बेंगलुरु: आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 18 जून को होने वाले इस चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के साथ पवन खेड़ा और मंसूर अली खान शामिल हैं। राहुल गांधी की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, रणदीप सिंह सुरजेवाला और के.सी. वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। खरगे ने कर्नाटक विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन विधानसभा सचिव एम.के. विशालाक्षी को सौंपा। ‘कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत पक्की करने के लिए एकजुट रहें’ नामांकन के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों और नेताओं ने एकमत से उनके नाम का समर्थन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में सभी कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी पूरी तरह एकजुट रहेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव 18 जून को होना है और कांग्रेस संगठन को मजबूत एकता के साथ मैदान में उतरना होगा। 25 जून को समाप्त हो रहा है खरगे का कार्यकाल मल्लिकार्जुन खरगे वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। इसी कारण पार्टी ने उन्हें एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने घोषित किए तीन उम्मीदवार कांग्रेस ने कर्नाटक से राज्यसभा के लिए तीन उम्मीदवार उतारे हैं। खरगे के अलावा पार्टी ने पवन खेड़ा, जो कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख हैं, और मंसूर अली खान, जो राष्ट्रीय सचिव हैं, को भी उम्मीदवार बनाया है। नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून तय की गई है। पवन खेड़ा और मंसूर अली खान अपने नामांकन बाद में दाखिल करेंगे।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री DK Shivakumar ने प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने के लिए सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर योजनाओं की निगरानी के लिए जिलों और तालुकों का नियमित दौरा करने को कहा है। समीक्षा बैठक में सीएम का सख्त संदेश बेंगलुरु में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी तरह के भेदभाव के बिना काम करेगी। उन्होंने कहा कि शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता की भागीदारी प्राथमिकता होगी। 15 दिन में तैयार होगी विभागीय योजना सीएम ने सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और उसके क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया। सचिवों को नियमित रूप से जिलों और तालुकों का दौरा कर योजनाओं की प्रगति जांचने को कहा गया है। शिकायत निवारण के लिए नया तंत्र बनाने की तैयारी मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जन शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों के समाधान के लिए एक अलग प्रशासनिक तंत्र विकसित किया जाएगा, जो समस्याओं के त्वरित और कानूनी समाधान में मदद करेगा। CSR फंड के बेहतर उपयोग पर जोर सीएम ने करीब 8,000–8,500 करोड़ रुपये के CSR फंड के प्रभावी उपयोग और पारदर्शी लेखा-जोखा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि CSR नीति के नए दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे। शिक्षा और कानून-व्यवस्था पर फोकस मुख्यमंत्री ने प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने और नए स्कूलों के निर्माण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। साथ ही उन्होंने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक तालुका में विशेष पुलिस दस्ते तैनात करने का सुझाव दिया। कर्नाटक भवन और दिल्ली दौरे की तैयारी दिल्ली स्थित कर्नाटक भवन के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए सीएम ने इसकी समीक्षा की बात कही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह जल्द दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। गारंटी योजनाओं में बदलाव नहीं सीएम शिवकुमार ने साफ किया कि राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा, दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
बेंगलुरु, एजेंसियां। कर्नाटक की राजनीति में आज एक महत्वपूर्ण दिन है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता D. K. Shivakumar मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। उनका शपथ ग्रहण समारोह बुधवार शाम 4 बजे लोकभवन में आयोजित होगा। इस अवसर पर कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं, वीवीआईपी मेहमानों और पार्टी कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। समारोह को लेकर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की है। मंत्रियों की संख्या को लेकर जारी है असमंजस मुख्यमंत्री के साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों की संख्या को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस विधायक Sharan Prakash Patil ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ लगभग 14 नेता मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। हालांकि इससे पहले पार्टी के एक अन्य विधायक ने पहली सूची में केवल 9 मंत्रियों के शामिल होने की बात कही थी। वहीं कांग्रेस विधायक R. Krishnamurthy का दावा है कि पहली सूची में नौ नाम शामिल किए गए हैं, जबकि विधायक N. A. Haris ने कहा कि अभी तक आलाकमान ने किसी सूची को अंतिम रूप नहीं दिया है। उनके अनुसार मंत्रियों की दो अलग-अलग सूची जारी हो सकती हैं, जिनमें कुछ नेता आज शपथ लेंगे और बाकी 15 से 20 दिनों बाद मंत्रिमंडल में शामिल किए जाएंगे। कांग्रेस ने बताया नए युग की शुरुआत कांग्रेस विधायक Sharath Kumar Bachegowda ने इस शपथ ग्रहण समारोह को कर्नाटक की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही मंत्रियों के नामों की घोषणा करेगा और नई सरकार राज्य में विकास तथा सामाजिक न्याय की नीतियों को आगे बढ़ाएगी। 