लक्जरी ज्वेलरी ब्रांड Bvlgari की नई हाई ज्वेलरी कलेक्शन “Eclettica” सिर्फ कीमती गहनों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह पर्सनल स्टाइल, आत्मविश्वास और पहचान की कहानी भी बयां करती है। फैशन राइटर Lamiya Chitalwalla ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे एक 30.75 कैरेट के दुर्लभ हीरे और ज्वेलरी डिजाइनों ने उन्हें स्टाइल को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा दी।
लेख में लमिया ने बताया कि बचपन में फैशन को लेकर उनका आत्मविश्वास काफी कमजोर था। कपड़ों के फिट और ट्रेंड्स के बीच खुद को सहज महसूस करना मुश्किल होता था। ऐसे में उन्हें अपनी मां की बोल्ड ज्वेलरी स्टाइल से प्रेरणा मिली।
उनकी मां भारी सिल्वर इयररिंग्स, बड़ी बिंदी और काजल के साथ खुद को अलग तरीके से पेश करती थीं। यही स्टाइल धीरे-धीरे लमिया के लिए आत्मविश्वास का जरिया बन गया। कॉलेज के दिनों में सिल्वर कड़े, जुमके और मिक्स मेटल्स पहनकर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
मिलान में आयोजित Bvlgari के हाई ज्वेलरी इवेंट में ब्रांड की ज्वेलरी क्रिएटिव डायरेक्टर Lucia Silvestri ने नई “Eclettica” कलेक्शन पेश की। इस खास इवेंट में Priyanka Chopra Jonas, Dua Lipa और Anne Hathaway जैसी ग्लोबल हस्तियां शामिल हुईं।
Silvestri ने बताया कि उनकी डिजाइन फिलॉसफी हमेशा versatile, playful और feminine रही है। इस कलेक्शन में 15 transformable creations और 9 masterpieces शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग तरीकों से पहना जा सकता है।
कलेक्शन का सबसे चर्चित पीस “Serpenti Imperial Heart” नेकलेस रहा। इसमें लगा 30.75 कैरेट का Golconda-type diamond भारत के किसी शाही परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है।
Silvestri ने कहा कि उनकी ज्यादातर जेमस्टोन्स भारत के Jaipur से खरीदी जाती हैं और लगभग हर कलेक्शन में भारत का कोई न कोई प्रभाव जरूर शामिल होता है।
इसके अलावा “Seres Scarf” नेकलेस भी काफी चर्चा में रहा, जिसे नौ अलग-अलग तरीकों से पहना जा सकता है।
लेख में यह बात खास तौर पर उभरकर सामने आती है कि ज्वेलरी केवल सजावट नहीं, बल्कि खुद को व्यक्त करने का जरिया भी बन सकती है। चाहे मिक्स मेटल्स पहनना हो या एक स्टेटमेंट पीस चुनना, असली मायने इस बात के हैं कि वह आपको कैसा महसूस कराता है।
Lucia Silvestri के शब्दों में, “जब कोई ज्वेलरी पहनता है और उसके चेहरे पर खुशी दिखाई देती है, वही सबसे बड़ी सफलता है।”
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। मानसून में बढ़ी हुई नमी का असर त्वचा के साथ-साथ बालों और स्कैल्प पर भी पड़ता है। इस मौसम में बाल चिपचिपे होने, डैंड्रफ, खुजली और हेयर फॉल की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि बारिश के मौसम में नारियल तेल लगाना चाहिए या नहीं। विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून में नारियल तेल पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, तेल की मात्रा और लगाने का तरीका स्कैल्प की स्थिति के अनुसार तय करना जरूरी है। क्या बारिश में नारियल तेल लगा सकते हैं? सामान्य तौर पर मानसून में बालों में नारियल तेल लगाया जा सकता है। नारियल तेल बालों की नमी बनाए रखने और बालों के शाफ्ट को होने वाले कुछ नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है। यह बालों में प्रोटीन लॉस को कम करने में भी सहायक हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नारियल तेल हर तरह के हेयर फॉल का इलाज है। बाल झड़ने के पीछे तनाव, हार्मोनल बदलाव, पोषण की कमी, आनुवंशिक कारण और स्कैल्प