भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी नेतृत्व ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मंजूर किया इस्तीफा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अन्नामलाई द्वारा भेजे गए इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। पार्टी की ओर से इस फैसले की पुष्टि होने के बाद तमिलनाडु बीजेपी में भविष्य की रणनीति और नेतृत्व को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं अन्नामलाई ने 2 जून को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah से उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। राजनीतिक गलियारों में यह भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि अन्नामलाई नई राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारी कर सकते हैं, इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी। प्रदेश नेतृत्व ने पहले किया था खंडन इस्तीफे की खबरों के बीच तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नागेंद्रन ने गुरुवार को इन दावों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें अन्नामलाई के इस्तीफे से संबंधित कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है और पार्टी के भीतर किसी तरह के मतभेद नहीं हैं। नागेंद्रन ने यह भी कहा था कि अन्नामलाई ने नई पार्टी बनाने को लेकर न तो उनसे कोई चर्चा की है और न ही ऐसा कोई संकेत दिया है। तमिलनाडु बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम के. अन्नामलाई को तमिलनाडु बीजेपी के प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है। पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे अन्नामलाई ने राज्य में पार्टी के विस्तार और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर रहेगी कि वह भविष्य में किस राजनीतिक दिशा का चयन करते हैं और इसका तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
भारतीय जनता पार्टी ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने पांच राज्यों में होने वाले चुनावों के लिए कई वरिष्ठ और नए चेहरों को मैदान में उतारा है। मध्य प्रदेश से तरुण चुघ और राजस्थान से सतीश पूनिया उम्मीदवार बीजेपी ने मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय महासचिव Tarun Chugh और राजस्थान से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Satish Poonia को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की इस सूची को संगठनात्मक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई मौजूदा सांसदों को नहीं मिला टिकट इस बार की सूची में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का नाम शामिल नहीं किया गया है। दोनों वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। गुजरात से चार उम्मीदवारों की घोषणा बीजेपी ने गुजरात से चार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इनमें राजुभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र मेघजीभाई कंजरिया के नाम शामिल हैं। ओडिशा उपचुनाव में देबाशीष सामंतराय पर भरोसा ओडिशा के राज्यसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी ने Debashish Samantaray को उम्मीदवार बनाया है। वह हाल ही में बीजू जनता दल छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। मध्य प्रदेश और राजस्थान से अन्य नाम भी शामिल मध्य प्रदेश से रजनीश अग्रवाल और राजस्थान से अलका गुर्जर को भी उम्मीदवार बनाया गया है। राजस्थान में उम्मीदवार बनाए जाने पर सतीश पूनिया ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया और इसे कार्यकर्ताओं का सम्मान बताया। पूर्वोत्तर राज्यों में भी उम्मीदवार घोषित बीजेपी ने मणिपुर से ए. शारदा देवी और अरुणाचल प्रदेश से ताई तागाक को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। 18 जून को होगा मतदान 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 18 जून को होगा। इसी दिन ओडिशा में राज्यसभा उपचुनाव भी कराया जाएगा।