राष्ट्रीय

धर्मांतरण रोकने के लिए नया कानून लाएगी बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ने किया बड़ा ऐलान

abhishek singh जून 27, 2026 0
Suvendu Adikari
Suvendu Adikari Love Jihad

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में कथित जबरन धर्मांतरण और तथाकथित "लव जिहाद" के मामलों को रोकने के लिए सख्त कानून लाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार जल्द ही इस संबंध में नया विधेयक लाने की दिशा में काम करेगी। इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

 

क्या होगा नए कानून का उद्देश्य?

 

मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति का धोखे, दबाव, लालच या जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन रोकना है। सरकार का कहना है कि कानून केवल ऐसे मामलों पर कार्रवाई के लिए बनाया जाएगा, जहां किसी प्रकार की अवैध या जबरन गतिविधि के आरोप हों।

 

सरकार ने क्या कहा?

 

सरकार का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन छल, प्रलोभन या दबाव के माध्यम से कराया जाता है, तो ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी उद्देश्य से बंगाल में नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है।

 

विपक्ष की प्रतिक्रिया

 

घोषणा के बाद विपक्षी दलों ने इस प्रस्तावित कानून पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कानून का दायरा और प्रावधान स्पष्ट होने के बाद ही उसके प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा। वहीं समर्थकों का मानना है कि इससे अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

 

अभी कानून नहीं हुआ लागू

 

फिलहाल सरकार ने केवल कानून लाने की मंशा जाहिर की है। विधेयक का मसौदा, विधानसभा में पेश किए जाने की तारीख और अंतिम प्रावधानों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। कानून लागू होने से पहले इसे विधानसभा से पारित कराना होगा।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

राष्ट्रीय

View more
Assam floods
बाढ़ में डूबा घर, राहत शिविर में मिली हिम्मत; 17 साल की जानमोनी ने दिल्ली में जीता कराटे गोल्ड

जोरहाट। असम में आई विनाशकारी बाढ़ ने 17 वर्षीय कराटे खिलाड़ी जानमोनी कोंवर के परिवार को राहत शिविर में पहुंचा दिया। घर और प्रैक्टिस ग्राउंड पानी में डूब गए, लेकिन मुश्किल हालात के बावजूद जानमोनी ने हिम्मत नहीं हारी। नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित 20वीं ऑल इंडिया इंडिपेंडेंस कप कराटे चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा और जज्बे का परिचय दिया।   बाढ़ में डूब गया घर और प्रैक्टिस ग्राउंड   जोरहाट जिले के होल्मोरा के पास माजियाभेटी गांव की रहने वाली जानमोनी कोंवर बचपन से ही कराटे में रुचि रखती हैं। वह करीब 10 साल की उम्र से अलग-अलग कराटे प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं।   19 जुलाई को असम में आई बाढ़ के दौरान उनका घर पानी में डूब गया। उनका प्रैक्टिस ग्राउंड भी बाढ़ की चपेट में आ गया। इसके बाद परिवार को तटबंध पर बनाए गए राहत शिविर में शरण लेनी पड़ी।   बाढ़ के कारण दिल्ली में होने वाली प्रतियोगिता की तैयारी करना जानमोनी के लिए बेहद मुश्किल हो गया था। घर और अभ्यास की जगह नहीं होने से उनका मन प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का भी नहीं था।   राहत शिविर में हुई अलख पांडे से मुलाकात   इसी मुश्किल दौर में फिजिक्स वाला के फाउंडर और CEO अलख पांडे जोरहाट के बाढ़ राहत शिविर पहुंचे। वहां उन्हें जानमोनी की कराटे प्रतिभा और संघर्ष के बारे में जानकारी मिली। जानमोनी की खेल भावना से प्रभावित होकर अलख पांडे ने उनकी मदद करने का फैसला किया। उन्होंने जानमोनी को 3 लाख रुपये का चेक दिया और दिल्ली में होने वाली कराटे चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए फ्लाइट की व्यवस्था भी कराई। इस प्रोत्साहन के बाद जानमोनी ने प्रतियोगिता में जाने का फैसला किया। राहत शिविर में उपलब्ध सीमित परिस्थितियों के बीच उन्होंने अभ्यास जारी रखा और दिल्ली के लिए रवाना हुईं।   तालकटोरा स्टेडियम में जीता गोल्ड   जानमोनी ने 20वीं ऑल इंडिया इंडिपेंडेंस कप कराटे चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया। 8 अगस्त की शाम उन्होंने प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। बाढ़ के कारण पैदा हुई मुश्किल परिस्थितियों के बीच हासिल की गई यह उपलब्धि जानमोनी और उनके परिवार के लिए बेहद खास है। उन्होंने दिखाया कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादे और मेहनत के सामने बाधा नहीं बन सकतीं।   घर अब भी बाढ़ में डूबा, परिवार राहत शिविर में   जानमोनी की जीत के बाद गांव में खुशी का माहौल है, लेकिन उनके परिवार की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। उनका घर अभी भी बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है और परिवार राहत शिविर में रह रहा है।   सामान्य स्थिति लौटने में अभी समय लग सकता है। इसके बावजूद जानमोनी की उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गांव का हौसला बढ़ाया है। बाढ़ की त्रासदी के बीच जानमोनी कोंवर की यह कहानी संघर्ष, खेल भावना और सही समय पर मिले प्रोत्साहन की मिसाल बन गई है।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
भारतीय रेलवे की नई ट्रेन सेवाएं और ट्रेनों के रूट विस्तार