से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। क्या नारियल तेल लगाने से बाल ज्यादा झड़ते हैं? सीधे तौर पर नारियल तेल को बाल झड़ने का सामान्य कारण नहीं माना जाता। लेकिन अगर किसी व्यक्ति की स्कैल्प पहले से ऑयली है या उसे डैंड्रफ और फंगल समस्या है, तो अधिक मात्रा में तेल लगाने से परेशानी बढ़ सकती है। तेल लगाने के बाद अगर स्कैल्प में खुजली, जलन या डैंड्रफ बढ़ जाए, तो बाल टूटने या झड़ने की समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है। मानसून में कैसे लगाएं नारियल तेल? बारिश के मौसम में नारियल तेल लगाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। स्कैल्प और बालों की जरूरत के अनुसार कम मात्रा में तेल लगाएं। बहुत ज्यादा तेल लगाकर लंबे समय तक स्कैल्प को चिपचिपा न रखें। तेल लगाने के बाद बालों को अच्छी तरह धो लें। गीले बालों में जोर से कंघी करने से बचें। डैंड्रफ या खुजली बढ़ने पर तेल का इस्तेमाल रोक दें। समस्या लगातार बनी रहे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। अचानक ज्यादा बाल झड़ें तो न करें नजरअंदाज अगर बाल सामान्य से काफी ज्यादा झड़ रहे हैं या लगातार हेयर फॉल की समस्या बनी हुई है, तो केवल तेल को इसका कारण मानकर घरेलू उपायों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। लगातार या अचानक बढ़े हेयर फॉल के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में डर्मेटोलॉजिस्ट से जांच कराना बेहतर है। निष्कर्ष: मानसून में नारियल तेल लगाना पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है। लेकिन ऑयली स्कैल्प, डैंड्रफ या फंगल समस्या होने पर सावधानी जरूरी है। तेल की मात्रा कम रखें और स्कैल्प की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें।
हरियाली तीज पर खूबसूरत और ट्रेडिशनल दिखने के लिए हजारों रुपये खर्च करना जरूरी नहीं है। थोड़ी स्मार्ट स्टाइलिंग और सही एक्सेसरीज की मदद से महज 1000 रुपये के बजट में भी रॉयल और फेस्टिव लुक तैयार किया जा सकता है। अगर आपके वॉर्डरोब में पहले से साड़ी या सूट मौजूद है, तो खर्च और भी कम हो सकता है। हरी साड़ी या सूट के साथ चूड़ियां, स्टेटमेंट ज्वेलरी, मेहंदी और सिंपल मेकअप आपके लुक को खास बना सकते हैं। ग्रीन या ट्रेडिशनल आउटफिट को बनाएं बेस तीज के लिए हरे रंग की साड़ी, सूट, लहंगा या अनारकली एक शानदार विकल्प है। अगर घर में पहले से हरी साड़ी मौजूद है तो नया आउटफिट खरीदने की जरूरत नहीं होगी। साड़ी को नए अंदाज में ड्रेप करके और कॉन्ट्रास्टिंग ब्लाउज या दुपट्टे के साथ लुक को बिल्कुल अलग बनाया जा सकता है। अगर नया आउटफिट खरीदना है तो करीब 400 रुपये का बजट रखें। बजट कम हो तो लोकल मार्केट से सस्ती साड़ी या दुपट्टा लेकर भी फेस्टिव लुक तैयार किया जा सकता है। चूड़ियों से मिलेगा रॉयल टच तीज के श्रृंगार में चूड़ियों की खास जगह है। हरी कांच की चूड़ियों के साथ गोल्डन या स्टोन वाले कंगन पहनने से हाथों का लुक ज्यादा फेस्टिव नजर आएगा। इसके लिए 100 से 150 रुपये तक खर्च किए जा सकते हैं। डार्क ग्रीन के साथ गोल्डन या ग्रीन के साथ रेड चूड़ियों का कॉम्बिनेशन भी खूबसूरत लगेगा। ज्वेलरी में चुनें एक स्टेटमेंट पीस कम बजट में पूरी हैवी ज्वेलरी खरीदने के बजाय एक स्टेटमेंट पीस चुनना बेहतर रहेगा। आप बड़े झुमके, कुंदन नेकलेस या टेंपल ज्वेलरी में से कोई एक विकल्प चुन सकती हैं। करीब 300 से 350 रुपये में आर्टिफिशियल ज्वेलरी का अच्छा विकल्प मिल सकता है। इसके साथ छोटी बिंदी या हल्का मांगटीका लुक को और आकर्षक बना सकता है। मेहंदी और मेकअप से बढ़ाएं खूबसूरती तीज के लुक को पूरा करने के लिए मेहंदी और हल्का मेकअप काफी है। अगर आपके पास