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Jamal Siddiqui को व्हाट्सएप के जरिए कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी गई है। धमकी देने वाले ने उनसे भारी रकम की फिरौती भी मांगी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। व्हाट्सएप संदेशों में मांगी गई फिरौती पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, 25 से 27 मई के बीच एक मोबाइल नंबर से कई धमकी भरे संदेश भेजे गए। इन संदेशों में 50 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक की रकम यूपीआई और बैंक ट्रांसफर के जरिए देने की मांग की गई। संदेश भेजने वाले ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि यदि रकम नहीं दी गई तो जमाल सिद्दीकी और उनके परिवार को गंभीर नुकसान पहुंचाया जाएगा। बम धमाकों और टारगेट किलिंग का भी जिक्र एफआईआर के मुताबिक, धमकी भरे संदेशों में बम विस्फोट और राजनीतिक नेताओं की टारगेट किलिंग का भी उल्लेख किया गया है। संदेश भेजने वाले ने दावा किया कि कुछ नेताओं द्वारा उसका अपमान किए जाने के कारण वह इस तरह की घटनाओं को अंजाम देगा। पुलिस ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच जारी है। कई बड़े नेताओं के नाम भी शामिल धमकी देने वाले व्यक्ति ने अपने संदेशों में Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra, Sachin Pilot और Mallikarjun Kharge समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के नामों का भी उल्लेख किया है। इस वजह से मामले को सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त संवेदनशीलता के साथ देख रही हैं। पुलिस ने दर्ज किया मामला जमाल सिद्दीकी ने पुलिस को व्हाट्सएप चैट, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सबूत सौंपे हैं। शिकायत के आधार पर नागपुर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ आपराधिक धमकी, जबरन वसूली और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। साइबर फोरेंसिक जांच शुरू पुलिस अब संबंधित मोबाइल नंबर के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। इसके लिए कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण, आईपी एड्रेस ट्रैकिंग और साइबर फोरेंसिक जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमें जांच में लगाई गई हैं और आरोपी की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के सभी 23 जिलों में होल्डिंग सेंटर्स बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार का कहना है कि इन केंद्रों का उद्देश्य संदिग्ध घुसपैठियों और नागरिकता जांच के दायरे में आये लोगों को अस्थायी रूप से रखना है, ताकि दस्तावेजों का सत्यापन पूरा किया जा सके। जेल नहीं, ‘सुविधा केंद्र’ के तौर पर तैयार किये गये सेंटर राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि होल्डिंग सेंटर्स जेल नहीं हैं। इन्हें ट्रांजिट सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां रहने वाले लोगों को भोजन, साफ बिस्तर और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी। सरकार के मुताबिक, इन केंद्रों में किसी भी व्यक्ति को अधिकतम 30 दिनों तक रखा जा सकेगा। इस दौरान उनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच की जायेगी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीसीटीवी कैमरे, पुलिस बल और सिविल डिफेंस कर्मियों की तैनाती की गयी है। मालदा और मुर्शिदाबाद में शुरू हुआ ऑपरेशन सीमावर्ती जिलों में इन केंद्रों ने काम करना भी शुरू कर दिया है। मालदा जिले के इंग्लिश बाजार स्थित एक सरकारी प्रशिक्षण केंद्र की एक मंजिल को होल्डिंग सेंटर में बदला गया है। यहां हाल ही में पकड़े गये 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। वहीं मुर्शिदाबाद के लालगोला स्थित ‘पद्म भवन’ में दूसरा केंद्र सक्रिय किया गया है। यहां जाली दस्तावेजों के साथ पकड़े गये लोगों को शिफ्ट किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, केंद्र में प्रवेश से पहले सभी लोगों का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है ताकि संक्रमण या बीमारी के खतरे को रोका जा सके। क्या है ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति? राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ अपनी रणनीति को ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नाम दिया है। डिटेक्ट (Detect) : संदिग्ध घुसपैठियों और फर्जी दस्तावेज रखने वालों की पहचान करना। डिलीट (Delete) : अवैध रूप से वोटर लिस्ट या सरकारी रिकॉर्ड में शामिल लोगों के नाम हटाना। डिपोर्ट (Deport) : दस्तावेज सत्यापन के बाद संबंधित व्यक्तियों को बीएसएफ को सौंपना, ताकि उन्हें उनके देश वापस भेजा जा सके। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार घुसपैठ के मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। CAA के तहत अल्पसंख्यकों को राहत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 31 दिसंबर 2014 से पहले पड़ोसी देशों से भारत आये हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत सुरक्षा प्रदान की जायेगी। विपक्ष ने उठाये सवाल जहां बीजेपी सरकार इस अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल टीएमसी ने प्रक्रिया को लेकर चिंता जतायी है। टीएमसी का कहना है कि कार्रवाई के दौरान किसी भी भारतीय नागरिक को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। सरकार का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार चलायी जा रही है और इसका उद्देश्य केवल अवैध घुसपैठ पर रोक लगाना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी में गुरुवार को बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला। पार्टी नेतृत्व ने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और त्रिपुरा में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति का ऐलान किया है। इस फैसले को आगामी चुनावों और संगठन विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। दिल्ली की कमान हर्ष मल्होत्रा के हाथ दिल्ली भाजपा में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने वीरेंद्र सचदेवा की जगह ली है। हर्ष मल्होत्रा लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय रहे हैं और दिल्ली भाजपा में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पार्टी को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में राजधानी में संगठन और मजबूत होगा। हरियाणा में अर्चना गुप्ता को जिम्मेदारी भाजपा ने हरियाणा में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देते हुए अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। अर्चना गुप्ता संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं और पार्टी के भीतर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। भाजपा नेतृत्व को उनसे संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं को और सक्रिय करने की उम्मीद है। पंजाब चुनाव से पहले बड़ा दांव पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने बड़ा फैसला लेते हुए Keval Singh Dhillon को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। केवल सिंह ढिल्लों बरनाला से दो बार विधायक रह चुके हैं और राज्य के बड़े उद्योगपतियों में गिने जाते हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री Amarinder Singh के करीबी माने जाते हैं। विकास आधारित राजनीति के कारण पंजाब में उनकी अलग पहचान है। त्रिपुरा में अभिषेक देबरॉय पर भरोसा भाजपा ने भारतीय जनता पार्टी में गुरुवार को बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला। पार्टी नेतृत्व ने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और त्रिपुरा में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति का ऐलान किया है। इस फैसले को आगामी चुनावों और संगठन विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर अंदरूनी संकट की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कई सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 29 सांसदों में से करीब 12 सांसद भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की तैयारी में हैं। इसके अलावा पांच से छह अन्य सांसदों से भी बातचीत चलने की चर्चा है। हालांकि इन दावों की अभी तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दल-बदल कानून से बचने की रणनीति राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए कम से कम 19 से 20 सांसदों को एक साथ लाने की रणनीति बनाई जा रही है। माना जा रहा है कि तृणमूल नेतृत्व को भी संभावित टूट की जानकारी मिल चुकी है और पार्टी को एकजुट रखने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। चर्चा यह भी है कि इस संभावित बदलाव में ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कुछ सांसदों के नाम भी शामिल हो सकते हैं। भाजपा की नजर राज्यसभा सांसदों पर भी लोकसभा में भाजपा के पास फिलहाल 240 सांसद हैं और केंद्र सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से चल रही है। ऐसे में यदि तृणमूल के सांसद बड़ी संख्या में भाजपा के साथ आते हैं, तो भाजपा की ताकत और बढ़ सकती है तथा सहयोगी दलों पर निर्भरता कम हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा की नजर अब राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों पर भी है। पार्टी के भीतर संगठनात्मक व्यवस्था और आइपैक की भूमिका को लेकर असंतोष की भी चर्चा हो रही है। हालांकि अभी तक पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई Cockroach Janta Party को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मामले में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें संगठन की गतिविधियों की जांच कराने और FIR दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह स्व-घोषित राजनीतिक संगठन सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर रहा है और उनका व्यावसायिक लाभ उठाया जा रहा है। CBI जांच की मांग याचिकाकर्ता ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा है कि इसकी जांच Central