झारखंड

हूल दिवस को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में भाजपा, 9 सदस्यीय समिति का गठन

anjali kumari जून 27, 2026 0
Hul Diwas 2026
Hul Diwas 2026

रांची। झारखंड भाजपा ने 30 जून को मनाए जाने वाले हूल दिवस को भव्य और व्यापक रूप से आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस उद्देश्य से प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने नौ सदस्यीय आयोजन समिति का गठन किया है। समिति संथाल परगना के भोगनाडीह स्थित अमर शहीद स्थल पर होने वाले मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों की जिम्मेदारी संभालेगी। पार्टी का उद्देश्य हूल क्रांति के महानायकों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाना है।

 

हूल दिवस का ऐतिहासिक महत्व


प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने बताया कि 30 जून झारखंड और विशेषकर संथाल परगना के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। वर्ष 1855 में इसी दिन अमर शहीद सिदो-कान्हू के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन के खिलाफ हूल क्रांति का बिगुल फूंका गया था। इस आंदोलन में चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो ने भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि शोषण और दमन के खिलाफ आदिवासी समाज का यह संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती और ऐतिहासिक अध्यायों में शामिल है।

 

भोगनाडीह में जुटेंगे भाजपा के नेता और कार्यकर्ता


भाजपा के अनुसार, हूल दिवस के अवसर पर राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य आयोजन भोगनाडीह स्थित अमर शहीद स्थल पर होगा, जहां संथाल परगना सहित झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पार्टी के नेता, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यक्रम के माध्यम से हूल क्रांति के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।

 

इन नेताओं को मिली आयोजन की जिम्मेदारी


भाजपा द्वारा गठित नौ सदस्यीय आयोजन समिति में पूर्व विधायक लोबिन हेम्ब्रम, पूर्व सांसद सुनील सोरेन, अमर शहीद परिवार के वंशज मंडल मुर्मू, पूर्व प्रदेश मंत्री दुर्गा मरांडी, वरिष्ठ नेता गणेश तिवारी, साहिबगंज जिला अध्यक्ष गौतम यादव, पाकुड़ जिला अध्यक्ष सरिता मुर्मू, महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री अनिता सोरेन और अनुसूचित जनजाति मोर्चा की प्रदेश मंत्री अनिता मुर्मू को शामिल किया गया है।

 

महानायकों के सम्मान का संदेश


भाजपा का कहना है कि हूल दिवस का आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड के वीर स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, बलिदान और आदिवासी गौरव को सम्मान देने का अवसर है। पार्टी ने इसे ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल बताया है।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

झारखंड

View more
Special Kanwariya Track
श्रावणी मेला 2026: बाबा धाम के लिए बनेगा 36 किमी का स्पेशल कांवड़िया ट्रैक

देवघर। श्रावणी मेले से पहले बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बासुकीनाथ-देवघर राष्ट्रीय राजमार्ग-114A पर व्यापक तैयारियां तेज कर दी हैं। इस परियोजना के तहत समर्पित कांवड़िया ट्रैक, नए बाईपास और आधुनिक सड़क सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक होगी।   36 किलोमीटर का समर्पित कांवड़िया ट्रैक तैयार श्रावणी मेला 2026 के दौरान सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ मंदिर पहुंचने वाले कांवड़ियों के लिए एनएचएआई 36.044 किलोमीटर लंबा और 3.5 मीटर चौड़ा समर्पित कांवड़िया पथ विकसित कर रहा है। इस विशेष ट्रैक पर केवल पैदल श्रद्धालु चलेंगे, जबकि सामान्य वाहनों का आवागमन अलग मार्ग से होगा। इससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी। इसके साथ ही 45.159 किलोमीटर लंबी फोर-लेन सड़क परियोजना का निर्माण भी तेज गति से किया जा रहा है।   बाईपास, फ्लाईओवर और आधुनिक सुविधाओं पर जोर यात्रा को और सुगम बनाने के लिए परियोजना में लगभग 28.677 किलोमीटर लंबे पांच प्रमुख बाईपास बासुकीनाथ, सहारा, तालझारी, घोरमारा और देवघर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा सर्विस रोड, स्लिप रोड, फ्लाईओवर, रेल ओवरब्रिज (ROB) और अंडरपास जैसी आधुनिक संरचनाएं भी विकसित की जा रही हैं, ताकि स्थानीय और भारी वाहनों का आवागमन बाधित न हो। एनएचएआई ने श्रावणी मेले से पहले पूरे मार्ग को गड्ढामुक्त बनाने, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने, रिफ्लेक्टिव रोड मार्किंग, सुरक्षा बैरियर, संकेतक बोर्ड और साफ-सफाई जैसे कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का लक्ष्य रखा है।   धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा परियोजना पूरी होने के बाद बाबा बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ मंदिर और त्रिकूट पर्वत जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा, वहीं संताल परगना क्षेत्र में पर्यटन, स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। NHAI का मानना है कि यह परियोजना श्रावणी मेले की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

abhishek singh जून 27, 2026 0
Hemant Soren

झारखंड के स्वास्थ्य केंद्रों को मिली वित्तीय आजादी, अब सिविल सर्जन पर नहीं रहेगी निर्भरता

Jharkhand road accidents

झारखंड मे  पीछे चार सालों में सड़क हादसे से कितने लोगों की गई जान

Hul Diwas 2026

हूल दिवस को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में भाजपा, 9 सदस्यीय समिति का गठन

Muharram
पलामू में 90 साल से कायम भाईचारे की मिसाल, रामनवमी समिति करती है मुहर्रम जुलूस का स्वागत

पलामू। झारखंड के पलामू जिले का मेदिनीनगर आज भी गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बना हुआ है। यहां वर्ष 1937 से चली आ रही एक अनोखी परंपरा आज भी कायम है, जिसमें मुहर्रम और रामनवमी के अवसर पर दोनों समुदाय एक-दूसरे के जुलूस का स्वागत करते हैं। शुक्रवार को निकले मुहर्रम जुलूस में भी इस परंपरा की झलक देखने को मिली, जब रामनवमी पूजा समिति के सदस्यों ने पूरे उत्साह के साथ जुलूस का स्वागत किया।   1937 से निभाई जा रही है भाईचारे की परंपरा मेदिनीनगर में मुहर्रम के दौरान रामनवमी समिति जुलूस का स्वागत करती है, जबकि रामनवमी के अवसर पर मुहर्रम इंतजामिया समिति रामनवमी जुलूस का सम्मान करती है। दोनों समितियां एक-दूसरे को सम्मानित भी करती हैं। महावीर नवयुवक दल (रामनवमी समिति) के अध्यक्ष मंगल सिंह ने बताया कि यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है और आज भी उसी आत्मीयता के साथ निभाई जा रही है।   नमाज के दौरान रामनवमी समिति ने संभाली जिम्मेदारी शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान जब मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिद गए, तब मुहर्रम जुलूस की देखरेख की जिम्मेदारी रामनवमी समिति के सदस्यों ने संभाली। यह दृश्य दोनों समुदायों के बीच विश्वास और आपसी सम्मान का प्रतीक बना।   मुहर्रम इंतजामिया समिति के अध्यक्ष जीशान खान ने कहा कि डाल्टनगंज जैसी परंपरा शायद ही देश के किसी अन्य हिस्से में देखने को मिले। दोनों समुदाय हर पर्व पर एक-दूसरे का सहयोग करते हैं और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं।   प्रशासन ने भी की सराहना पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने इस परंपरा को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों से एक-दूसरे का सम्मान और स्वागत करने की यह परंपरा देश की सामाजिक ताकत का प्रतीक है। वहीं पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में भाईचारा और आपसी विश्वास को मजबूत करते हैं।   भीषण गर्मी के कारण बदला जुलूस का समय इस बार भीषण गर्मी को देखते हुए मेदिनीनगर में मुहर्रम जुलूस दोपहर बाद निकाले गए। मुहर्रम इंतजामिया समिति के अनुसार, इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली और बिजली आपूर्ति भी अधिक प्रभावित नहीं हुई। यह आयोजन एक बार फिर पलामू की सांप्रदायिक सद्भाव की पहचान बनकर सामने आया।

anjali kumari जून 27, 2026 0
Bokaro

बोकारो में पिता की डांट बनी मौत की वजह, नशे में बेटे ने कर दी हत्या

Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जेल विभाग की 81% रिक्तियां 6 महीने में भरने के निर्देश

