jharkhand politics update

CM Hemant Soren meeting
सीएम हेमंत सोरेन से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने की मुलाकात

रांची। झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास में मुलाकात की। हालांकि इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया है, लेकिन राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले हुई इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। बैठक में झारखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू, राज्यसभा सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक प्रदीप यादव और पार्टी के पर्यवेक्षक अजय शर्मा मौजूद रहे।   सरकार और संगठन के समन्वय पर चर्चा की अटकलें मुख्यमंत्री आवास में हुई इस मुलाकात के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता पक्ष के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय, राज्यसभा चुनाव की रणनीति तथा समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई होगी। बैठक के बाद किसी भी नेता ने बातचीत के विषय पर सार्वजनिक बयान नहीं दिया।   राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के सामने चुनौती झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है। चुनाव मैदान में झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी हैं। विधानसभा में झामुमो के 34 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 28 मतों की आवश्यकता है। ऐसे में बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है।   वहीं कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की राह अपेक्षाकृत कठिन नजर आ रही है। उनकी जीत के लिए कांग्रेस, झामुमो, राजद और भाकपा (माले) के विधायकों का पूरा समर्थन जरूरी माना जा रहा है। गठबंधन के किसी विधायक की क्रॉस वोटिंग या वोट के अमान्य होने की स्थिति कांग्रेस की रणनीति पर असर डाल सकती है।   क्रॉस वोटिंग रोकने पर गठबंधन का फोकस राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार राज्यसभा चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती क्रॉस वोटिंग की आशंका है। यही वजह है कि महागठबंधन अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। दूसरी ओर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी लगातार सक्रिय हैं और विभिन्न नेताओं से संपर्क कर अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।   वर्तमान विधानसभा संख्या बल के अनुसार महागठबंधन के पास 56 विधायक हैं, जबकि एनडीए के पास 24 विधायक हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव का परिणाम काफी हद तक दलों की एकजुटता और मतदान के दिन की राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। 18 जून का चुनाव झारखंड की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है और सभी दल अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

anjali kumari जून 15, 2026 0
Rajya Sabha elections 2026
राज्यसभा चुनाव से पहले 16 को कांग्रेस व JMM और 17 जून को गठबंधन की बैठक

रांची। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन अंतिम तैयारी में जुटा है। कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने दावा किया है कि महागठबंधन दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेगा। इसे लेकर 16 जून को कांग्रेस नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें चुनावी रणनीति और विधायकों के समन्वय पर चर्चा होगी। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा भी बैठक कर रणनीति बनायेगा।  17 जून को होगी महागठबंधन की अहम बैठक राज्यसभा चुनाव को लेकर 17 जून को महागठबंधन की संयुक्त बैठक होगी। इस बैठक में कांग्रेस, झामुमो और गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेता शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि चुनाव से एक दिन पहले होने वाली यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण होगी, जिसमें वोटिंग की रणनीति और सभी विधायकों के बीच समन्वय को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ये बैठकें सीएम आवास में 6 बजे से होगी।  कौन-कौन है प्रत्याशी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि झामुमो ने बैजनाथ राम को मैदान में उतारा है। वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवाणी चुनाव लड़ रहे हैं। महागठबंधन नेतृत्व को भरोसा है कि गठबंधन के दोनों उम्मीदवार जीत हासिल करेंगे।

anjali kumari जून 15, 2026 0
CM Hemant Soren  decision
भोजपुरी-मगही पर नहीं बनी सहमति, अब सीएम हेमंत करेंगे फैसला

रांची। झारखंड में भोजपुरी और मगही को लेकर चल रहे भाषा विवाद पर महागठबंधन के भीतर सहमति नहीं बन पाई है। जानकारी के अनुसार भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा सूची में शामिल करने के मुद्दे पर एक ओर कांग्रेस और राजद अपनी राय पर कायम हैं, जबकि दूसरी ओर झामुमो ने अलग रुख अपनाया है। इस मुद्दे पर गठबंधन के भीतर मंथन जारी है, लेकिन अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकल सका है।  कांग्रेस और राजद शामिल करने के पक्ष मे जानकारी के मुताबिक कांग्रेस और राजद इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में नजर आ रहे हैं, जबकि झामुमो की ओर से इस पर सावधानीपूर्वक विचार करने की बात कही जा रही है। भाषा पहचान और स्थानीय अस्मिता से जुड़े इस मुद्दे ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सुदिव्य सोनू कमेटी में और सदस्य चाहते है इस बीच मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भाषा समिति में अल्पसंख्यक और जनजातीय मंत्री को भी शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मसलों पर व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है, ताकि सभी वर्गों की राय को महत्व मिल सके। भाषा विवाद पर अब अंतिम फैसला मुख्यमंत्री के स्तर पर होने की संभावना है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सभी पक्षों की राय लेने के बाद इस मामले में अंतिम निर्णय ले सकते हैं। ऐसे में अब सबकी नजर मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हुई है।

Unknown मई 22, 2026 0
alamgir alam release
झारखंडः पूर्व मंत्री आलमगीर आलम जेल से निकले, टेंडर घोटाले में 2 साल बाद रिहाई पत्नी निशात आलम पहुंचीं होटवार

रांची। झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम दो साल बाद जेल से आज बाहर निकले। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। अदालत ने सोमवार को जमानत दी थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से मिले जमानत का आदेश अपलोड नहीं होने के कारण जेल से नहीं निकल सके। पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के साथ उनके पीए संजीव लाल को भी जमानत मिली है। आदेश अपलोड होने के बाद गुरुवार को बेल बॉन्ड भरा गया। जिसके बाद वे जेल से बाहर आए। पत्नी और समर्थक पहुंचे लेने होटवार जेल में दो साल से बंद आलमगीर आलम को लेने के लिए उनकी पत्नी सह विधायक निशात आलम सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता होटवार स्थित सेंट्रल जेल पहुंचे। जानकारी के मुताबिक आलमगीर आलम की जमानतदार उनकी पत्नी निशात आलम बनी हैं।   हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती झारखंड हाईकोर्ट द्वारा पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके पीए संजीव लाल की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आलमगीर आलम की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि इस मामले में उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है। साथ ही, जांच के दौरान उनके पास से किसी प्रकार की नगदी या आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद नहीं हुई है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। वकीलों ने यह भी कहा कि आलमगीर आलम की तबीयत ठीक नहीं है। वे कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। इस आधार पर भी अदालत से राहत देने की अपील की गई। बचाव पक्ष ने कोर्ट से मानवीय आधार पर विचार करते हुए जमानत मंजूर करने का आग्रह किया है।

Unknown मई 14, 2026 0
Samrat government
सम्राट सरकार में जल्द हो सकती है इन नए चेहरों की एंट्री !

पटना, एजेंसियां। बिहार में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी में है। इस विस्तार में कई नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है, खासकर भारतीय जनता पार्टी के कुछ युवा और प्रभावशाली विधायकों के नाम चर्चा में हैं।   बीजेपी के तीन प्रमुख दावेदार कैबिनेट में शामिल होने की रेस में सबसे चर्चित नामों में Anand Mishra, Kumar Shailendra और Sanjeev Chaurasia शामिल हैं। ये तीनों विधायक अपनी अलग पहचान और राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण पार्टी नेतृत्व की नजर में अहम माने जा रहे हैं।   आनंद मिश्रा: प्रशासनिक अनुभव और तेज छवि बक्सर से विधायक आनंद मिश्रा पूर्व आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं और असम कैडर में अपनी कड़क कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की छवि और प्रशासनिक अनुभव उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है। राजनीति में आने के बाद उन्होंने अपनी लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता से पार्टी नेतृत्व का ध्यान आकर्षित किया है।   कुमार शैलेंद्र: अनुभवी और प्रभावशाली नेता भागलपुर के बिहपुर से विधायक कुमार शैलेंद्र तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। उनकी मजबूत पकड़ और क्षेत्र में विकास कार्यों के कारण वे एक अनुभवी नेता के रूप में देखे जाते हैं। राजनीतिक बयानबाजी और स्पष्ट रुख के कारण भी वे अक्सर चर्चा में रहते हैं।   संजीव चौरसिया: लगातार जीत और संगठन से जुड़ाव दीघा से विधायक संजीव चौरसिया लगातार तीन चुनाव जीत चुके हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनके करीबी संबंध और मजबूत जनाधार उन्हें पार्टी के भीतर एक प्रभावशाली नेता बनाते हैं।   कैबिनेट विस्तार से नए समीकरण मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर यह भी माना जा रहा है कि सहयोगी दलों के साथ संतुलन साधने के लिए नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। इससे न केवल सरकार की कार्यशैली में नई ऊर्जा आएगी, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक समीकरण भी मजबूत होंगे।

