कोलकाता,एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कालीघाट इकाई के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि पार्टी की ओर से आयोजित शहीद दिवस रैली के दौरान सार्वजनिक सभा से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रैली के आयोजन को लेकर उठे सवाल रिपोर्ट के अनुसार, FIR में आरोप लगाया गया है कि कार्यक्रम के दौरान प्रशासन द्वारा तय नियमों और शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आयोजन में किन नियमों का उल्लंघन हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। शहीद दिवस रैली TMC का बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम TMC हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित करती है, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल होते हैं। इस साल भी कार्यक्रम को लेकर बंगाल की राजनीति में काफी हलचल रही। पार्टी की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं FIR दर्ज होने के बाद TMC की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आगे किस तरह की कार्रवाई की जाएगी। अभिषेक बनर्जी से जुड़े FIR मामले भी चर्चा में इससे पहले TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भी कथित आपत्तिजनक चुनावी टिप्पणी को लेकर FIR दर्ज की गई थी। इस मामले में उन्होंने FIR रद्द कराने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में आतंकवाद, संगठित अपराध और देश विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) के गठन का प्रस्ताव सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक में राज्य में NIA की तर्ज पर एक विशेष जांच एजेंसी बनाने की जरूरत पर चर्चा की गई। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा मुद्दों पर हुई चर्चा बैठक में पश्चिम बंगाल में आतंकवाद, कट्टरपंथ, अवैध हथियारों, नशा तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई। अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में ऐसी विशेष एजेंसी की आवश्यकता पर जोर दिया गया, जो गंभीर मामलों की जांच तेजी से कर सके। SIA को मिल सकती है विशेष जांच की जिम्मेदारी प्रस्तावित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) को आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच के लिए विशेष अधिकार दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इसके गठन और अधिकारों को लेकर अंतिम फैसला राज्य सरकार और संबंधित विभागों की प्रक्रिया के बाद ही होगा। केंद्र ने सुरक्षा तंत्र मजबूत करने पर दिया जोर अमित शाह की बैठक में राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने पर चर्चा हुई। राजनीतिक बहस भी तेज SIA गठन के प्रस्ताव को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई है। जहां बीजेपी इसे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल केंद्र के इस कदम को लेकर सवाल उठा सकते हैं। अभी प्रस्ताव, अंतिम निर्णय बाकी फिलहाल पश्चिम बंगाल में SIA के गठन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यह अभी प्रस्ताव और चर्चा के स्तर पर है। आगे राज्य और केंद्र के बीच समन्वय के बाद ही इसकी रूपरेखा तय होगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सांकराइल फूड पार्क में अमूल के नए इंटीग्रेटेड डेयरी प्लांट की नींव रखी गई है। करीब ₹700 करोड़ की लागत से बनने वाले इस डेयरी कॉम्प्लेक्स को राज्य में खाद्य प्रसंस्करण और डेयरी क्षेत्र के बड़े निवेश के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1000 से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है। अमूल का बड़ा निवेश, डेयरी नेटवर्क को मिलेगी मजबूती इस परियोजना के जरिए अमूल पश्चिम बंगाल में अपने डेयरी नेटवर्क का विस्तार करेगा। नए प्लांट में दूध प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का निर्माण और आधुनिक भंडारण सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे राज्य के किसानों और दुग्ध उत्पादकों को भी बेहतर बाजार उपलब्ध होने की संभावना है। सांकराइल फूड पार्क में विकसित होगा डेयरी कॉम्प्लेक्स अमूल का यह इंटीग्रेटेड डेयरी कॉम्प्लेक्स हावड़ा के सांकराइल फूड पार्क में स्थापित किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र में खाद्य उद्योग को बढ़ावा देगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगी। किसानों को मिलेगा फायदा डेयरी प्लांट के शुरू होने के बाद आसपास के क्षेत्रों के दुग्ध उत्पादकों को अमूल के नेटवर्क से जुड़ने का मौका मिलेगा। इससे दूध की खरीद, प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन मजबूत होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा राज्य सरकार ने कहा है कि इस निवेश से पश्चिम बंगाल में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। प्लांट से जुड़े परिवहन, पैकेजिंग, सप्लाई और अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। बंगाल में निवेश बढ़ाने पर जोर अमूल की यह परियोजना पश्चिम बंगाल में बड़े औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने की कोशिशों का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
