पटना, एजेंसियां। बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए BPSC TRE 4.0 को लेकर नया अपडेट सामने आया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग को शिक्षक भर्ती से संबंधित प्रस्ताव मिल गया है और अब आवश्यक स्वीकृति के बाद बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से भर्ती का विस्तृत विज्ञापन जारी किया जा सकता है। 32,388 पदों पर भर्ती की जानकारी ताजा रिपोर्टों में TRE 4.0 के तहत 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती की बात सामने आई है। इनमें प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षक पद शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, पदों की अंतिम संख्या और विषयवार विवरण को BPSC की आधिकारिक अधिसूचना से ही अंतिम माना जाएगा। नोटिफिकेशन का इंतजार TRE 4.0 का आधिकारिक नोटिफिकेशन अभी जारी नहीं हुआ है। प्रस्ताव और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद BPSC आवेदन की तारीख, पात्रता, शुल्क, विषयवार रिक्तियां और परीक्षा कार्यक्रम जारी करेगा। इसलिए अभ्यर्थियों को फिलहाल वायरल सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय आयोग की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए। परीक्षा और आवेदन से जुड़ी जानकारी TRE 4.0 की परीक्षा तिथि, आवेदन की शुरुआत और अंतिम तिथि जैसी महत्वपूर्ण जानकारी आधिकारिक विज्ञापन जारी होने के बाद ही निश्चित होगी। अलग-अलग रिपोर्टों में पहले अलग-अलग पद संख्या और संभावित तारीखें बताई गई हैं, इसलिए अभी किसी एक आंकड़े को अंतिम मानना उचित नहीं है। अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे अपनी शैक्षणिक डिग्री, प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, जाति/आरक्षण प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार रखें, ताकि आवेदन शुरू होने पर परेशानी न हो।
नालंदा/पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा घोटाले की जांच में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में कार्यरत टेक्निकल असिस्टेंट रोशन कुमार को मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने परीक्षा शुरू होने से पहले आंसर-की हासिल कर उसे आगे पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। मुंबई के BARC परिसर से हुई गिरफ्तारी EOU की विशेष टीम ने गुप्त अभियान चलाकर मुंबई के ट्रॉम्बे स्थित BARC परिसर से रोशन कुमार को गिरफ्तार किया। वह नालंदा जिले के कंकड़िया गांव का रहने वाला है। जांच एजेंसी के अनुसार, तीन सदस्यीय टीम 3 अगस्त को पटना से मुंबई पहुंची थी और अब आरोपी को पूछताछ के लिए पटना लाया जा रहा है। जैमर कंपनी के स्टाफ बनकर परीक्षा केंद्र में घुसने का आरोप जांच में सामने आया है कि परीक्षा के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर जैमर कंपनी के कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र में प्रवेश किया। EOU अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र की आंसर-की उसके पास कैसे पहुंची, किसने उपलब्ध कराई और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां इस मामले में इससे पहले बायोमेट्रिक सिस्टम से जुड़ी कंपनी के सिटी को-ऑर्डिनेटर ब्रजेश यादव को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं नालंदा के सोहसराय स्थित पीएल साहू हाई स्कूल परीक्षा केंद्र से एक अभ्यर्थी और बायोमेट्रिक कंपनी के दो कर्मचारियों को भी पकड़ा गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि परीक्षा में संगठित तरीके से धांधली की गई। 11 लाख अभ्यर्थियों पर पड़ा असर 14 से 21 अप्रैल 2026 के बीच नौ पालियों में आयोजित AEDO भर्ती परीक्षा 935 पदों के लिए हुई थी, जिसमें करीब 11 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। पेपर लीक और ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल के आरोप सामने आने के बाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई। अब तक मुंगेर, नालंदा, गया, बेगूसराय, वैशाली और समस्तीपुर समेत छह जिलों में मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जांच के दौरान तीन दर्जन से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि EOU पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