Prince Khan

प्रिंस खान के नाम पर हटिया के कारोबारी से मांगी पांच करोड़ की रंगदारी

Khunti
खूंटी में आम की भरपूर फसल, बाजार में नहीं मिल रहा किसानों को उचित दाम

खूंटी। झारखंड के खूंटी जिले के रनिया प्रखंड में इस वर्ष आम की बंपर पैदावार हुई है। जंगलों में रसीले आमों से लदे पेड़ों ने किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद तो दी, लेकिन उचित बाजार और सही कीमत नहीं मिलने से उनकी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सौदे, जयपुर, लोहागढ़, मरचा और रनिया समेत आसपास के गांवों के किसान हर सुबह जंगलों से आम तोड़कर स्थानीय बाजार पहुंच रहे हैं, लेकिन खरीदारों की कमी के कारण उन्हें अपनी उपज कम दाम पर बेचनी पड़ रही है।   हाथियों के खतरे के बीच जुटा रहे आम ग्रामीणों के सामने सिर्फ बाजार की समस्या ही नहीं, बल्कि जंगलों में जंगली हाथियों का खतरा भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। किसान रोज तड़के तीन-चार बजे ही जंगलों में आम चुनने निकल जाते हैं ताकि सुबह बाजार पहुंचकर बिक्री कर सकें। ग्रामीणों का कहना है कि जान जोखिम में डालकर आम इकट्ठा करने के बावजूद उन्हें मेहनत के अनुरूप कीमत नहीं मिल रही है।   किसानों को नहीं मिल रहा मेहनत का लाभ 65 वर्षीय सुंदइर देवी बताती हैं कि वे दूर-दराज के जंगलों से सिर पर आम ढोकर बाजार तक लाती हैं, लेकिन व्यापारियों द्वारा बहुत कम कीमत दी जाती है। बाद में यही आम शहरों में कई गुना अधिक दाम पर बेचे जाते हैं। सुलोचना कुमारी ने भी कहा कि परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए हाथियों के डर के बावजूद जंगल जाना मजबूरी है, लेकिन उचित मूल्य नहीं मिलने से निराशा होती है।   वहीं बांधनी देवी का कहना है कि इस बार आम बेचकर करीब दो हजार रुपये कमाने की उम्मीद है, जिससे खेती के खर्च पूरे किए जा सकें। विरशमुनि देवी ने बताया कि मनरेगा के तहत विकसित बागवानी में भी इस वर्ष अच्छी पैदावार हुई है और यदि बेहतर बाजार मिले तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।   प्रशासन ने संगठित बिक्री पर दिया जोर प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रशांत डांग ने किसानों से संगठित होकर आम की बिक्री करने की अपील की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रयास करेगा। साथ ही जंगलों में हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए किसानों से सतर्कता बरतने और अनावश्यक जोखिम नहीं लेने की भी सलाह दी है। स्थानीय किसानों का मानना है कि यदि आम की खरीद और विपणन की प्रभावी व्यवस्था हो जाए तो यह प्राकृतिक संपदा उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का बड़ा माध्यम बन सकती है।

abhishek singh जून 27, 2026 0
Jharkhand Weather

झारखंड में 3 जुलाई तक बारिश और वज्रपात का अलर्ट, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट

JSSC exam update

JSSC का बड़ा फैसला: 50 हजार से कम आवेदन आए तो नहीं होगी प्रारंभिक परीक्षा

Rajya Sabha election

राज्यसभा चुनाव में हार के बाद क्या महागठबंधन दलों में सब ठीक है?

0 Comments

Top week

झारखंड

वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

anjali kumari जून 24, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?