कोलकाता, एजेंसियां। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज से पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरे के दौरान उनका मुख्य फोकस सीमा सुरक्षा, कानून व्यवस्था, प्रशासनिक स्थिति और विकास योजनाओं की समीक्षा पर रहेगा। BSF जवानों से करेंगे मुलाकात अमित शाह अपने दौरे के दौरान पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वह सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों और जवानों से मुलाकात कर सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। खासतौर पर बांग्लादेश सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। कानून व्यवस्था और नए आपराधिक कानूनों पर समीक्षा गृह मंत्री राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति और केंद्र द्वारा लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की भी समीक्षा करेंगे। इसके अलावा राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश दे सकते हैं। विकास परियोजनाओं का भी लेंगे जायजा अमित शाह के कार्यक्रम में कई विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं। वह BSF से संबंधित परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी कर सकते हैं। राजनीतिक नजरिए से भी अहम दौरा अमित शाह का यह बंगाल दौरा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में संगठनात्मक गतिविधियों, आगामी राजनीतिक रणनीति और पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
मुर्शिदाबाद, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक रेल हादसा हो गया। यहां रेलवे क्रॉसिंग पार कर रही एक स्कूल वैन को यात्री ट्रेन ने जोरदार टक्कर मार दी। कर्णसुबर्णा रेलवे क्रॉसिंग के पास हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना अजीमगंज-कटवा रेलखंड पर कर्णसुबर्णा स्टेशन और गोविंदापुर रेलवे गेट के बीच हुई। स्कूल वैन बच्चों को लेकर जा रही थी, तभी रेलवे ट्रैक पार करते समय वह ट्रेन की चपेट में आ गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए। दो छात्रों समेत तीन लोगों की मौत हादसे में शुरुआती जानकारी के मुताबिक दो स्कूली बच्चों समेत कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है। कुछ रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या चार बताई गई है, जिसमें तीन छात्र शामिल होने की बात कही गई है। कई घायल छात्रों की हालत गंभीर बताई जा रही है। रेलवे ने जांच के आदेश दिए घटना के बाद रेलवे अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू कराया। शुरुआती जांच में रेलवे क्रॉसिंग की व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रेलवे की ओर से मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इलाके में मचा हड़कंप हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। घटना से इलाके में शोक का माहौल है। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है।
बीरभूम, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में अवैध बालू तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कृषि मंत्री और मयूरेश्वर के विधायक दुध कुमार मंडल ने गुरुवार को खुद सड़क पर उतरकर अवैध बालू परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की। मंत्री ने बिना वैध दस्तावेजों के बालू लेकर जा रहे करीब 12 से 14 डंपरों को रोककर पुलिस के हवाले कर दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में बालू माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया, जबकि स्थानीय लोगों ने मंत्री के कदम का स्वागत किया। शिकायतों के बाद मंत्री ने संभाली कमान जानकारी के अनुसार, मंत्री को पिछले कई दिनों से अवैध बालू तस्करी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि कई वाहन बिना आवश्यक अनुमति और वैध कागजात के बालू का परिवहन कर रहे हैं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मंत्री स्वयं सड़क पर पहुंचे और संदिग्ध डंपरों की जांच शुरू कराई। इस दौरान कई वाहनों को रोका गया और दस्तावेजों की जांच में अनियमितता मिलने पर उन्हें तत्काल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। घटनास्थल पर जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा मंत्री की कार्रवाई की सूचना मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। कुछ समय के लिए इलाके में तनाव जैसी स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस ने हालात को जल्द ही नियंत्रित कर लिया। पकड़े गए सभी डंपरों की जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। अवैध कारोबार पर नहीं होगी कोई रियायत कृषि मंत्री दुध कुमार मंडल ने स्पष्ट कहा कि जिले में अवैध बालू खनन और तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को इस अवैध कारोबार पर स्थायी रोक लगाने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में लापरवाही बरती गई तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे। मंत्री की इस पहल के बाद स्थानीय लोगों ने भी अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की चर्चित अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बुधवार को दिल्ली पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से अपना इस्तीफा सौंपा। इससे पहले जून में उन्होंने ईमेल के माध्यम से इस्तीफा भेजने की कोशिश की थी, लेकिन संसदीय नियमों के तहत उसे स्वीकार नहीं किया गया था। अब उनके औपचारिक इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। ईमेल नहीं, खुद पहुंचकर दिया इस्तीफा जानकारी के अनुसार, कोयल मल्लिक अपने पति और फिल्म निर्माता निशपाल सिंह के साथ दिल्ली पहुंचीं और राज्यसभा सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा सौंपा। बताया जा रहा है कि विदेश यात्रा के कारण वह पहले यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी थीं। देश लौटने के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से अपनी सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया। हाल ही में ली थी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ कोयल मल्लिक ने इसी वर्ष 6 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने अपने परिवार के साथ तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि उन्हें बंगाल की जनता की सेवा करने का अवसर मिला है और वह पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी। चुनाव प्रचार के दौरान भी वह पार्टी के लिए सक्रिय दिखाई दी थीं, लेकिन उसके बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां सीमित हो गई थीं। भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अब तक न तो भाजपा की ओर से और न ही कोयल मल्लिक ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यदि कोयल मल्लिक अपनी नई राजनीतिक दिशा का ऐलान करती हैं तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल होने का ऐलान किया। इस फैसले को TMC के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान का बड़ा संकेत माना जा रहा है। नेतृत्व से नाराजगी बनी वजह मदन मित्रा ने अपने इस्तीफे के पीछे पार्टी नेतृत्व से मतभेद को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के भीतर उनकी बातों को महत्व नहीं दिया जा रहा था और पार्टी में फैसले लेने की प्रक्रिया बदल गई है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल मदन मित्रा के इस कदम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद TMC के भीतर उभर रहे मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। TMC के लिए बड़ा झटका मदन मित्रा लंबे समय से ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते रहे हैं। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना TMC के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। हाल ही में उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारी भी दी गई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। आगे की रणनीति पर नजर मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने के बाद अब सभी की नजर पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और TMC नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
कोलकाता, एजेंसियां। झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी भारत में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी से जुड़े कम दबाव के क्षेत्र और उससे बनी चक्रवाती परिसंचरण के असर से दोनों राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज हवाएं और आकाशीय बिजली का खतरा बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कई जिलों के लिए बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है। झारखंड से बंगाल तक मौसम का बदला मिजाज मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और जलभराव की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में ज्यादा असर की आशंका पश्चिम बंगाल के उत्तरी और दक्षिणी जिलों में भारी बारिश दर्ज की जा रही है। वहीं झारखंड के कई जिलों में भी तेज बारिश, बिजली गिरने और तेज हवा चलने की चेतावनी दी गई है। IMD ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। प्रशासन अलर्ट मोड पर संभावित भारी बारिश को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के जलस्तर, शहरी जलभराव और बिजली आपूर्ति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग ने कहा है कि मानसून की सक्रिय स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है, इसलिए लोगों को आधिकारिक मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में हुए चर्चित एनकाउंटर मामले की जांच अब क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) करेगी। राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक जांच के भी आदेश दिए हैं। इस बीच घटना के बाद हुई हिंसा और तोड़फोड़ के सिलसिले में पुलिस ने 40 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। क्या है पूरा मामला? बारुईपुर में एक 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रभास मंडल को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी को घटनास्थल पर क्राइम सीन का पुनर्निर्माण कराने ले जाया गया था। इसी दौरान उसने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी की सर्विस रिवॉल्वर छीनकर भागने और पुलिस पर गोली चलाने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से उसकी मौत हो गई। एनकाउंटर के बाद उठे सवाल एनकाउंटर की घटना सामने आने के बाद विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। मामले की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने CID जांच के साथ-साथ न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। हिंसा के मामले में 40 से अधिक गिरफ्तार आरोपी की मौत के बाद कुछ इलाकों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिस पर पथराव करने और कानून-व्यवस्था बाधित करने के आरोप लगे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 40 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। CID करेगी पूरे घटनाक्रम की जांच CID यह जांच करेगी कि एनकाउंटर किन परिस्थितियों में हुआ, पुलिस की कार्रवाई नियमानुसार थी या नहीं और पूरे घटनाक्रम में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं। वहीं न्यायिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। राज्यभर में बनी हुई है नजर यह मामला पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया है। सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी, जबकि पुलिस का दावा है कि पूरी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में हाई-टेक उद्योग को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच जापानी कंपनी Mitsubishi ने राज्य में सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित करने में रुचि दिखाई है। पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री तपस रॉय ने बताया कि Mitsubishi के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार के साथ मुलाकात कर प्रस्तावित सेमीकंडक्टर परियोजना को लेकर अपनी इच्छा जताई है। Durgapur या Panagarh में मिल सकती है जमीन राज्य सरकार ने संभावित परियोजना के लिए दुर्गापुर या पानागढ़ में जमीन उपलब्ध कराने का विकल्प दिया है। Mitsubishi के अधिकारी जल्द ही दोबारा राज्य का दौरा कर परियोजना से जुड़ी आगे की बातचीत कर सकते हैं। Mitsubishi प्रतिनिधिमंडल ने की अहम बैठक Mitsubishi के प्रतिनिधियों ने पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री तपस रॉय और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान राज्य में निवेश की संभावनाओं और सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़े अवसरों पर चर्चा हुई। सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में बंगाल का कदम सेमीकंडक्टर उद्योग को आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पश्चिम बंगाल सरकार राज्य को पूर्वी भारत के बड़े निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। रोजगार और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मिलेगा फायदा यदि यह परियोजना अंतिम रूप लेती है तो इससे राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे कुशल युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। अभी अंतिम मंजूरी बाकी हालांकि, अभी तक Mitsubishi की ओर से परियोजना को लेकर अंतिम निवेश घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल बातचीत शुरुआती चरण में है और जमीन, निवेश, तकनीकी जरूरतों सहित अन्य पहलुओं पर आगे फैसला लिया जाएगा।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी की रैली के दौरान कोलकाता में हंगामा हो गया। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर रैली के दौरान अंडे फेंके और नारेबाजी की। घटना के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। TMC की विरोध रैली के दौरान हुआ विवाद जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व में कोलकाता में एक विरोध मार्च निकाला गया था। इसी दौरान कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कथित तौर पर अंडे फेंके और नारे लगाए। घटना के बाद मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को संभाला। रैली में लगे विरोधी नारे रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की ओर से नारेबाजी भी की गई, जिसके बाद रैली स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस और सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल घटना के बाद TMC नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान इस तरह का विरोध सुरक्षा में चूक को दर्शाता है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। TMC और विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है। ममता बनर्जी ने भी रैली के दौरान हुई घटनाओं को लेकर सरकार और पुलिस पर सवाल उठाए हैं। पुलिस कर रही मामले की जांच प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि प्रदर्शनकारी कौन थे और वे सुरक्षा व्यवस्था के बीच तक कैसे पहुंचे।