शिक्षा विभाग ने BPSC को भेजी अधियाचना, जल्द शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया पटना, एजेंसियां। बिहार में शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) के तहत राज्य में 32,388 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। बिहार शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए पदों की अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को भेज दी है। 11वीं-12वीं के लिए 16 हजार से ज्यादा पद सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, TRE-4 भर्ती में अलग-अलग कक्षाओं के लिए शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसमें कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए करीब 16,101 पद शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी। BPSC जारी करेगा भर्ती का नोटिफिकेशन शिक्षा विभाग की अधियाचना मिलने के बाद अब BPSC की ओर से भर्ती विज्ञापन और आवेदन प्रक्रिया की घोषणा की जाएगी। अभ्यर्थियों को आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार है, जिसमें पदों का विवरण, योग्यता, आवेदन तिथि और परीक्षा से जुड़ी जानकारी जारी होगी। शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी बिहार सरकार का कहना है कि शिक्षक भर्ती के जरिए सरकारी स्कूलों में खाली पदों को भरा जाएगा और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। सरकार अगले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की योजना पर भी काम कर रही है। TRE-4 अभ्यर्थियों में बढ़ी उम्मीद TRE-4 की घोषणा के बाद शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों में उम्मीद बढ़ गई है। अब सभी की नजर BPSC के आधिकारिक नोटिफिकेशन और परीक्षा कार्यक्रम पर है।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सरकार ने एक साथ सात महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए। जुआ कानून, जीएसटी संशोधन, भूमि दाखिल-खारिज, चिकित्सा, नर्सों के पंजीकरण और कृषि भूमि से जुड़े इन विधेयकों पर सदन में चर्चा शुरू हो गई। सरकार ने संकेत दिया कि बहस पूरी होने के बाद इन्हें पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। सदन में पेश किए गए विधेयकों में बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026, बिहार माल एवं सेवा कर (GST) संशोधन विधेयक, 2026, बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक, 2026, बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) संशोधन विधेयक, 2026, बिहार चिकित्सा संशोधन विधेयक, 2026, बिहार नर्सेस पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026 तथा बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजन के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। सत्र के दौरान सत्र के दौरान जदयू विधायक श्याम रजक ने इंदिरा आंबेडकर विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में करीब 62 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इस पर एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने बताया कि शिक्षक नियुक्ति के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को अधियाचना भेजी जा चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन में क्या घोषणा की TRE-4 शिक्षक भर्ती को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन में घोषणा की कि इसकी अधिसूचना इसी महीने जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं त्रुटिरहित बनाया जाएगा। वहीं, विधान परिषद में ग्राम पंचायतों में होल्डिंग टैक्स वसूली का मुद्दा भी गरमाया। राजद एमएलसी सुनील सिंह ने गरीबों पर टैक्स लगाने का आरोप लगाया, जिस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार गरीबों पर कोई नया टैक्स नहीं लगा रही है और इस तरह की बातें पूरी तरह भ्रामक हैं।
पटना: कहते हैं कि मेहनत और सही समय जब एक साथ मिलते हैं, तो सफलता की कहानी मिसाल बन जाती है। बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली सुदिति भूषण ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। शादी के अगले ही दिन उन्हें ऐसी खुशखबरी मिली, जिसने उनके जीवन की नई शुरुआत को और भी यादगार बना दिया। 19 जून 2026 को सुदिति ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी सौरभ श्रीवास्तव के साथ सात फेरे लिए और 20 जून को घोषित 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा के परिणाम में उनका चयन राज्य कर सहायक आयुक्त (State Tax Assistant Commissioner) के प्रतिष्ठित पद पर हो गया। शादी की खुशियों के बीच मिली इस उपलब्धि ने पूरे परिवार और शुभचिंतकों के उत्साह को दोगुना कर दिया। शादी के अगले दिन मिली जिंदगी की सबसे बड़ी खुशखबरी शादी के समारोह की रस्में अभी पूरी भी नहीं हुई थीं कि अगले दिन बीपीएससी का परिणाम जारी हो गया। रिजल्ट में सुदिति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य कर सहायक आयुक्त के पद के लिए सफलता हासिल की। दिलचस्प बात यह है कि उनके पति सौरभ श्रीवास्तव भी प्रशासनिक सेवा में हैं और वर्तमान में कार्यपालक दंडाधिकारी (Executive Magistrate) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस तरह यह दंपति अब प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ी एक प्रेरणादायक जोड़ी बन गया है। यह पहली सफलता नहीं, पहले भी पास कर चुकी हैं BPSC सुदिति भूषण की यह उपलब्धि अचानक मिली सफलता नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और निरंतर प्रयास का परिणाम है। इससे पहले उन्होंने 64वीं बीपीएससी परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। उस परीक्षा में उन्होंने पूरे बिहार में 486वीं रैंक हासिल की थी, जिसके आधार पर उन्हें अंचल अधिकारी (CO) का पद मिला था। वर्तमान में वह बक्सर जिले में चकबंदी पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थीं। हालांकि, उनका लक्ष्य इससे भी ऊंचा था। उन्होंने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी और लगातार मेहनत करते हुए दूसरे प्रयास में अपनी रैंक में उल्लेखनीय सुधार कर राज्य कर सहायक आयुक्त का पद हासिल किया। पटना के प्रतिष्ठित संस्थानों से की पढ़ाई मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के बड़का डुमरा गांव की रहने वाली सुदिति की शुरुआती शिक्षा पटना में हुई। उन्होंने सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल, पटना से स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद पटना वीमेंस कॉलेज से भूगोल (Geography) ऑनर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दिनों से ही उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार तैयारी की और अपनी मेहनत के दम पर सफलता प्राप्त की। प्रशासनिक और शैक्षणिक माहौल वाले परिवार से हैं सुदिति सुदिति की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके घर का वातावरण शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ा रहा, जिसने उन्हें हमेशा बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। उनके पिता डॉ. कृष्ण भूषण प्रसाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उनकी मां डॉ. निभा श्रीवास्तव आकाशवाणी पटना में उद्घोषिका हैं। उनकी बड़ी बहन मेधा भूषण भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की अधिकारी हैं। वहीं उनके छोटे भाई सत्यम भूषण श्रीवास्तव Banaras Hindu University से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। मेहनत और धैर्य की मिसाल सुदिति भूषण की कहानी यह बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। नौकरी के साथ तैयारी करना, पहले से मिली सरकारी नौकरी के बावजूद बेहतर रैंक के लिए प्रयास जारी रखना और जीवन के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तिगत अवसर के बीच भी अपनी उपलब्धि हासिल करना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है। उनकी सफलता आज हजारों बीपीएससी और सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
पटना, एजेंसियां। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने ऑडिटर (अंकेक्षक) प्रारंभिक परीक्षा-2026 को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार, परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को 2 जुलाई 2026 से अपने परीक्षा केंद्र की विस्तृत जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करा दी जाएगी। अभ्यर्थी आयोग के पोर्टल पर लॉगिन कर अपने डैशबोर्ड से परीक्षा केंद्र का विवरण देख सकेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा से जुड़ी सभी सूचनाएं केवल आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही उपलब्ध कराई जाएंगी। ई-एडमिट कार्ड पहले ही जारी, विवरण जांचना जरूरी आयोग ने अभ्यर्थियों के लिए ई-एडमिट कार्ड पहले ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। उम्मीदवार अपने लॉगिन आईडी और पासवर्ड की सहायता से इसे डाउनलोड कर सकते हैं। एडमिट कार्ड पर आवंटित परीक्षा जिला, अनुक्रमांक और बारकोड का मिलान करना आवश्यक होगा। किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर अभ्यर्थियों को समय रहते आयोग से संपर्क करने की सलाह दी गई है। 5 जुलाई को एक पाली में होगी परीक्षा बीपीएससी ऑडिटर पीटी परीक्षा 5 जुलाई (रविवार) को एक ही पाली में आयोजित की जाएगी। परीक्षा का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक निर्धारित किया गया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी अभ्यर्थी परीक्षा शुरू होने से कम से कम दो घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाएं। परीक्षा प्रारंभ होने से एक घंटे पहले तक ही प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। निर्देशों का पालन करना होगा अनिवार्य आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को अपने ई-एडमिट कार्ड की एक अतिरिक्त प्रति साथ लानी होगी, जिस पर परीक्षा केंद्र में हस्ताक्षर कर वीक्षक को जमा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, एडमिट कार्ड केवल ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा और इसकी हार्ड कॉपी डाक के माध्यम से नहीं भेजी जाएगी। अभ्यर्थियों से सभी परीक्षा निर्देशों का पालन करने और समय से परीक्षा केंद्र पहुंचने की अपील की गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।