2028 विधानसभा और 2029 लोकसभा चुनाव पर नजर राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस इस नेतृत्व परिवर्तन को भविष्य की चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रही है। पार्टी का लक्ष्य आगामी 2028 विधानसभा चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत राजनीतिक आधार तैयार करना है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि पिछले वर्षों में लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों को जारी रखते हुए सरकार जनता का विश्वास और मजबूत करेगी। सुरक्षा और ट्रैफिक के विशेष इंतजाम शपथ ग्रहण समारोह को देखते हुए बेंगलुरु प्रशासन ने लोकभवन और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है। कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है ताकि कार्यक्रम के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे। समारोह में बड़ी संख्या में समर्थकों और नेताओं के पहुंचने की उम्मीद है।
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही उनके नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। अब राज्य में नए मुख्यमंत्री के चयन और नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। कांग्रेस में पिछले कई महीनों से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस आलाकमान के निर्देश का पालन करते हुए छोड़ा मुख्यमंत्री पद सिद्धारमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के निर्देशों का पालन किया है और पार्टी के फैसले का सम्मान किया है। इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में सिद्धारमैया ने कहा कि पार्टी की ओर से उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी रुचि राष्ट्रीय राजनीति में नहीं है और वह कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय बने रहना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक के रूप में उनका कार्यकाल अभी दो वर्ष बाकी है और वह जनता के बीच रहकर अपनी राजनीतिक भूमिका जारी रखेंगे। 2023 में सत्ता में वापसी के बाद शुरू हुआ था दूसरा कार्यकाल सिद्धारमैया ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला था। कांग्रेस ने बीजेपी को हराकर राज्य में सत्ता वापसी की थी और सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया था, जबकि डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब उनके इस्तीफे के साथ ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। इस्तीफे के बाद समर्थकों में भावुकता, कई जगह हुए विरोध प्रदर्शन मुख्यमंत्री पद छोड़ने के फैसले के बाद सिद्धारमैया समर्थकों में नाराजगी और भावुकता देखने को मिली। 28 मई को राज्य के कई हिस्सों में समर्थकों ने प्रदर्शन किया और नेतृत्व परिवर्तन के फैसले पर सवाल उठाये। बेंगलुरु स्थित सिद्धारमैया के सरकारी आवास पर बड़ी संख्या में समर्थक जमा हुए। कई समर्थकों ने उनसे इस्तीफा वापस लेने की अपील की। इस दौरान माहौल काफी भावुक नजर आया। सिद्धारमैया बाहर आये और समर्थकों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने लोगों से शांत रहने और पार्टी के फैसले का सम्मान करने की अपील की। डीके शिवकुमार के आवास के बाहर जश्न, समर्थकों ने मनायी खुशी जहां एक तरफ सिद्धारमैया समर्थकों में निराशा थी, वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के आवास के बाहर जश्न का माहौल देखने को मिला। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए उनके समर्थकों ने मिठाइयां बांटीं और जश्न मनाया। कई कांग्रेस नेता और विधायक भी शिवकुमार को बधाई देने उनके आवास पहुंचे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर समर्थन जताया और नेतृत्व परिवर्तन को कांग्रेस के लिए नया अध्याय बताया। दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ अहम बैठकों की संभावना इस्तीफे के तुरंत बाद सिद्धारमैया दिल्ली के लिए रवाना हो गए। माना जा रहा है कि वह कांग्रेस आलाकमान के साथ नए मुख्यमंत्री के चयन और मंत्रिमंडल गठन को लेकर चर्चा करेंगे। उधर, डीके शिवकुमार भी बाद में दिल्ली पहुंचे। वर्तमान में वह उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में होने वाली बैठकों में विधायक दल के नए नेता के चयन, मंत्रिमंडल के स्वरूप और प्रदेश संगठन में संभावित बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। नए मुख्यमंत्री के नाम पर कांग्रेस के अंतिम फैसले का इंतजार कर्नाटक में अब सबसे बड़ी नजर कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर टिकी हुई है। हालांकि डीके शिवकुमार का नाम सबसे आगे माना जा रहा है, लेकिन पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में सत्ता और संगठन दोनों को संतुलित रखने की रणनीति के तहत फैसला ले सकता है। आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
