हैदराबाद, एजेंसियां। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि तेलंगाना को देश का नया बुलेट ट्रेन हब बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य के लिए तीन प्रस्तावित हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर तैयार किए गए हैं, जिनसे हैदराबाद को पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई से जोड़ा जाएगा। यह परियोजना दक्षिण भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। तीन बड़े शहरों से जुड़ेगा हैदराबाद रेल मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कॉरिडोरों के जरिए हैदराबाद से पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई तक तेज रफ्तार रेल सेवा उपलब्ध कराने की योजना है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा और व्यापार, उद्योग तथा पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। रेल बजट से मिलेगी नई रफ्तार अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तेलंगाना के लिए इस बार रेलवे क्षेत्र में ₹5,400 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस निवेश से नई रेल लाइनें, स्टेशन आधुनिकीकरण और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं को गति मिलेगी। हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का होगा विस्तार रेल मंत्री के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के अनुभव के आधार पर अब देश के अन्य हिस्सों में भी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना को इस नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है, जिससे दक्षिण भारत में आधुनिक रेल संपर्क को नई दिशा मिलेगी।
कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पदभार संभालने के तुरंत बाद कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। शपथ ग्रहण के बाद आयोजित अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने युवाओं, छात्रों और रोजगार से जुड़े कई फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर अब पूर्णविराम लग चुका है और सरकार विकास के एजेंडे पर आगे बढ़ेगी। सभी छात्रों को मिलेगा मुफ्त बस पास नई सरकार का पहला बड़ा फैसला स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए मुफ्त बस पास उपलब्ध कराने का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब केवल छात्राओं ही नहीं, बल्कि सभी विद्यार्थियों को मुफ्त बस पास की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए छात्रों को आवेदन करना होगा और योजना को लागू करने के लिए परिवहन विभाग के साथ आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार पहल डीके शिवकुमार ने रोजगार को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए कहा कि नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार विभिन्न कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित करेगी ताकि युवाओं को उनकी योग्यता और कंपनियों की आवश्यकता के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। गांवों में बनेंगे भारत जोड़ो यूथ क्लब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में ‘भारत जोड़ो यूथ क्लब’ स्थापित करने की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रत्येक क्लब को 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। सरकार का लक्ष्य राज्यभर में लगभग 10,000 ऐसे क्लब स्थापित करना है। युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय युवाओं का है और सरकार उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी से जुड़ी नई पहलें युवाओं को बेहतर अवसर प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री पद को बताया जनता के विश्वास की जिम्मेदारी पदभार ग्रहण करने के बाद डीके शिवकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद केवल संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि जनता के भरोसे का प्रतीक है। उन्होंने राज्य के लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सभी मिलकर ऐसा कर्नाटक बनाएं जो अधिक समृद्ध, समानतापूर्ण और विकासोन्मुख हो। नई सरकार की प्राथमिकताएं हुईं स्पष्ट शपथ ग्रहण के तुरंत बाद की गई घोषणाओं से यह संकेत मिला है कि नई सरकार शिक्षा, रोजगार और युवा कल्याण पर विशेष ध्यान देने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में इन योजनाओं के क्रियान्वयन और अन्य नीतिगत फैसलों पर सरकार की अगली रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
बेंगलुरु, एजेंसियां। देश में गैस सिलेंडर की बढ़ती किल्लत के बीच अब सिलेंडर चोरी की घटनाएं भी सामने आने लगी हैं। कर्नाटक की राजधानी Bengaluru और उसके आसपास के इलाकों में घरों के बाहर रखे एलपीजी सिलेंडर चोरी होने के मामले सामने आए हैं, जिनके CCTV वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और आपूर्ति संकट के कारण देश के कई हिस्सों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। लोग सुबह 4 बजे से ही सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े हो रहे हैं। कई जगहों पर गैस एजेंसियों के बाहर लाइनें 500 मीटर तक पहुंच गई हैं। नागरभावी इलाके में चोरी बेंगलुरु के नागरभावी इलाके में एक चोर बाइक से आया और घर के बाहर रखा गैस सिलेंडर चोरी कर फरार हो गया। बताया जा रहा है कि आरोपी सिलेंडर को बोरे में भरकर मौके से भाग निकला। यह पूरी घटना घर के बाहर लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है। चन्नपट्टना में दूसरी घटना दूसरी घटना Channapatna इलाके में सामने आई है, जो Bengaluru–Mysuru Expressway के पास स्थित है। यहां स्कूटर पर सवार दो बदमाश एक घर में घुसे और बाहर रखा LPG सिलेंडर चुराकर फरार हो गए। यह वारदात भी CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। लोगों से सतर्क रहने की अपील इन घटनाओं के बाद स्थानीय पुलिस ने लोगों से सावधान रहने और गैस सिलेंडर को घर के बाहर खुला न छोड़ने की सलाह दी है। पुलिस का कहना है कि संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत सूचना दें। इस बीच सरकार का कहना है कि देश में गैस की पर्याप्त आपूर्ति है, लेकिन जमाखोरी और कालाबाजारी के कारण कुछ जगहों पर संकट की स्थिति बन रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जल्द ही आपूर्ति सामान्य की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।