Bureau of Investigation से कराई जानी चाहिए। साथ ही याचिका में कथित फर्जी वकीलों और नकली डिग्री रखने वाले लोगों की जांच की भी मांग की गई है। संवैधानिक प्रक्रियाओं के दुरुपयोग का आरोप याचिका में कहा गया है कि कुछ संगठन अदालत की टिप्पणियों और संवैधानिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल प्रचार, डिजिटल मार्केटिंग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। इसे न्यायिक प्रक्रिया के “खतरनाक व्यावसायीकरण” के रूप में पेश किया गया है। सोशल मीडिया अकाउंट बंद होने का दावा कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक Abhijeet Deepak ने दावा किया है कि संगठन के सभी सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट ब्लॉक कर दिए गए हैं। उनका कहना है कि अब संगठन अपने आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग साझा करते हुए दावा किया था कि पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट को 22 अप्रैल से 21 मई के बीच 1.6 बिलियन व्यूज मिले। उनके मुताबिक, इस दौरान करीब 1.2 करोड़ नए फॉलोअर्स जुड़े। NEET-UG मुद्दे के बाद चर्चा में आई थी पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी हाल ही में NEET-UG paper leak controversy को लेकर चलाए गए ऑनलाइन अभियान के बाद सुर्खियों में आई थी। इस अभियान में केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग की गई थी। शुरुआत में व्यंग्य के तौर पर शुरू हुआ यह डिजिटल अभियान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बड़ी संख्या में यूजर्स खुद को “कॉकरोच” कहकर इस अभियान से जुड़ने लगे। कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाए आरोप इस विवाद को लेकर Indian National Congress ने केंद्र सरकार और Bharatiya Janata Party पर निशाना साधा है। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Nana Patole ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर बढ़ते जन आक्रोश को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि खुफिया एजेंसियों की चेतावनी के बाद इस डिजिटल संगठन के सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए गए।
भाजपा नेता और ‘एक देश, एक चुनाव’ पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष P. P. Chaudhary ने शुक्रवार को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से शासन व्यवस्था में होने वाले व्यवधान कम होंगे और देश को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, प्रशासन और औद्योगिक उत्पादन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी पड़ता है। गांधीनगर और अहमदाबाद में हुई बैठकें पीपी चौधरी ने बताया कि पिछले तीन दिनों में Gandhinagar और Ahmedabad में ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर कई अहम बैठकें आयोजित की गईं। उन्होंने कहा, “लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रधानमंत्री मोदी का विजन विकसित भारत के निर्माण से जुड़ा हुआ है। इसका उद्देश्य देश में स्थिर शासन और तेज विकास सुनिश्चित करना है।” “बार-बार चुनाव से विकास प्रभावित” भाजपा नेता के मुताबिक, लगातार अलग-अलग राज्यों में चुनाव होने से सरकारी मशीनरी लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहती है, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि बच्चों की शिक्षा बिना बाधा के चलती रहे, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों और प्रशासनिक कार्यों में रुकावट न आए। चौधरी ने कहा, “जब बार-बार चुनाव होते हैं तो आचार संहिता लागू हो जाती है, जिससे कई नीतिगत फैसले और विकास परियोजनाएं प्रभावित होती हैं।” “7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत संभव” आर्थिक पहलू पर बात करते हुए पीपी चौधरी ने दावा किया कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं तो देश की अर्थव्यवस्था को 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो सकती है। उनके अनुसार, चुनावों पर होने वाला भारी खर्च, प्रशासनिक संसाधनों का उपयोग और विकास कार्यों में देरी देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ डालते हैं। “1967 तक साथ होते थे चुनाव” चौधरी ने कहा कि भारत में पहले लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ ही कराए जाते थे। उन्होंने बताया कि 1967 तक देश में चार आम चुनाव एक साथ हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद के वर्षों में कांग्रेस सरकारों के दौरान कई राज्य विधानसभाओं को समय से पहले भंग किया गया, राष्ट्रपति शासन लगाया गया और आपातकाल जैसी परिस्थितियों के कारण चुनावी चक्र टूट गया। उन्होंने कहा, “1967-68 के दौरान सात राज्य विधानसभाओं को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग कर दिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग होने लगे।” चुनावी सुधार की जरूरत पर जोर भाजपा नेता ने बताया कि संयुक्त संसदीय समिति ने इस मुद्दे पर कई हितधारकों से बातचीत की है। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बैंकिंग क्षेत्र, नौकरशाह, मंत्री, कानूनी विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोगों ने बार-बार होने वाले चुनावों से पैदा होने वाले आर्थिक और प्रशासनिक बोझ को लेकर चिंता जताई है। पीपी चौधरी ने कहा, “देश की अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। इसलिए आज भारत को इस तरह के चुनावी सुधार की सख्त जरूरत है।”
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपते हुए कहा कि नंदीग्राम केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि उनके दिल का हिस्सा है। इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा, “नंदीग्राम मेरे दिल में है। यहां की जनता ने मुझे जो प्यार और विश्वास दिया है, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मैं जहां भी रहूं, नंदीग्राम के विकास के लिए हमेशा काम करता रहूंगा।” दो सीटों से जीत के बाद लिया फैसला शुभेंदु अधिकारी ने हालिया विधानसभा चुनाव में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी थी, जिसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देने का फैसला किया। अब इस सीट पर उपचुनाव होने की संभावना है और इसे लेकर राज्य की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि नंदीग्राम से उपचुनाव में उम्मीदवार कौन होगा। बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित केंद्र रहा नंदीग्राम नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से बेहद अहम मानी जाती रही है। इसी सीट से शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को हराकर राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव किया था। उस जीत को बंगाल की राजनीति का ऐतिहासिक मोड़ माना गया था। इसके बाद भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत की। केंद्र की योजनाओं को लेकर बड़ा बयान इस्तीफे के साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब केंद्र की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को पश्चिम बंगाल में प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की हर योजना का लाभ बंगाल के गरीब, किसान, महिला, युवा और श्रमिक तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता होगी।” मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाकर विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। नंदीग्राम के विकास का किया वादा शुभेंदु अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि नंदीग्राम के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। भाजपा नेताओं के मुताबिक, क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट जल्द शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार नंदीग्राम को विकास के मॉडल के रूप में तैयार करना चाहती है। विपक्ष ने उठाए सवाल वहीं, विपक्ष इस इस्तीफे को राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि नंदीग्राम सीट छोड़ने के पीछे भाजपा की नई राजनीतिक तैयारी हो सकती है। राज्य की राजनीति में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि नंदीग्राम उपचुनाव में कौन उम्मीदवार होगा और क्या यह सीट एक बार फिर बंगाल की राजनीति का बड़ा रणक्षेत्र बनेगी।
West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य के कई जिलों में हिंसा और उपद्रव की खबरें सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। टॉलीगंज में TMC कार्यालय पर कब्जे का आरोप कोलकाता के टॉलीगंज विधानसभा क्षेत्र से अरूप बिश्वास की हार के बाद विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि भाजपा समर्थकों ने उनके पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया और वहां तृणमूल का झंडा हटाकर भगवा झंडा फहरा दिया। इसी तरह डबग्राम-फुलबारी और बहरामपुर से भी हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की खबरें सामने आई हैं। तृणमूल का आरोप है कि भाजपा समर्थित लोगों ने पार्टी कार्यालयों और नेताओं के घरों को निशाना बनाया। भवानीपुर में पार्षद कार्यालय पर हमला भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में भी हालात तनावपूर्ण रहे। वार्ड नंबर 70 के नॉर्दर्न पार्क इलाके में तृणमूल कांग्रेस के पार्षद असीम कुमार बोस के कार्यालय पर हमला किया गया। बताया जा रहा है कि उपद्रवियों ने कार्यालय का ताला तोड़ा, अंदर घुसकर तोड़फोड़ की और सामान बाहर निकालकर आग लगाने की कोशिश की। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। जिलों में फैली अशांति चुनाव नतीजे सामने आने के बाद उत्तर से दक्षिण बंगाल तक कई इलाकों में झड़पों की खबरें आई हैं। बहरामपुर में तृणमूल पंचायत उप-प्रमुख के घर में तोड़फोड़ और कई कार्यालयों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। चुनाव आयोग और केंद्र की अपील स्थिति को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं केंद्र की ओर से भी शांति बनाए रखने और “बदले की राजनीति” से दूर रहने की अपील की गई है। राजनीतिक तनाव के बीच कानून-व्यवस्था चुनौती राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पैदा हुआ यह तनाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब नजर इस बात पर है कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं और नई सरकार कानून-व्यवस्था को कैसे संभालती है।
कोलकाता में गरमाया सियासी माहौल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है और इसे “धांधली” के जरिए अंजाम दिया जा रहा है। ममता बनर्जी ने यहां तक कहा कि चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर “आतंकियों जैसा व्यवहार” कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। BJP पर “इलेक्शन रिगिंग” का आरोप कोलकाता में TMC पार्षद असीम बोस से मुलाकात के दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा चुनाव में गड़बड़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बलों का इस्तेमाल डराने और दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय सुरक्षा बल TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं के घरों में जबरन प्रवेश कर रहे हैं और लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इसी तरह की एक घटना देर रात TMC पार्षद असीम बोस के घर पर हुई, जिसके बाद वह उनसे मिलने पहुंचीं। चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर्स पर विवादित बयान ममता बनर्जी ने Election Commission of India के ऑब्जर्वर्स पर भी गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका व्यवहार निष्पक्षता के विपरीत दिखाई दे रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने ममता के आरोपों को चुनावी माहौल बिगाड़ने वाला बताया है, जबकि TMC ने अपने रुख का बचाव किया है। चुनाव के माहौल में ममता बनर्जी के इन आरोपों ने सियासी टकराव को और तेज कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग और भाजपा इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
नई दिल्ली में AAP को बड़ा झटका, राज्यसभा में संख्या घटकर रह गई सिर्फ 3 आम आदमी पार्टी (AAP) को राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है। पार्टी के 10 में से 7 सांसदों ने संगठन से नाता तोड़ लिया है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद पार्टी के पास अब सिर्फ 3 राज्यसभा सांसद बचे हैं। कौन-कौन से सांसद पार्टी में रह गए? बड़े पैमाने पर हुए इस बदलाव के बाद जो तीन सांसद AAP के साथ बने हुए हैं, वे हैं: Balbir Singh Seechewal Sanjay Singh ND Gupta इन नेताओं के साथ पार्टी अब उच्च सदन में बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गई है। 7 सांसदों ने छोड़ा AAP का साथ सूत्रों के मुताबिक, सात सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जाने का फैसला किया है। यह फैसला AAP के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इनमें कई वरिष्ठ नाम शामिल हैं, जिससे पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। राघव चड्ढा का दावा: दो-तिहाई समर्थन मिला इस पूरे घटनाक्रम के बीच Raghav Chadha ने दावा किया कि उनके पास AAP के राज्यसभा सांसदों के दो-तिहाई से अधिक समर्थन है, जो कानून के अनुसार किसी भी पार्टी में विलय के लिए जरूरी माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राजनीतिक मजबूरी नहीं बल्कि सिद्धांतों के आधार पर लिया गया है। “AAP अब अपनी मूल विचारधारा से भटक गई” चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी को उन्होंने वर्षों तक मजबूत किया, वह अब अपने मूल आदर्शों से दूर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में पार्टी की दिशा और कार्यशैली बदल गई है। केजरीवाल की प्रतिक्रिया पार्टी प्रमुख Arvind Kejriwal ने इस पूरे घटनाक्रम पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पंजाब के लोगों के साथ “धोखा” है और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। राजनीतिक तनाव और बढ़ा इस घटनाक्रम के बाद AAP के भीतर तनाव और बढ़ गया है। पार्टी में नेतृत्व, नीतियों और अंदरूनी मतभेदों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव AAP के लिए राज्यसभा में बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।