Unknown अप्रैल 27, 2026 0
Nishikant Dubey apology
बीजू पटनायक पर बयान देकर घिरे निशिकांत दुबे, विवाद बढ़ने पर मांगी बिना शर्त माफी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में आ गए। इस बार मामला ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता बीजू पटनायक को लेकर दिए गए उनके बयान से जुड़ा है। पिछले सप्ताह मीडिया से बातचीत के दौरान की गई टिप्पणी पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसके बाद अब दुबे को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। निशिकांत दुबे ने 1 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया से बातचीत के दौरान वह नेहरू-गांधी परिवार के संदर्भ में अपनी बात रख रहे थे, लेकिन उसे बीजू पटनायक के खिलाफ टिप्पणी के रूप में समझ लिया गया।   दुबे ने अपनी  पोस्ट में क्या लिखा? अपने पोस्ट में दुबे ने लिखा कि, “पिछले हफ्ते मीडिया से बात करते हुए मैंने नेहरू-गांधी परिवार के कारनामों के क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के अग्रणी नेताओं में स्थान रखने वाले आदरणीय श्री बीजू पटनायक जी के संदर्भ में जो कहा, उसका गलत मतलब निकाला गया। पहले तो यह वक्तव्य मेरा व्यक्तिगत है। नेहरू जी पर मेरे विचार को बीजू पटनायक पर समझा गया।   निशिकांत दुबे ने अपने बयान पर मांगी माफी  विवाद बढ़ने के बाद निशिकांत दुबे ने अपने बयान पर बिना शर्त माफी भी मांगी। उन्होंने लिखा कि बीजू बाबू हमेशा सम्मानित और ऊंचे कद के नेता रहे हैं और रहेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह उसके लिए खेद प्रकट करते हैं। बीजू पटनायक ओडिशा की राजनीति और देश की सार्वजनिक जीवन में एक बेहद सम्मानित नाम रहे हैं। ऐसे में उनके बारे में किसी भी विवादित टिप्पणी पर स्वाभाविक रूप से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। फिलहाल, दुबे की माफी के बाद यह मामला कुछ शांत होता दिख रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा अभी भी जारी है।

Unknown अप्रैल 1, 2026 0
Basukinath dham news
बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना के बाद, सीएम पर गरजे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास

रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ धाम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने बाबा भोलेनाथ और माता पार्वती की आरती उतारकर राज्य की सुख-समृद्धि और जनता के कल्याण की कामना की। इस दौरान उनके साथ परिवार के सदस्य और समर्थक भी मौजूद रहे।   कार्यकर्ताओं से मुलाकात, बाजार का किया दौरा पूजा के बाद रघुवर दास ने मंदिर कार्यालय में स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने बासुकीनाथ बाजार का दौरा किया और दुकानदारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।   सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप मीडिया से बातचीत में उन्होंने राज्य की Hemant Soren सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। खासकर ‘मंईयां सम्मान योजना’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 18 से 50 वर्ष की महिलाओं को ₹2500 प्रतिमाह देने का वादा अधूरा है और कई लाभार्थी इससे वंचित हैं।   विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर सवाल रघुवर दास ने अपनी सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कई बड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ था। उन्होंने संथाल परगना में एम्स, साहिबगंज गंगा पुल और एयरपोर्ट जैसी योजनाओं को उदाहरण बताया। उनके अनुसार वर्तमान सरकार में विकास की गति धीमी पड़ गई है।   कानून व्यवस्था और सुरक्षा पर चिंता उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। रघुवर दास ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं और इससे आम लोगों में डर का माहौल बन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं।   सीएम के बयान पर जताई आपत्ति पूर्व मुख्यमंत्री ने विधानसभा में धार्मिक टिप्पणियों को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है और इस तरह की टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं।

Unknown मार्च 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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