Bilateral Trade

External Affairs Minister S. Jaishankar meets Uzbekistan Foreign Minister Bakhtiyor Saidov to strengthen bilateral cooperation
भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों को नई रफ्तार, माइनिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स में बढ़ेगा सहयोग: जयशंकर

India-Uzbekistan Relations: भारत और उज्बेकिस्तान ने रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने व्यापार, माइनिंग, रेयर अर्थ मिनरल्स, ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री चार दिवसीय भारत यात्रा पर आए उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने तथा नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। माइनिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स पर रहेगा विशेष फोकस बैठक के बाद एस. जयशंकर ने कहा कि भारत, उज्बेकिस्तान को अपने "विस्तारित पड़ोस (Extended Neighbourhood)" का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंध अब नई आर्थिक साझेदारी में बदल रहे हैं। जयशंकर ने बताया कि निर्माण, ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और शिक्षा के बाद अब दोनों देश माइनिंग सेक्टर, विशेष रूप से रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर काम करेंगे। व्यापार बढ़ाने पर भी जोर विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1 अरब डॉलर का है, लेकिन दोनों देशों की क्षमता इससे कहीं अधिक है। इसलिए व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए नई पहल की जाएगी। राष्ट्रपति मुर्मू ने बताईं नई संभावनाएं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी दोनों देशों के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और माइनिंग में सहयोग की व्यापक संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने भारत-उज्बेकिस्तान बिजनेस फोरम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को नए अवसर मिलेंगे। राष्ट्रपति ने बताया कि भारत के ITEC और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के तहत अब तक 3,000 से अधिक उज्बेक अधिकारी, पेशेवर और छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जबकि 16,000 से अधिक भारतीय छात्र फिलहाल उज्बेकिस्तान में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। NAM और BRICS पर भी हुई चर्चा बैठक के दौरान भारत ने 2027-29 के लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की अध्यक्षता के लिए उज्बेकिस्तान को अपना समर्थन देने की घोषणा की। साथ ही, BRICS में साझेदार देश के रूप में भारत की अध्यक्षता के दौरान सहयोग के लिए उज्बेकिस्तान का आभार भी व्यक्त किया गया। आतंकवाद पर साझा रुख एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर समान सोच रखते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने हर प्रकार के आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। रिश्तों को नई ऊंचाई देने पर सहमति दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि लगातार उच्चस्तरीय संवाद, व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और मध्य एशिया में रणनीतिक साझेदारी के जरिए भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।  