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सत्ता संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है। कोलकाता स्थित पार्टी के राज्य मुख्यालय पर बागी गुट के नियंत्रण के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने शुक्रवार को पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद परिसर में तनाव बढ़ गया। स्थिति को देखते हुए मौके पर CRPF और कोलकाता पुलिस के जवान तैनात किए गए। बागी गुट ने जताया मुख्यालय पर दावा बताया जा रहा है कि बागी गुट ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, फंड और चुनाव चिह्न पर दावा पेश करने के एक दिन बाद यह कदम उठाया। ऋतब्रत बनर्जी अपने समर्थक नेताओं के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे और वहां लगे पुराने साइनबोर्ड हटाकर नया बैनर लगा दिया। बागी गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन घोषित करने का भी दावा किया। बागी नेताओं का कहना है कि कार्यालय का पुराना किराया समझौता समाप्त हो चुका था और नई वर्किंग कमेटी के तहत नया समझौता किया गया है। उनका दावा है कि कार्यालय पर उनका वैध अधिकार है, हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान जताते हुए अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करने से इनकार किया। ममता गुट ने लगाया अवैध कब्जे का आरोप मुख्यालय पर कब्जे की खबर के बाद ममता बनर्जी समर्थक नेताओं ने इसे अवैध कार्रवाई बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने आरोप लगाया कि बागी गुट को केंद्रीय सुरक्षा बलों का संरक्षण मिल रहा है। वहीं टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी इस कार्रवाई को अदालत और जनता दोनों के सामने चुनौती देगी। अब चुनाव आयोग के फैसले पर निगाहें कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्यालय के स्वामित्व और लीज से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही वहां नियमित राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी। इस बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से 6 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक पार्टी के संगठन, नाम और चुनाव चिह्न पर अपने-अपने दावे और जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस विवाद का अगला बड़ा फैसला चुनाव आयोग के रुख पर निर्भर करेगा।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में शुरू की गई प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने का फैसला किया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए लाभार्थियों की व्यापक जांच कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य फर्जीवाड़े पर रोक लगाकर योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। वोटर लिस्ट और डोर-टू-डोर सत्यापन से होगी जांच सरकारी अधिकारियों के अनुसार सभी लाभार्थियों के रिकॉर्ड का मिलान अंतिम मतदाता सूची से किया जाएगा। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हट चुके हैं या जो अपात्र पाए जाएंगे, उन्हें योजनाओं की सूची से बाहर किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर घर-घर जाकर भी सत्यापन किया जाएगा, ताकि सरकारी सहायता केवल वास्तविक और जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंचे। नवंबर 2025 में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान करीब 80 लाख संदिग्ध नाम हटाए गए थे, जिनके आधार पर अब कल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने क्या कहा ? राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने अपने पहले बजट भाषण में संकेत दिया था कि सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन उनमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए जाएंगे। इसी क्रम में सरकार ने जनकल्याण शिविरों में प्राप्त नए आवेदनों की जांच शुरू कर दी है। सत्यापन पूरा होने तक वृद्धावस्था और विधवा पेंशन जैसी कुछ योजनाओं के वितरण को अस्थायी रूप से रोका गया है, जबकि कन्याश्री और रूपश्री जैसी योजनाओं की भी कड़ी निगरानी की जा रही है। वहीं, सरकार ने तृणमूल कांग्रेस की महत्वाकांक्षी 'कृषक बंधु' योजना को बंद कर दिया है। अधिकारियों का दावा है कि इस योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और फर्जी लाभार्थी शामिल थे। इसके स्थान पर भाजपा सरकार नई योजना के तहत प्रत्येक पात्र किसान को सालाना 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी। कृषि विभाग का अनुमान है कि सख्त सत्यापन के बाद मौजूदा लाभार्थियों में से 40 प्रतिशत से अधिक अपात्र नाम हटाए जा सकते हैं।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शहीद दिवस रैली से जुड़े कथित अवमानना मामले में दोनों नेताओं से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करें। क्या है पूरा मामला? याचिकाकर्ता का आरोप है कि शहीद दिवस रैली के आयोजन के दौरान हाईकोर्ट के पहले जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वे आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की नई तारीख भी तय की है, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा पर कथित तौर पर अंडे, बैंगन और कीचड़ फेंके जाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करते हुए सुरक्षा और कानूनी संरक्षण की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई नहीं की, जबकि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर पर तेजी दिखाई जा रही है। हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल करने की दी अनुमति शुक्रवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में महुआ मोइत्रा की ओर से याचिका दायर करने की अनुमति मांगी गई। उनके वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस का रवैया पक्षपातपूर्ण है और उनकी शिकायत को नजरअंदाज किया जा रहा है। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी। अब अगली सुनवाई में इस मामले में पुलिस की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अदालत का रुख स्पष्ट हो सकता है। कार्यकर्ता सभा के दौरान हुआ था विरोध प्रदर्शन यह पूरा मामला एक जुलाई को नदिया जिले के कालीगंज में आयोजित टीएमसी की कार्यकर्ता सभा से जुड़ा है। महुआ मोइत्रा कार्यक्रम में मौजूद थीं, तभी पार्टी कार्यालय के बाहर राष्ट्रीय राजमार्ग पर काले झंडे लेकर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने “गो बैक” और “हाय-हाय” के नारे लगाए और पार्टी कार्यालय की खिड़की की ओर अंडे, बैंगन और कीचड़ फेंके। इतना ही नहीं, टीएमसी कार्यकर्ताओं और महुआ को बाहर निकलने से रोकने की भी कोशिश की गई। पुलिस पर निष्क्रिय रहने का आरोप घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा कर दावा किया कि प्रदर्शनकारी भाजपा समर्थक थे और पुलिस पूरे घटनाक्रम के दौरान मूकदर्शक बनी रही। उन्होंने कहा कि पुलिस ने न तो भीड़ को हटाने की कोशिश की और न ही हमलावरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की। महुआ का कहना है कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। अब इस पूरे विवाद पर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
बंगाल, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद राज्य में निवेश आकर्षित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी क्रम में देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों में शामिल आदित्य बिड़ला समूह से राज्य में निवेश करने का आग्रह किया गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल एक बार फिर उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और पुराने औद्योगिक घरानों को राज्य में वापस निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। पुराने औद्योगिक संबंधों का दिलाया गया स्मरण कोलकाता में आयोजित 'बिजनेस अपॉर्च्युनिटी प्लेटफॉर्म' कार्यक्रम में शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि आदित्य बिड़ला समूह का बंगाल से ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि कभी इस समूह का मुख्यालय कोलकाता में हुआ करता था, लेकिन श्रमिक अशांति और उस समय के औद्योगिक माहौल के कारण समूह को अपना मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब राज्य में उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है और बिड़ला समूह जैसे प्रतिष्ठित उद्योग घरानों का स्वागत है। 1978 की घटना का किया उल्लेख अपने संबोधन में शमिक भट्टाचार्य ने वर्ष 1978 की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय उद्योगपति आदित्य बिड़ला को कोलकाता में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने अपने व्यवसाय की सुरक्षा और विस्तार के लिए मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, इसके बाद कई अन्य बड़े उद्योग समूहों ने भी बंगाल से अपना मुख्यालय दूसरी जगह स्थानांतरित कर लिया। निवेश और रोजगार पर सरकार का फोकस भाजपा का कहना है कि राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। हालांकि, आदित्य बिड़ला समूह की ओर से इस आग्रह पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्य सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद बढ़ाने की पहल को निवेश और औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कोलकाता एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी सियासी हलचल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का बागी विधायक दल आज चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व और चुनाव चिन्ह से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष आयोग के समक्ष रखेगा। नेतृत्व विवाद को लेकर चुनाव आयोग के सामने रखेगा पक्ष सूत्रों के अनुसार, बागी गुट का कहना है कि पार्टी में नए नेतृत्व का गठन किया गया है और इसकी आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग को दी जानी चाहिए। वहीं ममता बनर्जी समर्थक गुट का दावा है कि टीएमसी की वैध राष्ट्रीय कार्यसमिति और पदाधिकारियों की सूची पहले ही आयोग को सौंप दी गई है और पार्टी पर उनका ही अधिकार है। चुनाव चिन्ह पर भी हो सकती है चर्चा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बागी गुट की यह पहल भविष्य में पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर कानूनी विवाद का रूप ले सकती है। हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक हलकों की नजर आयोग के फैसले पर आज होने वाली इस मुलाकात पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग के अगले कदम से इस विवाद की दिशा और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इसका असर आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के औद्योगिक शहर हल्दिया में मंगलवार तड़के बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (HPL) की नैफ्था पाइपलाइन में अचानक भीषण आग लगने से कम से कम 35 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू कर दिया गया। सुबह 5 बजे भड़की आग प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग सुबह करीब 5 बजे नैफ्था पाइपलाइन से उठी। नैफ्था अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया। उस समय आसपास काम कर रहे कई कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी जिला प्रशासन के मुताबिक, हादसे में झुलसे सभी घायलों को पहले हल्दिया सब-डिवीजनल अस्पताल ले जाया गया। इनमें से कई की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए तामलुक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों के उपचार में जुटी हुई है। रेल सेवा प्रभावित, दमकल की 12 गाड़ियां मौके पर आग लगने का स्थान हल्दिया और पांसकुड़ा के बीच रेलवे ट्रैक के निकट होने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर इस मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई। आग पर काबू पाने के लिए शुरुआत में दो दमकल गाड़ियां भेजी गईं, लेकिन आग की तीव्रता को देखते हुए बाद में कुल 12 दमकल वाहन राहत कार्य में लगाए गए। हादसे के कारणों की जांच जारी प्रारंभिक जांच में पाइपलाइन में रिसाव को आग की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, HPL प्रबंधन ने बयान जारी कर कहा है कि शुरुआती जानकारी के अनुसार आग कंपनी परिसर के पास स्थित एक अनधिकृत नैफ्था चोरी बिंदु के आसपास लगी थी। कंपनी और प्रशासन की संयुक्त टीम मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे ज्वलनशील रसायनों से दूर रहें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) की हल्दिया रिफाइनरी में मंगलवार तड़के एक नेफ्था ) पाइपलाइन में भीषण आग लग गई। हादसे में कम से कम 15 कर्मचारी झुलस गए, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को तत्काल हल्दिया उप-मंडलीय अस्पताल और अन्य चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है। सुबह तड़के लगी आग प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग सुबह करीब 4 बजे से 5 बजे के बीच पाइपलाइन में भड़की। देखते ही देखते आग की लपटें और काला धुआं पूरे रिफाइनरी परिसर में फैल गया। घटना के बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। ट्रेन सेवाएं भी हुईं प्रभावित आग की गंभीरता को देखते हुए आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। हादसे का असर हल्दिया-हावड़ा रेल मार्ग पर भी पड़ा और कुछ ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हुईं है। जांच के आदेश इंडियन ऑयल और स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती तौर पर आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों और तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना की वास्तविक वजह सामने आएगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में कथित जबरन धर्मांतरण और तथाकथित "लव जिहाद" के मामलों को रोकने के लिए सख्त कानून लाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार जल्द ही इस संबंध में नया विधेयक लाने की दिशा में काम करेगी। इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। क्या होगा नए कानून का उद्देश्य? मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति का धोखे, दबाव, लालच या जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन रोकना है। सरकार का कहना है कि कानून केवल ऐसे मामलों पर कार्रवाई के लिए बनाया जाएगा, जहां किसी प्रकार की अवैध या जबरन गतिविधि के आरोप हों। सरकार ने क्या कहा? सरकार का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन छल, प्रलोभन या दबाव के माध्यम से कराया जाता है, तो ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी उद्देश्य से बंगाल में नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है। विपक्ष की प्रतिक्रिया घोषणा के बाद विपक्षी दलों ने इस प्रस्तावित कानून पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कानून का दायरा और प्रावधान स्पष्ट होने के बाद ही उसके प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा। वहीं समर्थकों का मानना है कि इससे अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। अभी कानून नहीं हुआ लागू फिलहाल सरकार ने केवल कानून लाने की मंशा जाहिर की है। विधेयक का मसौदा, विधानसभा में पेश किए जाने की तारीख और अंतिम प्रावधानों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। कानून लागू होने से पहले इसे विधानसभा से पारित कराना होगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।