नई दिल्ली में राजनीति का बड़ा उलटफेर देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले ने AAP के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal को गहरा राजनीतिक झटका दिया है। सूत्रों के अनुसार, AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने BJP के साथ जाने का फैसला किया है। यह बदलाव पार्टी के लिए बड़ी टूट के रूप में देखा जा रहा है। 7 सांसदों का एक साथ पाला बदला राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि AAP के कई सांसद अब BJP के साथ जुड़ रहे हैं। इनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला लंबे विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने कभी ईमानदार राजनीति का वादा किया था, वह अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उनके अनुसार, AAP में अब पारदर्शिता और नैतिकता की कमी देखी जा रही है। “AAP अब अपनी राह से भटक चुकी है” – चड्ढा का बयान राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने पार्टी को कई साल दिए, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास राजनीति छोड़ने या सही रास्ता चुनने का विकल्प था, और उन्होंने दूसरा विकल्प चुना। उनका कहना है कि राज्यसभा के दो-तिहाई सांसदों के साथ मिलकर BJP में शामिल होने का निर्णय लिया गया है। AAP का पलटवार, BJP पर गंभीर आरोप AAP ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे “धोखा” करार देते हुए कहा कि जिन नेताओं को AAP ने पहचान दी, वही अब विरोधी खेमे में चले गए हैं। पार्टी नेताओं ने यह भी दावा किया कि यह कदम राजनीतिक दबाव और रणनीति का हिस्सा हो सकता है। केजरीवाल की पहली प्रतिक्रिया घटना के बाद Arvind Kejriwal ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए BJP पर हमला बोला और इसे पंजाब के लोगों के साथ “विश्वासघात” बताया। राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद देश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस पर है कि आने वाले दिनों में AAP और BJP की रणनीति क्या होगी और संसद में इसका क्या असर पड़ेगा।
गुवाहाटी, 31 मार्च 2026: आगामी चुनावों से पहले Bharatiya Janata Party ने असम के लिए 31 बड़े चुनावी वादों का ऐलान किया है। इस घोषणापत्र में सुरक्षा, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं पर खास जोर दिया गया है। पार्टी ने अवैध घुसपैठ पर सख्ती, समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने और ‘लव जिहाद’ व ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ मजबूत कानून बनाने का वादा किया है। सुरक्षा और कानून पर सख्त रुख राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कहा कि अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जमीन से जुड़े मामलों में सख्त नीति अपनाई जाएगी। इसके साथ ही UCC लागू करने और विवादित मुद्दों पर कानून लाने का भी ऐलान किया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर में 5 लाख करोड़ निवेश भाजपा ने असम में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बड़े निवेश का वादा किया है। करीब 5 लाख करोड़ रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश 18,000 करोड़ रुपये से बाढ़ नियंत्रण योजना (पहले 2 साल में) रोजगार और शिक्षा पर बड़ा फोकस घोषणापत्र में युवाओं के लिए बड़े वादे किए गए हैं: 10 लाख नौकरियां देने का लक्ष्य हर जिले में यूनिवर्सिटी, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज महिलाओं और गरीबों के लिए योजनाएं 40 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य Orunodoi Scheme के तहत महिलाओं को करीब ₹3,000 सहायता गरीब परिवारों को मुफ्त आवश्यक वस्तुएं चाय बागान मजदूरों के लिए बड़े वादे असम की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले चाय बागान श्रमिकों के लिए भी कई घोषणाएं की गईं: सभी मजदूरों को भूमि पट्टा मजदूरी बढ़ाकर ₹500 प्रतिदिन करने का लक्ष्य आवास योजनाओं का विस्तार क्या है राजनीतिक संदेश? भाजपा का यह घोषणापत्र स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी विकास के साथ-साथ सुरक्षा और पहचान की राजनीति को भी चुनावी एजेंडे में प्रमुखता दे रही है। हालांकि, विपक्ष ने इन वादों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और तेज होने के संकेत हैं।