रेलवे ने दो नई ट्रेनों को दी मंजूरी, यूपी और गुजरात के यात्रियों को बड़ी राहत; 4 ट्रेनों का रूट बढ़ा, 7 के नए ठहराव

Abhishek Banerjee

अभिषेक बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, आंख के इलाज के लिए तीन हफ्ते विदेश जाने की मिली अनुमति

चीनी नागरिक लियू फेंगफेई की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

चीनी नागरिक लियू फेंगफेई की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, छह महीने में ट्रायल पूरा करने का निर्देश

Tribunals Reforms Bill 2026
लोकसभा ने हंगामे के बीच ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026 को दी मंजूरी, बिना चर्चा के हुआ पारित

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में सोमवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 लोकसभा से पारित हो गया। विधेयक पर सदन में विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी और इसे ध्वनिमत से मंजूरी दी गई। विपक्षी सांसद प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों को लेकर लगातार नारेबाजी कर रहे थे।   हंगामे के बीच बिना चर्चा के पारित हुआ बिल   लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग की जा रही थी।   हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही पहले स्थगित हुई। दोपहर बाद कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विरोध जारी रहा। इसी दौरान विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 पेश किया और विपक्ष के विरोध के बीच विधेयक को पारित कर दिया गया।   राष्ट्रीय अधिकरण आयोग बनाने का प्रस्ताव   विधेयक का प्रमुख प्रावधान राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना करना है। प्रस्तावित आयोग विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और एकसमान बनाने का काम करेगा।   सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य न्यायाधिकरणों की कार्यप्रणाली में दक्षता, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया में एकरूपता सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित आयोग में एक अध्यक्ष और चार सदस्य होंगे। अध्यक्ष पद के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश पात्र होंगे। आयोग का मुख्यालय राष्ट्रीय राजधानी में रखने का प्रस्ताव है।   सरकार ने सुधार को क्यों जरूरी बताया?   केंद्र सरकार का कहना है कि देश में अलग-अलग न्यायाधिकरणों के लिए नियुक्ति और प्रशासन की व्यवस्था को अधिक एकसमान और पारदर्शी बनाने की जरूरत है। सरकार के मुताबिक, नया ढांचा न्यायाधिकरणों के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।   विधेयक कानून बनने के बाद 2021 के ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट को निरस्त करने का भी प्रावधान है।   विपक्ष के विरोध के बीच संसद की कार्यवाही स्थगित   विधेयक पारित होने के बाद भी सदन में हंगामा जारी रहा। पीठासीन अधिकारी ने विपक्षी सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन विरोध नहीं थमा।   इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई। इस घटनाक्रम ने संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव को एक बार फिर सामने ला दिया।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
Supreme Court Reaction

SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में रुख, कहा- अवधारणा लागू नहीं होनी चाहिए

स्लोवेनिया में भारतीय दूतावास की तोड़फोड़ पर भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने स्लोवेनिया में भारतीय दूतावास की तोड़फोड़ की निंदा की, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

असम में बाढ़ से प्रभावित इलाके और राहत बचाव अभियान

असम में बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 100 पहुंचा, 1.37 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

Bankers Books Evidence Bill 2026 से डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता
संसद ने Bankers’ Books Evidence Bill 2026 को दी मंजूरी, डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी सबूत का दर्जा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद ने Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े करीब 135 साल पुराने कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नए कानून के तहत इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और क्लाउड में रखे गए बैंकिंग रिकॉर्ड को अदालतों में साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने के लिए स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा।   1891 के पुराने कानून की जगह लेगा नया विधेयक     Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 का उद्देश्य Bankers’ Books Evidence Act, 1891 को बदलना है। पुराना कानून उस समय बनाया गया था, जब बैंकिंग रिकॉर्ड मुख्य रूप से कागजी दस्तावेजों के रूप में रखे जाते थे।   आज बैंकिंग व्यवस्था में लेन-देन के रिकॉर्ड बड़े पैमाने पर डिजिटल माध्यमों, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों और क्लाउड सर्वर में रखे जाते हैं। ऐसे में सरकार ने मौजूदा कानून को डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप बनाने की जरूरत बताई है।   डिजिटल रिकॉर्ड भी अदालत में बनेंगे साक्ष्य     नए कानून का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बैंकिंग रिकॉर्ड की परिभाषा और उसके डिजिटल स्वरूप से जुड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रूप में उपलब्ध बैंक रिकॉर्ड को कानूनी कार्यवाही में साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करने की व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है।   इससे बैंक स्टेटमेंट, इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल बैंकिंग दस्तावेजों को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। इससे न्यायिक मामलों में बैंक रिकॉर्ड की जांच और प्रस्तुति को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।   लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी मंजूरी     विधेयक को 6 अगस्त 2026 को लोकसभा ने पारित किया था। इसके बाद 10 अगस्त को राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी, जिसके साथ विधेयक ने संसद की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी कर ली।   राज्यसभा में विधेयक के पारित होने के दौरान विपक्ष ने बहस के समय को लेकर आपत्ति जताई और विरोध में सदन से वॉकआउट भी किया।   डिजिटल बैंकिंग के दौर में क्यों महत्वपूर्ण है फैसला     भारत में UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बैंकिंग रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक रूप में तैयार और सुरक्षित किया जाता है।   ऐसे में नया कानून अदालतों में डिजिटल बैंकिंग दस्तावेजों की स्वीकार्यता को स्पष्ट करने और बैंकिंग तथा न्यायिक प्रक्रियाओं को डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप बनाने की दिशा में अहम बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, कानून के व्यावहारिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि डिजिटल रिकॉर्ड की प्रमाणिकता और उन्हें अदालत में पेश करने की प्रक्रिया किस तरह लागू की जाती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
Shivraj Singh Chouhan

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 6,000 से अधिक छात्रों के लिए जारी की ₹21.35 करोड़ की छात्रवृत्ति

Jaisalmer School Bus

राजस्थान के जैसलमेर में स्कूल बस में लगी भीषण आग, 17 बच्चों ने बाल-बाल बचकर बचाई जान

Nagaland CM Neiphiu Rio

FCRA संशोधन पर नागालैंड के CM ने जताई चिंता, नेफ्यू रियो ने अमित शाह से JPC को भेजने का किया आग्रह

0 Comments

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?