युगांडा से भारत लौटी एक भारतीय महिला में इबोला वायरस संक्रमण जैसे लक्षण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया था। एहतियात के तौर पर महिला को बेंगलुरु के सरकारी अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया था। अब राहत की खबर सामने आई है। महिला की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है और उसमें इबोला वायरस संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। पुणे लैब भेजा गया था ब्लड सैंपल स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, महिला के ब्लड सैंपल को जांच के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में इबोला संक्रमण नहीं पाया गया। अधिकारियों ने बताया कि महिला को हल्का बदन दर्द था, लेकिन इसके अलावा कोई गंभीर लक्षण नहीं थे। उसकी हालत सामान्य और स्थिर बताई जा रही है। सरकार बोली- भारत में इबोला का कोई मामला नहीं केंद्र और राज्य सरकारों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में इबोला वायरस का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि अफ्रीकी देशों में संक्रमण के मामलों को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है और सभी जरूरी स्वास्थ्य प्रोटोकॉल लागू हैं। एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकारें मिलकर एयरपोर्ट और अन्य एंट्री पॉइंट्स पर स्क्रीनिंग और निगरानी कर रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित देशों से लौटने वाले लोगों को 21 दिनों तक स्वास्थ्य निगरानी और सेल्फ मॉनिटरिंग की सलाह दी है। लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क की सलाह स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति में बुखार, बदन दर्द, कमजोरी या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए। राज्य में त्वरित प्रतिक्रिया दल (Rapid Response Teams) भी निगरानी गतिविधियों में जुटे हुए हैं। बेंगलुरु और मंगलुरु में विशेष केंद्र चिन्हित कर्नाटक सरकार ने इबोला जैसी संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए विशेष आइसोलेशन और क्वारंटाइन केंद्र भी चिन्हित किए हैं। बेंगलुरु में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट डिजीज को आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, जबकि महामारी रोग अस्पताल को क्वारंटाइन और उपचार केंद्र के रूप में तैयार रखा गया है। वहीं मंगलुरु में श्रीनिवास पोर्ट अस्पताल को क्वारंटाइन सेंटर और वेनलॉक जिला अस्पताल को आइसोलेशन व उपचार केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है। WHO ने इबोला को लेकर जारी किया अलर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला संक्रमण को “अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” घोषित किया था। अफ्रीकी देशों में संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कांगो में अब तक 100 से ज्यादा पॉजिटिव केस और सैकड़ों संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। इसी को देखते हुए भारत में भी स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्कता बरत रही हैं।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में “डिजिटल अरेस्ट” के जरिए 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला से 24 करोड़ रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। Karnataka State Cyber Command ने इस बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी खुद को Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) के वरिष्ठ अधिकारी बताकर महिला को लगातार डराते रहे और करीब दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रखा। दो महीने तक डराकर वसूले करोड़ों रुपये जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 10 फरवरी से 24 अप्रैल 2026 के बीच महिला को बार-बार पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इस दौरान महिला ने 26 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 24 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। पुलिस के अनुसार, यह रकम देशभर के 10 बैंकों में मौजूद 23 फर्जी बैंक खातों में भेजी गई थी। ये आरोपी हुए गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है: N. Shivagnanam - इरोड, तमिलनाडु Akkach Mallik - मुंबई Palak Bhai Patel - अहमदाबाद Amit Narendra Patel - अहमदाबाद Om Prakash Rajput - नई दिल्ली Gaurav Kumar - बिहार बैंक अलर्ट से खुला मामला धोखाधड़ी का खुलासा 24 अप्रैल को हुआ, जब एक बैंक ने संदिग्ध लेनदेन की जानकारी साइबर कमांड यूनिट को दी। इसके बाद पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर पीड़िता को समझाया और आगे रकम ट्रांसफर होने से रोका। कार्रवाई के दौरान करीब 3 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ठगी रोकी गई। पुलिस ने कई बैंक खातों को फ्रीज भी किया। 4 करोड़ रुपये बचाए, कई खाते फ्रीज बेंगलुरु स्थित साइबर कमांड के पुलिस महानिदेशक Pranab Mohanty ने बताया कि जांच के दौरान एनआरसीपी पोर्टल की मदद से कई खातों को फ्रीज किया गया। उन्होंने कहा कि अब तक 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सुरक्षित की गई है और अदालत के आदेशों के जरिए करीब 1.5 करोड़ रुपये की रिकवरी भी हुई है। क्या होता है डिजिटल अरेस्ट? पुलिस के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का तेजी से बढ़ता तरीका है। इसमें जालसाज खुद को पुलिस, CBI, ED या अदालत के अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो या ऑडियो कॉल पर डराते हैं। आरोपी पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर कानूनी मामले में फंस चुका है और गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने होंगे। कई मामलों में पीड़ितों को घंटों या दिनों तक लगातार निगरानी में रखा जाता है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi की बेंगलुरु यात्रा से पहले सुरक्षा में कथित चूक का मामला सामने आया है। प्रधानमंत्री के काफिले के रास्ते के पास जिलेटिन स्टिक मिलने के बाद छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। यह मामला 10 मई का है, जब प्रधानमंत्री मोदी Art of Living Foundation के 45 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उसके इंटरनेशनल सेंटर के दौरे पर जाने वाले थे। दौरे से पहले सुरक्षा जांच और निरीक्षण के दौरान पुलिस को संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिली थी। निरीक्षण के दौरान मिली जिलेटिन स्टिक जानकारी के मुताबिक, एक पुलिस कांस्टेबल को सर्किट और टाइमर लगी जिलेटिन की छड़ें बरामद हुई थीं। यह सामग्री प्रधानमंत्री के काफिले के निर्धारित मार्ग के पास मिली, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए National Investigation Agency (NIA) की टीम ने भी जांच शुरू की थी। किन पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई? बेंगलुरु दक्षिण जिले के पुलिस अधीक्षक R. Srinivas Gowda ने कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। निलंबित अधिकारियों में शामिल हैं: एक सब-इंस्पेक्टर एक सहायक सब-इंस्पेक्टर (ASI) चार कांस्टेबल प्राथमिक जांच में सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन में लापरवाही सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। जांच जारी फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जिलेटिन स्टिक वहां कैसे पहुंची और इसके पीछे किसी साजिश की आशंका थी या नहीं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
Karnataka में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के बीच नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने दोनों नेताओं के साथ अहम बैठक की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, खरगे ने सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ Thiruvananthapuram से Bengaluru लौटने के बाद राज्य के ऊर्जा मंत्री K. J. George के आवास पर चर्चा की। सत्ता संघर्ष की अटकलें फिर तेज कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता साझाकरण और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लंबे समय से अटकलें लगती रही हैं। पिछले साल नवंबर में कांग्रेस सरकार के आधे कार्यकाल पूरे होने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई थीं। राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा रही है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने को लेकर अंदरखाने खींचतान जारी है। बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा? सूत्रों के अनुसार, केरल में नई कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से लौटने के बाद नेताओं की यह अनौपचारिक बैठक हुई। इस दौरान राज्य के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ नेता नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान से स्पष्ट रुख चाहते हैं। कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल मधुगिरी से कांग्रेस विधायक K. N. Rajanna ने भी संकेत दिया कि नेतृत्व के मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा हुई होगी। उन्होंने कहा, “खरगे, राहुल गांधी, सिद्धारमैया और शिवकुमार सभी केरल में मौजूद थे, तो फिर वहीं चर्चा क्यों नहीं हुई?” राहुल गांधी ने भी मांगी रिपोर्ट सूत्रों के मुताबिक Rahul Gandhi ने राज्य की राजनीतिक स्थिति और अंदरूनी समीकरणों को लेकर वरिष्ठ नेताओं, जिनमें के.जे. जॉर्ज भी शामिल हैं, से फीडबैक मांगा था। कांग्रेस के अंदर अब पार्टी महासचिव K. C. Venugopal के अवकाश से लौटने का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दिल्ली में भी अहम बैठकों का दौर शुरू हो सकता है।
बेंगलुरु : शहर में अचानक हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। करीब एक घंटे की तेज बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया, जिसमें अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अस्पताल की दीवार गिरने से 7 की मौत सबसे दर्दनाक हादसा बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल में हुआ, जहां तेज बारिश के दौरान एक दीवार ढह गई। इस हादसे में 7 लोगों की जान चली गई, जिनमें एक 6 साल की बच्ची भी शामिल है। करंट और अन्य हादसों में गई जान बारिश के दौरान अलग-अलग घटनाओं में भी लोगों की मौत हुई। बैनरघट्टा रोड पर वेगा सिटी मॉल के पास 35 वर्षीय रघु की करंट लगने से मौत हो गई। एक अन्य मामले में छात्र सैयद सुफियान की बिजली के तार की चपेट में आने से जान चली गई। चामराजपेट में मंजुनाथ नामक व्यक्ति की मौत उस वक्त हो गई, जब तेज तूफान के दौरान घर की छत का हिस्सा गिर गया। सड़कें बनीं नदी, ट्रैफिक ठप तेज बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। कई प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप पड़ गया। ऑफिस टाइम में बारिश होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेड़ और बिजली के खंभे गिरे नगर निकाय के मुताबिक, शहर में कम से कम 87 पेड़ उखड़ गए और 131 पेड़ों की शाखाएं टूट गईं। इनमें से कई पेड़ सड़क किनारे खड़े वाहनों पर गिर गए, जिससे कारों और दोपहिया वाहनों को नुकसान पहुंचा। अब तक 60 पेड़ और 98 शाखाओं को हटाया जा चुका है, जबकि बाकी जगहों पर काम जारी है। अगले तीन दिन भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।