पटना की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने का फैसला लिया है। करीब 20 वर्षों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करने के बाद उनका यह कदम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। 20 साल का सफर, भावुक विदाई इस्तीफे से पहले नितिन नवीन ने एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने दो दशक लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने बताया कि 2006 में अपने पिता के निधन के बाद उपचुनाव के जरिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा और उसी के बाद से जनता की सेवा में जुटे रहे। लगातार पांच बार विधायक चुने गए नितिन नवीन ने अपने पोस्ट में बांकीपुर की जनता को “परिवार” बताया और उनके विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। ‘जनता ने रास्ता दिखाया’ अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि जनता ने उन्हें सिर्फ समस्याएं ही नहीं बताईं, बल्कि उनके समाधान का रास्ता भी दिखाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका सहयोग ही उनकी सफलता का आधार रहा है। उन्होंने बांकीपुर की जनता को “देवतुल्य” बताते हुए आभार जताया। नई जिम्मेदारी, लेकिन रिश्ता कायम नितिन नवीन ने स्पष्ट किया कि विधायक पद छोड़ने के बावजूद उनका जनता से रिश्ता खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें नई जिम्मेदारी दी है और वे उसी के माध्यम से बिहार और देश के विकास में योगदान देते रहेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने के अनुभव को भी अहम बताया। बांकीपुर में बढ़ेगी सियासी हलचल उनके इस्तीफे के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो जाएगी, जिससे उपचुनाव की स्थिति बनेगी। यह सीट बीजेपी के लिए काफी अहम मानी जाती है, ऐसे में आने वाले समय में उम्मीदवार चयन और रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर हलचल तेज होना तय है। नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत राजनीतिक जानकारों के अनुसार, नितिन नवीन का इस्तीफा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत है। माना जा रहा है कि अब उनकी भूमिका राज्य से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा सक्रिय हो सकती है।
राज्यसभा की 37 सीटों पर हुए चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बढ़त हासिल कर ली है। इस जीत के साथ ही उच्च सदन में NDA की कुल ताकत 135 के पार पहुंच गई है, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है। इससे केंद्र की सत्तारूढ़ सरकार को आने वाले समय में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में बड़ी राहत मिलेगी। चुनाव परिणाम का पूरा निचोड़ इन 37 सीटों में से 26 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ, जिनमें NDA को 13 सीटें मिलीं। वहीं, जिन 11 सीटों पर मतदान हुआ, उनमें से 9 पर NDA ने जीत दर्ज की। कुल मिलाकर NDA ने 37 में से 22 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं। राज्यों में NDA का दबदबा राज्यों के हिसाब से देखें तो NDA का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा: महाराष्ट्र: 7 में से 6 सीटें बिहार: सभी 5 सीटें असम: सभी 3 सीटें ओडिशा: 4 में से 3 सीटें तमिलनाडु: 5 में से 2 सीटें पश्चिम बंगाल: 5 में से 1 सीट हरियाणा और छत्तीसगढ़: 2 में से 1-1 सीट इसके अलावा, मनोनीत सदस्य के रूप में पूर्व CJI रंजन गोगोई का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनकी सीट भी NDA के खाते में ही जुड़ने की संभावना है। राज्यसभा में BJP और NDA की स्थिति मजबूत भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहले ही 100 से अधिक सीटों के साथ राज्यसभा की सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई थी। ताजा नतीजों के बाद NDA गठबंधन की कुल संख्या 135 से ऊपर पहुंच गई है, जिससे अब सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए विपक्ष पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कांग्रेस के लिए राहत की खबर हालांकि विपक्ष को कुल 15 सीटें मिली हैं, लेकिन कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि वह राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा बनाए रखने में सफल रही है। महिला आरक्षण बिल पर नजर इस मजबूत स्थिति का सीधा असर आगामी विधायी एजेंडे पर पड़ेगा। सरकार लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले ‘नारी वंदन अधिनियम’ को जल्द लागू करने की दिशा में कदम तेज कर सकती है। संभावना है कि आगामी सत्र में इस संबंध में संवैधानिक संशोधन पर चर्चा हो। सरकार का बढ़ा आत्मविश्वास राज्यसभा में बहुमत मिलने के बाद सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार विपक्षी दलों को साथ लेकर महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की रणनीति पर काम कर रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।