kalpana अगस्त 4, 2026 0
India and UK flags representing the implementation of the India-UK Free Trade Agreement to boost exports and bilateral trade.
India-UK FTA लागू: ब्रिटेन के 949 अरब डॉलर के बाजार में भारत को बड़ी बढ़त, टेक्सटाइल से फार्मा तक कई सेक्टरों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली: भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (India-UK Free Trade Agreement - FTA) आज से लागू हो गया है। इस समझौते को भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य दोनों देशों के बीच मौजूदा 60 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को अगले 3 से 4 वर्षों में 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के विशाल 949 अरब डॉलर के आयात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा। फिलहाल इस बाजार में भारत की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम है। किन सेक्टरों को होगा सबसे अधिक फायदा? FTA लागू होने के बाद ब्रिटेन ने 117 उत्पादों को छोड़कर लगभग सभी भारतीय उत्पादों पर शून्य (Zero) आयात शुल्क की व्यवस्था लागू की है। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है। सबसे अधिक लाभ मिलने वाले प्रमुख सेक्टर: टेक्सटाइल और परिधान खाद्य एवं कृषि प्रसंस्कृत उत्पाद लेदर एवं फुटवियर इंजीनियरिंग गुड्स फार्मास्यूटिकल्स इन क्षेत्रों के उत्पाद अब ब्रिटेन के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे भारतीय कंपनियों को चीन और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले बढ़त मिलने की संभावना है। भारत ने किन उत्पादों पर दी राहत? समझौते के तहत भारत ने भी लगभग 12,000 टैरिफ लाइनों में से करीब 89.5 प्रतिशत उत्पादों पर सीमा शुल्क कम करने या समाप्त करने पर सहमति दी है। 64 प्रतिशत से अधिक उत्पादों को तत्काल ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिलेगा। शेष उत्पादों पर शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। लगभग 536 उत्पादों, जिनमें कारें भी शामिल हैं, पर आयात शुल्क में क्रमिक कमी की जाएगी। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को शुरुआती पांच वर्षों के लिए इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों को रखा गया बाहर सरकार ने घरेलू किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है। इनमें शामिल हैं: डेयरी उत्पाद अनाज कई प्रमुख कृषि उत्पाद इस कदम का उद्देश्य घरेलू उत्पादन और किसानों के हितों की सुरक्षा करना है। सेवा क्षेत्र और रोजगार के नए अवसर यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल सेवाओं और प्रोफेशनल सर्विसेज के लिए भी नए अवसर लेकर आया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे: भारतीय आईटी और सेवा कंपनियों को लाभ मिलेगा। कुशल पेशेवरों के लिए नए रोजगार अवसर बनेंगे। भारत में Global Capability Centres (GCCs) की संख्या बढ़ सकती है। विदेशी कंपनियों का निवेश आकर्षित होने की संभावना बढ़ेगी। भारत के लिए क्यों है अहम यह समझौता? ब्रिटेन दुनिया के बड़े आयातक देशों में शामिल है और हर साल लगभग 949 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों का आयात करता है। अभी इस बाजार में भारत की हिस्सेदारी बेहद सीमित है। FTA लागू होने के बाद भारतीय कंपनियों को कम शुल्क, बेहतर बाजार पहुंच और अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों का लाभ मिलेगा। यदि व्यापार लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ता है, तो यह समझौता भारत के निर्यात, विनिर्माण और रोजगार सृजन को नई गति दे सकता है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
Indian Commerce Minister Piyush Goyal and the U.S. Ambassador to India respond to reports on the proposed India-US trade deal, clarifying that negotiations are continuing.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अटकलों के बीच दोनों देशों ने किया खंडन, अमेरिकी राजदूत बोले- 'किसी ने समझौता खारिज नहीं किया'

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर सामने आई उन खबरों को दोनों देशों ने सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि भारत ने इस समझौते को अस्वीकार कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में सकारात्मक बातचीत कर रहे हैं। अमेरिकी राजदूत ने रिपोर्ट को बताया फेक न्यूज भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत द्वारा ट्रेड डील खारिज किए जाने की खबर पूरी तरह गलत है। उन्होंने लिखा कि "फेक न्यूज अलर्ट। किसी ने भी किसी समझौते को खारिज नहीं किया है।" उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर लगातार सकारात्मक बातचीत चल रही है और दोनों पक्ष इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने संबंधित मीडिया रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की खबरें वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। पीयूष गोयल बोले- रिपोर्ट पूरी तरह भ्रामक केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत द्वारा ट्रेड डील खारिज किए जाने की खबर पूरी तरह निराधार, असत्य और भ्रामक है। उन्होंने बताया कि जून में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के भारत दौरे के दौरान दोनों पक्षों के बीच बेहद सकारात्मक और रचनात्मक बैठकें हुई थीं। गोयल ने कहा कि दोनों देशों की टीमें एक संतुलित और व्यावसायिक रूप से लाभकारी समझौते पर काम कर रही हैं। समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत जारी सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने के लिए सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने दोहराया कि किसी भी पक्ष ने बातचीत से पीछे हटने या समझौते को अस्वीकार करने जैसी कोई बात नहीं कही है। पहले भी कहा था- अंतिम चरण में है डील पिछले महीने यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने उस समय कहा था कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ अंतिम बिंदुओं पर चर्चा बाकी है। उनके अनुसार, समझौते का लगभग पूरा काम हो चुका है और दोनों देश इसे जल्द पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर जोर भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग और बढ़ने की संभावना है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi with New Zealand leaders during bilateral talks announcing a new strategic partnership and 2030 trade target.
भारत-न्यूजीलैंड ने 2030 तक ₹35,000 करोड़ व्यापार का रखा लक्ष्य, रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

भारत और न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए 2030 तक 6 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (करीब ₹35,000 करोड़) के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय किया है। दोनों देशों ने यह फैसला एक नए रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के तहत लिया, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, कृषि और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 से 11 जुलाई तक न्यूजीलैंड की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह करीब 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा है और इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। 2030 तक व्यापार बढ़ाने पर सहमति दोनों देशों ने 2030 तक करीब ₹35,000 करोड़ (6 अरब न्यूजीलैंड डॉलर) के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने और नए आर्थिक अवसरों पर मिलकर काम करने पर सहमति बनी। सरकारों का मानना है कि यह लक्ष्य दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को नई गति देगा। कई क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के तहत भारत और न्यूजीलैंड ने कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है, जिनमें शामिल हैं— व्यापार और निवेश कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण डिजिटल तकनीक और नवाचार शिक्षा और कौशल विकास रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु सहयोग दोनों देशों ने लोगों के बीच संपर्क (People-to-People Ties) को मजबूत करने और शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख भारत और न्यूजीलैंड ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए हर प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा की। संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता है तथा इस चुनौती से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। लगभग चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड का आधिकारिक दौरा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगा नया आयाम भारत और न्यूजीलैंड लंबे समय से लोकतांत्रिक मूल्यों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग के साझेदार रहे हैं। नया रणनीतिक रोडमैप व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ रक्षा, तकनीक और वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग को भी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and Japanese Prime Minister Sanae Takaichi during a bilateral meeting as India and Japan discuss a new rupee-yen trade mechanism to reduce dependence on the US dollar.
भारत-जापान ट्रेड में डॉलर की भूमिका होगी कम? रुपए-येन में सीधे कारोबार की तैयारी, मोदी-ताकाइची बैठक में हो सकता है बड़ा ऐलान

  नई दिल्ली: भारत और जापान द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं जिसके तहत कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में किया जा सकेगा। इस पहल का उद्देश्य व्यापार को अधिक तेज, सस्ता और सुगम बनाना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव की औपचारिक घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच नई दिल्ली में होने वाले 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद की जा सकती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद ताकाइची का यह पहला भारत दौरा है। स्थानीय मुद्रा में होगा व्यापार प्रस्ताव लागू होने के बाद भारत और जापान के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के लिए औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इसके तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में भुगतान कर सकेंगी। इस व्यवस्था से अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश की बैंकिंग प्रणाली पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा विनिमय की लागत घटेगी और सीमा-पार भुगतान पहले की तुलना में अधिक तेज़ी से हो सकेगा। स्पेशल अकाउंट के जरिए आसान होगा भुगतान योजना के तहत जापानी कंपनियां भारतीय बैंकों में विशेष खाते संचालित करेंगी, जिनके माध्यम से आयात-निर्यात का भुगतान सीधे स्थानीय मुद्राओं में किया जाएगा। इससे: विदेशी मुद्रा विनिमय का खर्च कम होगा। भुगतान प्रक्रिया तेज होगी। कारोबारियों की लेनदेन लागत घटेगी। व्यापारिक जोखिम कम होंगे। 2025 में बनी थी सहमति यह पहल नई नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान जारी संयुक्त विजन दस्तावेज में दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के दौरान स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने पर सहमति जताई थी। अब जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौते (MoC) पर काम कर रहा है, जिससे इस व्यवस्था को औपचारिक रूप दिया जा सके। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार भारतीय रिजर्व बैंक ने जुलाई 2022 में स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट (SRVA) व्यवस्था शुरू की थी, ताकि विदेशी देशों के साथ रुपए में व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके। सरकार के अनुसार: 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक उपयोग बढ़ेगा। भारत-जापान आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग लगातार विस्तार कर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27.5 अरब डॉलर रहा। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। अगले 10 वर्षों में जापान ने भारत में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश का लक्ष्य रखा है। भारत में वर्तमान में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना सहित कई बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी निवेश कर रहा है। शिखर सम्मेलन में इन मुद्दों पर भी होगी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच होने वाली बैठक में कई रणनीतिक और आर्थिक विषयों पर बातचीत होने की संभावना है, जिनमें शामिल हैं— व्यापार और निवेश सेमीकंडक्टर सहयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऑटोमोबाइल सेक्टर सप्लाई चेन रक्षा सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा क्वाड सहयोग दोनों नेता उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। भारत-जापान साझेदारी की प्रमुख बातें जापान भारत में निवेश करने वाला पांचवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। मार्च 2026 तक जापान का कुल निवेश लगभग ₹4.58 लाख करोड़ पहुंच चुका है। दोनों देशों ने 2025 में अगले 10 वर्षों के लिए 10 ट्रिलियन जापानी येन (करीब ₹5.84 लाख करोड़) के निजी निवेश का लक्ष्य तय किया। यह निवेश सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा उद्योगों पर केंद्रित होगा। भारत और जापान ने चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स (लिथियम, कोबाल्ट आदि) की सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए रणनीतिक सहयोग भी शुरू किया है।

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
India and US officials discuss bilateral trade deal at summit nearing final agreement stage
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर आखिरी दौर की बातचीत, लैंडौ बोले- “समझौते के बेहद करीब हैं”

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को लेकर बड़ी प्रगति के संकेत मिले हैं। अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा है कि दोनों देश समझौते पर हस्ताक्षर करने के “बेहद करीब” हैं और अब केवल आखिरी बाधा पार करना बाकी है। ‘भारत महान शक्तियों में से एक’ मैरीलैंड के नेशनल हार्बर में आयोजित SelectUSA Investment Summit के दौरान लैंडौ ने भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि “इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत दुनिया की महान शक्तियों में से एक है।” साथ ही उन्होंने भारत की आर्थिक क्षमता को “अपार” बताते हुए कहा कि आने वाले समय में भारत बड़े पैमाने पर आर्थिक विकास कर सकता है और करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की क्षमता रखता है। कई महीनों से जारी है बातचीत लैंडौ के मुताबिक, दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से इस डील को लेकर लगातार बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि दोनों पक्ष किसी ठोस नतीजे पर पहुंचें, ताकि व्यापार के साथ-साथ अन्य रणनीतिक मुद्दों पर भी आगे बढ़ा जा सके। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि “आखिरी बाधा” क्या है। डील कब होगी, स्पष्ट नहीं अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने कहा कि उनके पास इस बात की कोई निश्चित जानकारी नहीं है कि यह समझौता कब साइन होगा, लेकिन उन्हें भरोसा है कि यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आ सकता है। क्या है ट्रेड डील का फ्रेमवर्क? भारत और अमेरिका ने 2 फरवरी को इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क की घोषणा की थी, जबकि 7 फरवरी को इसका प्रारूप (टेक्स्ट) जारी किया गया था। इस डील का लक्ष्य 2030 तक दोनों देशों के बीच 500 अरब डॉलर के व्यापार को हासिल करना है। फ्रेमवर्क के तहत: अमेरिका ने भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई थी रूसी तेल खरीद को लेकर भारतीय उत्पादों पर लगे 25% टैरिफ को हटाने और बाकी टैरिफ घटाने की बात कही गई थी भारत अमेरिकी बाजारों में अधिक पहुंच और व्यापारिक रियायतें चाहता है सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदलाव हालांकि, बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद टैरिफ से जुड़ी नीतियों में बदलाव आया। इसके चलते भारत अब इस समझौते को नए वैश्विक टैरिफ फ्रेमवर्क के तहत अपने हितों के अनुसार संशोधित करने की कोशिश कर रहा है। आगे की राह दोनों देशों के बीच यह ट्रेड डील केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम मानी जा रही है। अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इससे वैश्विक व्यापार संतुलन और भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा मिल सकती है। फिलहाल, सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कब यह “आखिरी बाधा” पार होती है और डी  

surbhi मई 6, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0