ढाका: भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ती राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल के बीच चार भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ढाका पहुंचा है। यह दौरा बांग्लादेश की सेना की खुफिया एजेंसी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फोर्स इंटेलिजेंस (डीजीएफआई) के बुलावे पर हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, चार सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल रविवार दोपहर नई दिल्ली से विमान के जरिए ढाका पहुंचा। दोनों देशों के बीच संबंधों में हाल के दिनों में तनाव और संवेदनशील मुद्दों को देखते हुए इस सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल में शामिल अधिकारियों के नाम, पद और दौरे के विस्तृत एजेंडे की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। डीजीएफआई के निमंत्रण पर पहुंचा भारतीय दल उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का चार सदस्यीय दल बांग्लादेश की सैन्य खुफिया एजेंसी डीजीएफआई के निमंत्रण पर ढाका पहुंचा है। सुरक्षा कारणों से अधिकारियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। ढाका पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल के ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी डीजीएफआई की ओर से संभाले जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों के लिए एक प्रमुख होटल में ठहरने की व्यवस्था की गई है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक का मुख्य एजेंडा क्या होगा। भारत-बांग्लादेश संबंधों में बढ़ी संवेदनशीलता भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत और बांग्लादेश के संबंध कई संवेदनशील मुद्दों के कारण चर्चा में हैं। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण, क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग जैसे मुद्दे लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा अधिकारियों के बीच संपर्क बनाए रखना दोनों देशों के लिए अहम माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, राजनीतिक स्तर पर मतभेद होने के बावजूद सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के बीच संवाद के चैनल खुले रहना जरूरी होता है। इससे सीमा और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समय रहते जानकारी साझा करने और संभावित तनाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। भारतीय उच्चायुक्त की भी अहम मुलाकात इस घटनाक्रम के बीच ढाका में भारतीय उच्चायुक्त की बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ प्रस्तावित मुलाकात भी चर्चा में है। इस बैठक की समय-सीमा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के हालिया सार्वजनिक बयान के कुछ ही समय बाद हो रही है। ऐसे में भारतीय उच्चायुक्त और बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के बीच बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों, सुरक्षा सहयोग और दोनों देशों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। सितंबर में नई दिल्ली आ सकते हैं तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सितंबर में नई दिल्ली में प्रस्तावित बहुपक्षीय बैठक में शामिल होने की संभावना को लेकर भी चर्चा है। यदि यह दौरा होता है, तो प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका पहला भारत दौरा होगा। ऐसे में भारत और बांग्लादेश के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क की दिशा में इसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है। हालांकि, इस संभावित यात्रा और इसके कार्यक्रम को लेकर अंतिम आधिकारिक पुष्टि का इंतजार रहेगा। सुरक्षा सहयोग पर बनी रहेगी नजर भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा सहयोग का एक लंबा इतिहास रहा है। दोनों देश सीमा प्रबंधन, आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने, संगठित अपराध तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न स्तरों पर संपर्क में रहे हैं। मौजूदा परिस्थितियों में भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का ढाका दौरा इस बात का संकेत माना जा सकता है कि दोनों पक्ष संवेदनशील मुद्दों पर संवाद का रास्ता खुला रखना चाहते हैं। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल के दौरे के वास्तविक उद्देश्य और बातचीत के परिणाम के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल सभी की नजर भारतीय सुरक्षा अधिकारियों की बैठकों और भारतीय उच्चायुक्त की बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के साथ होने वाली बातचीत पर है। आने वाले दिनों में इन संपर्कों से भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली के 54वें जन्मदिन के मौके पर निर्माताओं ने उनकी बहुप्रतीक्षित बायोपिक 'दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी' का पहला पोस्टर जारी कर दिया। पोस्टर में राजकुमार राव सौरव गांगुली के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स बालकनी सेलिब्रेशन वाले अंदाज में नजर आ रहे हैं, जहां उन्होंने 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी जीत के बाद अपनी टी-शर्ट लहराई थी। साथ ही फिल्म की रिलीज डेट 14 मई 2027 घोषित की गई है। आइकॉनिक लुक ने बढ़ाया उत्साह पोस्टर में राजकुमार राव का लुक सौरव गांगुली से काफी मिलता-जुलता दिखाई दे रहा है। फिल्म का टैगलाइन "He Didn't Just Play The Game, He Changed It" भी जारी किया गया है, जिसे फैंस सोशल मीडिया पर खूब पसंद कर रहे हैं। क्रिकेट के 'दादा' की प्रेरणादायक कहानी फिल्म में सौरव गांगुली के भारतीय क्रिकेट में योगदान, कप्तानी, टीम इंडिया को नई पहचान दिलाने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की आक्रामक छवि स्थापित करने की कहानी दिखाई जाएगी। फिल्म का निर्देशन Vikramaditya Motwane कर रहे हैं, जबकि मुख्य भूमिका में Rajkummar Rao नजर आएंगे। फैंस में जबरदस्त उत्साह फर्स्ट लुक सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने राजकुमार राव की जमकर तारीफ की। कई यूजर्स ने इसे साल 2027 की सबसे बहुप्रतीक्षित स्पोर्ट्स बायोपिक बताया और फिल्म की रिलीज का बेसब्री से इंतजार शुरू कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को खास अंदाज में पेश करते हुए बॉलीवुड फिल्म 'कुछ कुछ होता है' का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया में यह फिल्म बेहद लोकप्रिय है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "मैंने राष्ट्रपति प्रबोवो से भी कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो सिर्फ 'कुछ कुछ' नहीं, बल्कि 'बहुत कुछ' होता है।" उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने पर जताया आभार प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किए जाने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय का सम्मान है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता, विश्वास और लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों का प्रतीक है। राष्ट्रपति प्रबोवो के बयान का किया जिक्र पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "उनमें भारत का DNA है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि यह डीएनए किसी प्रयोगशाला का नहीं, बल्कि दोनों देशों की साझा संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और आपसी विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो के इस बयान ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया। भारत और इंडोनेशिया सिर्फ दोस्त नहीं, पड़ोसी भी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से ही नहीं, बल्कि भौगोलिक रूप से भी बेहद करीब हैं। उन्होंने बताया कि भारत के ग्रेट निकोबार द्वीप और इंडोनेशिया के आचेह प्रांत के बीच केवल 150 किलोमीटर की दूरी है, जो दोनों देशों की निकटता को दर्शाती है। भारत की विकास यात्रा का भी किया जिक्र अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की तेज आर्थिक प्रगति और बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में देश में शुरू हुई नई रिफाइनरी में इतना स्टील इस्तेमाल हुआ है कि उससे 40 एफिल टावर या 5 बुर्ज खलीफा बनाए जा सकते हैं। वहीं, इसमें लगी केबल की लंबाई इतनी है कि उससे पूरी पृथ्वी को दो बार लपेटा जा सकता है। पीएम ने कहा कि आज भारत रिफाइनिंग क्षमता के मामले में दुनिया के शीर्ष चार देशों में शामिल है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी दी जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत मात्र 20 रुपये सालाना में 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे करीब 60 करोड़ लोग जुड़े हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि रोजाना करीब डेढ़ रुपये के प्रीमियम पर जीवन बीमा की सुविधा मिल रही है, जो एक कप कॉफी की कीमत से भी कम है। भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगी नई मजबूती प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों की साझेदारी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को नई गति मिलेगी।
नई दिल्ली: Sanae Takaichi बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचीं। नई दिल्ली के पालम टेक्निकल एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने भारत सरकार की ओर से उनका स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि भारत सरकार की ओर से जापानी प्रधानमंत्री का स्वागत करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने इस यात्रा को भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगी शामिल अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री तकाइची 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। बैठक में दोनों नेता व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा करेंगे। साथ ही दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य की रूपरेखा पर भी विचार किया जाएगा। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली भारत यात्रा भारत पहुंचने के बाद जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है और व्यक्तिगत रूप से भी वह पहली बार भारत आई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक में वैश्विक और द्विपक्षीय महत्व के कई मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी तथा दोनों देशों के सहयोग को नई दिशा देने पर जोर रहेगा। रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति भारत और जापान के बीच हाल के वर्षों में आर्थिक, रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, मुक्त एवं समावेशी समुद्री व्यवस्था और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर सेशेल्स के लिए रवाना हो गए। 27 से 29 जून तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान वह सेशेल्स की आजादी के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री की यह पिछले 11 वर्षों में सेशेल्स की दूसरी यात्रा है। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2015 में इस हिंद महासागर द्वीपीय देश का दौरा किया था। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी और समुद्री सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। राष्ट्रीय दिवस परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी के साथ भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे। राष्ट्रपति से द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय संबंधों, हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और विभिन्न क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इसके अलावा वे सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को भी संबोधित करेंगे। यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री सेशेल्स की संसद को संबोधित करेगा। प्रधानमंत्री वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे। सेशेल्स की लगभग 1.35 लाख की आबादी में करीब 12 हजार लोग भारतीय मूल के हैं, जो कुल आबादी का लगभग 8 से 9 प्रतिशत हिस्सा हैं। भारत-सेशेल्स संबंधों के 50 वर्ष पूरे रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने का अवसर होगा। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और सतत विकास के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को संबोधित करना उनके लिए सम्मान की बात होगी और यह दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संसदीय परंपराओं का प्रतीक है। हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी पर रहेगा फोकस भारत के लिए सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेशेल्स भारत के 'विजन महासागर (MAHASAGAR)' का प्रमुख सहयोगी है और दोनों देश समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान समुद्री निगरानी, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और विकास परियोजनाओं पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। 2015 के दौरे में मजबूत हुए थे रक्षा संबंध प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले मार्च 2015 में सेशेल्स का दौरा किया था। उस समय भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की थी, जिससे उसकी तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी क्षमता मजबूत हुई। इसी यात्रा के दौरान भारत की सहायता से विकसित तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का भी उद्घाटन किया गया था। यह परियोजना हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की निगरानी बढ़ाने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जाती है। इंदिरा गांधी के बाद मोदी का दूसरा ऐतिहासिक दौरा सेशेल्स की यात्रा करने वाली पहली भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं, जिन्होंने 1976 में देश की स्वतंत्रता के बाद वहां का दौरा किया था और 1981 में दोबारा सेशेल्स गई थीं। इसके बाद करीब 34 वर्षों तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस द्वीपीय राष्ट्र की यात्रा नहीं की। वर्ष 2015 में नरेंद्र मोदी ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया और अब 2026 का यह दौरा भारत-सेशेल्स संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सामरिक सहयोग के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के रणनीतिक तथा व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलने जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना तथा लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना होगा। रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहद अच्छे संबंध हैं और दोनों देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित है यात्रा समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत आएंगे। यही हमारी कोशिश है और इस दिशा में तैयारियां जारी हैं।" अंतिम चरण में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता मार्को रुबियो ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और दोनों पक्ष जल्द ही समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। 'भारत अमेरिका का करीबी साझेदार' अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "भारत अमेरिका का बहुत करीबी साथी और सहयोगी है। दोनों देशों के रिश्ते पहले से अधिक मजबूत हुए हैं और भविष्य में इन्हें और विस्तार देने की दिशा में काम किया जा रहा है।" मोदी-ट्रंप मुलाकात पर रहेगी नजर ट्रंप के प्रस्तावित भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक में व्यापार समझौते के अलावा रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, तकनीकी साझेदारी, निवेश और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। ईरान के पेट्रोलियम मंत्री Mohsen Paknejad भारत के दौरे पर हैं। उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, कच्चे तेल की आपूर्ति और हाइड्रोकार्बन सेक्टर में साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई। ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर जोर बैठक में भारत और ईरान ने तेल एवं गैस क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आपसी हितों के अनुरूप साझेदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। ब्रिक्स मंच पर अहम बैठक ईरानी मंत्री भारत में आयोजित 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इस दौरान स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, तेल-गैस आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार की चुनौतियों पर भी चर्चा की जा रही है। भारत-ईरान व्यापारिक संबंधों को मिल सकता है बल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो भारत और ईरान के बीच ऊर्जा व्यापार में नई गति आ सकती है। भारत पहले ईरान से कच्चे तेल का प्रमुख आयातक रहा है और दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं। तेल शोधन, पेट्रोकेमिकल्स में निवेश पर भी चर्चा बैठक में तेल शोधन (रिफाइनिंग), पेट्रोकेमिकल्स और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं में संभावित निवेश पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने की इच्छा व्यक्त की। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर रहेगी नजर मध्य पूर्व की बदलती परिस्थितियों और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में भारत और ईरान के बीच यह उच्चस्तरीय बैठक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।