घर में बेसिक मेकअप प्रोडक्ट्स हैं तो अलग से पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। करीब 100 से 150 रुपये में मेहंदी लगवाकर लुक को फेस्टिव बनाया जा सकता है। मेकअप में हल्का बेस, काजल, मस्कारा, ब्लश और गुलाबी या लाल लिप कलर इस्तेमाल कर सकती हैं। हेयरस्टाइल में ट्राई करें फूलों वाला बन बालों में सिंपल लो बन, चोटी या सॉफ्ट वेव्स तीज के ट्रेडिशनल लुक के साथ अच्छी लगती हैं। बन या चोटी में छोटे आर्टिफिशियल फूल लगाने से कम खर्च में भी खूबसूरत फेस्टिव टच मिल सकता है। 1000 रुपये का आसान बजट प्लान आउटफिट: करीब 400 रुपये चूड़ियां: 100-150 रुपये स्टेटमेंट ज्वेलरी: 300-350 रुपये मेहंदी/फूल: 100-150 रुपये मेकअप: घर में मौजूद सामान का इस्तेमाल प्रो टिप: अगर आपके पास पहले से साड़ी और ज्वेलरी है, तो पूरे 1000 रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं। बची रकम से ब्लाउज की फिटिंग, हेयरस्टाइल या छोटी एक्सेसरीज पर खर्च करके लुक को और बेहतर बनाया जा सकता है।
Plastic Bottle Reuse Ideas: घर में खाली पड़ी प्लास्टिक की बोतल को अक्सर लोग इस्तेमाल के बाद फेंक देते हैं। लेकिन थोड़ी सावधानी के साथ इसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर घर में स्क्रबर खत्म हो गया है, तो प्लास्टिक बोतल से अस्थायी स्क्रबर या स्क्रबर होल्डर बनाया जा सकता है। इसे बनाने के लिए घर में आसानी से मिलने वाली कुछ चीजों की जरूरत होगी। हालांकि, प्लास्टिक काटते समय खास सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि इसके किनारे तेज हो सकते हैं। स्क्रबर बनाने के लिए चाहिए ये सामान इसके लिए एक साफ प्लास्टिक बोतल, कैंची या कटर, मजबूत धागा या रबर बैंड और पुराना साफ कपड़ा या प्लास्टिक की जाली ले सकते हैं। बर्तन साफ करने के लिए डिशवॉशिंग लिक्विड भी रखें। ऐसे बनाएं प्लास्टिक बोतल का स्क्रबर सबसे पहले प्लास्टिक बोतल को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें और उसका लेबल हटा दें। अब बोतल के बीच वाले हिस्से को सावधानी से अलग करें और उसे पतली-पतली पट्टियों में काट लें। इन पट्टियों को हल्का मोड़कर जाली जैसा आकार देने की कोशिश करें। इसके बाद सभी पट्टियों को एक साथ इकट्ठा करें और बीच से मजबूत धागे या रबर बैंड की मदद से बांध दें। इस्तेमाल करने से पहले प्लास्टिक के किनारों को अच्छी तरह जांच लें। अगर किनारे नुकीले या बहुत खुरदरे हैं, तो इसे बर्तन साफ करने के लिए इस्तेमाल न करें। प्लास्टिक काटना नहीं चाहते तो अपनाएं यह तरीका अगर बोतल को काटने का झंझट नहीं करना चाहते हैं, तो इसके निचले हिस्से को साफ करके उसमें पुराना साफ कपड़ा या जाली वाला स्क्रबर रखा जा सकता है। इस तरह बोतल एक छोटे होल्डर की तरह काम कर सकती है और स्क्रबर को पकड़ना आसान हो जाता है। बर्तन साफ करते समय इन बातों का रखें ध्यान स्क्रबर पर थोड़ा डिशवॉशिंग लिक्विड लगाकर बर्तनों को हल्के हाथ से साफ करें। नॉन-स्टिक बर्तन, कांच और दूसरी नाजुक सतहों पर ज्यादा दबाव न डालें। अगर प्लास्टिक ढीला होने लगे, टूट जाए या बहुत गंदा हो जाए, तो उसे दोबारा इस्तेमाल न करें। खाने के सीधे संपर्क में आने वाली सतहों पर नुकीले या खुरदरे प्लास्टिक का इस्तेमाल करने से बचें। पुरानी प्लास्टिक बोतल का दोबारा इस्तेमाल घर में जरूरत के समय काम आ सकता है, लेकिन बर्तन साफ करने के लिए सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। यदि बोतल का प्लास्टिक कटने के बाद तेज या खुरदरा हो गया है, तो उसे स्क्रबर के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय किसी सुरक्षित विकल्प का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा।