से NDA की सरकार है और शुरुआती संकेत उसी की वापसी की ओर इशारा कर रहे हैं।

मतदान और मतगणना की स्थिति

  • तमिलनाडु में 23 अप्रैल को 85.10% मतदान दर्ज
  • कुल 4.87 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाले
  • महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही
  • पुडुचेरी में 89.87% मतदान हुआ
  • तमिलनाडु के 62 और पुडुचेरी के 6 मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच गिनती जारी

मतगणना तीन-स्तरीय सुरक्षा के बीच हो रही है और पहले पोस्टल बैलेट, फिर EVM वोटों की गिनती की जा रही है।

क्या बदल जाएगी तमिलनाडु की राजनीति?

तमिलनाडु की राजनीति दशकों से DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन इस बार Tamilaga Vettri Kazhagam की एंट्री ने पूरा समीकरण बदल दिया है।

अगर यही रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो यह राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है, जहां एक नई पार्टी पहली बार में ही सत्ता के करीब पहुंच जाए।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

राजनीति

View more
Deepak Prakash
बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश की MLC नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा रिकॉर्ड, सरकार से अधिसूचना पेश करने को कहा

नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की विधान परिषद सदस्य (MLC) के रूप में नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। अदालत ने नियुक्ति और नामांकन से जुड़े दस्तावेज एवं अधिसूचना पेश करने को कहा है। मामला दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने की संवैधानिक वैधता से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया।   मंत्री पद और MLC नियुक्ति पर उठा सवाल   याचिका में सवाल उठाया गया था कि दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने के बाद निर्धारित संवैधानिक अवधि के भीतर उन्हें विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनाया गया या नहीं। इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।   बिहार सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि दीपक प्रकाश अब विधान परिषद के सदस्य बन चुके हैं और उन्होंने MLC के रूप में शपथ भी ले ली है। सरकार का पक्ष है कि इस तरह उनके मंत्री पद पर बने रहने को लेकर उठाया गया संवैधानिक सवाल अब समाप्त हो गया है।   सुप्रीम कोर्ट ने मांगे नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज   अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए बिहार सरकार से दीपक प्रकाश की नियुक्ति, नामांकन और विधान परिषद की सदस्यता से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। रिपोर्टों के मुताबिक दीपक प्रकाश ने 6 अगस्त 2026 को MLC के रूप में शपथ ली थी। उनका नाम विधान परिषद की खाली हुई सीट पर मनोनीत किया गया था।   आगे की सुनवाई पर नजर   अब सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड के आधार पर मामले की आगे सुनवाई होगी। अदालत यह देखेगी कि नियुक्ति और नामांकन की पूरी प्रक्रिया संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हुई है या नहीं।

abhishek singh अगस्त 8, 2026 0
Jairam Mahto

JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के समर्थन में जयराम महतो का बड़ा ऐलान, 9 अगस्त को करेंगे निर्जला अनशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी NDA सांसदों के साथ बैठक में सलाह देते हुए

सांसदों को PM मोदी की सलाह, बोले- ‘लुटियंस दिल्ली के जाल’ में न फंसें; NDA को बताया एक परिवार

सुप्रीम कोर्ट में महुआ मोइत्रा की वर्चुअल पूछताछ याचिका

महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, वर्चुअल पूछताछ की मांग वाली याचिका वापस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात
पीएम मोदी से मिले सुखबीर सिंह बादल, BJP-SAD गठबंधन को लेकर सियासी चर्चाएं तेज

नई दिल्ली, एजेंसियां। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। इस बैठक के बाद पंजाब की राजनीति में BJP और SAD के बीच दोबारा गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, मुलाकात के बाद दोनों दलों की ओर से गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।   करीब 20 मिनट चली मुलाकात     रिपोर्ट के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री मोदी से संसद परिसर में मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान पंजाब से जुड़े राजनीतिक और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है।   यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पंजाब में आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर विभिन्न दलों की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। ऐसे में मोदी और बादल की मुलाकात को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   गठबंधन की अटकलों को क्यों मिली हवा?     BJP और SAD लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों ने 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर गठबंधन तोड़ दिया था। इसके बाद से दोनों पार्टियां अलग-अलग राजनीतिक रास्ते पर चल रही हैं।   अब दोनों नेताओं की ताजा मुलाकात के बाद पुराने गठबंधन की संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं फिर शुरू हो गई हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी ने गठबंधन बहाली को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।   पंजाब की राजनीति पर नजर     सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को पंजाब की आगामी राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यदि BJP और SAD के बीच दोबारा समझौता होता है तो इसका असर राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।   फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या यह मुलाकात केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित रहेगी या आने वाले दिनों में BJP-SAD गठबंधन की औपचारिक वापसी का रास्ता भी खुलेगा। पार्टी नेतृत्व की अगली बैठकों और बयानों से इस पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते एकनाथ शिंदे

एकनाथ शिंदे ने पीएम मोदी से की मुलाकात, केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें तेज

C. Joseph Vijay, Sangeetha Sornalingam

तमिलनाडु CM विजय की पत्नी संगीता ने तलाक की याचिका वापस ली, चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में मामला बंद

प्रयागराज में राहुल गांधी के कार्यक्रम को सशर्त अनुमति

प्रयागराज में राहुल गांधी के कार्यक्रम की अनुमति पहले रद्द, फिर मिली सशर्त मंजूरी

तमिलनाडु के सांसदों ने राज्यपाल को पत्र लिखा
तमिलनाडु के 21 सांसदों का राज्यपाल को पत्र, ‘तमिझ थाई वाझ्थु’ को कार्यक्रमों में पहले बजाने की मांग

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु के 21 सांसदों ने राज्यपाल आर.एन. रवि को पत्र लिखकर सरकारी और विश्वविद्यालय कार्यक्रमों में राज्य गीत ‘तमिझ थाई वाझ्थु’ को फिर से सबसे पहले बजाने की पुरानी परंपरा बहाल करने की मांग की है। सांसदों ने इस संबंध में राजभवन से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है।   राज्य गीत को तीसरे स्थान पर बजाने पर विवाद     यह विवाद हाल ही में एक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में ‘तमिझ थाई वाझ्थु’ को कार्यक्रम में तीसरे स्थान पर बजाए जाने के बाद सामने आया। सांसदों ने इसे राज्य में लंबे समय से चली आ रही आधिकारिक कार्यक्रमों की परंपरा में बदलाव बताया है।   सांसदों का कहना है कि राज्य गीत को कार्यक्रम की शुरुआत में बजाने की व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए और राष्ट्रीय गान को कार्यक्रम के अंत में बजाया जाना चाहिए।   राज्यपाल से स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग     21 सांसदों ने राज्यपाल से तमिलनाडु के सभी विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों के लिए पहले से स्पष्ट प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इससे भविष्य में कार्यक्रमों में गीतों के क्रम को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं होगा।     राजनीतिक विवाद बढ़ने के आसार     ‘तमिझ थाई वाझ्थु’ के कार्यक्रम में स्थान और क्रम को लेकर विवाद ने तमिलनाडु में राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। 21 सांसदों का राज्यपाल को पत्र लिखना इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना रहा है।   सांसदों की मांग है कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े इस गीत को सरकारी और विश्वविद्यालय कार्यक्रमों में निर्धारित परंपरा के अनुसार सम्मानजनक स्थान दिया जाए।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
राहुल गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रशंसा की

राहुल गांधी ने BJP नेता को बताया अपना पसंदीदा, कैप्टन अमरिंदर सिंह की जमकर की तारीफ

डेरेक ओ’ब्रायन ने संसद में विधेयकों पर सरकार को घेरा

संसद में विधेयकों को लेकर TMC का BJP पर हमला, डेरेक ओ’ब्रायन बोले- ‘मैगी नूडल्स’ की तरह बिल पास हो रहे

राहुल गांधी के प्रयागराज कार्यक्रम पर BJP की प्रतिक्रिया

प्रयागराज कार्यक्रम को लेकर BJP का राहुल गांधी पर हमला, कहा- संसद से बचकर कर रहे ‘छोटी राजनीति’

0 Comments

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?